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विज्ञान Previous Year Paper 2023

UP DELED Semester 4 विज्ञान Previous Year Question Paper 2023 with solution.

Section 1 वस्तुनिष्ठ प्रश्न

वस्तुनिष्ठ प्रश्न

प्रश्न 1. चुम्बक द्वारा आकर्षित होता है-

(a) लकड़ी का बुरादा

(b) काँच का बुरादा

(c) लोहे का बुरादा

(d) उपरोक्त सभी

उत्तर: (c) लोहे का बुरादा। लोहा एक लौहचुम्बकीय पदार्थ है, इसलिए वह चुम्बक द्वारा प्रबल रूप से आकर्षित होता है। लकड़ी और काँच चुम्बक द्वारा इस प्रकार आकर्षित नहीं होते।

प्रश्न 2. मिश्र धातु है-

(a) पीतल

(b) ताँबा

(c) जस्ता

(d) टिन

उत्तर: (a) पीतल। पीतल (Brass) मुख्यतः ताँबा और जस्ता से बनी मिश्रधातु है, जबकि ताँबा, जस्ता और टिन स्वयं धात्विक तत्व हैं।

प्रश्न 3. डार्विनवाद सम्बन्धित है-

(a) उपार्जित लक्षणों की वंशागति

(b) अंगों का उपयोग और अनुपयोग

(c) जीवों के आकार में वृद्धि की प्रवृत्ति

(d) योग्यतम की उत्तरजीविता

उत्तर: (d) योग्यतम की उत्तरजीविता। डार्विनवाद का मूल आधार प्राकृतिक चयन है, जिसके अनुसार पर्यावरण के अनुकूल वंशानुगत विविधताओं वाले जीवों के जीवित रहने और प्रजनन की सम्भावना अधिक होती है। “योग्यतम की उत्तरजीविता” पद मूलतः हर्बर्ट स्पेंसर ने दिया था, जिसे बाद में डार्विन ने प्राकृतिक चयन के सन्दर्भ में अपनाया।

प्रश्न 4. रक्त के थक्के बनने की प्रक्रिया धीमी हो जाती है-

(a) थेलेसीमिया

(b) एनीमिया

(c) हीमोफीलिया

(d) उपरोक्त में से सभी

उत्तर: (c) हीमोफीलिया। हीमोफीलिया एक रक्तस्रावी विकार है जिसमें आवश्यक clotting factors की कमी के कारण रक्त सामान्य रूप से थक्का नहीं बना पाता और रक्तस्राव लम्बे समय तक हो सकता है।

प्रश्न 5. एलीसा परीक्षण है-

(a) क्षय रोग

(b) डेंगू ज्वर

(c) टी.बी.

(d) एड्स

उत्तर: (d) एड्स। इस प्रश्न में अपेक्षित उत्तर एड्स है। ELISA/EIA का उपयोग HIV संक्रमण की जाँच में HIV के विरुद्ध प्रतिरक्षियों अथवा कुछ प्रकार के परीक्षणों में HIV antigen-antibody का पता लगाने के लिए किया जाता है।

Section 2 अति लघु उत्तरीय प्रश्न

अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 6. पौधों और जन्तुओं के बीच की कड़ी का नाम लिखिए।

उत्तर: युग्लीना (Euglena) को परम्परागत रूप से पौधों और जन्तुओं के बीच की कड़ी माना जाता है, क्योंकि इसमें प्रकाश-संश्लेषण तथा जन्तु-सदृश गति और पोषण दोनों प्रकार के लक्षण मिलते हैं।

प्रश्न 7. रक्त वर्ग कितने प्रकार के होते हैं?

उत्तर: ABO प्रणाली के अनुसार मानव रक्त के चार मुख्य वर्ग—A, B, AB और O होते हैं। Rh कारक को जोड़ने पर इनके धनात्मक तथा ऋणात्मक प्रकार भी होते हैं।

प्रश्न 8. मेण्डलीफ की संशोधित आवर्त सारणी में कुल कितने आवर्त तथा समूह हैं?

उत्तर: आधुनिक दीर्घाकार आवर्त सारणी में कुल 7 आवर्त तथा 18 समूह होते हैं।

प्रश्न 9. ऊर्जा का पिरामिड कैसा होता है?

उत्तर: ऊर्जा का पिरामिड सदैव सीधा (Upright) होता है, क्योंकि प्रत्येक पोषी स्तर से अगले स्तर तक ऊर्जा स्थानान्तरण के दौरान ऊर्जा की मात्रा कम होती जाती है।

प्रश्न 10. विद्युत धारा का ऊष्मीय प्रभाव किसे कहते हैं?

उत्तर: किसी चालक में विद्युत धारा प्रवाहित होने पर उसमें ऊष्मा उत्पन्न होने की घटना विद्युत धारा का ऊष्मीय प्रभाव कहलाती है। जूल के नियम के अनुसार H = I2Rt।

प्रश्न 11. सर्वाहारी जन्तु किसे कहते हैं?

उत्तर: जो जन्तु पौधों तथा अन्य जन्तुओं दोनों से प्राप्त भोजन ग्रहण करते हैं, सर्वाहारी कहलाते हैं; जैसे—मनुष्य, भालू, सूअर और कौआ।

Section 3 लघु उत्तरीय प्रश्न

लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 12. चुम्बकीय एवं अचुम्बकीय पदार्थ किसे कहते हैं, उदाहरण सहित समझाइये।

उत्तर:

चुम्बकीय पदार्थ— वे पदार्थ जो चुम्बक द्वारा आकर्षित होते हैं, चुम्बकीय पदार्थ कहलाते हैं। लोहा, निकिल तथा कोबाल्ट इसके प्रमुख उदाहरण हैं।

अचुम्बकीय पदार्थ— वे पदार्थ जो सामान्य चुम्बक द्वारा आकर्षित नहीं होते, अचुम्बकीय पदार्थ कहलाते हैं। लकड़ी, काँच, कागज, प्लास्टिक और रबर इसके उदाहरण हैं।

प्रश्न 13. प्राथमिक उपचार से क्या तात्पर्य है? प्राथमिक उपचार देने वाले व्यक्ति में कौन-कौन से गुण होने चाहिए?

उत्तर: किसी घायल या अचानक बीमार व्यक्ति को चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध होने से पहले दी जाने वाली तत्काल एवं प्रारम्भिक सहायता को प्राथमिक उपचार कहते हैं।

प्राथमिक उपचार देने वाले व्यक्ति में निम्न गुण होने चाहिए—

  • शान्त एवं धैर्यवान: आपात स्थिति में घबराए बिना कार्य करना चाहिए।
  • सतर्क एवं निरीक्षणशील: घायल की स्थिति तथा आसपास के खतरों को शीघ्र समझना चाहिए।
  • शीघ्र निर्णय लेने वाला: परिस्थिति के अनुसार सही प्राथमिकता तय करनी चाहिए।
  • सहानुभूतिशील: घायल व्यक्ति को भरोसा एवं मानसिक सहायता देनी चाहिए।
  • प्राथमिक उपचार का ज्ञान: रक्तस्राव रोकने, CPR तथा अन्य आवश्यक प्राथमिक उपायों का उचित ज्ञान होना चाहिए।
  • स्वच्छता एवं सुरक्षा का ध्यान रखने वाला: स्वयं तथा घायल दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए।

प्रश्न 14. धातु तथा अधातु में अन्तर लिखिए।

उत्तर:

धातु अधातु
धातुएँ सामान्यतः ऊष्मा एवं विद्युत की सुचालक होती हैं। अधातुएँ सामान्यतः ऊष्मा एवं विद्युत की कुचालक होती हैं; ग्रेफाइट इसका प्रमुख अपवाद है।
धातुओं में सामान्यतः धात्विक चमक होती है। अधातुएँ सामान्यतः चमकहीन होती हैं; आयोडीन इसका अपवाद है।
धातुएँ सामान्यतः आघातवर्ध्य तथा तन्य होती हैं। ठोस अधातुएँ सामान्यतः भंगुर होती हैं।
धातुएँ सामान्यतः ध्वन्यात्मक होती हैं। अधातुएँ सामान्यतः ध्वन्यात्मक नहीं होतीं।
अनेक धातुएँ तनु अम्लों से अभिक्रिया कर हाइड्रोजन गैस देती हैं। अधातुएँ सामान्यतः तनु अम्लों से हाइड्रोजन गैस मुक्त नहीं करतीं।
धातुएँ इलेक्ट्रॉन त्यागकर धनायन बनाने की प्रवृत्ति रखती हैं। अधातुएँ सामान्यतः इलेक्ट्रॉन ग्रहण करने अथवा साझा करने की प्रवृत्ति रखती हैं।

प्रश्न 15. कूलॉम का नियम समझाइए।

उत्तर: कूलॉम के नियम के अनुसार दो स्थिर बिन्दु आवेशों के बीच लगने वाले विद्युत बल का परिमाण दोनों आवेशों के परिमाणों के गुणनफल के समानुपाती तथा उनके बीच की दूरी के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती होता है।

F ∝ q1q2

F ∝ 1/r2

अतः,

F = k q1q2/r2

जहाँ q1 और q2 आवेश, r उनके बीच की दूरी तथा k समानुपातिकता नियतांक है। निर्वात में k = 1/(4πε0)। समान आवेशों के बीच प्रतिकर्षण तथा विपरीत आवेशों के बीच आकर्षण होता है।

प्रश्न 16. अयस्क से धातु निष्कर्षण में प्रयुक्त होने वाली प्रविधियों का उल्लेख कीजिए।

उत्तर: अयस्क से धातु प्राप्त करने की प्रक्रिया को धातु निष्कर्षण अथवा धातुकर्म कहते हैं। इसकी विधि धातु की सक्रियता तथा अयस्क की प्रकृति पर निर्भर करती है। इसके प्रमुख चरण हैं—

  1. चूर्णीकरण एवं पेषण: खदान से प्राप्त अयस्क को छोटे टुकड़ों एवं बारीक कणों में बदला जाता है।
  2. अयस्क का सान्द्रण: मिट्टी, रेत तथा अन्य गैंग अशुद्धियों को गुरुत्वीय पृथक्करण, चुम्बकीय पृथक्करण, फेन प्लवन आदि विधियों से दूर किया जाता है।
  3. निस्तापन या भर्जन: अयस्क की प्रकृति के अनुसार उसे सीमित वायु/वायु की अनुपस्थिति में गर्म करके निस्तापन अथवा अधिक वायु में गर्म करके भर्जन किया जाता है।
  4. अपचयन: धातु के यौगिक अथवा ऑक्साइड को कार्बन, CO, एल्युमीनियम अथवा विद्युत अपघटन जैसी उपयुक्त विधि से धातु में परिवर्तित किया जाता है।
  5. परिष्करण: प्राप्त अशुद्ध धातु को विद्युत-अपघटनी अथवा अन्य उपयुक्त शोधन विधि से शुद्ध किया जाता है।

प्रश्न 17. थेलेसिमिया रक्त दोष के परिचय, कारण, लक्षण तथा परिणाम के बारे में वर्णन कीजिए।

उत्तर: थैलेसीमिया एक वंशानुगत रक्त विकार है जिसमें शरीर पर्याप्त मात्रा में सामान्य हीमोग्लोबिन नहीं बना पाता। इसके कारण स्वस्थ लाल रक्त कणिकाओं की संख्या कम हो सकती है और एनीमिया उत्पन्न होता है।

कारण—

थैलेसीमिया हीमोग्लोबिन बनाने वाले जीनों में आनुवंशिक परिवर्तन के कारण होता है और माता-पिता से सन्तान में पहुँचता है। इसके दो मुख्य प्रकार अल्फा थैलेसीमिया और बीटा थैलेसीमिया हैं।

लक्षण—

  • थकान और कमजोरी।
  • त्वचा का पीलापन अथवा पीलिया।
  • साँस फूलना।
  • बच्चों में वृद्धि एवं विकास धीमा होना।
  • गंभीर प्रकार में प्लीहा अथवा यकृत का बढ़ना।
  • चेहरे की हड्डियों में परिवर्तन हो सकता है।

परिणाम—

हल्के प्रकार में बहुत कम या कोई लक्षण नहीं हो सकते, जबकि गंभीर थैलेसीमिया में नियमित रक्त आधान की आवश्यकता पड़ सकती है। बार-बार रक्त आधान से शरीर में अतिरिक्त आयरन जमा हो सकता है, जिससे हृदय, यकृत और अन्य अंग प्रभावित हो सकते हैं।

प्रश्न 18. मेण्डलीफ के अनुसार संक्रमण तत्व क्या है?

उत्तर: प्रश्न की भाषा पारम्परिक है। आधुनिक वैज्ञानिक परिभाषा के अनुसार वह तत्व जिसका परमाणु अपूर्ण d-उपकक्षा रखता हो अथवा जो ऐसा धनायन बना सके जिसमें d-उपकक्षा अपूर्ण हो, संक्रमण तत्व (Transition Element) कहलाता है। ये तत्व आवर्त सारणी के d-ब्लॉक के मध्य भाग में पाए जाते हैं।

उदाहरण— क्रोमियम (Cr), मैंगनीज (Mn), लोहा (Fe), कोबाल्ट (Co), निकिल (Ni) तथा ताँबा (Cu)।

प्रमुख गुण—

  • अनेक संक्रमण तत्व परिवर्तनशील ऑक्सीकरण अवस्थाएँ प्रदर्शित करते हैं।
  • इनके अनेक आयन एवं यौगिक रंगीन होते हैं।
  • कई संक्रमण तत्व एवं उनके यौगिक अच्छे उत्प्रेरक होते हैं।
  • ये सामान्यतः धात्विक प्रकृति के होते हैं।
  • इनमें जटिल यौगिक बनाने की प्रवृत्ति पाई जाती है।

जस्ता (Zn) d-ब्लॉक का तत्व है, लेकिन आधुनिक IUPAC परिभाषा के अनुसार संक्रमण तत्व नहीं माना जाता, क्योंकि Zn परमाणु तथा Zn2+ आयन दोनों में d-उपकक्षा पूर्ण भरी हुई होती है।

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