वस्तुनिष्ठ प्रश्न
प्रश्न 1. सिनेबार किसका अयस्क है?
(a) Zn
(b) Au
(c) Hg
(d) Fe
उत्तर: (c) Hg। सिनेबार पारा (Mercury) का प्रमुख अयस्क है। इसका रासायनिक सूत्र HgS अर्थात् मरक्यूरिक सल्फाइड है।
प्रश्न 2. निम्न में से विषाणु जनित रोग नहीं है-
(a) पोलियो
(b) कोरोना
(c) एड्स
(d) हैजा
उत्तर: (d) हैजा। हैजा विषाणु जनित नहीं बल्कि Vibrio cholerae नामक जीवाणु से होने वाला संक्रामक रोग है। पोलियो, COVID-19 तथा HIV/AIDS विषाणुओं से सम्बन्धित रोग हैं।
प्रश्न 3. निम्न में से प्राथमिक सेल नहीं है-
(a) लेक्लांशे सेल
(b) डेनियल सेल
(c) वोल्टीय सेल
(d) सीसा संचायक सेल
उत्तर: (d) सीसा संचायक सेल। सीसा संचायक (Lead-acid accumulator) एक द्वितीयक सेल है, जिसे डिस्चार्ज होने के बाद पुनः चार्ज किया जा सकता है। प्राथमिक सेल सामान्यतः पुनः चार्ज नहीं किए जाते।
प्रश्न 4. रक्त को निम्नलिखित में से किस तापक्रम पर काँच या प्लास्टिक की वायुरुद्ध बोतलों में सुरक्षित रखते हैं?
(a) 2.5°C
(b) 5.4°C
(c) 3.5°C
(d) 5.3°C
उत्तर: यह प्रश्न विकल्पों की दृष्टि से त्रुटिपूर्ण है। संचित पूर्ण रक्त तथा लाल रक्त कणिकाओं को सामान्यतः 2°C से 6°C के बीच रखा जाता है। दिए गए चारों तापमान इसी स्वीकृत सीमा में आते हैं, इसलिए इनमें से कोई एक विकल्प वैज्ञानिक रूप से अद्वितीय सही उत्तर नहीं है।
प्रश्न 5. डार्विनवाद सम्बन्धित है-
(a) उपार्जित लक्षणों की वंशागति
(b) अंगों का उपयोग और अनुपयोग
(c) जीवों के आकार में वृद्धि की प्रवृत्ति
(d) योग्यतम की उत्तरजीविता
उत्तर: (d) योग्यतम की उत्तरजीविता। डार्विनवाद का मुख्य आधार प्राकृतिक चयन है, जिसमें पर्यावरण के अनुकूल विविधताओं वाले जीवों के जीवित रहने और प्रजनन की सम्भावना अधिक होती है। “Survival of the Fittest” पद मूलतः हर्बर्ट स्पेंसर ने दिया था, जिसे बाद में डार्विन ने प्राकृतिक चयन के सन्दर्भ में अपनाया।
अति लघु उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 6. विद्युत धारा अदिश राशि है, स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: विद्युत धारा आवेश के प्रवाह की दर है, I = Q/t। इसमें दिशा का संकेत लिया जा सकता है, परन्तु यह सदिश योग के नियमों का पालन नहीं करती; इसलिए विद्युत धारा अदिश राशि है।
प्रश्न 7. चुम्बकीय क्षेत्र से क्या तात्पर्य है?
उत्तर: चुम्बक अथवा धारावाही चालक के चारों ओर का वह क्षेत्र जहाँ किसी चुम्बकीय पदार्थ या अन्य चुम्बक पर चुम्बकीय बल का प्रभाव अनुभव किया जा सके, चुम्बकीय क्षेत्र कहलाता है।
प्रश्न 8. मेण्डलीफ की संशोधित आधुनिक आवर्त सारणी में कुल कितने आवर्त तथा समूह हैं?
उत्तर: आधुनिक आवर्त सारणी में कुल 7 आवर्त तथा 18 समूह होते हैं।
प्रश्न 9. एच.आई.वी. (HIV) पॉजिटिव व्यक्तियों का पता लगाने के लिए किये जाने वाले परीक्षणों का नाम लिखिए।
उत्तर: HIV संक्रमण की जाँच के लिए ELISA/EIA जैसे एंटीबॉडी अथवा एंटीजन-एंटीबॉडी परीक्षण किए जाते हैं। परीक्षा-सन्दर्भ में अपेक्षित उत्तर ELISA परीक्षण है।
प्रश्न 10. प्राथमिक उपचार के किन्हीं दो उद्देश्यों को लिखिए।
उत्तर: (i) घायल या बीमार व्यक्ति के जीवन की रक्षा करना।
(ii) उसकी स्थिति को और अधिक बिगड़ने से रोकना तथा चिकित्सकीय सहायता मिलने तक सहायता देना।
प्रश्न 11. ऊर्जा का पिरामिड कैसा होता है?
उत्तर: ऊर्जा का पिरामिड सदैव सीधा होता है, क्योंकि प्रत्येक पोषी स्तर से अगले स्तर तक ऊर्जा के स्थानान्तरण में कुछ ऊर्जा ऊष्मा के रूप में नष्ट हो जाती है।
लघु उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 12. खाद्य श्रृंखला तथा खाद्य-जाल में अन्तर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
| खाद्य श्रृंखला | खाद्य-जाल |
|---|---|
| जीवों के बीच भोजन सम्बन्ध का एक सरल एवं क्रमबद्ध मार्ग होता है। | अनेक परस्पर जुड़ी खाद्य-श्रृंखलाओं का जटिल जाल होता है। |
| ऊर्जा एक निश्चित मार्ग से एक पोषी स्तर से अगले स्तर तक जाती है। | ऊर्जा का प्रवाह अनेक परस्पर जुड़े मार्गों से हो सकता है। |
| प्रत्येक जीव का भोजन सम्बन्ध अपेक्षाकृत सरल रूप में दिखाया जाता है। | एक जीव के अनेक भोजन-स्रोत तथा अनेक भक्षी हो सकते हैं। |
| यह प्राकृतिक पारिस्थितिक सम्बन्धों का सरल रूप है। | यह प्राकृतिक पारिस्थितिक सम्बन्धों का अधिक वास्तविक एवं जटिल रूप है। |
प्रश्न 13. कूलॉम का नियम समझाइए।
उत्तर: कूलॉम के नियम के अनुसार दो स्थिर बिन्दु आवेशों के बीच लगने वाले विद्युत बल का परिमाण दोनों आवेशों के परिमाणों के गुणनफल के समानुपाती तथा उनके बीच की दूरी के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती होता है।
F ∝ q1q2
तथा
F ∝ 1/r2
अतः,
F = k q1q2/r2
निर्वात में,
k = 1/(4πε0)
जहाँ q1 और q2 आवेश तथा r उनके बीच की दूरी है। बल दोनों आवेशों को मिलाने वाली रेखा के अनुदिश होता है। समान प्रकृति के आवेशों में प्रतिकर्षण तथा विपरीत प्रकृति के आवेशों में आकर्षण होता है।
प्रश्न 14. अयस्क से धातु निष्कर्षण में प्रयुक्त होने वाली प्रविधियों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर: अयस्क से शुद्ध धातु प्राप्त करने की प्रक्रिया को धातुकर्म कहते हैं। इसके प्रमुख चरण निम्नलिखित हैं—
- अयस्क का सान्द्रण: अयस्क में उपस्थित मिट्टी, रेत एवं अन्य गैंग अशुद्धियों को गुरुत्वीय पृथक्करण, चुम्बकीय पृथक्करण, फेन प्लवन आदि विधियों से हटाया जाता है।
- अयस्क को ऑक्साइड में बदलना: अयस्क की प्रकृति के अनुसार निस्तापन (Calcination) अथवा भर्जन (Roasting) किया जाता है।
- धातु का अपचयन: धातु ऑक्साइड से उपयुक्त अपचायक, कार्बन, कार्बन मोनोऑक्साइड अथवा विद्युत अपघटन द्वारा धातु प्राप्त की जाती है।
- धातु का परिष्करण: प्राप्त अशुद्ध धातु को उपयुक्त विधि से शुद्ध किया जाता है; जैसे विद्युत-अपघटनी परिष्करण।
प्रश्न 15. रक्त के थक्का बनने की क्रियाविधि का वर्णन कीजिए।
उत्तर: चोट लगने पर रक्तस्राव रोकने के लिए रक्त का थक्का बनना शरीर की महत्वपूर्ण सुरक्षा प्रक्रिया है। इसमें प्लेटलेट्स तथा रक्त के विभिन्न स्कन्धन कारक भाग लेते हैं।
- रक्तवाहिनी को क्षति पहुँचने पर प्लेटलेट्स क्षतिग्रस्त स्थान पर चिपककर प्लेटलेट प्लग बनाते हैं तथा स्कन्धन प्रक्रिया सक्रिय होती है।
- पारम्परिक वर्णन के अनुसार थ्रोम्बोप्लास्टिन तथा Ca2+ आदि की सहायता से निष्क्रिय प्रोथ्रोम्बिन सक्रिय थ्रोम्बिन में परिवर्तित होता है।
- थ्रोम्बिन घुलनशील फाइब्रिनोजन को अघुलनशील फाइब्रिन के रेशों में बदल देता है।
- फाइब्रिन का जाल रक्त कणिकाओं एवं प्लेटलेट्स को फँसा लेता है और थक्का बन जाता है, जिससे रक्तस्राव रुकता है।
प्रश्न 16. यदि किसी परिपथ में 105 इलेक्ट्रॉन एक घण्टे के लिए प्रवाहित होते हैं तो परिपथ में विद्युत धारा की गणना कीजिए।
उत्तर:
दिया है—
इलेक्ट्रॉनों की संख्या, n = 105
एक इलेक्ट्रॉन का आवेश, e = 1.6 × 10−19 C
समय, t = 1 घंटा = 3600 s
कुल आवेश,
Q = ne
Q = 105 × 1.6 × 10−19
Q = 1.6 × 10−14 C
विद्युत धारा,
I = Q/t
I = (1.6 × 10−14)/3600
I ≈ 4.44 × 10−18 A
अतः परिपथ में विद्युत धारा ≈ 4.44 × 10−18 एम्पियर।
प्रश्न 17. थैलेसीमिया रक्त दोष के परिचय, कारण, लक्षण तथा परिणाम के बारे में वर्णन कीजिए।
उत्तर: थैलेसीमिया एक वंशानुगत रक्त विकार है, जिसमें हीमोग्लोबिन की ग्लोबिन शृंखलाओं का निर्माण सामान्य रूप से नहीं हो पाता। इसके कारण शरीर में प्रभावी हीमोग्लोबिन की मात्रा कम हो सकती है और एनीमिया उत्पन्न होता है।
कारण—
यह दोषपूर्ण जीन माता-पिता से सन्तान में पहुँचने के कारण होता है। मुख्य रूप से इसे अल्फा-थैलेसीमिया और बीटा-थैलेसीमिया में बाँटा जाता है। बीटा-थैलेसीमिया में carrier अवस्था को प्रायः थैलेसीमिया माइनर तथा गंभीर अवस्था को थैलेसीमिया मेजर कहा जाता है।
मुख्य लक्षण—
- एनीमिया, थकान एवं कमजोरी।
- त्वचा का पीलापन अथवा पीलिया।
- बच्चों में वृद्धि एवं विकास में विलम्ब।
- गंभीर मामलों में प्लीहा तथा यकृत का बढ़ना।
- कुछ गंभीर मामलों में चेहरे एवं अन्य हड्डियों में परिवर्तन।
परिणाम एवं उपचार—
गंभीर थैलेसीमिया में नियमित रक्त आधान की आवश्यकता पड़ सकती है। बार-बार रक्त चढ़ाने से शरीर में अतिरिक्त आयरन जमा हो सकता है, जिसके लिए आयरन केलेशन उपचार दिया जाता है। रोग की गंभीरता उसके प्रकार एवं आनुवंशिक स्थिति पर निर्भर करती है।
प्रश्न 18. फर्स्ट ऐड बॉक्स क्या होता है? उसके कार्यों को समझाइए।
उत्तर: फर्स्ट ऐड बॉक्स ऐसी सुव्यवस्थित पेटी या किट है जिसमें दुर्घटना, चोट अथवा अचानक बीमारी की स्थिति में तत्काल प्राथमिक उपचार देने के लिए आवश्यक सामग्री रखी जाती है।
प्रमुख सामग्री—
- स्टेराइल गॉज एवं पट्टियाँ।
- एडहेसिव बैंडेज एवं मेडिकल टेप।
- एंटीसेप्टिक वाइप/घाव साफ करने की सामग्री।
- डिस्पोजेबल दस्ताने।
- कैंची एवं चिमटी।
- त्रिकोणीय पट्टी।
- थर्मामीटर तथा आवश्यक प्राथमिक उपचार निर्देश।
कार्य—
- छोटे घावों को साफ करके ढकने में सहायता करना।
- रक्तस्राव को नियंत्रित करने के लिए पट्टी एवं दबाव देने में सहायता करना।
- घायल भाग को अस्थायी सहारा देना।
- चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध होने तक घायल अथवा बीमार व्यक्ति की स्थिति को स्थिर रखने में सहायता करना।
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