वस्तुनिष्ठ प्रश्न
प्रश्न 1. सतत् विकास के तीन आयाम हैं—
(a) आर्थिक आयाम
(b) सामाजिक आयाम
(c) पर्यावरणीय आयाम
(d) उपर्युक्त सभी
उत्तर: (d) उपर्युक्त सभी
सतत् विकास के तीन प्रमुख आयाम आर्थिक, सामाजिक और पर्यावरणीय हैं। ये तीनों परस्पर सम्बन्धित हैं और इनके संतुलित समन्वय से सतत् विकास सम्भव होता है।
प्रश्न 2. व्यक्तित्व की समाज द्वारा उत्पन्न की जाने वाली शान्ति प्रक्रिया के प्रमुख तथ्य हैं—
(a) संवेगात्मक स्थिरता
(b) वैज्ञानिक दृष्टिकोण
(c) सांस्कृतिक विकास
(d) उपर्युक्त सभी
उत्तर: (d) उपर्युक्त सभी
संवेगात्मक स्थिरता, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और सांस्कृतिक विकास व्यक्ति के सकारात्मक सामाजिक विकास तथा शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व में सहायक होते हैं।
प्रश्न 3. राष्ट्रीयता है—
(a) देशभक्ति का पुराना प्रत्यय
(b) देशभक्ति का नया प्रत्यय
(c) देशभक्ति का समान प्रत्यय
(d) विघटन प्रत्यय
उत्तर: (b) देशभक्ति का नया प्रत्यय (परीक्षा-अपेक्षित उत्तर)
यह प्रश्न पाठ्यपुस्तक-विशिष्ट शब्दावली पर आधारित है। राष्ट्रीयता और देशभक्ति परस्पर सम्बन्धित अवधारणाएँ हैं, परन्तु दोनों को पूर्णतः समान नहीं माना जाता। दिए गए विकल्पों में (b) अपेक्षित उत्तर है।
प्रश्न 4. लोकतन्त्र का मूल सिद्धान्त नहीं है—
(a) विशेषाधिकार
(b) स्वतन्त्रता
(c) समानता
(d) बन्धुत्व
उत्तर: (a) विशेषाधिकार
स्वतन्त्रता, समानता और बन्धुत्व लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक मूल्यों में सम्मिलित हैं, जबकि किसी विशेष वर्ग को विशेषाधिकार देना लोकतांत्रिक समानता के सिद्धान्त के अनुरूप नहीं है।
प्रश्न 5. सतत् विकास के लिए आवश्यक है—
(a) शुद्ध एवं स्वच्छ पर्यावरण
(b) आर्थिक स्थिरता का अभाव
(c) संसाधनों का कम प्रयोग
(d) असन्तुलित विकास
उत्तर: (a) शुद्ध एवं स्वच्छ पर्यावरण
दिए गए विकल्पों में शुद्ध एवं स्वच्छ पर्यावरण सतत् विकास के लिए आवश्यक है। सतत् विकास का उद्देश्य संसाधनों का केवल ‘कम’ प्रयोग करना नहीं, बल्कि उनका विवेकपूर्ण एवं टिकाऊ उपयोग करना है।
अति लघु उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 6. नैतिकता क्या है?
उत्तर: उचित-अनुचित, अच्छा-बुरा और कर्तव्य-अकर्तव्य के सम्बन्ध में व्यक्ति के आचरण का मार्गदर्शन करने वाले मूल्यों एवं मानदण्डों को नैतिकता कहते हैं।
प्रश्न 7. अष्टांग योग किसे कहते हैं?
उत्तर: पतंजलि के योग के आठ अंग— यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान और समाधि— सामूहिक रूप से अष्टांग योग कहलाते हैं।
प्रश्न 8. पुरुषार्थ चतुष्टय का क्या अर्थ है?
उत्तर: भारतीय चिन्तन में मानव-जीवन के चार प्रमुख पुरुषार्थ— धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष— पुरुषार्थ चतुष्टय कहलाते हैं।
प्रश्न 9. साइबर बुलिंग का क्या अर्थ है?
उत्तर: इंटरनेट, सोशल मीडिया, मैसेजिंग प्लेटफॉर्म या मोबाइल जैसी डिजिटल तकनीकों द्वारा किसी व्यक्ति को बार-बार डराने, अपमानित करने या परेशान करने वाले व्यवहार को साइबर बुलिंग कहते हैं।
प्रश्न 10. तनाव प्रबन्ध कौशल का क्या अभिप्राय है?
उत्तर: तनाव के कारणों को पहचानकर व्यायाम, विश्राम, समय-प्रबन्धन, सकारात्मक सोच, सामाजिक सहयोग आदि उपायों से तनाव को नियंत्रित करने की क्षमता को तनाव-प्रबन्ध कौशल कहते हैं।
प्रश्न 11. राष्ट्रीय एकता की क्या आवश्यकता है?
उत्तर: राष्ट्रीय एकता विविधताओं के बीच नागरिकों में एकता, सहयोग, परस्पर सम्मान और साझा राष्ट्रीय उत्तरदायित्व की भावना विकसित करके सामाजिक सद्भाव और राष्ट्रीय विकास में सहायक होती है।
लघु उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 12. मूल्यों की प्रकृति को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: मूल्य वे मानदण्ड और आदर्श हैं जिनके आधार पर व्यक्ति किसी व्यवहार, वस्तु, विचार या लक्ष्य को उचित-अनुचित, अच्छा-बुरा अथवा वांछनीय-अवांछनीय मानता है। मूल्यों की प्रकृति के सम्बन्ध में तीन प्रमुख मत बताए जाते हैं—
- आत्मनिष्ठ मत: इस मत के अनुसार मूल्य व्यक्ति की रुचियों, इच्छाओं, अनुभवों, आवश्यकताओं और व्यक्तिगत पसन्द से सम्बन्धित होते हैं। इसलिए एक ही वस्तु या व्यवहार का मूल्य अलग-अलग व्यक्तियों के लिए भिन्न हो सकता है।
- वस्तुनिष्ठ मत: इस मत के अनुसार कुछ मूल्यों का महत्त्व केवल किसी व्यक्ति की व्यक्तिगत पसन्द पर निर्भर नहीं होता, बल्कि उन्हें व्यापक रूप से वांछनीय और महत्त्वपूर्ण माना जाता है।
- आपेक्षिक मत: इस मत के अनुसार मूल्यों पर समाज, संस्कृति, समय और परिस्थितियों का प्रभाव पड़ता है। इसलिए विभिन्न समाजों और कालों में मूल्यों की प्राथमिकताएँ बदल सकती हैं।
प्रश्न 13. चरित्र निर्माण का अर्थ स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: चरित्र निर्माण से आशय व्यक्ति में ऐसे नैतिक मूल्यों, आदतों और व्यवहारों का विकास करना है जो उसके आचरण को उचित दिशा प्रदान करें। चरित्र व्यक्ति के व्यवहार, निर्णय और दूसरों के प्रति उसके आचरण में प्रकट होता है।
सत्य, ईमानदारी, उत्तरदायित्व, आत्मानुशासन, न्याय, करुणा, सहयोग और कर्तव्यनिष्ठा जैसे गुण चरित्र-निर्माण के महत्त्वपूर्ण आधार हैं। परिवार, विद्यालय, शिक्षक, सामाजिक वातावरण तथा व्यक्ति के अपने अनुभव चरित्र के विकास में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
प्रश्न 14. वैश्विक दृष्टि से शान्ति शिक्षा की आवश्यकता को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: वर्तमान विश्व में विभिन्न देशों और समाजों के बीच परस्पर निर्भरता बढ़ी है। साथ ही हिंसा, संघर्ष, असमानता, भेदभाव, पर्यावरणीय संकट और मानवाधिकार से जुड़ी चुनौतियाँ भी उपस्थित हैं। इसलिए वैश्विक दृष्टि से शान्ति शिक्षा अत्यन्त आवश्यक है।
- यह विभिन्न देशों, संस्कृतियों और समुदायों के प्रति सम्मान एवं सहिष्णुता विकसित करती है।
- यह संवाद, सहयोग और अहिंसक संघर्ष-समाधान के कौशल विकसित करती है।
- यह मानवाधिकार, समानता और सामाजिक न्याय के प्रति जागरूक बनाती है।
- यह विश्व-बन्धुत्व और वैश्विक नागरिकता की भावना विकसित करती है।
- यह पूर्वाग्रह, घृणा और हिंसा के स्थान पर शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व को प्रोत्साहित करती है।
- यह मानव तथा प्रकृति के बीच संतुलित और उत्तरदायी सम्बन्ध की समझ विकसित करती है।
प्रश्न 15. स्वस्थ साथी सम्बन्धों को बढ़ावा देने में अभिभावकों की क्या भूमिका है?
उत्तर: बच्चों के स्वस्थ साथी-सम्बन्धों के विकास में अभिभावकों की महत्त्वपूर्ण भूमिका होती है। अभिभावक बच्चों को मित्रता, सहयोग, सम्मान, सहानुभूति और विवादों के शांतिपूर्ण समाधान का व्यवहार सिखा सकते हैं।
- बच्चे से उसके मित्रों और साथियों के विषय में खुलकर एवं नियमित बातचीत करें।
- अच्छे मित्र चुनने और स्वस्थ व्यक्तिगत सीमाएँ बनाए रखने का मार्गदर्शन दें।
- साझा खेल, समूह-कार्य और सामाजिक गतिविधियों में भाग लेने के अवसर दें।
- साथियों के दबाव, बुलिंग या दुर्व्यवहार की स्थिति में बच्चे की बात ध्यान से सुनें और सहायता करें।
- मतभेद होने पर संवाद, सहानुभूति और शांतिपूर्ण समाधान की आदत विकसित करें।
प्रश्न 16. व्यक्तित्व की कोई पाँच विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर: व्यक्तित्व के पंच-कारक मॉडल के अनुसार पाँच प्रमुख विशेषक निम्नलिखित हैं—
- अनुभव के प्रति खुलापन: नवीन विचारों, अनुभवों और कल्पनाशीलता के प्रति ग्रहणशीलता।
- कर्तव्यनिष्ठा: व्यवस्थित, जिम्मेदार, अनुशासित और लक्ष्य के प्रति प्रतिबद्ध रहने की प्रवृत्ति।
- बहिर्मुखता: सामाजिक सक्रियता, मिलनसारिता और दूसरों से अन्तःक्रिया करने की प्रवृत्ति।
- सहमतिजन्यता: सहयोग, मैत्री, विश्वास और दूसरों के प्रति संवेदनशीलता की प्रवृत्ति।
- न्यूरोटिसिज़्म/भावनात्मक अस्थिरता: चिन्ता, तनाव, भय तथा अन्य नकारात्मक भावनाओं को अधिक अनुभव करने की प्रवृत्ति। इसके विपरीत छोर पर भावनात्मक स्थिरता होती है।
प्रश्न 17. महात्मा गाँधी के अनुसार शिक्षा का उद्देश्य बताइए।
उत्तर: महात्मा गाँधी शिक्षा को बालक के शरीर, मन और आत्मा में निहित सर्वोत्तम गुणों के सर्वांगीण विकास का माध्यम मानते थे। उनके लिए केवल साक्षरता ही शिक्षा नहीं थी; शिक्षा को जीवन, श्रम, चरित्र और आत्मनिर्भरता से जुड़ा होना चाहिए।
गाँधीजी के अनुसार शिक्षा के प्रमुख उद्देश्य:
- सर्वांगीण विकास: शरीर, मन और आत्मा का संतुलित विकास करना।
- चरित्र निर्माण: सत्य, अहिंसा, नैतिकता और आत्मानुशासन का विकास करना।
- स्वावलम्बन: उपयोगी हस्तकला और उत्पादक कार्य के माध्यम से बालक को आत्मनिर्भर बनाना।
- श्रम की गरिमा: शारीरिक श्रम के प्रति सम्मान विकसित करना।
- मातृभाषा के माध्यम से शिक्षा: बालक को उसकी अपनी भाषा के माध्यम से प्रभावी शिक्षा देना।
- सामाजिक विकास: सहयोग, सेवा, उत्तरदायित्व तथा समाजोपयोगी जीवन की भावना विकसित करना।
प्रश्न 18. साम्प्रदायिकता के दुष्परिणाम लिखिए।
उत्तर: साम्प्रदायिकता से आशय ऐसी संकीर्ण प्रवृत्ति से है जिसमें धार्मिक पहचान के आधार पर अन्य समुदायों के प्रति वैमनस्य, भेदभाव या विरोध उत्पन्न होता है। इसके प्रमुख दुष्परिणाम हैं—
- विभिन्न समुदायों के बीच अविश्वास और सामाजिक तनाव बढ़ सकता है।
- सामाजिक सद्भाव और राष्ट्रीय एकता कमजोर हो सकती है।
- साम्प्रदायिक हिंसा होने पर जन-धन की हानि हो सकती है।
- भय और असुरक्षा का वातावरण उत्पन्न हो सकता है।
- सामाजिक एवं आर्थिक गतिविधियाँ प्रभावित हो सकती हैं।
- समान नागरिकता और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व की भावना को नुकसान पहुँच सकता है।
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