वस्तुनिष्ठ प्रश्न
प्रश्न 1. विद्युत धारा का मात्रक है-
(a) कूलॉम
(b) एम्पियर
(c) सेकण्ड
(d) वोल्ट
उत्तर: (b) एम्पियर। किसी चालक के अनुप्रस्थ काट से प्रति इकाई समय में प्रवाहित विद्युत आवेश की मात्रा को विद्युत धारा कहते हैं। इसका SI मात्रक एम्पियर (A) है।
प्रश्न 2. हेमेटाइट किसका अयस्क है?
(a) सोना
(b) ताँबा
(c) लोहा
(d) कैल्सियम
उत्तर: (c) लोहा। हेमेटाइट लोहे का प्रमुख अयस्क है और इसका रासायनिक सूत्र Fe2O3 है।
प्रश्न 3. निम्नलिखित में से कौन-सा मिश्रधातु है?
(a) पीतल
(b) ताँबा
(c) जस्ता
(d) टिन
उत्तर: (a) पीतल। पीतल (Brass) ताँबा और जस्ता से बनी मिश्रधातु है, जबकि ताँबा, जस्ता और टिन स्वयं धात्विक तत्व हैं।
प्रश्न 4. भारत में एनीमिया के कारण हैं-
(a) गरीबी
(b) अज्ञानता
(c) गन्दा रहन-सहन
(d) उपर्युक्त सभी
उत्तर: (d) उपर्युक्त सभी। गरीबी, पोषण एवं स्वास्थ्य सम्बन्धी जानकारी की कमी तथा अस्वच्छ परिस्थितियाँ एनीमिया के जोखिम को अप्रत्यक्ष रूप से बढ़ा सकती हैं। एनीमिया के प्रत्यक्ष कारणों में विशेष रूप से आयरन एवं अन्य पोषक तत्त्वों की कमी, रक्तस्राव, संक्रमण, दीर्घकालिक रोग तथा कुछ वंशानुगत रक्त विकार शामिल हैं।
प्रश्न 5. उत्परिवर्तन का कारण है-
(a) जीन परिवर्तन
(b) जीवन संघर्ष
(c) उद्विकास
(d) प्राकृतिक चयन
उत्तर: (a) जीन परिवर्तन। आनुवंशिक पदार्थ में होने वाला अचानक एवं स्थायी परिवर्तन उत्परिवर्तन कहलाता है। यह जीन अथवा गुणसूत्र में परिवर्तन के कारण हो सकता है।
अति लघु उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 6. पिग आयरन किसे कहते हैं?
उत्तर: वात्या भट्ठी में लौह अयस्क के अपचयन से प्राप्त उच्च कार्बनयुक्त अशुद्ध लोहे को पिग आयरन कहते हैं। इसमें सामान्यतः लगभग 3.5–4.5% कार्बन होता है।
प्रश्न 7. विद्युत धारा का ऊष्मीय प्रभाव किसे कहते हैं?
उत्तर: किसी चालक में विद्युत धारा प्रवाहित करने पर उसमें ऊष्मा उत्पन्न होने की घटना को विद्युत धारा का ऊष्मीय प्रभाव कहते हैं।
प्रश्न 8. रक्त वर्ग (Blood Group) कितने प्रकार का होता है?
उत्तर: ABO प्रणाली के अनुसार रक्त के चार मुख्य समूह—A, B, AB और O होते हैं। Rh कारक को शामिल करने पर इनके धनात्मक एवं ऋणात्मक रूप मिलाकर सामान्यतः आठ रक्त प्रकार बताए जाते हैं।
प्रश्न 9. योग्यतम की उत्तरजीविता का मत किस वैज्ञानिक ने दिया?
उत्तर: हर्बर्ट स्पेंसर ने “योग्यतम की उत्तरजीविता” (Survival of the Fittest) पद का प्रयोग किया था। बाद में डार्विन ने भी इसे प्राकृतिक चयन की व्याख्या में अपनाया।
प्रश्न 10. थैलेसीमिया रोग के क्या लक्षण हैं?
उत्तर: थैलेसीमिया में एनीमिया, थकान, कमजोरी, पीलापन/पीलिया, बच्चों में धीमी वृद्धि तथा गंभीर अवस्था में चेहरे की हड्डियों में परिवर्तन जैसे लक्षण हो सकते हैं।
प्रश्न 11. खाद्य श्रृंखला क्या है?
उत्तर: जीवों का वह क्रम जिसमें भोजन और ऊर्जा एक जीव से दूसरे जीव तक स्थानान्तरित होते हैं, खाद्य श्रृंखला कहलाती है; जैसे—घास → टिड्डा → मेढक → साँप।
लघु उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 12. धातु तथा अधातु में अन्तर लिखिए।
उत्तर:
| धातु | अधातु |
|---|---|
| धातुएँ सामान्यतः ऊष्मा और विद्युत की सुचालक होती हैं। | अधातुएँ सामान्यतः ऊष्मा और विद्युत की कुचालक होती हैं; ग्रेफाइट इसका प्रमुख अपवाद है। |
| धातुएँ सामान्यतः चमकीली होती हैं। | अधातुएँ सामान्यतः चमकहीन होती हैं; आयोडीन इसका प्रमुख अपवाद है। |
| धातुएँ सामान्यतः आघातवर्ध्य एवं तन्य होती हैं। | ठोस अधातुएँ सामान्यतः भंगुर होती हैं तथा आघातवर्ध्य या तन्य नहीं होतीं। |
| धातुएँ सामान्यतः ध्वन्यात्मक होती हैं। | अधातुएँ सामान्यतः ध्वन्यात्मक नहीं होतीं। |
| अनेक धातुएँ तनु अम्लों से अभिक्रिया करके हाइड्रोजन गैस उत्पन्न करती हैं। | अधातुएँ सामान्यतः तनु अम्लों से हाइड्रोजन गैस मुक्त नहीं करतीं। |
प्रश्न 13. चुम्बक के गुण एवं इसके उपयोग लिखिए।
उत्तर: चुम्बक वह पदार्थ है जो लोहा, निकेल, कोबाल्ट जैसे चुम्बकीय पदार्थों को आकर्षित करता है। इसके प्रमुख गुण एवं उपयोग निम्नलिखित हैं—
चुम्बक के गुण—
- प्रत्येक चुम्बक के दो ध्रुव—उत्तर और दक्षिण होते हैं।
- समान ध्रुव एक-दूसरे को प्रतिकर्षित तथा असमान ध्रुव आकर्षित करते हैं।
- चुम्बकीय ध्रुव सदैव जोड़े में पाए जाते हैं; अकेला चुम्बकीय ध्रुव प्राप्त नहीं होता।
- चुम्बक का आकर्षण उसके दोनों ध्रुवों पर सर्वाधिक होता है।
- स्वतन्त्र रूप से लटकाया गया चुम्बक उत्तर-दक्षिण दिशा में ठहरता है।
उपयोग—
- दिक्सूचक (Compass) में दिशा ज्ञात करने के लिए।
- विद्युत मोटर एवं जनरेटर में।
- लाउडस्पीकर, हेडफोन तथा माइक्रोफोन में।
- लोहे एवं इस्पात की वस्तुओं को अलग करने तथा उठाने में।
प्रश्न 14. प्राथमिक उपचार के लिए कौन-कौन सी आवश्यक बातें जरूरी हैं?
उत्तर: प्राथमिक उपचार देते समय सबसे पहले स्वयं, घायल व्यक्ति तथा आसपास के स्थान की सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए। इसके बाद घायल की स्थिति का शीघ्र आकलन कर आवश्यकता के अनुसार सहायता दी जाती है। प्रमुख बातें हैं—
- घायल व्यक्ति की चेतना एवं श्वसन की जाँच करना।
- गम्भीर स्थिति में तुरन्त चिकित्सकीय सहायता/एम्बुलेंस बुलाना।
- अधिक रक्तस्राव होने पर साफ कपड़े या पट्टी से सीधे दबाव देकर रक्तस्राव रोकना।
- घाव को स्वच्छ रखना तथा अनावश्यक रूप से छेड़ना नहीं।
- हड्डी टूटने की आशंका में प्रभावित भाग को अनावश्यक रूप से न हिलाना।
- बेहोश व्यक्ति को जबरन भोजन, पानी या दवा नहीं देनी चाहिए।
प्रश्न 15. मेण्डलीफ के अनुसार संक्रमण तत्व क्या है?
उत्तर: प्रश्न की भाषा ऐतिहासिक रूप से सटीक नहीं है। आधुनिक परिभाषा के अनुसार वे तत्व जिनके परमाणु में d-कक्षक अपूर्ण होता है अथवा जो ऐसा धनायन बनाते हैं जिसमें d-कक्षक अपूर्ण रहता है, संक्रमण तत्व कहलाते हैं।
ये आवर्त सारणी के d-ब्लॉक के मध्य भाग में पाए जाते हैं। Fe, Co, Ni, Cu आदि इसके उदाहरण हैं। इनमें परिवर्तनशील ऑक्सीकरण अवस्थाएँ, रंगीन आयन/यौगिक बनाने की प्रवृत्ति तथा उत्प्रेरकीय गुण प्रायः पाए जाते हैं।
प्रश्न 16. विद्युत बल्ब का नामांकित चित्र बनाइए।
उत्तर: विद्युत बल्ब विद्युत धारा के ऊष्मीय प्रभाव पर कार्य करता है। इसके अन्दर उच्च प्रतिरोध और उच्च गलनांक वाला टंगस्टन तन्तु होता है। विद्युत धारा प्रवाहित होने पर यह अत्यधिक गर्म होकर श्वेत तप्त हो जाता है और प्रकाश उत्पन्न करता है।
प्रश्न 17. एड्स रोग के लक्षणों को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: एड्स (AIDS) HIV संक्रमण की उन्नत अवस्था है, जिसमें शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली अत्यधिक कमजोर हो जाती है। संक्रमित व्यक्ति में प्रारम्भ में कोई लक्षण न भी हो सकते हैं, लेकिन रोग बढ़ने पर निम्न लक्षण दिखाई दे सकते हैं—
- लगातार या बार-बार बुखार आना।
- बिना कारण वजन कम होना।
- लम्बे समय तक दस्त रहना।
- अत्यधिक थकान और कमजोरी।
- लसीका ग्रन्थियों में सूजन।
- बार-बार अथवा गंभीर संक्रमण होना।
- टीबी, गंभीर जीवाणु/फंगल संक्रमण तथा कुछ प्रकार के कैंसर जैसे अवसरवादी रोग विकसित होना।
केवल लक्षणों के आधार पर HIV/AIDS की पुष्टि नहीं की जा सकती; इसके लिए निर्धारित HIV परीक्षण आवश्यक होता है।
प्रश्न 18. दीर्घाकार आवर्त सारणी के दोष के बारे में बताइए।
उत्तर: आधुनिक दीर्घाकार आवर्त सारणी परमाणु क्रमांक एवं इलेक्ट्रॉनिक विन्यास पर आधारित होने के कारण अत्यन्त उपयोगी है, फिर भी इसकी कुछ सीमाएँ हैं—
- हाइड्रोजन की स्थिति: हाइड्रोजन में समूह 1 तथा समूह 17 दोनों के तत्वों से कुछ समानताएँ हैं, इसलिए इसकी स्थिति पूर्णतः निर्विवाद नहीं है।
- हीलियम की स्थिति: हीलियम का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 1s2 है, फिर भी रासायनिक निष्क्रियता के कारण इसे p-ब्लॉक के समूह 18 में रखा जाता है।
- लैन्थेनाइड एवं ऐक्टिनाइड: इन तत्वों को मुख्य आवर्त सारणी से अलग नीचे दो पंक्तियों में प्रदर्शित करना पड़ता है, जिससे सारणी की निरन्तरता टूटती है।
इसके बावजूद आधुनिक दीर्घाकार आवर्त सारणी पुरानी आवर्त सारणियों की अधिकांश कमियों को दूर करती है।
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