वस्तुनिष्ठ प्रश्न
प्रश्न 1. कोशिका भित्ति पायी जाती है-
(a) पादप कोशिका में
(b) जन्तु कोशिका में
(c) पापद तथा जन्तु कोशिका (दोनों)
(d) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर: (a) : कोशिका भित्ति पादप कोशिकाओं में पायी जाती है। जब कि जन्तु कोशिकाओं में यह अनुपस्थित होता है और यह सेल्यूलोज व पेक्टिन से बनी होती है。
प्रश्न 2. यौगिक का उदाहरण है-
(a) वायु
(b) धुँआ
(c) चीनी
(d) चीनी का विलयन।
उत्तर: (c) : यौगिकः वह पदार्थ जो दो या दो से अधिक प्रकार के परमाणुओं से या तत्वों से एक निश्चित अनुपात में मिलकर बनता है उसे यौगिक कहते हैं। यौगिक में उनके अवयवी तत्वों के परमाणुओं की संख्या का अनुपात नियत होता है। जैसेः चीनी, एक यौगिक है, यह कार्बन, हाइड्रोजन और ऑक्सीजन के 12: 22 : 11 के अनुपात से मिलकर बनता है。
प्रश्न 3. कायिक प्रवर्धन सम्भव है-
(a) जड़ द्वारा
(b) तना द्वारा
(c) पत्ती द्वारा
(d) इन सभी के द्वारा।
उत्तर: (d) : कायिक प्रवर्धन पादप के कायिक भागों में जड़, तना और पत्ती द्वारा नये पादपों का निर्माण कायिक प्रवर्धन कहलाता है。
प्रश्न 4. बल का मात्रक है-
(a) न्यूटन
(b) सेकण्ड
(c) किलोग्राम
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर: (a) : बल का मात्रक न्यूटन होता है। बलः बल वह बाह्य कारक है जो किसी वस्तु की गति की अथवा विराम की अवस्था की स्थिति में परिर्वतन करने का प्रयास करता है। इसका मात्रक न्युटन होता है। बल (F) = m × a. F = (द्रव्यमान × त्वरण)।
प्रश्न 5. निम्नलिखित में संयुक्त पत्ती छाँटिए-
(a) आम की पत्ती
(b) अमरुद की पत्ती
(c) नींबू की पत्ती
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर: (c) : सरलपत्ती :- एक पत्ती को सरल कहा जाता है जब इसकी लैमिना पूरी होती है या जब कटाव किया जाता है तो कटाव मध्य शिरा को नहीं छूती है। उदाहरण :- अमरूद की पत्ती, आम की पत्ती, पीपल, बरगद आदि।
संयुक्त पत्ती :- जब लैमिना के कटाव इसे कई पत्तियों में तोड़कर मध्यशिरा तक पहुँचते हैं तो इसे संयुक्त पत्ती कहा जाता है। उदारहरण: मटर, बबूल, छुई-मूई, नींबू आदि。
अति लघु उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 6. पौधों की पत्तियों में होने वाली प्रकाश संश्लेषण की क्रिया का समीकरण लिखिए।
उत्तर: पौधों की पत्तियों में होने वाली प्रकाश संश्लेषण की क्रिया का समीकरण :-
6CO2 + 12H2O → C6H12O6 + 6H2O + 6O2 (सूर्य का प्रकाश / हरित लवक की उपस्थिति में)
प्रश्न 7. 4 सेमी त्रिज्या के वृत्तीय पथ पर एक कण आधा चक्कर लगाता है, तो इस दशा में कण द्वारा तय की गई दूरी तथा विस्थापन ज्ञान कीजिए।
उत्तर: दिया है वृत्तीय पथ की त्रिज्या R = 4 cm
कण द्वारा आधे चक्कर में तय की गई दूरी = πR = 3.14 × 4 = 12.56 सेमी.
कण द्वारा किया गया विस्थापन, (विस्थापन प्रांरभिक और अन्तिम स्थिति के बीच की सबसे छोटी दूरी है) = 2R सेमी.
विस्थापन = 2 × 4 सेमी. = 8 सेमी。
प्रश्न 8. पुष्प के मुख्य चार भागों के नाम लिखिए।
उत्तर: पुष्प के मुख्य चार भाग निम्न हैं-
(i) बाह्य दल पुंज: यह पुष्प का सबसे बाहरी चक्र होता है। ये हरे तथा छोटी पत्तियों जैसे होते हैं। इसकी प्रत्येक इकाई को बाह्य दल (Sepal) कहते हैं यह कली में जननांगों की सुरक्षा का कार्य करता है।
(ii) दलपुंज (Corolla): यह दलपुंज दूसरा चक्र है तथा यह बाह्य दलपुंज के भीतर की ओर होता है यह रंगीन तथा सुन्दर होने के कारण इसका मुख्य कार्य परागण हेतु कीड़ो को आर्कषित करना है।
(iii) पुमंग (Androecium): यह पुष्प का तीसरा चक्र होता है इसके प्रत्येक सदस्य को पुंकेसर कहते हैं पुंकेसरों के समूह को 'पुमंग' कहा जाता है। पुंकेसर पुष्प का नर जननांग होता है。
(iv) जायांग (Gynoecium): यह पुष्प का चौथा अन्तिम चक्र है तथा सबसे सुरक्षित भीतरी भाग है जिसकी इकाई स्त्रीकेसर (Carpel or pistil) या अण्डाशय कहलाती है यह पुष्प का मादा जननांग है。
प्रश्न 9. पत्ती के प्रमुख भागों का नाम लिखिए।
उत्तर: पत्तियों के तीन मुख्य भाग होते हैं-
(1) पर्णाधार: एकबीजपत्रिया में पर्णाधार चौड़े होते हैं, जो तने को एक आवरण के रूप में चारों ओर से घेरे रहते हैं।
(2) पर्णवृन्तः पर्ण का वह भाग जो पर्ण फलक और पर्णाधार को जोड़ने का कार्य करता है उसे पर्णवृन्त कहते हैं। जिन पौधों की पत्तियों में पर्णवृन्त उपस्थित होते हैं। ऐसी पत्तियों को सवृन्त कहते हैं。
(3) पर्णफलक :- पर्णफलक पत्ती का चपटा तथा फैला हुआ भाग होता है और पर्ण फलक की विविधता पत्ती की विविधता का मुख्य कारण होता है पर्णफलक सरल प्रकार का या छोटे-छोटे खण्डों में विभक्त हो सकता है。
प्रश्न 10. 1 माइक्रोमीटर में कितने पीकोमीटर होते हैं?
उत्तर: 1 माइक्रोमीटर = 10-6 मीटर
1 पीकोमीटर = 10-12 मीटर
1 माइकोमीटर / 1 पीकोमीटर = 10-6 / 10-12 = 10-6+12 = 106
अतः 1 माइक्रोमीटर = 106 पीकोमीटर。
प्रश्न 11. बेलन की लम्बाई तथा वृत्त के व्यास मापन के लिए किस यन्त्र का उपयोग किया जाता है?
उत्तर: बेलन की लम्बाई तथा वृत्त के व्यास मापन के लिए "वर्नियर कैलीपर" यन्त्र का प्रयोग किया जाता है।
वर्नियर कैलीपर : यह एक प्रकाश का माइक्रोमीटर है, जिसका उपयोग हम ऐसी जगहों पर करते हैं जहाँ पर किसी बड़े मापने वाले औजार का प्रयोग नहीं किया जा सकता है। इस कारण इसे माइक्रोमीटर के नाम से भी जाना जाता है। इसका आविष्कार एक फ्रांस के वैज्ञानिक पियरे वर्नियर ने किया था, और इन्हीं के नाम पर इसका नाम वर्नियर कैलीपर रखा गया है。
लघु उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 12. पदार्थों के पृथक्करण से आप क्या समझते हैं? पृथक्करण की किन्हीं चार प्रमुख विधियों का नाम लिखिए।
उत्तर: पदार्थों का पृथक्करण : - पदार्थों के मिश्रण में से एक दूसरे से पृथक करना ही पदार्थों का पृथक्करण कहलाता है। पृथक्करण की निम्न चार विधियाँ हैं-
(i) हस्त चयन: इस विधि में अनाज से पत्थर भूसे आदि के कणों को हाथ से चुनकर अलग किया जाता है।
(ii) थ्रेसिंग : यह डंडियों से अन्न कणों को अलग करने की प्रक्रिया है इसमें डण्डों से पीटकर या थ्रेसर मशीन द्वारा अन्नकणों को पृथक किया जाता है。
(iii) फटकना : फटकने से केवल हल्के अवयव ही दूर होते हैं। उदाहरण :- गेहूँ को सूप से फटका जाता है। सूप के द्वारा गेहूँ को फटकने से हल्का भूसा सूप से बाहर गिरता है。
(iv) चालन : इस विधि में छोटे कण तो चलनी के छिद्रों से निकल जाते हैं जबकि बड़ी अशुद्धियाँ चलनी में ही रह जाती हैं。
प्रश्न 13. भोजन एकत्रीकरण हेतु मूसला जड़ों में होने वाले रूपान्तरण के प्रकारों को उदाहरण से बताइए।
उत्तर: भोजन एकत्रीकरण हेतु मूसला जड़ों में होने वाले रूपान्तरण के प्रकार निम्न हैं-
(1) मूसला जड़ (Taproot): ये संचित खाद्य के कारण फूली हुई गूदेदार और विभिन्न प्रकार की होती हैं ।
(i) शंकुरूपी (Conical): यह जड़ ऊपर से चौड़ी फिर नीचे से पतली होती जाती है। जैसे गाजर
(ii) कुम्भीरूप (Napiform): इस प्रकार की जड़ों में ऊपर का भाग घड़े के समान फूला और निचला भाग एकदम पतला हो जाता है जैसे - शलजम
(iii) तर्करूप (Fusiform): इस प्रकार की जड़ मध्य से फूली हुई, परन्तु दोनों सिरों शीर्ष तथा आधार पतली होती है। जैसे- मूली
(iv) गाँठदार जड़ : यह फूली हुई गूदेदार होती है परन्तु कोई निश्चित आकार नहीं होता है। जैसे मटर, सेम इत्यादि。
प्रश्न 14. कायिक प्रवर्धन से आप क्या समझते हैं? पत्ती द्वारा कायिक प्रवर्धन को उदाहरण से समझाइए।
उत्तर: कायिक प्रवर्धन : जनन की ऐसी विधि है जिसमें पौधे के शरीर का कोई भी कायिक भाग जैसे, जड़ तथा पत्ती आदि द्वारा नये पौधे का पुनर्जन्म, कायिक प्रवर्धन कहलाता है।
कायिक प्रवर्धन के उदाहरण निम्न हैं-
(1) अजूबा (Bryophyllum) :- के पौधे में पत्तियों के किनारों से पादपकाय उत्पन्न होते है जो मातृ पौधे से अलग होकर नये पौधे को जन्म देते हैं。
(2) आलू (Potato): आलू के कंद में उपस्थित पर्वसन्धियाँ (nodes) कायिक प्रर्वधन में सहायक होती हैं। पर्वसन्धियों में कलिकाएँ स्थित होती हैं तथा प्रत्येक कलिका नये पौधों को जन्म देती है。
प्रश्न 15. किसी वस्तु का रेखीय संवेग कब संरक्षित रहता है? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: रेखीय संवेग संरक्षण के नियम के अनुसार, यदि किसी निकाय पर कोई बाहृय बल न लग रहा हो, तो उस निकाय का सम्पूर्ण रेखीय संवेग नियत रहता है।
माना किसी निकाय पर F बल Δt समयान्तराल पर लगाया जाता है तो उसके संवेग में परिर्वतन Δp हो जाता है, न्यूटन गति के द्वितीय नियम के अनुसार:
F = Δp / Δt
यदि बाहृय बल F = 0 हो तो:
Δp / Δt = 0
अतः Δp = 0
अर्थात् संवेग में कोई परिवर्तन नहीं होता और वह संरक्षित रहता है。
प्रश्न 16. तत्व तथा यौगिक में अन्तर लिखिए।
उत्तर:
| क्र. सं. | तत्व | यौगिक |
|---|---|---|
| 1 | तत्व एक ही प्रकार के परमाणु से बने होते हैं। | यौगिक विभिन्न तत्वों के परमाणुओं से बने होते हैं। |
| 2 | तत्व को विभाजित कर कोई नया तत्व प्राप्त नहीं किया जा सकता है। | यौगिक को विभाजित कर नया तत्व प्राप्त किया जा सकता है। |
| 3 | तत्वों के सूक्ष्म कण उनके परमाणु होते हैं। | यौगिक के सूक्ष्मतम कण उनके अणु होते हैं। |
| 4 | अभी तक ज्ञात तत्वो की संख्या 119 है। | यौगिक लाखों की संख्या में उपलब्ध हैं। |
| 5 | अधिकांश तत्व प्रकृतिक रूप में पाये जाते हैं। | यौगिक प्रकृति में भी पाये जाते हैं तथा अनेक यौगिक प्रयोगशाला में भी बनाये जाते हैं। |
प्रश्न 17. दोलन तथा कम्पन गति में उदाहरण सहित अन्तर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: दोलन गति :- जब कोई वस्तु साम्य स्थिति के इधर-उधर गति करती है तो वस्तु की यह गति 'दोलन गति' कहलाती है। दोलन एक तरह की आवर्ती गति है। उदाहरण: झूले की गति, घड़ी के पेण्डुलम की गति。
कम्पन गति :- जब कोई पिण्ड अपनी माध्य स्थिति के इधर उधर गति करती है तो इसे 'कम्पन गति' कहते हैं। कंपन गति को किसी वस्तु के आगे पीछे हिलने डुलने ऊपर नीचे चलने स्पंदित होने आदि के रूप में वर्णित किया जाता है। उदाहरण: पेण्डुलम की गति, झूलें की गति, टयुनिक कांटा आदि कम्पन गति के उदाहरण हैं。
प्रश्न 18. बीजाण्ड की आन्तरिक संरचना का नामांकित चित्र बनाइए।
उत्तर: बीजाण्ड का नामांकित चित्र-
चित्र में बीजाण्ड, बीजाण्ड द्वार, भ्रूणकोष, बीजाण्डकाय, अध्यावरण, बीजाण्ड वृन्त आदि स्पष्ट रूप से प्रदर्शित हैं।