बहुविकल्पीय प्रश्न
प्रश्न 1. कलकत्ता में मदरसा की स्थापना किसने की थी?
(a) मैकाले ने
(b) विलियम बैंटिक ने
(c) वॉरेन हेस्टिंग्स
(d) उपर्युक्त में से कोई नहीं
उत्तर: (c) वॉरेन हेस्टिंग्स
वॉरेन हेस्टिंग्स ने 1781 में कलकत्ता मदरसा की स्थापना मुस्लिम कानून एवं इस्लामी अध्ययन को प्रोत्साहित करने के लिए की थी।
प्रश्न 2. किसे राष्ट्रीय शिक्षा आयोग भी कहते हैं?
(a) राधाकृष्णन आयोग
(b) मुदालियर आयोग
(c) कोठारी आयोग
(d) उपर्युक्त में से कोई नहीं
उत्तर: (c) कोठारी आयोग
शिक्षा आयोग (1964-66) को राष्ट्रीय शिक्षा आयोग अथवा कोठारी आयोग भी कहा जाता है। इसके अध्यक्ष डॉ. डी. एस. कोठारी थे।
प्रश्न 3. भारतीय शिक्षा आयोग का गठन किया गया था?
(a) 1880 में
(b) 1882 में
(c) 1890 में
(d) 1892 में
उत्तर: (b) 1882 में
भारतीय शिक्षा आयोग, 1882 की अध्यक्षता सर विलियम हण्टर ने की थी। इसलिए इसे हण्टर आयोग भी कहा जाता है।
प्रश्न 4. 'गोखले विधेयक' प्रस्तुत किया गया था—
(a) 16 मार्च 1911
(b) 20 मार्च 1911
(c) 16 मार्च 1912
(d) 20 अप्रैल 1919
उत्तर: (a) 16 मार्च 1911
गोपाल कृष्ण गोखले ने प्राथमिक शिक्षा को अनिवार्य बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास करते हुए 16 मार्च 1911 को इससे सम्बन्धित विधेयक प्रस्तुत किया।
प्रश्न 5. शिक्षा आयोग 1964-66 के अध्यक्ष थे—
(a) डॉ. ए. लक्ष्मणस्वामी मुदालियर
(b) श्री एम. टी. व्यास
(c) डॉ. डी. एस. कोठारी
(d) डॉ. ताराचन्द
उत्तर: (c) डॉ. डी. एस. कोठारी
शिक्षा आयोग (1964-66) के अध्यक्ष डॉ. दौलत सिंह कोठारी थे। इसी कारण इसे कोठारी आयोग कहा जाता है।
प्रश्न 6. प्राच्य-पाश्चात्य विवाद का जन्म हुआ—
(a) हण्टर आयोग से
(b) 1813 के आज्ञापत्र से
(c) मैकाले के विवरण-पत्र से
(d) वुड के घोषणा-पत्र से
उत्तर: (b) 1813 के आज्ञापत्र से
1813 के चार्टर एक्ट में शिक्षा के लिए धनराशि निर्धारित की गई, किन्तु उसका उपयोग प्राच्य अथवा पाश्चात्य शिक्षा में किसके लिए किया जाए, इसे लेकर प्राच्य-पाश्चात्य विवाद विकसित हुआ।
प्रश्न 7. शिक्षा को समवर्ती सूची में स्थान दिया गया—
(a) 1970 ई. में
(b) 1975 ई. में
(c) 1976 ई. में
(d) 1980 ई. में
उत्तर: (c) 1976 ई. में
42वें संविधान संशोधन, 1976 द्वारा शिक्षा को राज्य सूची से हटाकर समवर्ती सूची में रखा गया।
प्रश्न 8. फोर्ट विलियम कॉलेज की स्थापना किसके द्वारा की गयी?
(a) विलियम बैंटिक
(b) लॉर्ड वेलेजली
(c) चार्ल्स ग्राण्ट
(d) इरविन
उत्तर: (b) लॉर्ड वेलेजली
लॉर्ड वेलेजली ने 1800 में कलकत्ता में फोर्ट विलियम कॉलेज की स्थापना ईस्ट इण्डिया कम्पनी के असैनिक अधिकारियों के प्रशिक्षण के लिए की थी।
प्रश्न 9. निस्पन्दन सिद्धान्त के प्रतिपादक कौन थे?
(a) चार्ल्स ग्राण्ट
(b) लॉर्ड मैकाले
(c) लॉर्ड वेलेजली
(d) लॉर्ड विलियम बैंटिक
उत्तर: (b) लॉर्ड मैकाले
भारतीय शिक्षा के इतिहास में अधोमुखी निस्पन्दन अथवा छनाई सिद्धान्त को मैकाले की शिक्षा-नीति से जोड़ा जाता है। इसमें पहले उच्च वर्ग को शिक्षित कर शिक्षा को क्रमशः सामान्य जनता तक पहुँचाने की धारणा थी।
प्रश्न 10. ऑपरेशन ब्लैक बोर्ड कब आरम्भ हुआ?
(a) 1985-86
(b) 1986-87
(c) 1987-88
(d) 1988-89
उत्तर: (c) 1987-88
ऑपरेशन ब्लैकबोर्ड राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 1986 के अन्तर्गत 1987-88 में प्रारम्भ किया गया। इसका उद्देश्य प्राथमिक विद्यालयों में न्यूनतम आवश्यक भौतिक एवं शैक्षिक सुविधाएँ उपलब्ध कराना था।
प्रश्न 11. शिक्षा छनाई का सिद्धान्त लागू किया गया—
(a) उच्च वर्ग की शिक्षा हेतु
(b) जन शिक्षा हेतु
(c) अंग्रेजों की शिक्षा हेतु
(d) छात्रों की शिक्षा हेतु
उत्तर: (a) उच्च वर्ग की शिक्षा हेतु
अधोमुखी निस्पन्दन सिद्धान्त के अनुसार पहले समाज के उच्च एवं प्रभावशाली वर्ग को शिक्षित करके शिक्षा को उनके माध्यम से सामान्य जनता तक पहुँचाने की कल्पना की गई थी।
प्रश्न 12. निःशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा अधिकार अधिनियम कब बना?
(a) 2005
(b) 2008
(c) 2009
(d) 2011
उत्तर: (c) 2009
बच्चों का निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 6 से 14 वर्ष के बच्चों के निःशुल्क एवं अनिवार्य प्रारम्भिक शिक्षा के अधिकार से सम्बन्धित है। यह 1 अप्रैल 2010 से लागू हुआ।
प्रश्न 13. कस्तूरबा गाँधी विद्यालय योजना का सम्बन्ध है—
(a) प्राथमिक शिक्षा से
(b) उच्च प्राथमिक बालिका शिक्षा से
(c) माध्यमिक शिक्षा से
(d) माध्यमिक बालिका शिक्षा से
उत्तर: (b) उच्च प्राथमिक बालिका शिक्षा से
कस्तूरबा गाँधी बालिका विद्यालय (KGBV) योजना 2004 में मुख्यतः शैक्षिक रूप से पिछड़े क्षेत्रों की वंचित बालिकाओं के लिए आवासीय उच्च प्राथमिक शिक्षा उपलब्ध कराने हेतु प्रारम्भ की गई थी।
प्रश्न 14. भारतीय विश्वविद्यालय अधिनियम किस वर्ष पारित किया गया?
(a) 1903
(b) 1905
(c) 1904
(d) 1908
उत्तर: (c) 1904
भारतीय विश्वविद्यालय अधिनियम, 1904 लॉर्ड कर्जन के शासनकाल में पारित हुआ। इसका उद्देश्य विश्वविद्यालयों के प्रशासन, शिक्षण, निरीक्षण एवं सम्बद्धता व्यवस्था में सुधार करना था।
प्रश्न 15. कलकत्ता एवं बम्बई विश्वविद्यालय की स्थापना का आदर्श किसे बनाया गया?
(a) कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय को
(b) ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय को
(c) लंदन विश्वविद्यालय को
(d) पेरिस विश्वविद्यालय को
उत्तर: (c) लंदन विश्वविद्यालय को
1857 में स्थापित कलकत्ता, बम्बई और मद्रास विश्वविद्यालयों के संगठन के लिए लंदन विश्वविद्यालय के तत्कालीन परीक्षा एवं सम्बद्धता-आधारित मॉडल को आदर्श बनाया गया था।
अति लघु उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 16. निस्पन्दन सिद्धान्त से क्या आशय है?
उत्तर: पहले उच्च वर्ग को शिक्षित करके शिक्षा को धीरे-धीरे सामान्य जनता तक पहुँचाने की नीति को अधोमुखी निस्पन्दन सिद्धान्त कहा जाता है।
प्रश्न 17. कोठारी आयोग की नियुक्ति का मुख्य उद्देश्य क्या था?
उत्तर: भारतीय शिक्षा-व्यवस्था का समग्र अध्ययन एवं मूल्यांकन करके उसके विकास हेतु राष्ट्रीय स्तर की नीतियाँ एवं सुधार सुझाना इसका मुख्य उद्देश्य था।
प्रश्न 18. शिक्षा के सार्वभौमीकरण से क्या आशय है?
उत्तर: सभी पात्र बच्चों के लिए शिक्षा की पहुँच, नामांकन, ठहराव एवं अपेक्षित अधिगम सुनिश्चित करना शिक्षा का सार्वभौमीकरण कहलाता है।
प्रश्न 19. राष्ट्रीय बालश्रम परियोजना क्या है?
उत्तर: राष्ट्रीय बाल श्रम परियोजना (NCLP) 1988 में बाल श्रमिकों को श्रम से हटाकर शिक्षा, प्रशिक्षण एवं पुनर्वास उपलब्ध कराने के लिए प्रारम्भ की गई।
प्रश्न 20. जनशाला कार्यक्रम क्या है?
उत्तर: जनशाला 1998 में प्रारम्भ भारत सरकार एवं पाँच संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों का समुदाय-आधारित प्राथमिक शिक्षा कार्यक्रम था, जिसका विशेष ध्यान बालिकाओं एवं वंचित बच्चों पर था।
प्रश्न 21. न्यूनतम अधिगम स्तर से क्या तात्पर्य है?
उत्तर: किसी निश्चित कक्षा अथवा स्तर के अन्त तक प्रत्येक विद्यार्थी से अपेक्षित न्यूनतम ज्ञान, कौशल एवं दक्षताओं को न्यूनतम अधिगम स्तर (MLL) कहते हैं।
प्रश्न 22. विद्यालयोन्मुखी कार्यक्रम से आप क्या समझते हैं?
उत्तर: नवप्रवेशी बच्चों को गतिविधियों द्वारा विद्यालयी वातावरण, दिनचर्या एवं प्रारम्भिक अधिगम के लिए तैयार करने वाला कार्यक्रम विद्यालयोन्मुखी कार्यक्रम कहलाता है।
प्रश्न 23. पी-मोस्ट कार्यक्रम का पूरा नाम लिखिए।
उत्तर: P-MOST का पूरा नाम Programme of Mass Orientation of School Teachers है।
प्रश्न 24. प्राथमिक शिक्षा के सन्दर्भ में अपव्यय व अवरोधन का अर्थ स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: शिक्षा पूरी किए बिना विद्यालय छोड़ देना अपव्यय तथा एक ही कक्षा में अपेक्षित समय से अधिक रुकना अवरोधन कहलाता है।
प्रश्न 25. प्राच्य-पाश्चात्य विवाद क्या है?
उत्तर: भारत में शिक्षा के लिए प्राच्य भाषाओं एवं ज्ञान को बढ़ावा दिया जाए या अंग्रेजी एवं पाश्चात्य ज्ञान को—इसी मतभेद को प्राच्य-पाश्चात्य विवाद कहा गया।
प्रश्न 26. DPEP परियोजना का मुख्य कार्य क्या है?
उत्तर: DPEP का मुख्य कार्य प्राथमिक शिक्षा की पहुँच, नामांकन, ठहराव एवं गुणवत्ता बढ़ाना तथा सामाजिक एवं लैंगिक असमानताओं को कम करना था।
प्रश्न 27. BEP क्या है?
उत्तर: BEP का अर्थ Basic Education Project अर्थात् बेसिक शिक्षा परियोजना है। उत्तर प्रदेश में इसे 1993 में प्रारम्भिक शिक्षा की पहुँच, पूर्णता एवं गुणवत्ता सुधारने हेतु प्रारम्भ किया गया।
प्रश्न 28. वुड के घोषणा-पत्र का शिक्षा पर क्या प्रभाव पड़ा?
उत्तर: वुड्स डिस्पैच से शिक्षा विभाग, अनुदान-सहायता, शिक्षक-प्रशिक्षण, विश्वविद्यालयों तथा क्रमबद्ध विद्यालयी व्यवस्था के विकास को महत्वपूर्ण आधार मिला।
प्रश्न 29. ब्रिज कोर्स का क्या आशय है?
उत्तर: विद्यार्थी के वर्तमान अधिगम स्तर और अपेक्षित कक्षा-स्तर के बीच के अधिगम-अन्तर को पूरा करने वाला अल्पकालीन कार्यक्रम ब्रिज कोर्स कहलाता है।
प्रश्न 30. शिक्षा का अधिकार अधिनियम-2009 में 'प्रारम्भिक शिक्षा' से क्या आशय है?
उत्तर: शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 के अनुसार प्रारम्भिक शिक्षा का अर्थ कक्षा 1 से कक्षा 8 तक की शिक्षा है।
लघु उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 31. लॉर्ड मैकाले की शिक्षा नीति का आलोचनात्मक मूल्यांकन करें।
उत्तर:
लॉर्ड मैकाले ने 1835 के अपने प्रसिद्ध विवरण-पत्र में अंग्रेजी भाषा के माध्यम से पाश्चात्य ज्ञान-विज्ञान के प्रसार का समर्थन किया। उसकी नीति का सम्बन्ध उच्च वर्ग को पहले शिक्षित करने वाली अधोमुखी निस्पन्दन धारणा से भी जोड़ा जाता है।
प्रमुख प्रभाव एवं गुण—
- भारत में अंग्रेजी भाषा एवं पाश्चात्य ज्ञान के प्रसार को बल मिला।
- आधुनिक विज्ञान, साहित्य और राजनीतिक विचारों तक भारतीयों की पहुँच बढ़ी।
- आधुनिक उच्च शिक्षा के विकास को गति मिली।
प्रमुख दोष—
- भारतीय भाषाओं एवं पारम्परिक ज्ञान को अपेक्षित महत्व नहीं दिया गया।
- जनसाधारण की प्राथमिक शिक्षा की अपेक्षा सीमित उच्च वर्ग की शिक्षा पर अधिक ध्यान रहा।
- व्यावसायिक एवं तकनीकी शिक्षा को पर्याप्त महत्व नहीं मिला।
- शिक्षा की दिशा औपनिवेशिक प्रशासन की आवश्यकताओं से भी प्रभावित रही।
इस प्रकार मैकाले की नीति ने आधुनिक अंग्रेजी शिक्षा के प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, किन्तु उसकी अभिजन-केन्द्रित और भारतीय भाषाओं की उपेक्षा करने वाली प्रवृत्ति की आलोचना की जाती है।
प्रश्न 32. वुड के घोषणा-पत्र 1854 को शिक्षा का मैग्नाकार्टा क्यों कहा जाता है?
उत्तर:
वुड्स डिस्पैच, 1854 ने भारत में आधुनिक शिक्षा-व्यवस्था के लगभग सभी प्रमुख पक्षों के लिए विस्तृत एवं क्रमबद्ध नीति प्रस्तुत की। इसी व्यापक स्वरूप के कारण इसे भारतीय शिक्षा का मैग्नाकार्टा कहा जाता है।
इसकी प्रमुख संस्तुतियाँ थीं—
- प्रत्येक प्रान्त में लोक शिक्षा विभाग की स्थापना।
- प्राथमिक स्तर पर स्थानीय भाषाओं को महत्व देना।
- उच्च शिक्षा में अंग्रेजी के प्रयोग को बढ़ावा देना।
- कलकत्ता, बम्बई एवं मद्रास में विश्वविद्यालय स्थापित करना।
- निजी शिक्षण संस्थाओं के लिए अनुदान-सहायता प्रणाली विकसित करना।
- शिक्षक-प्रशिक्षण संस्थाओं की स्थापना पर बल देना।
- स्त्री शिक्षा एवं व्यावसायिक शिक्षा को प्रोत्साहित करना।
- प्राथमिक से विश्वविद्यालय स्तर तक क्रमबद्ध शिक्षा-व्यवस्था विकसित करना।
इस प्रकार वुड्स डिस्पैच ने भारत की आधुनिक शिक्षा-व्यवस्था के लिए एक व्यापक प्रशासनिक एवं शैक्षिक ढाँचा प्रस्तुत किया।
प्रश्न 33. भारतीय शिक्षा में लॉर्ड कर्जन का क्या योगदान है?
उत्तर:
लॉर्ड कर्जन ने भारतीय शिक्षा की गुणवत्ता, प्रशासन, निरीक्षण एवं शिक्षक-प्रशिक्षण में सुधार के लिए अनेक कदम उठाए।
उसके प्रमुख योगदान—
- 1901 में शिमला शिक्षा सम्मेलन आयोजित किया।
- प्राथमिक शिक्षा के विस्तार एवं उसके लिए सरकारी सहायता बढ़ाने पर बल दिया।
- प्राथमिक स्तर पर स्थानीय अथवा मातृभाषा को महत्व दिया।
- शिक्षक-प्रशिक्षण एवं शिक्षकों की कार्यकुशलता सुधारने पर बल दिया।
- विद्यालयों की निरीक्षण एवं मान्यता व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाया।
- 1902 में भारतीय विश्वविद्यालय आयोग गठित किया।
- 1904 में भारतीय विश्वविद्यालय अधिनियम पारित कराया।
कर्जन की नीति से शिक्षा की गुणवत्ता एवं प्रशासन पर ध्यान बढ़ा, किन्तु विश्वविद्यालयों पर सरकारी नियन्त्रण बढ़ाने के कारण इसकी आलोचना भी हुई।
प्रश्न 34. कोठारी आयोग की प्रमुख सिफारिशों का संक्षेप में वर्णन करें।
उत्तर:
कोठारी आयोग (1964-66) ने भारतीय शिक्षा के सभी स्तरों का समग्र अध्ययन करके शिक्षा को राष्ट्रीय विकास से जोड़ने के लिए व्यापक संस्तुतियाँ दीं।
प्रमुख सिफारिशें—
- पूरे देश में 10+2+3 शिक्षा-संरचना अपनाई जाए।
- समान विद्यालय प्रणाली (Common School System) विकसित की जाए।
- शैक्षिक अवसरों की समानता एवं बालिका शिक्षा पर विशेष बल दिया जाए।
- विद्यालय स्तर पर विज्ञान एवं गणित को महत्वपूर्ण स्थान दिया जाए।
- त्रिभाषा सूत्र को लागू करने पर बल दिया गया।
- कार्य-अनुभव एवं व्यावसायिक शिक्षा को शिक्षा से जोड़ा जाए।
- शिक्षकों की स्थिति, प्रशिक्षण एवं सेवा-शर्तों में सुधार किया जाए।
- शिक्षा पर राष्ट्रीय आय का लगभग 6 प्रतिशत व्यय करने की दिशा में प्रयास किया जाए।
आयोग का उद्देश्य ऐसी राष्ट्रीय शिक्षा-व्यवस्था विकसित करना था जो उत्पादकता, सामाजिक एवं राष्ट्रीय एकता, आधुनिकीकरण और मूल्यों के विकास में सहायक हो।
प्रश्न 35. राष्ट्रीय शिक्षा नीति 1986 के प्रमुख बिन्दु क्या थे?
उत्तर:
राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 1986 ने शिक्षा को समानता, राष्ट्रीय विकास एवं सामाजिक परिवर्तन का महत्वपूर्ण साधन माना।
इसके प्रमुख बिन्दु—
- राष्ट्रीय शिक्षा प्रणाली: पूरे देश में शिक्षा के आवश्यक सामान्य स्वरूप एवं मूल्यों पर बल।
- प्रारम्भिक शिक्षा का सार्वभौमीकरण: सभी बच्चों के नामांकन, ठहराव एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को महत्व।
- ऑपरेशन ब्लैकबोर्ड: प्राथमिक विद्यालयों में न्यूनतम आवश्यक सुविधाएँ उपलब्ध कराना।
- समानता: महिलाओं, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अल्पसंख्यकों एवं अन्य वंचित समूहों की शिक्षा पर विशेष ध्यान।
- नवोदय विद्यालय: ग्रामीण क्षेत्रों के प्रतिभाशाली बच्चों के लिए आवासीय विद्यालयों की व्यवस्था।
- प्रौढ़ शिक्षा: निरक्षरता दूर करने एवं सतत् शिक्षा का विस्तार।
- व्यावसायिक शिक्षा: माध्यमिक स्तर पर रोजगारोन्मुख एवं व्यावसायिक पाठ्यक्रम बढ़ाना।
- शिक्षक शिक्षा: जिला स्तर पर DIET जैसी संस्थाओं की स्थापना एवं शिक्षक-प्रशिक्षण को मजबूत करना।
- बाल-केन्द्रित शिक्षा: शिक्षण को गतिविधि, अनुभव एवं बालक की आवश्यकताओं से जोड़ना।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 1986 में आगे 1992 में संशोधन किए गए और उसके क्रियान्वयन के लिए Programme of Action, 1992 प्रस्तुत किया गया।
प्रश्न 36. जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान के प्रमुख उद्देश्य बताएं।
उत्तर:
जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (DIET) जिला स्तर पर प्रारम्भिक शिक्षा एवं शिक्षक-शिक्षा के अकादमिक संसाधन केन्द्र के रूप में कार्य करता है।
इसके प्रमुख उद्देश्य—
- भावी प्रारम्भिक शिक्षकों को सेवापूर्व प्रशिक्षण देना।
- कार्यरत शिक्षकों के लिए सेवाकालीन प्रशिक्षण एवं अभिविन्यास आयोजित करना।
- शिक्षकों को निरन्तर अकादमिक एवं विषयगत सहायता प्रदान करना।
- स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप शिक्षण-अधिगम सामग्री विकसित करना।
- शैक्षिक समस्याओं पर क्रियात्मक अनुसंधान करना।
- नवीन एवं बाल-केन्द्रित शिक्षण-विधियों को प्रोत्साहित करना।
- जिला स्तर पर शैक्षिक नियोजन, मूल्यांकन एवं कार्यक्रमों के क्रियान्वयन में सहयोग देना।
प्रश्न 37. प्राथमिक शिक्षा की प्रमुख समस्याओं पर प्रकाश डालिए।
उत्तर:
भारत में प्राथमिक शिक्षा के सार्वभौमीकरण एवं गुणवत्ता के मार्ग में अनेक समस्याएँ हैं—
- गरीबी एवं बाल-श्रम: आर्थिक कठिनाइयों के कारण अनेक बच्चे नियमित शिक्षा से वंचित रह जाते हैं।
- ड्रॉपआउट: बच्चों का शिक्षा-स्तर पूरा करने से पहले विद्यालय छोड़ देना।
- शिक्षकों की कमी: अनेक विद्यालयों में पर्याप्त प्रशिक्षित शिक्षक उपलब्ध नहीं होते।
- आधारभूत सुविधाओं की कमी: कक्षा-कक्ष, शौचालय, पेयजल एवं शिक्षण-सामग्री का अभाव।
- शैक्षिक असमानता: बालिकाओं, वंचित समूहों एवं दूरस्थ क्षेत्रों के बच्चों के लिए अवसरों में असमानता।
- भाषायी समस्या: अनेक बच्चों को उनकी मातृभाषा में उपयुक्त शिक्षण-सामग्री एवं शिक्षक उपलब्ध नहीं होते।
- अधिगम गुणवत्ता: नामांकन के बावजूद अपेक्षित भाषा, गणित एवं अन्य मूलभूत दक्षताओं का विकास न होना।
इन समस्याओं के समाधान के लिए समान पहुँच, पर्याप्त संसाधन, प्रशिक्षित शिक्षक एवं गुणवत्तापूर्ण बाल-केन्द्रित शिक्षण आवश्यक है।
प्रश्न 38. ECCE का क्या उद्देश्य है?
उत्तर:
ECCE का पूरा नाम Early Childhood Care and Education है। इसका उद्देश्य जन्म से लगभग 6 वर्ष तक के बच्चों की समग्र देखभाल, विकास एवं प्रारम्भिक शिक्षा सुनिश्चित करना है।
इसके प्रमुख उद्देश्य—
- बच्चों के शारीरिक एवं मोटर विकास को बढ़ावा देना।
- संज्ञानात्मक एवं भाषा-विकास के अवसर प्रदान करना।
- सामाजिक एवं भावात्मक विकास करना।
- स्वास्थ्य, पोषण, सुरक्षा एवं देखभाल सुनिश्चित करना।
- खेल एवं गतिविधि आधारित अनुभवों द्वारा सीखने की रुचि विकसित करना।
- बच्चों को आगे की विद्यालयी शिक्षा के लिए तैयार करना।
अतः ECCE केवल पूर्व-प्राथमिक पढ़ाई नहीं, बल्कि बच्चे के स्वास्थ्य, पोषण, देखभाल, सुरक्षा और समग्र विकास से सम्बन्धित है।
प्रश्न 39. NCERT का मुख्य कार्य क्या है?
उत्तर:
राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद् (NCERT) विद्यालयी शिक्षा के क्षेत्र में केन्द्र एवं राज्य सरकारों को अकादमिक सहायता और परामर्श प्रदान करने वाली स्वायत्त संस्था है।
इसके प्रमुख कार्य—
- विद्यालयी शिक्षा से सम्बन्धित अनुसन्धान करना और उसे प्रोत्साहित करना।
- राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा एवं आदर्श पाठ्यक्रम के विकास में प्रमुख भूमिका निभाना।
- पाठ्यपुस्तकें, शिक्षक-सामग्री एवं अन्य शैक्षिक संसाधन विकसित करना।
- शिक्षकों एवं शिक्षक-प्रशिक्षकों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाना।
- मूल्यांकन, शैक्षिक तकनीक एवं नवाचारों का विकास करना।
- राज्यों एवं अन्य शैक्षिक संस्थाओं को अकादमिक सहयोग प्रदान करना।
प्रश्न 40. 'शिक्षा बिना बोझ के' इस सन्दर्भ में यशपाल समिति के मुख्य सुझाव क्या थे?
उत्तर:
प्रो. यशपाल की अध्यक्षता में गठित राष्ट्रीय सलाहकार समिति ने 1993 में Learning Without Burden रिपोर्ट प्रस्तुत की। इसका उद्देश्य बच्चों पर शारीरिक एवं मानसिक शैक्षिक बोझ कम करके अधिगम को अर्थपूर्ण बनाना था।
समिति के प्रमुख सुझाव—
- पाठ्यक्रम एवं पाठ्यपुस्तकों में अनावश्यक सूचनात्मक बोझ कम किया जाए।
- बहुत अधिक अधूरी जानकारी के बजाय कम लेकिन अच्छी तरह समझी गई विषय-वस्तु को महत्व दिया जाए।
- रटन्त अधिगम के स्थान पर समझ, तर्क, अनुभव एवं ज्ञान-निर्माण पर बल दिया जाए।
- पाठ्यपुस्तक को ज्ञान का एकमात्र स्रोत न बनाया जाए।
- विद्यालयी ज्ञान को बच्चे के जीवन एवं वास्तविक अनुभवों से जोड़ा जाए।
- पाठ्यक्रम एवं पाठ्यपुस्तक निर्माण में शिक्षकों की सक्रिय भागीदारी बढ़ाई जाए।
- बच्चों के भारी स्कूल-बैग एवं अनावश्यक गृहकार्य का बोझ कम किया जाए।
- परीक्षा में केवल याद किए गए तथ्यों के बजाय अवधारणात्मक समझ एवं ज्ञान के प्रयोग को महत्व दिया जाए।
- शिक्षक-प्रशिक्षण को अधिक व्यावहारिक एवं बाल-केन्द्रित बनाया जाए।
यशपाल समिति की रिपोर्ट ने आगे चलकर बाल-केन्द्रित एवं बोझमुक्त पाठ्यचर्या की दिशा को प्रभावित किया और NCF-2005 में भी इसके विचारों को महत्व दिया गया।
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