वस्तुनिष्ठ प्रश्न
प्रश्न 1. मछली में श्वॉस लेने के लिए कौन-सा अंग पाया जाता है?
(a) फेफड़ा
(b) गलफड़ा
(c) त्वचा
(d) उपर्युक्त सभी
उत्तर: (b) : मछली श्वॉस लेने के लिए अपने गलफड़ो (gills) का उपयोग करती है।
प्रश्न 2. 1 गज बराबर होता है-
(a) 5 फुट
(b) 4 फुट
(c) 3 फुट
(d) 2 फुट
उत्तर: (c) : 1 गज में 3 फुट होते हैं। 1 गज = 3 फुट
प्रश्न 3. घुलनशील ठोस पदार्थों को द्रव से पृथक् करने की विधि है-
(a) छानना
(b) निथारना
(c) तलछटीकरण
(d) वाष्पन
उत्तर: (d) : वाष्पन विधि का उपयोग द्रव में घुले ठोस पदार्थों (Solid) को पृथक करने में किया जाता है।
प्रश्न 4. पहलवान को भार उठाने में लगने वाला बल है-
(a) पेशीय बल
(b) विद्युत बल
(c) चुम्बकीय बल
(d) उपर्युक्त में से कोई नहीं
उत्तर: (a) : पहलवान को भार उठाने में लगने वाला बल, पेशीय बल है। पेशियों की क्रिया द्वारा उत्पन्न बल को पेशीय बल कहते हैं।
प्रश्न 5. चने के बीज का दो हल्के पीले रंग की संरचनाओं का नाम है-
(a) बीजचोल
(b) भ्रूण
(c) बीजपत्र
(d) मूलांकुर
उत्तर: (c) : चने के बीज के दो हल्के पीले रंग की संरचनाओं को बीजपत्र कहते हैं।
अति लघु उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 6. जलीय पौधे के तने एवं पत्ती की एक-एक विशेषता बताइए।
उत्तर: जलीय पौधों के तनों के अन्दर असंख्य रिक्त स्थान होते हैं, जिन्हें वायुकोष्ठ कहा जाता है। जलीय पौधों की पत्तियों की सतह पर मोम की तरह चिकनी परत होती है।
प्रश्न 7. कीटभक्षी पौधे की विशेषता व नाम लिखिए।
उत्तर: कीटभक्षी पौधे अपना अधिकांश पोषण कीड़ों से प्राप्त करते हैं। जिन्हें वे फँसाते हैं और खा जाते हैं। कुछ कीटभक्षी पौधे पिचर प्लांट, ड्रोसैरा, डायोनिया, सेरोसेनिया आदि।
प्रश्न 8. वृत्तीय गति व घूर्णन गति का एक-एक उदाहरण लिखिए।
उत्तर: वृत्तीय गति में वस्तु एक वृत में घूमती है। उदाहरण- कृत्रिम उपग्रह एक निश्चित ऊँचाई पर पृथ्वी की परिक्रमा करते हैं।
घूर्णन गति में वस्तु एक अक्ष के चारों ओर घूमती है। उदाहरण- पृथ्वी अपनी अक्ष पर घूम रही है।
प्रश्न 9. सरसों के पुष्प के विभिन्न अंगो के नाम लिखिए।
उत्तर: सरसों के पुष्प के निम्न अंग हैं-
(i) बाह्य दलपुंज
(ii) दलपुंज
(iii) जायांग
(iv) पुमंग
प्रश्न 10. डॉक्टरी थर्मामीटर में हम मानव शरीर के °C (डिग्री-सेंटीग्रेड) में किस सीमा के अन्तर्गत ताप माप सकते हैं?
उत्तर: मानव शरीर का सामान्य तापमान 37°C होता है तथा मानव शरीर का तापमान सामान्यतः 35°C से नीचे या 42°C से अधिक नहीं होता है। यही कारण है कि डॉक्टरी थर्मामीटर की सीमा 35°C से 42°C होती है।
प्रश्न 11. पेड़-पौधों में अलैंगिक प्रजनन की विधियों के नाम लिखिए।
उत्तर: पेड़-पौधों में अलैंगिक प्रजनन की विधियाँ निम्न हैं -
(i) विखंडन
(ii) मुकुलन
(iii) बीजाणु का बनना
(iv) पुनर्जनन
(v) खंडन आदि।
प्रश्न 12. पर्वतीय क्षेत्रों में पाये जाने वाले जन्तुओं एवं पौधों में अनुकूलन हेतु क्या-क्या विशेषताएँ होती हैं? लिखिए।
उत्तर: जन्तु - जन्तु वातावरण के प्रति अनुकुलित होते हैं। पर्वतीय क्षेत्रों में पाए जाने वाले जन्तुओं की त्वचा मोटी होती है और उस मोटी त्वचा के ऊपर फर पाए जाते हैं। फर शरीर के तापमान को बनाए रखता है।
उदाहरण -
(i) याक का शरीर लंबे वालो से ढका रहता है。
(ii) पहाड़ी तेंदुओं के शरीर पर फर पाए जाते हैं तथा पैरों में भी फर होते हैं, जो इन्हे ठंड से बचाता है。
पौधे - पर्वतीय क्षेत्र पाए जाने वाले वृक्ष सामान्यतः शंक्वाकार होते हैं तथा इनकी शाखाएँ तिरछी होती हैं। इनमें से कुछ वृक्षों की पत्तियाँ सुई के आकार की होती हैं। इससे वर्षा का जल एवं बर्फ सरलता से नीचे की ओर खिसक जाता है। पर्वतों पर इन वृक्षों से अधिक भिन्न आकृति एवं आकार वाले पौधे भी मिल सकते हैं। पर्वत पर जीवित रहने के लिए इनमें कुछ अन्य प्रकार का अनुकूलन हो सकता है।
लघु उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 13. गति किसे कहते हैं? गति के कौन-कौन से नियम हैं? लिखिए।
उत्तर: गतिः समय के साथ वस्तु की स्थिति में परिर्वतन ही गति कहलाता है। उदाहरण - चलता हुआ आदमी, गतिमान वाहन, बहती हुई नदी आदि।
गति के नियम -
(i) पहला नियम - एक स्थिर पिंड तब तक स्थिर रहेगा जब तक उस पर कोई बाहरी बल नहीं लगाया जाता।
(ii) दूसरा नियम - बल, द्रव्यमान तथा त्वरण के गुणनफल के बराबर होता है और गति में परिवर्तन लागू बल के समानुपाती होती है。
(iii) तीसरा नियम - प्रत्येक क्रिया के लिए समान और विपरीत प्रतिक्रिया होती है。
प्रश्न 14. अमरबेल, सिंघाड़ा एवं आर्किंड में किस-किस प्रकार की जड़ें सहारा देने वाली होती हैं और वे किस प्रकार एक-दूसरे से भिन्न हैं?
उत्तर: अमरबेल : यह एक परजीवी पौधा होता है। अमरबेल में जगह-जगह अंकुर के समान रचनाएँ होती हैं, जिसे चूषकांग कहते हैं जो पोषक के शरीर के अन्दर पहुँचकर खाद्य पदार्थ चूसते हैं。
सिंघाड़ा : सिंघाड़ा की जड़ें प्रकाश संश्लेषी होती हैं जो पानी के पास घनी तथा हरी होकर फैलती रहती हैं。
आर्किड : इसकी जड़ें वायु में लटककर अपने स्पंजी सिरों द्वारा जलवाष्प अवशोषित करके पौधों की जलापूर्ति करती हैं। इन्हे वायुवीय अथवा आद्रताग्राहि जड़े कहा जाता है。
प्रश्न 15. विभिन्न प्रकार के मापक बर्तनों का उपयोग आप कहाँ-कहाँ करते हैं? लिखिए।
उत्तर: विभिन्न प्रकार के मापक बर्तनों का उपयोग निम्नांकित है-
(i) नपना ग्लास - दवा मापन हेतु。
(ii) लीटर (1 एवं 1/2 लीटर) - दूध मापन हेतु。
(iii) नपना बेलन - किसी ठोस वस्तु का आयतन ज्ञात करने हेतु ।
(iv) लीटर (5 एवं 10 लीटर) - मिट्टी का तेल, पेट्रोल, डीजल मापन हेतु आदि。
प्रश्न 16. ठोस, द्रव एवं गैस की आणविक संरचना का सचित्र वर्णन कीजिए।
उत्तर: ठोस अवस्था: ऐसे पदार्थ जिनका आयतन तथा आकृति निश्चित होती है, उनको ठोस पदार्थ कहते हैं। जैसे लोहा, ताँबा, पत्थर, आदि।
द्रव पदार्थ: वे पदार्थ जिनका आयतन निश्चित होता है, लेकिन आकार अनिश्चित होता है, उन पदार्थों को द्रव पदार्थ कहा जाता है। इन पदार्थों को जिस आकार के बर्तन में रखा जाता है तो वे उसी का आकार ग्रहण कर लेते हैं, इनका आयतन नहीं बदलता है। जैसे- जल, तेल, दूध, पारा आदि।
गैस: वे पदार्थ जिनके आयतन एवं आकार दोनों अनिश्चित होते हैं उन पदार्थों को गैसीय अवस्था कहा जाता है। ये जिन बर्तन में रखे जाते हैं। उन्हीं का आयतन एवं आकृति ग्रहण कर लेते हैं। जैसे- वायु नाइट्रोजन, हाड्रोजन आदि।
प्रश्न 17. बीजों के प्रकीर्णन किस-किस माध्यम द्वारा होते हैं? लिखिए।
उत्तर: बीजों के प्रकीर्णन के विभिन्न तरीके निम्नलिखित हैं-
(i) हवा द्वारा : कुछ पौधों के बीज हल्के वजन के होते हैं और उन पर कुछ बाल या पंख जैसी संरचनाएँ मौजूद होती हैं। उदाहरण: सहिजन, द्विफल, सूरजमुखी, मदार आदि के बीज。
(ii) पानी द्वारा : कुछ बीजों का प्रकीर्णन मुख्यतः जलीय पौधों में होता है। जैसे नारियल, जलकुंभी。
(iii) जानवरों द्वारा: कुछ बीजों पर काँटेदार हुक की तरह संरचना होती है वे जानवरों के शरीर से चिपक जाते हैं। जैसे- यूरेना, जैन्थियम आदि。
(iv) फटने के कारण : परिपक्व होने पर कुछ फल झटके के साथ फट जाते हैं। फटने के कारण उसके अंदर स्थित बीज प्रकीर्णित हो जाते हैं। जैसे भिन्डी, अरंडी, बालसम आदि。
(v) मनुष्यों द्वारा : मनुष्य बीज के फैलाव में भी मदद करता है। खासकर खेती के दौरान。
प्रश्न 18. बीजों के अंकुरण का नामांकित चित्र बनाइए।
उत्तर: बीजों के अंकुरण का नामांकित चित्र-
मूलांकुर, मटर, प्रांकुर