वस्तुनिष्ठ प्रश्न
प्रश्न 1. निम्नलिखित में एसीटिलीन का रासायनिक सूत्र है-
(a) CH4
(b) C2H6
(c) C2H4
(d) C2H2
उत्तर: (d): एसीटिलीन का रासायनिक सूत्र C2H2 है इसे एथाइन या विनाइलीन भी कहा जाता है। यह एक रंगहीन गैस है और इसका उपयोग ईंधन और रासानिक निर्माण ब्लॉक के रूप में किया जाता है।
प्रश्न 2. जब वस्तु अवतल दर्पण की मुख्य फोकस एवं वक्रता केन्द के मध्य रखी है तो प्रतिबिम्ब बनेगा-
(a) उल्टा, वास्तविक तथा वस्तु से बड़ा
(b) सीधा, वास्तविक एवं वस्तु से छोटा
(c) उल्टा, वास्तविक तथा वस्तु से छोटा
(d) सीधा, वास्तविक तथा वस्तु से बड़ा।
उत्तर: (a) : जब वस्तु अवतल दर्पण की मुख्य फोकस एवं वक्रता केन्द्र के मध्य रखी है तो प्रतिबिम्ब उल्टा, वास्तविक तथा वस्तु से बड़ा बनेगा।
प्रश्न 3. हरित लवक रहित पौधों का समूह है-
(a) शैवाल
(b) कवक
(c) अनावृत बीजी
(d) उपर्युक्त सभी
उत्तर: (b) : हरितलवक या क्लोरोप्लास्ट एक प्रकार का कोशिकांग हैजो सुकेन्द्रिक पादप कोशिकाओं में और शैवालीय कोशिकाओं में पाया जाता हैं। क्लोरोप्लास्ट हरे वर्णक है ये प्रकाश संश्लेषण की क्रिया में सहायता करते हैं। अतः हरित लवक रहित पौधों का समूह कवक है।
प्रश्न 4. किसी वस्तु द्वारा प्रति सेकेण्ड किए गए कम्पनों की संख्या को कहते हैं-
(a) आवर्तकाल
(b) आयाग
(c) आवृत्ति
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर: (c): किसी वस्तु द्वारा प्रति सेकेण्ड किए गए कम्पनों की संख्या को आवृत्ति (Frequency) कहते है। इसकी इकाई हर्ज (Hz) है। कंपित वस्तु द्वारा एक दोलन पूरा करने में, लिए गए समय को आवर्तकाल कहते हैं। इसका SI मात्रक सेकंड है। कंपित वस्तु अपनी माध्य स्थिति से ईधर-उधर जिस अधिकतम (Maximum) दूरी तक जाती है, उसे आयाम कहते है। इसका SI मात्रक मीटर है।
प्रश्न 5. वायु दाब आरोपित करती है-
(a) केवल ऊपर की दिशा में
(b) केवल नीचे की दिशा में
(c) चारो दिशाओं में
(d) किसी दिशा में नहीं
उत्तर: (c) : वायुदाब एक स्थिर, सर्वव्यापी बल होता है, जो वायु सभी दिशाओं में सभी वस्तुओं पर आरोपित करती है।
अति लघु उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 6. यांत्रिक ऊर्जा किसे कहते हैं? सूत्र लिखिए।
उत्तर: यांत्रिक ऊर्जा (Mechanical Energy)-किसी वस्तु पर किये गये कार्य को यांत्रिक ऊर्जा कहते हैं। जैसे-फेंके गए पत्थर, चाबी भरा खिलौना आदि की ऊर्जा यांत्रिक ऊर्जा है।
यांत्रिक ऊर्जा दो प्रकार की होती है-
- गतिज ऊर्जा (Kinetic Energy)
- स्थितिज ऊर्जा (Potential Energy)
सूत्र-किसी वस्तु की यांत्रिक ऊर्जा उसकी गतिज ऊर्जा व स्थितिज ऊर्जा के योग के बराबर होती है।
अतः यांत्रिक ऊर्जा = गतिज ऊर्जा + स्थितिज ऊर्जा
यांत्रिक ऊर्जा = $$\frac{1}{2}mv^{2}+Mgh$$
प्रश्न 7. प्रतिध्वनि सुनाई देने के लिए ध्वनि, उत्पादक और परावर्तक तल के बीच की न्यूनतम दूरी कितनी होनी चाहिए?
उत्तर: प्रतिध्वनि सुनाई देने के लिए ध्वनि, उत्पादक और परावर्तक तल के बीच की न्यूनतम दूरी 17 मीटर (16.6 मी.) होनी चाहिए।
प्रश्न 8. शिराएँ क्या है? इनका मुख्य कार्य क्या है?
उत्तर: कार्य-शिराएँ रक्त को शरीर के विभिन्न अंगों से हृदय तक पहुँचाती हैं शिराओं में अशुद्ध रक्त प्रवाहित होता हैं। शिराओं में जो रक्त प्रवाहित होता हैं उसमें कार्बनडाइऑक्साइड की मात्रा अधिक एवं ऑक्सीजन की मात्रा कम होती है। पल्मोनरी शिराएँ फेफड़ों से रक्त को बाएं आलिंद तक पहुँचाती हैं। पल्मोनरी शिराओं में शुद्ध रक्त प्रवाहित होता है।
प्रश्न 9. प्रतिवर्ती क्रिया का कोई दो उदाहरण लिखिए।
उत्तर: प्रतिवर्ती क्रिया (Reflex Actions)- कुछ अनुक्रियाएँ तुरन्त होती हैं और मस्तिष्क के आदेश के बिना ही हो जाती है। इस प्रकार की अनुक्रियाएँ प्रतिवर्ती क्रियाएँ या स्वतः प्रेरित क्रियाएँ कहलाती है। उदाहरण- छींकना, खाँसना, पलक का झपकना एवं उबासी लेना आदि।
प्रश्न 10. नवीकरणीय ऊर्जा किसे कहते है? लिखिए।
उत्तर: नवीकरणीय ऊर्जा (Renewable Energy)-ऐसे ऊर्जा स्रोत जो प्रकृति में निरंतर उत्पन्न होते रहते हैं तथा कभी समाप्त नहीं होते, उन्हें नवीकरणीय ऊर्जा कहते हैं। जैसे सौर ऊर्जा, वायु ऊर्जा, ज्वारीय ऊर्जा तथा जल ऊर्जा आदि।
प्रश्न 11. रासायनिक परिवर्तन किसे कहते है? लिखिए।
उत्तर: रासायनिक परिवर्तन-वह परिवर्तन, जिसमें एक अथवा एक से अधिक नए पदार्थ बनते हैं, रासायनिक परिवर्तन कहलाता है। इसमें पूर्व पदार्थों को प्राप्त नहीं किया जा सकता है। यह परिवर्तन स्थायी होता है। उदाहरण-लोहे पर जंग लगना, दूध से दही बनना आदि।
लघु उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 12. पर्यावरण संरक्षण से क्या अभिप्राय हैं? अपने स्तर से आप पर्यावरण को कैसे संरक्षित करेंगे?
उत्तर: पर्यावरण संरक्षण (Environment Protection)-पर्यावरण संरक्षण का तात्पर्य है कि हम अपने चारों ओर के वातावरण को संरक्षित रखे क्योंकि पर्यावरण और प्राणी एक-दूसरे पर आश्रित हैं। इसमें वायु, जल, भूमि, वनस्पतियों, जीवों और अन्य प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण शामिल है।
पर्यावरण को संरक्षित करने के उपाय-
- पानी बचाएं-पानी बचाने के लिए कम पानी का उपयोग करें, नल बंद रखें, और वर्षा जल का संग्रह करें।
- पौधे लगाएं-पौधे लगाने से वायु को शुद्ध करने और पर्यावरण को बेहतर बनाने में मदद मिलती है।
- कचरा कम करें-कचरा कम करने के लिए कम सामान खरीदें, रीसायकल करें, और खाद बनाएं।
- प्लास्टिक का उपयोग कम करें-प्लास्टिक का उपयोग कम करने के लिए plastic की थैलियों और पानी की बोतलों का उपयोग न करें।
- बिजली बचाएं-बिजली बचाने के लिए कम बिजली का उपयोग करें और जब आप कमरें में न हो तो लाइट बंद कर दें।
अतः पर्यावरण संरक्षण हम सभी की जिम्मेदारी है। हम सभी को मिलकर अपने स्तर से पर्यावरण को संरक्षित करने के लिए प्रयास करना चाहिए।
प्रश्न 13. स्टरलाइजेशन विधि से खाद्य पदार्थो को सूक्ष्म जीवों से कैसे सुरक्षित रखा जा सकता है? संक्षेप में लिखिए।
उत्तर: स्टरलाइजेशन विधि खाद्य पदार्थों को सूक्ष्म जीवों से सुरक्षित रखने का एक प्रभावी तरीका है। विभिन्न प्रकार की स्टरलाइजेशन विधियों का उपयोग विभिन्न प्रकार की खाद्य पदार्थों के लिए किया जा सकता है। इससे खाद्य पदार्थ एक निश्चित समय तक खराब नहीं होते हैं। फ्रिज एक ऐसा उपकरण है जिसके द्वारा सामान्य ताप से कम ताप (5°C-10°C) उत्पन्न कर सूक्ष्म जीवों की उपापचयी क्रियाएँ तथा वृद्धि को नियन्त्रित किया जाता है। इसीलिए फ्रिज का उपयोग फल, सब्जियों तथा खाद्य पदार्थों आदि को संरक्षित करने के लिए एवं पेय पदार्थों को ठण्डा करने के लिए किया जाता है।
प्रश्न 14. अभिसारी एवं अपसारी लेंस में क्या अन्तर है? संचित्र संक्षेप में समझाइए।
उत्तर: अभिसारी एवं अपसारी लेंस में अन्तर-
अभिसारी लेंस:
- अभिसारी लेंस को उत्तल लेंस कहते है।
- यह बीच में से मोटा तथा किनारों से पतला होता है।
- इससे अक्षर बड़े दिखते हैं।
- यह प्रकाश किरणों को केन्द्रित करता है इसलिए इसे अभिसारी लेंस कहते हैं।
- इससे वस्तु का प्रतिबिम्ब वास्तविक तथा उल्टा बनता है।
- की फोकस दूरी धनात्मक होती है।
अपसारी लेंस:
- अपसारी लेंस को अवतल लेंस कहते है।
- यह बीच में से पतला किनारों से मोटा होता है।
- इससे अक्षर छोटे दिखते है।
- यह प्रकाश किरणों को फैलाता है इसलिए इसे अपसारी लेंस कहते है।
- इससे वस्तु का प्रतिबिम्ब आभासी तथा सीधा बनता है।
- इसकी फोकस दूरी ऋणात्मक होती है।
प्रश्न 15. धातुओं के संक्षारण हेतु अपनाई जाने वाली विभिन्न विधियों को संक्षेप में बताइए।
उत्तर: धातुओं के संक्षारण हेतु अपनाई जाने वाली विभिन्न विधियाँ निम्नलिखित है-
- गैल्वोनीकरण (धातु चढ़ाना) - लोहा को जंग से बचाने के लिए लोहे की चादर या अन्य पात्र को पिघले हुए जस्ते में डुबा देते हैं, जिसके कारण लोहे पर जस्ते की एक पतली परत जम जाती है। इस लोहे का उपयोग बाल्टी, टंकी आदि बनाने में किया जाता है।
- इलेक्ट्रोप्लेंटिग (विद्युत लेपन)- कुछ धातु जैसे क्रोमियम, निकिल तथा टिन वायुमण्डल में उपस्थित ऑक्सीजन एवं नमी से प्रभावित नहीं होते हैं। लोहे का क्षरण रोकने के लिए उसके चारों ओर क्रोमियम या टिन की विद्युत लेपन की जाती है।
- ग्रीस या तेल लगाकर - नए औजारों जैसे-कैंची, चाकू, मशीन आदि पर ग्रीस या तेल लगाकर उन्हें क्षरण से बचाया जा सकता है।
- पेंट का लेप चढ़ाकर - धातु की वस्तुओं की सतह पर पेंट लगाकर उसे क्षरण से बचाया जा सकता है।
प्रश्न 16. अनुकूलन किसे कहते हैं। मरूस्थलीय अनुकूलन को संक्षेप सहित समझाइए।
उत्तर: अनुकूलन-आकृति, आकार, रंग-रूप, संरचना तथा आवास सम्बन्धी लक्षणों में ऐसा परिवर्तन जो सजीव को विशेष पर्यावरण में सफलतापूर्वक जीवित रहने में सहायक होता है, अनुकूलन कहलाता है। मरूस्थल में रहने वाले जन्तुओं को विशेष परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है जैसे-पानी की कमी, तेज धूप तथा गरम बालू पर चलना।
प्रश्न 17. कार्बनिक रसायन का क्या अभिप्राय है कार्बनिक यौगिकों में श्रृंखलन की विशेषता को उदाहरण सहित कीजिए।
उत्तर: कार्बनिक रसायन-कार्बनिक रसायन का सम्बन्ध मुख्यतः कार्बन और हाइड्रोजन के अणओं वाले रासायनिक योगिकों के संरचना, गुणधर्म, रासायनिक अभिक्रियाओं एवं उनके निर्माण आदि के वैज्ञानिक अध्ययन से है। कार्बनिक यौगिकों में कार्बन और हाइड्रोजन के अतिरिक्त अन्य अणु भी हो सकते है। जैसे नाइट्रोजन, ऑक्सीजन, हैलोजन, फॉस्फोरस, सिलिकॉन, गंधक आदि। कार्बनिक यौगिकों के निरन्तर अध्ययन से ही ज्ञात होता है कि सभी कार्बनिक यौगिकों में तत्व कार्बन का होना आवश्यक है। श्रृंखलन की विशेषताओं के अंतर्गत खुली श्रृंखला और शाखित श्रृंखला प्रमुख हैं।
प्रश्न 18. एक प्रारूपिक पुष्प का चित्र बनाकर लेबिल कीजिये।
उत्तर: प्रारूपिक पुष्प का विवरण - पुष्प वास्तव में पत्तियों का ही रूपान्तरण होता है। यह अपने डण्ठल के पुष्पासन पर लगा रहता है। इसे पुष्प वृन्त कहते हैं। पुष्प का जन्म कली से होता है, जो कि हरी पत्तियों से ढँकी रहती है। इन पत्तियों को वाह्यपुट चक्र कहते हैं। प्रारूपिक पुष्प के चार प्रकार के अंग होते , जो पुष्पासन पर लगे रहते हैं। यह चार अंग चक्रों में लगे रहते हैं। इन अंगों के प्रत्येक भाग को पुष्य कहते हैं। चारों चक्रों में से नीचे के दो चक्र सहायक तथा ऊपर के दो चक्र वाह्यपुट कहलाते है। मुख्य अंगो में बाडादल पुंज, दलपुंज, पुमंग, और जायांग (वर्तिकाग्र, वर्तिका, अण्डाशय) सम्मिलित हैं।