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PYQ 2016 • आरम्भिक स्तर पर भाषा एवं गणित के पठन लेखन-क्षमता का विकास

आरम्भिक स्तर पर भाषा एवं गणित के पठन लेखन-क्षमता का विकास Previous Year Paper 2016

UP DELED Semester 4 आरम्भिक स्तर पर भाषा एवं गणित के पठन लेखन-क्षमता का विकास Previous Year Question Paper 2016 with solution.

Section 1 वस्तुनिष्ठ प्रश्न

वस्तुनिष्ठ प्रश्न

प्रश्न 1. हिन्दी में स्वर होते हैं-

(a) 10

(b) 11

(c) 9

(d) 14

उत्तर: (b) 11

हिन्दी में परम्परागत रूप से 11 स्वर माने जाते हैं- अ, आ, इ, ई, उ, ऊ, ऋ, ए, ऐ, ओ, औ।

प्रश्न 2. मनुष्य के उच्चारणोपयोगी अवयव हैं-

(a) काकल

(b) कंठ

(c) दंत

(d) उपर्युक्त सभी

उत्तर: (d) उपर्युक्त सभी

काकल, कंठ और दंत ध्वनि-उच्चारण में प्रयुक्त होने वाले उच्चारणोपयोगी अवयवों में सम्मिलित हैं।

प्रश्न 3. ध्वनि-विज्ञान में अध्ययन किया जाता है-

(a) मानव के मुख से निकली श्वास का

(b) मानव के मुख से निकली ध्वनि का

(c) मानव के मुख से निकली चीख का

(d) इनमें से कोई नहीं

उत्तर: (b) मानव के मुख से निकली ध्वनि का

ध्वनि-विज्ञान में मानव-वाणी की ध्वनियों के उत्पादन, उच्चारण एवं उनके ध्वन्यात्मक स्वरूप का अध्ययन किया जाता है।

प्रश्न 4. ओष्ठाकृति के आधार पर स्वर होते हैं-

(a) वृत्ताकार स्वर

(b) अवृत्ताकार स्वर

(c) (a) और (b) दोनों

(d) इनमें से कोई नहीं

उत्तर: (c) (a) और (b) दोनों

  1. वृत्ताकार स्वर- जिन स्वरों के उच्चारण में ओष्ठ गोलाकार हो जाते हैं। जैसे- उ, ऊ, ओ, औ।
  2. अवृत्ताकार स्वर- जिन स्वरों के उच्चारण में ओष्ठ गोलाकार नहीं होते। जैसे- अ, आ, इ, ई, ऋ, ए, ऐ।

प्रश्न 5. व्यंजनों को उच्चारण की दृष्टि से बाँटा गया है-

(a) 2 भागों में

(b) 3 भागों में

(c) 4 भागों में

(d) 5 भागों में

उत्तर: (b) 3 भागों में

उच्चारण की प्रकृति के आधार पर व्यंजनों को मुख्यतः स्पर्श, अन्तःस्थ और ऊष्म तीन वर्गों में बाँटा जाता है।

प्रश्न 6. ध्वनियों के उच्चारण में होने वाले यत्न को 'प्रयत्न' कहा जाता है, यह होते हैं-

(a) स्वर तन्त्री में कम्पन से

(b) श्वास की मात्रा से

(c) जिह्वा तथा अन्य अवयवों द्वारा

(d) उपर्युक्त सभी

उत्तर: (d) उपर्युक्त सभी

ध्वनि-उच्चारण में स्वर-तन्त्रियों का कम्पन, श्वास-वायु की मात्रा तथा जिह्वा एवं अन्य उच्चारण-अवयवों की क्रिया महत्वपूर्ण होती है।

प्रश्न 7. निम्नलिखित में दन्त्य व्यंजन है-

(a) 'न'

(b) 'क'

(c) 'च'

(d) 'ड'

उत्तर: (a) 'न'

त-वर्ग के व्यंजन त, थ, द, ध, न दन्त्य माने जाते हैं। इनके उच्चारण में जिह्वा का अग्रभाग दाँतों के निकट या उनसे स्पर्श करता है।

प्रश्न 8. आश्चर्य, हर्ष, शोक, उत्साह इत्यादि व्यक्त करने में प्रयोग होता है-

(a) अल्प विराम का

(b) अर्द्ध विराम का

(c) पूर्ण विराम का

(d) विस्मयादि बोधक का

उत्तर: (d) विस्मयादिबोधक का

आश्चर्य, हर्ष, शोक, उत्साह आदि तीव्र भावों को व्यक्त करने के लिए विस्मयादिबोधक चिह्न (!) का प्रयोग किया जाता है।

प्रश्न 9. 'ढ' वर्ण किस वर्ग में आता है-

(a) 'क' वर्ग

(b) 'ट' वर्ग

(c) 'च' वर्ग

(d) इनमें से कोई नहीं

उत्तर: (b) 'ट' वर्ग

'ढ' ट-वर्ग का व्यंजन है। ट-वर्ग के व्यंजनों का उच्चारण मूर्धा से होता है, इसलिए इन्हें मूर्धन्य व्यंजन भी कहा जाता है।

प्रश्न 10. 13 संख्या है-

(a) सम

(b) विषम

(c) उपर्युक्त दोनों

(d) इनमें से कोई नहीं

उत्तर: (b) विषम

जो पूर्ण संख्या 2 से पूर्णतः विभाजित नहीं होती, वह विषम संख्या कहलाती है। इसलिए 13 विषम संख्या है।

प्रश्न 11. अवरोही क्रम है-

(a) 11, 9, 7, 5, 2

(b) 2, 5, 7, 9, 11

(c) उपर्युक्त दोनों

(d) इनमें से कोई नहीं

उत्तर: (a) 11, 9, 7, 5, 2

बड़ी संख्या से छोटी संख्या की ओर लिखे गए क्रम को अवरोही क्रम कहते हैं।

प्रश्न 12. भाग की संक्रियाएँ होती है-

(a) भाज्य

(b) भाजक

(c) भागफल

(d) उपर्युक्त सभी

उत्तर: (d) उपर्युक्त सभी

  • भाज्य- जिस संख्या में भाग दिया जाता है।
  • भाजक- जिस संख्या से भाग दिया जाता है।
  • भागफल- भाग देने पर प्राप्त परिणाम।
  • शेषफल- भाग देने के बाद बची हुई संख्या।

भाज्य = भाजक × भागफल + शेषफल

प्रश्न 13. भाषा शिक्षण के पक्ष हैं-

(a) पठन

(b) लेखन

(c) व्याकरण

(d) उपर्युक्त सभी

उत्तर: (d) उपर्युक्त सभी

दिए गए विकल्पों के अनुसार पठन, लेखन तथा व्याकरण भाषा-शिक्षण के महत्वपूर्ण पक्ष हैं।

प्रश्न 14. भाषिक अज्ञानता सम्बन्धी समस्या है-

(a) लिपि सम्बन्धी अज्ञानता

(b) व्याकरण का अपर्याप्त ज्ञान

(c) सही विराम चिह्नों के प्रयोग का अभाव

(d) उपर्युक्त सभी

उत्तर: (d) उपर्युक्त सभी

लिपि का अपर्याप्त ज्ञान, व्याकरण का अपर्याप्त ज्ञान तथा विराम चिह्नों के सही प्रयोग का अभाव भाषिक अज्ञानता से सम्बन्धित समस्याएँ हैं।

प्रश्न 15. 99 में दहाई है-

(a) 8

(b) 9

(c) 10

(d) 11

उत्तर: (b) 9

99 में दहाई के स्थान पर 9 और इकाई के स्थान पर भी 9 है।

Section 2 अति लघु उत्तरीय प्रश्न

अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 16. लेखन का अर्थ बताइए।

उत्तर: विचारों, भावों एवं सूचनाओं को भाषा के स्वीकृत लिपि-चिह्नों द्वारा लिखित रूप में अभिव्यक्त करने की प्रक्रिया को लेखन कहते हैं।

प्रश्न 17. उच्चारण की दृष्टि से व्यंजन की तीन श्रेणियाँ लिखिए।

उत्तर: उच्चारण की दृष्टि से व्यंजन की तीन प्रमुख श्रेणियाँ हैं- स्पर्श व्यंजन, अन्तःस्थ व्यंजन तथा ऊष्म व्यंजन।

प्रश्न 18. 'अयोगवाह' के तीन प्रकार लिखिए।

उत्तर: इस पाठ्य-वर्गीकरण के अनुसार अयोगवाह के तीन प्रकार हैं- अनुस्वार (ं), अनुनासिक (ँ) तथा विसर्ग (ः)।

प्रश्न 19. 'विकारी' शब्द किसे कहते हैं?

उत्तर: जिन शब्दों के रूप में लिंग, वचन, कारक, पुरुष या काल आदि के कारण परिवर्तन होता है, उन्हें विकारी शब्द कहते हैं। संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण और क्रिया इसके प्रमुख वर्ग हैं।

प्रश्न 20. 'ह्रस्व' के आधार पर हिन्दी ध्वनियों के नाम लिखिए।

उत्तर: जिन स्वरों के उच्चारण में एक मात्रा का समय लगता है, वे ह्रस्व स्वर कहलाते हैं। हिन्दी के ह्रस्व स्वर हैं- अ, इ, उ, ऋ।

प्रश्न 21. 'बलाघात' क्या है? ध्वनि-विज्ञान के आधार पर स्पष्ट कीजिए।

उत्तर: उच्चारण में किसी ध्वनि, अक्षर, शब्द अथवा वाक्यांश पर अन्य की अपेक्षा अधिक जोर देने को बलाघात कहते हैं। इससे अर्थ और भाव की स्पष्टता बढ़ती है।

प्रश्न 22. जिह्वा के आधार पर हिन्दी ध्वनियों का वर्गीकरण कर उनके नाम लिखिए।

उत्तर: जिह्वा की स्थिति के आधार पर स्वर तीन प्रकार के माने जाते हैं- अग्र स्वर- इ, ई, ए, ऐ; मध्य स्वर- अ; पश्च स्वर- आ, उ, ऊ, ओ, औ। आगत स्वर 'ऑ' भी पश्च स्वर के रूप में रखा जाता है।

प्रश्न 23. 'ऋ' स्वर का उच्चारण स्थान क्या है?

उत्तर: पारम्परिक उच्चारण-वर्गीकरण में 'ऋ' का उच्चारण स्थान मूर्धा माना जाता है।

प्रश्न 24. 'ऊष्म' व्यंजन क्या हैं? लिखिए।

उत्तर: जिन व्यंजनों के उच्चारण में वायु घर्षण के साथ निकलती है, उन्हें ऊष्म व्यंजन कहते हैं। ये हैं- श, ष, स और ह।

प्रश्न 25. 'अनुनासिक' स्वर को परिभाषित कीजिए।

उत्तर: जिन स्वरों के उच्चारण में वायु मुख तथा नासिका दोनों से निकलती है, वे अनुनासिक स्वर कहलाते हैं। जैसे- माँ, चाँद, आँख।

प्रश्न 26. 'हलन्त' से क्या अभिप्राय है? लिखिए।

उत्तर: व्यंजन में निहित स्वर के अभाव को दिखाने के लिए व्यंजन के नीचे लगाया जाने वाला चिह्न हलन्त (्) कहलाता है। जैसे- पश्चात् में 'त्'।

प्रश्न 27. अंग्रेज़ी वर्णमाला में कितने वर्ण होते हैं? लिखिए।

उत्तर: अंग्रेज़ी वर्णमाला में 26 अक्षर होते हैं। इनमें 5 vowel letters- a, e, i, o, u तथा शेष 21 consonant letters हैं।

प्रश्न 28. 'च' वर्ग की ध्वनियाँ कितनी हैं? नाम लिखिए।

उत्तर: 'च' वर्ग की पाँच ध्वनियाँ हैं- च, छ, ज, झ, ञ।

प्रश्न 29. गुणा में कौन-कौन सी संक्रियाएँ होती हैं? लिखिए।

उत्तर: गुणा के मुख्य अवयव हैं- गुण्य, गुणक तथा गुणनफल।

प्रश्न 30. 345 में सभी अंकों का स्थानीयमान लिखिए।

उत्तर:

सैकड़ा दहाई इकाई
3 4 5

5 × 1 = 5
4 × 10 = 40
3 × 100 = 300

Section 3 लघु उत्तरीय प्रश्न

लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 31. लेखन की अशुद्धियों को दूर करने के उपाय बताइए।

उत्तर: लेखन की अशुद्धियों को दूर करने के प्रमुख उपाय निम्नलिखित हैं-

  1. व्याकरण एवं वर्तनी के नियमों का समुचित ज्ञान कराना।
  2. शुद्ध उच्चारण के साथ शुद्ध लेखन का नियमित अभ्यास कराना।
  3. वर्णमाला, मात्राओं तथा बारहखड़ी का पर्याप्त अभ्यास कराना।
  4. नियमित पठन एवं वाचन का अभ्यास कराना।
  5. लिपि एवं वर्णों की सही आकृति का ज्ञान कराना।
  6. पहले शुद्धता पर ध्यान देते हुए धीरे-धीरे लेखन की गति बढ़ाना।
  7. शब्द-पुस्तिका बनवाकर कठिन एवं बार-बार गलत लिखे जाने वाले शब्दों का अभ्यास कराना।
  8. अध्यापक द्वारा व्यक्तिगत ध्यान एवं समय पर त्रुटि-सुधार करना।
  9. संयुक्त एवं मिश्रित व्यंजनों के लेखन का विशेष अभ्यास कराना।
  10. 'व' और 'ब' जैसे भ्रम उत्पन्न करने वाले वर्णों एवं ध्वनियों का भेद स्पष्ट कराना।
  11. अल्पप्राण एवं महाप्राण ध्वनियों के शुद्ध उच्चारण और लेखन का अभ्यास कराना।
  12. दृष्टि, श्रवण अथवा वाक्-संबंधी कठिनाई होने पर आवश्यक शैक्षिक एवं चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध कराना।

प्रश्न 32. 'विधान-वाचक' एवं 'निषेध-वाचक' वाक्य में क्या अन्तर है? उदाहरण देकर समझाइए।

उत्तर:

  • विधानवाचक वाक्य- जिन वाक्यों में किसी क्रिया के करने या होने की सामान्य सूचना दी जाती है, उन्हें विधानवाचक वाक्य कहते हैं। जैसे- सूर्य पश्चिम में अस्त होता है।
  • निषेधवाचक वाक्य- जिन वाक्यों में किसी कार्य के न होने या निषेध का भाव प्रकट होता है, उन्हें निषेधवाचक वाक्य कहते हैं। जैसे- वह प्रतिदिन योग नहीं करता है।

प्रश्न 33. ध्वनि के आवश्यक मूल-तत्व क्या हैं?

उत्तर: प्रभावी मौखिक अभिव्यक्ति के संदर्भ में ध्वनि के प्रमुख तत्व हैं-

  1. शुद्धता- ध्वनियों और शब्दों का मानक एवं शुद्ध उच्चारण होना चाहिए।
  2. सार्थकता- वाणी अर्थपूर्ण हो तथा अनावश्यक विस्तार और पुनरावृत्ति से बचना चाहिए।
  3. स्पष्टता- उच्चारण इतना स्पष्ट हो कि श्रोता उचित अर्थ आसानी से ग्रहण कर सके।
  4. तरंगता- वाणी में भावानुसार उचित आरोह-अवरोह, बलाघात एवं स्वराघात होना चाहिए; पूर्णतः एकसमान वाचन नीरस हो जाता है।

प्रश्न 34. स्वर के भेद किन-किन आधार पर किए गए हैं? एक-एक उदाहरण देकर समझाइए।

उत्तर: स्वरों का वर्गीकरण मुख्यतः निम्न आधारों पर किया जाता है-

  1. उच्चारण में लगने वाले समय या मात्रा के आधार पर।
  2. जिह्वा की स्थिति के आधार पर।
  3. मुखद्वार के खुलने की स्थिति के आधार पर।
  4. ओष्ठाकृति के आधार पर।

1. उच्चारण के समय या मात्रा के आधार पर-

  • ह्रस्व स्वर- जिनके उच्चारण में एक मात्रा का समय लगता है। जैसे- अ, इ, उ, ऋ।
  • दीर्घ स्वर- जिनके उच्चारण में लगभग दो मात्राओं का समय लगता है। जैसे- आ, ई, ऊ, ए, ऐ, ओ, औ।
  • प्लुत स्वर- जिनका उच्चारण तीन मात्राओं तक खींचकर किया जाता है। जैसे- ओऽऽम्।

2. जिह्वा की स्थिति के आधार पर-

  • अग्र स्वर- इ, ई, ए, ऐ।
  • मध्य स्वर- अ।
  • पश्च स्वर- आ, उ, ऊ, ओ, औ।

3. मुखद्वार के खुलने के आधार पर-

  • विवृत स्वर- आ।
  • अर्धविवृत स्वर- अ, ऐ, औ।
  • अर्धसंवृत स्वर- ए, ओ।
  • संवृत स्वर- इ, ई, उ, ऊ, ऋ।

4. ओष्ठाकृति के आधार पर-

  • वृत्ताकार स्वर- उ, ऊ, ओ, औ।
  • अवृत्ताकार स्वर- अ, आ, इ, ई, ऋ, ए, ऐ।

प्रश्न 35. गिनती सिखाने सम्बन्धी मुख्य बातें बताइए।

उत्तर: गिनती सिखाते समय निम्न बातों का ध्यान रखना चाहिए-

  1. सबसे पहले बच्चे के पूर्वज्ञान और वर्तमान संख्या-बोध का पता लगाना चाहिए।
  2. मूर्त वस्तुओं जैसे कंकड़, खिलौने, फल, छड़ियाँ आदि से गिनती का अभ्यास कराना चाहिए।
  3. सीखने में रुचि बनाए रखने के लिए खेल, गीत, कहानी एवं गतिविधियों का प्रयोग करना चाहिए।
  4. बच्चे से वस्तुओं को एक-एक करके छुआकर या अलग रखवाकर गिनवाना चाहिए, ताकि एक-एक संगति की समझ विकसित हो।
  5. मौखिक गिनती के बाद संख्या-चिह्नों की पहचान तथा क्रमबद्धता का अभ्यास कराना चाहिए।

प्रश्न 36. दहाई एवं सैकड़ा का अभिप्राय स्पष्ट कीजिए।

उत्तर:

  • दहाई- दस इकाइयों का एक समूह एक दहाई कहलाता है।
    10 इकाई = 1 दहाई
    20 इकाई = 2 दहाई
    40 इकाई = 4 दहाई
  • सैकड़ा- दस दहाइयों अथवा सौ इकाइयों का एक समूह एक सैकड़ा कहलाता है।
    100 इकाई = 10 दहाई = 1 सैकड़ा
    उदाहरण- 185 = 1 सैकड़ा + 8 दहाई + 5 इकाई
    = 1 × 100 + 8 × 10 + 5 × 1

प्रश्न 37. आरोही एवं अवरोही क्रम किसे कहते हैं? उदाहरण सहित समझाइए।

उत्तर:

  • आरोही क्रम- संख्याओं को छोटी से बड़ी संख्या की ओर क्रमबद्ध करना आरोही क्रम कहलाता है। उदाहरण- 8, 10, 5, 3, 12 का आरोही क्रम 3, 5, 8, 10, 12 है।
  • अवरोही क्रम- संख्याओं को बड़ी से छोटी संख्या की ओर क्रमबद्ध करना अवरोही क्रम कहलाता है। उदाहरण- 5, 25, 48, 6, 10 का अवरोही क्रम 48, 25, 10, 6, 5 है।

प्रश्न 38. शुद्ध, सुडौल तथा आकर्षक लेखन में अनुलेख, सुलेख तथा श्रुतलेख के महत्व पर प्रकाश डालिए।

उत्तर:

  • अनुलेख- किसी आदर्श लिखावट को देखकर उसी के अनुरूप लिखने का अभ्यास अनुलेख कहलाता है। इससे वर्णों की सही आकृति, आकार, दूरी तथा लेखन-अनुशासन का विकास होता है।
  • सुलेख- शुद्ध, स्पष्ट, सुडौल और आकर्षक लिखावट का अभ्यास सुलेख कहलाता है। इससे लिखावट पठनीय, व्यवस्थित एवं आकर्षक बनती है।
  • श्रुतलेख- शिक्षक द्वारा बोले गए शब्दों या वाक्यों को सुनकर लिखना श्रुतलेख कहलाता है। इससे श्रवण-कौशल, शुद्ध वर्तनी तथा सुनी हुई ध्वनियों को सही लिखित रूप में बदलने की क्षमता विकसित होती है।

प्रश्न 39. समानार्थी शब्दों का आशय उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिए।

उत्तर: जिन शब्दों के अर्थ समान या बहुत निकट हों, उन्हें समानार्थी अथवा पर्यायवाची शब्द कहते हैं।

  • अश्व- घोड़ा, तुरंग, घोटक।
  • इच्छा- आकांक्षा, चाह, अभिलाषा, कामना।
  • इन्द्र- देवेन्द्र, सुरेन्द्र, पुरन्दर।
  • सूर्य- दिनकर, दिवाकर, भानु, भास्कर, आदित्य।

प्रश्न 40. भाषा-शिक्षण में शारीरिक समस्याएँ क्या हैं? उदाहरण देकर स्पष्ट कीजिए।

उत्तर: भाषा सीखने और अभिव्यक्ति करने में कुछ शारीरिक कठिनाइयाँ पठन, लेखन, श्रवण तथा उच्चारण को प्रभावित कर सकती हैं। प्रमुख उदाहरण हैं-

  • उच्चारण-अवयवों की समस्या- जिह्वा, तालु, होंठ, दाँत, कंठ आदि में संरचनात्मक या क्रियात्मक कठिनाई होने से कुछ ध्वनियों का स्पष्ट उच्चारण कठिन हो सकता है।
  • श्रवण सम्बन्धी कठिनाई- ठीक से सुन न पाने पर ध्वनियों में भेद, शुद्ध उच्चारण तथा मौखिक भाषा सीखने में कठिनाई हो सकती है।
  • दृष्टि सम्बन्धी कठिनाई- दृष्टि-दोष के कारण अक्षर पहचानने, पढ़ने अथवा लिखित सामग्री ग्रहण करने में समस्या हो सकती है।
  • वाक् सम्बन्धी कठिनाई- हकलाना, तुतलाना या कुछ ध्वनियों के उच्चारण में कठिनाई मौखिक अभिव्यक्ति को प्रभावित कर सकती है।
  • सूक्ष्म पेशीय समन्वय की कठिनाई- हाथ एवं उँगलियों के नियंत्रण में कठिनाई होने पर लेखन की गति, आकार एवं स्पष्टता प्रभावित हो सकती है।

ऐसे विद्यार्थियों के लिए व्यक्तिगत ध्यान, उपयुक्त शिक्षण-सहायता तथा आवश्यकता होने पर विशेषज्ञ या चिकित्सकीय सहयोग उपयोगी होता है।

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