बहुविकल्पीय प्रश्न
प्रश्न 1. निम्न में से कौन-सा अनुच्छेद अल्पसंख्यक वर्गों के हितों के संरक्षण से सम्बन्धित है?
(a) अनुच्छेद 45
(b) अनुच्छेद 21
(c) अनुच्छेद 29 (1)
(d) अनुच्छेद 17
उत्तर: (c) : अनुच्छेद 29 (1) अल्पसंख्यक वर्गों के हितों के संरक्षण से सम्बन्धित है। अनुच्छेद 29 यह कहता है, कि धर्म, मूलवंश, जाति, भाषा या इनमें से किसी के आधार पर कोई भेद-भाव नहीं किया जायेगा।
प्रश्न 2. 6-14 वर्ष तक के बच्चों की निःशुल्क व अनिवार्य शिक्षा को 'मौलिक अधिकार' किस संविधान संशोधन द्वारा बनाया गया?
(a) 82वाँ
(b) 85वाँ
(c) 86वाँ
(d) 87वाँ।
उत्तर: (c) : 86 वाँ संविधान संशोधन अधिनियम, 2002 ने भारत के संविधान में अनुच्छेद 21-ए को शामिल किया। ताकि 6 से 14 वर्ष की आयु के सभी बच्चों को मौलिक अधिकार के रूप में मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा प्रदान की जा सके।
प्रश्न 3. केन्द्रीय सलाहकार बोर्ड किसके नाम से जाना जाता है?
(a) बेसिक शिक्षा योजना के नाम से
(b) सार्जेण्ट योजना के नाम से
(c) हण्टर कमीशन के नाम से
(d) हांग समिति के नाम से।
उत्तर: (b) : केन्द्रीय सलाहकार बोर्ड ने शैक्षिक विकास पर एक रिपोर्ट तैयार की जिसे सार्जेंट प्लान ऑफ एजुकेशन के नाम से जाना जाता है। 1944 की सार्जेंट शिक्षा योजना भारत में शिक्षा को आगे बढ़ाने के लिए अंग्रेजो द्वारा किये गये कई कार्यों में से एक थी।
प्रश्न 4. उच्च अध्ययन शिक्षा संस्थान कहाँ स्थित है?
(a) लखनऊ में
(b) दिल्ली में
(c) वाराणसी में
(d) प्रयागराज में।
उत्तर: (d) : उच्च अध्ययन शिक्षा संस्थान प्रयागराज में स्थित है।
प्रश्न 5. शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 कब लागू हुआ?
(a) मार्च 2010
(b) अप्रैल 2010
(c) जुलाई 2010
(d) मई 2010
उत्तर: (b) : शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 1 अप्रैल 2010 को लागू हुआ।
प्रश्न 6. निम्न आयोगों का सही क्रम बताइए-
(a) हण्टर आयोग
(b) राधाकृष्णन आयोग
(c) वुड डिस्पैच
(d) कोठारी आयोग
उत्तर: (c) : वुड डिस्पैच 1854
हण्टर आयोग 1882
राधाकृष्णन आयोग 1949
कोठारी आयोग 1964
प्रश्न 7. उत्तर प्रदेश में मिड-डे-मील योजना कब लागू की गई?
(a) 11 सितम्बर, 2004
(b) 1 सितम्बर, 2004
(c) 29 सितम्बर, 2004
(d) 14 सितम्बर, 2004
उत्तर: (b) : मिड-डे-मील योजना 1 सितम्बर, 2004 में लागू की गयी।
प्रश्न 8. कस्तूरबा गाँधी बालिका विद्यालय योजना भारत सरकार द्वारा कब प्रारम्भ की गई?
(a) 2004
(b) 2005
(c) 2006
(d) 2007
उत्तर: (a) : कस्तूरबा गाँधी बालिका विद्यालय (के.जी.बी.वी.) योजना भारत सरकार द्वारा अगस्त, 2004 में उच्च प्राथमिक स्तर पर आवासीय विद्यालयों की स्थापना के लिए शुरू की गयी थी। यह योजना मुख्य रूप से अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ावर्ग और कठिन क्षेत्रों में अल्पसंख्यकों के लिए थी।
प्रश्न 9. 'जिला प्राथमिक शिक्षा कार्यक्रम' की क्या विशेषता है?
(a) शिक्षा में सबकी भागीदारी
(b) शिक्षा में बराबरी पर बल
(c) नये शैक्षणिक प्रयोग
(d) उपर्युक्त सभी।
उत्तर: (d) : जिला प्राथमिक शिक्षा कार्य क्रम की विशेषताएँ निम्नलिखित हैं-
- शिक्षा में सबकी भागीदारी
- शिक्षा में बराबरी पर बल
- नये शैक्षणिक प्रयोग
- सशक्तिकरण और क्षमता निर्माण
प्रश्न 10. अध्यापक शिक्षा हेतु नियामक संस्था है-
(a) NCTE
(b) NCERT
(c) CTE
(d) MHRO
उत्तर: (a) : अध्यापक शिक्षा हेतु नियामक संस्था NCTE है। NCTE का पूर्ण रूप National Council For Teacher Education.
प्रश्न 11. राष्ट्रीय पाठ्यचर्या, 2005 के प्रारम्भ का अंश रबीन्द्रनाथ टैगोर के किस निबन्ध से लिया गया?
(a) सभ्यता और संस्कृति
(b) सभ्यता और प्रगति
(c) सभ्यता और समाज
(d) सभ्यता और मानव।
उत्तर: (b) : राष्ट्रीय पाठ्यचर्या, 2005 के प्रारम्भ का अंश रबीन्द्रनाथ टैगोर के 'सभ्यता और प्रगति' निबन्ध से लिया गया है।
प्रश्न 12. 1992 में गठित यशपाल समिति किससे सम्बन्धित है?
(a) स्कूली छात्रों के बोझ को कम करने से
(b) उच्च शिक्षा में गुणवत्ता से
(c) व्यवसायिक शिक्षा से
(d) तकनीकी शिक्षा से।
उत्तर: (a) : 1992 में गठित यशपाल समिति का सम्बन्ध निम्नलिखित से है-
- गणित को रटने के बजाय समझाना।
- स्कूली छात्रों के बोझ को कम करना।
- भाषा को जीवन से जोड़कर पढ़ाना।
- प्राथमिक स्तर पर विज्ञान की पुस्तकें न होना।
प्रश्न 13. 'छनाई का सिद्धान्त' किसके द्वारा प्रतिपादित किया गया?
(a) विलियम वुड
(b) लॉर्ड कर्जन
(c) लॉर्ड मैकाले
(d) माइकल सैडलर।
उत्तर: (c) : 'छनाई का सिद्धान्त' लार्ड मैकाले द्वारा प्रतिपादित किया गया। एक ऐसा सिद्धान्त जो यह मानता था कि ज्ञान शिक्षित वर्गों से जनता तक पूर्व के स्वतन्त्र प्रयासों के माध्यम से प्रसारित होगा। छनाई से तात्पर्य किसी द्रव का छन-छनकर नीचे जाने से है। शिक्षा के क्षेत्र में छनाई (निस्पंदन) से तात्पर्य समाज के उच्च वर्ग को दी गयी शिक्षा का कालान्तर में निम्न वर्ग तक पहुँच जाना।
प्रश्न 14. नवोदय विद्यालय की स्थापना किसकी संस्तुति पर की गई?
(a) कोठारी आयोग
(b) माध्यमिक शिक्षा आयोग
(c) नई शिक्षा नीति (1986)
(d) यशपाल समिति।
उत्तर: (c) : नवोदय विद्यालय की स्थापना नई शिक्षा नीति (1986) की संस्तुति पर की गयी।
प्रश्न 15. जब कोई बालक किसी भी अवस्था में प्राथमिक शिक्षा पूर्ण किये बिना ही विद्यालय छोड़कर चला जाता है, तो यह कहलाता है-
(a) अवरोध
(b) पृथक्करण
(c) अपव्यय
(d) विभाजन।
उत्तर: (c) : जब कोई बालक किसी भी अवस्था में प्रारम्भिक शिक्षा पूर्ण किये बिना ही विद्यालय छोड़कर का चला जाता है, अपव्यय कहलाता है। जब कोई बालक एक ही कक्षा में एक से अधिक बार अनुत्तीर्ण हो जाता है या एक ही कक्षा में एक वर्ष से अधिक रहता है, तो वह अवरोधन कहलाता है।
अति लघु उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 16. भारतीय संविधान के अनुच्छेद 51क के बारे में आप क्या जानते हैं?
उत्तर: भारतीय संविधान का अनुच्छेद 51 क-इसमें भारतीय नागरिकों के 11 मौलिक कतों का वर्णन है। यह भारत के सभी लोगों में समरसता और समान भ्रातृत्व की भावना के निर्माण का उपबंध करता है। भारतयी संविधान में मौलिक कतों की अवधारणा तत्कालीन USSR के संविधान से प्रेरित है।
प्रश्न 17. वुड का घोषणा पत्र 1954 के शिक्षा सम्बन्धी उद्देश्य क्या थे?
उत्तर: वुड का घोषणा पत्र 1954- इसे भारतीय शिक्षा का 'मैग्नाकार्टा' भी कहा जाता है। इसमें पाश्चात्य शिक्षा के प्रसार को सरकार ने अपना उद्देश्य बनाया। शिक्षा को अंग्रेजी भाषा के माध्यम से दिये जाने पर बल दिया गया परन्तु साथ ही देशी भाषा के विकास को भी महत्व दिया गया। इस घोषणा पत्र में सहायता अनुदान दिये जाने पर भी बल दिया गया।
प्रश्न 18. 'हण्टर आयोग' के दो कार्य लिखिए।
उत्तर: हण्टर आयोग के दो कार्य निम्नलिखित हैं -
- प्राथमिक शिक्षा की समीक्षा करना।
- द्वितीयक शिक्षा स्तर की समीक्षा करना।
प्रश्न 19. राष्ट्रीय स्तर पर शिक्षा के कौन-से अभिकरण हैं?
उत्तर: राष्ट्रीय स्तर पर शिक्षा के अभिकरण समस्त जीवन काल के दौरान, मनुष्य कई संस्थाओं के सम्पर्क में आते हैं। वे इन संस्थाओं के माध्यम से शैक्षिक अनुभवों की प्राप्ति करते हैं। इन संस्थाओं को शिक्षा के अभिकरण कहते हैं। शिक्षा के इन अभिकरणों को परिवार, विद्यालय, समुदाय, राज्य, मीडिया आदि में वर्गीकृत किया जा सकता है।
प्रश्न 20. शैक्षिक उन्नयन में ब्लॉक संसाधन केन्द्रों की क्या भूमिका है?
उत्तर: शैक्षिक उन्नयन में ब्लॉक संसाधन केन्द्रों की भूमिका ब्लॉक के समस्त माध्यमिक/ उच्च माध्यमिक विद्यालयों में अध्ययनरत विद्यार्थियों के लिए निःशुल्क पाठ्य पुस्तकें संबंधित विद्यालयों को वितरित करने का कार्य ही शैक्षिक उन्नयन में ब्लॉक संसाधन केन्द्रों की भूमिका है।
प्रश्न 21. लॉर्ड कर्जन ने प्राथमिक स्तरीय शिक्षा में क्या-क्या सुधार किये ?
उत्तर: लॉर्ड कर्जन का प्राथमिक स्तरीय शिक्षा में सुधार- लार्ड कर्जन ने निम्नलिखित सुधार किये -
- भारतीय भाषाओं को मुख्य स्थान दिया जाये।
- प्राथमिक शिक्षा की अनुदान राशि बढ़ायी जाये।
- पाठ्यक्रम में सुधार किया जाये।
- प्राथमिक विद्यालय के विद्यार्थियों को शारीरिक व्यायाम करने के लिए प्रशिक्षण विद्यालयों की स्थापना की जानी चाहिए।
- अध्यापकों के प्रशिक्षण को सही व कुशल व्यवस्था करने के लिए प्रशिक्षण विद्यालयों की स्थापना की जानी चाहिए।
- जिन विद्यालयों में सुयोग्य अध्यापक हैं वहाँ किडरगार्डन तथा वस्तु पद्धति का प्रयोग किया जाना चाहिए।
प्रश्न 22. प्रोग्राम ऑफ एक्शन के कौन-कौन से लक्ष्य निर्धारित किये गये?
उत्तर: प्रोग्राम ऑफ एक्शन के लक्ष्य निम्नलिखित हैं-
- इसमें मौजूदा नीति ढाँचे में कई महत्वपूर्ण संशोधन और परिवर्धन पेश किये गए जिसका लक्ष्य सभी स्तरों पर शिक्षा की गुणवत्ता और पहुँच को बढ़ाना है।
- इसमें नारी समानता के लिए शिक्षा सम्बन्धी योजनाओं को प्रस्तुत किया गया।
- इसमें पिछड़े वर्गों को शिक्षा, अल्पसंख्यको, की शिक्षा, विकलांगों की शिक्षा के लिए सतत् प्रयास किया गया।
- प्रोग्राम आफ एक्शन के लक्ष्य में प्रौढ़ एवं सतत् शिक्षा और पूर्व बाल्यकाल परिचर्या संबंधी योजनाओं को प्रस्तुत किया गया है।
प्रश्न 23. ऑपरेशन ब्लैकबोर्ड परियोजना क्या है?
उत्तर: ऑपरेशन ब्लैक बोर्ड योजना यह योजना भारत सरकार द्वारा सन् 1987 में आरम्भ की गई। यह शिक्षा नीति से संबंधित थी। इसके अन्तर्गत प्राथमिक विद्यालयों का विकास करना था जिससे बच्चों को अच्छी शिक्षा मिल सके। ऑपरेशन ब्लैक बोर्ड योजना का मुख्य लक्ष्य शिक्षा के सपनों को साकार करना था तथा प्राथमिक शिक्षा के क्षेत्र में लड़कियों को विद्यालय तक पहुँचाना था और शिक्षा की गुणवत्ता में सही तरह से सुधार लाना था।
प्रश्न 24. स्कूल रेंडीनेस प्रोग्राम क्या है?
उत्तर: स्कूल रेंडीनेस प्रोग्राम- यह एक ऐसा कार्यक्रम है जिसका उद्देश्य बच्चों को स्कूल में सीखने के लिए आवश्यक कौशल, ज्ञान और दृष्टिकोण प्रदान करना है। यह निपुण भारत मिशन का एक हिस्सा है। यह राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 पर आधारित है। इस कार्यक्रम में 12 सप्ताह की गतिविधियाँ शामिल है। जो बच्चों को औपचारिक शिक्षा के लिए तैयार करने और उनकी भाषा, साक्षरता, संख्या और वैज्ञानिक सोच कौशल विकसित करने के लिए निर्मित किया गया है। यह कार्यक्रम भारत के विभिन्न राज्यों जैसे उत्तर प्रदेश और झारखण्ड में लागू किया गया है।
प्रश्न 25. शिक्षा को संविधान में समवर्ती सूची में रखने का क्या उद्देश्य है?
उत्तर: शिक्षा को संविधान में समवर्ती सूची में रखने का उद्देश्य - सन् 1976 से पहले शिक्षा मुख्य रूप से राज्यों के अधिकार में थी। यह अनुभव किया गया शिक्षा के क्षेत्र में जिस स्तर पर विकास और प्रसार किया जाना चाहिए था, वह नहीं हो पाया। अतः शिक्षा को समवर्ती सूची में रखा जाये ताकि केन्द्र भी इस सन्दर्भ में अपनी वांछित भूमिका निभा सके। शिक्षा को समवर्ती सूची में लाने का अर्थ है कि केन्द्र तथा राज्य सरकारें दोनों ही इस क्षेत्र में नीतियाँ निर्धारित कर सकती हैं, और उसके अनुसार शिक्षा के परिमाणात्मक तथा गुणात्मक विकास में वांछित कार्य कर सकती है। किसी नीति के कार्यान्वयन में कोई मतभेद है तो केन्द्र सरकार का निर्णय सर्वोपरि माना जायेगा।
प्रश्न 26. स्कूल चलो अभियान कब प्रारम्भ हुआ?
उत्तर: स्कूल चलो अभियान का प्रारम्भ उत्तर प्रदेश के सबसे कम साक्षरता दर वाले जिले श्रावस्ती में "स्कूल चलो अभियान" मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा 4 अप्रैल, 2022 को शुरू किया गया। इसका लक्ष्य निम्न और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में पूर्ण नामांकन का आश्वासन देना है। जुलाई, 1996 में स्कूल चलो अभियान का प्रारम्भ किया गया था। यह अभियान कक्षा 1 से 8 तक के बच्चों को विद्यालय की ओर आकर्षित करने के लिए शुरू किया गया था।
प्रश्न 27. राष्ट्रीय बालश्रम परियोजना क्या है?
उत्तर: राष्ट्रीय बाल श्रम योजना यह योजना सातवीं पंचवर्षीय योजना के तहत 14 अगस्त, 1987 को शुरू हुई। खतरनाक व्यवसायों और प्रक्रियाओं से 14 वर्ष से कम उम्र के बच्चों की पहचान करने और उन्हें हटाने में सरकार अग्रणी भूमिका निभाती है। राष्ट्रीय बाल श्रम परियोजना भारत सरकार के श्रम मंत्रालय के समग्र मार्गदर्शन और दायरे में सरकार, जिला प्रशासन और नागरिक समाजों, प्रवर्तन एजेंसियों, गैर सरकारी संगठनों और शिक्षाविदों के सहयोगात्मक प्रयास द्वारा कार्यान्वित की जाती है।
प्रश्न 28. सी.टी.ई. किस स्तर के शिक्षकों को तैयार करता है?
उत्तर: सी.टी.ई. माध्यमिक शिक्षा के लिए विभिन्न शिक्षक तैयार करता है। यह उच्च माध्यमिक स्तर के शिक्षक को भी तैयार करता है।
प्रश्न 29. 'मिड-डे-मील' योजना को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: 'मिड-डे-मील' योजना-मध्याह्न भोजन योजना (शिक्षा मंत्रालय के तहत) एक केन्द्र प्रायोजित योजना है जिसकी शुरूआत वर्ष 1995 में की गयी थी। यह प्राथमिक शिक्षा के सार्वभौमिकरण के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए विश्व का सबसे बड़ा विद्यालय भोजन कार्यक्रम है।
प्रश्न 30. 'बिना बोझ के शिक्षा' में कितने प्रकार के बोझ, बच्चों में होने की बात कही गयी है?
उत्तर: 'बिना बोझ के शिक्षा' में निम्नलिखित दो प्रकार के बोझ की बात की गयी है-
- भौतिक बोझ
- मानसिक बोझ।
लघु उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 31. राष्ट्रीय साक्षरता मिशन पर संक्षिप्त टिप्पणी कीजिए।
उत्तर: राष्ट्रीय साक्षरता मिशन-राष्ट्रीय साक्षरता मिशन की स्थापना 5 मई, 1988 को की गई थी। यह मिशन भारत में निरक्षरता उन्मूलन के लिए किये जाने वाले प्रयासों की एक महत्वपूर्ण कड़ी है। इसकी स्थापना के बाद देश में साक्षरता की गति में तेजी आ गई थी। सन् 2011 की जनगणना में भारत में साक्षरता का प्रतिशत पहले की तुलना में अधिक प्रदर्शित किया गया है। सन् 1991 में साक्षरता का जो प्रतिशत 52.21 था, वह 2011 में बढ़कर 74.04 हो गया। राष्ट्रीय साक्षरता मिशन की स्थापना के बाद ही केरल में पूर्ण साक्षरता का लक्ष्य प्राप्त कर लिया गया। राष्ट्रीय साक्षरता मिशन के द्वारा अब तक लगभग 9 करोड़ व्यक्तियों को साक्षर बनाया जा चुका है। तथा इसके कार्यक्रम देश के 561 जिलों में संचालित हो रहे हैं। भारत सरकार के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के इण्डिया 2002 के प्रकाशन के अनुसार विभिन्न जिलों में से 166 में पूर्ण साक्षरता अभियान चलाया गया। यह निश्चित रूप से कहा जा सकता है कि राष्ट्रीय साक्षरता मिशन के द्वारा देश में निरक्षर व्यक्तियों को साक्षर बनाने में पर्याप्त प्रगति की गई है।
राष्ट्रीय साक्षरता मिशन के उद्देश्य-
- सतत् शिक्षा योजना की सम्पूर्ण सफलता के लिए साक्षरता कार्यक्रमों को प्राप्त करना तथा लोगों को लक्ष्य सतत् अधिगम प्रदान करना।
- सामाजिक और पेशागत विकास के प्रोत्साहन के लिए क्षेत्रीय मांग की जरूरतों के अनुसार अवसर उपलब्ध कराना।
- व्यावसायिक कौशल की खोज करना और मूल साक्षरता, साक्षरता कौशल में सुधार वैकल्पिक शिक्षा कार्यक्रम करना।
- अनवरत शिक्षा के केन्द्रों की स्थापना करना जिससे नव साक्षर लोगों को आगे अधिगम के अवसर उपलब्ध करना।
शिक्षा कार्यक्रम के अन्तर्गत अब तक लगभग 400 जिले सम्मिलित किये जा चुके हैं।
प्रश्न 32. शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 के क्रियान्वयन में समस्याएँ बताइए।
उत्तर: शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 के क्रियान्वयन में निम्नलिखित समस्याएँ हैं-
- भाषायी एवं अध्ययन सम्बन्धी मुद्दे- अपवंचित वर्ग के बच्चों के लिए भाषायी एवं अध्ययन सम्बन्धी मुद्दा प्रमुख है। भारत के ऐसे कई क्षेत्र खासकर उत्तर-पूर्व भारत में एक ही जनपद में कई भाषा एवं बोलियां प्रयोग में लायी जाती हैं। ऐसे क्षेत्रों में भाषा एवं अध्ययन सम्बन्धी समस्या लगातार बनी हुई है। सम्बन्धित मातृ भाषा में पाठ्य-पुस्तकें एवं शिक्षक समुचित रूप से उपलब्ध नहीं हो पा रहे हैं, जिससे ऐसे क्षेत्रों में रहने वाले अपवंचित वर्ग के बच्चे प्रभावित हो रहे हैं। शिक्षा अधिकार अधिनियम-2009 में उल्लिखित मातृ-भाषा में शिक्षा का उल्लंघन हो रहा है।
- स्थानीय सरकारों की भूमिका- शिक्षा अधिकार अधिनियम-2009 के क्रियान्वयन में स्थानीय सरकारों की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण है। सामाजिक-आर्थिक स्थिति से स्थानीय सरकार बहुत अच्छे ढंग से परिचित होती है जो ग्रामीण शिक्षा एवं विकास के लिए कार्य कर रही होती है। इन स्थानीय क्षेत्र में रहने वाले अपवंचित वर्ग के बच्चों के सम्बन्ध में स्थानीय सरकारों की जिम्मेदारी है कि ऐसे सभी बच्चों को विद्यालय तक पहुँचाकर उनकी शिक्षा को पूर्ण कराएं। विद्यालय छोड़ने की सर्वाधिक दर अपवंचित वर्ग के बच्चों की ही है। विद्यालय छोड़ने की समस्या का हल बहुत हद तक स्थानीय सरकारों द्वारा किया जा सकता है। लेकिन ये स्थानीय सरकारें असफल साबित हो रही है।
- सीटों सम्बन्धी मुद्दा- इस अधिनियम में प्रावधान किया गया है कि सामाजिक एवं आर्थिक रूप से अक्षम बच्चों के लिए 25 सींटे निजी विद्यालयों में आरक्षित की जाएंगी यह प्रावधान एक बेहतर सामाजिक व्यवस्था के निर्माण और विकास में मदद कर सकता है। आज के संदर्भ में इस प्रावधान में लूट-खसोट मची है। सरकार निजी विद्यालयों में इन 25% सीटों के लिए उपयुक्त धनराशि मुहैया करा रही है। लेकिन निजी विद्यालय इस व्यवस्था में मनमानी कर रहें है।
प्रश्न 33. 'वंचित वर्ग' से आप क्या समझते हैं?
उत्तर: वंचित से तात्पर्य है-विहीन होना या रहित होना समूह का तात्पर्य किसी वर्ग से है। अर्थात् ऐसा वर्ग या समूह उन लोगों से होता है, जो समाज की मुख्य धारा से कटे होते हैं। या जिन्हें सामाजिक जीवन की मूलभूत आवश्यकताओं से वंचित करके रखा जाता है। जिनके अधिकारों का हनन शोषित वर्ग करता है। जो आर्थिक, सामाजिक व शैक्षणिक रूप से पिछड़े हुए हैं। जो अपने जीवन-यापन के लिए आवश्यक मूलभूत आवश्यकताओं की पूर्ति भी नही कर पाते हैं। जिन्हें समाज के शोषित वर्ग के लोग अपने वर्चस्व स्थापित कर अलग-अलग कर देते हैं। ऐसे लोगों को वंचित वर्ग कहा जाता है। भारत में वंचित वर्ग मुख्यतः दलित एवं निचली जातियों तथा आदिवासी समूह के लोगों को माना जाता है। क्योंकि ऐसे लोगों को ऊँची जाति के लोगों ने समाज की मुख्यधारा से अलग कर दिया था और उनके अधिकारों का हनन भी किया था।
प्रश्न 34. विद्यालय प्रबन्ध समिति पर संक्षिप्त टिप्पणी कीजिए।
उत्तर: RTE यानि बाल शिक्षा अधिकार अधिनियम 2009 की विशेष बात यह है कि विद्यालय को अच्छे तरीकें से चलाने के लिए स्कूल में या विद्यालय में पढ़ने वाले बच्चों के माता-पिता मुख्य रूप से स्कूल में शिक्षकों से मिलकर एक विद्यालय प्रबंधन समिति (कमेटी) बनाई जाएगी यह कमेटी विद्यालय के सभी मामलों के लिए जिम्मेदार होगी। सब बच्चे पढ़े उन सभी को अच्छी शिक्षा मिले, इसके लिए जरूरी है कि बच्चों के माता-पिता स्कूल को ठीक से चलाने के लिए व विद्यालय के विकास मे सक्रिय रूप से हिस्सा लें।
- इस कमेटी के कुछ कर्त्तव्य व अधिकार होंगे।
- इस कमेटी के सदस्य साथ मिलकर स्कूल के विकास व स्कूल को सही तरीके से चलाने के लिए तथा बच्चों की उचित शिक्षा के लिए योजना बनाएंगे।
- यह कमेटी विद्यालय को एक अच्छा व आदर्श विद्यालय बनाने का हर संभव प्रयास करेगी।
- विद्यालय प्रबंधन कमेटी मिड-डे-मील सहित अन्य सुविधाओं का निरीक्षण करेगी।
- कमेटी इस बात की निगरानी करेगी कि समाज के हर वर्ग के बच्चों का पंजीकरण/नामांकन स्कूल में हो व बच्चे लगातार स्कूल मे पढ़ने आयें बच्चों का शारीरिक व मानसिक उत्पीड़न न हो।
प्रश्न 35. प्राथमिक शिक्षा हेतु शिमला सम्मेलन में क्या विचार व्यक्त किये गये थे?
उत्तर: शिमला सम्मेलन-शिक्षा सुधार के कार्यों को व्यवहारिक स्वरूप प्रदान करने के लिए लार्ड कर्जन ने सितम्बर 1901 में शिमला में एक शिक्षा सम्मेलन का आयोजन किया जिसमें प्रांतों के शिक्षा संचालकों व मिशनरियों के प्रतिनिधियों को भाग लेने के लिए बुलाया गया किन्तु भारत के एक भी प्रतिनिधि को नहीं बुलाया गया इसको देखते हुए भारतीयों में कर्जन के शिक्षा सम्बन्धी कार्यों के प्रति संदेह उत्पन्न हो गया।
- भारत में पाँच में से चार गाँवों में कोई विद्यालय नहीं है। चार में से तीन बालकों को शिक्षा प्राप्त नहीं हो पाती है और 40 में से मात्र एक बालिका शिक्षा ग्रहण कर पाती है।
- पाठ्यक्रम पूरी तरह साहित्यिक होना।
- अंग्रेजी को प्रमुख स्थान देकर भारतीय भाषाओं की उपेक्षा।
- प्राथमिक शिक्षा में भारतीय भाषाओं को स्थान नहीं।
- प्राथमिक शिक्षा पर कम ध्यान दिया जाना।
- प्राथमिक शिक्षा में अंग्रेजी का अध्ययन।
प्रश्न 36. शिक्षक शिक्षा में जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थानों की भूमिका लिखिए।
उत्तर: शिक्षक शिक्षा में जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थानों की भूमिका शिक्षा नीति में ऐसी परिस्थितियाँ बनाने की बात कही गई है। जिससे अध्यापकों को निर्माण और सृजन की ओर बढ़ने की प्रेरणा मिले राज्य में नीचे कुछ प्रारंभिक शिक्षक प्रशिक्षण संस्थाएँ हैं, जिनकी गतिविधियाँ प्री-सर्विस टीचर एजुकेशन तक सीमित है। इससे आगे बढ़कर सेवाकालीन शिक्षकों का सतत् सक्षमीकरण एवं शिक्षा के लिए लगातार अकादमिक सपोर्ट डायट की स्थापना की गई।
सेवापूर्व प्रशिक्षण शाखा-
- संस्था की विभिन्न शाखाओं के कार्यों में सहयोग प्रदान करना। सफल होने की आवश्यकता अनुसार सहायता प्रदान करना।
- शारीरिक शिक्षा से सम्बन्धित कार्यक्रमों का सम्पादन करना।
- शारीरिक एवं मानसिक रूप से दिव्यांग बच्चों की शिक्षण व्यवस्था हेतु मार्गदर्शन।
सेवाकालीन प्रशिक्षण-
- डायट में संचालित होने वाले सेवाकालीन प्रशिक्षण कार्यक्रम हेतु वार्षिक कैलेण्डर बनाना।
- डायट के बाहर आयोजित होने वाले सेवाकालीन प्रशिक्षण कार्यक्रमों हेतु संबन्धित विभाग को सहयोग।
प्रश्न 37. बाल अधिकार से आप क्या समझते हैं? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: बाल अधिकार मौलिक स्वतन्त्रता है। जिनका प्रत्येक बच्चे को आनंद लेना चाहिए। इनमें जीवन, शिक्षा, स्वास्थ्य और नुकसान से सुरक्षा का अधिकार शामिल है। ये अधिकार संयुक्त राष्ट्र द्वारा मान्यता प्राप्त हैं, और यह सुनिश्चित करने के लिए है कि प्रत्येक बच्चा सुरक्षित, स्वास्थ और पोषित वातावरण में बड़ा हो।
बाल अधिकारों का महत्व- बाल अधिकार महत्वपूर्ण है क्योंकि वे सुनिश्चित करते है कि बच्चों के साथ समान और सम्मान के साथ व्यवहार किया जाए। वे बच्चों को शोषण और दुर्व्यवहार से बचाने में मदद करते हैं। वे यह भी गारंटी देते हैं कि बच्चों को शिक्षा और स्वास्थ्य देखभाल जैसी बुनियादी सेवाओं तक पहुँच मिले।
समाज की भूमिका- बाल अधिकारों को कायम रखने में समाज में हर किसी की भूमिका होती है। माता-पिता, शिक्षकों और सरकारी अधिकारियों को কাশী सुनिश्चित करने के लिए मिलकर काम करना चाहिए कि बच्चों के अधिकारों का सम्मान और सुरक्षा हो इसमें बच्चों को सीखने, बढ़ने और आगे बढ़ने के अवसर प्रदान करना शामिल है।
प्रश्न 38. भारतीय शिक्षा में लॉर्ड कर्जन का योगदान लिखिए।
उत्तर: भारतीय शिक्षा में लॉर्ड कर्जन का योगदान-
प्राथमिक शिक्षा में-
- प्राथमिक स्तर की शिक्षण-विधियों में सुधार किया जाए और किण्डरगार्डन प्रणाली का प्रयोग किया जाए।
- प्राथमिक शिक्षा के लिए शिक्षक को दो वर्ष का प्रशिक्षण दिया जाए और उनके वेतन में वृद्धि की जाए।
- प्राथमिक शिक्षा के प्रति कम ध्यान दिया गया है और उसके प्रसार के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए अतः उसका प्रसार करना सरकार का मुख्य कर्तव्य है।
माध्यमिक शिक्षा में-
- माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षण स्तर को ऊँचा उठाने के लिए उन्हें मान्यता प्रदान करने और सहायता अनुदान स्वीकृत करने के नियम कठोर किए जाने चाहिए।
- इनके पाठ्यक्रम मे व्यवसायिक विषयों को स्थान दिया जाना चाहिए।
- सभी माध्यमिक विद्यालयों में प्रशिक्षित शिक्षक नियुक्त किए जाने चाहिए।
प्रश्न 39. स्वतंत्रता पश्चात् के किन्हीं दो शिक्षा आयोगों का संक्षिप्त परिचय दीजिए।
उत्तर: स्वतन्त्रता के पश्चात् निम्न दो शिक्षा आयोग हैं।
(i) राधाकृष्णन आयोग (1948-49)-
- भारत सरकार द्वारा 1948 में डॉ. एस. राधाकृष्णन की अध्यक्षता में गठित ।
- इसका मुख्य कार्य विश्वविद्यालयी शिक्षा की समस्याओं पर अपना विचार देना।
- इनकी मुख्य सिफारिश विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के गठन का प्रस्ताव था।
- इस सिफारिश के बाद विश्वविद्यालय अनुदान आयोग का गठन किया गया।
- यह केवल उच्च शिक्षा के लिए थी।
(ii) मुदालियर आयोग (1952)- यह माध्यमिक शिक्षा आयोग था। इसका गठन 1952 में किया गया था। इसका अध्यक्ष लक्ष्मण स्वामी मुदालियर थे।
उद्देश्य-
- माध्यमिक शिक्षा की जाँच करना।
- माध्यमिक शिक्षा के संगठन के बारे में अध्ययन।
- प्राथमिक एवं उच्च शिक्षा में सम्बन्ध।
- सभी प्रकार के विद्यालयों के आपसी सम्बन्ध के अध्ययन की रिपोर्ट देना।
प्रश्न 40. शिक्षकों के अकादमिक सर्पोट में डायट की क्या भूमिका है?
उत्तर: शिक्षकों के अकादमिक सपोर्ट में डायट की भूमिका- शिक्षा नीति में ऐसी परिस्थितियाँ बनाने की बात कही गई है जिससे अध्यापकों को निर्माण और सृजन की ओर बढ़ने की प्रेरणा मिले राज्य से नीचे कुछ प्रारम्भिक शिक्षक प्रशिक्षण संस्थाएँ हैं। जिनकी गतिविधियाँ प्री-सर्विस टीचर एजुकेशन तक सीमित हैं। इससे आगे बढ़कर सेवाकालीन शिक्षकों का सतत् सक्षमीकरण एवं शिक्षा के लिए लगातार अकादमिक सपोर्ट हेतु डायट की स्थापना हुई। प्रारम्भिक शिक्षा के सार्वजनीकरण एवं राष्ट्रीय साक्षरता मिशन के अन्तर्गत 15 से 35 आयु समूह के लिए कार्यात्मक साक्षरता के विशेष संदर्भ में प्रारम्भिक शिक्षा एवं प्रौढ़ साक्षरता के लिए बनाई गई रणनीति व कार्यक्रमों की सफलता के लिए ग्रास रूट लेवल पर अकादमिक रिर्पोट प्रदान करना।