वस्तुनिष्ठ प्रश्न
वस्तुनिष्ठ प्रश्न
प्रश्न 1. लेखन एक शारीरिक क्रिया है जिसमें बालकों के हाथों को गतिविधियाँ करनी पड़ती हैं। कथन है-
(a) प्लेटो
(b) महात्मा गाँधी
(c) श्रीमती माण्टेसरी
(d) उपर्युक्त कोई नहीं
उत्तर: (c) : लेखन एक शारीरिक क्रिया है जिसमें बालकों के हाथों को गतिविधियाँ करनी पड़ती है। यह कथन श्री मती माण्टेसरी का है।
प्रश्न 2. जिनका उच्चारण कण्ठ्य के स्पर्श से होता है-
(a) क ख ग घ
(b) च छ ज झ
(c) ट ठ ज झ
(d) त थ द ध
उत्तर: (a): क वर्ग (क, ख, ग, घ) का उच्चारण कण्ठ्य से होता है। च, छ, ज, झ का उच्चारण स्थान तालु है। ट, ठ, ड, ढ का उच्चारण स्थान मूर्धा है। त, थ, द, ध का उच्चारण स्थान दन्त है।
प्रश्न 3. ज्ञानार्जन और ज्ञानवृद्धि का साधन है-
(a) प्रत्यक्ष निरीक्षण तथा रचानुभव
(b) विचार विनिमय एवं दूसरों से शिक्षा ग्रहण
(c) स्वाध्याय तथा पठनाभ्यास
(d) उपर्युक्त सभी
उत्तर: (d) : प्रत्यक्ष निरीक्षण तथा रचानुभाव, विचार विनिमय एवं दूसरों से शिक्षा ग्रहण, स्वाध्याय तथा पठनाभ्यास, ये सभी ज्ञानार्जन और ज्ञान वृद्धि के साधन है।
प्रश्न 4. विराम सम्बन्धी समस्या का प्रमुख कारण है-
(a) विराम चिन्हों का ज्ञान न होना
(b) आत्मविश्वास का अभाव
(c) उपर्युक्त दोनों
(d) उपर्युक्त में से कोई नहीं
उत्तर: (a): विराम चिह्नों का ज्ञान न होना, विराम सम्बन्धी समस्या का प्रमुख कारण है।
प्रश्न 5. विवृत स्वर हैं-
(a) क और ख
(b) आ और औ
(c) च और छ
(d) ट और ठ
उत्तर: (b): आ और औ विवृत स्वर हैं।
प्रश्न 6. आनन्द का पर्यायवाची शब्द है-
(a) मोद
(b) प्रमोद
(c) सुख
(d) उपर्युक्त सभी
उत्तर: (d): आनन्द का पर्यायवाची शब्द मोद, प्रमोद, सुख, हर्ष, प्रसन्नता, उल्लास आदि हैं।
प्रश्न 7. निम्नलिखित में से कौन सा संयुक्त व्यंजन नहीं है-
(a) क्ष
(b) ञ
(c) त्र
(d) ज्ञ
उत्तर: (b): क्ष, त्र, ज्ञ संयुक्त व्यंजन है जबकि 'ञ' संयुक्त व्यंजन नहीं है।
प्रश्न 8. निम्नलिखित में से दीर्घ स्वर हैं-
(a) अ
(b) आ
(c) इ
(d) ऋ
उत्तर: (b): दीर्घ स्वर 'आ' हैं। जबकि अ, इ, ऋ हस्व स्वर है।
प्रश्न 9. किसके उच्चारण में निचला होठ ऊपरी दाँतों को स्पर्श करता है-
(a) व
(b) ब
(c) (a) और (b) दोनों के
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर: (b): 'ब' के उच्चारण में निचला ओठ ऊपरी दाँतों को स्पर्श करता है।
प्रश्न 10. वाक्या जहाँ बहुत ही कम ठहरना होता है, वहाँ प्रयोग हेता है-
(a) पूर्ण विराम का
(b) अल्प विराम का
(c) दोनों का
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर: (b) : वाक्य जहाँ बहुत ही कम ठहरना होता है, वहाँ अल्प विराम का प्रयोग होता है।
प्रश्न 11. 4328 में दहाई वाली संख्या है-
(a) 2
(b) 3
(c) 4
(d) 8
उत्तर: (a): 4328 में दहाई वाली संख्या '2' है。
प्रश्न 12. जब आँकड़ों को घटते हुए क्रम में लिखा जाता है, तो उसे कहते हैं-
(a) अनन्तर क्रम
(b) अवरोही क्रम
(c) आरोही क्रमे
(d) नियत क्रम
उत्तर: (b): जब आकड़ों को घटते हुए क्रम में लिखा जाता है, तो उसे अवरोही क्रम कहते हैं। जबकि आकड़ों को बढ़ते हुए क्रम में लिखा जाता है, तो उसे आरोही क्रम कहते है।
प्रश्न 13. मूल संख्या में बृद्धि करना, बढ़ाना अथवा योग करना है-
(a) जोड़
(b) घटाना
(c) गुणा
(d) भाग
उत्तर: (a): मूल संख्या में वृद्धि करना, बढ़ाना अथवा योग करना "जोड़" कहा जाता है।
प्रश्न 14. किसी भी संख्या के मान होते हैं-
(a) एक
(b) दो
(c) तीन
(d) चार
उत्तर: (b): किसी भी संख्या के दो मान होते हैं- (i) जातीय मान (Face Value) (ii) स्थानीय मान (Place Value)
प्रश्न 15. तीन अंकों की सबसे पहली संख्या होती है-
(a) 100
(b) 160
(c) 299
(d) 298
उत्तर: (a): तीन अंकों की सबसे पहली संख्या 100 होती है।
अति लघु उत्तरीय प्रश्न
अति लघु उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 16. सस्वर पठन से आप क्या समझते है?
उत्तर: सस्वर वाचन - पठन का एक प्रकार हैं जो बच्चों द्वारा पाठ को स्वर सहित पढ़ते हुए अर्थ ग्रहण करने से सम्बन्धित हैं। यह बच्चों में वाचन कौशल का विकास करता है। जिससे बच्चे उचित हावभाव के साथ पाठ का वाचन करना सीखते हैं।
सस्वर वाचन के दो भेद हैं-
(1) आदर्श वाचन-अध्यापक द्वारा किया जाने वाला वाचन आदर्श वाचन कहलाता है।
(2) अनुकरण वाचन-अनुकरण वाचन छात्रों द्वारा किया जाता है। जिसे छात्र अध्यापक के अनुसार करते हैं।
प्रश्न 17. भाषा शिक्षण में उचित आरोह-अवरोह की कठिनाई उत्पन्न होने के दो प्रमुख कारण बताइये।
उत्तर: भाषा शिक्षण में उचित आरोह-अवरोह की कठिनाई - उत्पन्न होने के प्रमुख कारण निम्न हैं-
(1) अधिक धीमी आवाज में पठन
(2) मूलभाव के विपरीत पठन।
(3) शीघ्रता से पठन।
(4) धारा प्रवाह का अभाव।
(5) अधिक तेज आवाज में पठन।
प्रश्न 18. पढ़ते समय ध्यान रखने योग्य दो बातें बताइयें?
उत्तर: पढ़ते समय ध्यान रखने योग्य बातें - निम्न हैं-
(1) पढ़ते समय शब्दों का उचित उच्चारण करना चाहिए तथा स्वर, लय, गीत और प्रवाह का पूरा ध्यान रखना चाहिए।
(2) प्रत्येक शब्द पर जोर देना आवश्यक है, ऐसा करने से पठन पूरी तरह से सफल होगा, और जहाँ रूकने की जरूरत हैं वहाँ अवश्य रूकना चाहिए और शब्दों को अलग-अलग करके सही बल और विराम के साथ पढ़ना चाहिए।
(3) पढ़ाई करते समय हमेशा कुर्सी-टेबल पर बैठकर ही करें, विस्तर पर लेटकर बिल्कुल भी न पढ़ें।
(4) पढ़ते समय टेलीविजन न चलायें, रेडियो या मोबाइल भी बन्द करके रखें।
प्रश्न 19. असुन्दर (खराब) लेखन के दो कारण बताइये?
उत्तर: असुन्दर (खराब) लेखन के कारण - निम्न हैं-
(1) कलम पकड़ने का सही ढंग या तरीकों का सही ज्ञान न होना।
(2) लिखने की कॉपी तथा आँखों की दूरी का उचित न होना।
(3) लिखते समय, कामा, अल्प विराम, पूर्ण विराम आदि का उचित प्रयोग न करना।
(4) लिखते समय बालक को बैठने का उचित ढंग का ज्ञान न होना।
प्रश्न 20. पठन कितने प्रकार का होता है?
उत्तर: पठन - मुख्य रूप से दो प्रकार के होते हैं-
(1) सस्वर पठन-स्वर सहित पढ़ते हुए अर्थ ग्रहण करने को सस्वर पठन कहते हैं।
(2) मौन पठन-मौन पठन, पठन का एक प्रकार है जिसमें लिखित सामाग्री को बिना आवाज किए भावार्थ को समझते हुए पढ़ना शामिल होता है। इसमें नेत्र तथा मस्तिष्क दोनों सक्रिय होते हैं。
प्रश्न 21. शब्द किसे कहते है?
उत्तर: शब्द - वर्णों या ध्वनियों के सार्थक मेल को "शब्द" कहते हैं। जैसे-विद्यालय, पुस्तक, राम, श्याम, मोहन इत्यादि।
प्रश्न 22. श्रुत लेख किसे कहते हैं?
उत्तर: श्रुत लेख - का अर्थ है, 'सुने हुए को लिखना' या "सुनकर लिखना" श्रुत का अर्थ होता है, "सुना हुआ"। इस विधि में एक व्यक्ति बोलता है तथा दूसरा सुनकर उसे लिखता है। विद्यालयों में श्रुत लेख का उपयोग वर्तनी सुधारने हेतु किया जाता है।
प्रश्न 23. स्पर्श व्यंजन का क्या आशय होता है?
उत्तर: स्पर्श व्यंजन - जिन व्यंजनों का उच्चारण करते समय जीभ मुख के किसी न किसी भाग को स्पर्श करती हैं उन्हें स्पर्श व्यंजन कहते हैं। 'क' से 'म' तक कुल 25 स्पर्श व्यंजन हैं। जैसे-
क वर्ग - क, ख, ग, घ, ङ।
च वर्ग - च, छ, ज, झ, ञ।
ट वर्ग - ट, ठ, ड, ढ, ण।
त वर्ग - त, थ, द, ध, न।
प वर्ग - प, फ, ब, भ, म。
प्रश्न 24. संकर शब्द को उदाहरण सहित लिखिए?
उत्तर: संकर शब्द - वे शब्द जो दो भाषाओं को मिलाकर बना लिए गये हो, उन्हें संकर शब्द कहते हैं। संकर शब्द विशेष शब्द होते हैं। जो दो भिन्न-भिन्न भाषाओं के मेल से बने होते हैं।
जैसे-रेलगाड़ी = रेल गाड़ी, इसमें रेल शब्द अंग्रेजी है। जबकि गाड़ी शब्द हिन्दी का है।
टिकटघर = टिकट घर, इसमें टिकट अंग्रेजी शब्द है। जबकि घर शब्द हिन्दी का है।
प्रश्न 25. विलोम शब्द किसे कहते है?
उत्तर: विलोम शब्द - एक-दूसरे के विपरीत या उल्टा अर्थ देने वाले शब्दों को "विलोम शब्द" कहते हैं। जैसे प्रकाश-अन्धकार, उदय-अस्त, लघु-दीर्घ, छोटा-बड़ा, वीर-कायर, आशा-निराशा आदि।
प्रश्न 26. शून्य (0) को किसी संख्या से भाग देने पर भागफल क्या आता है?
उत्तर: शून्य (0) को किसी संख्या में भाग देने पर भागफल (0) अपरिभाषित प्राप्त होता है। जैसे- 300 / 0 = ∞, 455 / 0 = ∞
प्रश्न 27. वास्तविक मान किसे कहते है?
उत्तर: वास्तविक मान - किसी संख्या का वह मान जो कभी परिवर्तित नहीं होता है, उसे वास्तविक मान कहते हैं।
जैसे- 4035 में 3 का वास्तविक मान 3 है। जबकि स्थानीय मान 30 है। उसी तरह 4 का वास्तविक मान 4 है। जबकि स्थानीय मान 4000 है।
प्रश्न 28. किसी संख्या को शून्य (0) से गुणा करने पर गुणनफल शून्य प्राप्त होता है, उदाहरण दीजिए।
उत्तर: किसी संख्या को शून्य से गुणा करने पर गुणनफल शून्य प्राप्त होता है।
उदाहरण- 500 x 0 = 0, 1050 x 0 = 0, 495 x 0 = 0, x x 0 = 0
प्रश्न 29. संख्या 41325 एवं 7061 की तुलना कीजिए ?
उत्तर: संख्या 41325 में अंक = 5 तथा 7061 में अंक = 4
41325 > 7061
7061 < 41325
प्रश्न 30. 12 पेन्सिले है, प्रत्येक बच्चो को दो-दो पेन्सिले दी गयीं। कितने बच्चों को पंन्सिलें मिली ?
उत्तर: माना बच्चों की संख्या x है।
कुल पेन्सिल = 12
प्रत्येक बच्चे को दो-दो पेन्सिल दी गई-
x × 2 = 12
x = 12 / 2 = 6
अतः 6 बच्चों को पेन्सिलें मिली
लघु उत्तरीय प्रश्न
लघु उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 31. वर्ण किसे कहते है? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: वर्ण - 'वर्ण' भाषा की सबसे छोटी इकाई होती है। हिन्दी भाषा में 'वर्ण' का अर्थ होता है, ध्वनि या शब्द। हम जब कुछ उच्चारित करते हैं, तो हमारे मुँह से जो ध्वनि निकलती हैं, उसे हम 'वर्ण' कहते हैं। इसे अंग्रेजी में 'letter' या 'sound' कहा जाता है। हिन्दी वर्णमाला में 52 वर्ण होते हैं, जिनमें 13 स्वर वर्ण और 36 व्यंजन वर्ण शामिल हैं। इसके अतिरिक्त 3 अयोगवाह वर्ण भी होते हैं। वर्णमाला के निम्न प्रकार हैं-
(1) स्वर वर्ण-आ, इ, उ, ऋ, ए, ऐ, ओ, औ, अं, अः।
(2) व्यंजन वर्ण-क, ख, ग, घ, ङ, च, छ, ज, झ, ञ, ट, ठ, ड, ढ, ण, त, थ, द, ध, न, प, फ, ब, भ, म, य, र, ल, व, श, ष, स, ह, क्ष, त्र, ज्ञ।
(3) अयोगवाह वर्ण-अं, अँ, अः।
प्रश्न 32. पठन का अर्थ एवं महत्व बताइये।
उत्तर: पठन का अर्थ एवं महत्व - पढ़ना अथवा पठन भाषा के चार कौशलों में से एक है। यह एक सार्थक, उद्देश्यपूर्ण एवं चिंतन प्रधान प्रक्रिया है जो पठन के दौरान अर्थ ग्रहण तथा अनुमानिक कौशल को विकसित करती है। पठित वस्तु के अर्थ ग्रहण करते हुए, एक निश्चित उद्देश्य से पढ़ना तथा आगे आने वाले तथ्यों का अनुमान लगाना ही सही मायने में सार्थक सिद्ध होता है。
पठन-प्रक्रिया का महत्व-
(1) पठन-प्रक्रिया में बालक लिखित या मुद्रित शब्दों को पढ़कर उनका भाव ग्रहण करता है।
(2) किसी लिखित भाषा या चित्र को देखकर इसके भाव आशय का ग्रहण करना पठन कहलाता है।
(3) भाव और विचारों को लिखित भाषा के माध्यम से अभिव्यक्ति पढ़कर समझना ही पठन-प्रक्रिया है।
(4) भाषाओं के अतिरिक्त अन्य विषय के बोध के लिए भी पठन-प्रक्रिया अत्यधिक महत्वपूर्ण है。
Note-अतः हम कह सकते हैं कि पढ़ना कौशल में अर्थ ग्रहण करना सर्वाधिक महत्वपूर्ण है।
प्रश्न 33. लेखन अभिव्यक्ति के विकास हेतु निबन्ध लेखन महत्वपूर्ण है, समझाइये।
उत्तर: लेखन अभिव्यक्ति के विकास में निबन्ध लेखन का महत्व - निबन्ध लेखन एक महत्वपूर्ण कौशल है, जो हमें सोचने, विचार को व्यक्त करने और विषय को सुसंगत ढंग से प्रस्तुत करने की क्षमता प्रदान करता है। इसमें एक स्पष्ट विचारधारा, सुसंगत वाक्य संरचना और सार्थक विषय विकसित करने की कला होती है। निबन्ध लेखन के माध्यम से हम अपनी भावनाओं, अनुभवों और विचारों को अद्वितीय ढंग से व्यक्त कर सकते हैं। निबन्ध लेखन एक रचनात्मक प्रक्रिया है जिसमें हम विचारों को संगठित करते हैं और उन्हें सुंदरता से प्रस्तुत करते हैं। यह भाषा का उच्चतम स्तर है, जो हमें शब्दों के साथ खेलने की अनुमति देता है।
निबन्ध लेखन का महत्व - निबन्ध लेखन का महत्व बहुत अधिक हैं, यह हमें आत्मविश्वास, स्वतंत्रता और सोचने की क्षमता प्रदान करता है। इसके माध्यम से हम अपने विचारों को साझा करके समाज में बदलाव ला सकते हैं। यह हमें सोचने की क्षमता में सुधार करता है और हमारे मस्तिष्क को विकसित करता है।
प्रश्न 34. पत्र लेखन की उपयोगिता स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: पत्र लेखन की उपयोगिता - निजी अथवा व्यापारिक सूचनाओं को प्राप्त करने तथा भेजने के लिए पत्र व्यवहार विषय अत्यन्त महत्वपूर्ण है। प्रेम, क्रोध, जिज्ञासा, प्रार्थना, आदेश, नियंत्रण आदि अनेक भावों को व्यक्त करने के लिए पत्र लेखन का सहारा लिया जाता है। पत्र के द्वारा व्यक्ति अपनी बातों को दूसरों तक लिखकर पहुँचाता है। हम पत्र को अभिव्यक्ति का एक सशक्त माध्यम भी कह सकते है। व्यक्ति जिन बातों को जुबां से अथवा मौखिक रूप से कहने में संकोच करता है, हिचकिचाता है, उन सभी बातों को वह पत्र के माध्यम से लिखित रूप में खुलकर अभिव्यक्त करता है。
पत्र लेखन का महत्व -
(i) पत्र संचार का एक सुगम साधन है। इसका उपयोग करना बहुत सरल है। कोई भी व्यक्ति अपनी बात पत्र में आसानी से लिखकर, अपना संदेश दूसरे व्यक्ति को भेज सकता है।
(ii) पत्र के माध्यम से हम विचारों का आदान-प्रदान सरलता से कर सकते हैं।
(iii) पत्र के द्वारा हम दूरस्थ व्यक्तियों के साथ आत्मीय सम्बन्ध स्थापित कर सकते हैं。
पत्र के प्रकार-
(i) औपचारिक पत्र।
(ii) अनौपचारिक पत्र।
(iii) व्यावसायिक पत्र।
(iv) आधिकारिक पत्र।
(v) रोजगार पत्र।
प्रश्न 35. वाक्य किसे कहते है? अर्थ के आधार पर वाक्य के प्रकारों का वर्णन कीजिए।
उत्तर: वाक्य - शब्दों का वह व्यवस्थित स्वरूप जिसमें विचारों का आदान-प्रदान किया जाता है, "वाक्य" कहलाता है। एक सामान्य वाक्य में कर्ता, कर्म एवं क्रिया होते है。
अर्थ के आधार पर वाक्य के 8 प्रकार है-
(1) आज्ञावाचक वाक्य- जिन वाक्यों में आज्ञा या अनुमति का बोध होता है। आज्ञावाचक वाक्य कहलाते हैं। जैसे-चुप रहो, खाना खाओं, पढ़ाई करों आदि।
(2) विधानवाचक वाक्य- ऐसे वाक्य जिनसे किसी बात या काम के होने का बोध होता है। उसे विधानवाचक वाक्य कहते हैं। जैसे-विराट कोहली एक अच्छा क्रिकेटर है।
(3) प्रश्नवाचक वाक्य- जिन वाक्यों में कोई बात पूछी जाती है। या प्रश्न किया जाता है। उसे "प्रश्नवाचक वाक्य" कहते हैं। जैसे-आप क्या विषय पढ़ाते हैं?
(4) संदेहवाचक वाक्य- जिन वाक्यों में कार्य के होने में संदेह या सम्भावना हो, ऐसे वाक्यों को संदेह वाचक वाक्य कहते हैं। जैसे-शायद मैं आज शादी में जाऊ।
(5) निषेधवाचक वाक्य- जिन वाक्यों में निषेध किसी कार्य के (न होने) का बोध होता हैं उसे "निषेधात्मक वाक्य" कहते हैं। जैसे-श्याम ने गाना नहीं गाया।
(6) इच्छावाचक- जिन वाक्यों से इच्छा, आशा, आर्शीवाद का बोध होता है, "इच्छावाचक वाक्य" कहलाते हैं। जैसे-ईश्वर करे सब कुछ पहले जैसा हो जाये।
(7) संकेतवाचक- ऐसे वाक्य जिनसे हमें एक क्रिया का दूसरी क्रिया पर निर्भर होने का बोध हो, ऐसे वाक्य 'संकेतवाचक वाक्य' कहलाते हैं। जैसे-अगर तुम कठिन परिश्रम करते तो आज सफल हो जाते。
(8) विस्मयादि वाचक- ऐसे वाक्य जिनसे हमें आश्चर्य, शोक, घृणा, अत्यधिक खुशी, स्तब्धता आदि भावों का बोध हो, ऐसे वाक्य "विस्मयादि बोधक" वाक्य कहलाते हैं। जैसे-ओह! कितना गर्म दूध है।
प्रश्न 36. आरोह-अवरोह को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: आरोह-अवरोह - आरोह-अवरोह के शाब्दिक अर्थ के अनुसार स्वरों के चढ़ते क्रम को आरोह एवं स्वरो के उतरते क्रम को अवरोह कहते हैं। जैसे
आरोह- सारेगमपधनिसां।
अवरोह- सांनिधपमगरेसा。
पठन की प्रक्रिया में जब तक उचित आरोह-अवरोह शामिल नहीं होता है तब तक उसमें सार्थकता पैदा नहीं होती है और नहि पाठ्य वस्तु का भाव ग्रहण होता है। पाठ्यवस्तु के भाव के अनुसार उचित आरोह-अवरोह का अभाव उसके भाव ग्रहण करने में भ्रम उत्पन्न कर देता है इसलिए पठन का मूल तत्व आरोह-अवरोह है。
उचित आरोह-अवरोह की कठिनाइयाँ-
(1) भाव को समझकर न पढ़ना।
(2) मूल भाव के विपरीत पठन।
(3) अधिक धीमी आवाज में पठन
(4) शीघ्रता से पठन।
(5) अधिक तेज आवाज में पठन
(6) धारा प्रवाह का अभाव।
प्रश्न 37. स्थानीय मान किसे कहते हैं? उदाहरण सहित समझाइये।
उत्तर: स्थानीय मान - स्थानीय मान या स्थानीय मूल्य या आकस्मिक मान किसी संख्या में किसी अंक का स्थान विशेष पर जो मान होता है, वही उस अंक का "स्थानीय मान" कहलाता है。
उदाहरण-
715
5 × 1 = 5
1 × 10 = 10
7 × 100 = 700
25456
6 × 1 = 6
5 × 10 = 50
4 × 100 = 400
5 × 1000 = 5000
2 × 10000 = 20000
प्रश्न 38. अरोही क्रम उदाहरण सहित समझाइये।
उत्तर: आरोही क्रम - गणित में, आरोही क्रम संख्याओं को बढ़ते क्रम में व्यवस्थित करने की प्रक्रिया है, यानी सबसे छोटे मान से सबसे बड़े मान तक। इसमें संख्याओं को बाएं से दाएं बढ़ते क्रम में व्यवस्थित किया जाता है। अतः संख्याओं के बढ़ते क्रम को आरोही क्रम कहा जाता है。
उदाहरण-
संख्या 9, 10, 15, 45, 19, 24, 25, 31
आरोही क्रम 9, 10, 15, 19, 24, 25, 31, 45
आरोही क्रम को '<' से प्रतीक द्वारा दर्शाया जाता है। जैसे 1 < 2 < 3 < 4 < 5 < 6 < 7 < 8 < 9 < 10
प्रश्न 39. घटाना में उधार क्यों लिया जाता है? उधार न लेने पर क्या समस्या आएगी?
उत्तर: घटाना में यदि घटाने वाली संख्या बड़ी है तो जिस संख्या से घटाते हैं उस संख्या के बाई वाली संख्या से उधार लिया जाता है, जिससे वह संख्या बड़ी बन जाती हैं, और हम आसानी से घटा सकते हैं।
उधार न लेने पर छोटी संख्या से बड़ी संख्या को घटाया नहीं जा सकता है。
उदाहरण- 475 - 418 = 057
घटाते समय इकाई की संख्या को इकाई से दहाई की संख्या को दहाई से एवं सैकड़े की संख्या को सैकड़े से घटाया जाता है। उपरोक्त में इकाई की संख्या 5, 8 से छोटी है। अतः घटा नही सकते, इसलिए बाई तरफ की संख्या से 1 उधार (Carry) लेकर, जिससे संख्या 15 हो जायेगी अब संख्या 8 को आसानी से घटा सकते हैं।
प्रश्न 40. जोड़ की प्रक्रिया में हासिल का महत्व एवं उपयोगिता बताइए।
उत्तर: जोड़ने का अर्थ है, किसी संख्या में वृद्धि करना, बढ़ाना या योग करना। यह गणितीय मूलभूत संक्रिया है। जब बालक संख्या गिनना भली-भाँति जान जाता है, तो उन्हें जोड़ सिखाना जरूरी हो जाता है。
उदाहरण-छात्रों को जोड़ सिखाते समय, उन्हें (+) का निशान (चिह्न) समझाना भी बहुत जरूरी है। इसके अभाव में उनका ज्ञान अधूरा रह जायेगा。
हासिल का जोड़ उदाहरण- 7645 + 2598 + 48
(1) पहला चरण-इकाइयों को जोड़ने पर 6+8=14 1 दहाई, 4 इकाई, 4 इकाई को इकाई के नीचे रखते हैं और 1 दहाई को हासिल कर लेते हैं。
(2) दूसरा चरण-दहाइयों को जोड़ने पर (1)+5+9=15, 5 को दहाई के नीचे रखते हैं और 1 को हासिल कर लेते हैं。
(3) तीसरा चरण-सैकड़ों को जोड़ने पर (1)+4+5=10, 0 को सैकड़े के नीचे लिखते हैं और 1 को हासिल कर लेते हैं。
(4) चौथा चरण-हजार को जोड़ने पर (1)+2+4=7, 7 को हजार के नीचे लिखते हैं। यहाँ पर कोई हासिल नहीं हैं केवल एक ही संख्या 7 प्राप्त हुई है。
(5) पाँचवा चरण- (0) + 7+ 8 = 15, 15 को दस हजार के नीचे लिखेंगे इस प्रकार संख्याओं का जोड़ हुआ 1570541
जोड़ की प्रक्रिया में हासिल का महत्व - जोड़ की क्रिया में परिणाम दस या अधिक होने पर दहाई की संख्या अपने बायें स्थित दहाइयों में जुड़ती हैं जिसे हासिल समझा जाता है। परिणाम के साथ प्रक्रिया भी महत्वपूर्ण होती है। बच्चे जोड़ के सवाल खुद पहचान लेते हैं और हल कर लेते हैं।