वस्तुनिष्ठ प्रश्न
प्रश्न 1. दृष्टि बाधिता का मुख्य कारण है -
(a) वातावरण
(b) वंशानुक्रम
(c) दोनों
(d) उपर्युक्त में से कोई नहीं
उत्तर: (c) दृष्टि बाधित का मुख्य कारण वातावरण एवं वंशानुक्रम दोनों हो सकते है।
प्रश्न 2. अच्छी निर्देशन सेवा होती है -
(a) बाल केन्द्रित
(b) शिक्षक केन्द्रित
(c) समाज केन्द्रित
(d) उपर्युक्त में से कोई नहीं
उत्तर: (a) अच्छी निर्देशन सेवा बाल केन्द्रित सेवा होती है।
प्रश्न 3. टरमन के अनुसार सामान्य बुद्धि बालकों की बुद्धि लब्धि होती है -
(a) 140 से अधिक
(b) 120 से 140
(c) 110 से 120
(d) 90 से 110
उत्तर: (d) टरमन के अनुसार सामान्य बुद्धि बालकों की बुद्धि लब्धि 90 से 110 होती है।
प्रश्न 4. समुदाय का अर्थ कितने शब्दों में मिलकर बना है?
(a) चार
(b) दो
(c) तीन
(d) इनमें से का
उत्तर: (b) समुदाय शब्द अंग्रेजी भाषा के कम्यूनिटी (Community) शब्द का हिन्दी रूपान्तरण है जो कि लैटिन भाषा के कॉम (Com) तथा म्यूनिस (Munis) शब्द से मिलकर बना है। लैटिन में 'काम' शब्द का अर्थ एक साथ (Together) तथा 'म्यूनिस' का अर्थ सेवा करना (To serve) है।
प्रश्न 5. मण्डलीय मनोविज्ञान केन्द्र कहाँ स्थित है?
(a) आगरा
(b) दिल्ली
(c) लखनऊ
(d) कानपुर
उत्तर: (a) मण्डलीय मनोविज्ञान केन्द्र आगरा में स्थित है। यह मनोविज्ञान कार्यालय आगरा और अलीगढ़ मंडल के क्षेत्र का एक मात्र मनोवैज्ञानिक कार्यालय है। यहाँ पर शैक्षणिक व्यवसायिक और व्यक्तिगत निर्देशन और परामर्श दिये जाते है।
प्रश्न 6. विकलांग शिक्षा के मुख्य आधार है -
(a) शारीरिक विकलांगता
(b) आवेगात्मक विकलांगता
(c) मानसिक विकलांगता
(d) उपर्युक्त सभी
उत्तर: (d) विकलांग दिव्यांग शिक्षा के मुख्य आधार शारीरिक विकलांगता, आवेशात्मक विकलांगता तथा मानसिक विकलांगता हो सकते है।
प्रश्न 7. सांकेतिक भाषा किसके लिए प्रयुक्त होती है?
(a) प्रतिभाशाली
(b) श्रवण बाधित
(c) 'अ' एवं 'ब' दोनों
(d) चलन बाधित
उत्तर: (b) सांकेतिक भाषा श्रवण बाधित बालकों के लिए प्रयोग किया जाता है।
प्रश्न 8. निर्देशन का प्रकार नहीं है -
(a) शैक्षिक निर्देशन
(b) लिखित निर्देशन
(c) व्यक्तिगत निर्देशन
(d) व्यावसायिक निर्देशन
उत्तर: (b) निर्देशन के प्रकार निम्न है-
- शैक्षिक निर्देशन।
- व्यक्तिगत निर्देशन।
- व्यावसायिक निर्देशन।
जबकि लिखित निर्देशन का प्रकार नही होता है।
प्रश्न 9. शिक्षा प्रक्रिया में अनुकूलन की आवश्यकता नहीं होती है -
(a) श्रवण बाधितों के लिए
(b) अस्थिर बाधितों के लिए
(c) प्रतिभाशाली बालकों के लिए
(d) दृष्टि बाधितों के लिए
उत्तर: (c) शिक्षा प्रक्रिया में अनुकूलन की आवश्यकता प्रतिभाशाली बालकों के लिए नहीं होती है।
प्रश्न 10. विकृत बालकों को बनाना चाहिए -
(a) परिवार पर निर्भर
(b) आत्म-निर्भर
(c) सरकार पर निर्भर
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर: (b) विकृति बालकों को आत्म निर्भर बनाना चाहिए।
प्रश्न 11. वर्तमान में निःशक्त बच्चों की शिक्षा को क्या कहा जाता है?
(a) विशेष शिक्षा
(b) समेकित शिक्षा
(c) समावेशी शिक्षा
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर: (c) वर्तमान में निःशक्त बच्चों की शिक्षा को समावेशी शिक्षा कहा जाता है
प्रश्न 12. हकलाने के कारण है -
(a) वंशानुक्रम
(b) वातावरण
(c) उपर्युक्त दोनों
(d) उपर्युक्त में से कोई नहीं
उत्तर: (c) hकलाने के वंशानुक्रम एवं वातावरण दोनों कारण हो सकते है
प्रश्न 13. मनोविज्ञान केन्द्र का प्रमुख कार्य है -
(a) निर्देशन
(b) प्रशिक्षण
(c) शोध कार्य
(d) उपर्युक्त सभी
उत्तर: (d) मनोविज्ञान केन्द्र का प्रमुख कार्य निर्देशन, प्रशिक्षण एवं शोध कार्य करना होता है।
प्रश्न 14. वाक्दोष के प्रमुख प्रकार है -
(a)चार
(b) पाँच
(c) छः
(d) सात
उत्तर: (c) वाक् दोष छः प्रकार के होते है
- (i) उच्चारण सम्बन्धित दोष।
- (ii) हकलाना।
- (iii) ओष्ठ विकृति।
- (iv) आवाज (ध्वनि) की समस्या।
- (v) श्रवण विकृति।
- (vi) देर से बोलना।
प्रश्न 15. निर्देशन एवं परामर्श द्वारा बताया जा सकता -
(a) क्या करने योग्य है
(b) क्या न करने योग्य है
(c) 'अ' एवं 'ब' दोनों
(d) उपर्युक्त में से कोई नहीं
उत्तर: (c) निर्देशन एवं परामर्श द्वारा बताया जाता है कि क्या करने योग्य है और क्या न करने योग्य है।
अति लघु उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 16. पर्यवेक्षण के कोई दो प्रकार लिखिए।
उत्तर: पर्यवेक्षण के दो प्रकार निम्न है-
- (i) नियंन्त्रणात्मक पर्यवेक्षण - यह पर्यवेक्षण का वह स्वरूप हैं जो अधिकारिक पर्यवेक्षण के ही समान है। अंतर केवल इतना होता है कि यह उचित क्रियाओं के लिए पुरस्कार एवं अनुचित क्रियाओं हेतु दंड आदि के प्रावधानों द्वारा अधीनस्थों की क्रियाओं को नियंत्रित करता हैं। इसके लिए आवश्यक तकनीकों का उपयोग किया जाता है। जिनके माध्यम से अधीनस्थों की क्रियाओं का सही मूल्यांकन किया जा सकें और कोई त्रुटि न होने पायें।
- (ii) निरीक्षणात्मक पर्यवेक्षण - यह पर्यवेक्षण का वह स्वरूप हैं। जिसमें पर्यवेक्षण अधिकारी सर्वज्ञाता होता है, तथा उसका मुख्य उद्देश्य केवल त्रुटियों का पता लगाना होता हैं इसे अधिकारिक पर्यवेक्षण भी कहते हैं। इसमें आज्ञा निर्देशों एवं नियमों पर बल दिया जाता है
प्रश्न 17. डायट के कोई दो विभागों के नाम लिखिए।
उत्तर: डायट को विभिन्न प्रकार की ईकाइयों विभागों में बाटा गया है।
- (i) सेवापूर्व विभाग (शिक्षण प्रशिक्षण विभाग)।
- (ii) सेवारत विभाग (शिक्षक प्रशिक्षण विभाग)
- (iii) जिला संसाधन इकाई विभाग (डी. आर. यू)।
- (iv) नियोजन एवं प्रबंधन विभाग
प्रश्न 18. परामर्श की कोई एक परिभाषा लेखक के नाम सहित लिखिए।
उत्तर: परामर्श की परिभाषा-
शेफर राबर्ट एच के अनुसार "परामर्श को भिन्न-भिन्न निर्देशन सेवाओं में से एक समझा जाता है। यह मुख्य रूप से एक व्यक्ति से आमने-सामने के संबंधों में प्रयुक्त होता है। परामर्शदाता सेवार्थी की भावनाओं, स्थितियों व परिस्थितियों और किसी भी क्रिया को समझने तथा विश्लेषण करने में सहायता करने का प्रयास करते है।"
प्रश्न 19. वाक्दोष का अर्थ स्पष्ट कीजिए ?
उत्तर: वाक्दोष का अर्थ - वाक् या वाणी दोष बाधित वे बच्चें है। जो मुख की आवाज बोले गये शब्दों में तालमेल तथा शब्दों को संयोजित करने में कठिनाई महसूस करते हैं। दूसरे शब्दों में यह कहा जा सकता है कि वे बोलते समय कुछ शब्दों को छोड़ देते है। बदल देते है, तोड़-मरोड़ देते है तथा कुछ जोड़ देते है। वाक्दोष बाधित बच्चों में बोलने की लयक्रम टूट जाता है। और उनकी आवाज में हकलाहट होती है।
प्रश्न 20. बाल अपराध के कोई दो कारण लिखिए
उत्तर: बाल अपराध के दो कारण - बाल अपराध के निम्न कारण है-
- (1) विघटित परिवार- विघटित परिवार वह परिवार है जिसमे माता-पिता में से किसी एक की मृत्यु हो चुकी हो या माता-पिता में तलाक हो गया हो। विघटित परिवारों में बच्चों की उचित देखभाल नहीं हो पाने से बच्चे उपेक्षित होते हैं। जिससे उनका व्यक्तित्व कुंठित हो जाता है ऐसी स्थिति में वह पथ भ्रष्ट होकर आपराधिक कार्यों में लिप्त हो जाते है।
- (2) माता-पिता का पक्षपातपूर्ण व्यवहार - यदि किसी परिवार में माता-पिता बालक के साथ पक्षपात पूर्ण व्यवहार करते हैं तो बालक अपेक्षित होकर समाज विरोधी गतिविधियों में लिप्त हो सकता है।
प्रश्न 21. डायट के कोई दो उद्देश्य लिखिए
उत्तर: डायट के निम्नलिखित उद्देश्य है-
- (i) शैक्षिक प्रशासन एवं शैक्षिक सुधारों का विकन्द्रीकरण करना
- (ii) आदर्श शिक्षा-प्रशिक्षण केन्द्र के रूप में प्राथमिक शिक्षा में गुणात्मक सुधार करना।
- (iii) जिला स्तर की शैक्षिक योजनाओं का निर्माण करना।
प्रश्न 22. विद्यालय पर्यवेक्षण के क्षेत्र बताइए।
उत्तर: विद्यालय पर्यवेक्षण के क्षेत्र- शिक्षण में सुधार और बालकों के विकास की दृष्टि से पर्यवेक्षक के सीमा क्षेत्र से संबन्धित समस्त क्रियाएँ आती है।
- (i) शिक्षण कार्य का पर्यवेक्षण- इसमें संस्था विशेष में शिक्षण विधियों के प्रभावी स्वरूप श्रव्य दृश्य सामग्री समय सामग्री, अध्यापकों के कार्य विभाजन, पाठ्यक्रम का पूरे सत्र में विभाजन आदि।
- (ii) विद्यालय वातावरण का पर्यवेक्षण - छात्रों के सामान्य व्यवहार, उनकी अनुशासनप्रियता, आदते विद्यालय का स्वच्छ परिवेश, पानी की उचित व्यवस्था आदि से पर्यवेक्षण प्रक्रिया का निकट सम्बन्ध होता है।
प्रश्न 23. निरीक्षण प्रणाली में सुधार के कोई दो सुझाव लिखिए।
उत्तर: निरीक्षण प्रणाली में सुधार के सुझाव निम्न है-
- (i) समिति कार्य प्रणाली की जाँच करके कार्य पद्धति में सुधार के लिए सुझाव
- (ii) जिन नियमों और प्रक्रियाओं को कार्यान्वित नही किया जा सकता या कार्यान्वित करने में कठिनाई आती हो, उन नियमों और प्रक्रियाओं के बारे में टिप्पणी दी जाए।
प्रश्न 24. "योग्य परामर्शदाताओं द्वारा किसी दूसरे व्यक्ति को दी जाने वाली सहायता निर्देशन कहलाती है।" यह परिभाषा कि किसने लिखी?
उत्तर: क्रो एवं क्रो की परिभाषा- "योग्य परमर्शदाताओं द्वारा किसी दूसरे व्यक्ति को दी जाने वाली सहायता निर्देशन कहलाती है।"
प्रश्न 25. अधिगम अक्षमता वाले बालकों के दो प्रकार बताइए ।
उत्तर: अधिगम अक्षमता वाले बालकों के प्रकार निम्न है-
- (i) डिस्लेक्सिया - डिस्लेक्सिया एक व्यापक शब्द है जिसका सम्बन्ध पढ़ने सम्बन्धी होता है। जिसमें अशक्त बालकों को पढ़ने में कठिनाई होती है।
- (ii) डिसग्राफिया - डिसग्राफिया का सम्बन्ध लिखने सम्बन्धी विकार से होता है। इसमें या तो बच्चा ठीक से लिख नहीं पाता अथवा लिखावट ठीक नही हो पाती है।
प्रश्न 26. धीमी गति से सीखने के कौन-कौन से कारण है?
उत्तर: धीमी गति से सीखने के निम्न कारण है-
- (i) संवेगात्मक कारण
- (ii) मानसिक या बौद्धिक कारण।
- (iii) शारीरिक कारण
- (iv) वातावरणीय कारण
प्रश्न 27. एक अध्यापक दृष्टि बाधक बच्चे की पहचान कैसे करेगा?
उत्तर: एक अध्यापक निम्न तरीकें से दृष्टि बाधित बालक की पहचान कर सकेगा-
- व्यवहार द्वारा
- निरीक्षण द्वारा
- शारीरिक चिन्ह द्वारा।
- आँखों के जाँच द्वारा
प्रश्न 28. समावेशी बालक किस प्रकार के होते हैं?
उत्तर: समावेशी बालक वे बालक होते है जो शारीरिक रूप से असमर्थ होते है। जैसे- लूले, एक पैर की खराबी लंगड़े चलने में कठिनाई आदि इन बालकों को कुछ उपकरण देकर सामान्य बच्चों के साथ शिक्षा देने का प्रावधान किया गया है।
प्रश्न 29. बुद्धि-लब्धि से आप क्या समझते हैं?
उत्तर: बुद्धि लब्धि- कोल एवं ब्रूस के अनुसार, "बुद्धिलब्धि यह बताती है कि बालक की मानसिक योग्यता में इस गति से विकास हो रहा है।" बुद्धि लब्धि सूत्र का सर्वप्रथम प्रयोग टरमन के द्वारा निर्मित स्टैनफोर्ड वीने बुद्धि परीक्षण में किया गया था तथा इसी परीक्षण में यह सूत्र सबके सामने आया था।
बुद्धि लब्धि (I.Q) = (मानसिक आयु (M.A) / वास्तविक आयु (C.A)) * 100
प्रश्न 30. अपवचंन क्या है?
उत्तर: अपवंचन- समाज में कुछ ऐसे लोग होते है, जो सामान्य लोगों के स्तर के अनुरूप उत्थान नही कर पाते है, वे पिछड़ जाते है। इनकें पिछड़ने का कारण समुचित साधन, सुविधाएँ, एवं अवसरों से विमुख होना है। ऐसे लोगों को अपवंचित वर्ग कहते है। अपवंचन का समानार्थी शब्द उपेक्षित है।
लघु उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 31. अस्थि बाधित बालकों की समस्याएँ बताइए तथा इनकी शिक्षा व्यवस्था कैसी होनी चाहिए?
उत्तर: अस्थि बाधित बालकों की समस्याएँ- अस्थि बाधित बालकों की समस्याएँ निम्नलिखित है-
- (i) आत्म विश्वास में कमी।
- (ii) समायोजन की समस्या।
- (iii) आवागमन की समस्या।
- (iv) रोजगार की समस्या।
- (v) सीखने में समस्या।
अस्थि बाधित बालकों की शिक्षा की व्यवस्था निम्नलिखित तरीके से होनी चाहिए-
- खास उपकरणों की व्यवस्था कराकर
- समुचित बैठने की व्यवस्था करके
- विद्यालय के अन्दर खेलें जाने वाले खेलों का आयोजन करके
- इनकी शिक्षाओं में (अध्यापकों की भूमिका) अध्यापकों को इन बच्चों से दोस्त जैसा व्यवहार करना चाहिए ताकि यह बच्चे अपनी समस्याएँ बिना संकोच के अध्यापको को बता सकें।
- अगर अध्यापकों को इन बच्चों की पारिवारिक पृष्ठभूमि पता हो तो वह अपने शैक्षिक प्रयासों में इन बच्चों के लिए सुधार ला सकते है।
- अस्थि बाधित बालकों की गतियों की तरफ विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए।
प्रश्न 32. समावेशी बालकों के लिए चलाई जा रही कार्य योजनाओं एवं नीतियों के बारे में बताइए।
उत्तर: समावेशी बालकों के लिए कार्य योजना एवं नीति- वर्तमान समय में विशिष्ट या समावेशी शिक्षा के क्षेत्र में अत्यन्त महत्वपूर्ण परिवर्तन किये गये तथा सरकारी नीतियों में समावेशी शिक्षा को महत्वपूर्ण स्थान दिया गया। विशिष्ट आवश्यकता वाले बालकों की शिक्षा से सम्बन्धित विभिन्न नीतियाँ योजनाएँ एवं कानून प्रस्तुत किया गया है-
- (i) राष्ट्रीय शिक्षा नीति 1968 ।
- (ii) राष्ट्रीय शिक्षा नीति 1986
- (iii) संसोधित राष्ट्रीय शिक्षा नीति 1992
- (iv) असमर्थी बालकों के लिए राष्ट्रीय शिक्षा नीति।
- (v) शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 |
- (vi) असमर्थी बालकों हेतु समावेशी शिक्षा की संसोधित कार्य योजना।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 1968- अशक्त बालकों के लिए भारत सरकार द्वारा 1969 में नियुक्त राष्ट्रीय शिक्षा आयोग ने अपनी रिपोर्ट सरकार को 1966 में प्रस्तुत की। भारत सरकार ने इसके सुझावों के आधार पर जुलाई 1968 में अपनी राष्ट्रीय शिक्षा नीति घोषित की। इस शिक्षा नीति के मूल तत्वों को निम्नलिखित रूप से प्रस्तुत किया जा सकता है-
- शिक्षा राष्ट्र का महत्वपूर्ण विषय है
- शिक्षा की व्यवस्था करना राज्य सरकारों एवं केन्द्र सरकारों का संयुक्त उत्तरदायित्व है।
- अनिवार्य एवं निःशुल्क प्राथमिक शिक्षा की व्यवस्था की जाएगी।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 1986 में अक्षम बालकों की शिक्षा- वर्तमान समय में बालकों की शिक्षा के लिए एक से एक प्रयास किया गया लेकिन इन बालकों को सामान्य बालकों से अलग समझा गया। अन्त में यह विचार किया गया कि इन बालकों के लिए अलग से शिक्षा व्यवस्था की जाए इस शिक्षा व्यवस्था के बनाने हेतु विशिष्ट अथवा समावेशी शिक्षण संस्थाओं का निर्माण किया गया धीरे-धीरे नीतियों के अन्तर्गत भी विशिष्ट शिक्षा को स्थान प्रदान किया गया। वर्तमान समय में विशिष्ट या समावेशी शिक्षा के क्षेत्र में अत्यन्त महत्वपूर्ण परिवर्तन किए गए
प्रश्न 33. लेखन अयोग्यता से आप क्या समझते है?
उत्तर: लेखन अयोग्यता- लेखन अयोग्यता को डिसग्राफिया भी कहते है। या डिसग्राफिया एक अधिगम अक्षमता या अधिगम विकलांगता है।
- डिसग्राफिया से प्रभावित छात्र/बालक को लेखन संबंधी सभी कौशलों में कठिनाई होती है
- लेखन अयोग्यता में बालक ठीक से नही लिख पाता है। या उसके लिखावट ठीक नहीं हो पाती है।
- लेखन अयोग्यता बालक के लेखन, कौशल, हस्त लेखन, स्पेलिंग, श्रुति लेख इत्यादि को प्रभावित करता है।
लेखन अयोग्यता से प्रभावित बालक में लिखने का कौशल निम्न होता है-
- (i) बालक श्रुति लेख यानी सुनकर लिखने में असमर्थ होता है।
- (ii) बालक लिखते समय हाथ की अंगुलियों और पेंसिल का समायोजन सही ढंग से नहीं कर पाता है।
- (iii) बालक लिखते समय शब्दों, वाक्य एवं पैराग्राफ को अलग-अलग ढंग से नही दर्शाता है।
प्रश्न 34. ब्रेल लेखन की प्रक्रिया को समझाइए।
उत्तर: ब्रेल लेखन- ब्रेल यह एक लिपि है जो नेत्रहीन लोगों के लिए बनाई गई थी। नेत्रहीन बालक लिखने और पढ़ने के लिए इस लिपि को छुकर इसका उपयोग करते है। या ब्रेल पद्धति एक तरह की लिपि है, जिसको विश्व भर में नेत्रहीनों को पढने और लिखने में छूकर व्यवहार में लाया जाता हैं इस पद्धति का अविष्कार 1821 में एक नेत्रहीन फ्रांसीसी लेखक अक्षरों, संख्याओं और विराम चिन्हों को दर्शाते है। ब्रेल लिपि उभरे हुए छः बिन्दुओं की लिपि होती है। जिसे स्पर्श या छुकर पढ़ा या लिखा जाता है। इन छः बिन्दओं के विभिन्न संयोगों के आधार पर विश्व की सभी भाषाओं की वर्णमालाएँ विराम चिन्ह, संक्षेप तथा संकेत तैयार किये गये है। ब्रेल चिन्ह मोटे कागज पर लेखन पाटी (ब्रेल स्लेट) तथा लिखी ब्रेल लेखन सामग्री की सहायता से उभारे जाते है। लेखन पाटी पर लिखते समय स्टाट्रल्स दबाकर एक-एक बिन्दु कागज पर बनाए जाते है। जो दूसरी ओर उभरकर आते है। अतः लेखन पाटी पर दाएँ से बाएँ लिखना पड़ता है। लेखन पाटी पर कागज के दोनों ओर लिखा जा सकता है दूसरी ओर लिखते समय दो पंक्तियों के बीच नई ब्रेल पंक्ति लिखी जाती है ब्रेल लिपि पाटी पर स्टाइलन से लिखते समय एक एक प्रकोष्ठ में किन्तु एक बार में एक बिन्दु को दबाया जाता हैं जबकि ब्रेल लेखन मशीनों पर उसी अक्षर हेतु सम्पूर्ण अपेक्षित बिन्दु संयोगों, जैसे- 'र' हेतु 1, 2, 3, तथा 5 संख्या के समस्त बिन्दुओं को एक साथ दबाया जाता है।
प्रश्न 35. सामान्य बच्चों में कौन-कौन सी मानसिक भिन्नताएँ होती हैं?
उत्तर: सामान्य बालकों की बुद्धि लब्धि (IQ 90-110) के बीच होती है। किसी सामान्य कक्षा में लगभग 70% बालक सामान्य ही होते है। सामान्य बालक वे होते है जिनका शारीरिक स्वास्थ्य मानसिक स्वास्थ्य एवं बनावट इस प्रकार होती है। उन्हे सामान्य कार्य करने में किसी प्रकार की कठिनाई नही होती है।
- सामान्य बालकों की शैक्षिक उपलब्धि प्रतिभाशाली बालकों से सामान्य होती है।
- सामान्य बालकों का मानसिक स्तर प्रतिभाशाली या मन्दबुद्धि बालकों से कम या ज्यादा नही होती बल्कि सामान्य होती है।
- सामान्य बच्चों की सीखने की गति प्रतिभाशाली या पिछड़े बालकों से सामान्य होती है।
- वातावरण के उत्तेजकों को अपनी बुद्धि के अनुसार समझने के कारण इनके अनुभव भिन्न होते है।
प्रश्न 36. निर्देशन के कोई तीन सिद्धान्त बताइए।
उत्तर: निर्देशन के सिद्धान्त - निर्देशन के सिद्धान्त निम्नलिखित है।
निरन्तरता का सिद्धान्त - किसी समस्या विशेष के समाधान के लिए एक बार निर्देशन दे देने भर से निर्देशन का कार्य समाप्त नहीं हो जाता है। क्योंकि ये सम्भव है कि जिसे निर्देशन प्राप्त हुआ है। उसे नवीन परिस्थितियों का सामना भविष्य में करना पड़े और उसे निर्देशन की आवश्यकता पड़े। और नवीन क्षेत्र में भी निर्देशन प्राप्तकर्ता को निर्देशन की बार-बार आवश्यकता अनुभव होती है। अतः हम कह सकते है कि निर्देशन की प्रक्रिया निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है
सार्वभौमिक का सिद्धान्त - निर्देशन प्रक्रिया आरम्भ करने से पूर्व निर्देशन को यह जान लेना चाहिए कि यह प्रक्रिया सार्वभौमिक है। अर्थात् निर्देशन की प्रक्रिया सदैव एवं सर्वत्र चलती रहती है।
ज्ञान का सिद्धान्त - निर्देशन को निर्देशन कार्य आरम्भ करने से पूर्व निर्देशन प्रक्रिया का सम्पूर्ण ज्ञान प्राप्त कर लेना चाहिए। ज्ञान के अभाव में निर्देशन गलत निर्देशन दे बैठता है जिसका परिणाम कभी कभी भयंकर भी हो सकता है।
प्रश्न 37. पर्यवेक्षण क्यों आवश्यक है? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: पर्यवेक्षण की आवश्यकता - शिक्षा में पर्यवेक्षण की निम्नलिखित आवश्यकता है-
- 1. शिक्षकों के समन्वय, उत्प्रेरण, तथा निर्देशन एवं विकास के लिए पर्यवेक्षण आवश्यक है
- 2. कार्य निर्देशों एवं योजनाओं के अनुसार हो यह सुनिश्चित करने के लिए पर्यवेक्षण आवश्यक होता है। तथा कार्य निर्देशों के अनुसार हो रहा है अथवा नहीं के लिए पर्यवेक्षण आवश्यक है।
- 3. पर्यवेक्षण की सहायता से शिक्षकों को अपना कार्य उत्तम ढंग से करने में मदद मिलती है
- 4. पर्यवेक्षण शिक्षा अधिकारियों द्वारा किया गया वह प्रयास है। जिसमें शिक्षकों तथा शिक्षा से व्यक्तियों के विकास हेतु प्रेरणा, शिक्षा के उद्देश्यों का चयन और सुधार, शिक्षण सामग्री शिक्षण विधि तथा मूल्यांकन में सुधार की क्रियाएँ सम्मिलित है।
- 5. शैक्षिक पर्यवेक्षण का शिक्षकों सीखने की परिस्थितियों तथा छात्रों की उन्नति से गहरा सम्बन्ध होता है।
प्रश्न 38. परामर्श की आवश्यकता क्यों होती है? परामर्श के क्षेत्र बताइए।
उत्तर: परामर्श की आवश्यकता-
- (i) व्यक्ति को सामाजिक और संवेगात्मक सांमजस्य स्थापित करने के लिए परामर्श की आवश्यकता होती है
- (ii) व्यक्ति को वर्तमान समस्याओं को हल करने के लिए परामर्श की आवश्यकता होती है।
- (iii) व्यक्ति को अपने पारिवारिक उत्तरदायित्व को समझने के लिए परामर्श की आवश्यकता होती है।
- (iv) व्यक्ति को अन्य व्यक्तियों से वैयक्तिक और व्यवसायिक समायोजन करने के लिए परामर्श की आवश्यकता होती है।
- (v) बालक को अपनी शिक्षा से अधिकतम लाभ उठाने की क्षमता के लिए परामर्श की आवश्यकता होती है।
- (vi) बालक के शैक्षिक एवं व्यवसायिक चयन की योजना बनाने के लिए परामर्श की आवश्यकता होती है।
परामर्श के क्षेत्र- परामर्श के निम्नलिखित क्षेत्र है-
- शैक्षिक परामर्श
- व्यावसायिक परामर्श
- व्यक्तिगत परामर्श
- मनोचिकित्सकीय परामर्श
- स्वास्थ्य परामर्श
प्रश्न 39. शारीरिक अक्षमता या विकलांगता की परिभाषित कीजिए।
उत्तर: शारीरिक अक्षमता या विकलांगता - शारीरिक अक्षमता से तात्यपर्य उस बालक से होता है। जो सामान्य बालकों से भिन्न होते है। इनकी भिन्नता शारीरिक मानसिक कुछ भी हो सकती है। जो सामान्य बालकों के जैसा सीखने में कठिनाई का अनुभव करते है। ऐसे बालकों की अक्षमता दुर्घटना या वंशानुक्रम किसी भी कारण से हो सकती है।
सैमुअट एवं किर्क के अनुसार - "वह बालक जो सामान्य बालको से शारीरिक, बौद्धिक, सामाजिक व संवेगात्मक विशेषताओं से भिन्न होते है। और गुणों को अधिकतम् सीमा तक विकसित करने की विशेष कक्षा का प्रबन्ध करना पड़ता है।"
जे. टी. टण्ड के अनुसार- "वे बालक जो शारीरिक संवेगात्मक या सामाजिक विशेषताओं में सामान्य बालकों से इतने पृथक है कि उनकी क्षमताओं के अधिकतम् विकास के लिए विशिष्ट शिक्षा सेवाओं की आवश्यकता होती है।"
प्रश्न 40. शैक्षिक समावेशन से आप क्या समझते हैं? उद्देश्यों की चर्चा कीजिए।
उत्तर: शैक्षिक समावेशन- समावेशी शिक्षा अपवर्जन के विरुद्ध एक पहल है। शैक्षिक समावेशीकरण शिक्षकों को छात्रों के रूप में विद्यालय व कक्षागत परिस्थितियों के अन्तर्गत उन बालकों के बारे में जानने व प्रशिक्षित होने के लिए तैयार कर देती है जो सामान्य बालकों से अपने स्वरूप में भिन्न एवं विशिष्ट है।"
- (i) शैक्षिक समावेशन एक सतही प्रक्रिया नही है। बल्कि मनुष्यों के विकास के लिए मनुष्यों द्वारा किए गए कुण्ठा मुक्त प्रयास है।
समावेशी शिक्षा के उद्देश्य-
- (ii) बालकों की असमर्थताओं का पता लगाकर उनको दूर करने का प्रयास करना।
- (iii) समाज में असमर्थ बच्चों में फैली भ्रांतियों को दूर करना।
- (iv) प्रजातांत्रिक मूल्यों के उद्देश्यों को प्राप्त करना।
- (v) बालकों में आत्मनिर्भरता की भावना का विकास करना
- (vi) असमर्थ बच्चों को जीवन की चुनौतियों का सामना करने के योग्य बनाना।
- (vii) विशिष्ट बालकों को आत्मनिर्भर बनाकर उनको समाज में मुख्य धारा से जोड़ना।
- (viii) असमर्थों को शिक्षित करके देश की मुख्य धारा से जोड़ना।
- (xi) विशेष आवश्यकताओं वोल बच्चों की सर्वप्रथम पहचान करना तथा निर्धारण करना।
- (x) असमर्थ बच्चों को सामाजिक व सांस्कृतिक रूप से समाज में जोड़ना।