बहुविकल्पीय प्रश्न
प्रश्न 1. एम. के. एस. पद्धति में ऊर्जा का मात्रक क्या है?
(a) कैलोरी
(b) जूल
(c) न्यूटन
(d) मिलीग्राम
उत्तर: (b) जूल
एम.के.एस. पद्धति में ऊर्जा का मात्रक जूल (J) है। जूल कार्य एवं ऊर्जा का SI मात्रक भी है।
प्रश्न 2. नासा का मुख्यालय स्थित है—
(a) आन्ध्र प्रदेश
(b) बंगलुरु
(c) यूरोपीय संघ
(d) वाशिंगटन डी. सी.
उत्तर: (d) वाशिंगटन डी. सी.
NASA (National Aeronautics and Space Administration) का मुख्यालय वाशिंगटन डी.सी., संयुक्त राज्य अमेरिका में स्थित है। यह अमेरिका की नागरिक अंतरिक्ष एवं वैमानिकी अनुसंधान एजेंसी है।
प्रश्न 3. निष्क्रिय गैस का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास है—
(a) 2,6
(b) 2,7
(c) 2,8
(d) 2,8,2
उत्तर: (c) 2,8
निऑन (Ne) एक निष्क्रिय गैस है जिसका इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 2,8 होता है। इसकी बाह्यतम कक्षा पूर्ण होने के कारण यह रासायनिक रूप से अत्यन्त कम क्रियाशील होती है।
प्रश्न 4. जल में घुलनशील विटामिन है—
(a) विटामिन-A
(b) विटामिन-D
(c) विटामिन-K
(d) विटामिन-C
उत्तर: (d) विटामिन-C
विटामिन C जल में घुलनशील विटामिन है। विटामिन B-समूह भी जल में घुलनशील होते हैं, जबकि A, D, E तथा K वसा में घुलनशील विटामिन हैं।
प्रश्न 5. तन्त्रिका कोशिकाओं की विशेषता है—
(a) ये पुनः निर्मित नहीं होती हैं
(b) इनमें केन्द्रक नहीं होता है
(c) इनकी संख्या उम्र के साथ बढ़ती है
(d) इनका आकार अनिश्चित होता है
उत्तर: (a) ये पुनः निर्मित नहीं होती हैं
परिपक्व तन्त्रिका कोशिकाएँ सामान्यतः कोशिका विभाजन नहीं करतीं और उनकी पुनर्निर्माण क्षमता अत्यन्त सीमित होती है। तन्त्रिका कोशिका के कोशिका-शरीर में केन्द्रक उपस्थित होता है, इसलिए विकल्प (b) गलत है।
अतिलघु उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 6. यान्त्रिक ऊर्जा कितने प्रकार की होती है?
उत्तर: यान्त्रिक ऊर्जा मुख्यतः दो प्रकार— गतिज ऊर्जा तथा स्थितिज ऊर्जा की होती है। यान्त्रिक ऊर्जा इन दोनों ऊर्जाओं का योग होती है।
प्रश्न 7. सौरमण्डल के आठ ग्रहों के नाम लिखिए।
उत्तर: सूर्य से दूरी के क्रम में आठ ग्रह हैं— बुध, शुक्र, पृथ्वी, मंगल, बृहस्पति, शनि, अरुण तथा वरुण।
प्रश्न 8. न्यूट्रॉन की खोज किस वैज्ञानिक ने की थी?
उत्तर: न्यूट्रॉन की खोज जेम्स चैडविक ने सन् 1932 में की थी।
प्रश्न 9. जीवाणुओं से होने वाले किन्हीं दो रोगों के नाम लिखिए।
उत्तर: जीवाणुओं से होने वाले दो रोग हैं— हैजा (Cholera) तथा मियादी बुखार/टायफाइड (Typhoid)।
प्रश्न 10. वनस्पति कोशिका एवं प्राणी कोशिका में कोई दो अन्तर लिखिए।
उत्तर: वनस्पति कोशिका में कोशिका भित्ति तथा प्लास्टिड उपस्थित होते हैं, जबकि प्राणी कोशिका में कोशिका भित्ति एवं प्लास्टिड नहीं होते हैं।
प्रश्न 11. समस्थानिक किसे कहते हैं? उदाहरण दीजिए।
उत्तर: एक ही तत्व के वे परमाणु जिनकी परमाणु संख्या समान लेकिन द्रव्यमान संख्या भिन्न होती है, समस्थानिक कहलाते हैं। उदाहरण— प्रोटियम 1 1 H तथा ड्यूटिरियम 2 1 H ।
लघुउत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 12. ऊर्जा संरक्षण का नियम क्या है?
उत्तर:
ऊर्जा संरक्षण के नियम के अनुसार ऊर्जा को न तो उत्पन्न किया जा सकता है और न नष्ट किया जा सकता है। ऊर्जा केवल एक रूप से दूसरे रूप में परिवर्तित हो सकती है। अतः किसी पृथक निकाय की कुल ऊर्जा सदैव स्थिर रहती है।
उदाहरण: गिरती हुई वस्तु में स्थितिज ऊर्जा क्रमशः गतिज ऊर्जा में परिवर्तित होती जाती है, परन्तु आदर्श स्थिति में उसकी कुल यान्त्रिक ऊर्जा स्थिर रहती है।
ऊष्मागतिकी के प्रथम नियम के रूप में इसे इस प्रकार व्यक्त किया जाता है—
ΔU = Q − W
जहाँ—
- ΔU = निकाय की आन्तरिक ऊर्जा में परिवर्तन
- Q = निकाय को दी गई ऊष्मा
- W = निकाय द्वारा किया गया कार्य
प्रश्न 13. ज्वालामुखी क्या है? ये कितने प्रकार के होते हैं? ज्वालामुखी का मानव जीवन पर क्या प्रभाव पड़ता है?
उत्तर:
ज्वालामुखी पृथ्वी की पर्पटी में स्थित वह छिद्र अथवा दरार है जिससे पृथ्वी के भीतर का मैग्मा, गैसें, राख तथा अन्य पदार्थ बाहर निकलते हैं। पृथ्वी की सतह पर निकलने वाले मैग्मा को लावा कहा जाता है।
ज्वालामुखी के प्रमुख प्रकार—
- सक्रिय ज्वालामुखी: जिनमें वर्तमान में उद्गार हो रहा हो या जिनमें पुनः उद्गार होने की प्रबल सम्भावना हो।
- सुप्त ज्वालामुखी: जो लम्बे समय से शान्त हों, परन्तु भविष्य में पुनः सक्रिय हो सकते हों।
- मृत या विलुप्त ज्वालामुखी: जिनमें भविष्य में पुनः उद्गार होने की सम्भावना अत्यन्त कम मानी जाती है।
मानव जीवन पर प्रभाव—
- लावा, राख और गैसों से जन-धन की हानि हो सकती है।
- ज्वालामुखीय राख से श्वसन सम्बन्धी समस्याएँ तथा वायु प्रदूषण हो सकता है।
- फसलें, मकान, सड़कें एवं अन्य आधारभूत संरचनाएँ नष्ट हो सकती हैं।
- ज्वालामुखीय पदार्थों से बनी मिट्टी समय के साथ अत्यन्त उपजाऊ हो सकती है।
- कुछ ज्वालामुखीय क्षेत्रों में खनिज तथा भू-तापीय ऊर्जा के उपयोग की सम्भावना होती है।
प्रश्न 14. उत्क्रमणीय तथा अनुत्क्रमणीय परिवर्तन को उदाहरण सहित समझाइए।
उत्तर:
उत्क्रमणीय परिवर्तन: ऐसे परिवर्तन जिन्हें उलटकर पदार्थ को पुनः उसकी प्रारम्भिक अवस्था में लाया जा सके, उत्क्रमणीय परिवर्तन कहलाते हैं।
उदाहरण—
- बर्फ का पिघलना और पुनः जमना।
- जल का वाष्प में बदलना और पुनः संघनित होना।
- रबर बैंड का खिंचना और छोड़ने पर पुनः मूल आकार में आना।
अनुत्क्रमणीय परिवर्तन: ऐसे परिवर्तन जिनमें पदार्थ को सामान्य परिस्थितियों में उसी प्रक्रिया को उलटकर उसकी प्रारम्भिक अवस्था में वापस नहीं लाया जा सकता, अनुत्क्रमणीय परिवर्तन कहलाते हैं।
उदाहरण—
- लकड़ी अथवा कागज का जलना।
- भोजन का पचना।
- लोहे में जंग लगना।
प्रश्न 15. अम्ल वर्षा किन दो ऑक्साइडों के वातावरणीय जल के साथ क्रिया करके बनती है?
उत्तर:
अम्ल वर्षा मुख्यतः सल्फर डाइऑक्साइड (SO2) तथा नाइट्रोजन के ऑक्साइड (NOx) के कारण होती है। ये वायुमण्डल में जल, ऑक्सीजन तथा अन्य पदार्थों से अभिक्रिया करके मुख्यतः सल्फ्यूरिक अम्ल और नाइट्रिक अम्ल बनाते हैं।
सरल रूप में—
SO2 → H2SO4
NOx → HNO3
ये अम्ल वर्षा के जल की अम्लता बढ़ाते हैं और मृदा, जलाशयों, वनस्पतियों तथा भवनों को क्षति पहुँचा सकते हैं।
प्रश्न 16. कंकाल तन्त्र के कार्य लिखिए।
उत्तर:
कंकाल तन्त्र शरीर का ढाँचा बनाता है तथा अनेक महत्वपूर्ण कार्य करता है—
- आकृति एवं सहारा: शरीर को निश्चित आकार तथा संरचनात्मक सहारा प्रदान करता है।
- सुरक्षा: खोपड़ी मस्तिष्क तथा पसलियाँ हृदय और फेफड़ों जैसे महत्वपूर्ण अंगों की रक्षा करती हैं।
- गति: हड्डियाँ, जोड़ और मांसपेशियाँ मिलकर शरीर की गति सम्भव बनाते हैं।
- मांसपेशियों का जुड़ाव: कंकाल मांसपेशियों को जुड़ने के लिए स्थान प्रदान करता है।
- रक्त कोशिकाओं का निर्माण: कुछ हड्डियों की अस्थिमज्जा में रक्त कोशिकाओं का निर्माण होता है।
- खनिजों का भण्डारण: हड्डियाँ कैल्शियम एवं फॉस्फोरस जैसे खनिजों का भण्डार होती हैं।
प्रश्न 17. मृदा अपरदन से आप क्या समझते हैं? इसके कारण एवं रोकने के उपायों पर प्रकाश डालिए।
उत्तर:
मृदा अपरदन मिट्टी की उपजाऊ ऊपरी परत का जल, वायु अथवा अन्य कारकों द्वारा हट जाना या बह जाना है। अत्यधिक मृदा अपरदन कृषि एवं पर्यावरण दोनों के लिए हानिकारक है।
मृदा अपरदन के प्रमुख कारण—
- वनों की अत्यधिक कटाई।
- अतिचराई।
- तीव्र वर्षा एवं बाढ़।
- तेज हवाएँ।
- ढाल वाली भूमि पर अनुचित जुताई।
- अवैज्ञानिक कृषि एवं भूमि उपयोग।
मृदा अपरदन रोकने के उपाय—
- वृक्षारोपण एवं वन संरक्षण करना।
- ढाल वाली भूमि पर समोच्च जुताई करना।
- पहाड़ी क्षेत्रों में सीढ़ीदार खेती अपनाना।
- तेज हवा वाले क्षेत्रों में वृक्षों की रक्षक पट्टियाँ लगाना।
- भूमि को वनस्पति आवरण से ढका रखना।
- अतिचराई को नियंत्रित करना।
- जल के अनियन्त्रित बहाव को रोकने के लिए उपयुक्त मेड़बन्दी एवं जल-संरक्षण उपाय अपनाना।
प्रश्न 18. तन्त्रिका ऊतक का नामांकित चित्र बनाइए तथा इसके कार्य के बारे में लिखिए।
उत्तर: तन्त्रिका ऊतक की संरचनात्मक एवं क्रियात्मक इकाई न्यूरॉन है। इसका नामांकित चित्र—
तन्त्रिका ऊतक के प्रमुख कार्य—
- शरीर के विभिन्न भागों से उद्दीपनों अथवा सूचनाओं को ग्रहण करना।
- तन्त्रिका आवेगों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुँचाना।
- मस्तिष्क, मेरुरज्जु और शरीर के अन्य अंगों के बीच सूचनाओं का संचार करना।
- शरीर के विभिन्न अंगों की क्रियाओं में समन्वय स्थापित करना।
- उद्दीपनों के प्रति उचित प्रतिक्रिया उत्पन्न करने में सहायता करना।
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