वस्तुनिष्ठ प्रश्न
प्रश्न 1. "लोकतन्त्र शासन वह प्रणाली है जिसमें जनता का शासन, जनता द्वारा और जनता के लिए होता है।" यह कथन है-
(a) रूसों
(b) अब्राहम लिंकन
(c) महात्मा गांधी
(d) कार्ल माक्स।
उत्तर: (b) : "लोकतन्त्र शासन वह प्रणाली है जिसमें जनता का शासन, जनता द्वारा और जनता के लिए होता है।" यह कथन अब्राहम लिंकन का है।
प्रश्न 2. योग दर्शन के प्रणेता हैं-
(a) महर्षि कपिल
(b) महर्षि कणाद
(c) महर्षि पतंजलि
(d) महर्षि विश्वामित्र।
उत्तर: (c) : योग दर्शन के प्रणेता "महर्षि पतंजलि" है। पतंजलि, हिन्दू दर्शन के सांख्य विद्यालय के एक उल्लेखनीय विद्वान थे।
प्रश्न 3. तनाव प्रबन्धन की तकनीक नहीं हैं-
(a) सामाजिक सरोकार
(b) व्यायाम करना
(c) परिस्थितियों के सामंजस्य स्थापित करना
(d) सदैव चिन्ताग्रस्त रहना।
उत्तर: (d) : तनाव प्रबन्धन की तकनीक सामाजिक सरोकार, व्यायाम करना, परिस्थियों के सामंजस्य स्थापित करना आदि है। जब कि "सदैव चिंताग्रस्त रहना" तनाव प्रबन्धन की तकनीक नहीं है।
प्रश्न 4. संयुक्त राष्ट्र संघ की स्थापना कब हुई?
(a) 26 जनवरी, 1945
(b) 24 अक्टूबर, 1945
(c) 24 नवम्बर, 1945
(d) 26 दिसम्बर, 1945
उत्तर: (b) : संयुक्त राष्ट्र संघ की स्थापना 24 अक्टूबर, 1945 को हुई थी। संयुक्त राष्ट्र की संरचना में सुरक्षा परिषद वाले सबसे शक्तिशाली देश (संयुक्त राज्य अमेरिका, फ्रांस, रूस और यूनाइटेड किंगडम) हैं। वर्तमान में संयुक्त राष्ट्र में 193 राष्ट्र है। विश्व के लगभग सारे अन्र्तराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त राष्ट्र इसमें शामिल हैं।
प्रश्न 5. अष्टांगिक योग में सम्मिलित नहीं है
(a) प्राणायाम
(b) आसन
(c) विधि-विधान
(d) ध्यान।
उत्तर: (c) : अष्टांगिक योग में प्राणायाम, आसन, ध्यान शामिल हैं, जबकि विधि-विधान सम्मिलित नहीं हैं।
अति लघु उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 6. शान्ति शिक्षा से आप क्या समझते हैं ?
Ans.: शान्ति शिक्षा-शान्ति शिक्षा अर्थात् मानवता की शिक्षा प्रदान करने वाली शिक्षा जिससे सभी लोग विभिन्न वर्गों समाज देशों के लोग आपस में परस्पर भली-भाँति से रहे, इसके द्वारा बढ़ती हिंसा तनाव और आत्महत्या आदि को नियंत्रित किया जा सकता है। शांति शिक्षा सकारात्मक सोच की तरफ एक सुखद पहल हैं जिससे शांतिमय जीवन को जिया जा सकता है।
प्रश्न 7. 'व्यक्तित्व' को परिभाषित करते हुए उसका अर्थ समझाइए।
Ans.: मन के अनुसार, "व्यक्तित्व एक व्यक्ति के गठन, व्यवहार के तरीकों, रूचियों, दृष्टिकोणों क्षमताओं तथा तरीकों का सबसे विशिष्ट संगठन है।" वुडवर्थ (Woodworth) के अनुसार, "व्यक्ति के व्यवहार की एक समग्र विशेषता ही व्यक्तित्व है।" गिलफोर्ड के अनुसार, "व्यक्ति के विशेषकों के विलक्षण स्वरूप को उसका व्यक्तित्व माना जाता है।" व्यक्तित्व के प्रमुख गुण निम्न है- (i) अनुभव के प्रति खुलापन (ii) चैतन्यता (iii) बर्हिमुखता (iv) सहमतिजन्मता (v) स्नायुविकृति
प्रश्न 8. अवांछित व्यवहार में सुधार हेतु शिक्षक द्वारा अपनायी जाने वाली सकारात्मक रणनीतियाँ कौन-सी हैं ?
Ans.: अवांछित व्यवहार में सुधार हेतु शिक्षक द्वारा अपनायी जाने वाली सकारात्मक रणनीतियाँ-
- कक्षा में छात्र का ध्यानपूर्वक निरीक्षण करें। उसके व्यवहार को देखें, उनका विश्लेषण करें और कारणों को पता लगाने की कोशिश करें।
- बच्चे की समस्या का मूल वजह को पहचानना।
- अवांछनीय व्यवहार के कारणों का पता लगाना और उपचार प्रदान करना।
- सकारात्मक स्पर्श के माध्यम से छात्रों में अच्छे व्यवहार को शामिल करना।
- बच्चे के अस्वीकार्य व्यवहार के साथ बेहतर ढंग से जुड़ना।
- सही तरीके से उचित मार्गदर्शन के साथ बच्चे की सहायता करना।
प्रश्न 9. व्यक्तित्व के प्रमुख पाँच गुण कौन-कौन सी हैं?
Ans.: व्यक्तित्व की पाँच विशेषताएँ- व्यक्तित्व, मनुष्य के व्यवहार की वह शैली है जिसे वह अपने आन्तरिक तथा बाहरी गुणों के आधार पर प्रकट करता है। व्यकित्तव की निम्न विशेषताएँ हैं-
- सामाजिकता मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है और वह समाज के बीच रहता हैं व्यक्ति समाज के बीच ही रहकर सारे क्रिया-कलाप करता हैं।
- लक्ष्य प्राप्ति प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में कोई लक्ष्य जरूर होता है, जिसकों ध्यान में रखकर व्यक्ति उस लक्ष्य प्राप्ति कें लिए हमेशा प्रयत्नशील रहता हैं। क्योंकि व्यक्ति अपने लक्ष्य के अनुरूप ही कार्य करता है।
- आत्म-चेतना व्यक्ति आत्मचिंतन के जरिए इस बात का ध्यान रखता है कि समाज में उसकी क्या छवि बन रही है, और समाज के लोग उसके प्रति-कैसी भावना रखते हैं ।
- बहिर्मुखता बहिर्मुखता का गुण व्यक्ति को सामाजिक बनाता है और ऐसे व्यक्ति समाज में अत्यन्त प्रसिद्ध होते है।
- स्नायु विकृति- स्नायु विकृति से ग्रसित व्यक्ति अच्छे व्यक्तित्व वाला नही होता है।
प्रश्न 10. राष्ट्रीय एकता के मार्ग में आने वाली प्रमुख बाधाएँ कौन-कौन सी हैं ?
Ans.: राष्ट्रीय एकता के मार्ग में आने वाली प्रमुख बाधाएँ निम्न हैं-
- भाषा में विभिन्नता राष्ट्रीय एकता को प्रभावित कर सकती है। जिससे लोगों के बीच समझौता करना कठिन हो जाता है।
- सामाजिक असमानता राष्ट्रीय एकता को कमजोर कर सकती हैं, क्योंकि यह विभिन्न समृद्धि वर्गों के बीच भेद-भाव उत्पन्न कर सकता है।
- धार्मिक एवं सांस्कृतिक विभिन्नता राष्ट्रीय एकता को प्रभावित कर सकती है, जो समरसता एवं आत्मनिर्भरता की भावना में रूकावट डाल सकती है।
- देश में जातिवाद, सम्प्रदायवाद, क्षेत्रवाद, भाषावाद आदि का प्रभाव होना।
- देश में विशिष्ट समूहों (नक्सलवादी एवं आतंकवादी) की गतिविधियाँ।
प्रश्न 11. 'अष्टांग योग' से क्या तात्पर्य है ?
Ans.: अष्टांग योग में आठो आयामो का अभ्यास किया जाता है। योग के आठ अंग निम्न है- (1) यम, (2) नियम, (3) आसन, (4) प्राणायाम, (5) प्रत्याहार, (6) धारणा, (7) ध्यान, (8) समाधि।
लघु उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 12. सतत विकास किसे कहते हैं? इसकी आवश्यकता को स्पष्ट कीजिए।
Ans.: सतत् विकास-सतत् विकास एक दूरदर्शी योजना है जो आर्थिक विकास, सामाजिक न्याय संगतता और पर्यावरण संरक्षण के समावेशन से विकास का आह्वान करती है तथा जो विकास के लिये जो भविष्य की पीढ़ियों आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए वर्तमान की आवश्यकताओं का पूरा करने पर जोर देता है।
सतत् विकास की आवश्यकता- पिछले दो या तीन दशकों से, हमने देखा है कि आर्थिक विकास की खातिर, पर्यावरण के स्वास्थ्य पर असर पड़ा है। परिणामस्वरूप, ग्रीनहाउस गैसों के कारण वायु गुणवत्ता में गिरावट और जलवायु परिवर्तन जैसे पर्यावरण पर प्रभाव पड़ा है। इन सभी कारकों ने सतत् विकास की आवश्यकता को जन्म दिया, क्योंकि अगर इसे अनियंत्रित छोड़ दिया गया तो यह पर्यावरण को अपूरणीय क्षति पहुँचा सकता है।
सतत् विकास का महत्व-सतत् विकास के महत्व निम्नलिखित हैं-
- उपलब्ध संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग करना और पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने की दिशा में काम करना।
- पर्यावरण के क्षरण को रोकना और पर्यावरण की रक्षा पर जोर देना।
- संसाधनों के अत्यधिक दोहन को रोकना।
प्रश्न 13. व्यक्तित्व का अर्थ स्पष्ट करते हुए किसी एक गुण का वर्णन कीजिए।
Ans.: व्यक्तित्व-व्यक्तित्व अंग्रेजी शब्द पर्सनालिटी का हिंदी रूपान्तरण है। (Personality) लैटिन भाषा के पर्सोना शब्द से लिया गया है। जिसका अर्थ है "वेशभूषा या मुखौटा" इसे नाटक के पात्र नाटक करते समय पहना करते थे।
व्यक्तित्व की परिभाषा- आलपोर्ट के अनुसार-व्यक्तित्व व्यक्ति के उन मनोशारीरिक गुणों का गत्यात्मक संगठन है जो वातावरण के साथ उसका अद्वितीय समायोजन निर्धारित करता है।
(i) अनुभव के प्रति खुलापन खुलापन व्यक्ति की बौद्धिक उत्सुकता, सहनशीलता, नवीनता, ग्रहणशीलता एवं विविधता का स्तर बताता है। यह कल्पनाशील, स्वतंत्र और विविधतापूर्ण क्रियाओं को नियमित रूप से करने की वरीयता को स्पष्ट करता है। खुलापन एक द्विध्रुवीय विमा माना गया है, अनुभव के प्रति खुलापन व्यक्तित्व का प्रमुख गुण है। जब कोई व्यक्ति परम्परागत विचारों को स्वीकार न कर स्वयं सोच-विचार कर अनुभव आधारित विचारों को स्वीकारता है, तो इसे हम अनुभव के प्रति खुलापन कहते हैं।
प्रश्न 14. बच्चों के चरित्र निर्माण में माता-पिता तथा परिवार के सदस्यों का योगदान बताइए।
Ans.: बच्चे मानवता की दिव्यतम निधि हैं। इनके लालन-पालन में स्नेह एवं मार्ग दर्शन में विवेकपूर्ण दृष्टि तथा दूरदर्शिता की आवश्यकता रहती है। बच्चों के व्यक्तित्व निर्माण में माता-पिता के त्याग, धैर्य, साहस, परिश्रम आदि वे सूत्र हैं जिनके द्वारा उनमें आत्मविश्वास भरा जा सकता है। बच्चे के व्यक्तित्व-निर्माण की पहली कार्यशाला उसका परिवार है। बच्चों को बाल्यकाल से ही सामान्य सुरक्षा एवं प्रोत्साहन देना चाहिए। माता-पिता बच्चों के व्यक्तित्व और चरित्र दोनों को प्रभावित करने में सर्वाधिक महत्वपूर्ण भूमिका अदा करते हैं। माता-पिता उसके लिए सुरक्षा और स्नेह का स्रोत है। बच्चे आयु में छोटे होते हैं, समझ में नहीं। वे चेहरे के भावों की भाषा पढ़ने में सर्वाधिक निपुण होते हैं। अतः माता-पिता को चाहिए उनका परस्पर व्यवहार बच्चे के सामने सभ्य और सम्मानजनक हो। वे एक-दूसरे के प्रति शालीन भाषा का प्रयोग करें।
प्रश्न 15. बच्चों के विकास में साथियों की भूमिका का मूल्यांकन कीजिए।
Ans.: बच्चों के विकास में साथी की भूमिका-बच्चों के जीवन में साथी का महत्वपूर्ण स्थान होता है, जिनमें सहानुभूति, परवाह करना, समझौता, सामाजिक दायित्व, सामाजिक नियंत्रण विवादों को सुलझाना इत्यादि के सीखने में इनका योगदान होता है। बच्चों के विकासक्रम में एक प्रकार से सामाजिक एवं संवेगात्मक आधार साथियों से ही प्राप्त होते हैं। साथी सामाजीकरण के साधन है। जो दूसरों के व्यवहारों एवं विश्वासों को आकार देते हैं एवं अपने व्यवहार एवं विश्वास को दृढ़ भी करते हैं। बच्चों के विकास में साथी की भूमिका निम्न बिन्दुओं के अन्तर्गत देख सकते हैं-
- वे हम उम्र के बालकों के टोली या गिरोह का सदस्य बनना चाहते हैं उसके साथी सदस्यों का प्रभाव उसके सामाजिक विकास के रूप में देखा जा सकता है।
- हरलॉक के अनुसार, "साथी-संगी बालकों में आत्मनियंत्रण साहस, न्याय, सहनशीलता, दूसरों के प्रति सद्भाव आदि गुणों का विकास करता है।"
- साथियों के प्रभाव से बालक में सामाजिक परिपक्वता का भाव विकसित होता है और समाज के प्रति उसके दायित्वों का बोध होता है।
- समूहों में रहने के कारण बालक आत्म केन्द्रित और स्वार्थी नहीं होता है।
- साथियों के साथ बालक गुणों को ही नहीं सीखता है बल्कि उनके अवगुण को भी सीखता है।
प्रश्न 16. धार्मिक विविधता से पूर्ण भारत में धार्मिक सहिष्णुता क्यों आवश्यक है ?
Ans.: भारत में धार्मिक सहिष्णुता - भारत के इतिहास में धर्म का यहाँ की संस्कृति में महत्वपूर्ण स्थान रहा है और इसलिए कहा गया है कि "धार्मिक सहिष्णुता से ही वैमनस्य का खात्मा-संभव हैं।" इस बात का समर्थन करते हुए ही महर्षि दयानंद ने कहा था कि "सभी धर्मों के प्रति सहिष्णुता जरूरी है। धर्म मनुष्य में मानवधर्म का पालन करने के लिए प्रेरित करता है। समाज एवं देश में शांति बनाये रखने के लिए धार्मिक सहिष्णुता भी आवश्यक है। जिन जिज्ञासाओं एवं विशेषताओं का समाधान विज्ञान व वैज्ञानिक सिद्धान्तों द्वारा पूर्ण नहीं हो पाता है। उनका समाधान धर्म के द्वारा किया जाता है। धर्म मानव को कई रूपों में प्रभावित किया है-
- मानव की सांस्कृतिक निष्ठा को बनाये रखना।
- मानव के भावात्मक रूप का संरक्षण आदि।
- मानव का व्यक्तित्व स्वरूप।
इसके अलावा धर्म स्वस्थ्य मनोरंजन देने की क्रिया के रूप में जाना जाता है। उत्सवों, कर्मकाण्डों, धर्मसभाओं के माध्यम से धर्म व्यक्ति को समाज कल्याण हेतु भी प्रोत्साहित करता है। अतः हम कह सकते है कि धार्मिक विविधता से पूर्ण भारत में धार्मिक सहिष्णुता आवश्यक है। क्योंकि धर्म हमारे समाज की आत्मा है, इसके बिना समाज का निर्माण नहीं किया जा सकता है।
प्रश्न 17. बच्चों में अच्छी आदतों के निर्माण में परिवार एवं शिक्षक की भूमिका बताइए।
Ans.: बच्चे मानवता की दिव्यतम निधि हैं। इनके लालन-पालन में स्नेह एवं मार्ग दर्शन में विवेकपूर्ण दृष्टि तथा दूरदर्शिता की आवश्यकता रहती है। बच्चों के व्यक्तित्व निर्माण में माता-पिता के त्याग, धैर्य, साहस, परिश्रम आदि वे सूत्र हैं जिनके द्वारा उनमें आत्मविश्वास भरा जा सकता है। बच्चे के व्यक्तित्व-निर्माण की पहली कार्यशाला उसका परिवार है। बच्चों को बाल्यकाल से ही सामान्य सुरक्षा एवं प्रोत्साहन देना चाहिए। माता-पिता बच्चों के व्यक्तित्व और चरित्र दोनों को प्रभावित करने में सर्वाधिक महत्वपूर्ण भूमिका अदा करते हैं। माता-पिता उसके लिए सुरक्षा और स्नेह का स्रोत है। बच्चे आयु में छोटे होते हैं, समझ में नहीं। वे चेहरे के भावों की भाषा पढ़ने में सर्वाधिक निपुण होते हैं। अतः माता-पिता को चाहिए उनका परस्पर व्यवहार बच्चे के सामने सभ्य और सम्मानजनक हो। वे एक-दूसरे के प्रति शालीन भाषा का प्रयोग करें।
बच्चों की अच्छी आदतों के निर्माण में शिक्षक की भूमिका- अच्छी आदतों के निर्माण में शिक्षक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। छात्र अपने माता-पिता से अधिक शिक्षक की सलाह का पालन करते हैं। बच्चों की अच्छी आदतों के बनाने में निम्न तरीकों से मदद कर सकता है-
- सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों का आयोजन करके शिक्षक विभिन्न सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों का आयोजन कर सकते हैं जो अच्छी आदतों के महत्व को बढ़ाते हैं। अच्छी आदतों को सीखने के लिए छात्रों को इसमें भाग लेने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।
- एक रोल मॉडल के रूप में छात्र युवा है और अभी भी जीवन के बारे में सीख रहे हैं। वे प्रभावशाली है और उन चीजों की नकल करेगें जो उन्हें आकर्षित और प्रभावित करती है। इसलिए शिक्षकों को छात्रों के जीवन में एक अच्छा रोल मॉडल होने चाहिए ताकि वे उनका अनुकरण कर सकें।
- पुरस्कार एवं दण्ड के रूप में पुरस्कार छात्रों को प्रेरित करने का एक अच्छा तरीका है। हमेशा बच्चों की उसकी अच्छी आदत या व्यवहार के लिए उसकी सराहना करें। इस प्रकार पुरस्कार एवं दण्ड से बच्चों में अच्छी आदतों के निर्माण के लिए प्रेरणा का निर्माण किया जा सकता है।
प्रश्न 18. निम्नलिखित पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए
(a) लोकतन्त्र के मूलभूत सिद्धान्त।
(b) व्यवहारवाद में उद्दीपन-अनुक्रिया सम्बन्ध
Ans.:
(a) लोकतन्त्र के मूलभूत सिद्धान्त-लोकतन्त्र के तीन मूल सिद्धान्त है-स्वतंत्रता, समानता और मातृत्व। हमने अपने देश के लोकतंत्र में तीन सिद्धान्त और जोड़ा है वे है-न्याय, समाजवाद और धर्मनिरपेक्षता। मानव जीवन के किसी भी क्षेत्र में इनका पालन करना आवश्यक होता है।
- स्वतंत्रता-लोकतंत्र का सर्व प्रथम सिद्धान्त स्वतंत्रता है। इसके अन्तर्गत विचार अभिव्यक्ति, उपासना, धार्मिक मान्यता आदि की व्यक्ति की स्वतंत्रता निहित है।
- समानता-समानता लोकतंत्र का दूसरा मूल सिद्धांत है। यह मनुष्य-मनुष्य में जाति, धर्म, लिंग और अर्थ आदि किसी भी आधार पर भेद नहीं करता। यह मनुष्य को उसके जीवन के प्रत्येक क्षेत्र (राजनीतिक, सामाजिक, धार्मिक, आर्थिक, सांस्कृतिक) के समान अधिकार देने पर बल देता है।
- मातृत्व-जब हम जाति, धर्म, लिंग और अर्थ आदि के आधार पर विकसित किसी भी भेद को स्वीकार न करें, सब एक-दूसरे को अपना भाई समझें, सब एक-दूसरे से प्रेम करें, और सब एक-दूसरे के विकास में सहयोग करें।
- न्याय-इसका तात्पर्य है कि नागरिकों को बिना किसी भेद-भाव के सामाजिक आर्थिक एवं राजनैतिक न्याय उपलब्ध कराना।
- समाजवाद-समाज की संरचना के सन्दर्भ में समाजवाद का अर्थ है, वर्गविहीन, समाज अर्थात् ऐसा समाज जिसमें व्यक्ति-व्यक्ति में जाति, धर्म, संस्कृति, लिंग आदि किसी भी आधार पर भेद नहीं किया जाता है सबके समान दर्जा प्राप्त होता है।
- धर्मनिरपेक्षता-हमारे संविधान के अनुसार भारत में राष्ट्र एवं धर्म के नाम का कोई धर्म नहीं होगा। राज्य प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप से किसी धर्म पर आधारित नहीं होगा और वह धर्म के आधार पर भेद-भाव नहीं करेंगा।
(b) व्यवहारवाद में उद्दीपन-अनुक्रिया सम्बन्ध-व्यवहार केवल पर्यावरणीय उद्दीपकों की अनुक्रिया है। व्यवहारवादी दृष्टिकोण बताता है कि सभी व्यवहार "अनुकूलन" नामक पारस्परिक क्रिया के माध्यम से पर्यावरण के साथ अन्तःक्रिया के माध्यम से सीखे जाते हैं। एक प्रकार से व्यवहार व्यक्ति द्वारा स्वतः और अपने पर्यावरण के संयोजन में की गयी क्रियाओं का कार्य करने के ढंगों का विस्तार या प्रसार क्षेत्र है। वाटसन ने किसी मनोवैज्ञानिक घटना को एक उद्दीपन से प्रारम्भ होने को माना है और उसके प्रति अनुक्रिया की जाती है तो घटना समाप्त हो जाती है। इस तरह वाटसन ने व्यवहारवाद में उद्दीपन-अनुक्रिया व्यवहारवाद को जन्म दिया है।