बहुविकल्पीय प्रश्न
प्रश्न 1. 'पटेल एक्ट' सम्बन्धित है—
(a) निःशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा के विरोध से
(b) अनिवार्य प्राथमिक शिक्षा पर बने कानून से
(c) प्राथमिक शिक्षा में गुणात्मक व परिमाणात्मक वृद्धि से
(d) पूर्व-प्राथमिक शिक्षा से
उत्तर: (b) अनिवार्य प्राथमिक शिक्षा पर बने कानून से
पटेल एक्ट विट्ठलभाई पटेल द्वारा प्रस्तुत अनिवार्य प्राथमिक शिक्षा सम्बन्धी विधेयक से विकसित हुआ। बम्बई में 1918 का प्राथमिक शिक्षा कानून इसी प्रयास से सम्बन्धित था।
प्रश्न 2. राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा के अनुसार मार्गदर्शक सिद्धान्त में निहित है—
(a) पाठ्यचर्या का संवर्धन पाठ्यपुस्तक पर केन्द्रित करना
(b) पाठ्यक्रम के कुछ उपविषयों को रटन्त प्रणाली से मुक्त करना
(c) विद्यालय में प्राप्त ज्ञान को बाहरी दुनिया से जोड़ना
(d) कक्षा की गतिविधियों को परीक्षा में कम महत्व देना
उत्तर: (c) विद्यालय में प्राप्त ज्ञान को बाहरी दुनिया से जोड़ना
राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा 2005 का एक प्रमुख मार्गदर्शक सिद्धान्त विद्यालयी ज्ञान को विद्यालय के बाहर के जीवन से जोड़ना है। साथ ही रटन्त अधिगम से दूर जाने और परीक्षा को कक्षा-जीवन से जोड़ने पर भी बल दिया गया है।
प्रश्न 3. 'गोखले विधेयक' प्रस्तुत किया गया था—
(a) 16 मार्च 1910
(b) 20 मार्च 1911
(c) 16 मार्च 1911
(d) 20 अप्रैल 1910
उत्तर: (c) 16 मार्च 1911
गोपाल कृष्ण गोखले ने प्राथमिक शिक्षा को अनिवार्य बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास किए और 16 मार्च 1911 को इससे सम्बन्धित विधेयक प्रस्तुत किया।
प्रश्न 4. हण्टर कमीशन के समक्ष प्राथमिक शिक्षा को अनिवार्य व निःशुल्क करने का प्रस्ताव रखा—
(a) दादाभाई नौरोजी ने
(b) ईश्वरचन्द्र विद्यासागर ने
(c) महात्मा गाँधी ने
(d) जवाहरलाल नेहरू ने
उत्तर: (a) दादाभाई नौरोजी ने
दादाभाई नौरोजी ने हण्टर कमीशन के समक्ष बच्चों के लिए चार वर्ष की अनिवार्य प्राथमिक शिक्षा की माँग रखी थी। ज्योतिराव फुले ने भी इसी आयोग के समक्ष जनसाधारण के लिए प्राथमिक शिक्षा के विस्तार एवं अनिवार्यता पर बल दिया था।
प्रश्न 5. प्राच्य-पाश्चात्य विवाद का जन्म हुआ—
(a) हण्टर आयोग से
(b) 1813 के आज्ञापत्र से
(c) मैकाले के विवरण-पत्र से
(d) वुड के घोषणा-पत्र से
उत्तर: (b) 1813 के आज्ञापत्र से
1813 के चार्टर एक्ट में शिक्षा के लिए धनराशि का प्रावधान किया गया, परन्तु उसके उपयोग और शिक्षा के माध्यम को लेकर प्राच्य-पाश्चात्य विवाद तीव्र हुआ।
प्रश्न 6. शिक्षा आयोग 1964-66 के अध्यक्ष थे—
(a) डॉ. ए. लक्ष्मणस्वामी मुदालियर
(b) श्री एम. टी. व्यास
(c) डॉ. डी. एस. कोठारी
(d) डॉ. ताराचन्द
उत्तर: (c) डॉ. डी. एस. कोठारी
शिक्षा आयोग (1964-66) के अध्यक्ष डॉ. दौलत सिंह कोठारी थे। इसी कारण इसे कोठारी आयोग कहा जाता है।
प्रश्न 7. राष्ट्रीय बालश्रम परियोजना को व्यापक रूप से विस्तार दिया गया—
(a) आठवीं पंचवर्षीय योजना में
(b) नौवीं पंचवर्षीय योजना में
(c) दसवीं पंचवर्षीय योजना में
(d) ग्यारहवीं पंचवर्षीय योजना में
उत्तर: (b) नौवीं पंचवर्षीय योजना में
राष्ट्रीय बाल श्रम परियोजना (NCLP) की शुरुआत 1988 में हुई थी। नौवीं पंचवर्षीय योजना में इसके संशोधित एवं विस्तारित स्वरूप को जारी रखने के लिए व्यापक प्रावधान किए गए।
प्रश्न 8. उ.प्र. के समस्त जिलों में 'स्कूल चलो अभियान' प्रारम्भ हुआ—
(a) वर्ष 2001 से
(b) वर्ष 2002 से
(c) वर्ष 2003 से
(d) वर्ष 2004 से
उत्तर: (b) वर्ष 2002 से
उत्तर प्रदेश में बच्चों के नामांकन एवं विद्यालयी सहभागिता को बढ़ाने के उद्देश्य से स्कूल चलो अभियान वर्ष 2002 से व्यापक स्तर पर चलाया गया।
प्रश्न 9. राष्ट्रीय साक्षरता मिशन की स्थापना के बाद सर्वप्रथम सम्पूर्ण साक्षरता अभियान की शुरुआत हुई—
(a) केरल राज्य में
(b) मध्य प्रदेश में
(c) राजस्थान में
(d) उपर्युक्त में से कोई नहीं
उत्तर: (a) केरल राज्य में
राष्ट्रीय साक्षरता मिशन के बाद पहला व्यापक सम्पूर्ण साक्षरता अभियान 26 जनवरी 1989 को केरल के एर्नाकुलम जिले में प्रारम्भ किया गया। एर्नाकुलम 4 फरवरी 1990 को देश का पहला पूर्ण साक्षर जिला घोषित हुआ।
प्रश्न 10. पूर्व-प्राथमिक शिक्षा सम्बन्धित है—
(a) 0 से 8 वर्ष तक के बच्चों के लिए
(b) 3 से 6 वर्ष तक के बच्चों के लिए
(c) 6 से 14 वर्ष तक के बच्चों के लिए
(d) 6 से 10 वर्ष तक के बच्चों के लिए
उत्तर: (b) 3 से 6 वर्ष तक के बच्चों के लिए
विद्यालयी वर्गीकरण में पूर्व-प्राथमिक शिक्षा सामान्यतः 3 से 6 वर्ष आयु-वर्ग के बच्चों से सम्बन्धित मानी जाती है।
प्रश्न 11. यशपाल समिति का गठन किया गया—
(a) वर्ष 1990 में
(b) वर्ष 1991 में
(c) वर्ष 1992 में
(d) वर्ष 1993 में
उत्तर: (c) वर्ष 1992 में
प्रो. यशपाल की अध्यक्षता में राष्ट्रीय सलाहकार समिति का गठन 1992 में विद्यार्थियों पर शैक्षिक बोझ कम करने के उपाय सुझाने हेतु किया गया। इसकी रिपोर्ट Learning Without Burden 1993 में प्रस्तुत हुई।
प्रश्न 12. बुनियादी शिक्षा से सम्बन्धित नहीं हैं—
(a) महात्मा गाँधी
(b) जाकिर हुसैन
(c) बी. जी. खेर
(d) एस. के. सिन्हा
उत्तर: (d) एस. के. सिन्हा
महात्मा गाँधी ने बुनियादी शिक्षा का प्रतिपादन किया, डॉ. जाकिर हुसैन की समिति ने इसकी विस्तृत योजना तैयार की और बी. जी. खेर भी बुनियादी शिक्षा से सम्बन्धित समितियों एवं उसके क्रियान्वयन-विचार से जुड़े थे। अतः दिए गए विकल्पों में एस. के. सिन्हा अभीष्ट उत्तर है।
प्रश्न 13. पोषाहार वितरण योजना का उद्देश्य नहीं है—
(a) बच्चों का विद्यालय में ठहराव बढ़ाना
(b) बच्चों के पोषण स्तर में सुधार करना
(c) शिक्षा में अपव्यय एवं ड्रॉपआउट कम करना
(d) बच्चों को परीक्षा में अधिक अंक दिलाना
उत्तर: (d) बच्चों को परीक्षा में अधिक अंक दिलाना
पोषाहार अथवा मध्याह्न भोजन योजना का उद्देश्य नामांकन, उपस्थिति और ठहराव बढ़ाने के साथ बच्चों के पोषण स्तर में सुधार करना है। परीक्षा में अधिक अंक दिलाना इसका प्रत्यक्ष उद्देश्य नहीं है।
प्रश्न 14. शिमला शिक्षा सम्मेलन (1901) का आयोजन किया गया था—
(a) लॉर्ड ऑकलैण्ड द्वारा
(b) लॉर्ड रिपन द्वारा
(c) लॉर्ड कर्जन द्वारा
(d) लॉर्ड विलियम बेंटिक द्वारा
उत्तर: (c) लॉर्ड कर्जन द्वारा
शिमला शिक्षा सम्मेलन, 1901 का आयोजन लॉर्ड कर्जन द्वारा भारतीय शिक्षा-व्यवस्था में सुधार एवं प्रशासनिक नियंत्रण के विषय पर विचार करने के लिए किया गया था।
प्रश्न 15. शिक्षा को समवर्ती सूची में स्थान दिया गया—
(a) 1970 ई. में
(b) 1975 ई. में
(c) 1976 ई. में
(d) 1980 ई. में
उत्तर: (c) 1976 ई. में
42वें संविधान संशोधन, 1976 द्वारा शिक्षा को राज्य सूची से हटाकर समवर्ती सूची में रखा गया। इससे शिक्षा पर केन्द्र और राज्य दोनों कानून बना सकते हैं।
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अति लघु उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 16. 'कलकत्ता मदरसा' एवं 'बनारस संस्कृत कॉलेज' की स्थापना किस उद्देश्य से की गई थी?
उत्तर: कलकत्ता मदरसा की स्थापना 1781 में इस्लामी विधि एवं अरबी-फारसी अध्ययन को प्रोत्साहित करने हेतु तथा बनारस संस्कृत कॉलेज की स्थापना 1791 में हिन्दू विधि एवं संस्कृत अध्ययन के लिए की गई थी।
प्रश्न 17. मैकाले की शिक्षा-नीति दोषपूर्ण होने के बावजूद इसका तत्कालीन भारतीय शिक्षा-व्यवस्था पर क्या दूरगामी प्रभाव पड़ा?
उत्तर: मैकाले की नीति से भारत में अंग्रेजी एवं पाश्चात्य शिक्षा का विस्तार हुआ तथा आधुनिक विज्ञान, राजनीतिक विचार और पाश्चात्य साहित्य तक भारतीयों की पहुँच बढ़ी।
प्रश्न 18. प्राथमिक शिक्षा के विस्तार के सम्बन्ध में चार्ल्स वुड की सिफारिशों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर: वुड के घोषणा-पत्र ने प्राथमिक शिक्षा के विस्तार, स्थानीय भाषाओं के प्रयोग, अनुदान-सहायता, शिक्षक-प्रशिक्षण तथा शिक्षा पर सरकार की जिम्मेदारी बढ़ाने पर बल दिया।
प्रश्न 19. प्राथमिक शिक्षा के सन्दर्भ में 'अपव्यय' व 'अवरोधन' का अर्थ स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: अपव्यय का अर्थ शिक्षा-स्तर पूरा करने से पहले विद्यालय छोड़ देना है, जबकि अवरोधन का अर्थ विद्यार्थी का एक ही कक्षा में अपेक्षित समय से अधिक रुक जाना है।
प्रश्न 20. पी-मोस्ट कार्यक्रम का पूरा नाम लिखिए।
उत्तर: P-MOST का पूरा नाम Programme of Mass Orientation of School Teachers है।
प्रश्न 21. एस.ओ.पी.टी. किस स्तर के अध्यापकों हेतु संचालित की गई?
उत्तर: SOPT का पूरा नाम Special Orientation Programme for Primary Teachers है। यह प्राथमिक स्तर के अध्यापकों के सेवाकालीन प्रशिक्षण हेतु संचालित किया गया।
प्रश्न 22. उ.प्र. बेसिक शिक्षा परियोजना मूलतः किन कार्यों से सम्बन्धित है?
उत्तर: इसका सम्बन्ध प्राथमिक शिक्षा की गुणवत्ता, शिक्षक-प्रशिक्षण, शिक्षण-सामग्री, बालिका शिक्षा, समान अवसर एवं संस्थागत सुदृढ़ीकरण से था।
प्रश्न 23. विद्यालयोन्मुखी कार्यक्रम से आप क्या समझते हैं?
उत्तर: विद्यालयोन्मुखी कार्यक्रम वह कार्यक्रम है जो नवप्रवेशी बच्चों को विद्यालय के वातावरण, दिनचर्या एवं प्रारम्भिक सीखने की गतिविधियों से परिचित कर विद्यालय के लिए तैयार करता है।
प्रश्न 24. पूर्व-प्राथमिक शिक्षा परियोजना के अन्तर्गत शिशुओं के सर्वांगीण विकास हेतु कौन-कौन से क्रियाकलाप आयोजित किए जाते हैं?
उत्तर: कहानी, गीत, खेल, चित्रकारी, बातचीत, शारीरिक गतिविधियाँ तथा सामाजिक एवं भाषा-विकास सम्बन्धी गतिविधियाँ आयोजित की जाती हैं।
प्रश्न 25. 'सर्व शिक्षा अभियान' के सफल क्रियान्वयन हेतु सरकार द्वारा कौन-कौन से कार्यक्रम चलाए गए?
उत्तर: इसके अन्तर्गत शिक्षा गारण्टी एवं वैकल्पिक शिक्षा, कस्तूरबा गाँधी बालिका विद्यालय, बालिका शिक्षा कार्यक्रम, शिक्षक-प्रशिक्षण, निःशुल्क पाठ्यपुस्तक तथा नामांकन अभियान जैसे प्रयास किए गए।
प्रश्न 26. कस्तूरबा गाँधी आवासीय बालिका विद्यालयों की मॉनीटरिंग का क्या प्रावधान है?
उत्तर: KGBV की मॉनीटरिंग जनपद एवं विकासखण्ड स्तर के शिक्षा अधिकारियों द्वारा नियमित निरीक्षण के माध्यम से की जाती है, जिसमें शैक्षिक गुणवत्ता, उपस्थिति, भोजन, सुरक्षा और आवासीय व्यवस्था की समीक्षा होती है।
प्रश्न 27. भारत में निःशुल्क तथा अनिवार्य शिक्षा की उन्नति के मार्ग में मुख्य कठिनाइयाँ क्या हैं?
उत्तर: गरीबी, बाल-श्रम, शिक्षक एवं आधारभूत सुविधाओं की कमी, सामाजिक असमानता, ड्रॉपआउट, अपव्यय-अवरोधन तथा शिक्षा की निम्न गुणवत्ता प्रमुख कठिनाइयाँ हैं।
प्रश्न 28. जिला प्राथमिक शिक्षा कार्यक्रम की रणनीतियों के विषय में संक्षेप में लिखिए।
उत्तर: DPEP की प्रमुख रणनीतियाँ थीं— प्राथमिक शिक्षा की पहुँच एवं गुणवत्ता बढ़ाना, बालिका शिक्षा, शिक्षक-दक्षता, सामुदायिक सहभागिता तथा शैक्षिक असमानता कम करना।
प्रश्न 29. 'सम्पूर्ण साक्षरता अभियान' की किन्हीं तीन विशेषताओं का उल्लेख कीजिए।
उत्तर: इसकी प्रमुख विशेषताएँ थीं— जनभागीदारी, समयबद्ध एवं लक्ष्योन्मुखी अभियान तथा जिला-स्तरीय विकेन्द्रीकृत संचालन।
प्रश्न 30. शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 में 'प्रारम्भिक शिक्षा' से क्या आशय है?
उत्तर: शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 में प्रारम्भिक शिक्षा का अर्थ कक्षा 1 से कक्षा 8 तक की शिक्षा है। अधिनियम 6 से 14 वर्ष के बच्चों को इसे निःशुल्क एवं अनिवार्य रूप से प्राप्त करने का अधिकार देता है।
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लघु उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 31. हमारे देश में 'राष्ट्रीय बालश्रम परियोजना' की आवश्यकता क्यों महसूस की गई?
उत्तर:
भारत में गरीबी, अशिक्षा एवं सामाजिक-आर्थिक समस्याओं के कारण बड़ी संख्या में बच्चे श्रम में लगे हुए थे। इन बच्चों को कार्य से हटाकर शिक्षा की मुख्यधारा में लाने और उनका पुनर्वास करने के लिए राष्ट्रीय बाल श्रम परियोजना (NCLP) की आवश्यकता महसूस हुई।
इस परियोजना के प्रमुख उद्देश्य थे—
- बाल श्रमिकों की पहचान एवं उन्हें कार्य से मुक्त कराना।
- विशेष प्रशिक्षण केन्द्रों में ब्रिज शिक्षा प्रदान करना।
- व्यावसायिक प्रशिक्षण, पोषण एवं स्वास्थ्य सुविधाएँ उपलब्ध कराना।
- बच्चों को औपचारिक विद्यालयी शिक्षा में सम्मिलित करना।
- बाल-श्रम निषेध सम्बन्धी कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन में सहायता करना।
इस प्रकार NCLP का प्रमुख उद्देश्य बाल श्रमिकों का शैक्षिक एवं सामाजिक पुनर्वास था।
प्रश्न 32. 'न्यूनतम अधिगम स्तर' की अवधारणा स्पष्ट कीजिए। यह प्राथमिक स्तर की शिक्षा की गुणवत्ता के लिए किस प्रकार सहायक है?
उत्तर:
न्यूनतम अधिगम स्तर (Minimum Levels of Learning—MLL) से आशय उन न्यूनतम ज्ञान, कौशल एवं दक्षताओं से है जिन्हें किसी निश्चित कक्षा अथवा शिक्षा-स्तर के अंत तक प्रत्येक विद्यार्थी द्वारा प्राप्त किया जाना अपेक्षित है।
यह प्राथमिक शिक्षा की गुणवत्ता में निम्न प्रकार सहायक है—
- प्रत्येक कक्षा के लिए स्पष्ट अधिगम-उपलब्धियाँ निर्धारित होती हैं।
- शिक्षक को शिक्षण की योजना बनाने में सहायता मिलती है।
- विद्यार्थियों की उपलब्धि का वस्तुनिष्ठ मूल्यांकन किया जा सकता है।
- कमजोर विद्यार्थियों की पहचान कर उपचारात्मक शिक्षण दिया जा सकता है।
- विद्यालयों एवं क्षेत्रों के बीच अधिगम स्तर की असमानता कम करने में सहायता मिलती है।
अतः MLL का उद्देश्य केवल बच्चों को कक्षा में बनाए रखना नहीं, बल्कि प्रत्येक बच्चे के लिए न्यूनतम गुणवत्तापूर्ण अधिगम सुनिश्चित करना है।
प्रश्न 33. 'शिक्षा बिना बोझ' के सन्दर्भ में यशपाल समिति के मुख्य सुझाव क्या थे?
उत्तर:
प्रो. यशपाल की अध्यक्षता वाली समिति ने 1993 में Learning Without Burden रिपोर्ट प्रस्तुत की। इसका उद्देश्य बच्चों पर शारीरिक एवं मानसिक शैक्षिक बोझ कम करके अधिगम को अर्थपूर्ण बनाना था।
इसके प्रमुख सुझाव—
- पाठ्यक्रम एवं पाठ्यपुस्तकों में अनावश्यक सामग्री का बोझ कम किया जाए।
- रटने के स्थान पर समझ एवं अनुभव आधारित अधिगम पर बल दिया जाए।
- पाठ्यक्रम निर्माण एवं पाठ्यपुस्तक लेखन में शिक्षकों की भागीदारी बढ़ाई जाए।
- बच्चों को प्रतिदिन भारी पुस्तकों का बस्ता ढोने के लिए बाध्य न किया जाए।
- प्राथमिक स्तर पर गृहकार्य का अनावश्यक बोझ न दिया जाए।
- शिक्षक-विद्यार्थी अनुपात में सुधार एवं शिक्षक-प्रशिक्षण को मजबूत किया जाए।
- परीक्षा को सूचना की पुनरावृत्ति के बजाय समझ एवं प्रयोग की क्षमता से जोड़ा जाए।
प्रश्न 34. "केन्द्रीय दस्तकारी के द्वारा सम्पूर्ण शिक्षा नहीं दी जा सकती है।" इस कथन के आधार पर बुनियादी शिक्षा की समीक्षा कीजिए।
उत्तर:
महात्मा गाँधी की बुनियादी शिक्षा में किसी उपयोगी एवं उत्पादक दस्तकारी या शिल्प को शिक्षण का केन्द्र बनाया गया था। भाषा, गणित, विज्ञान एवं सामाजिक अध्ययन को यथासम्भव उसी शिल्प से सहसम्बन्धित करके पढ़ाने की कल्पना की गई थी।
इस व्यवस्था के अनेक गुण हैं—यह करके सीखने, श्रम की प्रतिष्ठा, स्वावलम्बन और जीवनोपयोगी शिक्षा को बढ़ावा देती है। किन्तु केवल एक केन्द्रीय शिल्प के माध्यम से प्रत्येक विषय की सभी अमूर्त एवं व्यवस्थित अवधारणाओं को स्वाभाविक रूप से पढ़ाना कठिन हो सकता है।
अतः दस्तकारी को शिक्षा का महत्वपूर्ण क्रियात्मक आधार बनाया जा सकता है, परन्तु सम्पूर्ण पाठ्यक्रम को कृत्रिम रूप से उसी से जोड़ना उचित नहीं है। विषय की प्रकृति के अनुसार अन्य शिक्षण-विधियों एवं संसाधनों का भी प्रयोग आवश्यक है।
प्रश्न 35. सन् 1813 के आज्ञापत्र ने भारतीय शिक्षा के इतिहास को किस प्रकार एक नई दिशा प्रदान की?
उत्तर:
चार्टर एक्ट, 1813 भारतीय शिक्षा के इतिहास में महत्वपूर्ण घटना थी। इसके द्वारा पहली बार ईस्ट इंडिया कम्पनी पर भारतीय शिक्षा के लिए धन व्यय करने की स्पष्ट जिम्मेदारी डाली गई।
इसके प्रमुख प्रभाव थे—
- भारतीय शिक्षा के लिए प्रतिवर्ष एक लाख रुपये की राशि का प्रावधान किया गया।
- सरकार की शिक्षा सम्बन्धी जिम्मेदारी को औपचारिक मान्यता मिली।
- ईसाई मिशनरियों को भारत में शिक्षा एवं धार्मिक गतिविधियों के लिए अधिक अवसर मिले।
- भारतीय एवं पाश्चात्य ज्ञान में किसे प्राथमिकता दी जाए, इस पर प्राच्य-पाश्चात्य विवाद विकसित हुआ।
- आगे चलकर सरकारी शिक्षा-नीति के निर्माण की आधारभूमि तैयार हुई।
इस प्रकार 1813 के चार्टर एक्ट ने भारतीय शिक्षा में सरकारी हस्तक्षेप एवं आधुनिक शिक्षा-नीति के विकास की दिशा खोली।
प्रश्न 36. 'निस्यंदन सिद्धान्त' क्या है?
उत्तर:
अधोमुखी निस्यंदन सिद्धान्त से आशय उस औपनिवेशिक शिक्षा-नीति से है जिसमें पहले समाज के उच्च एवं प्रभावशाली वर्ग के सीमित लोगों को उच्च शिक्षा देने और फिर उनके माध्यम से शिक्षा को सामान्य जनता तक पहुँचने देने की कल्पना की गई थी।
इस नीति में सरकार का प्रत्यक्ष ध्यान जनसाधारण की प्राथमिक शिक्षा पर कम और एक अंग्रेजी-शिक्षित वर्ग तैयार करने पर अधिक था। भारतीय शिक्षा के इतिहास में इसे मैकाले की अंग्रेजी शिक्षा-सम्बन्धी नीति से निकटता से जोड़ा जाता है।
इस सिद्धान्त का प्रमुख दोष यह था कि शिक्षा वास्तव में अपेक्षित गति से सामान्य जनता तक नहीं पहुँच सकी और जनशिक्षा एवं प्राथमिक शिक्षा की उपेक्षा हुई।
प्रश्न 37. 'राष्ट्रीय शिक्षा नीति 1986' के अन्तर्गत प्राथमिक शिक्षा के उन्नयन हेतु दिए गए सुझाव लिखिए।
उत्तर:
राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 1986 ने प्रारम्भिक शिक्षा के सार्वभौमीकरण एवं उसकी गुणवत्ता में सुधार को प्रमुख लक्ष्य बनाया। इसके प्रमुख सुझाव थे—
- सभी बच्चों के लिए विद्यालय तक सार्वभौमिक पहुँच, नामांकन और ठहराव सुनिश्चित करना।
- ऑपरेशन ब्लैकबोर्ड द्वारा विद्यालयों में न्यूनतम आवश्यक सुविधाएँ उपलब्ध कराना।
- बाल-केन्द्रित एवं गतिविधि आधारित शिक्षण को बढ़ावा देना।
- शिक्षकों की पर्याप्त नियुक्ति एवं सेवाकालीन प्रशिक्षण की व्यवस्था करना।
- विद्यालय से बाहर बच्चों के लिए गैर-औपचारिक एवं वैकल्पिक शिक्षा की व्यवस्था करना।
- बालिकाओं एवं वंचित समूहों की शिक्षा पर विशेष ध्यान देना।
- प्रारम्भिक शिक्षा की गुणवत्ता एवं न्यूनतम अधिगम स्तर में सुधार करना।
प्रश्न 38. 'पूर्व-प्राथमिक शिक्षा' की मुख्य समस्याएँ क्या हैं?
उत्तर:
पूर्व-प्राथमिक शिक्षा बालक के विकास की आधारभूत अवस्था है, किन्तु इसके प्रभावी क्रियान्वयन में कई समस्याएँ हैं—
- प्रशिक्षित एवं बाल-मनोविज्ञान में दक्ष शिक्षकों की कमी।
- खेल एवं गतिविधि आधारित शिक्षण के स्थान पर औपचारिक पढ़ाई और रटने पर अत्यधिक बल।
- उपयुक्त भवन, खेल-सामग्री एवं सुरक्षित वातावरण की कमी।
- निजी पूर्व-प्राथमिक संस्थानों की अधिक फीस एवं ग्रामीण क्षेत्रों में सीमित पहुँच।
- आयु एवं विकास-स्तर के अनुरूप पाठ्यचर्या की कमी।
- शिक्षक-बालक अनुपात का अधिक होना।
- अभिभावकों में प्रारम्भिक बाल्यावस्था शिक्षा की सही समझ का अभाव।
- स्वास्थ्य, पोषण, देखभाल एवं शिक्षा के बीच पर्याप्त समन्वय की कमी।
प्रश्न 39. शिक्षा के सार्वभौमीकरण से क्या अभिप्राय है? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
शिक्षा का सार्वभौमीकरण अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर शिक्षा को जोड़ना नहीं, बल्कि सभी पात्र बच्चों तक शिक्षा को वास्तव में पहुँचाने की प्रक्रिया है। इसका उद्देश्य जाति, धर्म, लिंग, भाषा, क्षेत्र या आर्थिक स्थिति के भेद के बिना प्रत्येक बच्चे को शिक्षा का समान अवसर देना है।
प्रारम्भिक शिक्षा के सार्वभौमीकरण के प्रमुख पक्ष हैं—
- सार्वभौमिक प्रावधान: प्रत्येक बच्चे की पहुँच में विद्यालय एवं आवश्यक शैक्षिक सुविधाएँ उपलब्ध हों।
- सार्वभौमिक नामांकन: सभी पात्र बच्चों का विद्यालय में प्रवेश हो।
- सार्वभौमिक ठहराव: बच्चे शिक्षा-स्तर पूरा होने तक विद्यालय में बने रहें।
- सार्वभौमिक उपलब्धि: सभी बच्चों को अपेक्षित गुणवत्तापूर्ण अधिगम प्राप्त हो।
अतः सार्वभौमीकरण का वास्तविक अर्थ केवल नामांकन बढ़ाना नहीं, बल्कि पहुँच, सहभागिता, पूर्णता एवं गुणवत्तापूर्ण अधिगम सुनिश्चित करना है।
प्रश्न 40. राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा 2005 के प्रमुख मार्गदर्शक सिद्धान्तों की विवेचना कीजिए।
उत्तर:
राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा (NCF), 2005 ने विद्यालयी शिक्षा को अधिक अर्थपूर्ण, बाल-केन्द्रित एवं तनावमुक्त बनाने के लिए पाँच प्रमुख मार्गदर्शक सिद्धान्त प्रस्तुत किए—
- ज्ञान को विद्यालय के बाहर के जीवन से जोड़ना: विद्यार्थी जो सीखता है उसका सम्बन्ध उसके वास्तविक जीवन एवं अनुभवों से हो।
- अधिगम को रटन्त पद्धति से मुक्त करना: याद करने के स्थान पर समझ, खोज, तर्क एवं ज्ञान-निर्माण पर बल दिया जाए।
- पाठ्यचर्या को पाठ्यपुस्तक से आगे ले जाना: पाठ्यचर्या केवल पाठ्यपुस्तक तक सीमित न होकर बालक के सर्वांगीण विकास हेतु विविध अनुभव प्रदान करे।
- परीक्षा को अधिक लचीला एवं कक्षा-जीवन से एकीकृत करना: मूल्यांकन को शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया का स्वाभाविक अंग बनाया जाए।
- लोकतांत्रिक व्यवस्था में संवेदनशील एवं व्यापक पहचान का विकास: बच्चों में समानता, सहानुभूति, शान्ति, सामाजिक न्याय एवं दूसरों के प्रति संवेदनशीलता विकसित की जाए।
इन सिद्धान्तों का उद्देश्य बच्चे को निष्क्रिय ज्ञान-ग्राही के स्थान पर सक्रिय, विचारशील एवं ज्ञान का निर्माण करने वाला शिक्षार्थी बनाना है।
Semester 2 की Complete तैयारी
- Official Syllabus
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