वस्तुनिष्ठ प्रश्न
प्रश्न 1. ऐसे शब्द क्या कहलाते हैं, जो संस्कृत से विकृत होकर हिन्दी में आये हैं -
(a) तद्भव
(b) तत्सम
(c) देशज
(d) विदेशी
उत्तर: (a) ऐसे शब्द जो संस्कृत से विकृत होकर हिन्दी भाषा में प्रयोग किये जाते हैं उन्हें तद्भव शब्द कहा जाता है। जैसे आग, वीर, छत आदि। हिन्दी भाषा में संस्कृत के कुछ शब्द मूल रूप में ज्यों के त्यों प्रयोग किए जाते हैं, उन्हें तत्सम शब्द कहते हैं। जैसे अग्नि, अश्रु, गृह आदि।
प्रश्न 2. इनमें से कौन-सी रचना महादेवी वर्मा की नहीं है?
(a) ठलुआ क्लब
(b) नीहार
(c) नीरजा
(d) गिल्लू
उत्तर: (a) महादेवी वर्मा की निम्न रचनाएँ हैं: नीरजा, नीहार, गिल्लू, रश्मि, यामा तथा अतीत के चलचित्र आदि। ठलुआ क्लब की रचना बाबू गुलाबराय ने की है।
प्रश्न 3. 'पूरी तरह से मना कर देना' इसके लिए सटीक मुहावरा है-
(a) अन्धे की लकड़ी
(b) अक्ल का दुश्मन
(c) अँगूठा दिखाना
(d) अक्ल पर पत्थर पड़ना
उत्तर: (c) 'पूरी तरह से मना कर देना' के लिए सटीक मुहावरा 'अँगूठा दिखाना' है।
- अन्धे की लकड़ी: एकमात्र सहारा
- अक्ल का दुश्मन: मुर्ख या बेवकूफी के काम करना
- अक्ल पर पत्थर पड़ना: बुद्धि नष्ट होना
प्रश्न 4. 'मधुशाला' के रचयिता है-
(a) जयशंकर प्रसाद
(b) महादेवी वर्मा
(c) हरिवंशराय बच्चन
(d) सूर्यकान्त त्रिपाठी
उत्तर: (c) हरिवंश राय बच्चन उत्तर छायावाद काल के प्रमुख कवियों में से एक थे। उनकी प्रसिद्ध कृति मधुबाला है। अन्य रचनायें मधुकलश, मधुशाला, निशा निमंत्रण, एकांत संगीत तथा आत्म परिचय आदि है।
प्रश्न 5. अध्यापन, अधिगम प्रक्रिया का महत्वपूर्ण अंग है-
(a) मूल्यांकन
(b) मापन
(c) छात्र
(d) शिक्षक
उत्तर: (c) अध्यापन, अधिगम प्रक्रिया का महत्वपूर्ण अंग छात्र है क्योंकि सभी गतिविधियाँ और पूरी प्रक्रिया शिक्षार्थी/छात्रों के इर्द-गिर्द केन्द्रित और नियोजित होती है।
अति लघु उत्तरीय प्रश्न
अति लघु उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 6. कथा सम्राट के रूप में हिन्दी में कौन विख्यात है?
उत्तर: कथा सम्राट के रूप में हिन्दी में मुंशी प्रेमचन्द्र विख्यात है। क्योंकि इन्होंने हिन्दी कहानी को जन-जीवन की समस्याओं से जोड़ने का सराहनीय प्रयास किया।
प्रश्न 7. डॉ. हरिवंशराय बच्चन की आत्मकथा का नाम लिखिए।
उत्तर: हरिवंशराय बच्चन हिन्दी भाषा के एक कवि और लेखक थे। 'क्या भूलूँ क्या याद करूँ' हरिवंश राय बच्चन की बहुप्रशंसित आत्मकथा तथा हिन्दी साहित्य की एक कालजयी कृति है। इसे चार खण्डों में विभाजित किया गया है: क्या भूलूँ क्या याद करूँ, नीड़ का निर्माण फिर, बसेरे से दूर, दशद्वार से सोपान तक।
प्रश्न 8. 'राम ने रावण को मारा' वाक्य को कर्मवाच्य में परिवर्तित कीजिए।
उत्तर: कर्तृवाच्य: 'राम ने रावण को मारा'
कर्मवाच्य: रावण राम द्वारा मारा गया।
इस वाक्य में क्रिया 'मारा गया' का रूप बदलकर कर्म 'रावण' को प्रधानता दी गई है।
प्रश्न 9. 'आँधी खोपड़ी' मुहावरे का अर्थ लिखिए।
उत्तर: 'आँधी खोपड़ी' मुहावरे का अर्थ है मूर्ख होना। जो किसी कार्य को सही करने के बजाये उसे और अधिक उलझा देता है उसे मूर्ख की श्रेणी में रखा जाता है।
वाक्य प्रयोग: बृजेश तो आँधी खोपड़ी का आदमी है, उससे बात करेंगे तो अपना ही समय और दिमाग खराब होगा।
प्रश्न 10. सुलेख किसे कहते हैं?
उत्तर: सुलेख अर्थात् लिखावट सुधारने के लिए लिखा गया लेख सुलेख कहलाता है। सुलेख को सुन्दर लेखन या हस्त लेख कहा जाता है। इसमें लिपि को सुन्दर और आकर्षक तरीके से लिखा जाता है। सुलेख का अभ्यास एकाग्रता, धैर्य, और कल्पनाशीलता को विकसित करने में मदद करता है। अतः सुलेख शब्द का प्रयोग हाथ से लिखे गए सुंदर अक्षरों के लिए होता है। सुलेख को अंग्रेजी में (Colligraphy) तथा (Good hand writing) कहते हैं।
प्रश्न 11. किसी एक राष्ट्रीय पर्व पर चार पंक्तियां लिखिए।
उत्तर: गाँधी जयंती (राष्ट्रीय पर्व) -
- गाँधी जयंती हमारे देश का एक राष्ट्रीय पर्व है। यह हर वर्ष 2 अक्टूबर को मनाया जाता है। यह महात्मा गाँधी जी के जन्मदिवस पर मनाया जाता है। इस दिन भारत में सार्वजनिक अवकाश होता है।
- महात्मा गांधी को बापू तथा राष्ट्रपिता के नाम से भी जाना जाता है।
- भारत को आजाद कराने में इन्होंने महत्पूर्ण योगदान दिया था।
- यह सत्य, शांति और अंहिसा के समर्थक थे।
प्रश्न 12. लेखन में सुलेख का महत्व बताइए।
उत्तर: सुलेख को सुन्दर लेखन या हस्त लेख कहा जाता है। इसमें लिपि को सुन्दर और आकर्षक तरीके से लिखा जाता है। सुलेख का अभ्यास एकाग्रता, धैर्य, और कल्पनाशीलता को विकसित करने में मदद करता है।
सुलेख का महत्व: लिखना सीखाने का अर्थ केवल उतना ही नहीं है कि बच्चे अक्षरों, शब्दों अथवा वाक्यों को लिखने लगें, अपितु यह भी आवश्यक होता है कि वे सुन्दर और सुडौल अक्षरों की रचना करें और उचित गति से लिखें। सुलेख बच्चों की शिक्षा का एक आवश्यक पहलू है। अध्यापक का उद्देश्य अपने छात्रों को शुद्ध, सरल और प्रवाहपूर्ण भाषा लिखना सिखाना है। सुलेख के समुचित अभ्यास के बिना अध्ययन का एक पक्ष अधूरा छूट जाता है। पी.डी पटनायक के शब्दों में, 'निःसन्देह ही लेखन में सुलेख का उतना महत्त्व है जितना भाषण में सुउच्चारण का' सुलेख यदि शुद्ध नहीं होता तो भाषा ज्ञान की स्थिति फिर भी अधूरी कही जायेगी। लिखित कार्य में शुद्ध लेखन का अत्यधिक महत्त्व होता है।
प्रश्न 13. मुहावरा एवं लोकोक्तियों के बीच अन्तर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: मुहावरा एवं लोकोक्तियों में अन्तर निम्न हैं -
| मुहावरा | लोकोक्ति |
|---|---|
| 1. मुहावरा एक वाक्यांश होता है। | 1. लोकोक्ति पूर्ण वाक्य होती है। |
| 2. मुहावरें में काल, वचन और पुरुष के अनुरूप परिवर्तन हो जाता है। | 2. लोकोक्ति का स्वरूप अपरिवर्तित रहता है। |
| 3. इसका क्षेत्र सीमित होता है। | 3. इसका क्षेत्र विस्तृत होता है। |
| 4. मुहावरे की उत्पत्ति अरबी भाषा के 'मुहाविर' से मानी जाती है। | 4. लोकोक्ति की उत्पत्ति 'लोक' में प्रचलित उक्ति या कहावतों से मानी जाती है। |
उदाहरण:
- मुहावरा- अगूंठा दिखाना, अँधे की लाठी होना आदि।
- लोकोक्ति- काला अक्षर भैंस बराबर, भागते भूत को लँगोटी भली।
प्रश्न 14. 'दीपावली' पर्व पर 8 पंक्तियाँ लिखिए।
उत्तर: दीपावली पर्व:
- दिपावली हिन्दुओं का पवित्र त्योहार है।
- यह त्योहार कार्तिक मास की अमावस्या के दिन मनाया जाता है। इसे दीपों का त्यौहार भी कहते हैं।
- इस दिन भगवान राम 14 वर्ष का वनवास पूरा करके अयोध्या लौटे थे। तभी से यह त्यौहार बड़े धूमधाम से मनाया जाता है।
- इस अवसर पर सभी अपने घरों तथा दुकानों की सफाई करते हैं।
- घरों को दीपो और मोमबत्तियों से सजाया जाता है।
- इस दिन लोग पटाखे भी जलाते हैं।
- इस दिन माता लक्ष्मी और भगवान गणेश जी की पूजा की जाती है।
- दिपावली का त्योहार हमें अंधकार पर प्रकाश की विजय की शिक्षा देता है।
प्रश्न 15. प्रमुख विराम चिह्नों को उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: विराम चिह्न का अर्थ है ठहराव, विश्राम, रूकना अर्थात् वाक्य लिखते समय विराम को प्रकट करने के लिए लगाये जाने वाले चिह्न को ही 'विराम चिह्न' कहते हैं।
जैसे:
मोहन पढ़ रहा है।
ताजमहल किसने बनाया ? (प्रश्नवाचक)
विराम चिह्न के प्रकार:
- अल्प विराम (,): जहाँ थोड़ी सी देर रूकना पड़े, वहाँ अल्प विराम चिह्न का प्रयोग किया जाता है। उदाहरण: राम, सीता, लक्ष्मण और हनुमान ये सभी भगवान के रूप में पूजे जाते हैं।
- अर्द्ध विराम (;): जहाँ अल्प विराम की अपेक्षा कुछ अधिक देर तक रूकना पड़े, वहाँ अर्द्ध विराम का प्रयोग करते हैं। उदाहरण: सूर्योदय हो गया; चिड़ियाँ चहकने लगी और कमल खिल गए।
- पूर्ण विराम (।): जब वाक्य खत्म हो जाता है, तब वाक्य के अन्त में पूर्ण विराम (।) लगाया जाता है। उदाहरण: राधा खाना खाती है।
- विस्मयादिबोधक चिह्न (!): इसका प्रयोग वाक्य में हर्ष, विषाद, विस्मय, घृणा, आश्चर्य, करूणा, भय इत्यादि का बोध कराने के लिए किया जाता है। उदाहरण: हाय! वह मर गया। वाह! कितना सुन्दर वृक्ष है।
- प्रश्नवाचक चिन्ह (?): इसका प्रयोग प्रश्नवाचक वाक्यों के अंत में किया जाता है। उदाहरण: क्या तुम बाजार जाओगे?
- योजक चिह्न (-): योजन चिह्न का प्रयोग दो पदों के मध्य में किया जाता है। उदाहरण: सुख-दुःख, दिन-रात, लाभ-हानि।
- अवतरण या उद्धरण चिह्न: यह दो प्रकार के होते हैं - (i) एकहरा (ii) दोहरा उद्धरण चिह्न।
(i) एकहरा उद्धरण चिह्न ('): किसी व्यक्ति का नाम या उपनाम या किसी पुस्तक का नाम इकहरे उद्धरण चिह्न द्वारा लिखा जाता है; जैसे 'गोदान' भातरीय कृषक जीवन की व्यथा है।
(ii) दोहरा उद्धरण चिह्न (""): किसी के द्वारा कहे गए कथन या किसी महापुरुष की वाणी को उद्धृत करते समय इनका प्रयोग किया जाता है। जैसे तिलक ने कहा था, "स्वतंत्रता हमारा जन्म सिद्ध अधिकार है।" - लाघव चिह्न / संक्षेपसूचक (o): किसी बड़े तथा प्रसिद्ध शब्द को संक्षेप में लिखने के लिए उस शब्द का पहला अक्षर लिखकर उसके आगे शून्य (0) लगा देते हैं। उदाहरण: डॉक्टर के लिए - डॉ०, पंड़ित के लिए - पं०
- हंसपद (^): विस्मरण या हंसपद चिह्न (^) का प्रयोग लिखते समय किसी शब्द को भूल जाने पर किया जाता है। उदाहरण: राम (^) मथुरा जाएगा।
लघु उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 16. तद्भव एवं तत्सम् शब्दों में अन्तर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: तद्भव एवं तत्सम् शब्दों में अन्तर-
| तद्भव शब्द | तत्सम् शब्द |
|---|---|
| 1. ऐसे शब्द जो संस्कृत से परिवर्तित होकर हिन्दी में प्रचलित हुए हैं। | 1. ऐसे शब्द जो संस्कृत से ज्यों के त्यों हिन्दी में लिए गए है। |
| 2. इसका शाब्दिक अर्थ है- उससे उत्पन्न अर्थात् अपने स्त्रोत संस्कृत से उत्पन्न। | 2. इसका शाब्दिक अर्थ है- उसके समान अर्थात् अपने स्त्रोत संस्कृत के समान। |
| 3. उदाहरण- आँख, मस्तक, सूरज, भाई इत्यादि। | 3. उदाहरण- अक्षि, मस्तक, सूर्य इत्यादि। |
प्रश्न 17. औपचारिक एवं अनौपचारिक परिस्थितियों के अनुरूप भाषा प्रयोग पर अपने विचार लिखिए।
उत्तर: औपचारिक एवं अनौपचारिक परिस्थितियों के अनुरूप भाषा का प्रयोग-
- औपचारिक भाषा में व्याकरण का सख्त पालन किया जाता है, अनौपचारिक भाषा में व्याकरण में नियम लचीले होते हैं।
- औपचारिक भाषा में शैली गम्भीर, तटस्थ और वस्तुनिष्ठ होती है जबकि अनौपचारिक भाषा में शैली हल्की-फुल्की, भावपूर्ण और व्यक्तिपरक होती है।
- नौकरी के लिए आवेदन पत्र लिखना, व्याख्यान देना, बैठक में बात करना आदि औपचारिक भाषा के अन्तर्गत आता है तथा दोस्तों या परिवार के साथ बात करना, सोशल मीडिया पर पोस्ट लिखना आदि अनौपचारिक भाषा के अन्तर्गत आता है।
- औपचारिक भाषा हमेशा शिष्ट एवं विनययुक्त होती हैं तथा अनौपचारिक भाषा में असंसदीय शब्दों का प्रयोग स्वीकार्य है।
- औपचारिक पत्राचार के अन्त में भवदीय का प्रयोग करना पड़ता है। अनौपचारिक पत्राचार में तुम्हारा/तुम्हारी भी लिख सकते हैं।
प्रश्न 18. हिन्दी शिक्षण में मूल्यांकन के महत्व पर प्रकाश डालिए।
उत्तर: हिन्दी शिक्षण में मूल्यांकन का महत्व:
- उद्देश्यों की प्राप्ति में सहायक।
- उपयोगी शिक्षण विधियों के चयन में सहायक।
- विद्यार्थियों की प्रगति में सहायक।
- विद्यार्थियों के वर्गीकरण में सहायक।
- निदानात्मक एवं उपचारात्मक शिक्षण में सहायक।
- विद्यार्थियों को अध्ययन के प्रति प्रेरित करना।
- विद्यार्थियों के मार्गदर्शन में सहायक।
- पाठ्यक्रम के सुधार में सहायक।
- शिक्षा के सुधार तथा गुणवत्ता उन्नयन में सहायक।
- शिक्षण के उद्देश्यों को स्पष्ट करना।