वस्तुनिष्ठ प्रश्न
प्रश्न 1. 'शान्ति-शिक्षा' के लिए आवश्यक है-
(a) अलग से कक्षा की व्यवस्था
(b) समस्त विषयों की कक्षा में दी जा सकती है
(c) हिन्दी विषय की कक्षा उपयुक्त होगी
(d) संस्कृत विषय की कक्षा उपयुक्त होगी
उत्तर: (b) : 'शान्ति-शिक्षा' के लिए आवश्यक है- समस्त विषयों की कक्षा में दी जा सकती है। शांति शिक्षा अर्थात् मानवता की शिक्षा प्रदान करने वाली शिक्षा जिससे सभी लोग विभिन्न वर्गों समाज देशों के लोग आपस में परस्पर शांति से रहे इसके द्वारा बढ़ती हिंसा, तनाव और आत्महत्या आदि को नियंत्रित किया जा सकता है।
प्रश्न 2. बच्चों को सुयोग्य नागरिक बनाया जा सकता है-
(a) गुणवत्ता पूर्ण शिक्षण द्वारा
(b) नैतिकता का पाठ पढ़ाने से
(c) सद्गुणों के विकास से
(d) उच्च कोटि की प्रार्थना कराकर
उत्तर: (a) : बच्चों को सुयोग्य नागरिक बनाया जा सकता है गुणवत्ता पूर्ण शिक्षण द्वारा।
प्रश्न 3. 'योग दर्शन' के प्रणेता हैं-
(a) पतंजलि
(b) शंकराचार्य
(c) अरविन्द घोष
(d) मनु
उत्तर: (a) : 'योग दर्शन' के प्रणेता हैं पतंजलि
प्रश्न 4. शान्ति के लिए शिक्षा नैतिक विकास के साथ उन मूल्यों, दृष्टिकोण और कौशलों के पोषण पर बल देती है, जो सामंजस्य बैठाने के लिए आवश्यक है-
(a) प्रकृति और मानव-जगत के बीच
(b) विद्यालय और समुदाय के बची
(c) प्रधानाध्यापक और शिक्षक के बीच
(d) शिक्षक और बच्चों के बीच
उत्तर: (a) : शान्ति के लिए शिक्षा नैतिक विकास के साथ उन मूल्यों, दृष्टिकोण और कौशलों के पोषण पर बल देती है, जो सामंजस्य बैठाने के लिए आवश्यक है प्रकृति और मानव-जगत के बीच।
प्रश्न 5. 'विश्व-भारती' की स्थापना की है-
(a) महात्मा गाँधी ने
(b) विवेकानन्द ने
(c) रवीन्द्रनाथ टैगोर ने
(d) दयानन्द सरस्वती ने
उत्तर: (c) : 'विश्व-भारती' की स्थापना रवीन्द्रनाथ टैगोर ने की थी। विश्व भारती विश्वविद्यालय एक सार्वजनिक अनुसंधान केन्द्रीय विश्वविद्यालय और राष्ट्रीय महत्व का संस्थान है जो शांति निकेतन, पश्चिम बंगाल में स्थित है। इसकी स्थापना रवीन्द्रनाथ टैगोर ने की थी, जिन्होंने इसे विश्व-भारती कहा, जिसका अर्थ है भारत के साथ विश्व का संवाद।
अति लघु उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 6. विद्यालयीय पाठ्यक्रम में शांति शिक्षा क्यों आवश्यक है?
Ans.: विद्यालयीय पाठ्यक्रम में शांति शिक्षा को उचित स्थान मिलने से बढ़ रही अशांति, हिंसा, अपराध आदि समस्याओं से निजात पाया जा सकता है। इसलिए विद्यालयीय पाठ्यक्रम में शांति शिक्षा बहुत आवश्यक है।
प्रश्न 7. आपके मतानुसार शांति के प्रमुख घटक कौन से हैं?
Ans.: शांति के प्रमुख घटक-
- शांति एक परिणाम है।
- शांति एक प्रक्रिया है।
- शांति एक मानवीय स्वभाव है।
- शांति एक संस्कृति है।
प्रश्न 8. अहिंसामूलक समाज की विशेषता लिखिए।
Ans.: अहिंसामूलक समाज की विशेषता-अहिंसामूलक समाज में अहिंसा, सत्याग्रह, संयमित आचरण, क्षमाशीलता, प्रेम व सहानुभूति, सन्तोष, विवादों का शान्तिपूर्ण समाधान, हिंसा एवं उपद्रव का अभाव आदि का महत्व होता है।
प्रश्न 9. उन कारणों को बताइए जो किशोरावस्था में हिंसा के रूप में प्रकट होते हैं?
Ans.: किशोरावस्था में हिंसा प्रकट होने के कारण-
- सहकर्मी हिंसा
- किशोरावस्था में यौन हिंसा से भी हिंसा प्रकट होते है।
- साइबर आक्रामकता से भी हिंसा प्रकट होता है।
- बाल दुर्व्यवहार से हिंसा प्रकट होती है।
- आक्रामक मीडिया के संपर्क से भी हिंसा प्रकट होती है।
प्रश्न 10. साइबर-बुलिंग का क्या अर्थ है?
Ans.: साइबर बुलिंग-साइबर बुलिंग से तात्पर्य इंटरनेट या मोबाइल टेक्नोलॉजी का प्रयोग करके असभ्य, घटिया या तकलीफ संदेश, टिप्पणियां और इमेज/वीडियो भेजकर किसी को जानबूझकर तंग करना या डराना धमकाना है। किसी साइबर बुलिंग द्वारा दूसरों को डराने धमकाने के लिए टेक्स्ट मैसेज, ई-मेल, सोशल मीडिया प्लेटफार्म, वेब पेज, चैट रूम आदि का प्रयोग किया जाता है।
प्रश्न 11. अष्टांग योग किसे कहते है?
Ans.: अष्टांग योग- अष्टांग योग का अर्थ है जिसके आठ अंग हों। अष्टांग योग में जीवन के सामान्य व्यवहार से लेकर ध्यान एवं समाधि-सहित अध्यात्म की उच्चतम अवस्थाओं तक का अनुपम समावेश है। वे आठ अंग हैं-यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान और समाधि।
लघु उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 12. शांति-शिक्षा की अवधारण बताइए। शांति के लिए शिक्षा की आवश्यकता पर प्रकाश डालिए।
Ans.: शान्ति-शिक्षा, वह विज्ञान है जो मानव की मौलिक आवश्यकताओं तथा समाज की यथार्थ प्रकृति या स्वरूप का अध्ययन करता है जिसमें इन आवश्यकताओं की पूर्ति होती है। यह शिक्षा या विज्ञान लोगों को मानव अधिकारों के विषय में जागरूक बनाता है। शान्ति शिक्षा वह शिक्षा है जो अशोषित, अहिंसक तथा न्यायप्रिय समाज का निर्माण करती है।
शांति के लिए शिक्षा की आवश्यकता-शांति शिक्षा की मनोवैज्ञानिक रूप से आवश्यकता सबसे अधिक है, क्योंकि आज के किशोर एवं युवा विद्यार्थियों के भीतर एक अजीब सी उलझन सदैव विद्यमान रहती है, क्योंकि यह अवस्था, तनाव, तूफान एवं संघर्ष की अवस्था है जहाँ संवेगात्मकता, आक्रमकता सदैव बोलबाला रहता है। शांति शिक्षा के माध्यम से विद्यार्थियों में मानवीय आदर्शों, गुणों व व्यवहारों के प्रतिमानों के अनुसार व्यवहार कर सकारात्मकता का विकास किया जाये।
शांतिपूर्ण जीवन जीने हेतु स्वयं में कई कौशलों को अपनाना पड़ता है। जैसे-साकारात्मक विचार, निर्णय क्षमता, दृढ़ निश्चय, सहानुभूतिपूर्वक सुनना, आत्मविश्वास, समालोचनात्मक विचार प्रक्रिया इत्यादि।
प्रश्न 13. व्यक्ति एवं सामाजिक विकास का सम्बन्ध स्पष्ट कीजिए। व्यक्तित्व के कौन-कौन से प्रमुख गुण होते हैं?
Ans.: व्यक्तित्व एवं सामाजिक विकास का सम्बन्ध- व्यक्तित्व विकास के कई सिद्धान्त इस बात पर जोर देते हैं कि वयस्कता और बुढ़ापा ऋणात्मक परिवर्तन, असंततता और पहले के जीवन पैटर्न के परिवर्तनों की अवधि है। ये परिवर्तन व्यक्ति की बदलती जैविक स्थिति और सामाजिक सन्दर्भ-परिवार, कार्यस्थल और सामान्य रूप से समाज की मांगों के सम्बन्ध में उत्पन्न होते हैं। इस प्रकार व्यक्तित्व विकास एक व्यक्तिगत और सामाजिक घटना दोनों है। व्यक्तित्व एवं सामाजिक विकास का घनिष्ठ सम्बन्ध है। अतः व्यक्ति में उन गुणों का समावेश हो जो समाज की उन्नति एवं सामाजिक जीवन हेतु आवश्यक हो। सामाजिक परिस्थितियों में किसी व्यक्ति का व्यवहार उसके व्यक्तित्व विकास का प्रत्यक्ष माप है।
व्यक्तित्व के गुण निम्नलिखित हैं-
- चैतन्यता
- बर्हिमुखता
- स्थायुविक स्वास्थ्य
- खुलापन
- सहमति जन्मता
प्रश्न 14. मानवाधिकारों की सार्वभौमिक घोषणा कब एवं किस उद्देश्य से की गई है?
Ans.: संयुक्त राष्ट्र के लोग यह विश्वास करते हैं कि कुछ ऐसे मानवाधिकार हैं जो कभी छीने नहीं जा सकते, मानव की गरिमा है और स्त्री-पुरुष के समान अधिकार है। इस घोषणा के परिणामस्वरूप संयुक्त राष्ट्र संघ ने 10 दिसम्बर 1948 को मानवाधिकार की सार्वभौमिक घोषणा की।
उद्देश्य-मानवाधिकार लोगों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करना और भेदभाव रोकना है। मानवाधिकार वे मूलभूत अधिकार हैं जिनकी वजह से मनुष्य को नस्ल, रंग, जाति, धर्म, भाषा राष्ट्रीयता और अन्य विचार धारा आदि के आधार पर प्रताड़ित नहीं किया जा सकता है।
प्रश्न 15. बच्चों के चरित्र निर्माण में माता-पिता तथा परिवार के सदस्यों के योगदान का उल्लेख कीजिए।
Ans.: बच्चे मानवता की दिव्यतम निधि हैं। इनके लालन-पालन में स्नेह एवं मार्ग दर्शन में विवेकपूर्ण दृष्टि तथा दूरदर्शिता की आवश्यकता रहती है। बच्चों के व्यक्तित्व निर्माण में माता-पिता के त्याग, धैर्य, साहस, परिश्रम आदि वे सूत्र हैं जिनके द्वारा उनमें आत्मविश्वास भरा जा सकता है। बच्चे के व्यक्तित्व-निर्माण की पहली कार्यशाला उसका परिवार है। बच्चों को बाल्यकाल से ही सामान्य सुरक्षा एवं प्रोत्साहन देना चाहिए। माता-पिता बच्चों के व्यक्तित्व और चरित्र दोनों को प्रभावित करने में सर्वाधिक महत्वपूर्ण भूमिका अदा करते हैं। माता-पिता उसके लिए सुरक्षा और स्नेह का स्रोत है। बच्चे आयु में छोटे होते हैं, समझ में नहीं। वे चेहरे के भावों की भाषा पढ़ने में सर्वाधिक निपुण होते हैं। अतः माता-पिता को चाहिए उनका परस्पर व्यवहार बच्चे के सामने सभ्य और सम्मानजनक हो। वे एक-दूसरे के प्रति शालीन भाषा का प्रयोग करें।
प्रश्न 16. हिंसा क्या है? हिंसा के कारणों का उल्लेख कीजिए।
Ans.: हिंसा-हिंसा, शारीरिक बल का एक कार्य जो नुकसान पहुँचाता है या नुकसान पहुँचाने का इरादा रखता है। हिंसा से होने वाली क्षति शारीरिक, मनोवैज्ञानिक या दोनों हो सकती है। हिंसा को आक्रामकता से अलग किया जा सकता है, जो एक अधिक सामान्य प्रकार का शत्रुतापूर्ण व्यवहार है जो शारीरिक, मौखिक या निष्क्रिय प्रकृति का हो सकता है।
हिंसा के कारण-एक बात जिस पर सभी शोधकर्ता सहमत प्रतीत होते हैं वह यह है कि हिंसा बहुकारक होती है, जिसका अर्थ है कि हिंसक व्यवहार के लिए कोई एक कारक जिम्मेदार नहीं है। इसके बजाय, हिंसा कारकों के संयोजन से उत्पन्न होती है, जिसमें हिंसक व्यक्ति के सामाजिक या सांस्कृतिक वातावरण में उत्पन्न होने वाले और तत्काल स्थितिजन्य ताकतों का प्रतिनिधित्व करने वाले कारक शामिल है। शोधकर्ताओं ने एक व्यक्ति के भीतर कई कारकों की जांच की है जो हिंसा में योगदान दे सकते हैं, जिनमें आनुवंशिक प्रवृत्ति, न्यूरोकेमिकल असामान्यताएँ, व्यक्तित्व विशेषताएँ, सूचना-प्रसंस्करण की कमी शामिल है।
प्रश्न 17. सतत् विकास से आप क्या समझते हैं? सतत् विकास की आवश्यकता एवं महत्व बताइए।
Ans.: सतत् विकास-सतत् विकास एक दूरदर्शी योजना है जो आर्थिक विकास, सामाजिक न्याय संगतता और पर्यावरण संरक्षण के समावेशन से विकास का आह्वान करती है तथा जो विकास के लिये भविष्य की पीढ़ियों आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए वर्तमान की आवश्यकताओं का पूरा करने पर जोर देता है।
सतत् विकास की आवश्यकता-पिछले दो या तीन दशकों से, हमने देखा है कि आर्थिक विकास की खातिर, पर्यावरण के स्वास्थ्य पर असर पड़ा है। परिणामस्वरूप, ग्रीनहाउस गैसों के कारण वायु गुणवत्ता में गिरावट और जलवायु परिवर्तन जैसे पर्यावरण पर प्रभाव पड़ा है। इन सभी कारकों ने सतत् विकास की आवश्यकता को जन्म दिया, क्योंकि अगर इसे अनियंत्रित छोड़ दिया गया तो यह पर्यावरण को अपूरणीय क्षति पहुँचा सकता है।
सतत् विकास का महत्व-सतत् विकास के महत्व निम्नलिखित हैं-
- उपलब्ध संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग करना और पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने की दिशा में काम करना।
- पर्यावरण के क्षरण को रोकना और पर्यावरण की रक्षा पर जोर देना।
- संसाधनों के अत्यधिक दोहन को रोकना।
प्रश्न 18. 'शांति के लिए शिक्षा' के सन्दर्भ में निम्नलिखित में से किन्हीं दो पर टिप्पणी कीजिए-
(i) तैयार किए जा सकने वाले मॉडल (शांति-शिक्षा के सन्दर्भ में)
(ii) प्रॉजेक्ट कार्य
(iii) प्रशिक्षु शिक्षकों को शांति के लिए शिक्ष की आवश्यकता
Ans.: 'शांति के लिए शिक्षा' के सन्दर्भ में टिप्पणी-
(ii) प्रोजेक्ट कार्य-
- मीडिया और हिंसा का सम्बन्ध।
- मानवाधिकारों की सार्वभौमिक घोषणा का वितरण।
- तनाव प्रबन्धन में योग की भूमिका।
(iii) प्रशिक्षु शिक्षकों को शांति के लिए शिक्षा की आवश्यकता-संसार में चारों ओर तनाव, हिंसा एवं भय का वातावरण दिखाई पड़ता है, इसलिए आज शान्ति की सर्वाधिक आवश्यकता है। शान्ति मानव मन को समाज को प्रगति तथा विकास के बारे में सोचने के अवसर देती है। अतः व्यक्तियों में शान्ति के प्रति झुकाव उत्पन्न करना अति आवश्यक है। यह कार्य शिक्षा द्वारा ही किया जा सकता है जिसके लिए शिक्षक को महत्वपूर्ण भूमिका निभानी है।