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PYQ 2020 • आरम्भिक स्तर पर भाषा एवं गणित के पठन लेखन-क्षमता का विकास

आरम्भिक स्तर पर भाषा एवं गणित के पठन लेखन-क्षमता का विकास Previous Year Paper 2020

UP DELED Semester 4 आरम्भिक स्तर पर भाषा एवं गणित के पठन लेखन-क्षमता का विकास Previous Year Question Paper 2020 with solution.

Section 1 वस्तुनिष्ठ प्रश्न

वस्तुनिष्ठ प्रश्न

वस्तुनिष्ठ प्रश्न

प्रश्न 1. क्ष, त्र, ज्ञ व्यंजन है-

(a) लुंठित

(b) ऊष्म

(c) संयुक्त

(d) उत्क्षिप्त ।

उत्तर: (c) : हिंदी वर्णमाला में क्ष, त्र, ज्ञ तथा श्र को संयुक्त व्यंजन कहते हैं क्योंकि ये दो या दो से अधिक व्यंजनों के मेल से बने होते हैं। जैसे- क्ष = क् + ष, त्र = त् + र, ज्ञ = ज् + ञ, श्र = श् + र

प्रश्न 2. जिन शब्दों में काम का होना या करना प्रकट होता है, उन्हें कहते हैं-

(a) संज्ञा

(b) सर्वनाम

(c) क्रिया

(d) विशेषण।

उत्तर: (c) : क्रिया जिन शब्दों में काम का होना या करना प्रकट होता है उन्हें क्रिया कहते हैं। जैसे : पढ़ना, खाना, पीना, जाना इत्यादि ।

प्रश्न 3. जिन शब्दों के अर्थ समान होते हैं उन्हें कहते हैं-

(a) तत्सम शब्द

(b) पर्यायवाची शब्द

(c) विलोम शब्द

(d) विशेषण शब्द।

उत्तर: (b) : जिन शब्दों के अर्थ समान होते हैं, उन्हें पर्यायवाची या समानार्थी शब्द कहते हैं। जैसेः- हवा का पर्यायवाची शब्द पवन, वायु, समीर, वात, अनिल इत्यादि है।

प्रश्न 4. मुखाकृति के आधार पर स्वरों का वर्गीकरण है-

(a) अग्र स्वर

(b) पश्च स्वर

(c) संवृत्त स्वर

(d) ये सभी।

उत्तर: (c) : मुखाकृति के आधार पर स्वरों का वर्गीकरण-

  1. विवृत्त स्वर
  2. अर्द्धविवृत्त स्वर
  3. संवृत्त स्वर
  4. अर्द्धसंवृत्त स्वर

प्रश्न 5. वे संख्याएँ जो 2 से पूर्ण रूप से विभाजित नहीं होती है, उन्हें कहते हैं-

(a) विषम संख्या

(b) भाज्य संख्या

(c) सम संख्या

(d) अपरिमेय संख्या

उत्तर: (a) : वे संख्याएँ जो 2 से पूर्ण रूप से विभाजित नहीं होती है, उन्हें विषम संख्या कहते हैं। जैसे: 3, 5, 7, 9, 11 आदि विषम संख्या है।

प्रश्न 6. एक परिमेय संख्या को किस रूप में व्यक्त किया जा सकता है?

(a) q ≠ 0

(b) p/q

(c) p ≠ 0

(d) कोई नहीं।

उत्तर: (b) : परिमेय संख्याएँ :- ऐसी संख्याएँ जिन्हें p/q के रुप में व्यक्त किया जा सकता हैं परिमेय संख्याएँ कहलाती है। जैसे:- 2/3, 5/6, 1/2 आदि परिमेय संख्याएँ है।

प्रश्न 7. शून्य की खोज कहाँ हुई थी?

(a) यूनान

(b) ब्रिटेन

(c) बेबिलोनिया

(d) भारत।

उत्तर: (d) : शून्य की खोज भारत में आर्यभट्ट द्वारा की गई थी।

प्रश्न 8. 990 में 9 का स्थानीय मान है -

(a) 10

(b) 100

(c) दोनों

(d) कोई नहीं।

उत्तर: (c) : दोनों। 990 में 9 का स्थानीय मान 90 तथा 900 है। (0 × 1 = 0, 9 × 10 = 90, 9 × 100 = 900)

प्रश्न 9. "आँचल में है दूध और आँखों में पानी" यह कथन है-

(a) मैथिलीशरण गुप्त

(b) सुमित्रानन्दन पन्त

(c) जयशंकर प्रसाद

(d) सुभद्राकुमारी चौहान।

उत्तर: (a) : "आँचल में है दूध और आँखों में पानी" यह कथन 'मैथिलीशरण गुप्त' जी का है।

प्रश्न 10. 1 से 9 तक की संख्याओं का ज्ञात छोटे छात्रों को किन माध्यमों से कराया जाना चाहिए?

(a) खेल द्वारा

(b) कविता द्वारा

(c) मूर्त वस्तुओं द्वारा

(d) उपर्युक्त सभी।

उत्तर: (d) : गणित एक विज्ञान है जो तार्किक तर्क, मात्रात्मक गणना, आकृतियों का वर्णन करने वाले गणन के अभ्यास, विषय वस्तु के अमूर्तन आदि से संबंधित है। गणित दैनिक जीवन में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। अतः शिक्षिका 1 से 9 तक की संख्याओं का ज्ञान छोटे छात्रों को खेल द्वारा, कविता द्वारा तथा मूर्त वस्तुओं द्वारा करा सकती है।

प्रश्न 11. निम्नलिखित में दन्त्य व्यंजन है-

(a) क

(b) प

(c) ड़

(d) न।

उत्तर: (d) : दन्त्य जिन वर्णों का उच्चारण ऊपर के दाँतों पर जीभ के लगने से होता है, उसे दन्त्य व्यंजन कहते हैं। जैसेः त, थ, द, ध, न, ल और दन्त्य स।

प्रश्न 12. सबसे छोटी सम अभाज्य संख्या है-

(a) 1

(b) 2

(c) 3

(d) 5

उत्तर: (b) : सबसे छोटी सम अभाज्य संख्या 2 है।

प्रश्न 13. 22 × 34 का गुणनफल है-

(a) 748

(b) 874

(c) 487

(d) कोई नहीं।

उत्तर: (a) : 748

प्रश्न 14. गणित की मूल संक्रियाएँ हैं-

(a) जोड़-घटाना

(b) भाग-गुणा

(c) (a) और (b) दोनों

(d) इनमें से कोई नहीं।

उत्तर: (c) : गणित की 4 मूल संक्रियाएँ हैं- (1) जोड़ (+) (2) घटाना (-) (3) गुणा (×) (4) भाग (÷)

प्रश्न 15. 'त' वर्ग का उच्चारण स्थान है-

(a) स्पर्श

(b) कंठ

(c) ओष्ठ

(d) दन्त।

उत्तर: (d) : 'त' वर्ग का उच्चारण स्थान दन्त है।

Section 2 अति लघु उत्तरीय प्रश्न

अति लघु उत्तरीय प्रश्न

अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 16. वर्ण का अर्थ बताइए।

उत्तर: वर्ण उस मूल ध्वनि को कहते है, जिसका खण्ड या टुकड़ा नहीं किए जा सकते हैं अर्थात् वर्ण वैसी मूल ध्वनि है जो अखंडनीय है। यह भाषा की सबसे छोटी इकाई या प्राथमिक इकाई है वर्ण को भाषा की बुनियाद भी कहा जाता है। जैसे अ, आ, क, ख, ग, आदि। हिन्दी भाषा में प्रत्येक मूल ध्वनि के लिए अलग- अलग अक्षर या वर्ण का प्रयोग होता है। वर्ण दो प्रकार के होते हैं (1) स्वर (2) व्यंजन

प्रश्न 17. हिन्दी भाषा सीखने के प्रमुख अंग कौन-कौन हैं?

उत्तर: हिन्दी भाषा सीखने के प्रमुख चार अंग हैं- (1) सुनना (2) बोलना (3) पढ़ना तथा (4) लिखना। सुनना भाषा सीखने का प्रमुख तथा प्रथम अंग है। चूँकि श्रवण और पढ़ने का उपयोग सूचना प्राप्त करने के लिए माध्यम के रूप में किया जाता है, इस प्रकार इन दो कौशलों को ग्रहणशील कौशल कहा जाता है।

प्रश्न 18. संयुक्त वाक्य किसे कहते हैं?

उत्तर: संयुक्त वाक्य - जिन वाक्यों में दो या दो से अधिक सरल वाक्यों का बोध होता है, उन्हें संयुक्त वाक्य कहते हैं। यह वाक्य विभिन्न योजकों जैसे और, अंत, या, तथा, एवं, इसलिए, फिर, भी, तो, किन्तु, परन्तु, लेकिन, पर आदि से जुड़े होते हैं। उदाहरण-राधा पढ़ाई कर रही है लेकिन राजा सो रहा है।

प्रश्न 19. कहानी शिक्षण से आप क्या समझते हैं?

उत्तर: कहानी शिक्षण - कहानी शिक्षण एक प्रभावी और प्रभावशाली शिक्षण तकनीक है जो छात्रों को स्वरूप, साहित्यिकता, नैतिकता और मानवीयता के माध्यम से सिखाती है। यह छात्रों के मन को प्रभावित करने और उन्हें बोलचाल के संकेतों को समझने का मार्ग दिखाने का एक मजबूत तरीका है। कहानी शिक्षण बच्चों में कल्पना-शीलता रचनात्मक क्षमता, ज्ञान में वृद्धि करने तथा बालकों के मनोरंजन व आनंद का सर्वश्रेष्ठ साधन है जो बालकों में विचार, कल्पना तथा तर्क शक्ति को विकसित करता है।

प्रश्न 20. सौभाग्य का विलोम शब्द लिखिए।

उत्तर: विलोम शब्द - भिन्न अर्थ वाले शब्दों को विपरीतार्थी अथवा विलोम शब्द कहा जाता है। जैसे :- सौभाग्य का विलोम शब्द दुर्भाग्य, हानि का विलोम शब्द लाभ।

प्रश्न 21. इकाई किसे कहते हैं?

उत्तर: मापन द्वारा ज्ञात राशि की निश्चित मात्रा को इकाई कहा जाता है।

प्रश्न 22. अंक का स्थानीय मान किसे कहते हैं?

उत्तर: स्थानीय मान का अर्थ होता है, कि वह अंक किस स्थान पर है जो इकाई पर है, दहाई पर है, सैकड़े पर है, हजार पर है, आदि। अर्थात, अंक सहित मान ही स्थानीय मान है। अथवा किसी संख्या के प्रत्येक अंक का मान स्थानीय मान कहलाता है। जैसे- 982 में 2 का स्थानीय मान लिखिए।
2 × 1 = 2
8 × 10 = 80
9 × 100 = 900
अतः 982 में 2 का स्थानीय मान 2 होगा ।

प्रश्न 23. सरल वाक्य किसे कहते हैं?

उत्तर: सरल वाक्य - जिन वाक्यों में केवल एक ही उद्देश्य और एक ही विधेय होता है, उन्हें साधारण वाक्य या सरल वाक्य कहते हैं। उदाहरण- मीना दौड़ती है। मोहन हँस कर बोला।

प्रश्न 24. विकारी शब्द किसे कहते हैं?

उत्तर: विकारी शब्द - विकारी का अर्थ है जो वाक्य की आवश्यकता के अनुसार बदला जा सके। अर्थात् ऐसे शब्द जो लिंग, वचन तथा काल से प्रभावित होकर अपना रूप बदलें, उन्हें विकारी शब्द कहा जाता है। जैसे- कुत्ता, कुत्ते, कुत्तों (संज्ञा), मैं, मुझे, हमें (सर्वनाम), अच्छा, अच्छे (विशेषण), खाते हैं, खाती है (क्रिया)। इनमें संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण और क्रिया विकारी शब्द है।

प्रश्न 25. 356 में सभी अंकों का स्थानीय मान लिखिए

उत्तर: 356 में सभी अंकों का स्थानीय मान:
6 × 1 = 6
5 × 10 = 50
3 × 100 = 300
अतः 356 में 6 का स्थानीय मान 6, 5 का स्थानीय मान 50 तथा 3 का स्थानीय मान 300 है।

प्रश्न 26. आरोही क्रम किसे कहते हैं?

उत्तर: आरोही क्रम - आरोही क्रम से हमारा तात्पर्य है बढ़ते हुए क्रम में। जब हम संख्याओं को सबसे छोटे से बड़े के क्रम में व्यवस्थित करते हैं। संख्याओं के इस प्रकार के क्रम को आरोही क्रम कहा जाता है। जैसे: 15, 18, 20, 31, 25 का आरोही क्रम लिखए।
आरोही क्रम: 15, 18, 20, 25, 31

प्रश्न 27. संख्यापूर्व तैयारी से आप क्या समझते हैं?

उत्तर: सामान्यतः बच्चे गिनती या संख्या सीखने से पहले कम-ज्यादा, उपर-नीचे, दूर-पास और बड़ा-छोटा आदि से परिचित होते हैं। इसे ही संख्यापूर्ण अवधारणा कहा जाता है। प्रारम्भिक स्तर पर हम देखते हैं कि बच्चे संख्या, गिनती का मतलब नहीं समझ पाते हैं जैसे-एक शिक्षक ने एक बच्चे से 18 लिखने का कहा तो उसने 81 लिखा इसका अर्थ है कि बच्चे को संख्या के स्थानीय मान का ज्ञान नहीं है। बच्चे में संख्या की समझ धीरे-धीरे विकसित होती है। अतः संख्या के अर्थ को समझने से पहली आवश्यकता इस बात की है कि बच्चे में 'वर्गों में बाँटना', क्रम में रखना तथा 'एक-एक' की संगति बताना जैसी छमताओं का विकास किया जाये।

प्रश्न 28. हंसपद विराम चिह्न से क्या तात्पर्य है?

उत्तर: हंसपद विराम चिन्ह (^) जब लिखने में भूल से कोई शब्द या पदबंध छूट जाता है तो उसे दिखाने के लिए यह चिन्ह लगाकर पंक्ति के ऊपर लिख देते हैं। जैसे- सुरेश ^ ही अच्छा लड़का है। अतः यहाँ 'सुरेश बहुत ही अच्छा लड़का है', होगा। इस चिन्ह को त्रुटिबोधक भी कहते हैं।

प्रश्न 29. आकाश के तीन समानार्थी शब्द लिखिए।

उत्तर: समानार्थी शब्द - समानार्थी शब्द वह शब्द है जिसका अर्थ दूसरे शब्द के समान होता है। जैसे-आकाश का समानार्थी आसमान, गगन, नभ आदि।

प्रश्न 30. प्राकृत संख्या किसे कहते हैं?

उत्तर: प्राकृत संख्या - संख्या एक से अंनत तक सभी धनात्मक संख्याओं को प्राकृतिक संख्या कहते हैं। जैसे: 1, 2, 3, 4, 5......∞। सभी प्राकृतिक संख्याएँ पूर्ण संख्याएँ होती है परन्तु सभी पूर्ण संख्याएँ प्राकृतिक संख्याएँ नहीं होती है।

Section 3 लघु उत्तरीय प्रश्न

लघु उत्तरीय प्रश्न

लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 31. श्रवण कौशल के उद्देश्य बताइए

उत्तर: श्रवण कौशल के उद्देश्य निम्नलिखित है-

  1. छात्रों में सुनकर अर्थ ग्रहण करने की योग्यता विकसित करना है।
  2. भाषा एवं साहित्य के प्रति रूचि उत्पन्न करना।
  3. छात्रों में श्रवण के प्रति रूचि उत्पन्न करना जिससे वे दूसरों की बातों को ध्यानपूर्वक सुन सकें।
  4. छात्रों के शब्द भण्डार की वृद्धि करना।
  5. समाज, व्यवहार जीवन सम्बंधित महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान करना।
  6. ध्वनियों में विभेद करने की क्षमता विकसित करना।
  7. उच्चारण में उचित परिवर्तन लाना।
  8. बालकों को अच्छा श्रोता बनाना श्रवण कौशल का प्रमुख उद्देश्य है।

प्रश्न 32. कविताओं के प्रकार बताइए।

उत्तर: कविताओं के प्रकार-
कविता- आचार्य रामचंद्र शुक्ल ने कविता को परिभाषित करते हुए लिखा है कि "कविता वह साधन है, जिसके द्वारा सृष्टि के साथ मनुष्य के रागात्मक संबंध की रक्षा और निर्वाह होता है"। महादेवी वर्मा के अनुसार कविता कवि विशेष की भाषाओं का चित्रण है।
रामचन्द्र शुक्ल के अनुसार कविता की विशेषताएँ-

  1. कविता में भावों एवं कल्पना की प्रधानता रखती है।
  2. कविता में कवि की अनुभूति की अभिव्यक्ति रहती है

कविता के भेद-

  1. दृश्य काव्य - वह काव्य जिसे हम आंखों से देखते है एवं कानों से सुनते है।
  2. श्रवण काव्य - वह काव्य जिसे हम सुनकर रसास्वादन करते हैं।

प्रश्न 33. गणित शिक्षण का महत्व एवं उपयोगिता बताइए।

उत्तर: गणित शिक्षण का महत्व एवं उपयोगिता - शिक्षा के क्षेत्र में गणित का अत्यधिक महत्व है। गणित का हमारे दैनिक जीवन में गणित के संबंध है। गणित को व्यापार का प्राण एवं विज्ञान का जन्मदाता माना जाता है। गणित के महत्व व उपयोगिता को निम्न प्रकार से स्पष्ट किया जा सकता है-

  1. निश्चितता और आत्मनिर्भरता की दृष्टि से गणित का महत्व - गणित एक ऐसा विषय है जो व्यक्ति को निश्चितता सिखाता है गणित के छात्रों में दृढ़ता तथा आत्मविश्वास उत्पन्न करता है।
  2. दैनिक जीवन में गणित का महत्व - दैनिक जीवन में हमें घर बाहर, क्रय-विक्रय, आय-व्यय आदि सभी गणित के ज्ञान की आवश्यकता होती है। गणित के बिना हमारा जीवन गूंगे, बहरे तथा अंधे के समान हो जाएगा।
  3. प्रकृति अध्ययन के लिए गणित का महत्व - प्राकृतिक घटनाओं जैसे सूर्य चंद्रमा, तारों के निकलने तथा छिपने का समय, उसकी स्थिति एवं दिशा आदि के ज्ञान में गणित विशेष उपयोगी सिद्ध होता है।
  4. गणित का बौद्धिक महत्व - मानसिक एवं बौद्धिक विकास के लिए गणित शिक्षण का अत्यंत महत्व है। गणित की हर समस्या के लिए मानसिक प्रयास की आवश्यकता होती है तथा उस माध्यम से छात्र की विचार करने, तर्क करने, विश्लेषण करने तथा विवेचना करने की शक्तियों का विकास होता है।
  5. गणित का उपयोगात्मक महत्व - व्यवहारिक जीवन में गणित की उपयोगिता अन्य विषयों की तुलना में बहुत अधिक है। दैनिक जीवन में क्रय-विक्रय, माप-तोल, जोड़-घटाना, आय-व्याधि का लेखा-जोखा आदि सभी व्यक्तियों को करना पड़ता है। इस प्रकार घर, दफ्तर, व्यापार, सभी जगह गणित की आवश्यकता पड़ती है। अतः गणित संबंधी घटनाओं के बिना दैनिक जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती है।

प्रश्न 34. देवनागरी लिपि की विशेषता बताइए

उत्तर: देवनागरी लिपि की विशेषता इस लिपि की विशेषता निम्न है-

  1. देवनागरी लिपि का विकास ब्राह्मी लिपि से हुआ है।
  2. देवनागरी लिपि एक ध्वन्यात्मक लिपि है, जिसका अर्थ है कि प्रत्येक अक्षर एक ध्वनि से मेल खाता है।
  3. देवनागरी लिपि बायें से दायें लिखी जाती है।
  4. देवनागरी लिपि का उपयोग संस्कृत, हिन्दी और मराठी सहित कई भाषाओं को लिखने के लिए किया जाता है।
  5. देवनागरी लिपि एक वैज्ञानिक लिपि है।
  6. देवनागरी लिपि में कुल 52 वर्ण होते हैं।
  7. देवनागरी लिपि लिखने में आसान है।

प्रश्न 35. संख्याओं का गिनना एवं पढ़ना सिखाने की किन्हीं दो गतिविधियों का उल्लेख करो।

उत्तर: अंकों को पढ़ना और लिखना सीखने से पहले, बच्चें को यह जानना होगा कि गिनना कैसे है। आम तौर पर यह कम संख्या 2, 3, 4, और इसी तरह बच्चे को दोहराने के लिए बच्चे को सिखाकर गिनती गिनाई जाती है। प्राथमिक स्तर पर संख्याओं की सहज समझ को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। बच्चों को पहले अंक लिखने का अभ्यास करना चाहिए और फिर संख्या नामों की ओर ले जाना चाहिए।
आरभिक स्तर पर गणित शिक्षण का आरम्भ करने हेतु शिक्षक को छात्रों को गिनती तथा संख्या के प्रत्ययों का अध्ययन कराना प्रारम्भ करना होता है उसे इस कार्य हेतु सर्वप्रथम अग्र बातों का ध्यान रखना होता है-

  1. बालकों को गिनती एवं संख्या के प्रत्ययों का अध्यापन कैसे किया जाए।
  2. बालकों के मानसिक स्तर का अध्ययन करना।
  3. वे व्यक्तिगत रूप से कितना अधिक से अधिक सीख सकते हैं।
  4. छात्रों की सीखने की रूचि किस प्रकार की है, वे किस माध्यम से जल्दी सीख सकते हैं।
  5. खेल विधि द्वारा संख्याओं को गिनना एवं पढ़ना सिखाना चाहिए।
  6. शिक्षण सहायक सामग्री का प्रयोग करके सिखाना चाहिए।
  7. व्यावहारिक व दैनिक जीवन से जोड़कर संख्याओं को गिनना व पढ़ना सिखाना चाहिए।

प्रश्न 36. बच्चों को तीलियों के माध्यम से जोड़ कैसे सिखायेंगे?

उत्तर: तीलियों के माध्यम से बच्चों को जोड़ सिखाने के लिए निम्नलिखित चरणों का पालन किया जा सकता है-

  1. पहले चरण में, बच्चों को तीलियों से संख्याओं को बनाना सिखाएं। इसके लिए आप उन्हें तीलियों को एक साथ जोड़कर दो, तीन, चार आदि संख्याएं बनाने के लिए कह सकते हैं।
  2. दूसरे चरण में, उन्हें दो संख्याओं को जोड़कर एक नई संख्या बनाने का अभ्यास कराएं। इसके लिए, आप इन्हें तीलियों की दो पक्तियाँ बनाकर उन्हें एक साथ जोड़ने के लिए कह सकते हैं।
  3. तीसरे चरण में, उन्हें, विभिन्न प्रकार के जोड़ के प्रश्नों का अभ्यास कराएं। इसके लिए, आप उन्हें कागज पर जोड़ के प्रश्न लिखकर उन्हें हल करने के लिए कह सकते हैं।

प्रश्न 37. लेखन की विधियाँ का उल्लेख कीजिए।

उत्तर: लेखन की विधियाँ: लेखन की विधियाँ निम्नलिखित है-

  1. खण्डशः रेखालेखन विधि
  2. मान्टेसरी विधि
  3. जैटकॉक विधि
  4. पेस्टालॉजी विधि
  5. अनुकरण विधि
  6. स्वतंत्र लेखन विधि
  • 1. खण्डशः रेखालेखन विधि - इस विधि में बालक को अक्षर का ज्ञान देने के लिए सर्वप्रथम वर्णों का तोड़-तोड़ कर लिखना सिखाया जाता है अर्थात सबसे पहले बालक को वर्ण का आधा भाग फिर पूरा वर्ण लिखना सिखाया जाता है। इस प्रकार से बालक आसानी से पूर्ण अक्षर लिखना सीख लेता है।
  • 2. मॉन्टेसरी विधि - इस विधि के अन्तर्गत लिखना सिखाने में आँख, कान और हाथ तीनों के प्रयोग पर बल दिया जाता है। इसमें बालक को पहले लकड़ी अथवा गत्ते के बने अक्षरों पर उँगली फेरने को कहा जाता है। और बालक जब इसमें प्रवीण हो जाता है तो उन्हीं अक्षरों पर उससे रंगीन पेन्सिल घुमाने को कहा जाता है। अतः इस प्रकार बालक उन अक्षरों को पहचानने तथा लिखने में समर्थ हो जाता है।
  • 3. जैटकॉक विधि - इस विधि में बालक को सबसे पहले पढ़ना सिखाया जाता है तत्पश्चात् उसी अक्षर को लिखने के लिए कहा जाता है। और जब बालक पूरा वाक्य लिख लेता है तो एक बार पुनः वही वाक्य स्मरण के आधार पर बालक को लिखने के लिए कहा जाता है। अतः बालक अशुद्धि का सुधार स्वयं करता है।
  • 4. पेस्टालॉजी विधि - पेस्टालॉजी की यह प्रणाली कठिन से सरल पर आधारित है। इस विधि के अनुसार बालक को सबसे पहले अक्षर लिखना सिखाया जाता है। इसमें अक्षरों को छोटे-छोटे टुकड़ों में विभाजित कर दिया जाता है तथा पुनः उसकी सही योग करके पूर्ण अक्षर का ज्ञान कराया जाता है।
  • 5. अनुकरण विधि - इस विधि में शिक्षक श्यामपट्ट पर आगे लिख देता है तो छात्र भी लेख का अनुकरण करके सही प्रकार लिखने का पूरा प्रयास करते हैं।
  • 6. स्वतंत्र लेखन विधि - इस विधि में बिना वर्ण देखे या बिना नकल किये बालक से उसकी मानसिक चित्र छाया अनुसार लिखवाया जाता है। कुशाग्र बुद्धि बालक इसे बहुत कम समय में सीख जाते हैं।

प्रश्न 38. लोकगीत से आप क्या समझते हैं?

उत्तर: लोकगीत - लोकगीत में लोक और गीत दो शब्दों का योग है जिसका अर्थ है लोक के गीत। जनसामान्य जब अपने भावों को किसी भी गीत या कविता के माध्यम से लयात्मक ढंग से स्वर माधुर्य के साथ प्रस्तुत करता है, तो वे गीत लोकगीत कहलाते हैं। लोकगीत लोकमानस की साधारण अभिव्यक्ति है, जो प्राचीनकाल से लेकर आज तक निरंतर चलती आ रही है। विभिन्न प्रदेशों के लोकगीत है। जैसे उत्तर प्रदेश के बारहमासा और कजरी, राजस्थान का काजलिया और गोरबन्द आदि। लोकगीतों को समझाने से जनता की संस्कृति और परम्परा को समझा जा सकता है।

प्रश्न 39. समानार्थी शब्दों का आशय उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिए।

उत्तर: समानार्थी शब्द - समानर्थी का मतलब होता है- समान अर्थ वाला। अर्थात् समान बोले जाने वाले शब्दों को हम पर्यायवाची या समानार्थी शब्द कहते हैं।
उदाहरण -
हवा का पर्यायवाची शब्द- पवन, वायु, समीर, अनिल आदि।
जंगल का पर्यायवाची शब्द वन, विपिन, विटप, कानन आदि।

प्रश्न 40. अशुद्ध उच्चारण के कारण बताइए।

उत्तर: अशुद्ध उच्चारण के कारण - अशुद्ध उच्चारण के कारण निम्न है-

  1. वर्णों को जल्दी-जल्दी बोलना
  2. उच्चारण स्थानों का ज्ञान न होना।
  3. शर्मीला स्वभाव
  4. भय या डर के कारण
  5. अक्षरों वा मात्राओं का शुद्ध ज्ञान न होना
  6. आदत का प्रभाव।
  7. मनोवैज्ञानिक कारण।
  8. भाषा के उच्चारण पर क्षेत्रीय बोलियों का प्रभाव अवश्य पड़ता है।
  9. कभी-कभी शारीरिक विकार, जिह्वा, ओष्ठ तालु आदि के कारण भी उच्चारण संबंधी दोष आ जाते हैं।

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