वस्तुनिष्ठ प्रश्न
प्रश्न 1. सौरमण्डल के सबसे बड़े ग्रह का नाम है—
(a) मंगल
(b) बृहस्पति
(c) बुध
(d) शनि
उत्तर: (b) बृहस्पति
बृहस्पति सौरमण्डल का सबसे बड़ा ग्रह है। यह सूर्य से पाँचवाँ ग्रह है।
प्रश्न 2. सिंचाई के लिए प्रयोग होने वाला उपकरण है—
(a) रेन गन
(b) डिबलर
(c) स्प्रे पम्प
(d) कल्टीवेटर
उत्तर: (a) रेन गन
रेन गन सिंचाई का एक उपकरण है, जो पानी को वर्षा के समान फुहार के रूप में खेत में फैलाता है।
प्रश्न 3. MKS पद्धति में ऊर्जा का मात्रक है—
(a) कैलोरी
(b) न्यूटन
(c) जूल
(d) किलोग्राम
उत्तर: (c) जूल
MKS पद्धति में ऊर्जा का मात्रक जूल (J) है। जूल कार्य और ऊर्जा का SI मात्रक भी है।
प्रश्न 4. केन्द्रक की खोज करने वाले वैज्ञानिक का नाम है—
(a) रॉबर्ट हुक
(b) रॉबर्ट ब्राउन
(c) अल्बर्ट आइन्स्टीन
(d) ल्यूवेन हॉक
उत्तर: (b) रॉबर्ट ब्राउन
रॉबर्ट ब्राउन ने सन् 1831 में पादप कोशिकाओं में केन्द्रक का वर्णन किया था।
प्रश्न 5. सोडियम कार्बोनेट का अणुसूत्र है—
(a) $Na_{2}CO_{3}$
(b) $Na_{2}CO_{2}$
(c) $NaHCO_{3}$
(d) $NaCl$
उत्तर: (a) $Na_{2}CO_{3}$
सोडियम कार्बोनेट का रासायनिक सूत्र $Na_{2}CO_{3}$ है।
अति लघु उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 6. खरीफ की फसलें कब बोई जाती हैं? खरीफ की फसल के 4 उदाहरण दीजिए।
उत्तर: खरीफ की फसलें वर्षा ऋतु में, सामान्यतः मानसून के आरम्भ में बोई जाती हैं। उदाहरण— धान, मक्का, सोयाबीन और मूँगफली।
प्रश्न 7. ऊर्जा अपव्यय रोकने के चार उपाय लिखिए।
उत्तर: अनावश्यक विद्युत उपकरण बन्द रखें, LED एवं ऊर्जा-दक्ष उपकरण अपनाएँ, सार्वजनिक परिवहन का प्रयोग करें तथा ईंधन एवं बिजली का अनावश्यक उपयोग न करें।
प्रश्न 8. प्रथम श्रेणी के उत्तोलक को उदाहरण सहित परिभाषित कीजिए।
उत्तर: जिस उत्तोलक में आलम्ब, आयास और भार के बीच स्थित होता है, उसे प्रथम श्रेणी का उत्तोलक कहते हैं। उदाहरण— कैंची, प्लायर तथा सी-सॉ।
प्रश्न 9. पौधों की कोशिकाओं में कितने प्रकार के लवक पाए जाते हैं, लिखिए स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: लवक मुख्यतः तीन प्रकार— हरितलवक, वर्णीलवक और अवर्णीलवक होते हैं। हरितलवक प्रकाश संश्लेषण, वर्णीलवक रंग प्रदान करने तथा अवर्णीलवक भोजन संग्रह में सहायक होते हैं।
प्रश्न 10. विरंजक चूर्ण क्या है? इसका उपयोग कहाँ किया जाता है?
उत्तर: विरंजक चूर्ण को सामान्यतः कैल्शियम ऑक्सीक्लोराइड ($CaOCl_{2}$) कहा जाता है। इसका उपयोग कपड़े एवं कागज के विरंजन तथा पेयजल को रोगाणुमुक्त करने में किया जाता है।
प्रश्न 11. मानव की खोपड़ी में पाई जाने वाली हड्डियों की संख्या कितनी है, लिखिए। खोपड़ी में हड्डियों के कौन-कौन से सेट पाए जाते हैं?
उत्तर: मानव खोपड़ी में कुल 22 हड्डियाँ होती हैं— 8 कपाल अस्थियाँ तथा 14 चेहरे की अस्थियाँ।
लघु उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 12. सौर-परिवार सचित्र समझाइए।
उत्तर:
सौर-परिवार या सौरमण्डल सूर्य तथा उसके गुरुत्वाकर्षण प्रभाव में परिक्रमा करने वाले ग्रहों, उपग्रहों, बौने ग्रहों, क्षुद्रग्रहों, धूमकेतुओं एवं अन्य छोटे खगोलीय पिण्डों का समूह है।
सूर्य सौरमण्डल का प्रमुख तारा है। सूर्य से ग्रहों का क्रम है— बुध, शुक्र, पृथ्वी, मंगल, बृहस्पति, शनि, अरुण और वरुण।
प्रश्न 13. मृदा-अपरदन से क्या तात्पर्य है? इसके कारण और रोकने के उपायों पर प्रकाश डालिए।
उत्तर:
मृदा अपरदन मिट्टी की उपजाऊ ऊपरी परत का जल, वायु अथवा अन्य प्राकृतिक एवं मानवीय कारकों द्वारा हट जाना या बह जाना है।
मृदा अपरदन के प्रमुख कारण—
- वनों की अत्यधिक कटाई।
- अतिचराई।
- तेज वर्षा एवं बाढ़।
- तेज हवाएँ।
- ढाल वाली भूमि पर अनुचित जुताई।
- भूमि का अवैज्ञानिक उपयोग।
मृदा अपरदन रोकने के उपाय—
- वृक्षारोपण एवं वन संरक्षण करना।
- ढाल वाली भूमि पर समोच्च जुताई करना।
- पहाड़ी क्षेत्रों में सीढ़ीदार खेती अपनाना।
- अतिचराई को नियंत्रित करना।
- खेतों में मेड़बन्दी एवं जल-संरक्षण के उपाय करना।
- तेज हवा वाले क्षेत्रों में वृक्षों की रक्षक पट्टियाँ लगाना।
प्रश्न 14. उत्क्रमणीय तथा अनुत्क्रमणीय परिवर्तन को उदाहरण सहित समझाइए।
उत्तर:
उत्क्रमणीय परिवर्तन: ऐसे परिवर्तन जिन्हें उलटकर पदार्थ को पुनः उसकी प्रारम्भिक अवस्था में लाया जा सके, उत्क्रमणीय परिवर्तन कहलाते हैं।
उदाहरण— बर्फ का पिघलना और पुनः जमना, जल का वाष्प बनना और पुनः संघनित होना।
अनुत्क्रमणीय परिवर्तन: ऐसे परिवर्तन जिनमें पदार्थ को सामान्य परिस्थितियों में उसी प्रक्रिया को उलटकर उसकी प्रारम्भिक अवस्था में वापस नहीं लाया जा सकता, अनुत्क्रमणीय परिवर्तन कहलाते हैं।
उदाहरण— लकड़ी का जलना, भोजन का पचना तथा लोहे में जंग लगना।
प्रश्न 15. आवर्त सारणी में किसी आवर्त में बाएँ से दाएँ चलने पर विद्युत धनात्मक गुण एवं धात्विक गुणों में क्या परिवर्तन होता है? 1-1 उदाहरण देकर समझाइए एवं कारण स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
आवर्त सारणी में किसी आवर्त में बाएँ से दाएँ जाने पर विद्युत धनात्मक गुण तथा धात्विक गुण दोनों घटते हैं।
विद्युत धनात्मक गुण: किसी परमाणु की इलेक्ट्रॉन त्यागकर धनायन बनाने की प्रवृत्ति को विद्युत धनात्मक गुण कहते हैं। उदाहरणतः तीसरे आवर्त में Na, Mg की अपेक्षा अधिक विद्युत धनात्मक है।
धात्विक गुण: आवर्त में बाएँ से दाएँ धात्विक गुण घटता जाता है। उदाहरणतः तीसरे आवर्त में—
Na > Mg > Al
के क्रम में धात्विक गुण घटता है।
कारण: बाएँ से दाएँ जाने पर प्रभावी नाभिकीय आवेश बढ़ता तथा परमाणु आकार सामान्यतः घटता है। इससे बाह्य इलेक्ट्रॉनों पर नाभिक का आकर्षण बढ़ जाता है और इलेक्ट्रॉन त्यागने की प्रवृत्ति कम होती जाती है। इसलिए विद्युत धनात्मक तथा धात्विक गुण घटते हैं।
प्रश्न 16. प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय श्रेणी के उत्तोलकों में उदाहरण सहित अन्तर बताइए।
उत्तर:
| उत्तोलक की श्रेणी | आलम्ब, भार और आयास की स्थिति | उदाहरण |
|---|---|---|
| प्रथम श्रेणी | आलम्ब, भार और आयास के बीच होता है। | कैंची, प्लायर, सी-सॉ। |
| द्वितीय श्रेणी | भार, आलम्ब और आयास के बीच होता है। | ठेला-गाड़ी, सरौता, नींबू निचोड़ने का यंत्र। |
| तृतीय श्रेणी | आयास, आलम्ब और भार के बीच होता है। | चिमटा, मानव की अग्रबाहु, मछली पकड़ने की छड़ी। |
प्रश्न 17. कृषि कार्य में डिबलर एवं कल्टीवेटर की उपयोगिता लिखिए।
उत्तर:
डिबलर: इसका उपयोग बीजों को खेत में निश्चित दूरी एवं उचित गहराई पर बोने के लिए किया जाता है। इससे बीजों की व्यवस्थित बुवाई होती है और बीज की बचत होती है।
कल्टीवेटर: इसका उपयोग मिट्टी को जोतने एवं भुरभुरी करने, मिट्टी के ढेलों को तोड़ने, खरपतवार हटाने तथा खाद को मिट्टी में मिलाने के लिए किया जाता है।
प्रश्न 18. अम्ल-वर्षा क्या है? पेड़-पौधों पर अम्लीय वर्षा के प्रभाव को सोदाहरण समझाइए।
उत्तर:
वायुमण्डल में उपस्थित सल्फर डाइऑक्साइड ($SO_{2}$) तथा नाइट्रोजन ऑक्साइड ($NO_{x}$) जल एवं ऑक्सीजन से अभिक्रिया करके मुख्यतः सल्फ्यूरिक अम्ल और नाइट्रिक अम्ल बनाते हैं। इनके कारण सामान्य वर्षा से अधिक अम्लीय होने वाली वर्षा को अम्ल-वर्षा कहते हैं।
पेड़-पौधों पर अम्ल-वर्षा के प्रभाव—
- मिट्टी से कैल्शियम, मैग्नीशियम जैसे आवश्यक पोषक तत्वों का ह्रास हो सकता है।
- मिट्टी में उपस्थित एल्युमिनियम अधिक घुलनशील होकर पौधों की जड़ों को हानि पहुँचा सकता है।
- पत्तियों एवं सुईनुमा पत्तियों की सतह क्षतिग्रस्त हो सकती है।
- प्रकाश संश्लेषण एवं पौधों की वृद्धि प्रभावित हो सकती है।
- पौधे रोग, सूखा तथा अत्यधिक ठंड जैसी प्रतिकूल परिस्थितियों के प्रति अधिक संवेदनशील हो सकते हैं।
उदाहरण: अधिक अम्लीय वर्षा या अम्लीय कुहरे के प्रभाव से संवेदनशील वृक्षों की पत्तियाँ अथवा सुइयाँ भूरी या मृत हो सकती हैं और उनकी वृद्धि कम हो सकती है।
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