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PYQ 2021 • आरम्भिक स्तर पर भाषा एवं गणित के पठन लेखन-क्षमता का विकास

आरम्भिक स्तर पर भाषा एवं गणित के पठन लेखन-क्षमता का विकास Previous Year Paper 2021

UP DELED Semester 4 आरम्भिक स्तर पर भाषा एवं गणित के पठन लेखन-क्षमता का विकास Previous Year Question Paper 2021 with solution.

Section 1 वस्तुनिष्ठ प्रश्न

वस्तुनिष्ठ प्रश्न

वस्तुनिष्ठ प्रश्न

प्रश्न 1. क्ष, त्र, ज्ञ व्यंजन हैं-

(a) लुण्ठित व्यंजन

(b) संयुक्त व्यंजन

(c) ऊष्म व्यंजन

(d) उत्क्षिप्त व्यंजन

उत्तर: (b) : संयुक्त व्यंजन। यह दो या दो से अधिक व्यंजनों के मेल से बने होते हैं। हिन्दी वर्णमाला में 4 प्रकार के संयुक्त व्यंजन है- क्ष, त्र, ज्ञ, श्र।

प्रश्न 2. अनुनासिक चिह्न है-

(a) ँ

(b) :

(c) =

(d) इनमें से कोई नहीं।

उत्तर: (a) : अनुनासिक चिंह। जिन स्वरों का उच्चारण मुख और नासिका दोनों से किया जाता है उसे अनुनासिक चिह्न कहते हैं। अनुनासिक का चिंह चन्द्रबिंदु (ँ) है। जैसे चाँद, पाँच, ऊँट, हँसना आदि।

प्रश्न 3. गणित में मूल संक्रियाएँ हैं-

(a) 3 (तीन)

(b) 4 (चार)

(c) 6 (छ:)

(d) 7 (सात)।

उत्तर: (b) : गणित में मूल संक्रियाँए 4 है- जोड़, घटाना, गुणा और भाग।

प्रश्न 4. समान वितरण करने की क्रिया कहलाती है-

(a) जोड़

(b) गुणा

(c) घटाना

(d) भाग।

उत्तर: (d) : समान वितरण करने की क्रिया भाग कहलाती है।

प्रश्न 5. सही कथन है-

(a) भाज्य = भाजक x भागफल + शेषफल (विकल्प में + छूट गया है)

(b) 5 + 5 + 5 + 5 + 5 + 5 में 5 गुणज है

(c) किसी संख्या में अंकों का स्थानीय मान और आंसिक मान सदैव समान ही रहेगा

(d) विषम संख्याएँ 2 से भाज्य होती हैं।

उत्तर: (b): 5 + 5 + 5 + 5 + 5 + 5 में 5 गुणज है।

प्रश्न 6. 445 में 4 के स्थानीय मानों का अन्तर होगा-

(a) शून्य

(b) 396

(c) 360

(d) इनमें से कोई नहीं।

उत्तर: (c): 445 में 4 के स्थानीय मान
4 x 10 = 40
4 x 100 = 400
अतः 445 मे 4 के स्थानीय मानों का अन्तर = 400 - 40 = 360

प्रश्न 7. सही सुमेल है-

(a) कण्ठ्य - क वर्ग

(b) दन्तव्य - प वर्ग

(c) ओष्ठ्य - च वर्ग

(d) तालव्य - त वर्ग।

उत्तर: (a): स्पर्श व्यंजन की संख्या 25 होती है। जिन्हें पांच वर्गों में बांटा गया है-
(कण्ठ) क वर्ग - क, ख, ग, घ, ड़
(तालु) च वर्ग - च, छ, ज, झ, ञ
(मूर्धा) ट वर्ग - ट, ठ, ड, ढ, ण
(दन्त) त वर्ग - त, थ, द, ध, न
(ओष्ठ) प वर्ग - प, फ, ब, भ, म

प्रश्न 8. भाषा शिक्षण में शारीरिक समस्याएँ हैं-

(a) दृष्टि दोष

(b) श्रवण दोष

(c) उच्चारण दोष

(d) उपर्युक्त सभी।

उत्तर: (d): भाषा शिक्षण में शारीरिक समस्याएँ दृष्टि दोष, श्रवण दोष और उच्चारण दोष है।

प्रश्न 9. ओष्ठाकृति के आधार पर स्वर होते हैं-

(a) वृत्ताकार

(b) अवृत्ताकार

(c) 'अ' और 'ब' दोनों

(d) इनमें से कोई नहीं।

उत्तर: (c): ओष्ठाकृति के आधार पर स्वरों के दो भेद है:-
(1) वृत्ताकार स्वर - इनके उच्चरण में ओठों का आकार गोल हो जाता है। जैसे उ, ऊ, ओ, औ, आँ।
(2) अवृत्ताकार स्वर- इनके उच्चारण में ओठ गोल न खुलकर किसी अन्य आकर में खुलते हैं। जैसे अ, आ, इ, ई, ए, ऐ।

प्रश्न 10. निम्न में से चित्र लिपि है-

(a) चीनी लिपि

(b) तमिल लिपि

(c) गुजराती लिपि

(d) बंगाली लिपि।

उत्तर: (a) : चीनी लिपि वास्तव में चित्र और ध्वनि आधारित लिपि का एक मिश्रित रूप है।

प्रश्न 11. 2, 3, 5, 7 संख्याएँ हैं-

(a) प्राकृत संख्या

(b) अभाज्य संख्या

(c) परिमेय संख्या

(d) अपरिमेय संख्या।

उत्तर: (b): अभाज्य संख्या - वह संख्या जो स्वयं अथवा 1 के अतिरिक्त किसी अन्य संख्या से विभाजित नहीं होती है, अभाज्य संख्या कहलाती है। जैसे- 2, 3, 5, 7, 11 आदि।

प्रश्न 12. महाप्राण वर्ग हैं-

(a) क, ग

(b) च, ज

(c) ख, घ

(d) प, ब।

उत्तर: (c) : महाप्राण - ऐसे व्यंजन जिनको बोलते समय मुख से अधिक वायु निकलती है, उन्हें महाप्राण व्यंजन कहते हैं। जैसे ख, घ, छ, ठ आदि।

प्रश्न 13. कविता छन्दोमय रचना है यह कथन किसका है?

(a) आचार्य वामन

(b) कार्लाइल

(c) जानसन

(d) मिल्टन

उत्तर: (a) : आचार्य वामन के अनुसार 'कविता छन्दोमय रचना है।'

प्रश्न 14. एक परिमेय संख्या को किस रूप में व्यक्त किया जा सकता है?

(a) q ≠ 0

(b) p/q

(c) p ≠ 0

(d) इनमें से कोई नहीं।

उत्तर: (b): परिमेय संख्या - वह संख्या जो p/q के रूप में व्यक्त की जा सके, परिमेय संख्या कहलाती है। जहाँ q ≠ 0 हो। 3/4, -2/3, 8/5 आदि।

प्रश्न 15. व्यंजन 'त', 'थ', 'द', 'ध' अवयव हैं-

(a) कण्ठ

(b) तालु

(c) दन्त

(d) ओष्ठ।

उत्तर: (c) : दन्त ध्वनियाँ वह होती हैं जिनके उच्चारण में जीभ दाँतों के पिछले भाग को छूती है। जैसे त, थ, द, ध, न।

Section 2 अति लघु उत्तरीय प्रश्न

अति लघु उत्तरीय प्रश्न

अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 16. विराम चिह्न का प्रयोग कहाँ किया जाता है?

उत्तर: विराम का अर्थ है रूकना या ठहरना। वाक्य को लिखते अथवा बोलते समय बीच में कहीं थोड़ा बहुत रूकना पड़ता है जिससे भाषा स्पष्ट, अर्थवान एवं भावपर्ण हो जाती है। लिखित भाषा में इस ठहराव को दिखने के लिए कुछ विशेष प्रकार के चिह्नों का प्रयोग करते हैं, इन्हें ही विराम चिह्न कहा जाता है। वक्ता या लेखन को प्रभावी रूप से अपने भावों व विचारों को व्यक्त करते समय वाक्य के अंत में कभी-कभी बीच में ही साँस लेने के लिए रूकता है, इसे ही विराम कहते हैं। लेखन में भावों की अभिव्यक्ति, वाक्य का अर्थ स्पष्ट करने, उतार-चढ़ाव और ठहराव को दर्शाने के लिए विराम चिंह आवश्यक होते हैं।

प्रश्न 17. वर्ण किसे कहते हैं?

उत्तर: वर्ण - वर्ण भाषा की उस मूल ध्वनि को कहते हैं, जिसके और टुकड़े न हो सकें। वर्णों को अक्षर भी कहते हैं। वर्णों का प्रयोग बोलने या लिखने वाली ध्वनि के चिह्नों के रूप में होता है। अतः वर्ण भाषा की सबसे छोटी इकाई है। जैसे अ, ई, व, ख, क इत्यादि।

प्रश्न 18. गंगा के चार पयार्यवाची शब्द बताइए।

उत्तर: गंगा के पर्यायवाची शब्द - भागीरथी, मंदाकिनी, देवनदी, देवपगा, जाह्नवी, त्रिपथगा, सुरसरिता तथा विष्णुपदी आदि।

प्रश्न 19. तुकान्त शब्द क्या हैं?

उत्तर: तुकान्त शब्द - तुकांत शब्द ऐसे दो शब्दों के जोड़े को कहा जाता है। जिन शब्दों के अंतिम अक्षर एक समान हो। ऐसे शब्द सुनने में अधिकतर एक समान लगते हैं। जैसे हाथ-साथ, सरल-तरल आदि।

प्रश्न 20. आरोही क्रम व अवरोही क्रम में क्या अन्तर है?

उत्तर:
आरोही क्रम - आरोही क्रम का मतलब है बढ़ता हुआ क्रम। जब संख्याओं को बढ़ते हुए क्रम में लिखा जाता है उसे आरोही क्रम कहा जाता है।
जैसे - संख्या 8, 10, 5, 3, 12, को आरोही क्रम में लिखिए।
आरोही क्रम - 3, 5, 8, 10, 12
अवरोही क्रम - अवरोही का अर्थ है घटता हुआ क्रम। जब संख्याओं को घटते हुए क्रम में लिखा जाता है तो उसे अवरोही क्रम कहते है।
जैसेः संख्या 5, 25, 48, 6, 10 को अवरोही क्रम में लिखिए।
अवरोही क्रम - 48, 25, 10, 6, 5
अतः आरोही क्रम छोटे से बड़े की ओर तथा अवरोही क्रम बड़े से छोटे की ओर लिखा जाता है।

प्रश्न 21. "गणित वह मार्ग है जिसके द्वारा बच्चों के मन या मस्तिष्क में तर्क करने की आदत स्थापित होती है।" यह कथन किसका है?

उत्तर: लॉक के अनुसार गणित वह मार्ग है जिसके द्वारा बच्चों के मन या मस्तिष्क में तर्क करने की आदत स्थापित होती है।"

प्रश्न 22. गुणक किसे कहते हैं?

उत्तर:
गुणक (Multiplier) - जिस संख्या से गुणा किया जाता है, उसे गुणक कहते हैं।
गुण्य (Multiplicand) - जिस संख्या में गुणा किया जाता है, उसे गुण्य कहते हैं。
गुणनफल (Multiple) - गुणक से गुण्य में गुणा करने पर जो परिणाम प्राप्त होता है, उसे गुणनफल कहते हैं。
उदाहरण - 12 (गुण्य) x 15 (गुणक) = 180 (गुणनफल)

प्रश्न 23. स्थानीय मान से क्या तात्पर्य है?

उत्तर: स्थानीय मानः किसी संख्या में किसी अंक का वह मान जो उसके स्थान विशेषज्ञ की स्थिति के अनुसार बदलता रहता है। अर्थात् अंक सहित मान ही स्थानीय मान है। उदाहरण के लिए, 482 में 8, 8 दहाई या 80 को दर्शाता है।

प्रश्न 24. 'द्विज' शब्द किसे कहते हैं?

उत्तर: 'द्विज' शब्द - द्विज शब्द 'द्वि' और 'ज' से बना है। द्विका अर्थ होता है दो और ज का अर्थ होता है जन्म होना अर्थात् जिसका दो बार जन्म हो उसे द्विज कहते हैं। द्विज शब्द का प्रयोग पक्षी तथा ब्राह्मण के लिये होता है क्योंकि पक्षी एक बार अंडे के रूप में जन्म लेता है और दूसरी बार पक्षी के रूप में ।

प्रश्न 25. 'लिपि' किसे कहते हैं?

उत्तर: लिपि का अर्थ है किसी भाषा की लेखन शैली अथवा ढंग अर्थात् किसी भी भाषा की ध्वनियों को लिखने के लिए जिन चिह्नों का प्रयोग किया जाता है। उसे लिपि कहते हैं। जैसे हिन्दी भाषा को लिखने के लिए देवानागरी लिपि का प्रयोग किया जाता है। देवनागरी लिपि में हिन्दी के अलावा संस्कृत, पाली, मराठी, कोंकणी आदि भाषाएँ भी लिखी जाती है।

प्रश्न 26. मिश्रित वाक्य किसे कहते हैं?

उत्तर: मिश्रित वाक्य - जिस वाक्य में एक से अधिक वाक्य मिले हो, किन्तु एक प्रधान उपवाक्य तथा शेष आश्रित उपवाक्य हो, उसे मिश्रित वाक्य कहते हैं। जैसे - अध्यापक ने कहा कि कल विद्यालय बंद रहेगा।

प्रश्न 27. सह-अभाज्य संख्याएँ किसे कहते हैं?

उत्तर: सह-अभाज्य संख्या - वे संख्याएं जिनका महत्व समापवर्तक (HCF) 1 होता है, सह-अभाज्य संख्याएं कहलाती है। जैसे (4, 5) तथा (6, 7) सह-अभाजय संख्या है, क्योंकि 4 और 5 का HCF एक है और 6 और 7 का HCF भी एक है।

प्रश्न 28. 40 पुस्तकों को 6 विद्यार्थियों में समान रूप से वितरित करने पर कितनी पुस्तकें शेष बचेंगी?

उत्तर:
पुस्तकों की संख्या = 40
विद्यार्थियों की संख्या = 6
शेष पुस्तकें = ?
6 ) 40 ( 6
- 36
4
अतः 40 पुस्तकों को 6 विद्यार्थियों में समाज रूप से वितरित करने पर 4 पुस्तकें शेष बचेंगी।

प्रश्न 29. अपरिमेय संख्याएँ किसे कहते हैं?

उत्तर: अपरिमेय संख्याएँ - अपरिमेय संख्या वह वास्तविक संख्या है जो परिमेय नहीं है, अर्थात् जिसे भिन्न P/q के रूप में व्यक्त नहीं किया जा सकता है, जहाँ p और q पूर्णांक है, जिसमें q गैर-शून्य है। इसलिए परिमेय संख्या नहीं है। उदाहरण - -√2, √3, √p यदि अपरिमेय संख्याएँ है।

प्रश्न 30. काव्य का क्या अभिप्राय है?

उत्तर: काव्य - काव्य, कविता या पद्य, साहित्य की वह विधा है जिसमें किसी कहानी या मनोभाव को कलात्मक रूप से किसी भाषा के द्वारा अभिव्यक्त किया जाता है। भारत में कविता का इतिहास और कविता का दर्शन बहुत पुराना है। इसका प्रारम्भ भरतमुनि से समझा जा सकता है।
अथवा
काव्य वह है जो उदित हृदय में कोई भाव जाग्रत कर दे या उसे प्रस्तुत वस्तु या तथ्य की मार्मिक भाषा में लीन कर दे।
विश्वनाथ के अनुसार काव्य की परिभाषा- "रसयुक्त वाक्य को ही काव्य कहा गया है।"

Section 3 लघु उत्तरीय प्रश्न

लघु उत्तरीय प्रश्न

लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 31. सम तथा विषम संख्याओं में उदाहरण सहित अन्तर स्पष्ट कीजिए।

उत्तर:
सम संख्या - वे संख्याएँ जो 2 से विभाजित हो जाए सम संख्या कहलाती है। जैसे 2, 4, 6, 8, 10 आदि सम संख्याएँ है。
विषम संख्या - वे संख्याएं जो 2 से विभाजित न हो उसे विषम कहते हैं। जैसे 3, 5, 7, 11 आदि विषम संख्याएँ है।

प्रश्न 32. अनुनासिक और अनुस्वार में उदाहरण सहित अन्तर स्पष्ट कीजिए।

उत्तर:
अनुनासिक - जिन स्वरों का उच्चारण मुख और नासिका दोनों से किया जाता है वे अनुनासिक कहलाते हैं। अनुनासिक को चंद्रबिन्दु (ँ) से प्रदर्शित करते हैं। जैसे हँसना, आँख, ऊँट आदि。
अनुस्वार - वे शब्द जिनका उत्वारण नाक से होता है, उन्हें अनुस्वार कहते हैं। जैसे कंचन, पंख, जंगल आदि अनुस्वार शब्द है। अनुस्वार को बिदु (ं) से प्रदर्शित करते हैं।

प्रश्न 33. वाक्य कितने प्रकार के होते हैं? उनका संक्षिप्त वणर्न कीजिए।

उत्तर: वाक्यों का विभाजन दो आधार पर किया गया है जो इस प्रकार है-
(1) अर्थ के आधार पर वाक्य के प्रकार
(2) रचना के आधार पर वाक्य के प्रकार
रचना के आधार पर वाक्य के मुख्यतः 3 भेद होते हैं जो निम्नलिखित है-
(1) सरल वाक्य
(2) संयुक्त वाक्य
(3) मिश्रित वाक्य
(1) सरल वाक्य - जिस वाक्य में एक ही विधेय और एक ही उद्देश्य हो, सरल या साधारण वाक्य कहलाता है। जैसे - राम खाना खाता है। राधा बाजार जा रही है。
(2) संयुक्त वाक्य - जो वाक्य दो या दो से अधिक प्रकार के योजकों से मिलकर बने होते हैं, वह संयुक्त वाक्य कहलाते हैं। जैसे राम सुबह दिल्ली गया था और शाम को लौट आया。
(3) मिश्रित वाक्य - जिन वाक्यों में एक प्रधान वाक्य और अन्य आश्रित वाक्य मौजूद होते हैं। वह मिश्रित वाक्य कहलाते हैं। उदाहरण - जैसे ही शाम हुई, बिजली चली गई। जैसे ही बादल घिरे, मोर नाचने लगा।

प्रश्न 34. हासिल की अवधारणा को आप बच्चों को किस प्रकार समझाएँगे?

उत्तर: जोड़ना का अर्थ है मूल संख्या में वृद्धि करना, बढ़ाना या योग करना। यह गणितीय मूलभूत संक्रिया है जब बालक संख्या गिनने का भली प्रकार ज्ञान प्राप्त कर लेते हैं, तो उन्हें जोड़ना सिखाना जरूरी हो जाता है। उदाहरण छात्रों को एक का जोड़ सिखाना। छात्रों को जोड़ (+) का निशान सझाना भी बहुत जरूरी है, क्योंकि इसके अभाव में उनका ज्ञान अधूरा रह जायेगा。
हासिल का जोड़
जैसे -
द.ह. ह. सै. द. इ.
4 2 5 8 3
+ 4 2 4 8 9
----------------
8 5 0 7 2
----------------
1. पहला चरण - इकाइयों को जोड़ने पर 3+9=12, 1 दहाई, 2 इकाई, 2 इकाई को इकाई के नीचे रखते हैं और 1 दहाई को हासिल कर लेते हैं。
2. दूसरा चरण - इकाइयों को जोड़ने पर (1)+8+8=17, 1 सैकड़ा और 7 दहाई के नीचे रखते हैं और (1) सैकड़ा हासिल ले लेते हैं。
3. तीसरा चरण - सैकड़ा को जोड़ने पर (1)+5+4=10, 1 हजार 0 सैकड़ा, सैकड़े को सैकड़े के नीचे रखते हैं और 1 हासिल कर लेते हैं。
4. चौथा चरण - हजार को जोड़ने पर (1)+2+2=5 है जो कि हजार में लिखेंगे, इसमें कोई हासिल नहीं है。
5. पाँचवाँ चरण - हजारों को जोड़ने पर 0+4+4=8 इस प्रकार दोनों संख्याओं का जोड़ 85072 हुआ।

प्रश्न 35. किसी बालक में भाषा के प्रति रुचि उत्पन्न करने के लिए आप किन विधियों का प्रयोग करेंगे?

उत्तर: किसी बालक में भाषा के प्रति रूचि उत्पन्न करने के लिए प्रश्नोत्तर प्रणाली की भूमिका सबसे अधिक है क्योंकि इस प्रणाली विधि के तहत विद्यार्थियों :के-
(1) पूर्व ज्ञान को नए ज्ञान से जोड़ा जाता है।
(2) जिज्ञासा को नए-नए प्रश्नों द्वारा उचित दिशा मिलती है।
(3) व्यावहारिक भाषा के अनुसार प्रश्नों का निर्माण किया जाता है।
(4) सही या गलत के लिए शिक्षक द्वारा उचित प्रतिक्रिया दी जाती है。
प्रसिद्ध दार्शनिक सुकरात द्वारा प्रतिपादित प्रश्नोत्तर विधि भाषा शिक्षक की ऐसी विधि है, जिसके अन्तर्गत शिक्षक बच्चों से प्रश्न पूछता है तथा उनके उत्तरो के आधार पर पाठ को पढ़ाते हुए अर्थ स्पष्ट करता है। इस विधि से विद्यार्थियों के प्रति रूचि का विकास संभव है।

प्रश्न 36. चित्रलिपि के लाभ लिखिए।

उत्तर: चित्रलिपि के लाभ - चित्रलिपि आज महत्वपूर्ण है क्योंकि वे ज्ञात लेखन के सबसे पुराने रूपों में से एक है। वे हमें प्राचीन मिस्त्र की संस्कृति, जीवन और इतिहास को समझने में मदद करते हैं। चित्रलिपि ऐसी लिपि को कहा जाता है जिसमें ध्वनि प्रकट करने वाली अक्षरमाला की बजाए अर्थ प्रकट करन वाले भावाचित्र होते हैं। कुछ भावचित्र ऐसे होते हैं कि किसी चीज को ऐसे दर्शाते हैं। कि उस भावचित्र से अपरिचित व्यक्ति भी उसका अर्थ पहचान सकता है。

प्रश्न 37. स्वर किसे कहते हैं? दीर्घ स्वर को उदाहरण सहित समझाइए।

उत्तर: स्वर - वे अक्षर जिसका उच्चारण करते समय हवा हमारे मुख से बिना रूकावट के बाहर निकल जाती है, उसे स्वर कहते हैं। स्वरों का उच्चारण किसी अन्य अक्षर की सहायता के बिना स्वतंत्र रूप से होता है। हिन्दी भाषा में कुल 11 स्वर हैं- अ, आ, इ, ई, ऊ, ऋ, ए, ऐ, ओ, औ。
उच्चारण में लेने वाले समय (मात्रा) के आधार पर स्वरों के 3 भेद होते हैं-
(1) ह्रस्व स्वर
(2) दीर्घ स्वर
(3) प्लुत स्वर
दीर्घ स्वर - जिन स्वरों के उच्चारण में दो मात्रा का समय लगता हैं, उन्हें दीर्घ स्वर कहते हैं। इनकी संख्या 7 होती है। आ, ई, ऊ, ए, ऐ, ओ, औ दीर्घ स्वर के उदाहरण है।

प्रश्न 38. श्रवण कौशल का उद्देश्य एवं महत्व बताइए।

उत्तर: श्रवण कौशल का उद्देश्य एवं महत्व :-
श्रवण कौशल का उद्देश्य -
(1) छात्रों में श्रवण के प्रति रूचि उत्पन्न करना जिससे वे दूसरों की बातों को ध्यानपूर्वक सुन सकें
(2) भाषा एवं साहित्य के प्रति रूचि उत्पन्न करना।
(3) छात्रों को साहित्यिक गतिविधियों में भाग लेने व सुनने के लिए प्रेरित करना。
(4) धैर्यपूर्वक सुनना, सुनने के शिष्टाचार का पालन करना।
(5) बालकों को अच्छा श्रोता बनाना भी भाषा शिक्षण का एक प्रमुख उद्देश्य है, जिसकी अभी एक अपेक्षा होती है。
महत्वः - बालक प्रारम्भिक काल से ही सार्थक और निरर्थक अनेक ध्वनियाँ सुनना प्रारम्भ कर देता है। श्रवण केवल शारीरिक क्रिया नहीं अपितु एक मानसिक क्रिया है। व्यक्ति अपने पूर्वानुभव के सन्दर्भ में श्रुत सामग्री को समझता है, उस पर विचार करता है। ध्यान भटक जाने पर वह श्रुत विषय का पूरा बोध नहीं कर पाता। वैदिककालीन और उत्तर वैदिककालीन जितना भी साहित्य था वह सुनकर ही याद किया जाता था। इसी कारण वेद को श्रुति भी कहा जाता है। आज भी बालक अधिकांश ज्ञान प्राप्त करता है। शैक्षणिक अनुसंधान विश्वकोष में श्रवण शक्ति के शोध कार्यों पर चर्चा करते हुए सामड्यूकर ने कई तथ्य प्रस्तुत किय हैं- प्राथमिक कक्षाओं में बालक 58% समय सुनने में व्यतीत करता है और कक्षा में लगभग आधा समय अध्यापक की बातें सुनता है。

प्रश्न 39. गणित शिक्षण का महत्व एवं उपयोगिता बताइए।

उत्तर: गणित शिक्षण का महत्व एवं उपयोगिता - शिक्षा के क्षेत्र में गणित का अत्यधिक महत्व है। गणित का हमारे दैनिक जीवन में गणित के संबंध है। आधुनिक युग में सभ्यता का आधार गणित ही है गणित को व्यापार का प्राण एवं विज्ञान का जन्मदाता माना जाता है।
गणित के महत्व व उपयोगिता को निम्न प्रकार से स्पष्ट किया जा सकता है-
(1) निश्चित्ता और आत्मनिर्भरता की दृष्टि से गणित का महत्व - गणित एक ऐसा विषय है जो व्यक्ति को निश्चित्ता सिखाता है गणित छात्रों में, दृढ़ता तथा आत्मविश्वास उत्पन्न करता है।
(2) दैनिक जीवन में गणित का महत्व - दैनिक जीवन में विक्रय, आय-व्यय, आदि सभी के लिए गणित के ज्ञान की आवश्यकता होती है। गणित के बिना हमारा जीवन, गूंगे, बहरे तथा अंधे के समान हो जाएगा।
(3) प्रकृति अध्ययन के लिए गणित का महत्व - प्राकृतिक घटनाओं जैसे सूर्य, चन्द्रमा, तारों के निकलने तथा छिपने का समय उसकी स्थिति एवं दिशा आदि के ज्ञान में गणित विशेष उपयोगी सिद्ध होता है।
(4) गणित का बौद्धिक महत्व - मानसिक एवं बौद्धिक विकास के लिए गणित शिक्षण का अत्यंत महत्व है।
(5) गणित का उपयोगात्मक महत्व - व्यवहारिक जीवन में गणित की उपयोगिता अन्य विषयों की तुलना में बहुत अधिक है। दैनिक जीवन में क्रय-विक्रय, माप, तोल, जोड़ घटाना, आय-व्याधि का लेखा-जोखा आदि सभी व्यक्तियों को करना पड़ता है। इस प्रकार घर, दफ्तर, व्यापर सभी जगह गणित की आवश्यकता पड़ती है। अतः गणित संबंधी घटनाओं के बिना दैनिक जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती है。

प्रश्न 40. लेखन की किन्हीं दो विधियों का वर्णन कीजिए।

उत्तर: लेखन की विधियाँ - लेखन की विधियाँ निम्नलिखित है-
(1) खण्डशः रेखालेखन विधि
(2) मॉन्टेसरी विधि
(3) जैटकॉक विधि
(4) पेस्टालॉजी विधि
(5) अनुकरण विधि
(6) स्वतंत्र लेखन विधि
(1) खण्डशः रेखालेखन विधिः इस विधि में बालक को अक्षर का ज्ञान देने के लिए सर्वप्रथम वर्णों को तोड़-तोड़ कर लिखना सिखाया जाता है। अर्थात् सबसे पहले बालक को वर्ण का आधा भाग फिर पूरा वर्ण लिखना सिखाया जाता है। इस प्रकार से बालक आसानी से पूर्ण अक्षर लिखना सीख लेता है。
(2) मॉन्टेसरी विधिः इस विधि के अन्तर्गत लिखना सिखाने में आँख, कान और हाथ तीनों के प्रयोग पर बल दिया जाता है। इसमें बालक को पहले लकड़ी अथवा गत्ते के बने अक्षरों पर उंगली फेरने को कहा जाता है। और बालक जब प्रवीण हो जाता है। तो उन्हीं अक्षरों पर उसमें रंगीन पेन्सिल घुमाने को कहा जाता है। अतः इस प्रकार बालक उन अक्षरों को पहचानने तथा लिखने में समर्थ हो जाता है。

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