वस्तुनिष्ठ प्रश्न
प्रश्न 1. निम्नांकित में से कौन-सा गुण व्यक्तित्व के पाँच गुणों में शामिल है?
(a) सामाजिकता
(b) एकान्तप्रियता
(c) स्वार्थपरता
(d) खुलापन
उत्तर: (d) खुलापन
व्यक्तित्व के Big Five गुण हैं— बहिर्मुखता, सहमतिजन्यता, कर्तव्यनिष्ठा, अनुभव के प्रति खुलापन तथा न्यूरोटिसिज़्म अर्थात् भावनात्मक अस्थिरता।
प्रश्न 2. उ-अ बंधन का निर्माण होता है—
(a) खोज से
(b) प्रभाव के नियम से
(c) अनुकूलन के नियम से
(d) खोज और अनुकूलन से
उत्तर: (c) अनुकूलन के नियम से
यहाँ ‘उ-अ’ से आशय उद्दीपक-अनुक्रिया (Stimulus-Response) बंधन से है। अनुबंधन या अनुकूलन की प्रक्रिया में किसी उद्दीपक और अनुक्रिया के बीच सम्बन्ध स्थापित किया जाता है; अतः दिए गए विकल्पों में (c) परीक्षा-अपेक्षित उत्तर है।
प्रश्न 3. शान्तिनिकेतन और ‘विश्व-भारती’ की स्थापना की है—
(a) अरविन्द घोष ने
(b) रवीन्द्रनाथ टैगोर ने
(c) महात्मा गाँधी ने
(d) विवेकानन्द ने
उत्तर: (b) रवीन्द्रनाथ टैगोर ने
रवीन्द्रनाथ टैगोर ने 1901 में शान्तिनिकेतन में ब्रह्मचर्याश्रम स्थापित किया तथा 1921 में विश्व-भारती की स्थापना की।
प्रश्न 4. निम्नलिखित में से कौन-सा लोकतन्त्र के सिद्धान्त हैं?
(a) बन्धुत्व, जातिवाद, समानता
(b) सन्तोष, समाजवाद, बहिर्मुखता
(c) स्वतंत्रता, समाजवाद, समानता
(d) स्वतंत्रता, जातिवाद, समानता
उत्तर: (c) स्वतंत्रता, समाजवाद, समानता (दिए गए विकल्पों में सबसे उपयुक्त)
लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक मूल्यों में स्वतंत्रता और समानता का विशेष महत्त्व है। भारतीय संविधान की प्रस्तावना भारत को समाजवादी लोकतांत्रिक गणराज्य घोषित करते हुए न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बन्धुत्व पर बल देती है।
प्रश्न 5. संयुक्त राष्ट्र संघ ने शान्ति और अहिंसा की संस्कृति का अन्तर्राष्ट्रीय दशक कब घोषित किया था?
(a) वर्ष 2001 से 2010 तक
(b) वर्ष 2002 से 2011 तक
(c) वर्ष 1999 से 2008 तक
(d) वर्ष 2005 से 2014 तक
उत्तर: (a) वर्ष 2001 से 2010 तक
संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 2001–2010 को ‘विश्व के बच्चों के लिए शान्ति और अहिंसा की संस्कृति का अन्तर्राष्ट्रीय दशक’ घोषित किया था।
अति लघु उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 6. व्यक्तित्व के पाँच गुण कौन-कौन से हैं?
उत्तर: व्यक्तित्व के पाँच प्रमुख गुण हैं— बहिर्मुखता, सहमतिजन्यता, कर्तव्यनिष्ठा, अनुभव के प्रति खुलापन तथा न्यूरोटिसिज़्म/भावनात्मक अस्थिरता।
प्रश्न 7. हिंसा के कौन-कौन से प्रकार हैं? नामांकित कीजिए।
उत्तर: हिंसा के प्रमुख प्रकार हैं— शारीरिक हिंसा, मनोवैज्ञानिक/भावनात्मक हिंसा, मौखिक हिंसा, यौन हिंसा तथा संरचनात्मक हिंसा।
प्रश्न 8. शान्ति शिक्षा में मूल्य का क्या तात्पर्य है?
उत्तर: शान्ति शिक्षा में मूल्य से आशय ऐसे जीवन-मूल्यों से है जो अहिंसा, सत्य, न्याय, समानता, सहिष्णुता, सहयोग, मानव-गरिमा और विश्व-बन्धुत्व को बढ़ावा देते हैं।
प्रश्न 9. योगसूत्र के आठ अंग कौन-कौन से हैं?
उत्तर: योग के आठ अंग हैं— यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान और समाधि।
प्रश्न 10. भारत में ‘राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग’ का गठन कब और किस उद्देश्य से हुआ था?
उत्तर: राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की स्थापना 12 अक्टूबर 1993 को हुई। इसका प्रमुख उद्देश्य भारत में मानवाधिकारों का संरक्षण और संवर्धन करना है।
प्रश्न 11. मीडिया के अन्तर्गत कौन-कौन से संचार माध्यमों को सम्मिलित किया जाता है?
उत्तर: मीडिया में समाचार-पत्र, पत्रिकाएँ, रेडियो, टेलीविजन, सिनेमा, इंटरनेट, वेबसाइट तथा सोशल मीडिया जैसे संचार माध्यम सम्मिलित होते हैं।
लघु उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 12. शान्ति शिक्षा की आवश्यकता का क्या औचित्य है? इस पर प्रकाश डालिए।
उत्तर: वर्तमान समाज में हिंसा, तनाव, असहिष्णुता, भेदभाव और संघर्ष जैसी समस्याओं के कारण शान्ति शिक्षा की आवश्यकता अत्यन्त महत्त्वपूर्ण है। इसका औचित्य निम्नलिखित आधारों पर स्पष्ट किया जा सकता है—
- वैयक्तिक दृष्टि से: शान्ति शिक्षा व्यक्ति में आत्मनियन्त्रण, सकारात्मक सोच, सहानुभूति, संवाद-कौशल और तनाव-प्रबन्धन की क्षमता विकसित करती है।
- सामाजिक दृष्टि से: यह सहयोग, समानता, सहिष्णुता, परस्पर सम्मान और अहिंसक संघर्ष-समाधान को बढ़ावा देती है।
- राष्ट्रीय दृष्टि से: यह लोकतांत्रिक मूल्यों, मानवाधिकारों, सामाजिक सद्भाव और राष्ट्रीय एकता के प्रति जागरूकता विकसित करती है।
- वैश्विक एवं पर्यावरणीय दृष्टि से: यह विश्व-बन्धुत्व, अन्तरराष्ट्रीय समझ तथा मनुष्य और प्रकृति के बीच संतुलित सम्बन्ध स्थापित करने की भावना विकसित करती है।
प्रश्न 13. बच्चों के स्वस्थ साथी सम्बन्ध को बढ़ाने के लिए परिवार की क्या भूमिका है?
उत्तर: बच्चों के स्वस्थ साथी-सम्बन्धों के विकास में परिवार की महत्त्वपूर्ण भूमिका होती है। माता-पिता बच्चों को सहयोग, सम्मान, सहानुभूति और संवाद का व्यवहार स्वयं करके दिखाएँ।
- बच्चे से उसके मित्रों और साथी-सम्बन्धों के विषय में नियमित बातचीत करें।
- बच्चे को अच्छे मित्र चुनने और स्वस्थ सीमाएँ बनाए रखने का मार्गदर्शन दें।
- साझा खेल, समूह-कार्य और सामाजिक गतिविधियों में भाग लेने के अवसर दें।
- मतभेद होने पर बातचीत और शांतिपूर्ण समाधान का तरीका सिखाएँ।
- बुलिंग, दुर्व्यवहार या हानिकारक साथी-दबाव की स्थिति में समय पर सहायता और संरक्षण दें।
प्रश्न 14. अवांछित व्यवहार को हतोत्साहित करने के लिए शिक्षक के रूप में जो रणनीतियाँ हैं, किन्हीं दो का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
- ध्यानपूर्वक निरीक्षण एवं कारण-विश्लेषण: शिक्षक विद्यार्थी के अवांछित व्यवहार का निरीक्षण करके यह समझे कि वह व्यवहार किन परिस्थितियों में और किन कारणों से उत्पन्न हो रहा है। कारण ज्ञात होने पर उचित परामर्श और सहायता दी जा सकती है।
- अस्थायी पृथकीकरण एवं सकारात्मक पुनर्निर्देशन: यदि विद्यार्थी का आक्रामक व्यवहार अन्य बच्चों को प्रभावित कर रहा हो, तो उसे कुछ समय के लिए विवाद की स्थिति से अलग किया जा सकता है। बाद में उससे शांतिपूर्वक बातचीत कर उचित व्यवहार की ओर प्रेरित किया जाए और वांछित व्यवहार को सकारात्मक पुनर्बलन दिया जाए।
प्रश्न 15. वैश्वीकरण के बाधक तत्व कौन-कौन से हैं?
उत्तर: वैश्वीकरण की प्रक्रिया में अनेक प्रकार की बाधाएँ उत्पन्न हो सकती हैं। प्रमुख बाधक तत्व हैं—
- राजनीतिक एवं नीतिगत बाधाएँ: देशों के बीच नीतिगत मतभेद, व्यापारिक प्रतिबन्ध, संघर्ष तथा राजनीतिक अस्थिरता वैश्विक सहयोग को प्रभावित कर सकते हैं।
- भाषायी बाधाएँ: विभिन्न भाषाओं के कारण संचार तथा ज्ञान के आदान-प्रदान में कठिनाई हो सकती है।
- भौतिक एवं अवसंरचनात्मक बाधाएँ: परिवहन, संचार, तकनीक और डिजिटल सुविधाओं की असमान उपलब्धता वैश्विक सम्पर्क को सीमित कर सकती है।
- धार्मिक एवं सांस्कृतिक भिन्नताएँ: विभिन्न सामाजिक मान्यताओं और सांस्कृतिक परम्पराओं को न समझ पाने से परस्पर सहयोग में कठिनाई हो सकती है।
- मनोवैज्ञानिक बाधाएँ: पूर्वाग्रह, अविश्वास, परिवर्तन का भय और संकीर्ण दृष्टिकोण वैश्विक सहयोग में बाधा उत्पन्न कर सकते हैं।
प्रश्न 16. राष्ट्रीय एकता के बाधक तत्वों का वर्णन कीजिए।
उत्तर: राष्ट्रीय एकता से आशय विविधताओं के बावजूद नागरिकों में राष्ट्र के प्रति एकता, समानता, सहयोग और अपनत्व की भावना से है। राष्ट्रीय एकता के प्रमुख बाधक तत्व निम्नलिखित हैं—
- साम्प्रदायिकता: धर्म के आधार पर वैमनस्य और विभाजन की भावना सामाजिक सद्भाव को प्रभावित करती है।
- संकीर्ण क्षेत्रीयता: राष्ट्रीय हित से ऊपर केवल क्षेत्रीय हित रखने की प्रवृत्ति एकता में बाधा बन सकती है।
- भाषायी संकीर्णता: अपनी भाषा को श्रेष्ठ मानकर अन्य भाषाओं या भाषायी समूहों के प्रति भेदभाव करना तनाव उत्पन्न कर सकता है।
- जातिगत एवं सामाजिक भेदभाव: जाति अथवा सामाजिक पहचान के आधार पर असमान व्यवहार सामाजिक एकता को कमजोर करता है।
- आर्थिक एवं सामाजिक विषमता: अवसरों और संसाधनों में अत्यधिक असमानता अलगाव और असन्तोष को बढ़ा सकती है।
- अफवाह एवं दुष्प्रचार: झूठी या भ्रामक सूचनाएँ विभिन्न समुदायों के बीच अविश्वास और तनाव उत्पन्न कर सकती हैं।
प्रश्न 17. नैतिक शिक्षा से आप क्या समझते हैं? समझाइए।
उत्तर: नैतिक शिक्षा वह शिक्षा है जिसके माध्यम से व्यक्ति में उचित-अनुचित का विवेक तथा सत्य, ईमानदारी, दया, सहानुभूति, न्याय, कर्तव्यनिष्ठा, अनुशासन और उत्तरदायित्व जैसे नैतिक मूल्यों का विकास किया जाता है।
नैतिक शिक्षा का उद्देश्य केवल उपदेश देना नहीं, बल्कि बालक के व्यवहार में सकारात्मक परिवर्तन लाना है। परिवार और विद्यालय दोनों इसमें महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। शिक्षक एवं अभिभावक अपने व्यवहार द्वारा आदर्श प्रस्तुत करें, नैतिक निर्णय लेने के अवसर दें और बच्चों को दूसरों के अधिकारों तथा गरिमा का सम्मान करना सिखाएँ।
प्रश्न 18. निम्नांकित में से किन्हीं दो पर टिप्पणी लिखिए—
(1) मनोवैज्ञानिक हिंसा
(2) अनुबन्धन
(3) पर्यावरणीय सन्तुलन हेतु सतत् विकास
उत्तर:
(1) मनोवैज्ञानिक हिंसा: ऐसा व्यवहार जो किसी व्यक्ति को भय, अपमान, मानसिक पीड़ा, असुरक्षा या भावनात्मक क्षति पहुँचाए, मनोवैज्ञानिक हिंसा कहलाता है। इसमें धमकी देना, बार-बार अपमानित करना, डराना, नियंत्रित करना, तिरस्कार करना तथा मानसिक उत्पीड़न सम्मिलित हो सकते हैं।
(2) अनुबन्धन: अनुबन्धन अधिगम की वह प्रक्रिया है जिसमें किसी उद्दीपक और अनुक्रिया के बीच सम्बन्ध स्थापित हो जाता है। पावलॉव के शास्त्रीय अनुबन्धन में एक तटस्थ उद्दीपक को प्राकृतिक उद्दीपक के साथ बार-बार प्रस्तुत करने पर वह स्वयं भी अनुकूलित अनुक्रिया उत्पन्न करने लगता है।
(3) पर्यावरणीय सन्तुलन हेतु सतत् विकास: सतत् विकास का अर्थ वर्तमान आवश्यकताओं को इस प्रकार पूरा करना है कि भावी पीढ़ियों की अपनी आवश्यकताओं को पूरा करने की क्षमता से समझौता न हो। पर्यावरणीय सन्तुलन के लिए प्राकृतिक संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग, प्रदूषण नियन्त्रण, जल एवं ऊर्जा संरक्षण, जैव-विविधता की रक्षा और नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देना आवश्यक है।
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