वस्तुनिष्ठ प्रश्न
प्रश्न 1. संयुक्त राष्ट्र ने निःशुल्क जन अधिकार की घोषणा कब की?
(a) 14 दिसम्बर 1974
(b) 11 दिसम्बर 1975
(c) 12 दिसम्बर 1974
(d) 9 दिसम्बर 1975
उत्तर: (d): संयुक्त राष्ट्र ने निःशुल्क जन अधिकार की घोषणा 9 दिसम्बर 1975 में की गई।
प्रश्न 2. दृष्टि बाधितों के लिये लिपि है -
(a) ब्रेल लिपि
(b) हिन्दी लिपि
(c) अंग्रेजी लिपि
(d) संस्कृति लिपि
उत्तर: (a): दृष्टि बाधितों के लिए लिपि ब्रेल लिपि है।
प्रश्न 3. विशेष आवश्यकता शिक्षा विश्व सम्मेलन सलमानकता किस वर्ष आयोजित किया गया -
(a) 1994
(b) 1993
(c) 1995
(d) 1992
उत्तर: (a): जून 1994 में 92 सरकारों के प्रतिनिधियों और 28 अंतर्राष्ट्रीय संगठनों ने मिलकर विशेष आवश्यकताओं की शिक्षा विषय पर विश्व सम्मेलन का आयोजन सालामान्का स्पेन में हुआ।
प्रश्न 4. हकलाने के कारण है -
(a) बंशानुक्रम
(b) वातावरण
(c) उक्त दोनों
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर: (c) : हकलाने के कारण वंशानुक्रम एवं वातावरण दोनों हो सकते है।
प्रश्न 5. भारत सरकार द्वारा मानसिक स्वास्थ्य अधिनियम कब लागू किया -
(a) 1986
(b) 1987
(c) 1989
(d) 1988
उत्तर: (b): भारत सरकार द्वारा मानसिक स्वास्थ्य अधिनियम 1987 में लागू हुआ। इस कानून को बनाने के लिए 31 वर्ष का समय लगा।
प्रश्न 6. टेलर-फ्रेम का उपयोग किया जाता है -
(a) दृष्टि बाधित
(b) श्रवण बाधित
(c) मानसिक मंदता
(d) बिशिष्ट अधिगम अक्षमता
उत्तर: (a): टेलर-फ्रेम का उपयोग दृष्टि बाधित बालकों के लिए किया जाता है। यह गणित अधिगम के लिए एक संपूर्ण स्पर्श समाधान प्रदान करता है।
प्रश्न 7. बालक सामाजीकरण की प्रक्रिया को सीखते है -
(a) विद्यालय से
(b) रूचियो से
(c) परिवार से
(d) तपरोक्त सभी से
उत्तर: (c): बालक सामाजीकरण की प्रक्रिया को विद्यालय, रूचियों एवं परिवार से सीखते है।
प्रश्न 8. परामर्श का मुख्य उद्देश्य है -
(a) आत्मज्ञान
(b) आत्म स्वीकृति
(c) सामाजिक सामंजस्य
(d) उपर्युक्त सभी
उत्तर: (a): परामर्श का मुख्य उद्देश्य आत्मज्ञान, आत्म स्वीकृति तथा सामाजिक सामंजस्य है।
प्रश्न 9. गैर सरकारी संगठन जो अभावग्रस्त बालकों के लिये योजना बनाते है, इन्हें कहते है -
(a) SCERT
(b) NCERT
(c) ICET
(d) NGO
उत्तर: (d) : गैर सरकारी संगठन जो अभाव ग्रस्त बालकों के लिए योजना बनाते है, इन्हें NGO कहते है।
प्रश्न 10. मण्डलीय मनोविज्ञान केन्द्र की उ.प्र. में कुल संख्या है-
(a) 10
(b) 12
(c) 14
(d) 15
उत्तर: (a): मण्डलीय मनोविज्ञान केन्द्र की उत्तर-प्रदेश में कुल संख्या 10 है। मण्डलीय मनोविज्ञान केन्द्र (लखनऊ, कानपुर, झाँसी, आगरा, मेरठ, मुरादाबाद, वाराणसी, गोरखपुर, बरेली, अयोध्या एवं) है।
प्रश्न 11. निम्न में से किसे बुद्धि परीक्षण का जनक कहा जाता है-
(a) थार्न डाइक
(b) कोहलर
(c) टिचनर
(d) बिने
उत्तर: (d): बुद्धि परीक्षण का जनक बिने को कहा जाता है। अल्फ्रेड बिनेट ने 1900 के दशक में पहला बुद्धि परीक्षण का निर्माण किया था।
प्रश्न 12. टर्मन के अनुसार सामान्य बालकों की बुद्धि लब्धि होती है -
(a) 140 से अधिक
(b) 120 से 140
(c) 110 से 120
(d) 90 से 110
उत्तर: (d): टर्मन के अनुसार सामान्य बालकों की बुद्धि लब्धि 90 से 110 होती है।
प्रश्न 13. राष्ट्रीय न्याय अधिनियम कब पारित हुआ?
(a) 1999
(b) 1988
(c) 1998
(d) 2000
उत्तर: (a): राष्ट्रीय न्याय अधिनियम 1999 में पारित हुआ।
प्रश्न 14. राष्ट्रीय दृष्टि दिव्यांगजन सशक्तिकरण संस्थान कहाँ स्थित है?
(a) देहरादून
(b) सिकन्दराबाद
(c) मुम्बई
(d) नई दिल्ली
उत्तर: (a): राष्ट्रीय दृष्टि दिव्यांगजन सशक्तिकरण संस्थान देहरादून में स्थित है।
प्रश्न 15. वाइट केन डे (White Cane Day) कब मनाया जाता है?
(a) 15 अक्टूबर
(b) 5 अक्टूबर
(c) 4 अक्टूबर
(d) 8 अक्टूबर
उत्तर: (a) : वाइट केन डे (White Cane Day) 15 अक्टूबर को मनाया जाता है।
अति लघु उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 16. श्रवण क्षीणता के प्रमुख प्रकार कौन-कौन से है?
उत्तर: श्रवण क्षीणता के प्रमुख प्रकार निम्नवत् है।
- कम श्रवण बाधित बालक
- मंद श्रवण बाधित बालक
- गंभीर रूप से श्रवण बाधित बालक
- पूर्ण रूप से श्रवण बाधित बालक
प्रश्न 17. विशिष्ट अधिगम निःशक्तता के प्रकार का नाम लिखिये?
उत्तर: विशिष्ट अधिगम निःशक्तता के प्रकार निम्न है-
- डिस्लोक्सिया (पढ़ने संबंधी विकार)
- डिस्ग्राफिया (लेखन संबंधी विकार)
- डिस्क्लेकूलिया (गणितीय कौशल संबंधी विकार)
- डिस्प्रैक्सिया (लेखन एवं चित्रांकन संबंधी विकार)
प्रश्न 18. पिछड़े बालको की एक विशेषता बताइए?
उत्तर: पिछड़े बालकों की विशेषताएँ-
- पिछड़े बालक बार-बार समझाने पर ही समझते हैं।
- पिछड़े बालक विद्यालय के पाठ्यक्रम को समय से पूर्ण नहीं कर पाते है।
- पिछड़े बालक गृह कार्य नहीं करते है।
प्रश्न 19. समस्यात्मक बालक किसे कहते है?
उत्तर: समस्यात्मक बालक ऐसे बालक जो कुछ ऐसा व्यवहार करते है, जो समस्या का कारण बन जाता है उन्हें समस्यात्मक बालक कहते है। जैसे झूठ बोलना, चोरी करना विद्यालय से भाग जाने वाले। वेलेन्टाइन शिराले के अनुसार "समस्यात्मक बालक वे होते है। जिनका व्यवहार अथवा व्यक्तित्व किसी बात में गम्भीर रूप से असाधारण होता है।" बर्ट के अनुसार- "जिनका व्यवहार गम्भीर रूप से असामान्य होता है।"
प्रश्न 20. बुद्धि लब्धि ज्ञात करने का सूत्र लिखिये?
उत्तर: बुद्धि लब्धि = (मानसिक आयु / वास्तविक आयु) * 100
प्रश्न 21. प्रतिभाशाली बालकों की पहचान किस प्रकार करते है?
उत्तर: परीक्षण प्रतिभाशाली बालकों की पहचान परीक्षण द्वारा किया जाता है। जो निम्न है-
- बुद्धि परीक्षण द्वारा
- अभिरुचि परीक्षण द्वारा
- उपलब्धि परीक्षण द्वारा
- निरीक्षण द्वारा
प्रश्न 22. बाल अपराध रोकने के दो उपाय लिखें?
उत्तर: बाल अपराध रोकने के उपाय- बाल अपराध रोकने के निम्न उपाय है।
- बालगृह- बालगृहों में उपेक्षित बच्चों को आवास, शिक्षा चरित्र-निर्माण एवं नैतिक खतरे से सुरक्षा इत्यादि की प्रमुख सुविधाएँ उपलब्ध होती है।
- विशिष्ट स्कूल- इनमें अनैतिक बालकों को सुधारने के लिए आवश्यक प्रशिक्षण दिया जाता है।
प्रश्न 23. अन्वेषण विधि की खोज किसने की है?
उत्तर: अन्वेषण विधि - अन्वेषण विधि/या खोज विधि्यूरिस्टिक विधि की निर्माण आगमन विधि के आधार पर बनाया गया इस विधि के जनक एच ई आर्मस्ट्रांग को माना जाता है। इस विधि को अनुमानी विधि भी कहा जाता है।
प्रश्न 24. कृत्रिम अंगो का निर्माण क्या कहलाता है?
उत्तर: कृत्रिम अंगों का निर्माण अंग प्रत्यारोपण कहलाता है।
प्रश्न 25. शरीर के आधे से अधिक भाग में अवरूद्ध गति अक्षमता का नाम लिखिये?
उत्तर: शरीर के आधे से अधिक भाग में अवरूद्ध गति अक्षमता को प्रमस्तिष्कीय पक्षाघात कहते है।
प्रश्न 26. समायोजन एवं परिष्करण में क्या अन्तर है?
उत्तर: समायोजन- मनुष्य अपने जीवन को समाज के परिवेश के साथ समायोजित करने का प्रयास करता है और इसके पश्चात् वह अपने व्यवहार में सामाजिक स्तर के अनुसार आंशिक अथवा पूर्ण परिवर्तन करता है। अतः जैविक व्यवहार की गतिशीलता को सामाजिक मान्यता उसकी समायोजन की घोतक होती है। परिष्करण- किसी चीज के दोष या बुराइयों को ठीक या दूर करने की क्रिया या भाव परिष्करण कहलाती है। इसमें संस्कार देना सुन्दर बनाना।
प्रश्न 27. शरीर के अंगों में असमन्वयित गति क्या कहलाती है?
उत्तर: शरीर के अंगों में असमन्वयित गति को गति विभ्रम कहते है।
प्रश्न 28. सहायक उपकरणों का निर्माण की प्रक्रिया का क्या नाम है?
उत्तर: सहायक उपकरणों के निर्माण की प्रक्रिया का कोई एक निश्चित नाम नहीं है। यह प्रक्रिया उपकरण के प्रकार, निर्माण सामाग्री और जटिलता पर निर्भर करती है। लेकिन सामान्य तौर पर सहायक उपकरणों के निर्माण में निम्नलिखित चरण शामिल है।
- प्रोटोटाइपिंग
- डिजाइन
- परीक्षण
- निर्माण
- प्रमाणीकरण
प्रश्न 29. निःशक्तता के प्रतिमान के नामों का उल्लेख कीजिए?
उत्तर: निःशक्तता के प्रतिमान के नाम निम्न है-
- श्रवण हास
- चलन क्रिया संबंधी निःशक्तता
- मानसिक मंदता
- दृष्टि बाधिता
- अस्थि बाधिता
प्रश्न 30. आप कक्षा कक्ष में श्रवण निःशक्त बच्चों की पहचान कैसे करते है?
उत्तर: कक्षा-कक्ष में श्रवण निःशक्त बच्चों की पहचान निम्न तरीके से करते है।
- श्रवण बाधित बालक कक्षा में सुनने के लिए अपने कानों को एक तरफ कर लेते है।
- श्रवण बाधित बालक सामान्य ध्वनि पर शिक्षक द्वारा प्रश्न पूछने पर कोई प्रतिक्रिया नहीं देते है।
लघु उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 31. समावेशी शिक्षा के विकास हेतु क्या कदम उठाये गए है?
उत्तर: समावेशी शिक्षा के विकास हेतु निम्न कदम उठाये गये है-
- राष्ट्रीय शिक्षा नीति 1986
- दिव्यांग जन अधिकार (PWD Act) 1995
- राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा (NCF)-2005
- निःशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा विधेयक (R.T.E Act) 2009
- नई शिक्षा नीति (NEP) – 2020
शिक्षा का समावेशीकरण यह बताता है कि विशेष शैक्षणिक आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए एक सामान्य छात्र और एक दिव्यांग छात्र को समान शिक्षा प्राप्ति के अवसर मिलने चाहिए। देश के हर नागरिक को शिक्षा हो बालक बालिका साथ मिलकर शिक्षा प्राप्त कर सकें। सामाजिक एवं आर्थिक आधार पर वंचित-समूहों, महिलाओं अनुसूचित जन जातियों और अनुसूचित जाति समुदायों आदि सभी को शैक्षिक अवसर की बराबरी हो।
भारतीय संविधान में समावेशी शिक्षा हेतु प्रावधान-
- अनुच्छेद 15- धर्म, जाति, लिंग आदि के आधार पर भेदभाव नहीं
- अनुच्छेद 45- 6 वर्ष तक आयु वाले बच्चों को प्रारम्भिक शिक्षा
- अनुच्छेद 21 क- 6-14 वर्ष तक आयु वाले बच्चों के लिए निःशुल्क व अनिवार्य शिक्षा
- आर टी ई अधि० संसोधन 2012- सभी अक्षमताओं वाले बच्चों को स्कूल में सामान्य बच्चों की तरह शिक्षा व गंभीर अक्षमताओं वाले बच्चों को घर में शिक्षा का अधिकार
समावेशी शिक्षा में प्रमुख प्रारंम्भिक कार्य-
- कोठारी आयोग (1964-1966) - सामान्य शिक्षा प्रणाली में दिव्यांग बच्चों की शिक्षा
- समेकित शिक्षा योजना 1974 - दिव्यांग बच्चों को सामान्य विद्यालय में शिक्षा के समान अवसर व भागीदारी
निःशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा विधेयक (R.T.E Act-2009)-
- 6 से 14 वर्ष तक के सभी बच्चों को निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा का मौलिक अधिकार।
- दिव्यांग बच्चों के लिए निःशुल्क शिक्षा के लिए अधिकतम् आयु 18 वर्ष।
- निजी विद्यालयों में 6-14 वर्ष तक के 25% गरीब बच्चों को निःशुल्क शिक्षा व्यवस्था।
प्रश्न 32. विशिष्ट आवश्यकता वाले बच्चों की पहचान स्पष्ट कीजिये ?
उत्तर: विशिष्ट आवश्यकता वाले बच्चें - शारीरिक रूप से अक्षम, प्रतिभाशाली, सृजनात्मक, मन्दबुद्धि, शैक्षिक रूप से श्रेष्ठ, पिछड़े बच्चे, बाल अपराधी, असमायोजित, समस्याग्रस्त, सांवेगिक अस्थिरतायुक्त आदि प्रकार के बच्चे विशिष्ट बच्चे कहलाते है।
विशिष्ट आवश्यकता वाले बच्चों की पहचान- विशिष्ट आवश्यकता वाले बच्चे सामान्य बच्चों से विशिष्ट लक्षणों वाले होते है इनमें विशिष्ट प्रवृत्तियाँ पायी जाती है। यह अन्तर्मुखी, निराशावादी, सांवेगिक स्थिर, शर्मीले, निष्क्रिय, आत्मकेन्द्रित, चिन्ताग्रस्त निर्भर प्रवृत्ति, कभी-कभी उग्र एकाकी भावना वाले होते हैं। इनकी पहचान निम्न तरीके से कर सकते है।
मानसिक परीक्षण द्वारा- छात्रों का मानसिक परीक्षण कर उनकी विशिष्टता का पता लगाया जा सकता है। यह थिंमेटिक अपरसेज्ञसन टेस्ट (TAT) हरमन रोर्शा का स्याही धब्बा परीक्षण आदि जैसे- परीक्षणों का प्रयोग कर पता लगाया जा सकता है।
शैक्षिक परिणामों के द्वारा- विशिष्ट आवश्यकता वाले बच्चें के कक्षा के परीक्षा में प्राप्त परिणामों का अवलोकन एवं विश्लेषण के द्वारा इनकी विशिष्टता का पता लगाया जा सकता है।
व्यवहार के अवलोकन द्वारा- विशिष्ट आवश्यकता वाले बच्चों द्वारा किये गये व्यवहारों के मनोवैज्ञानिक परीक्षण एवं विश्लेषण से उनकी विशिष्टताओं का पता लगाया जा सकता है।
समाजमिति एवं साक्षात्कार द्वारा- विशिष्ट आवश्यकता वाले बच्चों की पहचान के लिए समाजमिति एवं उनका प्रत्यक्ष विधि से साक्षात्कार कर उनकी विशिष्टताओं का पता लगाया जा सकता है।
प्रश्न 33. अस्थि बाधित बालकों की समस्यायें बताइये?
उत्तर: अस्थि बाधित बालक की समस्या- अस्थि बाधित बच्चे वे बच्चे होते है जिनकी एक या अधिक हड्डियों में दोष आ गया हो या क्षतिग्रस्त हो गई हो जिससे तो सामान्य बच्चों के साथ शारीरिक (हाथ पैर से) कार्य करने में कठिनाई का अनुभव करते है।
समस्याएँ-
उपचार सुविधाओं का अभाव - सरकार द्वारा विशिष्ट बालकों को सुविधाओं को उपलब्ध कराने के लिए प्रयास किये जा रहे है। परन्तु अभी भी कमी महसूस की जा रही है। अस्थि बाधित बालकों की सुलभ उपचार नही मिल पा रहा है।
प्रशिक्षित-अध्यापकों की कमी - अस्थि बाधित बालकों के लिए प्रशिक्षित अध्यापकों की आज भी कमी है। जिससे बहुत से अस्थि बाधित छात्र शिक्षा से वंचित है।
अतिरिक्त कक्षा की कमी - सामान्य बालकों के लिए तो सामान्य कक्षा पर्याप्त मात्रा में पाये जा रहे है। परन्तु अस्थि बाधित छात्रों के लिए अतिरिक्त कक्षा की कमी है।
स्कूल में संसाधनों की कमी - विशिष्ट बालकों के लिए आज भी संसाधनों की कमी है। जितने छात्र हैं उसके संख्या के आधार पर फर्नीचर आदि संसाधनों में कमी है।
प्रश्न 34. प्रतिभाशाली बालकों को परिभाषा द्वारा स्पष्ट कीजिये ?
उत्तर: प्रतिभाशाली बालक- प्रतिभाशाली बालक सामान्य बालकों से श्रेष्ठ होते है। इनकी श्रेष्ठता ही इनको अन्य बालकों से पृथक पंक्ति/अलग पंक्ति में खड़ा कर देती है। कुशाग्र बुद्धि व अपनी प्रतिभा के कारण इन बालकों की समूह व समाज में अलग पहचान होती है। वह बालक जिसकी मानसिक आयु अपने जीवन की आयु के अनुपात में औसत से बहुत अधिक हो, उसे प्रतिभाशाली बालक कहा जाता है। प्रतिभाशाली बालकों की I.Q 120 से 140 के मध्य होती है।
कुछ विद्वानों ने प्रतिभाशाली बालकों की परिभाषा निम्न प्रकार से दिए है-
- हैविंग हर्स्ट के अनुसार- "जो निरंतर किसी कार्य क्षेत्र में कुशलता का परिचय देता है इसे प्रतिभाशाली बालक मानते हैं"
- टरमैन और ओडन के अनुसार- "प्रतिभाशाली बालक शारीरिक गठन, सामाजिक समायोजन व्यक्तियों के गुणों, विद्यालयी उपलब्धि, खेल की सूचनाओं और रुचियों की विविधता में औसत बालक से श्रेष्ठ होते है।"
प्रश्न 35. बाल अपराध के प्रमुख कारण लिखिये?
उत्तर: बाल अपराध के प्रमुख कारण-
आनुवांशिक कारण (अपराधी प्रवृत्ति)- मनोवैज्ञानिकों का मत है कि बालकों को अपराधी प्रवृत्ति अपने माता-पिता के वंशानुक्रम द्वारा प्राप्त होती है।
शारीरिक कारण- बालक के शारीरिक दोष उसके तिरस्कार के कारण बनते है। इस तिरक्कार से उनके आत्मसम्मान को ठेस पहुँचती है। फलस्वरूप वह तिरस्कार वह विरसकार का बदला लेन के लिए दूसरों को कष्ट देने और सताने का अपराध करने लगता है।
यौनांगों का तीव्र विकास- जिन बालकों और बालिकाओं के यौनांगों का तीव्र विकास होता है, वे अनेक प्रकार से काम सम्बन्धी अपराध करने लगते है
मनोवैज्ञानिक कारण (मानसिक रोग)- बालकों के मानसिक रोग उनको अपराधी बनाने के लिए उत्तरदायी होते है। इन रोगों से ग्रस्त बालकों में मानसिक तनाव, विचार शून्यता असन्तुलन या अन्तर्दृन्द्व उत्पन्न हो जाता है। ऐसी दशा में वे अपना आत्मनियंत्रण खोने के कारण अपराध कर बैठते है।
ग्रन्थियाँ- जिस बालक में ग्रंथियों का निर्माण हो जाता है, वह थोड़े बहुत समय के बाद कोई न कोई अपराध करने लगता है।
प्रश्न 36. परामर्शदाता के गुण स्पष्ट कीजिए ?
उत्तर: परामर्शदाता के गुण- परामर्श प्रक्रिया की सफलता काफी हद तक परामर्शदाता की प्रतिभा, ज्ञान, दृष्टिकोण एवं अनुभव पर निर्भर करती है। परामर्शदाता की निम्नांकित गुण है-
- व्यक्तित्व सम्बन्धी गुणों का समावेश- परामर्शदाता के अन्दर व्यक्तित्व सम्बन्धी गुणों का होना आवश्यक है जैसे विनम्र स्वभाव, सहयोगी व्यवहार, व्यापक रुचि, दूरदर्शी, व आकर्षक व्यक्तित्व आदि होना चाहिए।
- परामर्श प्रदान करने हेतु प्रशिक्षण- परामर्शदाता को विभिन्न व्यवसायिक, जानकारी निर्देशन के प्रकृति, उद्देश्य व सिद्धान्त का ज्ञान व मनोवैज्ञानिक परीक्षण का ज्ञात होना चाहिए।
- उच्च शैक्षिक योग्यता- परामर्शदाता उच्च शैक्षिक योग्यता वाला होता है जिसमें सामान्य शिक्षा एवं व्यवसायिक शिक्षा दोनों प्राप्त किया होता है।
- लचीलापन- परामर्शदाता लचीले स्वाभाव के होते है
- पक्षपात से परे व्यवहार- परामर्शदाता हमेशा निष्पक्ष होता है। वह पक्षपात किसी के साथ नहीं करता है।
- ईमानदार- परामर्शदाता ईमानदार होता है।
प्रश्न 37. मनोविज्ञान के प्रमुख कार्य बताइये?
उत्तर: मनोविज्ञान के कार्य- शिक्षा मनोविज्ञान का प्रयोग कक्षा तक ही सीमित नहीं है। कक्षा के बाहर भी व्यक्ति सीखता है। शिक्षा मनोविज्ञान के निम्न कार्य है-
बालकों की प्रकृति की पहचान- प्रत्येक बालक शारीरिक बौद्धिक सांवेगिक और सामाजिक दृष्टिकोण से एक-दूसरे से अलग होते है। मनोविज्ञान का कार्य बालक के विभिन्न गुणों की पहचान करके शिक्षा के स्वरूप का निर्धारण करना
उद्देश्यों का निर्धारण- उद्देश्यों का निर्धारण मनोविज्ञान के एक मुख्य कार्य है। उद्देश्यों का निर्धारण करते समय इस बात का ध्यान रखा जाता है कि बालक बालिकाओं में हम क्या व्यवहारगत परिवर्तन लाना चाहते है।
विशिष्ट बालको की पहचान- विद्यालय में बहुत विद्यार्थी ऐसे होते है जो सामान्य स्तर के विद्यार्थियों से अलग होते है मंदबुद्धि वाले तेज बुद्धि वाले, विकलांग आदि जिनको सामान्य बच्चों के साथ पढ़ाना कठिन होता है। शिक्षा मनोविज्ञान का कार्य ऐसे विद्यार्थी की पहचान कर विशेष प्रकार के मनोविज्ञान की शिक्षा प्रदान करना है।
प्रश्न 38. भारतीय पुर्नावास परिषद के कार्यों का उल्लेख कीजिये ?
उत्तर: भारतीय पुनर्वास परिषद् के कार्य-
- दिव्यांगों के पुनर्वास से सम्बन्धित प्रशिक्षण एवं नितियाँ बनाना।
- कार्यरत संस्थाओं एवं विश्वविद्यालयों को मान्यता देना।
- पुनर्वास से सम्बन्धित विशेषज्ञों के प्रशिक्षण हेतु पाठ्यक्रम निर्माण करना।
- पीडब्ल्यूडी के पुनर्वास के क्षेत्र में काम करने वाले संस्थानों की मान्यता को वापस भी लेता है।
- पेशेवरों/कर्मियों के पंजीकरण के लिए केन्द्रीय पुनर्वास रजिस्टर बनाए गए है।
- भारत और विदेशों में विकलांग लोगों के पुनर्वास से संबन्धित शिक्षा और प्रशिक्षण संस्थाओं से नियमित रूप से जानकारी लेता है।
- पीडब्ल्यूडी के पुनर्वास के क्षेत्र में मास्टर डिग्री/स्नातक की डिग्री/पी०जी० डिप्लोमा/ सर्टिफिकेट पाठ्यक्रम चलाने वाले संस्थानों संगठनों / विश्वविद्यालयों को मान्यता देता है।
प्रश्न 39. बौद्धिक निःशक्त बच्चों हेतु संसाधन कक्षा गतिविधयों को लिखिये ?
उत्तर: बौद्धिक निःशक्त बच्चों की कक्षा संसाधन -
- बौद्धिक निःशक्त बालक जिसकी बुद्धि लब्धि 50-75 के बीच होते है। ऐसे बालकों को पढ़ाने के लिए प्रशिक्षित अध्यापकों की नियुक्ति की जाती है।
- ऐसे बालक जिसकी बुद्धि लब्धि (IQ) 50-25 के बीच होती है। ऐसे बालकों को विशेष साधनों कक्षाओं, तथा शिक्षकों की आवश्यकता होती है। जिससे बालक अपनी गति से कक्षा में संसाधनों के माध्यम से सीखते है।
- कुछ ऐसे बालक होते है जिसका I.Q 25 से कम होता है। ऐसे बालक गम्भीर रूप से मानसिक मंदित होते है वे अजीवन दूसरों के और से रहता है।
- बौद्धिक निःशक्त बालकों को कक्षा में शिक्षित करने के लिए चित्र दृय श्रव्य संसाधनों का प्रयोग करते है। जिससे बालक को सीखने में कठिनाई का अनुभव नहीं होता है।
प्रश्न 40. प्रमस्तिष्क पक्षाघात वाले बच्चों हेतु थिरैपिक विधि लिखिये ?
उत्तर: प्रमस्तिष्क पक्षाघात वाले बच्चों हेतु थिरैपिक विधि-
- थर्मोथेरेपी- गर्म चिकित्सा स्पास्टिक मांसपेशियों को आराम करने में मदद करती है। और इस प्रकार गति की थेरेपी अधिक रेंज प्राप्त करने में मदद करती है।
- अल्ट्रासाउंड थेरेपी- अल्ट्रासाउंड थेरेपी का उपयोग आसंजनों को तोड़ने परिसंचरण को बढाने के लिए किया जा सकता है, और इस प्रकार जोड़ों की गति को बढाने में मदद करता है।