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PYQ 2025 • आरम्भिक स्तर पर भाषा एवं गणित के पठन लेखन-क्षमता का विकास

आरम्भिक स्तर पर भाषा एवं गणित के पठन लेखन-क्षमता का विकास Previous Year Paper 2025

UP DELED Semester 4 आरम्भिक स्तर पर भाषा एवं गणित के पठन लेखन-क्षमता का विकास Previous Year Question Paper 2025 with solution.

Section 1 वस्तुनिष्ठ प्रश्न

वस्तुनिष्ठ प्रश्न

वस्तुनिष्ठ प्रश्न

प्रश्न 1. उत्पत्ति की दृष्टि से शब्द का प्रकार नहीं हैं-

(a) तद्भव

(b) तत्सम

(c) देशज

(d) योगरूढ़

उत्तर: (d) : उत्पत्ति की दृष्टि से शब्द के चार प्रकार या भेद होते है तत्सम, तद्भव, देशज तथा विदेशज। अतः योगरूढ़ इसका प्रकार नहीं हैं।

प्रश्न 2. उत्क्षिप्त व्यंजन कहलाते हैं-

(a) ड़, ढ़

(b) य, व

(c) र, ल

(d) श, ह

उत्तर: (a) : उत्क्षिप्त व्यंजन वे व्यंजन है जिन्हें बोलते समय जीभ को अचानक से किसी अन्य भाग पर टकराकर या जोर से फेंका जाता हैं। हिंदी में, 'ड़' और 'ढ़' उत्क्षिप्त व्यंजन के उदाहरण है।

प्रश्न 3. 'मुझसे बैठा नहीं जाता' वाच्य का उदाहरण हैं-

(a) भाववाच्य

(b) कर्मवाच्य

(c) कर्तृवाच्य

(d) उभयवाच्य का

उत्तर: (a) : दिये गये विकल्पों में 'मुझसे बैठा नहीं जाता' यह 'भाववाच्य' का उदाहरण हैं। कर्ता या कर्म की प्रधानता न होकर भाव की प्रधानता हैं।

प्रश्न 4. निम्न में से एक परिमेय संख्या हैं-

(a) $q\ne0$

(b) P/q

(c) $p\ne0$

(d) इनमें से कोई नहीं

उत्तर: (b) : परिमेय संख्या, एक ऐसी संख्या है जिसे p/q के रूप मे व्यक्त किया जा सकता है जहाँ p और q पूर्णांक है और q शून्य के बराबर नहीं हैं।

प्रश्न 5. श्वाँस के आधार पर व्यंजनों का वर्गीकरण होता हैं-

(a) सघोष एवं अघोष

(b) स्पर्श एवं ऊष्मा

(c) अल्पप्राण एवं महाप्राण

(d) अनुस्वार एवं अनुनासिक

उत्तर: (c) : श्वाँस की मात्रा के आधार पर व्यंजनों को दो भागों में विभाजित किया गया हैं- अल्पप्राण और महाप्राण।

प्रश्न 6. किसी संख्या के दाहिनी ओर शून्य रखने पर वह संख्या बढ़ जाती हैं-

(a) 5 गुना

(b) 2 गुना

(c) 20 गुना

(d) 10 गुना

उत्तर: (d) : किसी संख्या के दाहिनी ओर शून्य रखने पर वह संख्या 10 गुना बढ़ जाती हैं। उदाहरण 2 का दाहिनी ओर शून्य रखने पर वह 20 हो जाता हैं (2 × 10 = 20)।

प्रश्न 7. 'तुरंग' शब्द का पर्यायवाची है।

(a) शेर

(b) घोड़ा

(c) हाथी

(d) मोर

उत्तर: (b) : 'तुरंग' शब्द का अर्थ 'घोड़ा' होता है। इसके पर्यायवाची शब्द अश्व, घोटक, हयं, बाजि, रविसुत आदि है。

प्रश्न 8. देवनागरी लिपि नहीं होती है।

(a) हिन्दी भाषा की

(b) संस्कृत भाषा की

(c) गुजराती भाषा की

(d) मराठी भाषा की

उत्तर: (c) : देवनागरी लिपि एक प्राचीन भारतीय लिपि है जिसमें संस्कृत, हिंदी, मराठी आदि देशभाषाएँ लिखी जाती हैं। देवनागरी लिपि में गुजराती भाषा शामिल नहीं हैं।

प्रश्न 9. शुद्ध वर्तनीयुक्त शब्द है।

(a) अन्त्याक्षरी

(b) अन्ताक्षरी

(c) अन्तक्षरी

(d) अनताक्षरी

उत्तर: (a) : शुद्ध वर्तनीयुक्त शब्द अन्त्याक्षरी है। यह शब्द 'अंत्य' (अंतिम) और 'अक्षर' (वर्ण) से मिलकर बना है। इस खेल में अंतिम अक्षर से नए शब्द या वाक्य शुरू करने का नियम होता है。

प्रश्न 10. सोच समझकर खर्च करने वाले को कहते हैं।

(a) कृपण

(b) अपव्ययी

(c) कंजूस

(d) मितव्ययी

उत्तर: (d) :
सोच समझकर खर्च करने वाला व्यक्ति - मितव्ययी
जो धन का भोग या व्यय न करे - कंजूस
कंजूसी करने वाला व्यक्ति - कृपण
व्यर्थ या अनुचित खर्च करने वाला व्यक्ति - अपव्ययी

प्रश्न 11. संख्या 4547 में 5 का अंकित मान हैं।

(a) 500

(b) 5

(c) 50

(d) इनमें से कोई नहीं

उत्तर: (b) : संख्या 4547 में 5 का अंकित मान 5 है। किसी संख्या में उस अंक का वास्तविक मूल्य उस संख्या का अंकित मूल्य होता हैं।

प्रश्न 12. 'उपकार' का विलोम हैं।

(a) परोपकार

(b) सदाचार

(c) अपकार

(d) कदाचार

उत्तर: (c) : 'उपकार' का विलोम शब्द 'अपकार' होता है। सदाचार का विलोम शब्द दुराचार या कदाचार होता हैं।

प्रश्न 13. तीन अंकों की सबसे पहली संख्या होती है।

(a) 999

(b) 101

(c) 190

(d) 100

उत्तर: (d) : तीन अंको की सबसे पहली संख्या 100 होती है। इसे तीन अंको की सबसे छोटी संख्या भी कहते हैं। तीन अंको की सबसे बड़ी संख्या 999 होती हैं।

प्रश्न 14. वसन शब्द का अर्थ है।

(a) कपड़ा

(b) बुरी आदत

(c) तीर

(d) ये सभी

उत्तर: (a) : वसन का अर्थ होता है कपड़े, वस्त्र या आवरण। व्यसन का अर्थ होता हैं- आदत, लत या बुरा शौक।

प्रश्न 15. "लेखन एक शारीरिक क्रिया है जिसमें बालकों के हाथों को गतिविधियां करनी पड़ती है।" यह कथन हैं-

(a) सुकरात

(b) प्लेटो

(c) मांटेसरी

(d) एनी बेसेण्ट

उत्तर: (c) : यह कथन मांटेसरी का हैं। मारिया मांटेसरी का मानना था कि लेखन एक शारीरिक क्रिया हैं, जिसमें बच्चों को अपने हाथों का उपयोग करके अक्षरों और शब्दों को बनाना होता है।

Section 2 अति लघु उत्तरीय प्रश्न

अति लघु उत्तरीय प्रश्न

अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 16. स्वर के कितने भेद होते हैं? नाम लिखिए।

उत्तर: स्वर के मुख्य रूप से तीन भेद होते हैंः ह्रस्व स्वर, दीर्घ स्वर और प्लुत स्वर।
ह्रस्व स्वर का उच्चारण कम समय में होता हैं, जैसे अ, इ, उ, ऋ।
दीर्घ स्वर का उच्चारण ह्रस्व स्वरों की तुलना में अधिक समय में होता हैं, जैसे आ, ई, ऊ, ए, ऐ, ओ, औ।
प्लुत स्वर का उच्चारण और भी लंबा होता है और विशेष परिस्थितियों में उपयोग किया जाता हैं, जैसे संस्कृत में 'अऽ'।

प्रश्न 17. विकारी शब्द किसे कहते हैं?

उत्तर: प्रयोग के आधार पर शब्दों के दो भेद किए गए हैं- विकारी तथा अविकारी।
विकारी शब्दः जिन शब्दों का रूप परिवर्तन होता रहता है वे विकारी शब्द कहलाते हैं। जैसे:-

  • कुत्ता, कुत्ते, कुत्तों
  • मैं, मुझे, हमें
  • अच्छा, अच्छे
  • खाता है, खाती है, खाते है।

इनमें संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण और क्रिया विकारी शब्द हैं।

प्रश्न 18. सम संख्या किसे कहते हैं?

उत्तर: "सम संख्या" का अर्थ है एक ऐसी संख्या जिसे 2 से विभाजित करने पर शेषफल 0 आए। दूसरे शब्दों में, सम संख्याएँ वे संख्याएँ होती है जो 2 से पूरी तरह से विभाजित हो जाती है। सम संख्याओं का अंतिम अंक 0, 2, 4, 6, या 8 होता है। उदाहरण के लिए, 2, 4, 6, 8, 10, 12, 14, 16, आदि सम संख्याएँ है।

प्रश्न 19. रचना के आधार पर वाक्य के भेद लिखिए।

उत्तर: रचना के आधार पर वाक्य तीन प्रकार के होते हैं:

  1. साधारण वाक्य या सरल वाक्य
  2. संयुक्त वाक्य
  3. मिश्रित वाक्य

सरल वाक्य में एक मुख्य क्रिया और एक कर्ता होता हैं, जबकि संयुक्त वाक्य में दो या दो से अधिक सरल वाक्य समुच्चय बोधक अव्यय से जुड़े होते हैं। मिश्र वाक्य में एक मुख्य वाक्य और एक या एक से अधिक आश्रित उपवाक्य होते हैं जो मुख्य वाक्य पर निर्भर होते हैं।

प्रश्न 20. 'गणेश' शब्द के पर्यायवाची शब्द लिखिए।

उत्तर: 'गणेश' शब्द के कई पर्यायवाची शब्द है, जिनमें से कुछ प्रमुख हैः विनायक, लंबोदर, गौरीनंदन, गणपति, गजानन, महाकाय, एकदंत, मोदकदाता, पार्वतीनंदन, गणाधिप, विध्नेश, विध्नेश्वर, वक्रतुण्ड, सिद्धिविनायक, मंगलमूर्ति अंबिकेय, ईशानपुत्र और शंकरसुवन होते हैं।

प्रश्न 21. अनुनासिक वर्ण किसे कहते हैं? दो उदाहरण लिखिए।

उत्तर: जिन स्वरों के उच्चारण में मुख के साथ साथ नासिका (नाक) की भी सहायता लेनी पड़ती है, अर्थात् जिन स्वरों का उच्चारण मुख और नासिका दोनों से किया जाता है वे अनुनासिक कहलाते हैं। उदाहरण के लिए, अनुनासिक वर्णों को चन्द्रबिन्दु (ँ) लगाकर दर्शाया जाता है। जैसे हँसना, आँख, चाँद इत्यादि।

प्रश्न 22. श्रुतलेख से आप क्या समझते हैं?

उत्तर: श्रुतलेख का अर्थ 'सुने हुए को लिखना' या 'सुनकर लिखना' होता है जिसे 'इमला' भी कहते हैं, इससे सुनकर लिखने की कुशलता का विकास होता है।

  • श्रुतलेख लेखन कौशल को विकसित करने का साधन है, परन्तु इसकी सहायता से श्रवण कौशल को भी विकसित किया जा सकता है।

प्रश्न 23. अनुस्वार एवं अनुनासिक का चिन्ह स्पष्ट कीजिए।

उत्तर: अनुस्वार (ं): हिंदी भाषा में स्वर के बाद आने वाले व्यंजन होते है। इनका उच्चारण नाक से होता हैं। जैसे पंचायत, रंग, अंतिम आदि।
अनुनासिक (ँ): यह स्वर होते हैं तथा इनका उच्चारण नाक और मुंह दोनों से होता है। आँख, चाँद आदि।
इनके प्रयोग में त्रुटि के कारण कुछ शब्दों के अर्थ में अंतर आ जाता है। जैसे हंस (एक जल पक्षी), हँस (हँसने की क्रिया)।

प्रश्न 24. गुणा में कौन - कौन सी संक्रियाएँ होती हैं? लिखिए।

उत्तर: गुणा एक गणितीय संक्रिया है जिसमें एक संख्या को दूसरी संख्या से कितनी बार जोड़ा जाता है, यह दर्शाया जाता है। गुणा को दो संख्याओं को एक साथ जोड़कर किया जाता है और परिणाम को गुणनफल कहा जाता है। गुणा को अक्सर 'x' या '*' द्वारा दर्शाया जाता हैं। उदाहरण के लिए, यदि हम 5 को 4 से गुणा करते हैं, तो गुणा में शामिल संक्रियाएं-

  • गुणक (Multiplier): वह संख्या जो दूसरी संख्या से गुणा की जाती है, जैसे-4
  • गुण्य (Multiplicand): वह संख्या जिसे गुणा किया जाता है, जैसे-5
  • गुणनफल (Product): दो संख्याओं को गुणा करने के बाद प्राप्त परिणाम, जैसे 20

प्रश्न 25. समानार्थी शब्द के दो उदाहरण लिखिए।

उत्तर: समानार्थी शब्द वे शब्द होते हैं जिनका अर्थ दूसरे शब्द के समान या लगभग समान होता है। दूसरे शब्दों में, समानार्थी शब्द वे हैं जो एक ही अर्थ को व्यक्त करने के लिए उपयोग किए जाते हैं। उदाहरण के लिए- सुंदर और आकर्षक एक दूसरे के समानार्थी हैं क्योंकि वे दोनों किसी ऐसे व्यक्ति या चीज को संदर्भित करते है जो अच्छा दिखता है।

प्रश्न 26. श, ष एवं स का उच्चारण स्थान लिखिए।

उत्तर: श, ष एवं स का उच्चारण स्थान-

  • श (तालव्य): यह जीभ तालु (मुँह के ऊपरी भाग) से स्पर्श होती है तो श का उच्चारण होता है। उदाहरण के लिए, शब्द, शशि, शिशु।
  • ष (मूर्धन्य): जब जीभ मूर्धा (तालु के थोड़ा पीछे का भाग) से स्पर्श होती है तो ष का उच्चारण होता है। उदाहरण के लिए, षष्ठी, षट्, विशेष।
  • स (दंत्य): जब जीभ दाँत से स्पर्श होती है तो स का उच्चारण होता हैं। उदाहरण के लिए समय, सत्य, संस्कृत।

प्रश्न 27. ऐच्छिक शब्द का विलोम लिखिए।

उत्तर: 'ऐच्छिक' का सही विलोम शब्द 'अनैच्छिक' होता।

  • 'ऐच्छिक' शब्द का अर्थ-जो अपनी इच्छा या पसंद पर निर्भर हो।
  • 'अनैच्छिक' शब्द का अर्थ-इच्छा के बिना होने वाला।

प्रश्न 28. आघात किसे कहते हैं?

उत्तर: आघातः बोलते समय किसी शब्द के किसी अक्षर को या किसी शब्द समूह के किसी शब्द के उच्चारण को जो विशेष रूप से बल दिया जाता है, उसे आघात, बलाघात या स्वराघात कहते हैं। शब्दों के उच्चारण में अक्षरों पर जो जोर लगता है, उसे आघात या बल कहते हैं। ध्वनि, कंपन की लहरों से बनती है। यह बल अथवा आघात उन ध्वनि लहरों के छोटी बड़ी होने पर निर्भर होता है।

प्रश्न 29. पठन कितने प्रकार का होता है?

उत्तर: पढ़ना अथवा पठन भाषा के चार कौशलों में से एक हैं। पठन कौशल के दो प्रकार हैं:-

  1. सस्वर पठनः स्वर सहित पढ़ते हुए अर्थ ग्रहण करने को सस्वर पठन कहते हैं।
  2. मौन पठनः मौन पठन, पठन का एक प्रकार हैं जिसमें लिखित सामग्री को बिना आवाज किए भावार्थ को समझते हुए पढ़ना शामिल होता है।

प्रश्न 30. कोठारी आयोग ने गणित के विषय में क्या कहा था?

उत्तर: 1968 की शुरूआत में ही कोठारी आयोग ने गणित के महत्व पर जोर दिया था। इसने कहा, 'राष्ट्रीय अर्थ व्यवस्था के विकास में तेजी लाने के उद्देश्य से, विज्ञान शिक्षा और अनुसंधान को उच्च प्राथमिकता मिलनी चाहिए।' विज्ञान और गणित को स्कूली स्तर के अंत तक सामान्य शिक्षा का अभिन्न अंग होना चाहिए।

Section 3 लघु उत्तरीय प्रश्न

लघु उत्तरीय प्रश्न

लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 31. लेखन में वर्तनी अशुद्धि निवारण के उपाय बताइए

उत्तर: लेखन में वर्तनी अशुद्धि निवारण के उपाय-

  1. व्याकरण के नियमों को समझें: हिंदी व्याकरण के नियमों, विशेष रूप से वर्तनी से संबंधित नियमों को समझना आवश्यक हैं।
  2. नियमित रूप से पढ़ेंः नियमित रूप से पढ़ने से, आप विभिन्न शब्दों को सही ढंग से लिखने और बोलने की आदत डाल सकते हैं।
  3. अभ्यास करेंः जो शब्द आपकों लिखने में मुश्किल लगते हैं, उनके लिए अभ्यास करें। उदहारण के लिए, आप किसी शब्द को बार-बार लिख सकते हैं, या उसे किसी वाक्य में प्रयोग का सकते हैं।
  4. शब्द कोश का उपयोग करेंः यदि आपकों किसी शब्द की सही वर्तनी या उसके अर्थ के बारे में संदेह हैं, तो आप शब्दकोश का उपयोग कर सकते हैं।
  5. वर्तनी संबंधी अशुद्धियों के लिए जांच करेंः अपने लेखन को ध्यान से जांचे और वर्तनी संबंधी अशुद्धियों को ढूंढने के लिए एक वर्तनी जांच उपकरण का उपयोग करे।

प्रश्न 32. अर्थ के आधार पर वाक्य के भेद लिखिए।

उत्तर: अर्थ के आधार पर वाक्य के आठ भेद हैं-

वाक्य परिभाषा उदाहरण
विधान वाचक वाक्य ऐसे वाक्य जिनसे किसी काम के होने या किसी के अस्तित्व का बोध हो, वह वाक्य विधानवाचक वाक्य कहलाता है। ममता ने खाना खा लिया।
इच्छावाचक वाक्य ऐसे वाक्य जिनसे हमें वक्ता की कोई इच्छा, कामना, आकांक्षा आर्शीवाद आदि का बोध हो, वह वाक्य इच्छावाचक वाक्य कहलाते हैं। ईश्वर करे सब कुशल लौटें।
आज्ञावाचक वाक्य ऐसे वाक्य जिनमें आदेश, आज्ञा या अनुमति का पता चले या बोध हो, वे वाक्य आज्ञावाचक वाक्य कहलाते हैं। वहां जाकर बैठिये।
निषेधवाचक वाक्य जिन वाक्यों से कार्य के निषेध का बोध होता है, वह वाक्य निषेधवाचक वाक्य कहलाते हैं। मैं घर नहीं जाऊंगा।
प्रश्नवाचक वाक्य जिन वाक्यों में कोई प्रश्न किया जाये या किसी से कोई बात पूछी जायें, उन्हें प्रश्नवाचक वाक्य कहते हैं। तुम्हारा क्या नाम है?
विस्मयादि बोधक वाक्य ऐसे वाक्य जिनमें हमें आश्चर्य, शोक घृणा, अत्यधिक खुशी, स्तब्धता आदि भावों का बोध हो, ऐसे वाक्य विस्मयादिबोधक वाक्य कहलाते हैं। इन वाक्यों में विस्मयादिबोधक चिन्ह (!) लगता हैं। ओह ! कितनी ठंडी रात हैं।
संकेत वाचक वाक्य वे वाक्य जिनसे हमें एक क्रिया का दूसरी क्रिया पर निर्भर होने का बोध हो, ऐसे वाक्य संकेतवाचक वाक्य कहलाते हैं। अगर तुम परिश्रम करते तो आज सफल हो जाते ।
संदेह वाचक वाक्य ऐसे वाक्य जिनसे हमें किसी प्रकार के संदेह या संभावना का बोध होता हैं, वह वाक्य संदेहवाचक वाक्य कहलाते हैं। आज बहुत तेज बारिश हो सकती हैं।

प्रश्न 33. विराम चिन्हों के प्रकार लिखिए।

उत्तर: विराम शब्द वि + रम् + घं से बना है और इसका मूल अर्थ है "ठहराव", "आराम" आदि के लिए। जिन सर्वसंमत चिन्हों द्वारा, अर्थ की स्पष्टता के लिए वाक्य को भिन्न भिन्न भाँगों में बाँटते हैं, व्याकरण या रचनाशास्त्र में उन्हें 'विराम' कहते हैं। अन्य शब्दों में, 'विराम चिन्ह' वे प्रतीक या निशान हैं जिनका उपयोग लिखित भाषा में वाक्यों और शब्दों के बीच ठहराव, भाव और अर्थ को स्पष्ट करने के लिए किया जाता हैं。
विराम चिन्ह के प्रकार:

  • अल्प विराम (,)
  • अर्द्ध विराम (;)
  • पूर्ण विराम (।)
  • उप विराम (:)
  • प्रश्नवाचक चिन्ह (?)
  • योजक चिन्ह (-)
  • कोष्ठक चिन्ह ( () {} [] )
  • उद्धरण चिन्ह ( '' "" )
  • विस्मयादिबोधक चिन्ह (!)
  • लाघव चिन्ह (०)
  • निर्देशक चिन्ह (—)
  • विवरण चिन्ह (:-)
  • त्रुटिपूरक चिन्ह या पदलोप चिन्ह (......)
  • रेखांकन चिन्ह (_)
  • पुनरूक्ति सूचक चिन्ह (,,)
  • दीर्घ उच्चारण चिन्ह (ऽ)
  • समानता सूचक चिन्ह (=)

प्रश्न 34. आरम्भिक स्तर पर पठन की उपयोगिता पर प्रकाश डालिए।

उत्तर: आरम्भिक स्तर पर पठन का कई लाभ है, जैसे कि बच्चों को भाषा के प्रति रूचि जागृत करना, शब्दों और वाक्य संरचना को समझना, और भाषा कौशल का विकास करना। यह उन्हें आगे चलकर स्वतंत्र पाठक बनने में भी मदद करता है。

  • भाषा के प्रति रूचिः आरम्भिक स्तर पर पठन बच्चों को भाषा के प्रति रूचि विकसित करने में मदद करता हैं, जिससे वे आगे चलकर भाषा सीखने में अधिक रूचि लेते हैं।
  • शब्दों और वाक्य संरचना को समझनाः पठन के माध्यम से बच्चे शब्दों और वाक्य संरचना को समझने लगते हैं, जिससे वे भाषा को बेहतर तरीके से समझने और उपयोग करने में सक्षम होते हैं।
  • भाषा कौशल का विकासः आरम्भिक स्तर पर पठन बच्चों के भाषा कौशल, जैसे कि सुनने, बोलने, पढ़ने और लिखने को विकसित करने में मदद करता है।

प्रश्न 35. गणित की संक्रियाओं में शून्य का महत्व स्पष्ट कीजिए।

उत्तर: गणित में शून्य एक अत्यंत महत्वपूर्ण संख्या है। यह न केवल एक संख्या है बल्कि कई गणितीय संक्रियाओं और अवधारणाओं का आधार है। शून्य का महत्व निम्नलिखित बिंदुओं से समझा जा सकता हैं:

  1. योगात्मक तत्समकः शून्य को किसी भी संख्या में जोड़ने पर वह संख्या अपरिवर्तित रहती है। उदाहरण के लिए, 5 + 0 = 5
  2. गुणात्मक तत्समकः किसी भी संख्या को शून्य से गुणा करने पर परिणाम हमेशा शून्य होता है। उदाहरण के लिए, 5 × 0 = 0
  3. स्थान निरूपकः दशमलव प्रणाली में, शून्य संख्याओं को अलग अलग स्थानों पर दर्शाने के लिए उपयोग किया जाता है। यह संख्याओं को उनके सही मान को निर्धारित करने में मदद करता है।
  4. निर्देशांक प्रणालीः शून्य निर्देशांक प्रणालियों का केन्द्र बिंदु है। जिससे दूरियाँ और स्थितियाँ मापी जाती है।

प्रश्न 36. श्रवण कौशल के उद्देश्य लिखिए।

उत्तर: श्रवण कौशल वह क्षमता है जिसके द्वारा व्यक्ति ध्यानपूर्वक सुनकर, समझकर और उपयुक्त प्रतिक्रिया देकर संचार करता है। यह केवल शब्दों को सुनने तक सीमित नहीं होता, बल्कि बोलने वाले की भावनाओं, विचारों और संदेशों को सही ढंग से ग्रहण करने की योग्यता को भी दर्शाता हैं。
श्रवण कौशल के उद्देश्यः-

  • दूसरो की बात को ध्यानपूर्वक सुनने की आदत डालना।
  • दूसरे के द्वारा किए गए उच्चारण को सुनकर शुद्ध उच्चारण का अनुकरण करना।
  • शुद्ध सामग्री का अर्थ समझने की योग्यता विकसित करना।
  • वक्ता के मनोभावों को समझाने में निपुण बनना।
  • ध्वनियों को विभेदीकरण करने की क्षमता विकसित करना।
  • छात्रों में शब्द भंडार की वृद्धि करना।
  • समाज, व्यवहार, जीवन सम्बन्धित महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान करना।

प्रश्न 37. वाक्य के आवश्यक तत्व कौन कौन से हैं? लिखिए।

उत्तर: वाक्य के चार आवश्यक तत्व होते हैंः सार्थकता, आकांक्षा, अन्वय और पदक्रम। इन गुणों के बिना वाक्य पूर्ण नही होता है और अर्थ व्यक्त नहीं कर सकता है。

  1. सार्थकताः वाक्य में प्रयुक्त सभी शब्दों का सार्थक होना आवश्यक है। ऐसा नही चाहिए कि वाक्य में कोई निरर्थक शब्द प्रयुक्त हो। उदाहरणः राम बाजार गया। (यह एक सार्थक वाक्य है क्योंकि सभी शब्द सार्थक हैं।)
  2. आकांक्षाः वाक्य में एक शब्द को दूसरे शब्द के साथ संबंध स्थापित करने की क्षमता होनी चाहिए। यह संबंध व्याकरण के नियमों के अनुसार होना चाहिए। उदाहरण- मैं बाजार गया। (यहाँ 'मैं' शब्द 'बाजार' शब्द के साथ आकांक्षा रखता है और 'गया' शब्द 'मैं' शब्द के साथ आकांक्षा रखता है।)
  3. अन्वयः वाक्य में शब्दों का एक निश्चित क्रम में व्यवस्थित होना आवश्यक है ताकि अर्थ स्पष्ट हो सके। यह क्रम व्याकरण के नियमों के अनुसार होना चाहिए। उदाहरणः राम बाजार गया। (यहाँ शब्दों का क्रम व्याकरण के नियमों के अनुसार है और वाक्य का अर्थ स्पष्ट हैं।)
  4. पदक्रमः वाक्य में शब्दों का सही क्रम में व्यवस्थित होना आवश्यक है। यदि शब्दों का क्रम गलत होता है तो वाक्य का अर्थ गलत हो सकता है या वाक्य का अर्थ ही समझ में नहीं आएगा। उदाहरणः बाजार गया राम। (यहाँ शब्दों का क्रम गलत है और वाक्य का अर्थ गलत हो सकता हैं।)

प्रश्न 38. आप कविता द्वारा संख्याओं का क्रम कैसे सिखायेंगे? उदाहरण लिखिए।

उत्तर: कविताओं के माध्यम से संख्याओं का क्रम सिखाने के लिए, आप विभिन्न प्रकार की कविताओं का उपयोग कर सकते हैं। जो गिनती, क्रम और संख्याओं के बीच संबंध पर आधारित है。
उदाहरण के लिएः
(1) गिनती पर कविताः
एक छोटी चिड़िया, गई पेड़ पर सो。
दो छोटी चिड़िया, जा रही थी बाजार。
एक और आ गई, हो गई वो चार。
(2) बढ़ते क्रम पर कविताः-
एक, दो, तीन
चार, पाँच, छः,
सात, आठ, नौ,
फिर दस और बस。
(3) संख्याओं के बीच संबंध पर कविताः-
एक और एक दो होता है,
दो और दो चार होता है。
तीन और तीन छः होता है,
और ऐसे ही आगे बढ़ता हैं。

प्रश्न 39. गणित शिक्षण की आवश्यकता पर टिप्पणी लिखिए।

उत्तर: गणित शिक्षण की आवश्यकता कई कारणों से है। यह छात्रों के सामाजिक, व्यावहारिक और बौद्धिक विकास में सहायक होता है। गणित से तार्किक और तर्कशक्ति का विकास होता है, जो उन्हे दैनिक जीवन की समस्याओं को हल करने में मदद करता हैं。

  1. सामाजिक विकासः गणित सामाजिक गतिविधियों में मदद करता है, जैसे कि क्रय विक्रय, पैसे की गणना, और बजट बनाना।
  2. व्यावहारिक विकासः गणितीय अवधारणाओं का उपयोग करके रोजमर्रा की समस्याओं को सुलझाया जा सकता हैं, जैसे कि माप, गणना और मात्रा का अनुमान लगाना।
  3. बौद्धिक विकासः गणित तार्किक और तर्कशक्ति का विकास करता हैं, जो छात्रों को समस्या समाधान और आलोचनात्मक सोच के कौशल विकसित करने में मदद करता है।

प्रश्न 40. संख्या 8350 को 5 से भाग दीजिए और भाज्य, भाजक, भागफल और शेषफल लिखिए।

उत्तर:

  • वह संख्या जिसे हम विभाजित करते हैं, 'भाज्य' कहलाती है।
  • वह संख्या जिसके द्वारा हम विभाजित करते हैं, 'भाजक' कहलाती है।
  • प्राप्त परिणाम 'भागफल' कहलाता है।
  • शेष बची संख्या को शेषफल कहा जाता है।

भाज्य = भाजक × भागफल + शेषफल
संख्या 8350 को 5 से भाग देने पर, भाज्य 8350, भाजक 5, भागफल 1670 और शेषफल 0 होता है。

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