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PYQ 2016 • आरम्भिक स्तर पर भाषा एवं गणित के पठन लेखन-क्षमता का विकास

आरम्भिक स्तर पर भाषा एवं गणित के पठन लेखन-क्षमता का विकास Previous Year Paper 2016

UP DELED Semester 4 आरम्भिक स्तर पर भाषा एवं गणित के पठन लेखन-क्षमता का विकास Previous Year Question Paper 2016 with solution.

Section 1 वस्तुनिष्ठ प्रश्न

वस्तुनिष्ठ प्रश्न

वस्तुनिष्ठ प्रश्न

प्रश्न 1. हिन्दी में स्वर होते हैं-

(a) 10

(b) 11

(c) 9

(d) 14

उत्तर: (b): हिन्दी में स्वर 11 होते हैं। ग्यारह स्वर के वर्ण अ, आ, इ, ई, उ, ऊ, ऋ, ए, ऐ, ओ, औ।

प्रश्न 2. मनुष्य के उच्चारणोपयोगी अवयव हैं-

(a) काकल

(b) कंठ

(c) दंत

(d) उपर्युक्त सभी

उत्तर: (d) : मनुष्य के उच्चारणोपयोगी अवयव काकल, कंठ तथा दंत है।

प्रश्न 3. ध्वनि-विज्ञान में अध्ययन किया जाता है-

(a) मानव के मुख से निकली श्वास का

(b) मानव के मुख से निकली ध्वनि का

(c) मानव के मुख से निकली चीख का

(d) इनमें से कोई नहीं

उत्तर: (b) : ध्वनि-विज्ञान में मानव के मुख से निकली ध्वनि का अध्ययन किया जाता है।

प्रश्न 4. ओष्ठाकृति के आधार पर स्वर होते हैं-

(a) वृत्ताकार स्वर

(b) अवृत्ताकार स्वर

(c) (a) और (b) दोनों

(d) इनमें से कोई नहीं

उत्तर: (c) : ओष्ठाकृति के आधार पर स्वर दो प्रकार के होते हैं-

  1. वृत्ताकार स्वर- जिन स्वरों के उच्चारण में ओंठ गोलाकार होते हैं उन्हें वृत्ताकार स्वर कहते हैं। जैसे-उ, ऊ, ओ, औ, अं।
  2. अवृत्ताकार स्वर- जिन स्वरों के उच्चारण में ओंठ गोलाकार नहीं होते हैं, अवृत्ताकार स्वर कहलाते हैं। जैसे-अ, आ, इ, ई, ए, ऐ।

प्रश्न 5. व्यंजनों को उच्चारण की दृष्टि से बाँटा गया है-

(a) 2 भागों में

(b) 3 भागों में

(c) 4 भागों में

(d) 5 भागों में

उत्तर: (b) व्यंजनों को उच्चारण की दृष्टि से तीन भागों में बाँटा गया है-

  1. स्पर्शी व्यंजन
  2. उष्म व्यंजन
  3. अन्तःस्थ व्यंजन

प्रश्न 6. ध्वनियों के उच्चारण में होने वाले यत्न को 'प्रयत्न' कहा जाता है, यह होते हैं-

(a) स्वर तन्त्री में कम्पन से

(b) श्वास की मात्रा से

(c) जिह्वा तथा अन्य अवयवों द्वारा

(d) उपर्युक्त सभी

उत्तर: (d) : ध्वनियों के उच्चारण में होने वाले यत्न को 'प्रयत्न' कहा जाता है, यह स्वर तन्त्री में कम्पन से, श्वास की मात्रा से, जिह्वा तथा अन्य अवयवों द्वारा होते हैं।

प्रश्न 7. निम्नलिखित में दन्त्य व्यंजन है-

(a) 'न'

(b) 'क'

(c) 'च'

(d) 'ड'

उत्तर: (a) : दन्त्य व्यंजन-जिन वर्णों का उच्चारण ऊपर के दाँतों पर जीभ के लगने से होता है, उसे दन्त्य व्यंजन कहते हैं। जैसे-त, थ, द, ध, न।

प्रश्न 8. आश्चर्य, हर्ष, शोक, उत्साह इत्यादि व्यक्त करने में प्रयोग होता है-

(a) अल्प विराम का

(b) अर्द्ध विराम का

(c) पूर्ण विराम का

(d) विस्मयादि बोधक का

उत्तर: (d): आश्चर्य, हर्ष, शोक, उत्साह इत्यादि व्यक्त करने में विस्मयादिबोधक का प्रयोग होता है।

प्रश्न 9. 'ढ' वर्ण किस वर्ग में आता है-

(a) 'क' वर्ग

(b) 'ट' वर्ग

(c) 'च' वर्ग

(d) इनमें से कोई नहीं

उत्तर: (b) : 'ढ', जो की 'ट वर्ग' से है, का उच्चारण मूर्धा से होता है इसलिए इसे मूर्द्धन्य ध्वनि भी कहते हैं।

प्रश्न 10. 13 संख्या है-

(a) सम

(b) विषम

(c) उपर्युक्त दोनों

(d) इनमें से कोई नहीं

उत्तर: (b): विषम संख्या-वे संख्याएँ जो 2 से विभाजित नहीं होती हैं, उन्हें विषम संख्या कहते हैं। जैसे-1, 3, 5, 7, 9, 11, 13 आदि।

प्रश्न 11. अवरोही क्रम है-

(a) 11,9,7,5,2

(b) 2,5,7,9,11

(c) उपर्युक्त दोनों

(d) इनमें से कोई नहीं

उत्तर: (a) : अवरोही क्रम 11,9,7,5,2 हैं।

प्रश्न 12. भाग की संक्रियाएँ होती है-

(a) भाज्य

(b) भाजक

(c) भागफल

(d) उपर्युक्त सभी

उत्तर: (d): भाग की संक्रियाएँ -

  • भाज्य = जिसमें भाग दिया जाये
  • भाजक = जिसका भाग दिया जाये
  • भागफल = भाज्य में भाजक का जितनी बार भाग जाये
  • शेषफल = शेष बची संख्या

भाज्य = भाजक x भागफल + शेषफल

प्रश्न 13. भाषा शिक्षण के पक्ष हैं-

(a) पठन

(b) लेखन

(c) व्याकरण

(d) उपर्युक्त सभी

उत्तर: (d): भाषा शिक्षण के पठन, लेखन तथा उच्चारण पक्ष है

प्रश्न 14. भाषिक अज्ञानता सम्बन्धी समस्या है-

(a) लिपि सम्बन्ध अज्ञानता

(b) व्याकरण का अपर्याप्त ज्ञान

(c) सही विराम चिहनों के प्रयोग का अभाव

(d) उपर्युक्त सभी

उत्तर: (d): लिपि सम्बन्ध अज्ञानता, व्याकरण का अपर्याप्त ज्ञान और सही विराम चिह्नों के प्रयोग का अभाव आदि भाषिक अज्ञानता सम्बन्धी समस्या है।

प्रश्न 15. 99 में दहाई है-

(a) 8

(b) 9

(c) 10

(d) 11

उत्तर: (b): 99 में दहाई 9 है。

Section 2 अति लघु उत्तरीय प्रश्न

अति लघु उत्तरीय प्रश्न

अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 16. लेखन का अर्थ बताइए।

उत्तर: लेखन - लेखन 'लिख' धातु से बना है जिसका अर्थ है- 'लिखना'। लिखना भावों एवं विचारों की कलात्मक अभिव्यक्ति है। यह शब्दों को क्रम से लिपिबद्ध, सुव्यवस्थित करने की कला है। भावों एवं विचारों की यह कलात्मक अभिव्यक्ति जब लिखित रूप में होती है, तब उसे लेखन अथवा लिखित रचना कहते हैं।

प्रश्न 17. उच्चारण का दृष्टि से व्यंजन की तीन श्रेणियाँ लिखिए।

उत्तर: उच्चारण की दृष्टि से व्यंजन की तीन श्रेणियाँ हैं-

  1. स्पर्श व्यंजन - ऐसे वर्ण जिनका उच्चारण करते समय मुँह के किसी-न-किसी अंग का स्पर्श होता है, उसे स्पर्श व्यंजन कहते हैं। स्पर्श व्यंजनों की संख्या 25 होती है।
  2. अन्तःस्थ व्यंजन - ऐसे व्यंजन जिनका उच्चारण स्वरों और व्यंजनों के मध्य होता है, उन्हें अन्तःस्थ व्यंजन कहते हैं। जैसे- य, र, ल, व।
  3. उष्म व्यंजन - जिन वर्णों के उच्चारण में मुख से विशेष प्रकार की गर्म (उष्मा) वायु निकलती है, उन्हें उष्म व्यंजन कहते हैं। जैसे-श, स, ष और ह।

प्रश्न 18. 'अयोगवाह' के तीन प्रकार लिखिए।

उत्तर: अयोगवाह - ऐसे वर्ण जिनमें स्वर एवं व्यंजन दोनों के गुण पाए जाते हैं, उन्हें अयोगवाह कहते हैं। अयोगवाह निम्नलिखित 3 प्रकार के होते हैं, इसके नामकरण हिंदी के पाणिनी कहे जाने वाले डॉ किशोरदास बाजपेयी ने किया था-

  1. अनुस्वार - (ं)
  2. अनुनासिक - (ँ)
  3. विसर्ग - (:)

प्रश्न 19. 'विकारी' शब्द किसे कहते हैं?

उत्तर: विकारी शब्द - ऐसे शब्द जो लिंग, वचन, काल तथा कारक से प्रभावित होकर अपना रूप बदले, उन्हें विकारी शब्द कहा जाता है।
जैसे-

  • लड़का - लड़के - लड़कों (संज्ञा)
  • मैं - मुझे - मुझको (सर्वनाम)
  • नया - नई - नए (विशेषण)
  • आया - आए - आई - आओ (क्रिया)

प्रश्न 20. 'ह्रस्व' के आधार पर हिन्दी ध्वनियों के नाम लिखिए।

उत्तर: जिन स्वरों के उच्चारण में एक मात्रा का समय लगता है, उन्हें हस्व स्वर कहते हैं। 'ह्रस्व' के आधार पर हिन्दी ध्वनियों के नाम अ, इ, उ, ऋ।

प्रश्न 21. 'बलाघात' क्या है? ध्वनि-विज्ञान के आधार पर स्पष्ट कीजिए।

उत्तर: बलाघात - जब एक व्यक्ति दूसरे व्यक्ति को अपने विचारों, भावों अर्थात् मन की बात को बताना चाहता है और वह चाहता है कि सामने वाला व्यक्ति उसकी बात को स्पष्टतया समझ सके अर्थात् उसी बात को समझे जिसे वह बताना चाहता है, तब ऐसी स्थिति में अपने मुख से निकलने वाली ध्वनि के कुछ वर्णों, शब्दों या वाक्यों पर कुछ विशेष जोर (बल) देता है। शब्द का उच्चारण करते समय अर्थ तथा उच्चारण की स्पष्टता के लिए किसी वर्ण पर विशेष बल देते हैं। अतः भाव की स्पष्टता के लिए बलाघात या स्वराघात की आवश्यकता होती है।

प्रश्न 22. जिह्वा के आधार पर हिन्दी ध्वनियों का वर्गीकरण कर उनके नाम लिखिए।

उत्तर: जीभ के प्रयोग के आधार पर स्वरों का वर्गीकरण तीन प्रकार से किया गया है-

  1. अग्र स्वर - जिन स्वरों के उच्चारण में जीभ का अग्रभाग काम करता है। जैसे-इ, ई, ए, ऐ।
  2. मध्य स्वर - जिन स्वरों के उच्चारण में जीभ का मध्य भाग काम करता है। जैसे-अ।
  3. पश्च स्वर - जिन स्वरों के उच्चारण में जीभ का पिछला भाग काम करता है। जैसे-उ, ऊ, ओ, औ, ऑ, आ।

प्रश्न 23. 'ऋ' स्वर का उच्चारण स्थान क्या है?

उत्तर: 'ऋ' स्वर का उच्चारण स्थान मूर्द्धा है।

प्रश्न 24. 'ऊष्म' व्यंजन क्या हैं? लिखिए।

उत्तर: उष्म व्यंजन - जिन वर्णों के उच्चारण में मुख से विशेष प्रकार की गर्म (उष्म) वायु निकलती है, उन्हें उष्म व्यंजन कहते हैं। जैसे - श, ष, स तथा ह

प्रश्न 25. 'अनुनासिक' स्वर को परिभाषित कीजिए।

उत्तर: अनुनासिक स्वर - जिन स्वरों का उच्चारण मुख और नासिका दोनों से किया जाता है, वे अनुनासिक स्वर कहलाते हैं। उदाहरण - आँख, हँसना, चाँद आदि。

प्रश्न 26. 'हलन्त' से क्या अभिप्राय है? लिखिए।

उत्तर: हलन्त - हलन्त से अभिप्राय उस चिंह से है जो किसी शब्द को आधा दर्शाने के लिए प्रयोग किया जाता है। वाक्यों में शब्दों को अक्षरों के नीचे लगाया जाता है। जैसेः पश्चात् में त के नीचे हलन्त लगता है。

प्रश्न 27. अंग्रेज़ी वर्णमाला में कितने वर्ण होते हैं? लिखिए।

उत्तर: अंग्रेजी वर्णमाला में 26 वर्ण है। जिनमें 5 स्वर व 21 व्यंजन है। तथा 5 स्वर a, e, i, o, u है

प्रश्न 28. 'च' वर्ग की ध्वनियाँ कितनी हैं? नाम लिखिए

उत्तर: 'च वर्ग' की पाँच ध्वनियाँ हैं- च, छ, ज, झ, ञ

प्रश्न 29. गुणा में कौन-कौन सी संक्रियाएँ होती हैं? लिखिए।

उत्तर: गुणा में निम्न संक्रियाएँ होती है- गुण्य, गुणक तथा गुणनफल।

प्रश्न 30. 345 में सभी अंकों का स्थानीयमान लिखिए।

उत्तर: 345 में सभी अंकों का स्थानीय मान

सै. द. इ.
3 4 5

5 x 1 = 5
4 x 10 = 40
3 x 100 = 300

Section 3 लघु उत्तरीय प्रश्न

लघु उत्तरीय प्रश्न

लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 31. स्वर के भेद किन-किन आधार पर किए गए है? एक-एक उदाहरण देकर समझाइए।

उत्तर: स्वरों का वर्गीकरण - स्वरों का वर्गीकरण निम्न आधार पर किया जाता है-

  1. उच्चारण के समय (मात्रा) के आधार पर (ह्रस्व, दीर्घ तथा प्लुत स्वर)
  2. जीभ प्रयोग के आधार पर (अग्र, मध्य तथा पश्च स्वर)
  3. मुखद्वार के खुलने के आधार पर (विवृत्त, अधविवृत्त, अर्धसंवृत्त तथा संवृत्त स्वर)।
  4. ओष्ठाकृति के आधार पर (वृत्ताकार तथा अवृत्ताकार स्वर)

(1) उच्चारण के समय (मात्रा) के आधार पर स्वर के 3 भेद होते हैं-

  • (i) ह्स्व स्वर - जिन स्वरों के उच्चारण में कम समय लगता है, उसे ह्रस्व स्वर कहते हैं। जैसे-अ, इ, उ, ऋ
  • (ii) दीर्घ स्वर - जिन स्वरों के उच्चारण में ह्रस्व स्वर से दोगुना समय लगता है, उन्हें दीर्घ स्वर कहते हैं। जैसे-आ, ई, ऊ, ए, ऐ, ओ, औ।
  • (iii) प्लुत स्वर - जिन स्वरों के उच्चारण में ह्रस्व स्वर से तिगुना समय लगता है, उन्हें प्लुत स्वर कहते हैं। जैसे ओउम्।

(2) जीभ प्रयोग के आधार पर स्वर के 3 भेद होते हैं-

  • (i) अग्र स्वर - इ, ई, ए, ऐ।
  • (ii) मध्य स्वर - अ
  • (iii) पश्च स्वर - आ, उ, ऊ, ओ, औ, ऑ।

(3) ओष्ठाकृति के आधार पर-

  • (i) वृत्ताकार स्वर - उ, ऊ, ओ, औ।
  • (ii) अवृत्ताकार स्वर - अ, आ, इ, ई, ए, ऐ।

प्रश्न 32. 'विधान-वाचक' एवं 'निषेध-वाचक' वाक्य में क्या अन्तर है? उदाहरण देकर समझाइए।

उत्तर:

  • विधान वाचक वाक्य - जिन वाक्यों में किसी क्रिया के करने या होने की सामान्य सूचना मिलती हैं, उन्हें विधानवाचक वाक्य कहते हैं। जैसे-सूर्य पश्चिम में अस्त होता है।
  • निषेधवाचक वाक्य - जिन वाक्यों से कार्य न होने का भाव प्रकट होता है, उन्हें निषेधवाचक वाक्य कहते हैं। जैसे - वह प्रतिदिन योग नहीं करता है।

प्रश्न 33. ध्वनि के आवश्यक मूल-तत्व क्या हैं?

उत्तर: ध्वनि के आवश्यक मूल-तत्व-

  1. शुद्धता - यह ध्वनि का मुख्य मूल तत्व है इसके बिना ध्वनि का अर्थ ही नहीं सिद्ध हो सकता। ध्वनि का शुद्ध उच्चारण मान्य तथा परिष्कृत होना चाहिए।
  2. सार्थकता - ध्वनि उच्चारण में ध्यान रखना चाहिए कि वाणी सार्थक हो तथा अनावश्यक ध्वनि विस्तार नहीं होना चाहिए और न ही शब्दों की बार-बार पुनरावृत्ति होनी चाहिए।
  3. स्पष्टता - स्पष्टता का होना ध्वनि श्रवण में अत्यन्त आवश्यक है, क्योंकि यदि बोलने में स्पष्टता होगी तो सुनने वाला सुनकर उचित अर्थ ग्रहण कर सकेगा।
  4. तरंगता - ध्वनि में आरोह-अवरोह बिल्कुल नहीं होना चाहिए। एक समान वाचन से श्रोता ऊब जाता है तथा अर्थ ग्रहण की दृष्टि से स्वराघात, बलाघात की तरंगता होना आवश्यक है।

प्रश्न 34. लेखन की अशुद्धियों को दूर करने के उपाय बताइए।

उत्तर: लेखन की अशुद्धियों को दूर करने के उपाय-

  1. व्याकरण का समुचित ज्ञान
  2. शुद्ध उच्चारण और शुद्ध लेखन का अभ्यास।
  3. बारहखड़ी का अभ्यास
  4. वाचन अभ्यास
  5. शारीरिक उपचार
  6. तीव्र गति से लिखने का अभ्यास
  7. लिपि का समुचित ज्ञान
  8. शब्द पुस्तिकाएँ बनवाना।
  9. अध्यापक का व्यवहार तथा व्यक्तिगत ध्यान
  10. मिश्रित व्यंजनों में अशुद्धियाँ
  11. व और ब की अशुद्धियाँ।
  12. अल्पप्राण और महाप्राण की अशुद्धियाँ

प्रश्न 35. गिनती सिखाने सम्बन्धी मुख्य बातें बताइए

उत्तर: गिनती सिखाने सम्बन्धी मुख्य बातें-

  1. गिनती सिखाने सम्बंधी सर्वप्रथम बच्चों की पूर्वज्ञान की जानकारी होनी चाहिए। अतः बच्चों के पूर्वज्ञान को ध्यान में रखकर ही गतिविधियाँ की जानी चाहिए।
  2. यह सुनिश्चित करना कि बच्चों को मूर्त वस्तुओं की समझ है या नहीं।
  3. यह ध्यान देना कि बच्चा सीखने के प्रति रूचि ले रहा है या नहीं। यदि नहीं तो बच्चों को गति, कहानी या कविता के माध्यम से सीखाने का प्रबन्ध किया जाना चाहिए।
  4. बालक का वस्तुओं को गिनना तथा किसी अंक को बोलने पर समझ का पता लगाना। उसके पश्चात् गिनती सिखाना।
  5. क्रमबद्धता।

प्रश्न 36. दहाई एवं सैकड़ा का अभिप्राय स्पष्ट कीजिए।

उत्तर:

  • दहाई - 9 इकाई में 1 इकाई जोड़ देने से 10 इकाई या 1 दहाई हो जाती है। इसी प्रकार 20 इकाई को 2 दहाई, 30 इकाई को 3 दहाई, 40 इकाई को 4 दहाई एवं 50 इकाई को 5 दहाई कहा जाता है。
    10 इकाई = 1 दहाई
    20 इकाई = 2 दहाई
    40 इकाई = 4 दहाई
  • सैकड़ा - तीन अंकों की प्रथम संख्या 100 होती है, जो 99 से 1 अधिक होती है। इसी प्रकार 424 में 4 सैकड़ा, 2 दहाई और 4 इकाई होगा。
    उदाहरण- 185 = 1 सैकड़ा + 8 दहाई + 5 इकाई
    = 100 x 1 + 8 x 10 + 5 x 1

प्रश्न 37. आरोही एवं अवरोही क्रम किसे कहते हैं? उदाहरण सहित समझाइए।

उत्तर:

  • आरोही क्रम - आरोही क्रम का मतलब है बढ़ता हुआ क्रम। जब संख्याओं को बढ़ते हुए क्रम में लिखा जाता है उसे आरोही क्रम कहा जाता है। जैसे संख्या 8, 10, 5, 3, 12, को आरोही क्रम में लिखिए: आरोही क्रम 3, 5, 8, 10, 12
  • अवरोही क्रम - अवरोही का अर्थ है घटता हुआ क्रम। जब संख्याओं को घटते हुए क्रम में लिखा जाता है तो उसे अवरोही क्रम कहते है। जैसेः संख्या 5, 25, 486, 6, 10 को अवरोही क्रम में लिखिए: अवरोही क्रम 486, 25, 10, 6, 5

अतः आरोही क्रम छोटे से बड़े की ओर तथा अवरोही क्रम बड़े से छोटे की ओर लिखा जाता है।

प्रश्न 38. शुद्ध, सुडौल तथा आकर्षक लेखन में अनुलेख, सुलेख तथा श्रुतलेख के महत्व पर प्रकाश डालिए।

उत्तर:

  • अनुलेख - किसी आदर्श लिखाई का हुबहु अनुकरण करना अनुलेख या अनुलिपि कहलाता है। इसमें छात्र शिक्षक के आदर्श लेख का बिल्कुल हुबहु अनुकरण करते हैं। शिक्षक तख्ती या कॉपी पर वर्ण या शब्द लिख देता है और बच्चे देखकर ठीक वैसा ही लिखने का अभ्यास करते हैं।
  • सुलेख - सुंदर लेख को सुलेख कहते हैं। सुलेख का लेखन कौशल शिक्षण में विशेष स्थान है। सुलेख के माध्यम से जहाँ अपनी लिखावट को सुंदर बनाया जाता है, ताकि पढ़ने वाला उसे ना केवल सरलता से पढ़े बल्कि वह उसे रूचि से भी पढ़े।
  • श्रुतलेख - श्रुतलेख में छात्र सुनी हुई ध्वनियों को लेखनीबद्ध करते हैं। श्रुतलेख में सुंदर लेख का इतना महत्व नहीं है, जितना भाषा की शुद्धता का। इसका उद्देश्य छात्रों की श्रवणोन्द्रिय को पूर्ण शिक्षित करना भी है ताकि वह भाषा के शुद्ध रूप को सावधानी से सुन सकें।

प्रश्न 39. समानार्थी शब्दों का आशय उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिए।

उत्तर: समानार्थी शब्द - ऐसे शब्द जिनके अर्थ समान हो, पर्यायवाची या समानार्थी शब्द कहलाते हैं।

  • उदाहरण - अश्व का पर्यायवाची शब्द-घोड़ा, तुरंग, घोटक, सैंधव आदि।
  • इच्छा का पर्यायवाची शब्द- आकांक्षा, चाह, अभिलाषा, कामना, मनोरथ आदि।
  • इंद्र का पर्यायवाची शब्द- सुरेश, देवेन्द्र, पुरंदर आदि।
  • सूर्य का पर्यायवाची शब्द- दिनकर, दिवाकर, भानु, भास्कर, आदित्य, मार्तण्ड आदि।

प्रश्न 40. भाषा-शिक्षण में शारीरिक समस्याएँ क्या हैं? उदाहरण देकर स्पष्ट कीजिए।

उत्तर: भाषा की मौखिक अभिव्यक्ति में प्रयुक्त अक्षरों की ध्वनियाँ का सही प्रयोग आता है। यदि हम विचारों एवं भावों की अभिव्यक्ति के समय ध्वनि का उच्चारण उसके निश्चित स्थान से नहीं करेगें तो अभिव्यक्ति दोषपूर्ण और मौखिक भाषा निरर्थक व प्रभावहीन हो जायेगी। मनोवैज्ञानिक कारण से भय, संकोच, शीघ्रता, विलम्ब आदि शारीरिक दोष के कारण उच्चारण में दोष आ जाते हैं। इससे तुतलाना, लापरवाही आदि का विकास होता है और उच्चारण दोषपूर्ण हो जाता है।
शारीरिक कारण - कण्ठ, तालु, होंठ, दाँत आदि अंगों में दोष के कारण।

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