वस्तुनिष्ठ प्रश्न
प्रश्न 1. केन्द्रीय प्रवृत्ति का मापक नहीं है-
(a) मध्यमान
(b) मध्यांक
(c) प्रसार
(d) बहुलक
उत्तर: (c) प्रसार।
व्याख्या : माध्य, माध्यिका और बहुलक केन्द्रीय प्रवृत्ति के प्रमुख मापक हैं, जबकि प्रसार आँकड़ों के फैलाव या परिवर्तनशीलता से सम्बन्धित है।
प्रश्न 2. थार्नडाइक ने सीखने से सम्बन्धित मुख्य कितने नियमों का प्रतिपादन किया है?
(a) 5
(b) 4
(c) 6
(d) 3
उत्तर: (d) 3।
व्याख्या : थार्नडाइक ने अधिगम के तीन मुख्य नियम बताए-
- तत्परता का नियम
- अभ्यास का नियम
- प्रभाव का नियम
प्रश्न 3. नवजात शिशु में हड्डियों की संख्या होती है-
(a) 100
(b) 205
(c) 270
(d) 306
उत्तर: (c) 270।
व्याख्या : नवजात शिशु में सामान्यतः लगभग 270 हड्डियाँ होती हैं। वृद्धि के दौरान अनेक हड्डियाँ आपस में जुड़ जाती हैं और वयस्क अवस्था में सामान्यतः 206 हड्डियाँ रह जाती हैं।
प्रश्न 4. क्रिया-प्रसूत अधिगम सिद्धान्त के प्रतिपादक हैं-
(a) टॉलमैन
(b) स्किनर
(c) कोहलर
(d) हल
उत्तर: (b) स्किनर।
व्याख्या : बी. एफ. स्किनर ने क्रियाप्रसूत अनुबंधन (Operant Conditioning) का सिद्धान्त प्रस्तुत किया। इसमें व्यवहार के परिणाम और पुनर्बलन महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
प्रश्न 5. आपराधिक प्रवृत्ति का सर्वाधिक विकास होता है-
(a) शैशवावस्था
(b) बाल्यावस्था
(c) किशोरावस्था
(d) प्रौढ़ावस्था
उत्तर: (c) किशोरावस्था।
व्याख्या : पारम्परिक शैक्षिक-मनोविज्ञान के सन्दर्भ में किशोरावस्था को तीव्र परिवर्तन और समायोजन का काल माना जाता है। साथियों का दबाव, जोखिम लेने की प्रवृत्ति तथा पहचान सम्बन्धी संघर्ष कुछ किशोरों में अवांछित व्यवहार की सम्भावना बढ़ा सकते हैं; यह सभी किशोरों पर लागू नहीं होता।
प्रश्न 6. संज्ञानात्मक क्षमता की कमी से व्यक्ति को कठिनाई होती है-
(a) शारीरिक विकास में
(b) बौद्धिक विकास में
(c) व्यावसायिक विकास में
(d) समायोजन में
उत्तर: (b) बौद्धिक विकास में।
व्याख्या : संज्ञानात्मक क्षमताएँ ध्यान, स्मृति, चिन्तन, तर्क, अधिगम और समस्या-समाधान जैसी मानसिक प्रक्रियाओं से सम्बन्धित होती हैं। इनकी कमी बौद्धिक कार्यों को प्रभावित कर सकती है।
प्रश्न 7. "किसी दूसरी वस्तु की अपेक्षा एक ही वस्तु पर चेतना का केन्द्रीकरण अवधान है।" यह कथन है-
(a) क्रो एण्ड क्रो
(b) वुडवर्थ
(c) डमविल
(d) एवरिल
उत्तर: (c) डमविल।
व्याख्या : डमविल के अनुसार किसी दूसरी वस्तु की अपेक्षा एक वस्तु पर चेतना को केन्द्रित करना अवधान है।
प्रश्न 8. बुद्धि का विकास लगभग पूर्ण हो जाता है-
(a) शैशवावस्था में
(b) बाल्यावस्था में
(c) किशोरावस्था में
(d) सभी अवस्थाओं में
उत्तर: (c) किशोरावस्था में।
व्याख्या : पारम्परिक शैक्षिक दृष्टि से किशोरावस्था में बुद्धि, तर्क तथा अमूर्त चिन्तन की क्षमताएँ अपेक्षाकृत परिपक्व स्तर तक पहुँच जाती हैं।
प्रश्न 9. सीखने को प्रभावित करने वाला सबसे प्रभावपूर्ण कारक है-
(a) प्रेरणा
(b) ध्यान
(c) रुचि
(d) स्मृति
उत्तर: (a) प्रेरणा।
व्याख्या : अभिप्रेरणा व्यक्ति को सीखने के लिए सक्रिय करती है और उसके व्यवहार को लक्ष्य की ओर निर्देशित करती है।
प्रश्न 10. बालक में अभिप्रेरणा उत्पन्न करने का प्रमुख स्रोत है-
(a) उद्दीपक
(b) रुचि
(c) आवश्यकता
(d) उपर्युक्त सभी
उत्तर: (c) आवश्यकता।
व्याख्या : अभिप्रेरणात्मक चक्र का प्रारम्भ सामान्यतः आवश्यकता से होता है। आवश्यकता से तनाव या अन्तर्नोद उत्पन्न होता है, जो व्यक्ति को लक्ष्य की ओर व्यवहार करने के लिए प्रेरित करता है।
प्रश्न 11. आनुवंशिकता का वाहक होता है-
(a) आर.एन.ए.
(b) केन्द्रक
(c) जीन
(d) शिरा
उत्तर: (c) जीन।
व्याख्या : जीन आनुवंशिकता की मूल इकाइयाँ हैं। ये गुणसूत्रों पर स्थित होते हैं और आनुवंशिक गुणों के हस्तान्तरण में भूमिका निभाते हैं।
प्रश्न 12. व्यक्तित्व मापन की सबसे अच्छी विधि है-
(a) वैयक्तिक
(b) वस्तुनिष्ठ
(c) प्रक्षेपण
(d) ये सभी
उत्तर: (b) वस्तुनिष्ठ।
व्याख्या : दिए गए विकल्पों में वस्तुनिष्ठ विधि अपेक्षित उत्तर है, क्योंकि इसमें निर्धारित मानदण्डों और अपेक्षाकृत वस्तुनिष्ठ मूल्यांकन का प्रयोग किया जाता है। व्यवहार में व्यक्तित्व के समग्र मूल्यांकन के लिए एक से अधिक विधियों का प्रयोग भी किया जाता है।
प्रश्न 13. भाटिया बैटरी परीक्षण सम्बन्धित है-
(a) अभिरुचि से
(b) व्यक्तित्व से
(c) बुद्धि से
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर: (c) बुद्धि से।
व्याख्या : भाटिया बैटरी एक निष्पादन आधारित बुद्धि-परीक्षण है, जिसका निर्माण सी. एम. भाटिया ने किया था।
प्रश्न 14. शिक्षा में सृजनात्मकता का प्रयोग किस रूप में होता है?
(a) सीखना
(b) तर्क
(c) चिन्तन
(d) कल्पना
उत्तर: (d) कल्पना।
व्याख्या : सृजनात्मकता में मौलिक और नवीन विचारों की रचना के लिए कल्पना की महत्त्वपूर्ण भूमिका होती है।
प्रश्न 15. पियाजे के अनुसार बालक के संज्ञानात्मक विकास की स्थितियाँ हैं-
(a) दो
(b) चार
(c) छह
(d) आठ
उत्तर: (b) चार।
व्याख्या : पियाजे ने संज्ञानात्मक विकास की चार अवस्थाएँ बताईं-
- संवेदी-गामक अवस्था
- पूर्व-संक्रियात्मक अवस्था
- मूर्त-संक्रियात्मक अवस्था
- औपचारिक-संक्रियात्मक अवस्था
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अति लघु उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 16. शिक्षक को बाल मनोविज्ञान का ज्ञान क्यों आवश्यक है?
उत्तर: बाल मनोविज्ञान का ज्ञान शिक्षक को बालक की आयु, विकास-स्तर, रुचि, क्षमता और वैयक्तिक भिन्नताओं के अनुसार शिक्षण करने में सहायता देता है।
प्रश्न 17. बाल्यावस्था की प्रमुख दो विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर: बाल्यावस्था में शारीरिक एवं मानसिक विकास अपेक्षाकृत स्थिर होता है तथा बालक का सामाजिक सम्बन्ध और समूह-भावना विकसित होती है।
प्रश्न 18. बालक में विस्मृति कम करने के दो उपाय बताइये।
उत्तर: विस्मृति कम करने के लिए ध्यानपूर्वक एवं अर्थपूर्ण अधिगम तथा नियमित पुनरावृत्ति उपयोगी हैं।
प्रश्न 19. रुचि का शैक्षिक महत्त्व लिखिये।
उत्तर: रुचि बालक का ध्यान विषय पर केन्द्रित करती है और उसे सक्रिय होकर सीखने के लिए प्रेरित करती है, जिससे अधिगम अधिक प्रभावी होता है।
प्रश्न 20. अधिगम स्थानान्तरण सम्प्रत्यय को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: पहले सीखे गए ज्ञान, कौशल या अनुभव का नई परिस्थिति में होने वाले अधिगम पर प्रभाव पड़ना अधिगम स्थानान्तरण कहलाता है।
प्रश्न 21. व्यक्तित्व विकास में शिक्षा किस प्रकार प्रभावी है?
उत्तर: शिक्षा ज्ञान, कौशल, मूल्य, सामाजिक व्यवहार, आत्मविश्वास और अनुशासन का विकास करके बालक के सन्तुलित व्यक्तित्व-निर्माण में सहायता करती है।
प्रश्न 22. बुद्धि की कोई एक परिभाषा बताइए।
उत्तर: बुद्धि नई परिस्थितियों को समझने, सीखने, तर्क करने और समस्याओं का उचित समाधान करने की मानसिक क्षमता है।
प्रश्न 23. शैशवावस्था की प्रमुख दो विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर: शैशवावस्था में शारीरिक विकास अत्यन्त तीव्र होता है तथा भाषा, गामक कौशल और प्रारम्भिक अधिगम का तेजी से विकास होता है।
प्रश्न 24. समायोजन क्या है?
उत्तर: व्यक्ति द्वारा अपनी आवश्यकताओं और वातावरण की परिस्थितियों के बीच सन्तुलन एवं सामंजस्य स्थापित करने की प्रक्रिया समायोजन कहलाती है।
प्रश्न 25. व्यक्तित्व की कोई एक परिभाषा लिखिए।
उत्तर: व्यक्ति की शारीरिक, मानसिक, सामाजिक, संवेगात्मक तथा व्यवहारगत विशेषताओं के संगठित और विशिष्ट स्वरूप को व्यक्तित्व कहते हैं।
प्रश्न 26. अधिगम का अर्थ स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: अनुभव एवं अभ्यास के फलस्वरूप व्यवहार या व्यवहार-क्षमता में होने वाले अपेक्षाकृत स्थायी परिवर्तन को अधिगम कहते हैं।
प्रश्न 27. कल्पना से आप क्या समझते हैं?
उत्तर: पूर्व अनुभवों और मानसिक प्रतिमाओं को नए रूप में संगठित करके नई वस्तु, विचार या परिस्थिति की मानसिक रचना करना कल्पना कहलाता है।
प्रश्न 28. सन्तुलन को कोई एक उदाहरण देकर समझाइए।
उत्तर: पियाजे के अनुसार पूर्व ज्ञान और नई परिस्थिति में सामंजस्य स्थापित करना सन्तुलन है। जैसे बच्चा नई जानकारी के अनुसार अपनी पुरानी धारणा में परिवर्तन करता है।
प्रश्न 29. अधिगमान्तरण क्या है?
उत्तर: एक परिस्थिति में सीखे गए ज्ञान या कौशल का दूसरी परिस्थिति के अधिगम पर प्रभाव पड़ना अधिगमान्तरण कहलाता है।
प्रश्न 30. शैशवावस्था में शिक्षा का स्वरूप कैसा होना चाहिए?
उत्तर: शैशवावस्था में शिक्षा खेल, क्रिया, प्रत्यक्ष अनुभव और इन्द्रिय-अनुभव पर आधारित तथा बालक की रुचि एवं विकास-स्तर के अनुरूप होनी चाहिए।
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लघु उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 31. शिक्षा में वैयक्तिक भिन्नता के प्रभाव की विवेचना कीजिए।
उत्तर: प्रत्येक बालक बुद्धि, रुचि, अभिरुचि, योग्यता, व्यक्तित्व, सीखने की गति, पूर्व अनुभव तथा सामाजिक-सांस्कृतिक पृष्ठभूमि की दृष्टि से दूसरे बालकों से भिन्न होता है। इन अन्तरों को वैयक्तिक भिन्नताएँ कहते हैं।
शिक्षा पर वैयक्तिक भिन्नताओं के प्रमुख प्रभाव-
- सभी विद्यार्थी एक समान गति से नहीं सीखते हैं।
- एक ही शिक्षण-विधि सभी विद्यार्थियों के लिए समान रूप से प्रभावी नहीं होती।
- शिक्षक को विद्यार्थियों की योग्यता एवं रुचि के अनुसार गतिविधियाँ देनी चाहिए।
- धीमी गति से सीखने वाले विद्यार्थियों को अतिरिक्त सहायता की आवश्यकता हो सकती है।
- प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को अधिक चुनौतीपूर्ण एवं समृद्धि गतिविधियाँ दी जानी चाहिए।
- शिक्षण में व्यक्तिगत कार्य, समूह-कार्य तथा विभिन्न शिक्षण-सामग्रियों का प्रयोग करना चाहिए।
- मूल्यांकन में भी विद्यार्थियों की व्यक्तिगत क्षमताओं एवं प्रगति का ध्यान रखना चाहिए।
अतः प्रभावी शिक्षा के लिए शिक्षक को वैयक्तिक भिन्नताओं को स्वीकार करके लचीला और बाल-केन्द्रित शिक्षण अपनाना चाहिए।
प्रश्न 32. किशोरावस्था में शिक्षा का स्वरूप कैसा होना चाहिए?
उत्तर: किशोरावस्था तीव्र शारीरिक, मानसिक, सामाजिक और संवेगात्मक परिवर्तनों की अवस्था है। अतः इस अवस्था में शिक्षा ऐसी होनी चाहिए जो किशोर के सर्वांगीण विकास, आत्मनिर्भरता और स्वस्थ व्यक्तित्व-निर्माण में सहायता करे।
किशोरावस्था में शिक्षा का स्वरूप-
- शारीरिक एवं स्वास्थ्य शिक्षा : शारीरिक परिवर्तनों, पोषण, स्वच्छता और स्वास्थ्य सम्बन्धी उचित ज्ञान देना चाहिए।
- नैतिक एवं मूल्य शिक्षा : उत्तरदायित्व, सहयोग, अनुशासन और मानवीय मूल्यों का विकास करना चाहिए।
- आत्मनिर्भरता : निर्णय लेने और उत्तरदायित्व निभाने के अवसर देने चाहिए।
- वैयक्तिक भिन्नताओं का ध्यान : शिक्षा रुचि, योग्यता और अभिरुचि के अनुसार होनी चाहिए।
- संवेगात्मक विकास : भावनाओं को समझने और उचित ढंग से व्यक्त करने का अवसर देना चाहिए।
- सृजनात्मक गतिविधियाँ : कला, खेल, विज्ञान, साहित्य और अन्य रचनात्मक कार्यों को प्रोत्साहित करना चाहिए।
- व्यावसायिक निर्देशन : भविष्य की शिक्षा और व्यवसाय के चुनाव में उचित मार्गदर्शन देना चाहिए।
- सहानुभूतिपूर्ण वातावरण : शिक्षक एवं अभिभावक को किशोर की समस्याओं को समझकर सहयोग देना चाहिए।
प्रश्न 33. अवधान व अभिरुचि एक सिक्के के दो पहलू हैं, स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: अवधान और अभिरुचि में घनिष्ठ सम्बन्ध है। जिस वस्तु या कार्य में व्यक्ति की रुचि होती है, उसकी ओर उसका ध्यान सहज रूप से आकर्षित होता है। इसी प्रकार किसी विषय पर लगातार ध्यान देने और सफलता प्राप्त करने से उसमें रुचि विकसित हो सकती है।
अवधान एवं अभिरुचि का सम्बन्ध-
- अवधान अभिरुचि से प्रभावित होता है : रुचिकर विषय की ओर व्यक्ति स्वाभाविक रूप से अधिक ध्यान देता है।
- अभिरुचि अवधान से विकसित हो सकती है : किसी विषय को ध्यानपूर्वक समझने और उसमें सफलता मिलने पर उस विषय के प्रति रुचि बढ़ सकती है।
- दोनों परस्पर पूरक हैं : रुचि ध्यान को स्थायी बनाती है और ध्यान रुचि को गहरा करने में सहायता करता है।
इसी कारण शिक्षा में विद्यार्थियों की रुचि उत्पन्न करके उनका ध्यान पाठ की ओर केन्द्रित करना महत्त्वपूर्ण है।
प्रश्न 34. स्मृति के प्रभावी कारकों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर: स्मृति की प्रभावशीलता अनेक शारीरिक, मानसिक और अधिगम सम्बन्धी कारकों से प्रभावित होती है। प्रमुख कारक निम्नलिखित हैं-
- ध्यान एवं एकाग्रता : ध्यानपूर्वक सीखी गई सामग्री अधिक अच्छी तरह याद रहती है।
- रुचि : रुचिकर सामग्री शीघ्र सीखी और अधिक समय तक धारण की जाती है।
- सार्थकता : अर्थपूर्ण सामग्री निरर्थक सामग्री की अपेक्षा अधिक आसानी से याद रहती है।
- अभ्यास एवं पुनरावृत्ति : उचित पुनरावृत्ति स्मृति को दृढ़ करती है।
- अभिप्रेरणा : सीखने की इच्छा और स्पष्ट उद्देश्य स्मरण को प्रभावी बनाते हैं।
- संगठन : सामग्री को क्रमबद्ध एवं समूहबद्ध करके सीखना स्मरण में सहायक होता है।
- शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य : पर्याप्त नींद, विश्राम और अच्छा स्वास्थ्य स्मृति के लिए उपयोगी हैं।
- संवेगात्मक स्थिति : अत्यधिक भय, चिन्ता और तनाव स्मरण को बाधित कर सकते हैं।
प्रश्न 35. प्रक्षेपी परीक्षण से आप क्या समझते हैं? किन्हीं दो प्रक्षेपी परीक्षणों का नाम बताइए।
उत्तर: व्यक्तित्व-मापन की वह विधि जिसमें व्यक्ति के सामने अस्पष्ट उद्दीपक प्रस्तुत किए जाते हैं और उसकी स्वतन्त्र प्रतिक्रियाओं के आधार पर उसकी भावनाओं, आवश्यकताओं, संघर्षों तथा व्यक्तित्वगत विशेषताओं का अध्ययन किया जाता है, प्रक्षेपी परीक्षण कहलाता है।
दो प्रमुख प्रक्षेपी परीक्षण-
- 1. टी.ए.टी. (Thematic Apperception Test) : मरे एवं मॉर्गन द्वारा विकसित इस परीक्षण में अस्पष्ट चित्रों के आधार पर व्यक्ति से कहानी बनाने को कहा जाता है। मूल सेट में 31 कार्ड हैं; व्यक्ति के अनुसार चयनित कार्डों का प्रयोग किया जाता है।
- 2. रोर्शाक स्याही-धब्बा परीक्षण : हरमन रोर्शाक द्वारा विकसित इस परीक्षण में 10 स्याही-धब्बा कार्ड दिखाए जाते हैं और व्यक्ति की प्रतिक्रियाओं का अध्ययन किया जाता है।
प्रश्न 36. सीखने के वक्र से आप क्या समझते हैं? इनके विभिन्न प्रकारों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर: सीखने की मात्रा, गति या निष्पादन तथा समय अथवा अभ्यास के बीच सम्बन्ध को ग्राफ पर प्रदर्शित करने वाली रेखा को अधिगम वक्र (Learning Curve) कहते हैं।
अधिगम वक्र के प्रमुख प्रकार-
- 1. सरल रेखीय वक्र : इसमें सीखने की प्रगति लगभग समान गति से होती है।
- 2. उन्नतोदर या ऋणात्मक त्वरण वक्र : प्रारम्भ में सीखने की गति तीव्र होती है और बाद में धीरे-धीरे कम हो जाती है।
- 3. नतोदर या धनात्मक त्वरण वक्र : प्रारम्भ में सीखने की गति धीमी होती है, पर बाद में अभ्यास के साथ तेजी से बढ़ती है।
- 4. S-आकार का वक्र : प्रारम्भ में प्रगति धीमी, मध्य में तीव्र तथा अन्त में पुनः धीमी हो जाती है।
अधिगम वक्र से शिक्षक विद्यार्थी की प्रगति, सीखने की गति तथा अधिगम-पठार जैसी स्थितियों की पहचान कर सकता है।
प्रश्न 37. बाल विकास का क्षेत्र स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: बाल विकास का क्षेत्र व्यापक है। इसके अन्तर्गत बालक के जन्म से किशोरावस्था तक होने वाले विभिन्न प्रकार के विकास और उन्हें प्रभावित करने वाले कारकों का अध्ययन किया जाता है।
बाल विकास के प्रमुख क्षेत्र-
- शारीरिक एवं गामक विकास : ऊँचाई, भार, शरीर की संरचना, मांसपेशियों तथा क्रियात्मक कौशलों का विकास।
- मानसिक एवं संज्ञानात्मक विकास : बुद्धि, स्मृति, ध्यान, चिन्तन, तर्क और समस्या-समाधान का विकास।
- संवेगात्मक विकास : भय, क्रोध, प्रेम, प्रसन्नता आदि संवेगों की अभिव्यक्ति तथा नियन्त्रण का विकास।
- सामाजिक विकास : परिवार, मित्रों और समाज के साथ उचित सम्बन्ध स्थापित करने तथा सामाजिक व्यवहार सीखने का विकास।
- भाषा विकास : क्रन्दन, बलबलाना, शब्द-भण्डार, वाक्य-निर्माण तथा भाषा-अभिव्यक्ति का विकास।
- व्यक्तित्व विकास : स्वभाव, रुचि, अभिवृत्ति, आत्मविश्वास तथा व्यवहारगत विशेषताओं का विकास।
बाल विकास के अध्ययन में वंशानुक्रम, वातावरण, परिपक्वता तथा वैयक्तिक भिन्नताओं के प्रभाव का भी अध्ययन किया जाता है।
प्रश्न 38. तर्क और चिन्तन को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: चिन्तन एक व्यापक मानसिक प्रक्रिया है जिसमें व्यक्ति विचारों, प्रतीकों, अनुभवों और ज्ञान के माध्यम से किसी वस्तु, घटना या समस्या के विषय में मानसिक क्रिया करता है।
तर्क चिन्तन का अधिक व्यवस्थित एवं उद्देश्यपूर्ण रूप है। इसमें उपलब्ध तथ्यों, सिद्धान्तों और अनुभवों के बीच सम्बन्ध स्थापित करके किसी उचित निष्कर्ष या समाधान तक पहुँचा जाता है।
तर्क एवं चिन्तन में अन्तर-
- चिन्तन का क्षेत्र व्यापक है, जबकि तर्क चिन्तन की विशिष्ट प्रक्रिया है।
- चिन्तन में सामान्य विचार, कल्पना और मानसिक विश्लेषण सम्मिलित हो सकते हैं।
- तर्क में विचारों को क्रमबद्ध करके किसी निष्कर्ष तक पहुँचना आवश्यक होता है।
- समस्या-समाधान एवं निर्णय लेने में तर्क का विशेष महत्त्व है।
प्रश्न 39. व्यक्तित्व की व्याख्या कीजिए। व्यक्तित्व मापन आप किस प्रकार करेंगे?
उत्तर: व्यक्ति की शारीरिक, मानसिक, सामाजिक, संवेगात्मक एवं व्यवहारगत विशेषताओं के संगठित और विशिष्ट स्वरूप को व्यक्तित्व कहते हैं। व्यक्तित्व केवल बाहरी रूप नहीं, बल्कि व्यक्ति के सम्पूर्ण व्यवहार और वातावरण के प्रति उसके विशिष्ट समायोजन को व्यक्त करता है।
व्यक्तित्व-मापन की प्रमुख विधियाँ-
- वैयक्तिक या आत्मनिष्ठ विधियाँ : जीवन-वृत्त, आत्मकथा, साक्षात्कार और प्रश्नावली आदि।
- वस्तुनिष्ठ विधियाँ : निरीक्षण, निर्धारण मापनी, परिस्थिति परीक्षण और समाजमिति आदि।
- मनोविश्लेषणात्मक विधियाँ : स्वतन्त्र साहचर्य, स्वप्न-विश्लेषण आदि।
- प्रक्षेपी विधियाँ : टी.ए.टी., सी.ए.टी., रोर्शाक स्याही-धब्बा परीक्षण, वाक्य-पूर्ति आदि।
व्यक्तित्व जटिल होने के कारण उसके समग्र मूल्यांकन के लिए परिस्थिति के अनुसार एक से अधिक विधियों का प्रयोग अधिक उपयोगी होता है।
प्रश्न 40. सीखने की प्रभावशाली विधियों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर: अधिगम को सक्रिय, स्थायी और प्रभावी बनाने के लिए विभिन्न शिक्षण-अधिगम विधियों का प्रयोग किया जाता है। प्रमुख विधियाँ निम्नलिखित हैं-
- करके सीखना : विद्यार्थी स्वयं कार्य एवं गतिविधि में भाग लेकर प्रत्यक्ष अनुभव प्राप्त करता है।
- अनुकरण द्वारा सीखना : बालक दूसरे व्यक्ति के व्यवहार, भाषा अथवा कौशल को देखकर उसका अनुकरण करता है।
- निरीक्षण द्वारा सीखना : वस्तुओं, घटनाओं एवं प्रक्रियाओं का ध्यानपूर्वक निरीक्षण करके ज्ञान प्राप्त किया जाता है।
- प्रयोग द्वारा सीखना : विद्यार्थी स्वयं प्रयोग एवं परीक्षण करके परिणाम और निष्कर्ष प्राप्त करता है।
- प्रयत्न एवं भूल द्वारा सीखना : अनेक प्रयासों में गलत प्रतिक्रियाएँ छोड़कर सफल प्रतिक्रिया सीखी जाती है।
- परियोजना विधि : किसी उद्देश्यपूर्ण समस्या या कार्य को योजना बनाकर पूरा करते हुए अधिगम किया जाता है।
- समूह-कार्य : सहयोग, चर्चा एवं विचार-विनिमय द्वारा सीखने के अवसर प्राप्त होते हैं।
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