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PYQ 2018 • शान्ति शिक्षा एवं सतत् विकास

शान्ति शिक्षा एवं सतत् विकास Previous Year Paper 2018

UP DELED Semester 4 शान्ति शिक्षा एवं सतत् विकास Previous Year Question Paper 2018 with solution.

Section 1 वस्तुनिष्ठ प्रश्न

वस्तुनिष्ठ प्रश्न

प्रश्न 1. "लोकतन्त्र शासन वह प्रणाली है जिसमें जनता का शासन, जनता द्वारा और जनता के लिए होता है।" यह कथन है—

(a) रूसो

(b) अब्राहम लिंकन

(c) महात्मा गांधी

(d) कार्ल मार्क्स

उत्तर: (b) अब्राहम लिंकन

अब्राहम लिंकन के प्रसिद्ध गेटिसबर्ग भाषण में लोकतांत्रिक शासन के लिए “Government of the people, by the people, for the people” अभिव्यक्ति प्रयुक्त हुई है।

प्रश्न 2. योग दर्शन के प्रणेता हैं—

(a) महर्षि कपिल

(b) महर्षि कणाद

(c) महर्षि पतंजलि

(d) महर्षि विश्वामित्र

उत्तर: (c) महर्षि पतंजलि

महर्षि पतंजलि ने ‘योगसूत्र’ में योग-दर्शन के सिद्धान्तों को व्यवस्थित रूप से प्रस्तुत किया। पतंजलि का योग अष्टांग योग के रूप में प्रसिद्ध है।

प्रश्न 3. तनाव प्रबन्धन की तकनीक नहीं है—

(a) सामाजिक सरोकार

(b) व्यायाम करना

(c) परिस्थितियों के साथ सामंजस्य स्थापित करना

(d) सदैव चिन्ताग्रस्त रहना

उत्तर: (d) सदैव चिन्ताग्रस्त रहना

व्यायाम, सामाजिक सहयोग तथा परिस्थितियों के साथ सकारात्मक सामंजस्य तनाव को कम करने में सहायक हो सकते हैं, जबकि लगातार चिन्ताग्रस्त रहना तनाव-प्रबन्धन की तकनीक नहीं है।

प्रश्न 4. संयुक्त राष्ट्र संघ की स्थापना कब हुई?

(a) 26 जनवरी, 1945

(b) 24 अक्टूबर, 1945

(c) 24 नवम्बर, 1945

(d) 26 दिसम्बर, 1945

उत्तर: (b) 24 अक्टूबर, 1945

संयुक्त राष्ट्र चार्टर 24 अक्टूबर 1945 को प्रभावी हुआ और इसी दिन संयुक्त राष्ट्र आधिकारिक रूप से अस्तित्व में आया।

प्रश्न 5. अष्टांग योग में सम्मिलित नहीं है—

(a) प्राणायाम

(b) आसन

(c) विधि-विधान

(d) ध्यान

उत्तर: (c) विधि-विधान

अष्टांग योग के आठ अंग हैं— यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान और समाधि। अतः ‘विधि-विधान’ इनमें सम्मिलित नहीं है।

Section 2 अति लघु उत्तरीय प्रश्न

अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 6. शान्ति शिक्षा से आप क्या समझते हैं?

उत्तर: शान्ति शिक्षा वह शिक्षा है जो व्यक्ति में अहिंसा, सहिष्णुता, सहयोग, न्याय, मानवाधिकारों के सम्मान और शांतिपूर्ण संघर्ष-समाधान से सम्बन्धित मूल्य एवं कौशल विकसित करती है।

प्रश्न 7. 'व्यक्तित्व' को परिभाषित करते हुए उसका अर्थ समझाइए।

उत्तर: व्यक्तित्व व्यक्ति के शारीरिक, मानसिक, सामाजिक एवं भावात्मक गुणों तथा व्यवहार के विशिष्ट और संगठित स्वरूप को कहते हैं, जो उसे अन्य व्यक्तियों से अलग पहचान प्रदान करता है।

प्रश्न 8. अवांछित व्यवहार में सुधार हेतु शिक्षक द्वारा अपनायी जाने वाली सकारात्मक रणनीतियाँ कौन-सी हैं?

उत्तर: शिक्षक अवांछित व्यवहार के कारणों का निरीक्षण करे, स्पष्ट नियम बनाए, सकारात्मक व्यवहार को पुनर्बलन दे तथा विद्यार्थी को उचित परामर्श और वांछित व्यवहार का मार्गदर्शन प्रदान करे।

प्रश्न 9. व्यक्तित्व के प्रमुख पाँच गुण कौन-कौन से हैं?

उत्तर: व्यक्तित्व के पाँच प्रमुख गुण हैं— अनुभव के प्रति खुलापन, कर्तव्यनिष्ठा, बहिर्मुखता, सहमतिजन्यता तथा न्यूरोटिसिज़्म/भावनात्मक अस्थिरता।

प्रश्न 10. राष्ट्रीय एकता के मार्ग में आने वाली प्रमुख बाधाएँ कौन-कौन सी हैं?

उत्तर: राष्ट्रीय एकता की प्रमुख बाधाओं में साम्प्रदायिकता, संकीर्ण क्षेत्रवाद, भाषावाद, जातिगत भेदभाव, सामाजिक-आर्थिक विषमता तथा हिंसक उग्रवाद आदि सम्मिलित हो सकते हैं।

प्रश्न 11. 'अष्टांग योग' से क्या तात्पर्य है?

उत्तर: पतंजलि के योग के आठ अंग— यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान और समाधि— सामूहिक रूप से अष्टांग योग कहलाते हैं।

Section 3 लघु उत्तरीय प्रश्न

लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 12. सतत विकास किसे कहते हैं? इसकी आवश्यकता को स्पष्ट कीजिए।

उत्तर: सतत् विकास ऐसा विकास है जो वर्तमान पीढ़ी की आवश्यकताओं को इस प्रकार पूरा करे कि भविष्य की पीढ़ियों की अपनी आवश्यकताओं को पूरा करने की क्षमता से समझौता न हो। इसमें आर्थिक विकास, सामाजिक समावेशन और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित किया जाता है।

सतत् विकास की आवश्यकता:

  1. प्राकृतिक संसाधनों का विवेकपूर्ण एवं संतुलित उपयोग करने के लिए।
  2. पर्यावरणीय प्रदूषण और पारिस्थितिक क्षरण को कम करने के लिए।
  3. जलवायु परिवर्तन और जैव-विविधता के ह्रास जैसी समस्याओं से निपटने के लिए।
  4. भावी पीढ़ियों के लिए प्राकृतिक संसाधनों की उपलब्धता बनाए रखने के लिए।
  5. आर्थिक प्रगति के साथ सामाजिक न्याय और पर्यावरण संरक्षण सुनिश्चित करने के लिए।

प्रश्न 13. व्यक्तित्व का अर्थ स्पष्ट करते हुए किसी एक गुण का वर्णन कीजिए।

उत्तर: व्यक्तित्व व्यक्ति के शारीरिक, मानसिक, सामाजिक और भावात्मक गुणों तथा उसके व्यवहार का संगठित स्वरूप है। व्यक्तित्व व्यक्ति के सोचने, अनुभव करने और व्यवहार करने के विशिष्ट ढंग को व्यक्त करता है।

अनुभव के प्रति खुलापन: यह व्यक्तित्व का एक प्रमुख गुण है। इससे व्यक्ति की जिज्ञासा, कल्पनाशीलता, नवीन विचारों को स्वीकार करने की प्रवृत्ति और नए अनुभवों के प्रति ग्रहणशीलता का पता चलता है। अधिक खुलापन रखने वाला व्यक्ति नई बातों को समझने, सीखने तथा विभिन्न दृष्टिकोणों पर विचार करने के लिए तैयार रहता है।

प्रश्न 14. बच्चों के चरित्र निर्माण में माता-पिता तथा परिवार के सदस्यों का योगदान बताइए।

उत्तर: परिवार बालक की प्रथम पाठशाला है और माता-पिता उसके प्रारम्भिक आदर्श होते हैं। बालक परिवार के सदस्यों के व्यवहार, भाषा और आदतों का अनुकरण करता है।

  1. माता-पिता प्रेम, सुरक्षा और उचित अनुशासन प्रदान करें।
  2. ईमानदारी, सहयोग, परिश्रम, सहानुभूति और उत्तरदायित्व का स्वयं आदर्श प्रस्तुत करें।
  3. बच्चे के अच्छे व्यवहार की प्रशंसा एवं प्रोत्साहन करें।
  4. गलत व्यवहार पर अपमान के बजाय उचित मार्गदर्शन दें।
  5. परिवार में सम्मानजनक संवाद और सहयोगपूर्ण वातावरण बनाए रखें।

प्रश्न 15. बच्चों के विकास में साथियों की भूमिका का मूल्यांकन कीजिए।

उत्तर: बालक के सामाजिक और भावात्मक विकास में साथियों की महत्त्वपूर्ण भूमिका होती है। साथियों के साथ रहने से बालक सहयोग, साझेदारी, नेतृत्व, आत्मनियन्त्रण, सहिष्णुता और संघर्ष-समाधान जैसे सामाजिक कौशल सीखता है।

  1. साथी बालक के सामाजीकरण में सहायता करते हैं।
  2. समूह में रहने से सहयोग और उत्तरदायित्व की भावना विकसित होती है।
  3. बच्चे दूसरों के विचारों और भावनाओं को समझना सीखते हैं।
  4. साथियों से आत्मविश्वास और सामाजिक परिपक्वता बढ़ सकती है।
  5. साथियों का प्रभाव सकारात्मक और नकारात्मक दोनों हो सकता है, इसलिए उचित मार्गदर्शन आवश्यक है।

प्रश्न 16. धार्मिक विविधता से पूर्ण भारत में धार्मिक सहिष्णुता क्यों आवश्यक है?

उत्तर: भारत विविध धार्मिक परम्पराओं वाला बहुलतावादी समाज है। इसलिए सामाजिक शान्ति, परस्पर सम्मान, राष्ट्रीय एकता और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व के लिए धार्मिक सहिष्णुता आवश्यक है।

धार्मिक सहिष्णुता का अर्थ सभी व्यक्तियों की धार्मिक आस्था या अनास्था की स्वतंत्रता का सम्मान करना तथा किसी व्यक्ति के साथ धर्म के आधार पर भेदभाव या वैमनस्य न करना है। भारतीय संविधान सभी व्यक्तियों को, सार्वजनिक व्यवस्था, नैतिकता और स्वास्थ्य के अधीन, अन्तःकरण तथा धर्म को मानने, आचरण करने और प्रचार करने की स्वतंत्रता प्रदान करता है। अतः विद्यार्थियों में विविधता के सम्मान, संवाद, समानता और सद्भाव की भावना विकसित की जानी चाहिए।

प्रश्न 17. बच्चों में अच्छी आदतों के निर्माण में परिवार एवं शिक्षक की भूमिका बताइए।

उत्तर: अच्छी आदतों के निर्माण में परिवार और शिक्षक दोनों की महत्त्वपूर्ण भूमिका होती है, क्योंकि बच्चे प्रायः अपने आसपास के वयस्कों के व्यवहार का अनुकरण करते हैं।

परिवार की भूमिका:

  • नियमित दिनचर्या, स्वच्छता, समयपालन और अनुशासन की आदत विकसित करना।
  • माता-पिता स्वयं अच्छे व्यवहार का आदर्श प्रस्तुत करें।
  • अच्छी आदतों पर प्रशंसा और सकारात्मक प्रोत्साहन दें।
  • प्रेमपूर्ण वातावरण में स्पष्ट और उचित सीमाएँ निर्धारित करें।

शिक्षक की भूमिका:

  • विद्यालय में समयपालन, स्वच्छता, सहयोग और उत्तरदायित्व का अभ्यास कराएँ।
  • विद्यार्थियों के सामने स्वयं आदर्श व्यवहार प्रस्तुत करें।
  • वांछित व्यवहार के लिए सकारात्मक पुनर्बलन एवं प्रशंसा का प्रयोग करें।
  • अवांछित व्यवहार पर केवल दण्ड देने के बजाय कारण समझकर उचित मार्गदर्शन दें।

प्रश्न 18. निम्नलिखित पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए—
(a) लोकतन्त्र के मूलभूत सिद्धान्त।
(b) व्यवहारवाद में उद्दीपन-अनुक्रिया सम्बन्ध।

उत्तर:

(a) लोकतन्त्र के मूलभूत सिद्धान्त: लोकतन्त्र नागरिकों की समान गरिमा एवं भागीदारी पर आधारित शासन-व्यवस्था है। इसके प्रमुख मूल्यों में स्वतंत्रता, समानता, बन्धुत्व और न्याय सम्मिलित हैं। भारतीय संवैधानिक व्यवस्था में धर्मनिरपेक्षता तथा लोकतांत्रिक शासन भी महत्त्वपूर्ण आधार हैं।

  • स्वतंत्रता: नागरिकों को विचार, अभिव्यक्ति, विश्वास, आस्था और उपासना की स्वतंत्रता प्राप्त हो।
  • समानता: सभी नागरिकों को समान दर्जा और अवसर प्राप्त हों।
  • बन्धुत्व: नागरिकों में परस्पर सम्मान, सहयोग और भाईचारे की भावना हो।
  • न्याय: सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक जीवन में न्याय की स्थापना हो।

(b) व्यवहारवाद में उद्दीपन-अनुक्रिया सम्बन्ध: व्यवहारवादी दृष्टिकोण में व्यवहार को उद्दीपन (Stimulus) और उसके प्रति होने वाली अनुक्रिया (Response) के सम्बन्ध में समझा जाता है। वातावरण में उपस्थित कोई उद्दीपन व्यक्ति में एक निश्चित अनुक्रिया उत्पन्न कर सकता है तथा अभ्यास या अनुबन्धन द्वारा उद्दीपन और अनुक्रिया के बीच सम्बन्ध मजबूत हो सकता है। वाटसन ने व्यवहार के वस्तुनिष्ठ अध्ययन में उद्दीपन-अनुक्रिया सम्बन्ध को विशेष महत्त्व दिया।

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