वस्तुनिष्ठ प्रश्न
प्रश्न 1. समावेशी शिक्षा के अन्तर्गत किस तरह के बच्चों को शिक्षा की हद में लाना होगा?
(a) सड़कों पर पाये जाने वाले बच्चे
(b) कार्यशील बच्चे
(c) एच. आई. वी. पॉजिटिव बच्चे
(d) उपरोक्त सभी
उत्तर: (d): समावेशी शिक्षा के अन्तर्गत सामान्य व असामान्य दोनों बच्चों को एक कक्षा के छत के नीचे समान रूप में साथ 2 शिक्षा देने की व्यवस्था है। इसमें सड़कों पर पाये जाने वाले बच्चे कार्यशील बच्चें एवं एच.आई.वी से ग्रसित बच्चों को शिक्षा की हद में लाना होता है।
प्रश्न 2. पुर्नवास प्रशिक्षण एवं शोध राष्ट्रीय संस्थान कहाँ स्थित है?
(a) उत्तर प्रदेश
(b) आन्ध्र प्रदेश
(c) उड़ीसा
(d) नई दिल्ली
उत्तर: (c) : पुर्नवास प्रशिक्षण एवं शोध राष्ट्रीय संस्थान उड़ीसा में स्थित है।
प्रश्न 3. भारतीय पुर्नवास परिषद की स्थापना की गयी?
(a) 1968
(b) 1986
(c) 1991
(d) 1993
उत्तर: (d): भारतीय पुर्नवास परिषद की स्थापना 1993 में की गई।
प्रश्न 4. अस्थि बाधिता के कारण हैं -
(a) जन्मजात
(b) दुर्घटना
(c) बीमारी
(d) उपरोक्त सभी
उत्तर: (d) : अस्थि बाधिता जन्मजात, दुर्घटना तथा गम्भीर बीमारी के कारण भी हो सकती है।
प्रश्न 5. दृष्टिहीन बालक ज्ञान प्राप्त करते है -
(a) स्पर्श द्वारा
(b) श्रवण द्वारा
(c) a एवं b दोनों
(d) उपरोक्त में से कोई नहीं
उत्तर: (c): दृष्टि बालक, स्पर्श द्वारा, श्रवण द्वारा तथा ब्रेल लिपि की सहायता से ज्ञान प्राप्त कर सकते हैं।
प्रश्न 6. "वंचित होना बाल्य जीवन की उद्दीपक दिशाओं की न्यूनता है।" यह परिभाषा दिया गया है -
(a) वॉकमैन ने
(b) गार्डन ने
(c) आंटो ने
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर: (b): गार्डन का कथन है- "वंचित होना बाल्य जीवन की उद्दीपक दिशाओं की न्यूनता है।"
प्रश्न 7. दृष्टि बाधिता का मुख्य कारण है?
(a) वातावरण
(b) वंशानुक्रम
(c) दोनों (a एवं b)
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर: (c) : दृष्टि बाधिता का मुख्य कारण वातावरण एवं वंशानुक्रम भी हो सकता है।
प्रश्न 8. साइको गैलवनिक स्किन रेजिस्टेन्स आडियोमीटर का प्रयोग करते हैं?
(a) श्रवण बाधित पर
(b) अस्थि बाधित पर
(c) दृष्टि बाधित पर
(d) उपरोक्त सभी
उत्तर: (a): साइको गैलवनिक स्किन रेजिस्टेन्स ऑडियोमीटर का प्रयोग श्रवण बाधित बालकों पर किया जाता है।
प्रश्न 9. टरमन के अनुसार प्रतिभाशाली बालक की बुद्धि होती है -
(a) 120 से अधिक
(b) 135 से अधिक
(c) 140 से अधिक
(d) उपरोक्त में कोई नहीं
उत्तर: (c) : टरमन के अनुसार प्रतिभाशाली बालक की बुद्धि लब्धि 140 होती है।
प्रश्न 10. अल्फ्रेड बिने ने बुद्धि परीक्षण बनाया?
(a) 1879 में
(b) 1911 में
(c) 1857 में
(d) 1905 में
उत्तर: (b) : अल्फ्रेड बिने ने बुद्धि परीक्षण सन् 1911 में बनाया अल्फ्रेड बिने एक फ्रांसिसी मनोविज्ञानी थे।
प्रश्न 11. किसी बालक के अपराधी बनने के कारण है?
(a) वातावरणीय कारक
(b) वंशानुक्रम
(c) a एवं b दोनों
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर: (c): किसी बालक के अपराधी बनने में वातावरणीय कारक के साथ वंशानुक्रम कारक भी होते हैं।
प्रश्न 12. समावेशी बालक समूह बनाते हैं?
(a) समांगी
(b) असमांगी
(c) विषमांगी
(d) उपरोक्त सभी
उत्तर: (c): समावेशी बालक विषयमांगी समूह बनाते है।
प्रश्न 13. लुई ब्रेल का जन्म हुआ था?
(a) 1809
(b) 1806
(c) 1820
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर: (a): नेत्रहीनों को पढ़ने और लिखने के लिए एक लिपि का निर्माण हुआ जिसे ब्रेल ने किया था इनका जन्म 4 जनवरी 1809 में हुआ था।
प्रश्न 14. ब्रेल लिपि पर कितने बिन्दु होते है -
(a) दस (10)
(b) छः (6)
(c) सात (7)
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर: (b): ब्रेल लिपि पर छः-छः बिन्दु दो पंक्तियों में होते हैं।
प्रश्न 15. दृष्टिबाधितों के लिये राष्ट्रीय शिक्षा संस्थान स्थित है?
(a) हरिद्वार में
(b) कानपुर में
(c) आगरा
(d) देहरादून में
उत्तर: (d) : दृष्टिबाधितों के लिए राष्ट्रीय शिक्षा संस्थान देहरादून में स्थित हैं।
अति लघु उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 16. बाल-अपराधी बालकों के उपचार की विधि बताइये।
उत्तर: बाल-अपराधि बालकों के उपचार विधि- बाल-अपराधी बालकों के उपचार की विधियाँ निम्न हैं-
- मनोचिकित्सा
- व्यवहार चिकित्सा
- परिवेश चिकित्सा पद्धति
- यर्थाथ चिकित्सा
प्रश्न 17. मन्द बुद्धि बालकों के पहचान (लक्षण) बताइये।
उत्तर: मन्द बुद्धि बालकों के पहचान निम्न द्वारा कर सकते हैं -
- सामान्य बालक की अपेक्षा मन्द बुद्धि बालक देर से चलना, बैठना, बोलना सीखते है।
- मन्द बुद्धि बालक सामान्य बालकों की अपेक्षा समाज के साथ सामंजस्य स्थापित करने में कठिनाई अनुभव करते हैं।
प्रश्न 18. अपवंचन क्या है?
उत्तर: अपवंचन से अभिप्राय किसी उद्दीपक दशाओं की नयूनता है। किसी भी व्यक्ति या बाल्य जीवन की उद्दीपक दशाओं की न्यूनता है।
प्रश्न 19. वाणी बाधित (वाकदोष) बच्चों के लक्षण बताइये।
उत्तर: वाक दोष से पीड़ित बालक कुछ ध्वनियाँ नहीं निकाल पाते हैं। वे एक शब्द के एक दो अक्षर बोल देते हैं। वाक दोष वाले बालक हकलाते हैं। वाक बाधित बच्चें धारा प्रवाह नहीं बोल पाते हैं।
प्रश्न 20. प्रतिभाशाली बालकों की दो विशेषता लिखिए।
उत्तर: प्रतिभाशाली बालकों की विशेषता निम्न हैं -
- प्रतिभाशाली बच्चों की बौद्धिक क्षमता उच्च होती है।
- प्रतिभाशाली बच्चें की शैक्षणिक योग्यता, नेतृत्व क्षमता सृजनात्मक चिंतन सामान्य बालकों से अच्छी होती है।
प्रश्न 21. मनोविज्ञानशाला कब और कहाँ स्थापित है?
उत्तर: मनोविज्ञानशाला उत्तर प्रदेश राज्य के प्रयागराज जिले (इलाहाबाद) में जुलाई 1947 में किया गया।
प्रश्न 22. श्रवण विकलांगता के प्रकार बताइये।
उत्तर: श्रवण विकलांगता के प्रकार- श्रवण विकलांगता मुख्य रूप से पाँच प्रकार की होती है।
- चालकीय श्रवण दोष
- संवेदनिक श्रवण दोष
- मिश्रित श्रवण दोष
- मध्यकर्ण श्रवण दोष
- प्रकार्यात्मक श्रवण दोष
प्रश्न 23. निर्देशन क्या है?
उत्तर: निर्देशन की सहायता से ही व्यक्ति/बालक अपनी योग्यता योग्यताओं और क्षमताओं कौशलों के बारे में ज्ञान प्राप्त करता है। और अपने में निहित क्षमताओं का उचित प्रयोग करके अपने कार्य क्षेत्र में सफलता प्राप्त करता है।
स्किनर के अनुसार "निर्देशन युवक को सहायता देने की वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा वह स्वयं के साथ, दूसरों के साथ और परिस्थितियों के साथ समायोजन करना सीखता है।"
प्रश्न 24. टेलर फ्रेम का उपयोग किस तरह के बालकों हेतु किया जाता है?
उत्तर: टेलर फ्रेम का उपयोग दृष्टि बाधितों के बालकों के लिए किया जाता है। टेलर फ्रेम एक एल्युमीनियम फ्रेम और प्रतिरूप के साथ धातु की कील या प्रकारों का समूह होता है।
प्रश्न 25. हकलाने के दो कारण बताइये।
उत्तर: बच्चों के हकलाने के दो मुख्य कारण हो सकते हैं -
- कभी-कभी बच्चा टेंशन डॉट की वजह से हलाता है। वह अपनी बात को स्पष्ट रूप से नहीं रख पाता है।
- वाक यंत्र दोष
प्रश्न 26. समावेशी शिक्षा की दो विशेषताएँ बताइये।
उत्तर: समावेशी रिक्षा की विशेषताएँ निम्न हैं -
- समावेशी शिक्षा अधिगम के ही नहीं, विशिष्ट अधिगम के लिए आयाम खोलती है।
- समावेशीकरण शिक्षकों की सोच व व्यवहार को नई दिशाएँ व आकार प्रदान करता है।
- समावेशी शिक्षा एक सतही प्रक्रिया नहीं है। बल्कि मनुष्यों के विकास के लिए मनुष्यों के द्वारा किए गए कुण्ठामुक्त प्रयास है।
प्रश्न 27. श्रवण विकृति से क्या समझते हैं?
उत्तर: ऐसे बालक जिनकी ध्वनियों की सुनने की क्षमता नष्ट/विकृति हो जाती है तथा ध्वनियों को सुनने और समझने में परेशानी/समस्या उत्पन्न होती है उसे हम श्रवण बाधित बालक कहते हैं। इस विकृति को श्रवण विकृति कहते हैं। यह विकृति पूर्ण या आंशिक दोनों तरह से हो सकता है।
प्रश्न 28. निर्देशन के दो प्रमुख उद्देश्य लिखिए।
उत्तर: निर्देशन के दो उद्देश्य निम्न है -
- बालक की क्षमताओं, योग्यताओं, और रूचियों का विकास करना।
- हर बालक में एक विशेष योग्यता होती है और बालक की उस योग्तानुसार उपर्युक्त अवसर उपलब्ध कराना।
प्रश्न 29. वाक् दोष के प्रकार बताइये।
उत्तर: वाक् दोष के निम्न प्रकार होते हैं -
- प्रक्रियात्मक उच्चारण दोष
- हकलाना
- आवाज की समस्या का दोष
- अंगीय वाणी के दोष
- कम सुनने वाले बालकों के साथ वाणी का समस्या
- देर से बोलने का विकास
प्रश्न 30. बुद्धि लब्धि का सूत्र लिखिए।
उत्तर: बुद्धि लब्धि = (मानसिक आयु / वास्तविक आयु) * 100
लघु उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 31. लेखन अयोग्यता से आप क्या समझते हैं?
उत्तर: लेखन अयोग्यता- बालकों में जो लेखन संबंधी अयोग्यता देखने को मिलती है, वह अनेक रूपों में होती है। जैसे अक्षरों की बनावट शब्दों के बीच उचित दूरी का अभाव, शब्द के ऊपर रेखा का न होना इत्यादि।
प्रो० एस० के दुबे "लेखन अयोग्यता का आशय उस अमानकीय लेखन की व्यवस्था से है जो अक्षरों के अनुचित बनावट, अनुचित शब्द दूरी एवं शिरोरेखा के अभाव को प्रदर्शित करता है तथा सुलेख की श्रेणी में नहीं आता है।"
लेखन अयोग्यता को दूर करने के लिए शिक्षक का यह प्रथम कर्तव्य है कि वह कक्षा में लेखन योग्यता से संबंधित बालकों की पहचान करें और उनका मूल्यांकन करें तथा सामान अयोग्यता वाले बालकों की श्रेणी विभाजित करके उनके सुधार हेतु प्रयास करें।
प्रश्न 32. मन्द बुद्धि बालकों का अर्थ एवं परिभाषा बताइए।
उत्तर: मन्द बुद्धि बालक वे बालक होते हैं। जिनकी मानसिक सक्रियता सामान्य बालकों से कम होती है या मानसिक दृष्टि से पिछड़े बालकों को मंद बुद्धि बालक कहा जाता है। ये बालक बौद्धिक दृष्टि से प्रतिभाशाली बालकों से ठीक विपरीत होते हैं। मंद बुद्धि बालक से तात्पर्य उन बालकों से है जिनका बौद्धिक स्तर सामान्य बालकों से कम होता है।
या मानसिक मन्दित से तात्पर्य उस असामान्य साधारण बौद्धिक कार्यक्षमता से है जो व्यक्ति की विकारात्मक अवस्थाओं में प्रकट होती है तथा उसके अनुकूलित व्यवहार में कमी संबंधित होती है।
परिभाषाएँ:
- क्रो एवं क्रो के शब्दों में - "जिन बालकों की बुद्धि लब्धि 70 से कम होती है उन्हें मानसिक मन्दित बालक कहते हैं।"
- पोलक एवं पोलक के अनुसार - "मन्द बुद्धि बालकों को हम क्षीण बुद्धि वाले बालकों की श्रेणी में हम नहीं रख सकते जिनके लिए कुछ भी नहीं किया जा सकता है। अपितु ये व्यवहार एवं व्यक्तित्व में काफी हद तक सामान्य बालकों के जैसे ही होते हैं।"
प्रश्न 33. जड़, मूढ़ को परिभाषित कीजिए और यह सामान्य से किस प्रकार भिन्न है?
उत्तर: जड़, मूढ़ बालक - मन्द बुद्धि बालक मूढ़ होता है। इसलिए उसमें सोचने समझने और विचार करने की शक्ति कम होती है।
क्रो एवं क्रो के अनुसार : "जिन बालकों की बुद्धि लब्धि 70 से कम होती है, उनको मन्द-बुद्धि बालक कहते हैं।"
पोलक व पोलक : "मूढ़ बुद्धि बालक को अब क्षीण-बुद्धि बालकों के समूह में नहीं रजा जाता है, जिनके लिए कुछ भी नहीं किया जा सकता है, अब हम यह स्वीकार करते है। कि उनके व्यक्तित्व के उतने ही विभिन्न पहलू होते हैं। जितने सामान्य बालकों के व्यक्तित्व के होते हैं।"
सामान्य से भिन्नता: प्रत्येक कक्षा के छात्रों को एक वर्ष में शिक्षा का एक निश्चित कार्यक्रम पूरा करना पड़ता है जो छात्र उसे पूरा कर लेते हैं, उनको सामान्य छात्र कहा जाता है जो छात्र उसे पूरा नहीं कर पाते हैं। उनको मूढ़ बुद्धि छात्र की संज्ञा दी जाती है। विद्यालयों में यह धारणा बहुत लम्बे समय से चली आ रही है और अब भी है।
प्रश्न 34. परामर्श से आप क्या समझते हैं ? परिभाषित कीजिए।
उत्तर: परामर्श - परामर्श अंग्रेजी शब्द "Counselling" लैटिन शब्द Counsilium से लिया. गया है जिसका अर्थ है सलाह लेना या परामर्श लेना यह एक व्यक्गित संचार है, जिसमें भावनाएँ, विचार एवं दृष्टिकोण प्रकट होते हैं।
विभिन्न विद्धानों ने परामर्श की विभिन्न परिभाषाएँ दिये जो निम्न है -
- जोन्स के अनुसार :- "परामर्श परामर्शदाता और परामर्शदाता के बीच एक अन्तः क्रिया प्रक्रिया है जिसमें परमार्श लेने वाला सहायता चाहता है, और परामर्शदाता ऐसी सहायता प्रदान करने के लिए शिक्षित और प्रशिक्षित होता है।"
- रूथ स्ट्रांग के अनुसार - "परामर्श प्रक्रिया समस्या को समाधान करने का सम्मिलित प्रयास है।"
- गार्डन हैमिल्टन के अनुसार - "परामर्श तर्क वितर्क के द्वारा एक व्यक्ति की क्षमताओं और इच्छाओं को तर्कसंगत बनाने में सहायता करता है। परामर्श का मुख्य उद्देश्य सामाजिक संस्थानों और सामाजिक अनुकूलन के लिए सचेत अहं को प्रोत्साहित करना है।"
प्रश्न 35. विशिष्ट बालकों की पहचान करने में बुद्धि परीक्षणों का विशेष उपयोग है ? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: प्रत्येक विद्यालय में शिक्षा प्राप्त करने के लिए कुछ सामान्य बालक प्रवेश करते हैं तो कुछ ऐसे बालक प्रवेश लेते हैं। जिनमें विशेष प्रकार की शारीरिक एवं मानसिक विषमताएँ पाई जाती है। इनमें से कुछ बालक प्रतिभाशाली तो कुछ मंद बुद्धि तो कुछ पिछड़े होते हैं और कुछ तो शारीरिक दोष वाले भी होते हैं इनको विशिष्ट बालक की संज्ञा दी जाती है अर्थात् इनकों हम विशिष्ट बालक कहते हैं।
विशिष्ट बालक से तात्पर्य ऐसे बालकों से हैं जो शारीरिक, मानसिक, सामाजिक, संवेगात्मक गुणों में सामान्य बालकों से भिन्नता रखते हैं। बुद्धि परीक्षणों द्वारा बालकों के मानसिक विशिष्टता का पता लगाया जाता है ।
मानसिक रूप से विशिष्ट बालक- मानसिक रूप से असामान्य बालक वे है जो सामान्य बौद्धिक तथा मानसिक कार्यों से पर्याप्त मात्रा में दूर रहते हैं।
प्रतिभा सम्पन्न बालक - प्रतिभाशाली बालक के होते हैं जो सबसे सभी बातों में श्रेष्ठ होते हैं इनकी बुद्धि लब्धि (130) से अधिक होती है।
सृजनात्मक बालक - सृजनशील बालक ऐसा बालक होता है जो अनुपयोगी वस्तुओं का उपयोग करते हुए उपयोगी वस्तु का निर्माण करता है।
मानसिक मंद बालक - मंद बुद्धि बालक वे होते हैं जिनके मस्तिष्क व बुद्धि इतने कम विकसित होते हैं कि उनमें मानसिक क्षमताएँ कम विकसित हो पाती है।
प्रश्न 36. बुद्धि परीक्षण कितने प्रकार का होता हे? लिखिए।
उत्तर: बुद्धि परीक्षण के प्रकार- बुद्धि परीक्षण के प्रकार को निम्न चार्ट के द्वारा समझया जा सकता है।
बुद्धि परीक्षण मुख्य रूप से दो भागों में विभाजित होता है: व्यक्तिगत बुद्धि परीक्षण और सामूहिक बुद्धि परीक्षण। इनके उप-प्रकार शाब्दिक और अशाब्दिक होते हैं।
व्यक्तिगत बुद्धि परीक्षण- व्यक्तिगत परीक्षण वयस्कों एवं बच्चों दोनों पर प्रयुक्त किए जा सकते हैं। व्यक्तिगत बुद्धि परीक्षण केवल एक व्यक्ति पर ही प्रयोग किया जा सकता है। समय अधिक लगता है। व्यक्तिगत बुद्धि परीक्षण के लिए सुशिक्षित योग्य एवं कुशल मनोवैज्ञानिकों की आवश्यकता होती है। व्यक्तिगत बुद्धि परीक्षण कम वस्तुनिष्ठ होते है। अर्थात् निश्चित उत्तर नहीं होता है।
सामूहिक बुद्धि परीक्षण- सामूहिक बुद्धि परीक्षण केवल वयस्कों के लिए ही प्रयुक्त किया जा सकता है। यह व्यक्ति एवं समूह दोनों पर प्रयुक्त किया जा सकता है। सामूहिक बुद्धि परीक्षण में समय कम लगता है। सामूहिक बुद्धि परीक्षण में कम प्रशिक्षित, कम योग्य एवं कम कुशल व्यक्तियों की आवश्यकता होती है। यह परीक्षण वस्तुनिष्ठ होता है अर्थात् निश्चित उत्तर होता है।
शाब्दिक बुद्धि परीक्षण - इसमें भाषा या शब्दों का प्रयोग किया जाता है। यह केवल शिक्षित व्यक्तियों पर ही प्रयोग किया जा सकता है। यह बड़े बालकों के लिए उपयोगी है, मंद बुद्धि बालकों के लिए उपयोगी नही है। इस परीक्षण में पुस्तकीय ज्ञान पर प्रभाव रहता है।
अशाब्दिक बुद्धि परीक्षण - अशाब्दिक बुद्धि परीक्षण में शब्दों का प्रयोग नहीं किया जाता है बल्कि प्रतीक, चित्र, मूर्त, पदार्थों आदि का प्रयोग किया जाता है। यह परीक्षण शिक्षित/अशिक्षित दोनों पर प्रयोग किया जा सकता है यह छोटे बालकों के लिए उपयोगी है सभी प्रकार के बालकों के लिए उपयोगी है।
प्रश्न 37. अपराधी बालकों के उपचार की विधियाँ कौन-कौन हैं? प्रकाश डालिये।
उत्तर: अपराधी बालों के उपचार की विधियाँ-
- मनोचिकित्सा - यह मनोवैज्ञानिक माध्यमों से संवेगात्मक और व्यक्तित्व समस्याओं का निदान करता है, यह पिछले जीवन में कुछ महत्वपूर्ण लोगों के बारे में भावनाओं की धारणाओं को बदलकर बाल अपराधी का इलाज करता है। जब प्रारम्भिक अवस्था में माता पिता के साथ बच्चे के संबंध अच्छे नहीं होते हैं, तो उसका भावनात्मक विकास अवरूद्ध हो जाता है।
- यथार्थ चिकित्सा - यथार्थ चिकित्सा इस विचार पर आधारित है कि जो लोग अपनी बुनियादी जरूरतों को पूरा करने में असमर्थ हैं, वे गैर-जिम्मेदाराना व्यवहार करते हैं।
- व्यवहार चिकित्सा - इसमें नवीन शिक्षण प्रक्रियाओं के विकास द्वारा बाल अपराधी के सीखे हुए व्यवहार में सुधार किया जाता है। इनाम या सजा से व्यवहार बदल जाता है।
- क्रिया चिकित्सा - कई बच्चों में समूह स्थितियाँ में मौखिक रूप से प्रभावी ढंग से संवाद करने की क्षमता नहीं होती है। क्रिया चिकित्सा पद्धति में बच्चों को खुले वातावरण में कुछ काम करने के लिए कहा जाता है।
- परिवेश चिकित्सा - यह एक ऐसा वातावारण बनाता है जो सुविधाजनक सार्थक परिवर्तन और संतोषजनक समायोजन प्रदान करता है।
अपराधी बालकों के उपचार की कुछ अन्य विधियाँ:
- मनो विश्लेषण विधियाँ
- स्वप्न विश्लेषण विधि
- वैज्ञानिक विधि
- प्रवीक्षण विधि (probation method)
- सुधार स्कूल
- किशोर न्यायालय
- किशोर बन्द्र गृह
प्रश्न 38. भारतीय पुनर्वास परिषद् के कार्य बताइये।
उत्तर: भारतीय पुनर्वास परिषद के निम्नलिखित कार्य है -
- भारत में पुनर्वास व्यवसायिकों को विश्वविद्यालयों आदि के द्वारा प्रदान की जा रही योग्यताओं, आदि को मान्यता प्रदान करना।
- परीक्षाओं के समय निरीक्षण करना।
- अध्ययन के लिए पाठ्यक्रमों तथा परीक्षाओं से सम्बन्धित सूचनाएँ प्रदान करना।
- मान्यता रद्द करना।
- शिक्षा के लिए न्यूनतम् मानकों को तय करना।
- अस्थायी रूप से रजिस्टर से नाम हटाना।
- नियमों के उलंघन पर नजर रखना।
- नियमों के निर्माण का अधिकार।
- प्रशिक्षण के न्यूनतम् मानकों का निर्धारण करना।
- RCI एक सरकारी शाखा है जो दिव्यांग/असमर्थ व्यक्तियों के लिए काम करती है। स्कूल/विश्वविद्यालयों/दिव्यांग विद्यालयों या विश्वविद्यालयों के पाठ्यक्रम तैयार करती है जिससे विशिष्ट क्षमता वाले बालकों को अच्छी निगरानी कर प्रशिक्षण प्रदान किया जा सके।
प्रश्न 39. शारीरिक अक्षमता या विकलांगता को परिभाषित कीजिए।
उत्तर: शारीरिक अक्षमता या विकलांगता- विकलांगता से तात्पर्य है किसी व्यक्ति या बालक के स्थायी शारीरिक दोष से युक्त जिसके कारण बालक सामान्य बालकों की सामान्य प्रक्रिया में भाग लेने से वंचित हो जाता है अर्थात् किसी भी कार्य को करने के लिए शारीरिक या मानसिक रूप से उच्च क्षमताओं और योग्यताओं की आवश्यकता होती है। यदि कोई बालक या व्यक्ति शारीरिक या मानसिक रूप से किसी काम को नहीं कर सकता है तो उसे विकलांगता कहते हैं।
विद्वानों के अनुसार परिभाषाएँ:
- सैमुअल एवं किर्क के अनुसार - "वह बालक जो सामान्य बालकों से शारीरिक बौद्धिक सामाजिक व संवेगात्मक विशेषताओं से भिन्न होते हैं और गुणों को अधिकतम सीमा तक विकसित करने की विशेष कक्षा का प्रबन्ध करना पड़ता है।"
- जे.टी.टण्ड के अनुसार - "वे बालक जो शारीरिक संवेगात्मक या सामाजिक विशेषताओं में सामान्य बालकों से इतने पृथक है कि उनकी क्षमताओं के अधिकतम विकास के लिए विशिष्ट शिक्षा सेवाओं की आवश्यकता होती है।"
प्रश्न 40. परामर्श के प्रकार लिखिए।
उत्तर: परामर्श के प्रकार- परामर्श के मुख्य प्रकार निम्नलिखित हैं:
- नैदानिक परामर्श
- मनोवैज्ञानिक परामर्श
- मनोचिकित्सकीय परामर्श
- छात्र परामर्श
- नियोजन परामर्श
- वैवाहिक परामर्श
- व्यावसायिक एवं जीविका परामर्श
- अनिदेशात्मक परामर्श
- निर्देशात्मक परामर्श
- समन्वित परामर्श