वस्तुनिष्ठ प्रश्न
वस्तुनिष्ठ प्रश्न
प्रश्न 1. एलीसा परीक्षण है-
(a) हिपेटाइटिस
(b) क्षय रोग
(c) एड्स
(d) टाइफाइड
उत्तर: (c) : एच.आई.वी. हेपेटाइटिस रोगों का पता लागाने के लिए एलीसा परीक्षण का उपयोग किया जाता है। एलीसा परीक्षण, जिसे एंजाइम लिंक्ड एम्यूनोसॉर्बेट परख, इसे (ELISA) भी कहा जाता है।
प्रश्न 2. गैलेना किस धातु का अयस्क है-
(a) जिंक
(b) लेड
(c) कापर
(d) एलुमीनियम
उत्तर: (b): गैलेना सीसा (pb) धातु का अयस्क है। यह सीसा सल्फाइड (pbs) का एक खनिज है, जो धातुकर्म में सीसा प्राप्त करने का मुख्य स्त्रों है। गैलोना धरती पर सबसे प्रचुर मात्रा में पाए जाने वाले सीसा अयस्कों में से एक है।
प्रश्न 3. वातावरण और जीवधारियों के पारस्परिक सम्बन्धों से क्या बनता है-
(a) समुदाय
(b) पारिस्थितिक तन्त्र
(c) जीवोम
(d) खाद्य-जाल
उत्तर: (b) : वातावरण और जीवधारियों के पारसपरिक संबंधों से पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) बनता है। पारिस्थितिकी तंत्र एक जटिल और गतिशील प्रणाली है जिसमें सभी जीवित और निर्जीव घटक एक दूसरे से जुड़े होते है। जीवित घटकों में पौधें, जानवर और सूक्ष्मजीव शामिल है, जबकि निर्जीव घटकों में पानी, हवा, मिटटी और चट्टानें शामिल हैं।
प्रश्न 4. शुष्क सेल में किस पदार्थ की छड़ एनोड का कार्य करती है-
(a) कार्बन
(b) सिलिकॉन
(c) जर्मेनियम
(d) बोरॉन
उत्तर: (a): शुष्क सेल में एनोड का कार्य कार्बन (ग्रेफाइड) करती है। शुष्क सेल में एक जिंक का पात्र होता है जो कैथोड के रूप में कार्य करती है。
शुष्क सेल के अन्य महत्वपूर्ण घटक-
कैथोड-यह सेल का धनात्मक इलेक्ट्रोड होता है और यह अपचयन प्रतिक्रिया में भाग लेता है。
इलेक्ट्रोलाइट- यह एक विद्युत प्रवाहकीय पदार्थ होता है जो सेल के अंदर इलेक्ट्रांनों के प्रवाह को अनुमति देता है।
प्रश्न 5. रुधिर का थक्का बनाने वाली रुधिर कणिका का नाम है-
(a) लाल रुधिर कणिका
(b) प्लेटलेट
(c) श्वेत रुधिर कणिका
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर: (b) : रूधिर का थक्का बनाने वाली रूधिर कणिका का नाम प्लेटलेट्स है। जो हमारे शरीर को रक्त स्त्राव को रोकने के लिए थक्के बनाने में मदद करती हैं। प्लेटलेट्स की संख्या कम होने से रक्तस्त्राव का खतरा बढ़ जाता है।
अति लघु उत्तरीय प्रश्न
अति लघु उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 6. खाद्य-जाल से क्या समझते हैं ?
उत्तर: खाद्य-जाल, एक परिस्थितिकी तंत्र में विभिन्न जीवों के बीच भोजन संबंधों का एक जटिल नेटवर्क हैं। यह एक दूसरे से जुड़ी अनेक खाद्य श्रृंखलाओं से बनता है。
खाद्य जाल का उपचार पौधे होते है। वे सूर्य की रोशनी और कार्बन-डाई आक्साइड का उपयोग करके अपना भोजन बनाते हैं। खाद्य जाल पारिस्थितिकी तंत्र का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह पारिस्थितिकी तंत्र को स्थिरता, जैव विविधता और पोषक तत्वों को चक्रण प्रदान करता है।
प्रश्न 7. विद्युत के दो सुचालक और दो कुचालक पदार्थों के नाम लिखो।
उत्तर: विद्युत के दो सुचालक और दो कुचालक पदार्थों के नामः-
सुचालक
(1) तांबा-यह विद्युत का सबसे अच्छा सुचालक है और इसका उपयोग तार, बिजली के तार और अन्य विद्युत उपकरणों में किया जाता है。
(2) एल्युमिनियम-यह ताँबे से कम सुचालक है, लेकिन हल्का और सस्ता है。
कुचालक
(1) रबर यह एक विद्युत का एक अच्छा कुचालक है और इसका उपयोग बिजली के तारों को ढ़कने और अन्य विद्युत उपकरणों में किया जाता है。
(2) प्लास्टिक यह रबर से कम कुचालक है, लेकिन हल्का और सस्ता है। इसका उपयोग बिजली के तारों को ढ़कने और अन्य विद्युत उपकरणों में किया जाता है。
प्रश्न 8. धातु गैल्वोनीकरण प्रक्रिया क्या है ?
उत्तर: धातु गैल्वोनीकरण प्रक्रिया धातुओं को जंग से बचाने के लिए एक महत्वपूर्ण तकनीक है। यह प्रक्रिया दो तरीकों से की जाती है。
(1) गर्म डुबकी गैल्वोनीकरण-इस प्रक्रिया में, धातु को पिघले हुए जस्ता में डुबोया जाता है। जस्ता धातु से चिपक जाता है। और एक सुरक्षात्मक परत बनाया है जो जंग को रोकता है。
(2) इलेक्ट्रो-गैल्वोनीकरण-इस प्रक्रिया में, धातु को एक जलीय घोल में डुबोया जाता है जिसमें जस्ता आयन होते हैं। धातु को बिजली के प्रवाह से गुजारा जाता है, जिसके कारण जस्ता धातु पर जमा हो जाता है。
गैल्वोनीकरण के लाभः-
(1) जंग से उत्कुष्ट सुरक्षा प्रदान करता है。
(2) धातु की सतह को चिकना और चमकदार बनाना है。
प्रश्न 9. सर्वदाता व सर्वग्राही रक्त वर्ग का नाम लिखो।
उत्तर:
सर्वदाता (Universal Acceptor) - रक्त समूह (O) वाले व्यक्ति सर्वदाता कहलाते हैं। इसमें एंटीजन नही होते, इसमें A व B दोनों के एंटीबॉडी होते है। इसलिए किसी भी अन्य रक्त समूह वाले व्यक्ति को सुरक्षित रूप से रक्तदान कर सकते हैं。
सर्वग्राही (Universal Acceptor) - रक्त समूह (AB) वाले व्यक्ति सर्वग्राही कहलाते हैं। इसमें कोई भी एंटीबॉडी नहीं होते हैं इसलिए किसी भी अन्य रक्त समूह से रक्त प्राप्त कर सकते हैं।
प्रश्न 10. विद्युत ऋणात्मकता को परिभाषित कीजिए।
उत्तर: विद्युत ऋणात्मकता किसी परमाणु को इलेक्ट्रॉनों को अपनी ओर आकर्षित करने की क्षमता को दर्शाता है। यह एक रासायनिक गुण है जो सहसंयोजक बंधों में इलेक्ट्रॉन घनत्व के वितरण को निर्धारित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है。
यह सहसंयोजक बंधों की ध्रुवीयता को निर्धारित करता है। यह रासायनिक यौगिकों के भौतक और रासायनिक गुणों को प्रभावित करता है।
प्रश्न 11. हेपेटाइटिस बी. शरीर के किस अंग को प्रभावित करता है।
उत्तर: हेपेटाइटिस बी. वायरस (HBV) मुख्य रूप से यकृत (लीवर) को प्रभावित करता है। यह वायरत यकृत की कोशिकाओं को संक्रमित करता है और उन्हें नुकसान पहुंचाता है, जिसके यकृत में सूजन और जलन होती है। इसे हेपेटाइटिस कहा जाता है。
यकृत शरीर के लिए महत्वपूर्ण अंग है, जो कई महत्वपूर्ण कार्यों को करता है जैसे-
(1) यकृत भोजन को पचाने में मदद करता है, पित्त का उत्पादन करता है, जो वसा को पचाने में मदद मदद करता है。
(2) यकृत रक्त से विषाक्त पदार्थो और अपशिष्ट उत्पादों को हटाता है।
लघु उत्तरीय प्रश्न
लघु उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 12. तत्वों की आवर्त सारणी के गुण व दोष क्या हैं ?
उत्तर:
तत्वों की आर्वत सारणी के गुणः-
(1) आवर्त सारणी में तत्वों को उनके परमाणु क्रमांक के आधार पर व्यवस्थित किया जाता है, जिसके फलस्वरूप तत्वों के भौतिक और रासायनिक गुणों में एक निश्चित क्रम स्थापित होता है。
(2) आर्वत सारणी में तत्वों को समूहों और आर्वतों में बाँटा गया है, जिसके आधार पर तत्वों के समान गुणों का अध्ययन आसानी से किया जा सकता है。
तत्वों की आर्वत सारणी के दोषः-
(1) हाइड्रोजन को न तो धातु माना जा सकता है और न ही अधातु, इसलिए उसकी स्थिति निश्चित नहीं है。
(2) आर्वत सारणी में समस्थानिकों के लिए कोई स्थान नहीं है。
(3) आर्वत सारणी में संक्रमण धातुओं का वर्गीकरण जटिल है。
प्रश्न 13. ओम के नियम को परिभाषित कीजिए तथा प्रतिरोध व विद्युत में सम्बन्ध लिखिए।
उत्तर: ओम का नियमः यदि किसी चालक की भौतिक अवस्थाओं जैसे तापमान, दबाव आदि में परिवर्तन न हो तो चालक में बहने वाली विद्युत धारा चालक के किन्हीं दो बिन्दुओं के बीच ओरोपित विभवान्तर के समानुपाती होती है。
ओम का नियम विद्युत परिपथ में वोल्टेज (V), करंट (I), और प्रतिरोध (R) के बीच संबन्ध को दर्शाता है। किसी चालक में विभावान्तर (V) उससे प्रवाहित धारा (I) के समानुपाती होता है। इस संबंध में गणितीय रूप में निम्न सूत्र द्वारा व्यक्त किया जा सकता है。
$V = I \times R$
जहाँ
V = वोल्टेज (वोल्ट में)
I = धारा (एम्पीयर में)
R = प्रतिरोध (ओम में)
प्रतिरोध और विद्युत धारा में संबंध-
प्रतिरोध (R) किसी चालक में विद्युत धारा के प्रवाह का विरोध करने का गुण है। यह चालक की सामग्री, लम्बाई और क्षेत्रफल पर निर्भर करता है。
ओम के नियम के अनुसार, प्रतिरोध वोल्टेज और धारा के अनुपात के बराबर होता है。
$R = \frac{V}{I}$
प्रश्न 14. धारावाही परिनालिका से क्या अभिप्राय है ? सचित्र वर्णन करो।
उत्तर: धारावाही परिनालिका ताँबे के तार से बनी एक कुंडली होती है, जिसके फेरों में विद्युत धारा प्रवाहित होती है। जब विद्युत धारा प्रवाहित होती है, तो कुंडली के चारो ओर एक चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न होता है। चुंबकीय क्षेत्र कुंडली के अंदर सबसे मजबूत होता है और कुंडली से दूर जाने पर कमजोर हो जाता है。
धारावाही परिनलिका के चुंबकीय क्षेत्र की दिशा दाहिने हाथ के नियम द्वारा निर्धारित की जा सकती है। दाहिने हाथ के नियम के अनुसार, यदि आप अपनी दाहिनी हथेली को कुंडली के चारों ओर घुमाते हैं, अंगूठा इस दिशा में दशारा करता है जिसमें धारा प्रवाहित होती हैं, तो आपकी उंगलियाँ चुंबकीय क्षेत्र की दिशा का संकेत देती हैं।
(चित्र का विवरण: एक बेलनाकार परिनालिका जिसे एक डोरी और आधार से लटकाया गया है। परिनालिका के दोनों सिरे C और N हैं। इसके चारों ओर तार लपेटा गया है। तार के दोनों सिरे एक परिपथ से जुड़े हैं, जिसमें एक बैटरी (D), एक कुंजी (K), और एक प्रतिरोध (R) है। धारा की दिशा तीरों द्वारा दर्शाई गई है।)
प्रश्न 15. जैविक घटक क्या होता है ? इनके घटकों का संक्षिप्त वर्णन करो।
उत्तर: जैविक घटक वे सभी जीवित चीजें हैं जो किसी पारिस्थितिकी तंत्र का हिस्सा हैं। इनमें पौधे, जानवर, सूक्ष्मजीव और अन्य जीवित चीजें शामिल हैं। जैविक घटक पारिस्थिकी तंत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। क्योंकि वे ऊर्जा और पोषक तत्वों का उत्पादन, उपभोग और पुनर्चक्रण करते हैं。
जैविक घटक (Biotic Components): पादप, जन्तु और सभी सूख्म जीव परितन्त्र का जैविक घटक बनाते हैं। सूर्य के प्रकाश की विकिरण ऊर्जा के प्रयोग करने के आधार पर जैविक घटक को तीन भागों में बांटा गया है-
(1) उत्पादक जैसे हरे पौधे, सभी प्रकार के पर्णहरित-युक्त हरे पादप सूर्य के प्रकाश में संश्लेषण की क्रिया द्वारा भोजन निर्माण करते हैं। अतः इन्हें स्वपोषी भी कहा जाता है। क्योंकि भोजन बनाने की क्षमता केव स्वपोषी में ही होती है। इनको उत्पादक भी कहते हैं。
(2) उपभोक्ता : खाद्य पदार्थों का उपयोग करने वाले जीवों को उपभोक्ता या परपोषी कहा जाता है। ये तीन प्रकार के होते हैं-
(i) प्राथमिक उपभोक्ता (Primary consumers:) - इस श्रेणी के अन्तर्गत वे जीव आते हैं जो सीधे ही हरे पौधों से अपना भोजन प्राप्त करते हैं। इसलिए ये जन्तु शाकाहारी कहलाते हैं। उदाहरण: गाय, भैंस, ऊँट, बकरी, खरगोश, हिरण, टिड्डा आदि。
(ii) द्वितीयक उपभोक्ता (Secondary consumers): इस श्रेणी में वे जन्तु आते हैं, जो शाकाहारी जन्तुओं का उपभोग करते हैं इसलिए ये जन्तु माँसाहारी कहलाते है। उदाहरण: मेढक, टोड, छिपकली, आदि。
(iii) तृतीयक उपभोक्ता (Tertiary consumers): इस श्रेणी में वे जन्तु आते हैं जो द्वितीयक उपभोक्ताओं (माँसाहारी) जन्तुओं को अपना आहार बनाते हैं। तृतीयक उपभोक्ता कहलाते हैं। जैसे : सर्प, बाज, सिंह आदि。
(3) अपघटक (Deomposers):- ये परपोषी/मृतपोषी जीव मृत पौधों एवं जन्तुओं के शरीर का अपघटन करते हैं। उन्हें अपघटक कहते हैं। उदाहरण : कवक (फफूंदी), जीवाणु, प्रोटोजोआ आदि。
प्रश्न 16. "एनीमिया" तथा "ल्यूकीमिया" रोग किस कारण होता है ? इसके बचाव व उपचार क्या हैं ?
उत्तर: एनीमिया एक ऐसी स्थिति हैं जिसमें शरीर में लाल रक्त कोशिकाओं की कमी होती है। लाल रक्त कोशिकाएं शरीर के सभी भागों में आक्सीजन पहुंचाने के लिए जिम्मेदार होती हैं। जब लाल रक्त कोशिकाओं की कमी होती है तो, शरीर को पर्याप्त आक्सीजन नही मिल पाती है, जिससे थकान, कमजोरी और अन्य लक्षण हो सकते हैं。
एनीमिया के कारण-
(1) आयरन की कमी。
(2) विटामिन B12 की कमी
(3) रक्त की हानि。
(4) अस्थि मज्जा की समस्याएँ
एनीमिया के बचाव-
(1) आयरन युक्त खाद्य पदार्थों का सेवन。
(2) नियमित व्यायाम करना लाभादायक होता है यह लाल रक्त कोशिकाओं की संख्या बढ़ाता है。
(3) रक्त स्त्राव को रोकना
उपचारः-
आयरन की खुराक एनीमिया में लेना चाहिए。
विटामिन B12 या फोलेट जैसे पोषक तत्वों का नियमित खुराक लेना चाहिए。
गंभीर स्थिति में रक्त आधान की आवश्यकता पड़ती है。
ल्यूकेमिया रक्त और अस्थि मज्जा में बनने वाली श्वेत रक्त कोशिकाओं का एक कैंसर है। WBC शरीर को संक्रमण से लड़नें में मदद करते हैं, लेकिन ल्यूकेमिया में ये कोशिकाएँ असमान्य हो जाती है और अनियंत्रित रूप से बढ़ने लगता है。
कारणः- ल्यूकेमिया के सटीक कारण अज्ञात है, लेकिन कुछ कारण जेखिम को बढ़ा सकते हैं。
अनुवंशिकी-कुछ लोगों में ल्यूकेमिया जीन होते है जो उन्हे इस बीमारी के प्रति अधिक संवेदनशील बनाते है。
विकिरण के संपर्क में आने से ल्यूकेमिया का खतरा बढ़ जाता है。
बचावः ल्यूकेमिया को पूरी तरह से रोकने का कोई निश्चित तरीका नहीं है, लेकिन खतरा कम करने के लिए उपाय है-
धूम्रपान न करने की सलाह, धूम्रपान से ल्यूकेमिया का खतरा बढ़ जाता है。
नियमित व्यायाम समग्र स्वास्थ्य को बढ़ाता है तथा ल्यूकेमिया के खतरे को कम करता है。
संक्रमण से बचाव शरीर को नियमित साफ रखना चाहिए तथा बीमार व्यक्ति के संपर्क में नहीं आना चाहिए。
प्रश्न 17. लोहे के अयस्क से पिग आयरन प्राप्त करने की प्रक्रिया का संक्षिप्त वर्णन करें।
उत्तर: लोहे के अयस्क के पिग कायरन प्राप्त करने की प्रक्रिया का संक्षिप्त वर्णनः-
(1) लौह अयस्क का प्रसंस्करणः-
लौह अयस्क को खनन करके निकाला जाता है और फिर उसे कुचलकर और पीसकर बारिक किया जाता है。
अयस्क को तब भारी द्रव माध्यम से धोया जाता है ताकि अशुद्धियों को हराया जा सके。
(2) वात्या भट्टी में प्रगलनः-
लौह अयस्क, कोक (ईंधन) और चूना पत्थर (फ्लक्स) को वात्या भट्ठी में ऊपर से डाला जाता है。
गर्म हवा को भट्टी के नीचे से प्रवेश कराया जाता है, जो कोक जलाता है。
चूना पत्थर अशुद्धियों को अवशोषित करता है और उन्हें स्लैग के रूप में हटा देता है。
(3) पिग आयरन का उत्पादनः-
पिघला हुआ लोहा भट्ठी के तल पर जमा होता है जिसमें माध्यमिक उत्पाद बनाता है जिसे कच्चा लोहा कहते है। इसे 'सॉ' के रूप में जाना जाता है और इसे पिग आयरन के सांचों में डाला जाता है。
ठंडा होने पर, पिग आयरन ठोस ब्लाकों में बदल जाता है。
पिग आयरन का उपयोगः-
पिग आयरन का उपयोग स्टील बनाने में किया जाता है。
प्रश्न 18. रक्त को कितने वर्ग में विभाजित किया गया है ? समझाइये।
उत्तर: रक्त की खोज सर्वप्रथम कार्ल लैण्ड स्टीनर में 1900 में की थी। रक्त को चार मुख्य वर्गो मे विभाजित किया जाता है- A, B, AB तथा O यह विभाजन लाल रक्त कोशिकाओं की सतह पर मौजूद एंटीजन के आधार पर किया जाता है। ABO रक्त की खोज कार्ल लैण्डस्टीनर ने किया था。
A रक्त समूह- यह रक्त समूह उन लोगो में होता है जिनकी लाल रक्त कोशिकाओं पर A एंटीजन होता है। इन लोगों के रक्त में B एंटीबाडी मौजूद होता है जो B एंटीजन वाले रक्त को स्वीकार नही करता。
B रक्त समूह- लाल रक्त कोशिकाओं पर B एंटीजन होता है तथा रक्त समूह मे A एंटीबाडी पाया जाता है जो A एंटीजन वाले रक्त को स्वीकार नहीं करता है。
AB रक्त समूह- यह रक्त समूह उन लोगों में पाया जाता है जिनकी लाल रक्त कोशिकाओं पर A और B दोनो एंटीजन होते है। इसमें A एवं B एंटीबाडी नही होता है इसलिए यह A,B AB और O सभी प्रकार के रक्त को स्वीकार कर सकते है। इसे सर्वग्राही भी कहते हैं。
O रक्त समूह- यह रक्त समूह उन लोगों में होता है जिनकी लाल रक्त कोशिकाओं पर A या B एंटीजन में से कोई भी नही होता है, इस रक्त में A और B दोनों एंटीबाडी मौजूद होते है, इसलिए वे केवल O रक्त समूह वाले व्यक्ति से रक्त प्राप्त कर सकते है। इसे सर्वदाता भी कहते हैं