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समावेशी शिक्षा Previous Year Paper 2019

UP DELED Semester 3 समावेशी शिक्षा Previous Year Question Paper 2019 with solution.

Section 1 वस्तुनिष्ठ प्रश्न

वस्तुनिष्ठ प्रश्न

प्रश्न 1. कौन विशिष्ट बालक नहीं है?

(a) प्रतिभाशाली बालक

(b) मन्द बुद्धि बालक

(c) दृष्टिदोष युक्त बालक

(d) अल्पसंख्यक बालक

उत्तर: (d) उपरोक्त विकल्पों में से अल्पसंख्यक बालक विशिष्ट बालक के अन्तर्गत नहीं आते है। विशिष्ट बालक हम उन बच्चों का संदर्भ कर रहे हैं जो अपने आप में अद्भुत और विशेष हैं। वे अपने जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में बाकी बच्चों से अलग होते है, जैसे उनकी प्रतिभा, ज्ञान, कला, खेल या किसी अन्य क्षेत्र में हो।

प्रश्न 2. प्रतिभाशाली बालकों की शिक्षा में क्या आवश्यक है?

(a) तीव्र गति से अध्ययन

(b) संपुष्ट कार्यक्रम

(c) व्यक्तिगत ध्यान

(d) उपर्युक्त सभी

उत्तर: (c) प्रतिभाशाली बालकों की शिक्षा के लिए व्यक्तिगत ध्यान देने की आवश्यकता है।

प्रश्न 3. प्रारम्भिक अवस्था में मन्द बुद्धि बालकों की पहचान हो सकती है-

(a) अवलोकन से

(b) परीक्षण से

(c) साक्षात्कार से

(d) प्रक्षेपी प्रविधि से

उत्तर: (d) प्रारम्भिक अवस्था में मन्द बुद्धि बालकों की पहचान प्रक्षेपी प्रविधि के माध्यम से हो सकती है। प्रक्षेपी प्रविधि - प्रक्षेपी प्रविधि एक मनोवैज्ञानिक है जिसका उपयोग व्यक्तित्व, भावनाओं और विचारों का आकलन करने के लिए किया जाता है।

प्रश्न 4. निर्देशन की आवश्यकता होती है-

(a) अपंग व्यक्तियों को

(b) विशेष व्यक्तियों को

(c) सामान्य व्यक्तियों को

(d) सभी व्यक्तियों को

उत्तर: (d) समावेशी शिक्षा के अन्तर्गत अपंग व्यक्तियों का, विशेष व्यक्तियों का एवं सामान्य सभी व्यक्तियों को निर्देशन की आवश्यकता होती है।

प्रश्न 5. दृष्टि-दोष की पहचान है

(a) आँखों को बार-बार झपकाना

(b) पढ़ते समय आँखों में दर्द

(c) पुस्तक को आँखों के निकट रखना

(d) उपर्युक्त सभी परेशानियाँ

उत्तर: (d) दृष्टि दोष एक ऐसी स्थिति है जो आपको स्पष्ट रूप से देखने से रोकती है जिसका मुख्य कारण आँखों का आकार, कॉर्निया की वक्रता और लेंस की शामिल है। दृष्टि दोष के तीन प्रमुख प्रकार है- (1) निकट दृष्टिदोष (मायोपिया) (2) दूरदृष्टिदोष (हाइपरओपिया) और (3) दृष्टिवैषम्य

प्रश्न 6. विशिष्टता का सम्प्रत्यय होता है-

(a) केवल गुणात्मक

(b) केवल मात्राात्मक

(c) गुणात्मक व मात्रात्मक दोनों

(d) कुछ कहा नहीं जा सकता।

उत्तर: (c) विशिष्टता का सम्प्रत्यय गुणात्मक तथा मात्रात्मक दोनों रूप से सम्प्रत्यय होता है।

प्रश्न 7. कौन शिक्षा के क्षेत्र में विशिष्ट बालकों का वर्ग नहीं है?

(a) बौद्धिक दृष्टि से विशिष्ट बालक

(b) शारीरिक दृष्टि से विशिष्ट बालक

(c) जातिगत दृष्टि से विशिष्ट बालक

(d) शैक्षिक दृष्टि से विशिष्ट बालक

उत्तर: (c) उपरोक्त विकल्पों में जातिगत दृष्टि से विशिष्ट बालक शिक्षा के क्षेत्र में विशिष्ट बालकों का वर्ग नहीं है।

प्रश्न 8. ब्रेल विधि सम्बन्धित है-

(a) श्रवण दोष

(b) मानसिक दोष

(c) अपंगहीनता

(d) दृष्टि-दोष

उत्तर: (d) ब्रेल लिपि- नेत्रहीन के लिए एक वरदान माना जाता है। ब्रेल लिपि एक स्पर्शनीय लिपि है जो नेत्रहीनों को पढ़ने में, और लिखने में सक्षम बनाती है।

प्रश्न 9. भारतीय पुनर्वास परिषद् अधिनियम कब पारित हुआ था?

(a) 1991

(b) 1992

(c) 1993

(d) 1995

उत्तर: (b) भारतीय पुनर्वास परिषद् अधिनियम 1992 में पारित हुआ था और 22 जून 1993 को लागू हुआ था। इसके अन्तर्गत विकलांग व्यक्तियों के लिए पुनर्वास सेवाओं के पंजीकरण, विनियमन और विकास के लिए जिम्मेदार है।

प्रश्न 10. विशिष्ट बालकों की शिक्षा के लिए चलाये जाते हैं-

(a) विशिष्ट कार्यक्रम

(b) संवर्धन कार्यक्रम

(c) उपचारी कार्यक्रम

(d) उपर्युक्त सभी

उत्तर: (b) विशिष्ट बालकों की शिक्षा के लिए संवर्धन कार्यक्रम के द्वारा चलाये जाते है।

प्रश्न 11. श्रवण बाधित बालकों में प्रायः सुनने की क्षमता होती है-

(a) 30-50 डेसिबल

(b) 50-60 डेसिबल

(c) 60 डेसिबल या अधिक

(d) 50 डेसिबल या अधिक

उत्तर: (a) श्रवण बाधित बालकों में प्रायः 30-50 डेसिबल सुनने की क्षमता होती है।

प्रश्न 12. विशिष्ट शिक्षा के अन्तर्गत कौन आता है?

(a) विकलांगता

(b) रोगग्रस्तता

(c) अक्षमता

(d) उपर्युक्त सभी

उत्तर: (d) विशिष्ट शिक्षा, विकलांग बच्चों की उनकी शैक्षिक आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए शिक्षा प्रदान करती है। इसके अन्तर्गत वे बच्चें आते है जो विकलांग, रोगग्रस्तता तथा अक्षमता आदि से ग्रसित होते है।

प्रश्न 13. सही दृष्टि कहलाती है-

(a) 6/6

(b) 6/9

(c) 6/12

(d) 6/18

उत्तर: (a) सही दृष्टि 6/6 को कहते है। सही दृष्टि एक ऐसी स्थिति है जिसमें आप वस्तुओं को स्पष्ट रूप से देख सकते है, चाहे वे दूर हो या पास।

प्रश्न 14. शैक्षिक समावेशन से तात्पर्य है-

(a) पिछड़े बच्चों को शिक्षा प्रदान करना

(b) विकलांग बच्चों को शिक्षा से जोड़ना

(c) सभी बच्चों को शिक्षा प्रक्रिया से जोड़ना

(d) बच्चों में शैक्षिक समझ बढ़ाना

उत्तर: (c) शैक्षिक समावेशन एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें सभी बच्चों को उनकी व्यक्तिगत आवश्यकताओं और क्षमताओं की परवाह किए बिना, एक ही शिक्षा प्रणाली में शिक्षा प्रदान की जाती है।

प्रश्न 15. भाटिया बैटरी में कुल कितने उपपरीक्षण है?

(a) 2

(b) 3

(c) 5

(d) 7

उत्तर: (c) भाटिया बैटरी में कुल 5 उपपरीक्षण है-

  • आकृति-पूर्ति
  • पैटर्न-ड्राइंग
  • ब्लाक-डिजाइन
  • वर्गीकरण
  • मात्रा-अनुमान
Section 2 अति लघु उत्तरीय प्रश्न

अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 16. शैक्षिक उपलब्धि का सूत्र बताइए।

उत्तर: शैक्षिक उपलब्धि = (शैक्षिक आयु / वास्तविक आयु) * 100

प्रश्न 17. मन्द बुद्धि बालकों को बुद्धिलब्धि कितनी होती है?

उत्तर: मंद बुद्धि बालकों की बुद्धिलब्धि (IQ) 70 से कम होती है। मंद बुद्धि बालकों की कुछ विशेषताएँ-

  • सीखने में कठिनाई।
  • ध्यान केन्द्रित करने में कठिनाई।
  • भाषा और संचार में कठिनाई।
  • सामाजिक और भावनात्मक विकास में देरी।
  • स्मृति और तर्क में कठिनाई।

प्रश्न 18. सृजनात्मकता के प्रमुख तत्व बताइए।

उत्तर: सृजनात्मकता के प्रमुख तत्व सृजनात्मकता को अक्सर कला और संगीत से जोड़ा जाता है, लेकिन यह विज्ञान, तकनीकी और व्यवसाय जैसे क्षेत्रों में भी महत्वपूर्ण है।

  • कल्पना
  • मौलिकता
  • लचीलापन
  • प्रेरणा
  • आत्मविश्वास
  • दृढ़ता
  • ज्ञान और कौशल
  • पर्यावरण

प्रश्न 19. परामर्श प्रक्रिया के प्रमुख अंग बताइए।

उत्तर: परामर्श प्रक्रिया के प्रमुख अंग निम्नलिखित है-

  • संबंध निर्माण- यह पहला और सबसे महत्वपूर्ण चरण है। परामर्शदाता और परामर्शदाता के बीच विश्वास और तालमेल का निर्माण होता है।
  • समस्या की पहचान परामर्शदाता की समस्याओं को समझने का प्रयास करता है।
  • लक्ष्य निर्धारण
  • योजना बनाना
  • कार्यान्वयन परामर्शदाता योजना को लागू करता है।
  • मूल्यांकन परामर्शदाता और परामर्शदाता मिलकर योजना की प्रगति का मूल्यांकन करते है।
  • समापन परामर्श प्रक्रिया समाप्त होती है।

प्रश्न 20. निर्देशन के दो उद्देश्य बताइए।

उत्तर: निर्देशन के दो उद्देश्य-

  • निर्देशन व्यक्ति को अपनी क्षमताओं, रूचियों, मूल्यों और लक्ष्यों को समझने में मदद करता है।
  • निर्देशन व्यक्ति को अपने निर्णयों पर विश्वास करने और चुनौतियों का सामना करने में मदद करता है।

प्रश्न 21. निर्देशन के दो उदाहरण बताइए।

उत्तर: निर्देशन के दो उदाहरण-

  • व्यक्तिगत निर्देशन यह व्यक्ति को अपनी व्यक्तिगत समस्याओं, जैसे कि रिश्तों, परिवार या स्वास्थ्य के बारे में सलाह प्रदान करता है।
  • सामाजिक निर्देशन- यह व्यक्ति को अपने परिवार, समुदाय और समाज में समायोजित होने में मदद करता है।

प्रश्न 22. An Enriched Curriculum for Rapid Learners पुस्तक के लेखक कौन है?

उत्तर: An Enriched Curriculum for Rapid Learners पुस्तक के लेखक जोसेफ रेनजुल्ली हैं।

प्रश्न 23. प्रतिभाशाली बालक की एक परिभाषा बताइए।

उत्तर: प्रतिभाशाली बालक की एक परिभाषा- जोसेफ रेनजुल्ली के अनुसार "प्रतिभाशाली बालक वे होते है जिनके पास उच्च क्षमता, उच्च स्तर की प्रेरणा और रचनात्मकता का मिश्रण होता है।

प्रश्न 24. पिछड़े बालकों की दो विशेषताएँ बताइए।

उत्तर: पिछड़े बालकों की दो विशेषताएँ -

  • सीखने की धीमी गति पिछड़े बालक सामान्य बच्चों की तुलना में धीमी गति से सीखते हैं। उन्हें नई अवधारणाओं को समझने और उनमें महारत हासिल करने में अधिक समय लगता है।
  • शैक्षिक उपलब्धि में कमी- पिछड़े बालक अपनी कक्षा के अन्य बच्चों की तुलना में कम शैक्षिक उपलब्धि प्राप्त करते है। वे परीक्षाओं में कम अंक प्राप्त करते है। और उन्हे स्कूल के काम को पूरा करने में कठिनाई होती है।

प्रश्न 25. मन्द बुद्धि बालकों के शिक्षक के दो गुण बताइए।

उत्तर: मन्द बुद्धि बालकों के शिक्षक के दो महत्वपूर्ण गुण-

  • धैर्य और समझदारी मन्द बुद्धि बालकों को शिक्षा देने के लिए धैर्य और समझदारी अत्यंत आवश्यक गुण है। शिक्षक को यह समझना होगा कि ये बच्चें सामान्य बच्चों की तुलना में धीमी गति से सीखते है। उन्हे बार-बार निर्देश देने और समझाने की आवश्यकता होती है।
  • सकारात्मकता और प्रोत्साहन देने वाला रवैया- मन्द बुद्धि बालकों को प्रोत्साहन और समारात्मकता की बहुत आवश्यकता होती है। शिक्षक को इन बच्चों की सफलता का जश्न मनाना चाहिए, चाहे वह कितनी भी छोटी क्यों न हो। उन्हें गलतियों से सीखने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए और उनकी क्षमताओं पर विश्वास रखना चाहिए।

प्रश्न 26. दो बुद्धि परीक्षणों के नाम बताइए।

उत्तर: दो बुद्धि परीक्षणों के नाम-

  1. व्यक्तिगत बुद्धि परीक्षण व्यक्तिगत बुद्धि परीक्षण एक समय में केवल एक ही व्यक्ति पर पशासित किया जा सकता है। इसमें नकल व धोखे की संभावना नही होती है। यह अनपढ़ तथा पढ़ी लिखि सभी के लिए उपयोगी है। इसके द्वारा बुद्धि की गुणात्मक व्याख्या की जा सकती है। यह परीक्षण निदान व उपचार की दृष्टि से उपयोगी है।
  2. सामूहकि बुद्धि परीक्षण-सामूहिक बुद्धि परीक्षण एक साथ अनेक लोगों की बुद्धि का मापन करने के लिए निर्मित किया जाता है। इसमें एक समान्य व्यक्ति ही इनका प्रशासन कर सकता है। इन परीक्षणों में समय, धन व श्रम की बचत होती है।

प्रश्न 27. परामर्शदाता के चार गुण बताइए।

उत्तर: परामर्शदाता के चार महत्वपूर्ण गुण-

  • सुनने की क्षमता - एक अच्छा परामर्शदाता एक अच्छा श्रोता होता है।
  • सहानुभूति - एक अच्छा परामर्शदाता सहानुभूति रखने वाला होता है।
  • योग्यता एक अच्छा परामर्शदाता योग्य होता है। उन्हें परामर्श और मनोविज्ञान में उचित प्रशिक्षण और अनुभव होता है।
  • आत्म-जागरूक - एक अच्छा परामर्शदाता आत्म-जागरूक होता है। वे अपनी भावनाओं और पूर्वाग्रहों को समझते है। ओर उन्हे व्यक्ति के साथ काम करने से रोकते हैं।

प्रश्न 28. Educational and Vocational Guidance का लेखक बताइए।

उत्तर: Educational and Vocational Guidance के लेखक एस. के. कोछर है।

प्रश्न 29. रेविन्स प्रोग्रेसिव मैट्रिक्स क्या है?

उत्तर: रेविन्स प्रोग्रेसिव मैट्रिक्स- यह एक गैर-मौलिक बुद्धि परीक्षण है जो अमूर्त तर्क और समस्या समाधान कौशल को मापता है। यह 1936 में डॉ. जॉन सी. रेवेन द्वारा विकसित किया गया था और तब से यह दुनिया में सबसे अधिक इस्तेमाल किये जाने वाले बुद्धि परीक्षणों में से एक बन गया है।

प्रश्न 30. बिने ने साइमन के सहयोग से सर्वप्रथम कब बुद्धि परीक्षण तैयार किया?

उत्तर: बिने ने साइमन के सहयोग से सर्वप्रथम 1905 में बुद्धि परीक्षण तैयार किया था। यह परीक्षण "बिने-साइमन बुद्धि परीक्षण" के नाम से जान जाता है। यह परीक्षण मानसिक आयु (Mental Age) की अवधारणा पर आधारित था, जिसके अनुसार किसी व्यक्ति की बुद्धि उसकी मानसिक आयु से मापी जाती है।

Section 3 लघु उत्तरीय प्रश्न

लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 31. पिछड़े बालकों को शिक्षा व्यवस्था पर प्रकाश डालिए।

उत्तर: पिछड़े बालकों को शिक्षा व्यवस्था- पिछड़े बालक वे होते हैं जो अपनी उम्र के औसत बालकों की तुलना में शैक्षिक रूप से, सामाजिक रूप से या भावनात्मक रूप से कम विकसित होते है। शिक्षा व्यवस्था- पिछड़े बालकों को शिक्षा देने के लिए विशेष शिक्षा व्यवस्था की आवश्यकता होती है। इस व्यवस्था में शामिल हैः

  • विशेष शिक्षक विशेष शिक्षक पिछड़े बालकों की विशेष आवश्यकताओं को समझते हैं और उन्हे शिक्षा देने के लिए विशेष तरीकों का उपयोग करते हैं
  • विशेष पाठ्यक्रम विशेष पाठ्यक्रम पिछड़े बालकों की आवश्यकतओं के अनुसार तैयार किया जाता है।
  • विशेष उपकरण विशेष उपकरण पिछड़े बालकों को शिक्षा में मदद करते है।

प्रश्न 32. समस्यात्मक बालकों के प्रकार उदाहरण सहित बताइए।

उत्तर: समस्यात्मक बालकों के प्रकार समस्यात्मक बालक वे होते है जो अपनी उम्र के औसत बालकों की तुलना में व्यवहार या भावनाओं में भिन्न होते है।

समस्यात्मक बालकों के उदाहरण कुछ इस प्रकार से है-

  • आक्रमक बालक - लड़ाई-झगड़ा करना, दूसरों को धमकाना, चीजे तोड़ना
  • अवज्ञाकारी बालक - नियमों का पालन नहीं करना, माता-पिता या शिक्षकों की बात न मानना, जिद्दी होना
  • अति सक्रिय बालक - एकाग्रता में कमी, बेचैनी, लगातार बात करना
  • अंतर्मुखी बालक - दूसरों से बातचीत करने में कठिनाई, अकेले रहना पसंद करना, भावनाओं को व्यक्त करने में कठिनाई

प्रश्न 33. अपराधी बालकों की उपचार विधियों पर प्रकाश डालिए।

उत्तर: अपराधी बालकों की उपचार विधियाँ - अपराधी बालकों को पुनर्वासित करने और उन्हे समाज का एक उत्पादक सदस्य बनाने के लिए कई उपचार विधियाँ उपलब्ध है। इनमें से कुछ प्रमुख विधियाँ निम्नलिखित है-

  1. अपराधी बच्चों को प्यार, समर्थन और समझ की आवश्यकता होती है।
  2. उनन्हें डांटना या सजा देना उनके व्यवहार को और खराब कर सकता है इसलिए उनका हमेशा समर्थन करना चाहिए।
  3. माता-पिता, शिक्षक और समुदाय सभी को मिलकर काम करना चाहिए ताकि बच्चों को उनकी समस्याओं का समाधान करने और उन्हें समाज का एक उत्पादक सदस्य बनाने में मदद मिल सके।

प्रश्न 34. निर्देशन तथा परामर्श में अन्तर बताइए।

उत्तर: निर्देशन और परामर्श के बीच में अन्तर कुछ इस प्रकार है-

  1. उद्देश्य - निर्देशन का उद्देश्य सूचना और ज्ञान प्रदान करना है, जबकि परामर्श का उद्देश्य व्यक्तिगत समस्याओं का समाधान करना है।
  2. प्रक्रिया - निर्देशन एक औपचारिक और व्यवस्थित प्रक्रिया है, जबकि परामर्श एक अनौपचारिक और लचीली प्रक्रिया है।
  3. समय - निर्देशन अल्पकालिक होता है, जबकि परामर्श दीर्घकालिक हो सकता है
  4. दृष्टिकोण - निर्देशन का दृष्टिकोण सामान्य होता है, जबकि परामर्श का दृष्टिकोण व्यक्तिगत होता है
  5. तकनीकी - निर्देशन में व्याख्यान, प्रदर्शन, सम्मेलन, आदि तकनीकों का उपयोग किया जाता है, जबकि परामर्श में साक्षात्कार, परीक्षण, परामर्श आदि तकनीकों का उपयोग किया जाता है।
  6. परिणाम - निर्देशन का परिणाम जानकारी और समझ में वृद्धि होता है, जबकि परामर्श का परिणाम समस्याओं का समाधान और बेहतर निर्णय लेने में सहायता होता है।

प्रश्न 35. विकलांग बालकों की पुनर्वास योजना तैयार कीजिए।

उत्तर: विकलांग बालकों की पुनर्वास योजना-

  1. उद्देश्य - विकलांग बालकों को उनके जीवन में पूर्ण और स्वतंत्र भागीदारी के लिए समझ बनाना।
  2. प्रारम्भिक हस्तक्षेप - विकलांगता का जल्द से जल्द पता लगाना और उपचार शुरू करना।
  3. शिक्षा - विकलांग बालकों को उनकी क्षमता के अनुसार शिक्षा प्रदान करना
  4. व्यावसायिक प्रशिक्षण - विकलांग बालकों को रोजगार के लिए आवश्यक कौशल प्रदान करना
  5. स्वास्थ्य देखभाल - विकलांग बालकों को उनकी विशेष स्वास्थ्य आवश्यकताओं के लिए देखभाल प्रदान करना।
  6. सामाजिक समावेशन - विकलांग बालकों को समाज में शामिल करने के लिए कार्यक्रमों का विकास करना।

प्रश्न 36. वाक् - दोष के प्रकार बताइए।

उत्तर: वाक्-दोष के प्रकार- वाक्-दोष, जिन्हे वाणी-विकार भी कहा जाता है, ध्वनि, उच्चारण, प्रवाह या भाषा के उपयोग में बाधाएँ है जो एक व्यक्ति की प्रभावी ढंग से संवाद करने की क्षमता को प्रभावित करते है।

  • नाक से हवा का कम निकलना।
  • जीभ, दांत या होंठो का अनुचित उपयोग।
  • शब्दों को गलत ढंग से बोलना।
  • शब्दों या वाक्यों को बोलने में अचानक रूकना
  • बार-बार शब्दों या वाक्यों को दोहराना।

प्रश्न 37. प्रतिभाशाली बालकों की विशेषताओं तथा शिक्षा-व्यवस्था को स्पष्ट कीजिए।

उत्तर: प्रतिभाशाली बालकों की विशेषताएँ -

  1. उच्च बौद्धिक क्षमता - प्रतिभाशाली बालकों में उच्च IQ (130 या उससे अधिक) होता है। वे जटिल अवधारणाओं को जल्दी समझते है और समस्याओं का समाधान ढूढ़ने में कुशल होते है।
  2. असामान्य जिज्ञास - प्रतिभाशाली बालकों में सीखने की अत्यधिक इच्छा होती है। वे लगातार प्रश्न पूछते है ओर नई चीजों को जानने में उत्सुक रहते हैं।

प्रतिभाशाली बालकों के लिए शिक्षा व्यवस्था-

  1. समृद्धि और चुनौतीपूर्ण पाठ्यक्रम - प्रतिभाशाली बालकों को उनके स्तर के अनुसार चुनौतीपूर्ण पाठ्यक्रम प्रदान किया जान चाहिए।
  2. सामाजिक और भावनात्क सहायता- प्रतिभाशाली बालकों को सामाजिक और भावनात्मक सहायता प्रदान की जानी चाहिए।
  3. विशिष्ट शिक्षण विधियाँ- प्रतिभाशाली बालको को अपनी गति से सीखने की अनुमति दी जानी चाहिए।

प्रश्न 38. श्रवण क्षतियुक्त बालकों के प्रकार बताइए। इन बालकों की पहचान कैसे करेंगे?

उत्तर: श्रवण क्षतियुक्त बालकों के प्रकार - श्रवण क्षतियुक्त बालकों को चार श्रेणियों में विभाजित किया जा सकता है-

  • हल्की श्रवण क्षति - 26-40 dB की श्रवण हानि वाले बालक को हल्की श्रवण क्षति होती है।
  • मध्यम श्रवण क्षति - 41-60 dB की श्रवण हानि वाले बालकों को मध्यम श्रवण क्षति होती है। उन्हें जोर से बोली जाने वाली आवाजें भी सुनाई नहीं देती है, लेकिन वे श्रवण यंत्र की सहायता से सुन सकते है।
  • गंभीर श्रवण क्षति - 61-80 dB की श्रवण हानि वाले बालकों को गंभीर श्रवण क्षति होती है। उन्हें श्रवण यंत्र की सहायता से भी नहीं सुनाई देती है।
  • बहरेपन - 81 dB या उससे अधिक श्रवण हानि वाले बालकों को बहरेपन की श्रेणी में रखा जाता है। उन्हें श्रवण यंत्र की सहायता से भी कोई आवाज सुनाई नही देती है।

प्रश्न 39. मन्द बुद्धि बालकों के प्रकार बताइए। इन बालकों की पहचान कैसे करेंगे?

उत्तर: मंद बुद्धि बालकों को चार प्रकारों में वर्गीकृत किया जा सकता है-

  • हल्की मंदबुद्धि - IQ 50-70 वाले बच्चों को हल्की मंदबुद्धि होती है। वे सामान्य बच्चों की तुलना में धीमी गति से सीखते है।
  • मध्यम मंदबुद्धि - IQ 35-50 वाले बच्चों को मध्यम मंदबुद्धि होती है। उन्हें स्कूल में विशेष शिक्षा की आवश्यकता होती है, और उन्हें स्वतंत्र रूप से रहने और काम करने में सहायता की आवश्यकता हो सकती है।
  • गम्भीर मंदबुद्धि - IQ 20-35 वाले बच्चों को गम्भीर मंदबुद्धि होती है। उन्हें दैनिक जीवन के कार्यों में महत्वपूर्ण सहायता की आवश्यकता होती है
  • गहन मंदबुद्धि - IQ 20 से कम वाले बच्चों को गहन मंदबुद्धि होती है। उन्हें दैनिक जीवन के कार्यों में व्यापक सहायता की आवश्यकता होती है

मंद बुद्धि बालकों की पहचान-

  • बच्चा देर से बैठना, चलना और बोलना सीखता है
  • बच्चा सीखने में कठिनाई महसूस करता है।
  • बच्चँ का ध्यान केन्द्रित करने में कठिनाई होती है।
  • बच्चा सामाजिक कौशल में देरी करता है।
  • बच्चँ का व्यवहार अनुचित या आक्रमक होता है।

प्रश्न 40. सृजनात्मक बालकों का अर्थ एवं विशेषताएँ बताइए।

उत्तर: सृजनात्मक बालकों का अर्थ- सृजनात्मक बालक वे होते हैं जो अपनी कल्पनाशीलता और अभिनव सोच का उपयोग करके नवीन विचारों और उत्पादों का निर्माण करते हैं। वे अपनी रचनात्मकता को विभिन्न माध्यमों से व्यक्त करते हैं, जैसे कि कला, संगीत, लेखन, खेल या समस्या समाधान ।

सृजनात्मक बालकों में निम्नलिखित विशेषताएँ पायी जाती है। जो इस प्रकार से है-

  • कल्पनाशीलता - सृजनात्मक बालकों में कल्पनाशीलता की प्रचुरता होती है। वे नई चीजों की कल्पना कर सकते हैं और उन विचारों को वास्तविकता में बदलने का प्रयास करते है।
  • जिज्ञासा - सृजनात्मक बालक अपने आसपास की दुनिया के बारे में जिज्ञासु होते हैं। वे दूसरों से अलग होने और अपनी रचनात्मकता को व्यक्त करने से नही डरते हैं।
  • स्वतंत्रता - सृजनात्मक बालक स्वतंत्र रूप से सोचने और काम करने में सक्षम होते हैं। वे नियमों का पालन करने के बजाए अपनी रचनात्मकता का उपयोग करके समस्याओं का समाधान ढूढ़ते है।
  • लचीलापन - सृजनात्मक बालक परिवर्तन के प्रति लचीले होते हैं। वे असफलता से नहीं डरते और अपनी गलतियों से सीखते हैं।
  • लगन - सृजनात्मक बालक अपनी रचनात्मक परियोजनाओं में बहुत रूचि रखते हैं। वे उन पर काम करने में बहुत समय और ऊर्जा लगाते है।

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