बहुविकल्पीय प्रश्न
प्रश्न 1. शिक्षा को समवर्ती सूची में स्थान कब दिया गया?
(a) 1970 ई.
(b) 1980 ई.
(c) 1975 ई.
(d) 1976 ई.
उत्तर: (d) 1976 ई.
42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा शिक्षा को राज्य सूची से हटाकर समवर्ती सूची में स्थान दिया गया। इसके बाद शिक्षा के विषय में केन्द्र और राज्य दोनों कानून बना सकते हैं।
प्रश्न 2. निम्न में से कौन-सा अनुच्छेद अल्पसंख्यक वर्गों के हितों के संरक्षण से सम्बन्धित है?
(a) अनुच्छेद 45
(b) अनुच्छेद 21
(c) अनुच्छेद 24
(d) अनुच्छेद 29
उत्तर: (d) अनुच्छेद 29
भारतीय संविधान का अनुच्छेद 29 नागरिकों के किसी वर्ग की विशिष्ट भाषा, लिपि एवं संस्कृति के संरक्षण तथा शैक्षिक संस्थाओं में प्रवेश के सम्बन्ध में भेदभाव से सुरक्षा प्रदान करता है।
प्रश्न 3. निःशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम कब भारत के राजपत्र में प्रकाशित हुआ?
(a) 27 अगस्त 2009
(b) 4 अगस्त 2009
(c) 15 जुलाई 2009
(d) 15 अगस्त 2009
उत्तर: (a) 27 अगस्त 2009
निःशुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 को राष्ट्रपति की स्वीकृति 26 अगस्त 2009 को मिली तथा इसे 27 अगस्त 2009 को भारत के राजपत्र में प्रकाशित किया गया।
प्रश्न 4. निम्न में से किसे राष्ट्रीय शिक्षा आयोग कहते हैं?
(a) राधाकृष्णन आयोग
(b) मुदालियर आयोग
(c) कोठारी आयोग
(d) सैडलर आयोग
उत्तर: (c) कोठारी आयोग
शिक्षा आयोग (1964-66) को राष्ट्रीय शिक्षा आयोग अथवा कोठारी आयोग के नाम से जाना जाता है। इसके अध्यक्ष डॉ. दौलत सिंह कोठारी थे।
प्रश्न 5. प्राच्य-पाश्चात्य विवाद का जन्म हुआ—
(a) हण्टर आयोग 1882 से
(b) 1813 के आज्ञापत्र से
(c) वुड डिस्पैच 1854 से
(d) मैकाले के विवरण-पत्र से
उत्तर: (b) 1813 के आज्ञापत्र से
1813 के चार्टर एक्ट में भारतीय शिक्षा के लिए धनराशि निर्धारित की गई। इस धन का उपयोग प्राच्य शिक्षा में किया जाए अथवा अंग्रेजी एवं पाश्चात्य शिक्षा में, इसी प्रश्न से प्राच्य-पाश्चात्य विवाद विकसित हुआ।
प्रश्न 6. शिमला शिक्षा सम्मेलन का आयोजन कब हुआ था?
(a) सन् 1900 ई.
(b) सन् 1901 ई.
(c) सन् 1905 ई.
(d) सन् 1906 ई.
उत्तर: (b) सन् 1901 ई.
लॉर्ड कर्जन ने सितम्बर 1901 में शिमला शिक्षा सम्मेलन आयोजित किया था, जिसमें भारतीय शिक्षा-व्यवस्था के विभिन्न स्तरों में सुधार पर विचार किया गया।
प्रश्न 7. शिक्षा का निस्यन्दन सिद्धान्त लागू किया गया—
(a) उच्च वर्ग की शिक्षा हेतु
(b) जन शिक्षा हेतु
(c) अंग्रेजों की शिक्षा हेतु
(d) छात्रों की शिक्षा हेतु
उत्तर: (a) उच्च वर्ग की शिक्षा हेतु
अधोमुखी निस्यन्दन सिद्धान्त में पहले समाज के उच्च एवं प्रभावशाली वर्ग को शिक्षित करके शिक्षा को धीरे-धीरे सामान्य जनता तक पहुँचाने की धारणा थी।
प्रश्न 8. 'गोखले विधेयक' प्रस्तुत किया गया था—
(a) 16 मार्च 1910
(b) 20 मार्च 1911
(c) 16 मार्च 1911
(d) 20 अप्रैल 1910
उत्तर: (c) 16 मार्च 1911
गोपाल कृष्ण गोखले ने प्राथमिक शिक्षा को अनिवार्य बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास करते हुए 16 मार्च 1911 को इससे सम्बन्धित विधेयक प्रस्तुत किया।
प्रश्न 9. एन.सी.एफ.टी.ई. में 10+2 के बाद कितने वर्ष का शिक्षक-प्रशिक्षण प्रस्तावित है?
(a) एक वर्ष
(b) दो वर्ष
(c) तीन वर्ष
(d) चार वर्ष
उत्तर: (d) चार वर्ष
NCFTE-2009 ने वरिष्ठ माध्यमिक अर्थात् 10+2 के बाद प्रारम्भिक शिक्षक-शिक्षा के लिए चार वर्षीय समेकित शिक्षक-शिक्षा कार्यक्रम की संस्तुति की।
प्रश्न 10. ऑपरेशन ब्लैक बोर्ड कब प्रारम्भ हुआ?
(a) 1985-86
(b) 1986-87
(c) 1987-88
(d) 1989-90
उत्तर: (c) 1987-88
ऑपरेशन ब्लैकबोर्ड राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 1986 के अनुसरण में 1987-88 से प्रारम्भ किया गया। इसका उद्देश्य प्राथमिक विद्यालयों में न्यूनतम आवश्यक भौतिक एवं शिक्षण-अधिगम सुविधाएँ उपलब्ध कराना था।
अति लघु उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 11. एन.पी.ई.जी.ई.एल. किस कक्षा की अपवंचित लड़कियों के अध्ययन करने का प्रावधान है?
(a) कक्षा 1 से 5
(b) कक्षा 2 से 4
(c) कक्षा 1 से 8
(d) कक्षा 5 से 6
उत्तर: (c) कक्षा 1 से 8
NPEGEL प्रारम्भिक स्तर अर्थात् कक्षा 1 से 8 तक की वंचित एवं अपवंचित बालिकाओं की शिक्षा को प्रोत्साहित करने के लिए संचालित कार्यक्रम था।
प्रश्न 12. उत्तर प्रदेश में मिड-डे-मील योजना कब लागू की गयी?
(a) 11 सितम्बर 2004
(b) 1 सितम्बर 2004
(c) 29 सितम्बर 2004
(d) 14 सितम्बर 2004
उत्तर: (b) 1 सितम्बर 2004
उत्तर प्रदेश के प्राथमिक विद्यालयों में बच्चों को पका हुआ मध्याह्न भोजन उपलब्ध कराने की व्यवस्था 1 सितम्बर 2004 से लागू की गई।
प्रश्न 13. राष्ट्रीय साक्षरता मिशन की स्थापना हुई थी—
(a) सन् 1950 में
(b) सन् 1952 ई.
(c) सन् 1988 ई.
(d) सन् 2000 ई.
उत्तर: (c) सन् 1988 ई.
राष्ट्रीय साक्षरता मिशन की स्थापना मई 1988 में निरक्षर वयस्कों को कार्यात्मक साक्षरता प्रदान करने के उद्देश्य से की गई।
प्रश्न 14. अध्यापक शिक्षा हेतु नियामक संस्था है—
(a) CTE
(b) NCTE
(c) MHRD
(d) NCERT
उत्तर: (b) NCTE
राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद् (NCTE) भारत में अध्यापक शिक्षा के मानकों, नियोजन एवं नियमन से सम्बन्धित सांविधिक संस्था है।
प्रश्न 15. यशपाल समिति का गठन किया गया था—
(a) सन् 1992 ई.
(b) सन् 1993 ई.
(c) सन् 1994 ई.
(d) सन् 1990 ई.
उत्तर: (a) सन् 1992 ई.
स्कूली बच्चों पर शैक्षिक बोझ कम करने के उपाय सुझाने के लिए 1992 में प्रो. यशपाल की अध्यक्षता में राष्ट्रीय सलाहकार समिति गठित की गई। इसकी रिपोर्ट 1993 में Learning Without Burden नाम से प्रस्तुत हुई।
प्रश्न 16. DPEP परियोजना का मुख्य कार्य लिखिए।
उत्तर: DPEP का मुख्य कार्य प्राथमिक शिक्षा की पहुँच, नामांकन, ठहराव एवं गुणवत्ता बढ़ाना तथा सामाजिक और लैंगिक शैक्षिक असमानताओं को कम करना था।
प्रश्न 17. मिड-डे-मील योजना का शुभारम्भ कब किया गया था?
उत्तर: राष्ट्रीय स्तर पर मध्याह्न भोजन सम्बन्धी पोषाहार सहायता कार्यक्रम 15 अगस्त 1995 को प्रारम्भ किया गया था।
प्रश्न 18. P-MOST कार्यक्रम का उद्देश्य लिखिए।
उत्तर: P-MOST का उद्देश्य शिक्षकों को राष्ट्रीय शिक्षा नीति 1986 के नवीन शैक्षिक दृष्टिकोण, बाल-केन्द्रित एवं गतिविधि-आधारित शिक्षण से परिचित कराना था।
प्रश्न 19. NCERT की स्थापना किस वर्ष की गयी?
उत्तर: राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद् (NCERT) की स्थापना 1961 में की गई थी।
प्रश्न 20. बेसिक शिक्षा परियोजना से आप क्या समझते हैं?
उत्तर: बेसिक शिक्षा परियोजना (BEP) प्रारम्भिक शिक्षा की पहुँच, पूर्णता, गुणवत्ता एवं संस्थागत क्षमता सुधारने से सम्बन्धित परियोजना थी।
प्रश्न 21. ECCE का पूरा नाम लिखिए।
उत्तर: ECCE का पूरा नाम Early Childhood Care and Education अर्थात् प्रारम्भिक बाल्यावस्था देखभाल एवं शिक्षा है।
प्रश्न 22. राष्ट्रीय बालश्रम परियोजना किस पंचवर्षीय परियोजना में संचालित हुई?
उत्तर: राष्ट्रीय बाल श्रम परियोजना सातवीं पंचवर्षीय योजना (1985-90) के दौरान प्रारम्भ हुई; NCLP योजना 1988 में शुरू की गई।
प्रश्न 23. DIET का पूरा नाम लिखिए।
उत्तर: DIET का पूरा नाम District Institute of Education and Training अर्थात् जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान है।
प्रश्न 24. विद्यालय प्रबन्ध समिति में कुल सदस्यों की संख्या एवं महिला सदस्यों की संख्या बताइए।
उत्तर: उत्तर प्रदेश में विद्यालय प्रबन्ध समिति में कुल 15 सदस्य होते हैं और कम-से-कम 50 प्रतिशत अर्थात् कम-से-कम 8 सदस्य महिलाएँ होनी चाहिए।
प्रश्न 25. स्कूल रेडीनेस कार्यक्रम की विशेषताएँ बताइए।
उत्तर: यह खेल एवं गतिविधि आधारित कार्यक्रम बच्चों को विद्यालयी वातावरण, भाषा, संख्या-बोध, दिनचर्या तथा सामाजिक व्यवहार के लिए तैयार करता है।
प्रश्न 26. उच्च शिक्षा आयोग 1948 के अध्यक्ष का नाम बताइए।
उत्तर: विश्वविद्यालय शिक्षा आयोग (1948-49) के अध्यक्ष डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन थे।
प्रश्न 27. महिला समाख्या कार्यक्रम क्या है? संक्षिप्त वर्णन कीजिए।
उत्तर: महिला समाख्या ग्रामीण एवं वंचित महिलाओं की शिक्षा, जागरूकता, सामूहिक संगठन एवं सशक्तिकरण को बढ़ावा देने वाला कार्यक्रम था।
प्रश्न 28. सर्वशिक्षा अभियान की विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर: सर्व शिक्षा अभियान की प्रमुख विशेषताएँ सार्वभौमिक प्रारम्भिक शिक्षा, समान अवसर, नामांकन एवं ठहराव तथा गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करना थीं।
प्रश्न 29. शिक्षा का अधिकार अधिनियम कब लागू किया गया?
उत्तर: शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 भारत में 1 अप्रैल 2010 से लागू हुआ।
प्रश्न 30. निस्यन्दन सिद्धान्त के जनक एवं इसके आशय को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: भारतीय शिक्षा के इतिहास में यह सिद्धान्त लॉर्ड मैकाले से सम्बन्धित है। इसमें पहले उच्च वर्ग को शिक्षित करके शिक्षा को सामान्य जनता तक छनकर पहुँचाने की धारणा थी।
लघु उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 31. बाल अधिकार से आप क्या समझते हैं? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
बाल अधिकार वे मूल अधिकार एवं स्वतंत्रताएँ हैं जो प्रत्येक बच्चे को सुरक्षित, स्वस्थ, सम्मानजनक एवं पूर्ण विकास के लिए प्राप्त होनी चाहिए। संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 20 नवम्बर 1989 को बाल अधिकार अभिसमय (UNCRC) को अपनाया।
बाल अधिकारों के प्रमुख पक्ष निम्नलिखित हैं—
- जीवन का अधिकार: जीवन, स्वास्थ्य, पोषण एवं सुरक्षित विकास का अधिकार।
- विकास का अधिकार: शिक्षा, खेल, सूचना और व्यक्तित्व-विकास के अवसर।
- सुरक्षा का अधिकार: शोषण, हिंसा, बाल-श्रम, दुर्व्यवहार एवं तस्करी से संरक्षण।
- भागीदारी का अधिकार: आयु एवं परिपक्वता के अनुसार अपने विचार व्यक्त करने और उन्हें सुने जाने का अधिकार।
- भेदभाव से मुक्ति: जाति, धर्म, भाषा, लिंग अथवा सामाजिक स्थिति के आधार पर भेदभाव न किया जाना।
बाल अधिकारों का उद्देश्य प्रत्येक बच्चे को सुरक्षा, समान अवसर एवं सर्वांगीण विकास के लिए अनुकूल वातावरण प्रदान करना है।
प्रश्न 32. शिक्षा के सार्वभौमीकरण से क्या अभिप्राय है? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
शिक्षा का सार्वभौमीकरण से आशय सभी पात्र बच्चों के लिए जाति, धर्म, लिंग, आर्थिक स्थिति अथवा भौगोलिक क्षेत्र के भेद के बिना शिक्षा की वास्तविक उपलब्धता सुनिश्चित करना है।
इसके प्रमुख पक्ष हैं—
- सार्वभौमिक प्रावधान: प्रत्येक बच्चे की पहुँच में विद्यालय एवं आवश्यक शैक्षिक सुविधाएँ उपलब्ध हों।
- सार्वभौमिक नामांकन: सभी पात्र बच्चों का विद्यालय में प्रवेश सुनिश्चित हो।
- सार्वभौमिक ठहराव: बच्चे निर्धारित शिक्षा-स्तर पूरा होने तक विद्यालय में बने रहें।
- सार्वभौमिक उपलब्धि: प्रत्येक बच्चे को अपेक्षित अधिगम एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त हो।
- समान अवसर: बालिकाओं, वंचित वर्गों, दिव्यांग एवं दूरस्थ क्षेत्रों के बच्चों को विशेष सहायता मिले।
अतः शिक्षा का सार्वभौमीकरण केवल नामांकन नहीं, बल्कि पहुँच, सहभागिता, पूर्णता और गुणवत्तापूर्ण अधिगम सुनिश्चित करना है।
प्रश्न 33. भारत में अनिवार्य एवं निःशुल्क प्राथमिक शिक्षा के सम्बन्ध में संवैधानिक निर्देशों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
भारतीय संविधान में बच्चों की निःशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा के लिए समय-समय पर महत्वपूर्ण प्रावधान किए गए हैं।
- मूल अनुच्छेद 45: संविधान लागू होने के बाद राज्य को दस वर्ष के भीतर 14 वर्ष तक के सभी बच्चों के लिए निःशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा की व्यवस्था करने का प्रयास करने का निर्देश दिया गया था।
- 86वाँ संविधान संशोधन, 2002: इस संशोधन द्वारा अनुच्छेद 21A जोड़ा गया और 6 से 14 वर्ष के प्रत्येक बच्चे के लिए निःशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा को मौलिक अधिकार बनाया गया।
- संशोधित अनुच्छेद 45: राज्य को 6 वर्ष से कम आयु के बच्चों के लिए प्रारम्भिक बाल्यावस्था देखभाल एवं शिक्षा उपलब्ध कराने का प्रयास करने का निर्देश देता है।
- अनुच्छेद 51A (क): माता-पिता अथवा अभिभावक का यह मौलिक कर्तव्य है कि वह 6 से 14 वर्ष के अपने बच्चे को शिक्षा का अवसर प्रदान करे।
- शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009: अनुच्छेद 21A को प्रभावी बनाने के लिए बनाया गया और 1 अप्रैल 2010 से लागू हुआ।
इन संवैधानिक प्रावधानों ने प्रारम्भिक शिक्षा को केवल राज्य के नीति-निर्देशक लक्ष्य से आगे बढ़ाकर बच्चों का मौलिक अधिकार बना दिया।
प्रश्न 34. भारतीय शिक्षा में लॉर्ड कर्जन के योगदान का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
लॉर्ड कर्जन ने भारतीय शिक्षा के प्रशासन, गुणवत्ता, निरीक्षण एवं शिक्षक-प्रशिक्षण में सुधार के लिए अनेक कदम उठाए।
उसके प्रमुख योगदान निम्नलिखित हैं—
- शिमला शिक्षा सम्मेलन, 1901: भारतीय शिक्षा की स्थिति एवं सुधारों पर विचार के लिए सम्मेलन आयोजित किया।
- प्राथमिक शिक्षा: प्राथमिक शिक्षा के विस्तार एवं सरकारी अनुदान में वृद्धि पर बल दिया।
- मातृभाषा: प्राथमिक स्तर पर स्थानीय अथवा मातृभाषा को महत्व दिया।
- शिक्षक-प्रशिक्षण: प्रशिक्षित शिक्षकों एवं प्रशिक्षण संस्थाओं की गुणवत्ता सुधारने पर बल दिया।
- विद्यालय निरीक्षण: विद्यालयों के निरीक्षण, मान्यता एवं प्रशासन को अधिक प्रभावी बनाया।
- भारतीय विश्वविद्यालय आयोग, 1902: विश्वविद्यालयी शिक्षा की स्थिति का अध्ययन करने हेतु आयोग गठित किया।
- भारतीय विश्वविद्यालय अधिनियम, 1904: विश्वविद्यालयों के प्रशासन, शिक्षण एवं सम्बद्धता व्यवस्था में सुधार किए।
कर्जन की नीतियों ने शिक्षा की गुणवत्ता एवं प्रशासन पर ध्यान बढ़ाया, किन्तु विश्वविद्यालयों पर सरकारी नियन्त्रण बढ़ाने के कारण उसकी आलोचना भी की गई।
प्रश्न 35. राष्ट्रीय शिक्षा नीति 1986 के प्रमुख बिन्दुओं का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 1986 का उद्देश्य शिक्षा को समानता, राष्ट्रीय विकास, सामाजिक न्याय एवं आधुनिकता का प्रभावी साधन बनाना था।
इसके प्रमुख बिन्दु—
- प्रारम्भिक शिक्षा का सार्वभौमीकरण: सभी बच्चों के लिए पहुँच, नामांकन, ठहराव एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करना।
- ऑपरेशन ब्लैकबोर्ड: प्राथमिक विद्यालयों में न्यूनतम आवश्यक भवन, शिक्षक एवं शिक्षण-सामग्री की व्यवस्था।
- महिला शिक्षा: शिक्षा को महिलाओं की समानता एवं सशक्तिकरण का साधन बनाना।
- वंचित वर्ग: अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अल्पसंख्यकों एवं अन्य वंचित समूहों की शिक्षा पर विशेष ध्यान।
- नवोदय विद्यालय: ग्रामीण क्षेत्रों के प्रतिभाशाली बच्चों के लिए आवासीय विद्यालयों की स्थापना।
- प्रौढ़ शिक्षा: निरक्षरता उन्मूलन एवं सतत् शिक्षा का विस्तार।
- व्यावसायिक शिक्षा: माध्यमिक स्तर पर रोजगारोन्मुख एवं व्यावसायिक पाठ्यक्रमों का विस्तार।
- शिक्षक शिक्षा: शिक्षक-प्रशिक्षण की गुणवत्ता सुधारने तथा जिला स्तर पर DIET स्थापित करने पर बल।
- प्रारम्भिक बाल्यावस्था देखभाल: छोटे बच्चों के पोषण, देखभाल एवं पूर्व-प्राथमिक विकास पर ध्यान।
- बाल-केन्द्रित शिक्षा: गतिविधि, अनुभव और बालक की आवश्यकताओं पर आधारित शिक्षण को प्रोत्साहन।
इस नीति को आगे 1992 में संशोधित किया गया और इसके क्रियान्वयन के लिए Programme of Action, 1992 प्रस्तुत किया गया।
प्रश्न 36. शिक्षा के क्षेत्र में प्राच्य-पाश्चात्य विवाद का सविस्तार वर्णन कीजिए।
उत्तर:
प्राच्य-पाश्चात्य विवाद ब्रिटिशकालीन भारत में इस प्रश्न को लेकर उत्पन्न हुआ कि भारतीयों को शिक्षा किस भाषा में और किस प्रकार का ज्ञान दिया जाए। यह विवाद 1813 के चार्टर एक्ट के बाद अधिक स्पष्ट हुआ।
प्राच्यवादी विचारधारा—
- संस्कृत, अरबी एवं फारसी जैसी प्राच्य भाषाओं को संरक्षण दिया जाए।
- भारतीय साहित्य, दर्शन, धर्म एवं पारम्परिक ज्ञान की शिक्षा को प्रोत्साहित किया जाए।
- 1813 में निर्धारित शिक्षा-धन का उपयोग प्राच्य विद्या एवं विद्वानों के संरक्षण में किया जाए।
पाश्चात्यवादी विचारधारा—
- अंग्रेजी भाषा को शिक्षा का प्रमुख माध्यम बनाया जाए।
- भारतीयों को आधुनिक पाश्चात्य विज्ञान, साहित्य एवं दर्शन की शिक्षा दी जाए।
- सरकारी धन आधुनिक अंग्रेजी शिक्षा के प्रसार पर व्यय किया जाए।
इस विवाद में लॉर्ड मैकाले ने 1835 के अपने विवरण-पत्र में पाश्चात्य शिक्षा एवं अंग्रेजी भाषा का समर्थन किया। इसके बाद लॉर्ड विलियम बैंटिक ने 1835 में अंग्रेजी एवं पाश्चात्य ज्ञान को सरकारी संरक्षण देने का निर्णय किया।
इस प्रकार प्राच्य-पाश्चात्य विवाद ने भारत में आधुनिक अंग्रेजी शिक्षा की दिशा निर्धारित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
प्रश्न 37. प्राथमिक विद्यालयों में विद्यालय प्रबन्ध समिति के गठन एवं कार्यों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
विद्यालय प्रबन्ध समिति (School Management Committee—SMC) का गठन शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 तथा उत्तर प्रदेश RTE नियम, 2011 के अन्तर्गत विद्यालय एवं समुदाय की सहभागिता सुनिश्चित करने के लिए किया जाता है।
उत्तर प्रदेश में गठन—
- समिति में कुल 15 सदस्य होते हैं।
- इनमें 11 सदस्य बच्चों के माता-पिता अथवा अभिभावक होते हैं।
- कम-से-कम 50 प्रतिशत सदस्य महिलाएँ होती हैं।
- अभिभावक सदस्यों में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग एवं कमजोर वर्ग का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जाता है।
- शेष चार सदस्यों में स्थानीय प्राधिकारी का निर्वाचित सदस्य, ANM, लेखपाल तथा प्रधानाध्यापक/वरिष्ठ शिक्षक सम्मिलित होते हैं।
- समिति का प्रत्येक दो वर्ष में पुनर्गठन किया जाता है।
प्रमुख कार्य—
- विद्यालय के कार्य एवं शिक्षकों की नियमितता की निगरानी करना।
- सभी बच्चों के नामांकन, उपस्थिति एवं ठहराव को सुनिश्चित करने में सहयोग करना।
- विद्यालय विकास योजना तैयार करना।
- विद्यालय को प्राप्त अनुदानों एवं संसाधनों के उपयोग की निगरानी करना।
- विद्यालय में आवश्यक मानकों एवं सुविधाओं की उपलब्धता की निगरानी करना।
- दिव्यांग एवं विद्यालय से बाहर बच्चों की पहचान एवं शिक्षा में सहयोग करना।
- मध्याह्न भोजन कार्यक्रम की निगरानी करना।
- विद्यालय, अभिभावकों एवं समुदाय के बीच सहयोग बढ़ाना।
इस प्रकार SMC विद्यालय में सामुदायिक सहभागिता, उत्तरदायित्व एवं गुणवत्तापूर्ण प्रबन्ध को मजबूत करती है।
प्रश्न 38. राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा 2005 पर टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा (NCF), 2005 NCERT द्वारा विकसित विद्यालयी शिक्षा की महत्वपूर्ण रूपरेखा है। इसका उद्देश्य शिक्षा को बाल-केन्द्रित, जीवन से जुड़ी, समझ-आधारित एवं तनावमुक्त बनाना है।
NCF-2005 के पाँच प्रमुख मार्गदर्शक सिद्धान्त हैं—
- ज्ञान को विद्यालय के बाहर के जीवन से जोड़ना।
- अधिगम को रटन्त प्रणाली से मुक्त करना।
- पाठ्यचर्या को केवल पाठ्यपुस्तक तक सीमित न रखना।
- परीक्षा को अधिक लचीला बनाकर कक्षा-जीवन से जोड़ना।
- लोकतांत्रिक व्यवस्था के भीतर संवेदनशील एवं व्यापक पहचान विकसित करना।
NCF-2005 में बालक को निष्क्रिय ज्ञान-ग्राही न मानकर सक्रिय ज्ञान-निर्माता माना गया है। इसमें गतिविधि, खोज, अनुभव, संवाद, स्थानीय ज्ञान, समावेशिता, शान्ति, पर्यावरण एवं लैंगिक समानता को भी महत्व दिया गया है।
इस प्रकार NCF-2005 ने विद्यालयी शिक्षा को समझ-आधारित, बाल-केन्द्रित एवं जीवनोपयोगी बनाने की दिशा प्रदान की।
प्रश्न 39. जिला प्राथमिक शिक्षा कार्यक्रम की रणनीतियों के विषय में संक्षेप में लिखिए।
उत्तर:
जिला प्राथमिक शिक्षा कार्यक्रम (District Primary Education Programme—DPEP) 1994 में प्राथमिक शिक्षा के सार्वभौमीकरण एवं शैक्षिक असमानताओं को कम करने के लिए प्रारम्भ किया गया। इसकी योजना जिला-विशिष्ट एवं विकेन्द्रीकृत दृष्टिकोण पर आधारित थी।
इसकी प्रमुख रणनीतियाँ—
- जिला-विशिष्ट नियोजन: स्थानीय शैक्षिक समस्याओं एवं आवश्यकताओं के आधार पर योजना तैयार करना।
- विकेन्द्रीकरण: जिला एवं स्थानीय स्तर पर नियोजन, प्रबन्ध एवं निर्णय क्षमता बढ़ाना।
- सार्वभौमिक पहुँच: विद्यालय-विहीन एवं पिछड़े क्षेत्रों में प्राथमिक शिक्षा की सुविधा बढ़ाना।
- नामांकन एवं ठहराव: विद्यालय से बाहर बच्चों को शिक्षा से जोड़ना तथा ड्रॉपआउट कम करना।
- समानता: बालिकाओं, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति एवं वंचित समूहों की शैक्षिक असमानता कम करना।
- गुणवत्ता सुधार: पाठ्यक्रम, शिक्षण-सामग्री, मूल्यांकन एवं अधिगम उपलब्धि में सुधार करना।
- शिक्षक-प्रशिक्षण: शिक्षकों की व्यावसायिक दक्षता एवं बाल-केन्द्रित शिक्षण क्षमता बढ़ाना।
- सामुदायिक सहभागिता: अभिभावकों एवं स्थानीय समुदाय को विद्यालयी विकास से जोड़ना।
- निरन्तर निगरानी: शैक्षिक उपलब्धियों एवं कार्यक्रमों के क्रियान्वयन का नियमित मूल्यांकन करना।
प्रश्न 40. SOPT का पूरा नाम लिखते हुए, इसके उद्देश्यों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
SOPT का पूरा नाम Special Orientation Programme for Primary Teachers है। इसे प्राथमिक शिक्षकों के व्यापक सेवाकालीन अभिविन्यास के लिए 1993-94 से संचालित किया गया।
इसके प्रमुख उद्देश्य—
- प्राथमिक शिक्षकों को बाल-केन्द्रित एवं गतिविधि-आधारित शिक्षण अपनाने के लिए प्रशिक्षित करना।
- ऑपरेशन ब्लैकबोर्ड के अन्तर्गत विद्यालयों को दी गई शिक्षण-अधिगम सामग्री का प्रभावी उपयोग करना सिखाना।
- न्यूनतम अधिगम स्तर (MLL) से सम्बन्धित दक्षताओं की प्राप्ति के लिए शिक्षकों को तैयार करना।
- शिक्षण को अधिक क्रियात्मक, रोचक एवं विद्यार्थी की आवश्यकताओं के अनुरूप बनाना।
- अधिगम उपलब्धियों के मूल्यांकन एवं उपचारात्मक शिक्षण की क्षमता विकसित करना।
- प्राथमिक शिक्षकों के ज्ञान एवं व्यावसायिक दक्षताओं का सतत् विकास करना।
इस प्रकार SOPT का उद्देश्य प्राथमिक स्तर पर शिक्षक की कार्यकुशलता बढ़ाकर शिक्षण-अधिगम की गुणवत्ता में सुधार करना था।
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