वस्तुनिष्ठ प्रश्न
प्रश्न 1. सामान्य बच्चे होते हैं -
(a) 70 से कम IQ वाले
(b) 70 से 80 IQ वाले
(c) 90 से 110 IQ वाले
(d) 110 से ऊपर IQ वाले
उत्तर: (c) 90 से 110 बुद्धिलब्धि (IQ) वाले बच्चे सामान्य या औसत होता है।
प्रश्न 2. किसने विशिष्ट आवश्यकता वाले बच्चों को दुर्लभ गुणों वाला बच्चा बताया है ?
(a) हेविट ने
(b) हीवर्ड ने
(c) क्रो एण्ड क्रो ने
(d) क्रिक ने
उत्तर: (a) हेविट ने विशिष्ट आवश्यकता वाले बच्चों को दुर्लभ गुणों वाला बच्चा बताया गया हैं।
प्रश्न 3. आंशिक शारीरिक रूप से अक्षम बच्चों को विभाजित किया जा सकता है -
(a) दो वर्गों में
(b) चार वर्गों में
(c) तीन वर्गों में
(d) पाँच वर्गों में
उत्तर: (b) आंशिक शारीरिक रूप से अक्षम बच्चों को चार वर्गों में विभाजित किया गया है।
प्रश्न 4. आंशिक दृष्टिबाधित वाले बच्चे पढ़ सकते हैं -
(a) उत्तल लेंस की सहायता से
(b) अवतल लेंस की सहायता से
(c) समतल लेंस की सहायता से
(d) किसी प्रकार के लेंस की आवश्यकता नहीं पड़ती
उत्तर: (d) आंशिक दृष्टिबाधित वाले बच्चे पढ़ सकते है तो इन्हें किसी प्राकर के लेंस की आवश्कता नहीं पड़ती है।
प्रश्न 5. श्रवण दोष से ग्रसित बच्चों में दोष हो सकता है -
(a) कान के बाहर
(b) कान के अन्दर
(c) कान के मध्य
(d) उपर्युक्त तीनों
उत्तर: (b) श्रवण दोष से ग्रसित बच्चों में कान के अन्दर दोष हो सकता है। कान के बाहर तथा कान के मध्य में भी हो सकता है।
प्रश्न 6. पूर्ण अथवा गहन श्रवण-बाधित बच्चों का सुनने का डेसीबल स्तर होता है -
(a) 35 से 51 DB तक
(b) 55 से 69 DB तक
(c) 70 से 89 DB तक
(d) 90 से 100 DB तक
उत्तर: (c) पूर्ण अथवा गहन श्रवण-बाधित बच्चों का सुनने का 70 से 89 डेसीबल (DB) तक होता है।
प्रश्न 7. निम्नलिखित में कौन अस्थिबाधित बच्चों की विशेषता नहीं है ?
(a) हकलाना
(b) मेरुदण्ड का वक्र होना
(c) विकृत नितम्ब
(d) पाँव फिरा
उत्तर: (a) हकलाना अस्थिबाधित बच्चों की विशेषता नहीं है।
प्रश्न 8. प्रतिभाशाली बच्चों की बुद्धिलब्धि होती है -
(a) 70 या इससे कम
(b) 100 या इससे कम
(c) 140 या इससे अधिक
(d) 120 या इससे कम
उत्तर: (c) प्रतिभाशाली बच्चों की बुद्धिलब्धि - 140 या इससे अधिक होती है। क्योंकि इस प्रकार के बच्चें सामान्य से अधिक बुद्धिमान व रचनात्मक होते है।
प्रश्न 9. निर्देशन नवयुवकों को अपने से दूसरों से और परिस्थितियों से सामंजस्य करना सीखने के लिए सहायता देने की प्रक्रिया है। यह कथन है -
(a) जोन्स का
(b) शिक्षा आयोग (1964-66) का
(c) रायवर्न का
(d) स्किनर का
उत्तर: (d) स्किनर का कथन है कि "निर्देशन नवयुवकों को अपने से दूसरों से और परिस्थियों से समंजस्य करना सीखने के लिए सहायता देने की प्रक्रिया है।"
प्रश्न 10. परामर्श का अभिप्राय है, दो व्यक्तियों का सम्पर्क जिसमें एक व्यक्ति को किसी प्रकार की सहायता दी जाती है। यह कथन है -
(a) मायर्स का
(b) कार्ल रोजर्स का
(c) रॉबिन्सन का
(d) बेबस्टर का
उत्तर: (a) मायर्स का कथन "परामर्श का अभिप्राय है दो व्यक्तियों का सम्पर्क जिसमें एक व्यक्ति को किसी प्रकार की सहायता दी जाती है।"
प्रश्न 11. परामर्श में व्यक्ति को समस्या समाधान हेतु सहायता दी जाती है -
(a) गीतों के माध्यम से
(b) चित्रों के माध्यम से
(c) वार्तालाप के माध्यम से
(d) कहानी के माध्यम से
उत्तर: (c) परामर्श में व्यक्ति को समस्या समाधान हेतु वार्तालाप के माध्यम से सहायता दी जाती है।
प्रश्न 12. परामर्श एवं निर्देशन देने वाली संस्था मनोविज्ञान शाला, उत्तर प्रदेश में स्थित है -
(a) लखनऊ में
(b) बरेली में
(c) वाराणसी में
(d) इलाहाबाद में
उत्तर: (d) परामर्श एवं निर्देशन देने वाली संस्था मनोविज्ञान शाला उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद (प्रयागराज) में स्थित है।
प्रश्न 13. परामर्श से सम्बन्धित जिले की विशेषज्ञ समिति का नेतृत्व करता है -
(a) जिले का मुख्य चिकित्साधिकारी
(b) जिला मजिस्ट्रेट
(c) जिलाधिकारी
(d) जिला विद्यालय निरीक्षक
उत्तर: (a) परामर्श से समबन्धित जिले की विशेषज्ञ समिति का नेतृत्व जिले का मुख्य चिकित्साधिकारी करता है।
प्रश्न 14. विद्यालय में दास-अवरोध की समस्या को रोकने में प्रमुख रूप से सहायक है -
(a) शिक्षक
(b) अभिभावक
(c) निर्देशन
(d) निर्देशन एवं परामर्श
उत्तर: (d) निर्देशन एवं परामर्श विद्यालय में दास-अवरोध की समस्या को रोकन में प्रमुख रूप से सहायक है-
प्रश्न 15. निर्देशन एवं परामर्श द्वारा बताया जा सकता है -
(a) क्या करने योग्य है
(b) क्या न करने योग्य है
(c) क्या करने योग्य, क्या न करने योग्य है
(d) उपरोक्त में से कोई नहीं
उत्तर: (c) क्या करने योग्य है, क्या न करने योग्य है- यह निर्देशन एवं परामर्श द्वारा बताया जा सकता है।
अतिलघु उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 16. शिक्षक-प्रशिक्षुओं को प्रशिक्षण अवधि में समावेशी शिक्षा पर आधारित प्रशिक्षण के दो उद्देश्य लिखिए।
उत्तर: शिक्षक-प्रशिक्षुओं को प्रशिक्षण अवधि में समावेशी शिक्षा पर आधारित प्रशिक्षण के दो उद्देश्य निम्नलिखित हैं-
(1) शिक्षक-प्रशिक्षु समावेशी शिक्षा से प्रशिक्षण के दौरान छात्रों के सीखने के अनुभव अधिकार को पहचानता है। फिर विविधता का सम्मान करता है
(2) शिक्षक प्रशिक्षु अक्षम बालकों की बाधाओं को दूर करता और सीखने की आवश्यकताओं और प्राथमिकताओं पर विचार करता है।
प्रश्न 17. समावेशी शिक्षा के अन्तर्गत किस प्रकार के बच्चे आते हैं?
उत्तर: समावेशी शिक्षा में सामान्य बालक के साथ-साथ शारीरिक रूप से बाधित जैसे शारीरिक अक्षमता मानसिक अयोग्यता बौद्धिक भिन्नता वाले बच्चे आते हैं।
प्रश्न 18. सामान्य बच्चों में कौन-कौन सी मानसिक भिन्नताएँ होती हैं?
उत्तर: सामान्य बुद्धिलब्धि के बच्चों में सीखने की गति धीमी होती है। इसमें सृजनात्मक क्षमता कम होती हे या निम्न होती है। ध्यान केन्द्रित करने की क्षमता कम होती है।
प्रश्न 19. सामान्य बच्चे की दो विशेषताएँ बताइए।
उत्तर: सामान्य बच्चे की दो विशेषताएँ निम्न है।-
1. सामान्य बुद्धि लब्धि के बच्चें शारीरिक एवं मानसिक रूप से पूर्ण होते है।
2. सामान्य बुद्धिलब्धि के बालको की सीखने का स्तर सामान्य होता है। ऐसे बालक मन्द बुद्धि बालक से ऊपर तथा प्रतिभाशाली बालक के बीच के होते है।
प्रश्न 20. पिछड़े बच्चों से आपका क्या अभिप्राय है ?
उत्तर: पिछड़े बालक-
वह बालक जो मानसिक शक्ति बुद्धि या शैक्षिक उपलब्धि में अपनी उम्र के सामान्य बालको से पीछे रह जाता है। उसे पिछड़े या पिछड़ा बालक कहते है।
प्रश्न 21. बच्चे की वास्तविक आयु की गणना से सम्बन्धित सूत्र लिखिए।
उत्तर:
वास्तविक आयु = (मानसिक आयु / बुद्धि लब्धि) * 100
प्रश्न 22. आंशिक रूप से शारीरिक अक्षम बच्चों के सभी प्रकार लिखिए।
उत्तर: आंशिक रूप से शारीरिक अक्षम बच्चों के प्रकार निम्न है-
(i) दृष्टि बाधित बालक
(ii) वाक् बाधित बालक
(iii) श्रवण बाधित बालक
(iv) अस्थि बाधित बालक
प्रश्न 23. मध्यम रूप से दृष्टिबाधित व्यक्ति के नेत्रों के देखने की क्षमता कितनी होती है?
उत्तर: मध्यम रूप से दृष्टिबाधित व्यक्ति के नेत्रों के देखने की क्षमता 20/70-20/200 होती है।
प्रश्न 24. वाक्दोष का अर्थ स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: वाक् दोष वह दोष है जिसमें बालक अपने मन के भावों या विचारों को किसी व्यक्ति के सामने स्पष्ट रूप से नहीं रख पाता है।
प्रश्न 25. अस्थिबाधित बच्चों की पहचान से सम्बन्धित लक्षण लिखिए।
उत्तर: अस्थि बाधित बच्चों/बालकों की पहचान से सम्बन्धित लक्षण निम्न है-
(i) वैसाखियों की सहायता से चलना
(ii) शारीरिक अंगो की गतिविधि में नियंत्रण का अभाव
(iii) मेरूरज्जू का वक्र होना
(iv) पाँव फिरा होना
प्रश्न 26. असुविधा सम्पन्न समूह के अन्तर्गत किस समूह के बच्चे आते हैं?
उत्तर: असुविधा सम्पन्न समूह के अन्तर्गत गरीब, अनाथ, श्रमिक इत्यादि के बच्चे आते हैं जो सुविधाओं से वंचित होते हैं।
प्रश्न 27. निर्देशन एवं परामर्श किन दृष्टिकोणों से आवश्यक है?
उत्तर: निर्देशन एवं परामर्श निम्न दृष्टिकोणों से आवश्यक है-
(i) निर्देशन एवं परामर्श की सहायता से एक अच्छे नागरिक का निर्माण किया जा सकता है।
(ii) निर्देशन एवं परामर्श की सहायता से बालकों में निर्णय लेने की क्षमता विकसित होती है।
(iii) बालकों के भविष्य में मार्ग प्रसस्त करने में आवश्यक है।
प्रश्न 28. परामर्श के क्या उद्देश्य है?
उत्तर: परामर्श के उद्देश्य निम्न हैं -
1. व्यक्ति या बालक की शैक्षिक, व्यवसायिक, व्यक्तिक समस्याओं को समझाने में सहायता देना
2. बालक को अपनी समस्याओं के स्वंय समाधान की योजनाएँ बनाने में सहायता देना
प्रश्न 29. डी. जी. पी. का पूरा नाम लिखते हुए इसका आशय स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: डी. जी. पी. का पूरा नाम डिजिटल गाइडेन्स साइक्लोजी इसका आशय बालको को डिजिटल के माध्यम परामर्श एवं निर्देशन करना है।
प्रश्न 30. पर्यवेक्षण क्यों आवश्यक है? स्पष्ट कीजिये।
उत्तर: अध्यापकों की कार्यकुशलता और विद्यालय की गतिविधियों का मूल्यांकन करने तथा वांछित कार्य एवं परिणाम की प्राप्ति के लिए पर्यवेक्षण आवश्यक है।
लघु उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 31. विशिष्ट आवश्यकता वाले बच्चों की पहचान कैसे करेंगे ? विस्तार से समझाइये ।
उत्तर: विशिष्ट आवश्यकता वाले बच्चे प्रत्येक विद्यालय में जहाँ सामान्य बालक होते है, वहाँ बहुत से विद्यार्थी ऐसे भी होते हैं जो किसी न किसी रूप में अन्य विद्यार्थियों से विशिष्ट होते हैं। यह विशिष्टता शारीरिक अथवा मानसिक किसी भी प्रकार की हो सकती है। प्रायः देखा जाता है कि विशिष्ट बालक अपनी आयु के सामान्य बालकों से कुछ अपनी खास विशेषताओं या खास कमियों के कारण या तो अधिक प्रतिभाशाली होते हैं या मंदबुद्धि वाले।
क्रों एण्ड क्रो के अनुसार- "विशिष्ट शब्द ऐसे गुण के लिए प्रयुक्त किया जाता है। जिससे वह विशिष्ट व्यक्ति सामान्य व्यक्ति से भिन्न होता है।"
विशिष्ट बालको की पहचान-
शारीरिक दृष्टि से विशिष्ट बालक
(a) दृष्टि दोष
(b) वाणी दोष
(c) श्रवण बाधित
बौद्धिक दृष्टि से विशिष्ट बालक
(a) प्रतिभाशाली
(b) सृजनशील
(c) अधिगम असमर्थ
(d) मन्द बुद्धि
(i) जड़ बुद्धि (25 से कम IQ)
(ii) मूढ़ बुद्धि (26-50)
(iii) मूर्ख बुद्धि (51-75)
शारीरिक दृष्टि से विशिष्ट बालक के लक्षणः -
(a) शरीर के अंगों में असंतुलन
(b) जोड़ों में दर्द
(c) कृत्रिम अंगों का प्रयोग
बौद्धिक दृष्टि से विशिष्ट बालक-
बौद्धिक दृष्टि से विशिष्ट बालकों की पहचान परीक्षणों के द्वारा की जाते है 90 से 110 तक बुद्धिलब्धि (IQ) वाले बालकों को सामान्य मानकर अन्य बालकों को विशिष्ट बालकों की श्रेणी में रखा जाता है। जैसे- प्रतिभाशाली बालक, सृजनशील बालक
प्रश्न 32. धीमी गति से सीखने वाले बच्चों की विशेषताएँ बताइए।
उत्तर: धीमी गति से सीखने वाले बच्चों की विशेषताएँ -
धीमी गति से सीखने वाले बच्चों की विशेषताएँ निम्नलिखित है।
(ⅰ) सम्प्रेषण क्षमता का अभाव - धीमी गति से सीखने वाले बालको/बच्चों में दूरदर्शिता का अभाव होता है। इनमें भविष्य बोध का गुण भी नहीं होता है। इस प्रकार के बच्चों की कल्पना शक्ति कम होती है। ये अपने विचारों की अभिव्यक्ति नही कर पाते है।
(ii) स्मरण शक्ति की कमी - धीमी गति से सीखने वाले बच्चों में स्मरण शक्ति की कमी के कारण धारणा शक्ति का अभाव रहता है। इस प्रकार के बच्चें शब्दों को ध्यानपूर्वक पढ़ते है। परन्तु उनमें सम्बन्ध स्थापित नहीं कर पाते हैं। इस प्रकार से सीखने वाले बच्चे पढ़ाई-लिखाई से दूर भागते हैं।
(iii) असुरक्षा का भाव होना- धीमी गति से सीखने वाले बालकों की मानसिक शारीरिक कमजोरी के कारण उनमें आत्मविश्वास की कमी रहता है। जिससे वे unsafe महसूस करते हैं।
(iv) समस्यागस्ता- धीमी गति से सीखने वाले बच्चें में सामाजिक सांस्कृतिक शैक्षिक, परेशानियाँ पाई जाती है। इनकी शैक्षिक उपलब्धि सन्तोषजनक नही होती है।
प्रश्न 33. शैक्षिक रूप से पिछड़े बच्चों की शिक्षा की व्यवस्था कैसे करेंगे? बिन्दुवार विवरण दीजिए।
उत्तर: पिछड़ा बालक वह बालक जो मानसिक शक्ति, बुद्धि या शैक्षिक उपलब्धि में अपनी उम्र के समान बालकों से पीछे रह जाता है उसे पिछड़ा बालक कहते हैं।
पिछड़े बालको की व्यवस्था निम्न प्रकार से की जा सकती है-
(i) व्यक्तिगत ध्यान देना - शैक्षिक रूप से पिछड़े बालक कक्षा में अध्यापक द्वारा दिये जाने वाले सामूहिक निर्देशन को नही समझ पाते हैं। अतः यह सामान्य बालकों से पीछे रह जाते हैं। इसलिए इनकी ओर विशेष ध्यान की आवश्यकता है।
(ii) पिछड़ेपन के कारणों का पता लगाना - शैक्षिक रूप से पिछड़े बालकों को रोकने के लिए उत्तरदायी कारणों का पता लगाना चाहिए इसके लिए बुद्धि परीक्षण उपलब्धि परीक्षण, शारीरिक, मानसिक क्षमता, बालक की पारिवारिक पृष्ठभूमि, इत्यादि का अध्ययन करके बालक अध्ययन करके बालक के लिए शिक्षा की योजना को निश्चित स्वरूप प्रदान किया जाना।
(iii) विशेष कक्षाओं की व्यवस्था- शैक्षिक रूप से पिछड़े बालकों की शिक्षा के लिए विद्यालय में विशेष कक्षाओं की व्यवस्था करनी चाहिए, क्योकि वह कक्षा में सामूहिक निर्देशन का लाभ नहीं उठा पाते हैं। अतः विशेष कक्षाओं के द्वारा उनके शैक्षिक पिछड़ेपन को दूर करने का प्रयास किया जा सकता है।
प्रश्न 34. श्रवण-बाधित बच्चों की पहचान से सम्बन्धित लक्षणों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर: श्रवण-बाधित बच्चों की पहचान से सम्बन्धित लक्षण-
ऐसा बालक जिसको सुनने में आंशिक रूप से अथवा पर्ण रूप से परेशानी का सामना करना पड़ता है तो वहाँ श्रवण बाधित बालक कहलाता है। यह श्रवण बाधिता जन्मजात हो सकता है या किसी अन्य कारणों से भी हो सकता हैं
इसके निम्न लक्षण हैं -
1. बालकों को पढ़ाई गई बातो को समझने में दिक्कत होती है।
2. श्रवण-बाधित बालक ऊँची आवाज में बोलते हैं।
3. श्रवण-बाधित बालक कक्षा में अध्यापक के द्वारा बोले गये शब्दो या ध्वनि को सुनने में परेशानी का सामना करते हैं।
4. श्रवण-बाधित बालक कक्षा में किसी बात को सुनने के लिए सर को एक तरफ झुका कर सुनने का प्रयास करते हैं।
5. श्रवण-बाधित बालक किसी बात को स्पष्ट या सही से न सुन पाने के कारण बातों को दोहरानें के लिए आग्रह करते हैं।
प्रश्न 35. वाक्दोष कितने प्रकार के हो सकते हैं व्याख्या कीजिए।
उत्तर: वाक्दोष-
ऐसे बालक जो ठीक से या स्पष्ट रूप से बोल नहीं पाते उनके द्वारा बोली गई बात श्रोता समझ नहीं पाते हैं। ऐसे बालक को वाक्दोष से ग्रसित बालक कहते हैं। इस दोष को वाक्दोष कहते हैं।
वाक्दोष निम्न प्रकार का होता है-
1. प्रक्रियात्मक उच्चारण दोष
2. हकलाना
3. आवाज की समस्या
4. अंगीय वाणी के दोषज्ञ
5. देन से बोलने का समस्या
6. कम सुनने वाले के साथ वाणी का समस्या
(1) प्रक्रियात्मक उच्चारण दोष- बालक इसमें एक अक्षर बोलता तथा दूसरा अक्षर भूल जाता है- जैसे कौआ कौआ भूल जाता गलत ध्वनि- कौआ-तौआ
(2) हकलाना-
i. एक वाणी दोष है हकलाना
ii. शब्दों को बार-बार दोहराते हैं।
iii. कभी-कभी यह बोलते-बोलते रूक जाते हैं।
iv. कभी-कभी बोलने में उलझन भी महसूस करते हैं।
v. इसमें बालक आँखे बन्द करके बोलता है। और शरीर के अंगों को हिला हिलाकर बोलता हैं।
(3) आवाज की समस्या- इसके अन्तर्गत बालक को यह समझ नहीं आता कि किस परिस्थिति में ऊँचा बोलना है तथा किस परिस्थिति में नीचा बोलना है।
(4) अंगीय बोलने के दोष - इस दोष में वायु मुँह व नाक के छेद से बिना रूकावट के आती जाती रहती है। अतः बालक नाक से बोलने लगते हैं। क, प, व, ट, ज आदि शब्दों के उच्चारण में कठिनाई आती है।
(5) मन्दित वाणी विकास- इसमें सुनने की क्षमता का विकास देरी से होता है। 100 बालकों में से 5 बालक इस प्रकार के होते हैं। अतः यह बालक मन्दित बालक कहलाते हैं।
प्रश्न 36. समस्यात्मक बच्चे कौन होते हैं? इनकी पहचान कैसे करेंगे? बिन्दुवार समझाइए।
उत्तर: समस्यात्मक बालक -
वह बालक समस्यात्मक बालक कहलाता है। जिसका व्यवहार सामान्य बालकों से भिन्न होता है। या ऐसी कोई असामान्य बात होती है जिसके कारण वह समस्या बन जाती है। जैसे- चोरी करना, झूठ बोलना, आदि।
वेलेन्टाइन के अनुसार- "समस्यात्मक बालकों शब्द का प्रयोग साधारणतः उन बालकों का वर्णन करने के लिए किया जाता है। जिनका व्यवहार या व्यक्तित्व किसी बात में गम्भीर रूप से असामान्य होता है।"
समस्यात्मक बालकों की पहचान -
1. अवलोकन या निरीक्षण विधि
(a) सहभागी निरीक्षण- बालक के साथ रहकर जानकारी प्राप्त की जा सकती है।
(b) असहभागी निरीक्षण- बालक से दूर रहकार अवलोकन करके पहचानना।
2. इतिहास विधि - इस विधि के माध्यम से समस्यात्मक बच्चों की पहचान की जाती है। इसके अन्तर्गत दो विधियाँ है -
i. एकल अध्ययन विधि इसमें एक-एक बच्चें की समस्या का समाधान किया जाता है।
ii. माता-पिता, मित्र व अध्यापकों से विचार-विमर्श के द्वारा
3. साक्षात्कार प्रविधि-
i. गहन जाँच हीन भावना
ii. अध्यापक अथवा मनोवैज्ञानिक द्वारा
4. मनोवैज्ञानिक परीक्षण- इसके अन्तर्गत निम्न विधि द्वारा बच्चों की समस्याओं की पहचान की जाती है -
i. समस्या जाँच सूची
ii. विद्यालयी विद्यार्थियों के लिए समायोजन सूची
iii. समयोजन सूची
प्रश्न 37. निर्देशन का अर्थ, उद्देश्य आवश्यकता एवं क्षेत्र की विस्तृत व्याख्या कीजिए।
उत्तर: निर्देशन का अर्थ-
निर्देशन के आधार पर व्यक्ति अपनी योग्यताओं क्षमताओं और कौशलों के बारे में ज्ञान प्राप्त करता है। और अपने में निहित क्षमताओं का उचित प्रयोग करके अपने कार्य में सफलता प्राप्त करता है। निर्देशन शब्द अंग्रेजी शब्द Guidance का हिन्दी रूपान्तरण है जिसका अर्थ होता है- निर्देश देना/पथ प्रदर्शन करना/सलाह देना।
जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में चाहे वह शैक्षिक हो या राजनैतिक, व्यवसायिक, हो या कलात्मक निर्देशन की आवश्यकता पड़ता है।
व्यक्तिगत जीवन में निर्देशन की आवश्यकता-
व्यक्तिगत जीवन में निर्देशन की आवश्यकता निम्न कारणों से पड़ती है। क्योंकि हम जानते मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है। वह समाज में रहते हुए जीवन के प्रत्येक राह पर दूसरों से सीखता है।
यह व्यक्तिगत क्षमताओं के विकास हेतु आवश्यक है।
व्यक्तिगत जीवन में निर्देशन पारिवारिक जीवन में आवश्यक है।
पारिवारिक जीवन में आवश्यक
शिक्षा के क्षेत्र में निर्देशन की आवश्यकता-
1. छात्र/व्यक्ति को उसकी अन्तर्निहित शक्तियों योग्यताओं एवं क्षमताओं से परिचित कराना
2. छात्रों में आत्म निर्देशन की क्षमता का विकास करना
3. व्यक्ति को किसी क्षेत्र में उचित चुनाव से सम्बन्धित सुझाव देना
4. छात्र को अपने वातावरण के साथ सामंजस्य स्थापित करने में सहायता करना
प्रश्न 38. परामर्श को परिभाषित करते हुए इसके उद्देश्य लिखिए।
उत्तर: परामर्श-
मायर्श के अनुसार- "दो व्यक्तियों के सम्पर्क में आने से दूसरे की समस्या हल करने के लिए दी गई मदद परामर्श कहलाता है।"
परामर्श के क्या उद्देश्य-
परामर्श के उद्देश्य निम्न है-
1. व्यक्ति या बालक की शैक्षिक, व्यवसायिक, व्यक्तिक समस्याओं को समझाने में सहायता देना
2. बालक को अपनी समस्याओं के स्वयं समाधान की योजनाएँ बनाने में सहायता देना
3. व्यक्ति को अपनी योजनाओं को पूरा करने की दिशा में सहायता प्रदान करना
4. व्यक्ति को अपनी योजनाओं में आवश्यक फेर-बदल करने में सहायता देना
5. व्यक्ति को खुद से सम्बन्धित तथ्यों की व्याख्या करने में सहायता प्रदान करना।
6. व्यक्ति को अपने समाज में उचित समझे जाने वाले ज्ञान दृष्टिकोण तथा कुशलताओं को प्राप्त करने में सहायता प्रदान करना।
7. पारिवारिक जीवन व्यवसाय, एवं नागरिकता से सम्बन्धित निर्धारित करने में सहायता करना
प्रश्न 39. परामर्श में सहयोग देने वाली संस्थाओं का उल्लेख कीजिए।
उत्तर: परामर्श में सहयोग देने वाली संस्था-
परामर्श में सहयोग देने वाली संस्थाएँ निम्नलिखित है।
मनोविज्ञान शाला (1947 इलाहाबाद)-
1. विद्यालयों में शिक्षा प्राप्त करने वाले छात्रों को शैक्षिक, व्यवसायिक तथा वैयक्तिक निर्देशन व परामर्श देना
2. शिक्षकों को मनोविज्ञान का प्रशिक्षण देकर उनकों बच्चों के मनोभावों को समझने में मदद करना।
3. शिक्षकोपयोगी मनोवैज्ञानिक प्रयोग व अनुसंधान करना।
राज्य विज्ञान संस्थान-
i. प्रारम्भिक स्तर के विज्ञान एवं गणित की पाठ्यपुस्तकों का लेखन, संसोधन व परामर्श देना।
ii. विज्ञान की प्रदर्शनी एवं मेलों का आयोजन
iii. प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक स्तर की T.L.M. का विकास
राज्यशैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (1981 लखनऊ)-
1. पाठ्यक्रम का विकास तथा पाठ्य-पुस्तकों का संसोधन करना
2. शिक्षकों की पूर्ति हेतु परामर्श देना।
राज्य तकनीकी शिक्षा संस्थान (लखनऊ)-
i. शिक्षक प्रशिक्षक संस्थानों में प्रशिक्षकों हेतु प्रशिक्षण मॉड्यूल/कार्यक्रम का निर्माण करना।
ii. शिक्षा में श्रव्य दृश्य सामाग्रियों का प्रयोग एवं प्रसार करना।
प्रश्न 40. बाल-अधिगम में निर्देशन एवं परामर्श का महत्व बताइए।
उत्तर: परामर्श/निर्देशन के महत्व को हम निम्न बिन्दुओं के माध्यम से समझ सकते हैं -
अपव्यय एवं अवरोधन- हमारे देश के शिक्षा जगत से सम्बन्धित बड़ी समस्या अपव्यय एवं अवरोधन की है जिसके कारण अनिवार्य शिक्षा का पता लगाकर निर्देशन द्वारा इस समस्या को हल किया जा सकता है
शिक्षा के रोजगार परक बनाने हेतु - वर्तमान में शिक्षा को रोजगार परक बनाने के बहुत प्रयास हो रहे है ताकि व्यक्ति शिक्षा के उपयोग से रोजगार कर सकें तथा अपना जीविकोपार्जन कर सकें ऐसे में बहुत सी समस्याएँ आती है। जिसके लिए हमें निर्देशन एवं परामर्श की आवश्यकता पड़ती है
व्यवसायों में विविधता- आज के वैज्ञानिक और औद्योगिक युग में व्यवसायों की विविधता के साथ हर कार्य में इनकी मांग में वृद्धि हो रही है। ऐसी स्थिति में व्यक्ति व्यवसाय चयन और उनमें प्रवेश के लिए आवश्यक प्रशिक्षण की समस्या का सामना करता है। ऐसी स्थिति में निर्देशन एवं परामर्श की आवश्यकता का पता चलता है