वस्तुनिष्ठ प्रश्न
प्रश्न 1. निम्नलिखित में से कौन-सा भौतिक संसाधन के अन्तर्गत आता है?
(a) छात्र-छात्राएँ
(b) शिक्षक
(c) विद्यालय भवन
(d) प्रधानाध्यापक
उत्तर: (c) विद्यालय भवन। विद्यालय भवन एक भौतिक संसाधन है। विद्यालय के फर्नीचर, पुस्तकालय, प्रयोगशाला, खेल सामग्री तथा अन्य उपकरण भी भौतिक संसाधनों के अन्तर्गत आते हैं।
प्रश्न 2. विद्यालय की बौद्धिक प्रयोगशाला होता है-
(a) शिक्षण कक्ष
(b) पुस्तकालय
(c) विज्ञान प्रयोगशाला
(d) म्यूजियम
उत्तर: (b) पुस्तकालय। पुस्तकालय को विद्यालय की बौद्धिक प्रयोगशाला कहा जाता है, क्योंकि यहाँ विद्यार्थियों को विभिन्न पुस्तकों एवं संदर्भ-सामग्री के माध्यम से अपने ज्ञान, विचार और बौद्धिक क्षमताओं का विकास करने का अवसर मिलता है।
प्रश्न 3. समस्या समाधान का प्रमुख अंग है-
(a) अनुशासन प्रक्रिया
(b) अधिगम प्रक्रिया
(c) निर्णयन प्रक्रिया
(d) शिक्षण प्रक्रिया
उत्तर: (c) निर्णयन प्रक्रिया। समस्या समाधान में उपलब्ध विकल्पों का विश्लेषण करके सर्वाधिक उपयुक्त विकल्प का चयन करना आवश्यक होता है। अतः निर्णयन समस्या-समाधान प्रक्रिया का प्रमुख अंग है।
प्रश्न 4. मानवीय प्रबन्धन के घटक हैं-
(a) फर्नीचर
(b) पुस्तकालय
(c) विद्यालय भवन
(d) शिक्षक, छात्र-छात्राएँ एवं समुदाय
उत्तर: (d) शिक्षक, छात्र-छात्राएँ एवं समुदाय। विद्यालय से जुड़े शिक्षक, विद्यार्थी, प्रधानाध्यापक, कर्मचारी, अभिभावक तथा समुदाय के सदस्य मानवीय संसाधनों के अन्तर्गत आते हैं।
प्रश्न 5. समय-सारणी को कहा जाता है-
(a) विद्यालय की दूसरी घड़ी
(b) अनुशासन
(c) घण्टा
(d) अध्ययन
उत्तर: (a) विद्यालय की दूसरी घड़ी। समय-सारणी विद्यालय के दैनिक कार्यों, विषयों, कक्षाओं तथा अन्य गतिविधियों को निश्चित समय के अनुसार व्यवस्थित करती है, इसलिए इसे विद्यालय की दूसरी घड़ी कहा जाता है।
प्रश्न 6. विद्यालय के अभिलेखों का मुख्य उद्देश्य होता है-
(a) दण्ड का साक्ष्य
(b) आवश्यक सूचनाओं का रख-रखाव
(c) अनियमितताओं की जानकारी
(d) निरीक्षण में सहयोग
उत्तर: (b) आवश्यक सूचनाओं का रख-रखाव। विद्यालयी अभिलेखों में विद्यार्थियों, शिक्षकों, वित्त, उपस्थिति, परीक्षा तथा विद्यालय की अन्य गतिविधियों से सम्बन्धित आवश्यक सूचनाएँ व्यवस्थित रूप से सुरक्षित रखी जाती हैं।
प्रश्न 7. कोठारी कमीशन (1964-66) ने राष्ट्र-निर्माता की संज्ञा किसे दी है?
(a) प्रतिभाशाली छात्रों को
(b) इन्जीनियरों को
(c) अध्यापकों को
(d) शिक्षाधिकारियों को
उत्तर: (c) अध्यापकों को। कोठारी शिक्षा आयोग (1964-66) ने राष्ट्र के भविष्य के निर्माण में शिक्षक की भूमिका को अत्यन्त महत्वपूर्ण माना और शिक्षा की गुणवत्ता को शिक्षक की योग्यता, क्षमता एवं चरित्र से निकट रूप से जोड़ा।
प्रश्न 8. शैक्षिक पर्यवेक्षण का मुख्य उद्देश्य होता है-
(a) शिक्षा की सम्पूर्ण प्रक्रिया में वांछनीय परिवर्तन करना
(b) सामान्य निर्देशन देना
(c) कक्षा-कक्ष का निरीक्षण
(d) अनुदानों के अपव्यय का निरीक्षण
उत्तर: (a) शिक्षा की सम्पूर्ण प्रक्रिया में वांछनीय परिवर्तन करना। शैक्षिक पर्यवेक्षण का उद्देश्य शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया, शिक्षक, विद्यार्थी, पाठ्यक्रम तथा विद्यालयी व्यवस्था में सुधार करके शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाना है।
प्रश्न 9. राज्य शिक्षा संस्थान कहाँ स्थित है?
(a) लखनऊ
(b) वाराणसी
(c) आगरा
(d) प्रयागराज
उत्तर: (d) प्रयागराज। राज्य शिक्षा संस्थान, उत्तर प्रदेश की स्थापना 1 फरवरी, 1964 को तत्कालीन इलाहाबाद, वर्तमान प्रयागराज में की गई थी।
प्रश्न 10. विद्यालय में अनुशासन स्थापित करने में सहायक नहीं है-
(a) पाठ्य सहगामी क्रियाओं का आयोजन
(b) नैतिक शिक्षा की व्यवस्था
(c) दण्ड की अधिकता
(d) शिक्षक-अभिभावक सहयोग
उत्तर: (c) दण्ड की अधिकता। अत्यधिक दण्ड विद्यार्थियों में भय, आक्रोश और नकारात्मक व्यवहार उत्पन्न कर सकता है। विद्यालयी अनुशासन के लिए सकारात्मक मार्गदर्शन, सहयोग और उचित नियम अधिक प्रभावी होते हैं।
प्रश्न 11. राज्य हिन्दी संस्थान कहाँ स्थित है?
(a) प्रयागराज
(b) वाराणसी
(c) लखनऊ
(d) गोरखपुर
उत्तर: (b) वाराणसी। राज्य हिन्दी संस्थान, उत्तर प्रदेश वाराणसी में स्थित है और यह राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद्, उत्तर प्रदेश से सम्बद्ध संस्थान है।
प्रश्न 12. विद्यालय प्रबन्धन में महत्वपूर्ण भूमिका होती है-
(a) प्रधानाध्यापक की
(b) शिक्षकों की
(c) छात्र-छात्राओं की
(d) प्रधान लिपिक की
उत्तर: (a) प्रधानाध्यापक की। प्रधानाध्यापक विद्यालय का प्रमुख प्रशासक एवं शैक्षिक नेता होता है। वह विद्यालय की शैक्षिक, प्रशासनिक तथा सहशैक्षिक गतिविधियों में समन्वय स्थापित करता है।
प्रश्न 13. शैक्षिक प्रबन्धन का महत्वपूर्ण पक्ष है-
(a) दण्ड
(b) पुरस्कार
(c) प्रशासन
(d) अनुशासन
उत्तर: (c) प्रशासन। शैक्षिक उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए नीतियों, संसाधनों, कार्मिकों तथा विभिन्न विद्यालयी गतिविधियों के सुव्यवस्थित संचालन में प्रशासन की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
प्रश्न 14. कौन-सी पाठ्य सहगामी क्रिया तर्कशक्ति का विकास करती है?
(a) अभिनय
(b) खेलकूद
(c) निबन्ध लेखन
(d) वाद-विवाद
उत्तर: (d) वाद-विवाद। वाद-विवाद में विद्यार्थी किसी विषय के पक्ष और विपक्ष में तर्क प्रस्तुत करते हैं, जिससे उनकी तार्किक चिंतन, विश्लेषण तथा अभिव्यक्ति की क्षमता विकसित होती है।
प्रश्न 15. भगदड़ जैसी आपदाएँ होती हैं-
(a) जागरूकता से
(b) कुप्रबन्धन से
(c) कड़ाई होने से
(d) अधिक सुविधाओं से
उत्तर: (b) कुप्रबन्धन से। भीड़ का अनुचित प्रबन्धन, अपर्याप्त निकास व्यवस्था, अफवाह या अचानक घबराहट जैसी परिस्थितियाँ भगदड़ का कारण बन सकती हैं। उचित भीड़ प्रबन्धन से ऐसी घटनाओं का जोखिम कम किया जा सकता है।
अति लघु उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 16. कुशल प्रबन्धन से आप क्या समझते हैं?
उत्तर: उपलब्ध मानवीय एवं भौतिक संसाधनों का उचित नियोजन, संगठन, समन्वय और नियंत्रण करते हुए निर्धारित उद्देश्यों को प्रभावी एवं मितव्ययी ढंग से प्राप्त करना कुशल प्रबन्धन कहलाता है।
प्रश्न 17. संस्थागत नियोजन से आपका क्या आशय है?
उत्तर: किसी संस्था की आवश्यकताओं, उपलब्ध संसाधनों और उद्देश्यों के आधार पर उसके विकास एवं सुधार के लिए बनाई गई व्यवस्थित योजना को संस्थागत नियोजन कहते हैं।
प्रश्न 18. लर्निंग कॉर्नर का उद्देश्य बताइए।
उत्तर: लर्निंग कॉर्नर का उद्देश्य बच्चों को शिक्षण-अधिगम सामग्री, पुस्तकों, चित्रों एवं वस्तुओं के माध्यम से स्वयं तथा गतिविधि-आधारित ढंग से सीखने के अवसर प्रदान करना है।
प्रश्न 19. समय-सारणी के दो महत्व बताइए।
उत्तर: (i) यह विद्यालय के समय एवं कार्यों का सुव्यवस्थित विभाजन करती है।
(ii) यह शिक्षकों और विद्यार्थियों में नियमितता एवं समयपालन विकसित करती है।
प्रश्न 20. शैक्षिक प्रशासन से आप क्या समझते हैं?
उत्तर: शिक्षा के उद्देश्यों की प्राप्ति हेतु शैक्षिक संस्थाओं, कार्मिकों, संसाधनों तथा कार्यक्रमों के नियोजन, संगठन, निर्देशन एवं नियंत्रण की प्रक्रिया शैक्षिक प्रशासन कहलाती है।
प्रश्न 21. आपदा प्रबन्धन से आपका क्या आशय है?
उत्तर: आपदाओं से होने वाली जन-धन की हानि को कम करने हेतु रोकथाम, शमन, तैयारी, त्वरित प्रतिक्रिया, राहत और पुनर्वास की व्यवस्थित प्रक्रिया को आपदा प्रबन्धन कहते हैं।
प्रश्न 22. पर्यवेक्षण का उद्देश्य बताइए।
उत्तर: पर्यवेक्षण का मुख्य उद्देश्य शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया में सुधार करना, शिक्षकों को उचित मार्गदर्शन देना तथा विद्यालय के शैक्षिक उद्देश्यों की प्रभावी प्राप्ति सुनिश्चित करना है।
प्रश्न 23. ग्राम शिक्षा समिति का कोई एक कार्य बताइए।
उत्तर: ग्राम शिक्षा समिति का एक प्रमुख कार्य पंचायत क्षेत्र के बेसिक विद्यालयों की स्थापना, प्रशासन, नियंत्रण एवं प्रबन्धन करना है।
प्रश्न 24. अभिलेख से आपका क्या आशय है?
उत्तर: विद्यालय से सम्बन्धित महत्वपूर्ण तथ्यों, घटनाओं, गतिविधियों तथा सूचनाओं को व्यवस्थित रूप से लिखित या दस्तावेजी रूप में सुरक्षित रखने को अभिलेख कहते हैं।
प्रश्न 25. एन. सी. टी. ई. का पूरा नाम बताइए।
उत्तर: NCTE का पूरा नाम National Council for Teacher Education अर्थात् राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद् है।
प्रश्न 26. जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान के विभागों का नाम बताइए।
उत्तर: DIET के सात प्रमुख विभाग हैं—पूर्व-सेवा शिक्षक शिक्षा (PSTE), कार्यानुभव (WE), जिला संसाधन इकाई (DRU), सेवाकालीन कार्यक्रम एवं क्षेत्रीय अन्तःक्रिया व नवाचार समन्वय (IFIC), पाठ्यक्रम-सामग्री विकास एवं मूल्यांकन (CMDE), शैक्षिक प्रौद्योगिकी (ET) तथा नियोजन एवं प्रबन्धन (P&M)।
प्रश्न 27. मानवीय संसाधनों से आपका क्या आशय है?
उत्तर: किसी संस्था के कार्यों को संचालित करने वाले व्यक्तियों को मानवीय संसाधन कहा जाता है। विद्यालय में प्रधानाध्यापक, शिक्षक, विद्यार्थी, कर्मचारी, अभिभावक एवं समुदाय इसके उदाहरण हैं।
प्रश्न 28. शिक्षक-अभिभावक संघ का उद्देश्य बताइए।
उत्तर: शिक्षक-अभिभावक संघ का उद्देश्य विद्यालय और अभिभावकों के बीच सहयोग स्थापित कर विद्यार्थियों की शैक्षिक प्रगति, व्यवहार तथा सर्वांगीण विकास में सहायता करना है।
प्रश्न 29. किन्हीं चार प्राकृतिक आपदाओं का नाम बताइए।
उत्तर: भूकम्प, बाढ़, सूखा और चक्रवात चार प्रमुख प्राकृतिक आपदाएँ हैं।
प्रश्न 30. विज्ञान शिक्षण में प्रयोगशाला का महत्व बताइए।
उत्तर: प्रयोगशाला विद्यार्थियों को स्वयं प्रयोग करके वैज्ञानिक सिद्धान्तों को समझने और सत्यापित करने का अवसर देती है तथा उनमें वैज्ञानिक दृष्टिकोण एवं प्रयोगात्मक कौशल विकसित करती है।
लघु उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 31. विद्यालय प्रबन्धन में किस-किस की भूमिका होती है? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: विद्यालय प्रबन्धन एक सामूहिक प्रक्रिया है, जिसमें अनेक व्यक्तियों की भूमिका होती है—
- प्रधानाध्यापक: विद्यालय का नेतृत्व, नियोजन, पर्यवेक्षण, समन्वय तथा प्रशासन करता है।
- शिक्षक: शिक्षण-अधिगम, मूल्यांकन, अनुशासन तथा विद्यार्थियों के विकास में प्रमुख भूमिका निभाते हैं।
- विद्यार्थी: विद्यालयी गतिविधियों में सक्रिय भाग लेकर अनुशासन एवं उत्तरदायित्व का पालन करते हैं।
- अभिभावक एवं समुदाय: विद्यालय को सहयोग देते हैं तथा बच्चों की प्रगति और विद्यालय के विकास में सहभागिता करते हैं।
- गैर-शैक्षणिक कर्मचारी: कार्यालय, अभिलेख, वित्त तथा अन्य प्रशासनिक कार्यों के सुचारु संचालन में सहयोग करते हैं।
प्रश्न 32. विद्यालय और समुदाय के सम्बन्धों को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: विद्यालय और समुदाय का सम्बन्ध परस्पर सहयोग एवं निर्भरता का होता है। विद्यालय समुदाय की आवश्यकताओं और संस्कृति से जुड़ा रहता है तथा समुदाय विद्यालय के विकास में सहयोग करता है।
- विद्यालय बच्चों को सामाजिक मूल्यों, नागरिकता और उत्तरदायित्व की शिक्षा देता है।
- समुदाय विद्यालय को स्थानीय संसाधन, अनुभव और सहयोग उपलब्ध कराता है।
- विद्यालय स्वास्थ्य, स्वच्छता, पर्यावरण और साक्षरता जैसे विषयों पर समुदाय में जागरूकता उत्पन्न करता है।
- अभिभावकों एवं समुदाय की सहभागिता से विद्यालय की समस्याओं के समाधान और शैक्षिक गुणवत्ता में सुधार होता है।
प्रश्न 33. प्रमुख विद्यालयी अभिलेखों का वर्णन कीजिए।
उत्तर: विद्यालय के प्रशासनिक एवं शैक्षिक कार्यों का व्यवस्थित विवरण विभिन्न अभिलेखों में सुरक्षित रखा जाता है। प्रमुख विद्यालयी अभिलेख निम्नलिखित हैं—
- प्रवेश एवं विद्यालय-त्याग पंजिका: विद्यार्थियों के प्रवेश तथा विद्यालय छोड़ने का विवरण।
- उपस्थिति पंजिका: विद्यार्थियों एवं कर्मचारियों की दैनिक उपस्थिति का विवरण।
- परीक्षा एवं प्रगति अभिलेख: विद्यार्थियों के मूल्यांकन, प्राप्तांक एवं शैक्षिक प्रगति का विवरण।
- स्टॉक पंजिका: विद्यालय की सामग्री, फर्नीचर, उपकरण आदि का विवरण।
- वित्तीय अभिलेख: आय-व्यय, अनुदान एवं अन्य वित्तीय लेन-देन का विवरण।
- लॉग बुक: विद्यालय की महत्वपूर्ण घटनाओं एवं गतिविधियों का क्रमबद्ध विवरण।
प्रश्न 34. पाठ्य सहगामी क्रियाएँ किस प्रकार बालक के विकास में उपयोगी होती हैं? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: पाठ्य सहगामी क्रियाएँ शिक्षा को केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित न रखकर बालक के सर्वांगीण विकास में सहायता करती हैं। इनकी प्रमुख उपयोगिताएँ हैं—
- बालकों में छिपी प्रतिभाओं एवं विशेष रुचियों की पहचान और विकास होता है।
- सहयोग, नेतृत्व, अनुशासन, सहिष्णुता और सामाजिकता जैसे गुण विकसित होते हैं।
- खेलकूद एवं अन्य गतिविधियों से शारीरिक विकास होता है।
- वाद-विवाद, नाटक, लेखन एवं कला से रचनात्मकता, अभिव्यक्ति और आत्मविश्वास बढ़ता है।
- विद्यार्थियों को प्रत्यक्ष एवं व्यावहारिक अनुभव प्राप्त होते हैं।
प्रश्न 35. "अच्छी समय-सारणी विद्यालय के विविध कार्य संचालन का सच्चा प्रतिबिम्ब है।" स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: समय-सारणी विद्यालय के दैनिक कार्यों, विषयों, कक्षाओं, शिक्षकों तथा अन्य गतिविधियों को निश्चित समय के अनुसार व्यवस्थित करती है। इसलिए इसे विद्यालय के कार्य-संचालन का सच्चा प्रतिबिम्ब कहा जाता है। इसके प्रमुख महत्व हैं—
- विद्यालय के समय और उपलब्ध संसाधनों का उचित उपयोग होता है।
- शिक्षकों एवं विद्यार्थियों को अपने कार्य और समय की पूर्व जानकारी रहती है।
- विभिन्न विषयों एवं पाठ्य सहगामी गतिविधियों को उचित समय दिया जा सकता है।
- शिक्षकों के कार्यभार का संतुलित वितरण किया जा सकता है।
- विद्यालय में नियमितता, व्यवस्था और अनुशासन बनाए रखने में सहायता मिलती है।
प्रश्न 36. कुशल शिक्षक के गुणों का वर्णन कीजिए।
उत्तर: कुशल शिक्षक केवल विषय-ज्ञान देने वाला व्यक्ति नहीं, बल्कि विद्यार्थियों का मार्गदर्शक और प्रेरक भी होता है। उसके प्रमुख गुण निम्नलिखित हैं—
- अपने विषय का पर्याप्त एवं अद्यतन ज्ञान होना।
- उपयुक्त एवं बाल-केंद्रित शिक्षण विधियों का प्रयोग करना।
- विद्यार्थियों के प्रति सहानुभूतिपूर्ण, धैर्यवान और निष्पक्ष व्यवहार करना।
- स्पष्ट एवं प्रभावी सम्प्रेषण क्षमता होना।
- समयपालन, कर्तव्यनिष्ठा एवं उत्तरदायित्व की भावना होना।
- विद्यार्थियों को प्रेरित करना और उनकी व्यक्तिगत भिन्नताओं को समझना।
- निरन्तर सीखने तथा अपनी शिक्षण विधियों में सुधार करने के लिए तत्पर रहना।
प्रश्न 37. मनोविज्ञानशाला, उ.प्र., प्रयागराज के कार्यों को बताइए।
उत्तर: मनोविज्ञानशाला, उत्तर प्रदेश, प्रयागराज विद्यार्थियों तथा अन्य व्यक्तियों को मनोवैज्ञानिक निर्देशन एवं परामर्श प्रदान करने वाली प्रमुख संस्था है। इसके मुख्य कार्य हैं—
- विद्यार्थियों को शैक्षिक, व्यावसायिक तथा वैयक्तिक निर्देशन एवं परामर्श प्रदान करना।
- संवेगात्मक एवं व्यवहारगत कठिनाइयों वाले बालकों के निदान तथा सहायता में सहयोग करना।
- शैक्षिक पिछड़ेपन के कारणों का पता लगाकर उसके निराकरण हेतु सुझाव देना।
- विद्यार्थियों की रुचि, योग्यता एवं क्षमता के अनुसार विषय तथा व्यवसाय के चयन में मार्गदर्शन देना।
- मनोवैज्ञानिक परीक्षणों का विकास, शोध कार्य तथा निर्देशन एवं परामर्श से सम्बन्धित प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करना।
प्रश्न 38. पर्यवेक्षण एवं निरीक्षण में अन्तर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
| पर्यवेक्षण | निरीक्षण |
|---|---|
| 1. इसका मुख्य उद्देश्य शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया में सुधार एवं विकास करना है। | 1. इसका मुख्य उद्देश्य निर्धारित मानकों के अनुसार कार्य की जाँच एवं स्थिति का आकलन करना है। |
| 2. यह निरन्तर एवं विकासात्मक प्रक्रिया है। | 2. यह सामान्यतः निश्चित समय पर की जाने वाली औपचारिक प्रक्रिया है। |
| 3. इसमें शिक्षक को मार्गदर्शन, सहयोग और सुझाव दिए जाते हैं। | 3. इसमें कार्य, अभिलेख, व्यवस्था तथा नियमों के अनुपालन की जाँच की जाती है। |
| 4. इसका स्वरूप सहयोगात्मक एवं प्रजातांत्रिक होता है। | 4. इसका स्वरूप अपेक्षाकृत औपचारिक एवं प्रशासनिक होता है। |
| 5. इसका क्षेत्र शिक्षण-अधिगम तथा विद्यालय की समग्र शैक्षिक प्रक्रिया तक विस्तृत होता है। | 5. यह प्रायः निर्धारित कार्यों, मानकों तथा प्रशासनिक व्यवस्थाओं की जाँच पर केन्द्रित होता है। |
| 6. इसका परिणाम सुधार, व्यावसायिक विकास एवं बेहतर शिक्षण के रूप में सामने आता है। | 6. इसका परिणाम निरीक्षण-रिपोर्ट, आवश्यक निर्देश अथवा अनुपालन सम्बन्धी कार्यवाही के रूप में सामने आता है। |
प्रश्न 39. कक्षा में अनुशासनहीनता के निवारण हेतु अपने विचार दीजिए।
उत्तर: कक्षा में अनुशासन बनाए रखने के लिए केवल दण्ड पर निर्भर रहने के स्थान पर सकारात्मक एवं बाल-केंद्रित उपाय अपनाने चाहिए। प्रमुख उपाय निम्नलिखित हैं—
- कक्षा के नियम स्पष्ट, उचित एवं सभी विद्यार्थियों के लिए समान होने चाहिए।
- शिक्षण को रोचक, सक्रिय एवं विद्यार्थियों की आवश्यकताओं के अनुरूप बनाया जाना चाहिए।
- शिक्षक और विद्यार्थियों के बीच सम्मानपूर्ण एवं मैत्रीपूर्ण सम्बन्ध होना चाहिए।
- अच्छे व्यवहार को प्रोत्साहन और सकारात्मक पुनर्बलन दिया जाना चाहिए।
- समस्याग्रस्त विद्यार्थियों को व्यक्तिगत मार्गदर्शन एवं परामर्श प्रदान किया जाना चाहिए।
- अभिभावकों के साथ नियमित सम्पर्क एवं सहयोग बनाए रखना चाहिए।
- खेलकूद एवं पाठ्य सहगामी गतिविधियों के पर्याप्त अवसर उपलब्ध कराने चाहिए।
- अनावश्यक एवं अत्यधिक शारीरिक या मानसिक दण्ड से बचना चाहिए।
प्रश्न 40. ग्राम शिक्षा समिति के कौन-कौन से सदस्य होते हैं? उसके कार्यों को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा अधिनियम, 1972 की धारा 11 के अनुसार प्रत्येक ग्राम पंचायत के लिए ग्राम शिक्षा समिति का गठन किया जाता है।
ग्राम शिक्षा समिति के सदस्य—
- ग्राम पंचायत का प्रधान—समिति का अध्यक्ष।
- बेसिक विद्यालयों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों के तीन अभिभावक, जिनमें कम-से-कम एक महिला अभिभावक होना आवश्यक है—इनका नामांकन सहायक बेसिक शिक्षा अधिकारी द्वारा किया जाता है।
- ग्राम पंचायत में स्थित बेसिक विद्यालय का प्रधानाध्यापक; यदि एक से अधिक विद्यालय हों तो उनमें से वरिष्ठतम प्रधानाध्यापक—समिति का सदस्य-सचिव।
ग्राम शिक्षा समिति के प्रमुख कार्य—
- पंचायत क्षेत्र में बेसिक विद्यालयों की स्थापना, प्रशासन, नियंत्रण एवं प्रबन्धन करना।
- बेसिक विद्यालयों के विकास, विस्तार एवं सुधार के लिए योजनाएँ तैयार करना।
- पंचायत क्षेत्र में बेसिक शिक्षा, अनौपचारिक शिक्षा तथा प्रौढ़ शिक्षा का विकास करना।
- विद्यालय भवनों एवं उपकरणों के सुधार के लिए जिला पंचायत को सुझाव देना।
- विद्यालयों के शिक्षकों एवं अन्य कर्मचारियों की समयपालन तथा उपस्थिति सुनिश्चित करने हेतु आवश्यक कदम उठाना।
- राज्य सरकार द्वारा सौंपे गए बेसिक शिक्षा से सम्बन्धित अन्य कार्यों का सम्पादन करना।
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