वस्तुनिष्ठ प्रश्न
प्रश्न 1. निम्न में से सत्य फल का उदाहरण है-
(a) काजू
(b) सेब
(c) आम
(d) अनानास
उत्तर: (c) आम।
व्याख्या : निषेचन के बाद केवल अंडाशय से विकसित होने वाले फल को सत्य फल कहते हैं। आम एक सत्य फल है। सेब में फल निर्माण में पुष्पासन भी भाग लेता है, इसलिए इसे आभासी या असत्य फल कहा जाता है। अनानास एक संयुक्त या बहुफल है।
प्रश्न 2. दही से मक्खन को पृथक करने की विधि है-
(a) ऊर्ध्वपातन
(b) वाष्पन
(c) निस्पंदन
(d) अपकेन्द्रण
उत्तर: (d) अपकेन्द्रण।
व्याख्या : दही या मथी हुई मलाई से वसा के कणों को अलग करने में अपकेन्द्रण के सिद्धान्त का उपयोग होता है। मिश्रण को तीव्र गति से घुमाने पर विभिन्न घनत्व वाले घटक अलग होने लगते हैं और वसा के कण एकत्रित होकर मक्खन के रूप में प्राप्त होते हैं।
प्रश्न 3. पौधों की कलम लगाना एक प्रकार का जनन है-
(a) अलैंगिक जनन
(b) लैंगिक जनन
(c) अनिषेचित जनन
(d) कायिक जनन
उत्तर: (d) कायिक जनन।
व्याख्या : कलम लगाना पौधों में कृत्रिम कायिक प्रवर्धन की एक विधि है। इसमें पौधे के तने या शाखा के किसी भाग से बिना बीज के नया पौधा तैयार किया जाता है। कायिक प्रवर्धन अलैंगिक जनन का ही एक प्रकार है। गुलाब, गन्ना, अंगूर आदि पौधों का प्रवर्धन कलम द्वारा किया जा सकता है।
प्रश्न 4. गति के नियम के प्रतिपादक कौन हैं-
(a) न्यूटन
(b) आइन्सटाइन
(c) कॉपरनिकस
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर: (a) न्यूटन।
व्याख्या : गति के तीन नियम सर आइजैक न्यूटन ने प्रतिपादित किए। इन नियमों का वर्णन उनकी प्रसिद्ध पुस्तक Principia में सन् 1687 में प्रकाशित हुआ। ये नियम वस्तुओं की गति और उन पर लगने वाले बल के बीच सम्बन्ध को स्पष्ट करते हैं।
प्रश्न 5. निम्न में से कौन-सा पदार्थ ऊर्ध्वपातज नहीं है-
(a) नौसादर
(b) आयोडीन
(c) कपूर
(d) नमक
उत्तर: (d) नमक।
व्याख्या : वे ठोस पदार्थ जो गर्म करने पर द्रव अवस्था में आए बिना सीधे वाष्प अवस्था में परिवर्तित हो जाते हैं, ऊर्ध्वपातज पदार्थ कहलाते हैं। नौसादर (अमोनियम क्लोराइड), आयोडीन और कपूर इसके उदाहरण हैं। सामान्य नमक अर्थात् सोडियम क्लोराइड ऊर्ध्वपातज पदार्थ नहीं है।
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अति लघु उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 6. हरे पौधों को स्वपोषी एवं जन्तुओं को परपोषी क्यों कहा जाता है?
उत्तर: हरे पौधे प्रकाश-संश्लेषण द्वारा अपना भोजन स्वयं बनाते हैं, इसलिए स्वपोषी कहलाते हैं। जन्तु भोजन के लिए पौधों या अन्य जीवों पर निर्भर रहते हैं, इसलिए परपोषी कहलाते हैं।
प्रश्न 7. जड़त्व का नियम क्या है?
उत्तर: कोई वस्तु अपनी विरामावस्था या समान वेग से सरल रेखीय गति की अवस्था में तब तक बनी रहती है, जब तक उस पर कोई बाह्य असंतुलित बल कार्य न करे। इसे जड़त्व का नियम कहते हैं।
प्रश्न 8. आसवन से आप क्या समझते हैं?
उत्तर: किसी द्रव को वाष्प में बदलकर और फिर वाष्प को ठंडा करके पुनः द्रव में बदलने की पृथक्करण प्रक्रिया को आसवन कहते हैं। उदाहरण- नमक के विलयन से शुद्ध जल प्राप्त करना।
प्रश्न 9. घर्षण बल क्या होता है?
उत्तर: दो सम्पर्क सतहों के बीच सापेक्ष गति या गति की प्रवृत्ति का विरोध करने वाले बल को घर्षण बल कहते हैं।
प्रश्न 10. ऊर्ध्वपातन किसे कहते हैं?
उत्तर: किसी ठोस पदार्थ का द्रव अवस्था में आए बिना सीधे वाष्प अवस्था में बदलना ऊर्ध्वपातन कहलाता है। उदाहरण- कपूर, आयोडीन तथा नौसादर।
प्रश्न 11. अनुकूलन को परिभाषित कीजिए।
उत्तर: जीवों के वे संरचनात्मक, क्रियात्मक या व्यवहारगत लक्षण जो उन्हें अपने पर्यावरण में जीवित रहने तथा प्रजनन करने में सहायता करते हैं, अनुकूलन कहलाते हैं।
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लघु उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 12. एक सरल पत्ती का नामांकित चित्र बनाइए।
उत्तर: सरल पत्ती की बाह्य संरचना नीचे चित्र में दिखाई गई है।
सरल पत्ती : जिस पत्ती में एक ही पर्णफलक होता है तथा यदि पर्णफलक में कटाव उपस्थित हों तो वे मध्यशिरा या पर्णवृन्त तक नहीं पहुँचते, उसे सरल पत्ती कहते हैं।
एक सामान्य सरल पत्ती में पर्णाधार, पर्णवृन्त, पर्णफलक, मध्यशिरा, पार्श्व शिराएँ, पर्णाग्र तथा पर्णकिनारा आदि भाग पाए जाते हैं।
उदाहरण :
- आम
- अमरूद
- पीपल
- पपीता
प्रश्न 13. बल को परिभाषित करते हुए उसके प्रकारों के नाम लिखिए।
उत्तर: किसी वस्तु पर लगाया गया धक्का या खिंचाव, जो उसकी विराम अथवा गति की अवस्था, गति की दिशा या आकार में परिवर्तन कर सकता है या परिवर्तन करने की प्रवृत्ति उत्पन्न कर सकता है, बल कहलाता है।
बल एक सदिश राशि है तथा इसका SI मात्रक न्यूटन (N) है।
बल मुख्यतः दो प्रकार के होते हैं-
(1) सम्पर्क बल : जिन बलों के लिए वस्तुओं का प्रत्यक्ष सम्पर्क आवश्यक होता है।
- पेशीय बल
- घर्षण बल
- अभिलम्ब बल
- तनाव बल
(2) असम्पर्क बल : जिन बलों के लिए वस्तुओं का प्रत्यक्ष सम्पर्क आवश्यक नहीं होता।
- गुरुत्व बल
- चुम्बकीय बल
- वैद्युत बल
प्रश्न 14. ठोस, द्रव एवं गैस में अन्तर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: ठोस, द्रव एवं गैस में प्रमुख अन्तर निम्नलिखित हैं-
| ठोस | द्रव | गैस |
|---|---|---|
| (1) ठोस का आकार और आयतन दोनों निश्चित होते हैं। | (1) द्रव का आयतन निश्चित होता है, लेकिन आकार निश्चित नहीं होता। | (1) गैस का न आकार निश्चित होता है और न आयतन। |
| (2) इसके कण बहुत पास-पास तथा व्यवस्थित होते हैं। | (2) इसके कण ठोस की अपेक्षा कुछ दूर-दूर होते हैं। | (2) इसके कण एक-दूसरे से बहुत दूर होते हैं। |
| (3) कणों के बीच आकर्षण बल बहुत अधिक होता है। | (3) कणों के बीच आकर्षण बल ठोस की अपेक्षा कम होता है। | (3) कणों के बीच आकर्षण बल बहुत कम होता है। |
| (4) कण अपने निश्चित स्थान के आसपास केवल कम्पन करते हैं। | (4) कण एक-दूसरे के ऊपर सरक सकते हैं, इसलिए द्रव बह सकते हैं। | (4) कण सभी दिशाओं में स्वतंत्र रूप से तीव्र गति करते हैं। |
| (5) ठोस को आसानी से संपीडित नहीं किया जा सकता। | (5) द्रव का संपीडन बहुत कम होता है। | (5) गैस को आसानी से संपीडित किया जा सकता है। |
| (6) उदाहरण- पत्थर, लोहा, बर्फ। | (6) उदाहरण- जल, दूध, तेल। | (6) उदाहरण- ऑक्सीजन, नाइट्रोजन, वायु। |
प्रश्न 15. स्वपरागण तथा परपरागण में क्या अन्तर है? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: स्वपरागण तथा परपरागण में प्रमुख अन्तर निम्नलिखित हैं-
| स्वपरागण | परपरागण |
|---|---|
| (1) परागकण उसी पुष्प अथवा उसी पौधे के दूसरे पुष्प के वर्तिकाग्र तक पहुँचते हैं। | (1) एक पौधे के पुष्प के परागकण उसी जाति के दूसरे पौधे के पुष्प के वर्तिकाग्र तक पहुँचते हैं। |
| (2) इसमें बाहरी परागण माध्यम की आवश्यकता अपेक्षाकृत कम होती है। | (2) इसमें वायु, जल, कीट, पक्षी आदि परागण माध्यमों की आवश्यकता सामान्यतः होती है। |
| (3) इसमें आनुवंशिक विविधता अपेक्षाकृत कम होती है। | (3) इसमें आनुवंशिक विविधता अधिक उत्पन्न होती है। |
| (4) इसमें परागकणों की बर्बादी अपेक्षाकृत कम होती है। | (4) इसमें परागकणों की बर्बादी अपेक्षाकृत अधिक हो सकती है। |
| (5) उदाहरण- मटर, गेहूँ। | (5) उदाहरण- मक्का, पपीता। |
प्रश्न 16. मिश्रण को परिभाषित करते हुए इसके गुणों पर संक्षेप में प्रकाश डालिए।
उत्तर: दो या दो से अधिक पदार्थों को किसी भी अनुपात में भौतिक रूप से मिलाने पर बने पदार्थ को मिश्रण कहते हैं। मिश्रण में उपस्थित पदार्थ उसके घटक कहलाते हैं।
मिश्रण के प्रमुख गुण निम्नलिखित हैं-
- मिश्रण के घटक रासायनिक रूप से बंधे हुए नहीं होते हैं।
- मिश्रण के घटक सामान्यतः अपने मूल गुण बनाए रखते हैं।
- मिश्रण के घटक किसी निश्चित अनुपात में होना आवश्यक नहीं है।
- मिश्रण का कोई निश्चित रासायनिक सूत्र नहीं होता।
- मिश्रण के घटकों को उपयुक्त भौतिक विधियों द्वारा अलग किया जा सकता है।
- मिश्रण समांगी अथवा विषमांगी हो सकता है।
- मिश्रण का गलनांक और क्वथनांक सामान्यतः शुद्ध पदार्थ की तरह निश्चित नहीं होता।
उदाहरण : वायु, नमक का विलयन, बालू और पानी का मिश्रण।
प्रश्न 17. घूर्णन गति किसे कहते हैं? उदाहरण सहित समझाइए।
उत्तर: जब कोई वस्तु किसी निश्चित अक्ष के चारों ओर घूमती है, तो उसकी गति को घूर्णन गति कहते हैं। घूर्णन के दौरान वस्तु के विभिन्न बिन्दु घूर्णन-अक्ष के चारों ओर वृत्ताकार पथों पर गति करते हैं।
उदाहरण :
- पृथ्वी का अपने अक्ष पर घूमना।
- विद्युत पंखे के पंखों का घूमना।
- कुम्हार के चाक का घूमना।
- साइकिल के पहिए का अपने अक्ष के चारों ओर घूमना।
ध्यान दें : घूर्णन गति और वृत्तीय गति समान नहीं हैं। घूर्णन गति में वस्तु अपने अक्ष के चारों ओर घूमती है, जबकि वृत्तीय गति में कोई वस्तु या कण किसी निश्चित केन्द्र के चारों ओर वृत्ताकार पथ पर गति करता है।
प्रश्न 18. मुकुलन से क्या आशय है? उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: मुकुलन : अलैंगिक जनन की वह विधि जिसमें जनक जीव के शरीर पर कोशिका-विभाजन के कारण एक छोटा उभार या मुकुल विकसित होता है और आगे चलकर नया जीव बन जाता है, मुकुलन कहलाती है।
मुकुल पूर्ण रूप से विकसित होने के बाद जनक जीव से अलग होकर स्वतंत्र जीव बन सकता है अथवा कुछ समय तक उससे जुड़ा रह सकता है।
उदाहरण :
- यीस्ट
- हाइड्रा
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