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PYQ 2017 • समावेशी शिक्षा

समावेशी शिक्षा Previous Year Paper 2017

UP DELED Semester 3 समावेशी शिक्षा Previous Year Question Paper 2017 with solution.

Section 1 वस्तुनिष्ठ प्रश्न

वस्तुनिष्ठ प्रश्न

प्रश्न 1. ब्रेल लिपि उपयोगी है -

(a) दृष्टिबाधितों के लिए

(b) श्रवणबाधितों के लिए

(c) अस्थि बाधितों के लिए

(d) उपर्युक्त में से कोई नहीं

उत्तर: (a) : ब्रेल लिपिः - ब्रेल लिपि दृष्टिबाधितों के लिए उपयोगी है इस पद्धति का आविष्कार 1821 में एक नेत्रहीन फ्रांसीसी लेखक लुई ब्रेल ने किया था। यह अलग-अलग अक्षरों, संख्याओं और विराम चिन्हों को दर्शाते हैं।

प्रश्न 2. पिछड़े बालकों की पहचान हेतु परीक्षण है -

(a) सामान्य बुद्धि परीक्षण

(b) मानवीकृत उपलब्धि परीक्षण

(c) नैदानिक परीक्षण

(d) उपर्युक्त सभी

उत्तर: (d) : पिछड़े बालको की पहचानः- पिछड़े बालको की पहचान हेतु निम्न परीक्षण है- सामान्य बुद्धि परीक्षण, मानवीकृत उपलब्धि परीक्षण, नैदानिक परीक्षण आदि।

प्रश्न 3. "वंचित होना निम्न स्तरीय जीवन दशा या अलगाव को घोषित करता है जो कि कुछ व्यक्तियों को उनके समाज की सास्कृतिक उपलब्धियों में भाग लेने से रोक देता है।" यह कथन है -

(a) गार्डन का

(b) वॉलमैन का

(c)盖 ब्राउन का

(d) क्रॉनवेल का

उत्तर: (b): वंचित होना निम्न स्तरीय जीवन दशा या अलगाव को घोषित करता है जो कि कुछ व्यक्तियों को उनके समाज की सांस्कृतिक उपलब्धियों में भाग लेने से रोक देता है। यह कथन वॉलमैन का है।

प्रश्न 4. वी.एन. दास के अनुसार वंचित बालकों का लक्षण नहीं है -

(a) उत्कृष्ट शैक्षिक उपलब्धि

(b) बौद्धिक विकास में क्रमिक ह्वास

(c) शैक्षिक उपलब्धि में क्रमिक ह्वास

(d) शैक्षिक जीवन का अपरिपक्व रूप से समापन

उत्तर: (d) : वी. एन. दास. के अनुसार वंचित बालको का लक्षण है। बौद्धिक विकास में क्रमिक हास, शैक्षिक उपलब्धि में क्रमिक हास, शैक्षिक जीवन का अपरिपक्व रूप में समापन है।

प्रश्न 5. बाल अपराधी बालकों के उपचार की विधि है -

(a) मनोविश्लेषणात्मक विधि

(b) मनोवैज्ञानिक विधि

(c) परिवीक्षण विधि

(d) उपर्युक्त सभी

उत्तर: (d): बाल अपराधी बालकों के उपचार की विधि- मनोविश्लेषणात्मक विधि, मनोवैज्ञानिक विधि, परिवीक्षण विधि, यथार्थ चिकित्सा व्यवहार चिकित्सा, क्रिया चिकित्सा आदि है।

प्रश्न 6. विशिष्ट वर्ग के बालक नहीं होते है -

(a) प्रतिभाशाली बालक

(b) पिछड़े बालक

(c) सामान्य बालक

(d) विकलांग बालक

उत्तर: (c) : सामान्य वर्ग के बालको को विशिष्ट वर्ग के बालको के अन्तर्गत नहीं रखा गया है विशिष्ट वर्ग के बालक होते है। प्रतिभाशाली बालक, पिछड़े बालक, विकलांग बालक इत्यादि।

प्रश्न 7. मनोविश्लेषण विधि के जनक थे -

(a) स्किनर

(b) पॉतलोव

(c) फ्रायड

(d) थार्नडाइक

उत्तर: (c) : मनोविश्लेषण विधि के जनक सिग्मंड फ्रायड को माना जाता है यह विधि मनोविश्लेषण सिद्धांतो पर आधारित उपचार का एक प्रकार है, यह चिकित्सा इस बात की जाँच करती है कि कैसे अचेतन मन विचारों और व्यवहार को प्रभावित करता है।

प्रश्न 8. प्रतिभाशाली बालकों हेतु शिक्षण विधि है -

(a) गतिवर्द्धन

(b) संपन्नीकरण या विशेष पाठ्यक्रम

(c) विशिष्ट कक्षाएँ

(d) उपर्युक्त सभी

उत्तर: (d): प्रतिभाशाली बालको हेतु निम्न शिक्षण विधिया है- गतिवर्द्धन, संपन्नीकरण या विशेष पाठ्यक्रम, विशिष्ट कक्षाएँ।

प्रश्न 9. टरमन के अनुसार सामान्य बुद्धि बालकों की बुद्धिलब्धि होती है -

(a) 140 से अधिक

(b) 120 से 140

(c) 110 से 120

(d) 90 से 110

उत्तर: (c): टरमन के अनुसार सामान्य बुद्धि बालको की बुद्धिलब्धि 110 से 120 के मध्य होती है।

प्रश्न 10. सी.ए.टी. परीक्षण है -

(a) बच्चों के लिए

(b) बालिकाओं के लिए

(c) वयस्कों के लिए

(d) पशुओं के लिए

उत्तर: (a): सी. ए. टी. परीक्षण बच्चों के लिए किया जाता है इस परीक्षण में 3-10 वर्ष की उम्र के बच्चों का परीक्षण किया जाता है। यह परीक्षण लियोपोल्ड बैलक द्वारा किया गया है।

प्रश्न 11. मनोविज्ञानशाला, उ.प्र. स्थित है -

(a) कानपुर में

(b) बरेली में

(c) प्रयागराज (इलाहाबाद) में

(d) मेरठ में

उत्तर: (c) : मनोविज्ञानशाला उत्तर प्रदेश के प्रयागराज (इलाहाबाद) जिले में स्थित है इसकी स्थापना आचार्य नरेन्द्र देव समिति द्वारा किया गया था।

प्रश्न 12. "व्यक्ति का बुद्धितापूर्ण चयन एवं सामंजस्य के लिए दी जाने वाली सहायता निर्देशन है।" यह कथन है -

(a) सी.वी.गुड का

(b) आर्थर जे. जोन्स का

(c) मैथ्यूसन का

(d) जे. एस. ब्रिवर का

उत्तर: (a): व्यक्ति का बुद्धितापूर्ण चयन एवं सामंजस्य के लिए दी जाने वाली सहायता निर्देशन है यह कथन आर्थर जे. जोन्स का है।

प्रश्न 13. निर्देशन का प्रकार नहीं है -

(a) शैक्षिक निर्देशन

(b) लिखित निर्देशन

(c) व्यक्तिगत निर्देशन

(d) व्यावसायिक निर्देशन

उत्तर: (b) : निर्देशन का प्रकार लिखित निर्देशन नही है, जबकि शैक्षिक निर्देशन, व्यक्तिगत निर्देशन, व्यावसायिक निर्देशन आदि निर्देशन के प्रकार है।

प्रश्न 14. निर्देशन तथा परामर्श देने का कार्य प्रारम्भ होना चाहिए -

(a) प्राथमिक स्तर पर

(b) उच्च प्राथमिक स्तर पर

(c) माध्यमिक स्तर पर

(d) विश्वविद्यालय स्तर पर

उत्तर: (a): निर्देशन तथा परामर्श देने का कार्य उच्च प्राथमिक स्तर पर प्रारम्भ होना चाहिए।

प्रश्न 15. परामर्श से सम्बन्धित उपकरण है -

(a) संचित अभिलेख

(b) साक्षात्कार

(c) आत्मकथाएँ एवं निरीक्षण

(d) उपर्युक्त सभी

उत्तर: (d): परामर्श से सम्बंधित निम्न उपकरण है संचित अभिलेख साक्षात्कार, आत्मकथाएँ एवं निरीक्षण, नैदानिक मूल्यांकन अवलोकन उपकरण आदि।

Section 2 अतिलघु उत्तरीय प्रश्न

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 16. समावेशी शिक्षा से आप क्या समझते है?

उत्तर: समावेशी शिक्षा :- समावेशी शिक्षा से आशय उस शिक्षा प्रणाली से है जिसमें एक सामान्य छात्र एक दिव्यांग छात्र के साथ विद्यालय में अधिकतर समय बिताता है। दूसरे शब्दों में, समावेशी शिक्षा विशिष्ट आवश्यकता वाले बालकों को सामान्य बालको से अलग शिक्षा देने की विधि है। शिक्षा का समावेशीकरण यह बताता है कि विशेष शैक्षणिक आवश्यकताओं की पर्ति के लिए एक सामान्य छात्र और एक दिव्यांग छात्र को समान शिक्षा प्राप्ति के अवसर मिलने चाहिए।

प्रश्न 17. अपवंचित बालकों से क्या अभिप्राय है?

उत्तर: अपवंचित बालक :- अपवंचित बालक वे है जो सुविधाओं के क्षेत्र में सामान्य बालकों से कम होते हैं। ये विभिन्न प्रकार की सुविधाओं जैसे आर्थिक, सामाजिक तथा सांस्कृतिक आदि से वंचित रह जाते है। इन सुविधाओं के अभाव में उनका विकास सामान्य बालकों की तरह नही हो पाता, उसमे गतिरोध आ जाता है। फलतः क्षमतावान होने पर भी वे वातावरणात्मक सुविधाओं के अभाव में विकास नहीं कर पाते अपवंचित बालक कहलाते है।

प्रश्न 18. प्रतिभाशाली बालकों की बुद्धिलब्धि कितनी होती है?

उत्तर: प्रतिभाशाली बालक प्रतिभाशाली बालक वे होते है जिसकी मानसिक आयु अपनी आयुवर्ग के अनुपात में औसत से बहुत अधिक हो, उसे प्रतिभावान या प्रतिभाशाली बालक कहा जाता है। संगीत, कला या किसी अन्य क्षेत्र में अत्यधिक योग्यता रखने वाला बालक भी प्रतिभाशाली बालकों की श्रेणी में आते है प्रतिभाशाली बालको की बृद्धिलब्धि 140 होती है।

प्रश्न 19. दृष्टिबाधित बालकों की शिक्षा किस प्रकार की होनी चाहिए?

उत्तर: दृष्टिबाधित बालकों की शिक्षा ऐसे बालक जो जन्म से या बाल्यावस्था में पूर्णतः अंधे हो जाते है दृष्टिबाधित बालक कहलाते है दृष्टिबाधित बालकों की शिक्षा इस प्रकार होनी चाहिए जिससे ये बालक दृष्टिबाधित होते हुए भी समाज में सामंजस्य स्थापित कर सकें दृष्टिबाधित बालको को वर्तमान तकनीक के अनुसार शिक्षा दिया जा सकता है जैसे पाठ्यपुस्तक की ऑडियों सीडी, रेडियों, वाणी संश्लेषक आदि की सहायता से शिक्षण प्रदान करें। उन्हें पढ़ने- लिखने के लिए ब्रेल प्रणाली उपयोगी है।

प्रश्न 20. बुद्धिलब्धि किसे कहते है? सोदाहरण स्पष्ट कीजिए।

उत्तर: बुद्धिलब्धि : कोल एवं ब्रूस के अनुसार बुद्धिलब्धि यह बताती है कि बालक की मानसिक योग्यता में किस गति से विकास हो रहा है।

बुद्धिलब्धि = (मानसिक आयु / वास्तविक आयु) * 100

जैसे किसी बालक की मानसिक आयु 10 वर्ष और वास्तविक आयु 8 वर्ष है तो उसकी बुद्धिलब्धि 125 होगी।

प्रश्न 21. विशिष्ट बालकों की दो विशेषताएँ लिखिए।

उत्तर: विशिष्ट बालकों की दो विशेषताएँ:- विशिष्ट बालक वे बालक होते है जो अपने आप में अदभुत और विशेष है वे अपने जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में बाकी बच्चों से अलग होते है। उनकी प्रतिभा, ज्ञान, कला के क्षेत्र या किसी अन्य क्षेत्र में होती है। विशिष्ट बालकों की निम्न विशेषताएँ है।

  1. सामान्य स्तर के बालकों के साथ समायोजन नही कर पाते है।
  2. विशिष्ट बालकों में विचलन की समस्या होती है।

प्रश्न 22. सृजनात्मक बालकों की पहचान हेतु किये जाने वाले किन्हीं दो परीक्षणों का उल्लेख कीजिए।

उत्तर: सृजनात्मक बालकों की पहचान हेतु परीक्षण :-

सृजनात्मक बालक :- सृजनात्मक बालक वे है जो कई क्षेत्रों में उच्च प्रदर्शन क्षमता दिखाते है जैसे कि कलात्मक और रचनात्मक कार्य, नेतृत्व की गुणवत्ता अवलोकन की उत्सुकता आदि।

सृजनात्मक बालक हेतु परीक्षण: सृजनात्मक बालकों हेतु निम्न उपागमों से की जा सकती है-

  • विशेषताओं द्वारा पहचान एवं मापन।
  • सृजनात्मक क्रिया द्वारा पहचान एवं मापन।
  • सृजनात्मक परीक्षणों द्वारा पहचान एवं मापन।

प्रश्न 23. शैक्षिक पिछड़ेपन के दो प्रमुख कारण लिखिए।

उत्तर: शैक्षिक पिछड़ेपन के दो प्रमुख कारणः- शैक्षिक पिछड़ेपन के दो प्रमुख कारण है-

  1. समुदाय की सांस्कृतिक और सामाजिक आर्थिक संरचना
  2. निम्न सामान्य बुद्धि

प्रश्न 24. समस्यात्मक बालक किसे कहते है?

उत्तर: समस्यात्मक बालक वे बालक जो कुछ असामाजिक या अनैतिक कार्य करने लगते है और बार-बार समझाने या मना करने पर भी अपने व्यवहार पर नियंत्रण नही कर पाते है, समस्यात्मक बालक कहलाते है।

वेलेण्टाइन के अनुसार :- समस्यात्मक बालक शब्द सामान्य रूप से ऐसे बच्चो का वर्णन करने के लिए प्रयोग किया जाता है, जिनका व्यवहार अथवा व्यक्तितत्व किसी बात में गंभीर रूप से असामान्य होता है।

प्रश्न 25. बाल अपराध रोकने हेतु दो प्रमुख उपाय लिखिए।

उत्तर: बाल अपराध रोकने हेतु दो प्रमुख उपायः -

बाल अपराधः जब किसी बच्चें द्वारा कोई कानून-विरोधी या समाज विरोधी कार्य किया जाता है तो उसे किशोर अपराध या बाल अपराध कहते है।

बाल अपराध रोकने हेतु उपायः

  1. बाल अपराध को प्रारम्भिक अवस्था में रोका जा सकता है यदि घर पर तथा विद्यालयों में उचित देख-रेख की जाए।
  2. बालक को आवश्यक सुविधाएँ उपलब्ध कराना।

प्रश्न 26. निर्देशन का अर्थ स्पष्ट करते हुए परिभाषित कीजिए।

उत्तर: निर्देशन: निर्देशन व्यक्ति को आत्म दर्शन करने और आत्म शक्ति का समुचित उपयोग करने में मदद करता है। निर्देशन का अर्थ निर्देश देने तथा व्यक्तियों के कार्य में मार्गदर्शन करने से है।

परिभाषा :- किसी संगठन में संगठनात्मक लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए लोगों को निर्देश देने, मार्गदर्शन करने परामर्श देने प्रेरित करने और नेतृत्व करने की प्रक्रिया को निर्देशन के रूप में जाना जाता है।

प्रश्न 27. समावेशी शिक्षा, सामान्य शिक्षा से किस प्रकार भिन्न है?

उत्तर: समावेशी शिक्षा, सामान्य शिक्षा से भिन्न :- समावेशी शिक्षा के अन्तर्गत शारीरिक रूप से बाधित बालक तथा सामान्य बालक साथ-साथ सामान्य कक्षा में शिक्षा ग्रहण करते हैं। लेकिन यह शिक्षा सामान्य बालकों को शिक्षण नहीं देती। समावेशी शिक्षा सामान्य बालकों की शिक्षा से सर्वथा अलग है। इस शिक्षा में ऐसे घटकों को शामिल किया जाता है जो सामान्य बालकों के कार्यक्रमों के साथ-साथ विशिष्ट भी होते है।

प्रश्न 28. निर्देशन के दो प्रमुख उद्देश्य लिखिए।

उत्तर: निर्देशन के दो प्रमुख उद्देश्य :- निर्देशन के दो प्रमुख उद्देश्य निम्न है।

  1. छात्रों को अपनी योग्यताओं, क्षमताओं, और रूचियों का बोध कराना
  2. छात्रों के क्षमताओं, योग्यताओं और रूचियों का विकास करना

प्रश्न 29. परामर्श का अर्थ स्पष्ट कीजिए।

उत्तर: परामर्श का अर्थ किसी व्यक्ति की व्यक्तिगत समस्याओं एवं कठिनाइयों को दूर करने के लिए दी जाने वाली सहायता, सलाह और मार्गदर्शन, परामर्श कहलाता है।

डॉ जुयाल - परामर्श एक प्रकार की राय देना है जहाँ व्यक्ति स्वयं निर्णय लेने में सक्षम नहीं होता।

प्रश्न 30. निर्देशन व परामर्श में दो प्रमुख अन्तर लिखिए।

उत्तर: निर्देशन व परामर्श में दो प्रमुख अन्तर निर्देशन व परामर्श में दो प्रमुख अन्तर निम्न है-

  • निर्देशन व्यक्ति को अपने आप को समझने, अपनी क्षमताओं का उपयोग करने अपनी समस्या के संबंध में स्वंय निर्णय करने तथा स्वतंत्र रूप से लाभकारी जीवन बिताने में सहायता करता है। परामर्श का उद्देश्य न केवल सलाह देना है बल्कि व्यावहारकि रूप से सहायता करना है। ताकि व्यक्ति अपने जीवन में समायोजित हो सके।
  • निर्देशन सामूहिक एवं व्यक्तिगत दोनों प्रकार का हो सकता है, जबकि परामर्श एक समय में एक ही व्यक्ति के लिये उपलब्ध होता है।
Section 3 लघु उत्तरीय प्रश्न

लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 31. विद्यालय में समावेशी शिक्षा प्रदान किए जाने में अध्यापक की क्या भूमिका है?

उत्तर: विद्यालय में समावेशी शिक्षा एक समावेशी कक्षा में शिक्षक की सबसे महत्वपूर्ण भूमिका यह सुनिश्चित करना है कि प्रत्येक बच्चे को अपनी क्षमता का एहसास करने का अवसर मिले क्योंकि एक समावेशी कक्षा समावेशी शिक्षा का एक हिस्सा है जो-

  • उनके मतभेदों और अक्षमताओं की परवाह किए बिना शिक्षा प्रणाली में सभी बच्चों को शामिल किया गया है।
  • सभी बच्चों को उनकी शारीरिक, बौद्धिक, सामाजिक, भावनात्मक, भाषायी या अन्य स्थितियों की परवाह किए बिना समायोजित करता है।
  • विविधता को महत्व देता है, प्रत्येक बच्चा कक्षा में आता है और सभी को सीखने और बढ़ने के समान अवसर प्रदान करता है।

प्रश्न 32. प्रतिभाशाली बालकों की शिक्षा व्यवस्था किस प्रकार की होनी चाहिए?

उत्तर: प्रतिभाशाली बालकों की शिक्षा व्यवस्था :- प्रतिभाशाली बालकों की शिक्षा एक आसान कार्य नही है क्योंकि यह संख्या में कम होते है और समूह विजातीय होता है अतः पूरे समूह पर किसी एक प्रणाली को लागू करना कठिन कार्य है प्रतिभाशाली बालकों के शिक्षण के प्रमुख निम्न उपागम है-

  • पाठ्यक्रम की समृद्धि
  • सामान्य कक्षाओं में समृद्धि
  • विशिष्ट कक्षाये
  • सर्वागीण विकास पर बल।

पाठ्यक्रम की समृद्धि प्रतिभावान बालक पाठ्यक्रम को समझने में सामान्य बालकों से कम समय लेते हैं। यह बचा हुआ समय उन्हे किसी और कार्य में व्यस्त करके उपयोग किया जाता है।

समृद्धिकरण- नियमित कक्षाओं में दिये जाने वाले पाठ्यक्रम में शैक्षिक अनुभव अधिक देकर उसे समृद्ध बनाया जाना।

विशिष्ट कक्षाएँ- सामानरू विद्यालयों में ही विशेषा कक्षाएँ आयोजित कर विशेष रूप से नियोजित पाठ्यक्रमों को प्रस्तुत किया जाता है।

सर्वागीण विकास पर बल प्रतिभावान बालकों की शिक्षा उसके व्यक्तित्व के सभी पक्षों के विकास पर केंद्रित होनी चाहिए न कि उसे किताबी कीड़ा बनाने के लिए, प्रतिभावान बालकों के सर्वांगीण विकास के लिए अध्यापक को अत्यधिक परिश्रम की आवश्यकता पड़ती है अतः इस कार्य के लिए उसे कक्षा और स्कूल में अत्यधिक सक्रिय रहना चाहिए।

प्रश्न 33. शैक्षिक रूप से पिछड़े बालकों हेतु उपचारात्मक कार्यक्रमों का उल्लेख कीजिए।

उत्तर: शैक्षिक रूप से पिछड़े बालकों हेतु उपचारात्मक कार्यक्रम शैक्षिक रूप से पिछड़े बालकों के पिछड़ेपन के कारणों का सम्बन्ध उनके परिवार, विद्यालय तथा समाज व उनके अपने शारीरिक, मानसिक एवं संवेगात्मक विकास के स्वरूप से होता है। शैक्षिक रूप से पिछड़े बालकों के पिछड़ेपन का निदान होने के बाद उन्हें सामान्य स्तर पर लाने के लिए उपचार व शिक्षा कि सम्बन्ध में कार्यक्रम निम्न है-

  • विज्ञान प्रदर्शनी का आयोजन- शैक्षिक रूप से पिछड़े बालको हेतु विज्ञान प्रदर्शनी का आयोजन किया जान चाहिए। ऐसा करने से बालकों में तार्किक सोच विकसित होगी तथा उनमें वैज्ञानिकता का विकास होगा।
  • पाठ्य सहगामी क्रियाएँ- शैक्षिक रूप से पिछड़े बालकों के लिए पाठ्य सहगामी क्रियाएँ जैसे-खेल-खेल के माध्यम से पहाड़ों, गिनती को याद कराना, वर्णमाला को याद कराना आदि।
  • विशेष पाठ्यक्रम की व्यवस्था- पिछड़े बालकों का मन पढ़ने मे लगे व उसमें सफलता मिले इसके लिए आवश्यक है कि विशेष पाठ्यक्रम की व्यवस्था की जाए।
  • विशेष शिक्षण विधियों का प्रयोग- पिछड़े हुए बालको के लिए शिक्षण को संभव बनाने के लिए आवश्यकता इस बात की है कि उनके शिक्षण में उनकी ग्रहण-क्षमता रूचि और बौद्धिक स्तर के अनुकूल शिक्षण विधियों का प्रयोग किया जाए।
  • विशिष्ट विद्यालयों की स्थापना- पिछड़े बालकों की अध्ययन को सफल बनाने के लिए विशिष्ट विद्यालयों की स्थापना करना आवश्यक है जिसमें एक ही समान बालकों की शिक्षा संभव हो सके।

प्रश्न 34. बाल अपराध के प्रमुख कारण लिखिए।

उत्तर: बाल अपराध बाल अपराध से तात्पर्य ऐसे अपराध से है जो बच्चों के साथ होते हैं और भविष्य के साथ-साथ वर्तमान को प्रभावित करते है, जिस कारण बच्चों को शारीरिक अथवा मानसिक रूप से क्षति पहुँचती है।

बाल अपराध के प्रमुख कारण-

(i) सामाजिक आर्थिक कारण-

  • गरीबी, बेरोजगारी, और सामाजिक असमानता
  • अशिक्षा और जागरूकता की कमी
  • परिवार में अंशांति, हिंसा और दुर्व्यवहार
  • बाल श्रम और बाल तस्करी
  • सामाजिक कुरीतियों जैसे जातिवाद, लिंगभेद, और धार्मिक कट्टरता।
  • बच्चों का अनाथ होना

(ii) मनोवैज्ञानिक कारण-

  • मानसिक स्वास्थ्य समस्याएँ जैसे चिंता, अवसाद और आत्मघाती विकार
  • मीडिया और इंटरनेट का नकारात्मक प्रभाव

(iii) सिनेमा, दूरदर्शन एवं इन्टरनेट- सिनेमा, दूरदर्शन एवं इन्टरनेट भी बाल अपराधों के लिए उत्तरदायी हैं। सिनेमा हाल एवं दूरदर्शन पर कई बार अश्लील चित्र एवं फिल्में दिखाई जाती हैं जिनसे निर्दोष बच्चें भी दोषी बन जाते हैं, ऐसी फिल्में एवं चित्रों का बच्चों के चरित्र पर कुप्रभाव पड़ता है तथा वे अपराधी बन जाते है।

प्रश्न 35. निर्देशन के प्रमुख प्रकारों का वर्णन कीजिए।

उत्तर: निर्देशन के प्रमुख प्रकारः- निर्देशन के निम्नलिखित प्रकार है।

  • व्यक्तिगत निर्देशन
  • शैक्षिक निर्देशन
  • स्वास्थ्य निर्देशन
  • सामाजिक निर्देशन
  • व्यावसायिक निर्देशन

(i) व्यक्तिगत निर्देशनः- यह निर्देशन व्यक्तिगत कठिनाइयों से सम्बंधित होता है।

  1. छात्रों को अलग-अलग निर्देश देना।
  2. छात्रों के संतुलित विकास में सहायता देना।

(ii) शैक्षिक निर्देशनः जोन्स ने शैक्षिक निर्देशन की परिभाषा इस प्रकार दी है- शैक्षिक निर्देशन का अर्थ उस व्यक्तिगत सहायता से है, जो छात्रो को इस कारण प्रदान की जाती है कि वे अपने लिये उपर्युक्त विद्यालय पाठ्यक्रम का चयन कर सकें।

(iii) स्वास्थ्य निर्देशनः-

  1. छात्रों को स्वस्थ जीवन के महत्व के विषय में बताना।
  2. छात्रों को उत्तम स्वस्थ आदतों के विषय में बताना।

(iv) सामाजिक निर्देशनः

  1. छात्रों को सामाजिक समायोजन के विषय में आवश्यक परामर्श देना
  2. छात्रों को विद्यालय के सामाजिक जीवन का ज्ञान कराना।

(v) व्यावसायिक निर्देशनः

  1. छात्रों को विभिन्न व्यवसायों के विषय में जानकारी कराना।
  2. विभिन्न व्यवसायों के गुण एवं दोषों की सूचना प्रदान कराना।

प्रश्न 36. बालकों को उचित निर्देशन देने में शिक्षक की भूमिका का उल्लेख कीजिए।

उत्तर: बालकों को उचित निर्देशन देने में शिक्षक की भूमिकाः बालकों को उचित निर्देशन देने में शिक्षक की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। शिक्षक अपने छात्रों का अध्ययन विशेष परिस्थितियों में करता है, क्योंकि वह उनके सबसे निकट सम्पर्क में रहता है। शिक्षक ही छात्रों की आवश्यकताओं के सम्बंध में सर्वाधिक जानकारी रखता है।

  • छात्रों के साथ सम्बंध स्थापित करके बाधित बालकों का पता लगाना।
  • छात्रों के अभिभावकों से सम्पर्क स्थापित करना।
  • पाठ्य सहगामी क्रियाओं का आयोजन करना।

प्रश्न 37. परामर्शदाता किसे कहते है? परामर्शदाता में कौन-कौन से गुण होने चाहिए।

उत्तर: परामर्शदाताः परामर्शदाता वह व्यक्ति होता है। जो किसी क्षेत्र विशेष में विशेषज्ञता रखता है और दूसरों की तत्सम्बंधी समस्याओं के लिये समाधान सुझाता है।

परामर्शदाता के गुणः-

  • परामर्शदाता क्षेत्र विशेष का विशेषज्ञ हो
  • उनकी समस्याओं को समझकर उन्हें इनसे मुक्ति दिलाने में मदद करनी चाहिए।
  • ऐसे उपाय बताने चाहिए जिनसे उनकी शैक्षणिक उपलब्धि में वृद्धि हो।
  • परामर्शदाता को उन्हे उपर्युक्त रूप से समझाना चाहिए कि वे क्या है उनकी योग्यताएँ तथा क्षमताएँ क्या है।
  • उनके व्यवहार में क्या वास्तव में कुछ कमियाँ है, इसका सही आभास उन्हें कराना चाहिए।

प्रश्न 38. उच्च प्राथमिक स्तर पर निर्देशन तथा परामर्श की क्या आवश्यकता है?

उत्तर: उच्च प्राथमिक स्तर पर शैक्षिक निर्देश की आवश्यकताः बालक प्राथमिक स्तर से निकलकर माध्यमिक सतर में प्रवेश करता है, तब उसका शिक्षा के साथ सम्बन्धों का स्वरूप कुछ नया ही होता है। इस स्तर पर बालक की मित्रता तथा सम्बन्ध बढ़ने शुरु हों जाते है। बालक के सोचने विचारने का तरीका भी बदल जाता है तथा नये क्षेत्रों के साथ सम्बन्ध स्थापित होते हैं। इस स्तर पर स्कूल तथा शिक्षकों के प्रति दृष्टिकोण बन चुकें होते है या बनने लगते है। कुछ रूचिया परिपक्व हो चुकी होती है तथा कुछ लगाव तथा अलगाव भी विकसित हो जाते हैं। इन सभी प्रकार के विकासों के परिणाम स्वरूप बालक का वातावरण के साथ विशेष सम्बन्ध स्थापित हो जाता हैं। यदि हम प्राथमिक स्तर पर शैक्षिक निर्देशन ढंग से प्रदान नहीं करेगें तो माध्यमिक स्तर पर शैक्षिक निर्देशन का कार्य बहुत ही कठिन तथा जटिल हो जायेगा।

उच्च प्राथमिक स्तर परामर्श की आवश्यकताः-

  • विषयों के चयन के लिएः आमतौर माध्यमिक स्तर से ही, उच्च माध्यमिक कक्षाओं में उचित परामर्श व्यवस्था होनी चाहिए ताकि छात्र कला, विज्ञान एवं वाणिज्य, कृषि आदि के विकल्पों में से अपनी परिस्थितियों और क्षमता के अनुसार सही क्षेत्र का चुनाव कर सकें।
  • स्कूल की गतिविधियों और स्कूल जीवन से परिचित होने के लिए :- शुरुआत में जब छात्र नये स्कूल में एडमिशन लेते है तो एडमिशन संम्बन्धी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है, साथ ही नये दोस्तों और टीचर्स के बीच एडजस्टमेन्ट की जरुरत होती है। स्कूल के माहौल, नये पाठ्यक्रम इन सभी के लिए परामर्श की आवश्यकता होती है।
  • सामाजिक कौशल को विकसित करने में बच्चों को सामाजिक कौशल और सामाजिक गुणों को विकसित करने में परामर्श की आवश्यकता होती है। ताकि जब बच्चा शिक्षा पूरी होने के बाद वास्तविक जीवन में प्रवेश करें, तो वह समाज के साथ समायोजित कर सके और सफल सामाजिक जीवन जी सकें
  • अच्छे चरित्र के निर्माण करने में पढ़ाने के साथ-साथ शिक्षक की जिम्मेदारी हैं कि वह छात्रों के चरित्र का निर्माण करे, अच्छे नैतिक मूल्यों और आदर्शों का विकास करे ताकि उनमें वे अच्छे एवं बुरे के अन्तर को समझ सके और खुद को सही दिशा में विकसित कर सकें।

प्रश्न 39. निर्देशन तथा परामर्श की विधियों का उल्लेख कीजिए।

उत्तर: निर्देशन तथा परामर्श की विधियाँ :-

"निर्देशन" वह प्रक्रिया हैं जिसमें व्यक्ति को उसकी समस्याओं के समाधान के लिए विशेष प्रकार की आवश्यकता प्रदान की जाती है। निर्देशन वह विधिया बताता है जिनका प्रयोग करके व्यक्ति समायोजन की समस्याओं को स्वयं सुलझा सकता हैं। निर्देशन की विधियाँ निम्न है-

  • प्रार्थी के लिए कौन-सी व्यावसायिक सूचना सामग्री उपर्युक्त है। इसका निश्चय करना।
  • व्यावसायिक सूचना प्रदान करने की सामूहिक विधियाँ- वैयक्तिक सम्पर्क की जटिलता को ध्यान में रखते हुए सूचनाएँ प्रस्तुत करने की सामूहिक विधियाँ विकसित की गयी है, जिनमें निम्न है-
  1. सिनेमा या चित्रों के माध्यम से व्यावसायिक सूचनाएँ प्रदान करना।
  2. विभिन्न व्यावसायिक सूचनाओं को पाठ्यक्रम में स्थान देना।
  3. रेडियों और टेलीविजन के माध्यम से व्यावसायिक सूचनाये प्रदान करना।
  4. व्यावसायिक सूचना सम्मेलनों का आयोजन करना।
  5. कक्षा एवं विद्यालय में व्यावसायिक सूचना सम्बन्धित चार्ट, आकड़ों, ग्राफिक विश्लेषण तथा पैम्पलेटों का प्रदर्शन करना।

परामर्श की विधियाँ :-

  • मौन धारण:- इस विधि में परामर्शदाता मौन धारण करके परामर्श प्रार्थी की बाते सुनता जाता है। प्रार्थी अपनी समस्या का वर्णन करता जाता है। प्रार्थी के वर्णन से परामर्श दाता उसकी समस्या को अधिक समझने की चेष्ठा करता हैं। मौन धारण इस बात की ओर संकेत करता है कि परामर्शदाता व्यक्ति की समस्या को समझ रहा है, और उस पर विचार कर रहा हैं।
  • स्वीकृति (Acceptance) :- जब परामर्श प्रार्थी अपनी समस्या का वर्णन करता है, तो परामर्शदाता बीच-बीच में इस प्रकार के शब्द बोलता जाता है। जिससे प्रार्थी यह समझता है कि वह जो कुछ कह रहा उससे परामर्शदाता सहमत है। परामर्शदाता ठीक है, अच्छा है, आदि शब्दों का प्रयोग करता है।
  • पुनरावृत्ति (Restatement) :- पुनरावृत्ति के द्वारा परामर्शदाता उसी बात को जैसे का तैसा दुहरा देता है जिसे की प्रार्थी ने वर्णित किया है। इस प्रकार स्वीकृति और पुनरावृत्ति से परामर्श प्रार्थी को यह ज्ञान हो जाता है, कि परामर्शदाता उसकी बात को ठीक तरह से समझ रहा है।
  • स्पष्टीकरण : कभी-कभी यह आवश्यक होता है कि परामर्शदाता, परामर्श प्रार्थी के वर्णन का स्पष्टीकरण भी करें।
  • मान्यता (Approval): जब परामर्श प्रार्थी अपनी समस्या का वर्णन करता है। तो यह आवश्यक नहीं है कि उसकी सभी बातों को परामर्शदाता मान्यता दे दें। परन्तु जिनकों वह मान्यता प्रदान करता हैं, वे विचार प्रार्थी को अधिक प्रभावित करते है।
  • विश्लेषण :- प्रार्थी की समस्या को सुनकर परामर्शदाता उसका विश्लेषण करके उसे समस्या के समाधान के लिए परामर्श दे सकता है। उसका कार्य केवल समाधान प्रस्तुत करना होता है। शेष वह प्रार्थी पर छोड़ देता है। यह प्रार्थी की इच्छा पर निर्भर है कि वह समाधान को जैसा का वैसा स्वीकार कर ले या उसमें संशोधन करके स्वीकार करें

प्रश्न 40. बालकों के सीखने में निर्देशन तथा परामर्श के महत्व को समझाइए।

उत्तर: बालकों के सीखने में निर्देशन तथा परामर्श के महत्वः -

बालको के सीखने में निर्देशन का महत्व निम्न हैं-

  1. पैठ्यक्रम को संगठित करने में सहायक है।
  2. विभिन्न शिक्षण विधियों के चुनाव में आवश्यक हैं।
  3. विद्यालय की व्यवस्था में मदद मिलती हैं।
  4. पाठ्य विषयों के चयन में सहायता मिलती है।
  5. शैक्षिक मार्गदर्शन तथा शैक्षिक निर्देशन द्वारा वैयक्तिक भेदों की जानकारी के आधार पर शिक्षा की व्यवस्था की जाती हैं।

बालकों के सीखने में परामर्श का महत्व :-

  1. बालकों को अपने सम्बन्ध में अपनी क्षमताओं तथा योग्यताओं की जानकारी मिल जाती है।
  2. समस्या के समाधान के लिए स्वनिर्णय लेने में सक्षम हो जाता है।
  3. बालकों को रचनात्मक कार्यों के सीखने हेतु प्रेरित करता हैं
  4. बालक अपने चरित्र का निर्माण कर सकते हैं।
  5. मन्द बुद्धि बालको को शिक्षित होने में सहायता मिलती है
  6. बालक अपनी समस्याओं से सम्बन्धित वातावरणीय परिस्थितियों से अवगत हो जाता है तथा उन परिस्थितियों से अनुकूल अपने को ढालता हैं।
  7. बालक समस्याओं का निवारण करते हुए स्वनिर्णय लेने में सक्षम हो जाता है।

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