वस्तुनिष्ठ प्रश्न
प्रश्न 1. बाल विकास के अन्तर्गत निम्नलिखित आयु वर्ग है-
(a) 0-18 वर्ष
(b) 20-30 वर्ष
(c) 25-35 वर्ष
(d) 35 से ऊपर।
उत्तर: (a) : बाल विकास के अन्तर्गत 0 से 18 वर्ष के आयु वर्ग के बालक आते हैं। नवजात उम्र (0 से 1 माह) शिशु (उम्र 1 महीना से 1 वर्ष) नन्हा बच्चा (उम्र 1 से 3 वर्ष) प्री-स्कूल बच्चा (उम्र 4 से 6 वर्ष) स्कूली बच्चा उम्र 6 से 13 वर्ष) किशोर-किशोरी उम्र 13 से 20 वर्ष)।
प्रश्न 2. बुद्धि का विकास लगभग पूर्ण हो जाता है-
(a) शैशवावस्था में
(b) बाल्यावस्था में
(c) किशोरावस्था में
(d) सभी अवस्थाओं में।
उत्तर: (c) : किशोरावस्था में बुद्धि का विकास लगभग पूर्ण हो जाता है। 12 वर्ष से 18 वर्ष तक की अवस्था को किशोरावस्था कहा जाता है। यह वह समय होता है जिसमें व्यक्ति बाल्यावस्था से किशोरावस्था की ओर उन्मुख होता है।
प्रश्न 3. नवजात शिशु में हड्डियां होती हैं-
(a) 100
(b) 205
(c) 306
(d) 350
उत्तर: (c) : मानव कंकाल शरीर की आन्तरिक संरचना होती है। नवजात शिशु में 306 हड्डिया होती हैं।
प्रश्न 4. सीखने को प्रभावित करने वाला सबसे महत्वपूर्ण कारक है-
(a) प्रेरणा
(b) ध्यान
(c) रुचि
(d) स्मृति।
उत्तर: (a) : सीखने को प्रभावित करने वाला सबसे महत्वपूर्ण कारक प्रेरणा है। यदि बालक सीखने के लिए प्रेरित नहीं होता है, तो वह सीखने के कार्य में रूचि नहीं लेता है।
प्रश्न 5. सीखने की सही परिभाषा है-
(a) आदेशों का पालन करना
(b) रटना
(c) अनुभव और प्रशिक्षण द्वारा व्यवहार में परिवर्तन
(d) दूसरों के साथ काम करना।
उत्तर: (c) : अनुभव एवं प्रशिक्षण द्वारा व्यवहार में परिवर्तन सीखना कहलाता है। सीखना एक व्यापक, सतत् एवं जीवन पर्यन्त चलने वाली महत्वपूर्ण प्रक्रिया है।
प्रश्न 6. 'प्रयत्न एवं भूल सिद्धान्त' का प्रतिपादन किया-
(a) कोलहर ने
(b) योकम ने
(c) थार्नडाइक ने
(d) हल ने।
उत्तर: (c) : थार्नडाइक ने प्रयत्न एवं भूल के सिद्धान्त का प्रतिपादन किया था।
प्रश्न 7. बालक के नैतिक विकास का तात्पर्य है उसके -
(a) सामाजिक विकास
(b) शारीरिक विकास
(c) धार्मिक विकास
(d) चारित्रिक विकास।
उत्तर: (d) : बालक के नैतिक विकास का तात्पर्य उसके चारित्रिक विकास से है। नैतिक विकास से बालक में प्रखर चारित्रिक विकास होता है जिससे वो जीवन में अच्छा नागरिक बनता है।
प्रश्न 8. निम्न में कौन-सा प्रकार मनोवैज्ञानिक है?
(a) बहिर्मुखी
(b) सैद्धान्तिक
(c) भक्तिहीन
(d) राजनैतिक
उत्तर: (a) : बहिर्मुखी एवं अन्तर्मुखी एक मनोवैज्ञानिक प्रक्रिया है। इसे लोकप्रिय बनाने का श्रेय जर्मन मनोवैज्ञानिक कार्ल जंग को जाता है।
प्रश्न 9. आत्मकेन्द्रित व्यक्ति का व्यक्तित्व होता है-
(a) अन्तर्मुखी
(b) बहिर्मुखी
(c) उभयमुखी
(d) सभी।
उत्तर: (a) : आत्मकेन्द्रित व्यक्ति का व्यक्तित्व अंतर्मुखी होता है। वह स्वयं पर और स्वयं की आवश्यकताओं, इच्छाओं प्राथमिकताओं और समस्याओं पर एकाग्र होकर ध्यान केन्द्रित करता है।
प्रश्न 10. चिन्तन के साधनों में एक है-
(a) संकेत
(b) रटना
(c) गुणों का विश्लेषण
(d) सामान्यीकरण।
उत्तर: (d) : चिन्तन के साधनों में सामान्यीकरण एक प्रक्रिया है। चिन्तन मानसिक रूप से विचार करने की ज्ञानात्मक प्रक्रिया है, जो विभिन्न प्रतीकों के सहारे चलती है और समस्या समाधान में सक्रिय सहयोग देती है।
प्रश्न 11. बालक में अभिप्रेरणा उत्पन्न करने का प्रमुख स्त्रोत है-
(a) उद्दीपक
(b) रुचि
(c) आवश्यकता
(d) उपर्युक्त सभी।
उत्तर: (d) : बालक में अभिप्रेरणा उत्पन्न करने का प्रमुख स्रोत निम्न है- (1) उद्दीपक, (2) रूचि, (3) आवश्यकता आदि।
प्रश्न 12. "स्मृति एक आदर्श पुनरावृत्ति है।" यह कथन किसका है ?
(a) स्टाउट
(b) जैक्स
(c) रायबर्न
(d) रॉस।
उत्तर: (a) : "स्मृति एक आदर्श पुनरावृत्ति है।" यह कथन स्टाउट का है।
प्रश्न 13. सृजनात्मक बालक की विशेषता है कि वह-
(a) संवेदनशील होता है
(b) परिहास प्रिय होता है
(c) जिज्ञासु होता है
(d) उपर्युक्त सभी।
उत्तर: (d) : सृजनात्मक बालक की विशेषता निम्न होती हैं-
- उसमें संवेदनशीलता होती है।
- उसमें परिहास प्रियता होती है।
- उसमें जिज्ञासा की प्रवृति होती है।
प्रश्न 14. संवेग का प्रकार नहीं है-
(a) क्रोध
(b) भय
(c) ध्यान
(d) उपलब्धि प्रेरक।
उत्तर: (d) : संवेग कई तरह के होते हैं। जैसे क्रोध, उल्लास, जलन आदि। संवेग में शारीरिक बदलाव महसूस होता है। उपलब्धि प्रेरक, संवेग का प्रकार नहीं है।
प्रश्न 15. फ्रायड के अनुसार आक्रामकता का कारण है-
(a) उच्च अधिगम
(b) उद्दोलन
(c) जिज्ञासा
(d) उपलब्धि प्रेरक।
उत्तर: (b) : फ्रायड के अनुसार आक्रामकता का मुख्य कारण उद्दोलन (निराशा) है।
अति लघु उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 16. शिक्षक को बाल विकास का ज्ञान क्यों आवश्यक है? दो कारण बताइए।
उत्तर: शिक्षक को बाल विकास का ज्ञान इसलिए आवश्यक है कि इसमें शिक्षक अपने कक्षा के बालकों का मानसिक स्तर सरलता से ज्ञात कर सकता है। दो कारण निम्न हैं-
- वह शिक्षण विधियों एवं शिक्षण अधिगम सामग्री का प्रयोग करता है। इस प्रकार वह प्रभावी शिक्षण प्रदान करता है।
- यह शिक्षकों को अधिगम के उचित अवसर प्रदान करने में मदद करेगा।
प्रश्न 17. शैशवावस्था की प्रमुख दो विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर: शैशवावस्था की प्रमुख दो विशेषताएँ निम्न हैं-
- शारीरिक विकास में तीव्रता।
- मानसिक क्रियाओं में तीव्रता।
- सीखने में तीव्रता।
प्रश्न 18. किशोरावस्था का क्या तात्पर्य है?
उत्तर: किशोरावस्था मनुष्य के जीवन का वसंतकाल माना गया है। यह काल 12 से 19 वर्ष तक रहता है, परन्तु किसी व्यक्ति में यह बाइस वर्ष तक चला जाता है। इसमें बालक तथा बालिका में कई परिवर्तन होता है, जैसे-लम्बाई, वृद्धि त्वचा में बदलाव (जैसे-मुहासे) शामिल हैं।
प्रश्न 19. समायोजन क्या है?
उत्तर: समायोजन (Adjustment), परस्पर विरोधी आवश्यकताओं को सन्तुलित करने की व्यवहार-सम्बन्धी प्रक्रिया है। अर्थात् पर्यावरण की कठिनाइयों एवं बाधाओं को ध्यान में रखते हुए व्यवहार में जो परिवर्तन किये जाते हैं समायोजन कहलाते हैं।
प्रश्न 20. तर्क का क्या तात्पर्य है?
उत्तर: "मन में किसी उद्देश्य एवं लक्ष्य को रखकर क्रमानुसार चिन्तन करना तर्क है।" - गैरेट के अनुसार
प्रश्न 21. सामाजिक विकास क्या है?
उत्तर: सामाजिक विकास- सामाजिक विकास वह प्रक्रिया है जिसके माध्यम से बच्चे अपने समाज और उसके भीतर कार्य करने के उचित तरीकों के बारे में सीखते हैं।
प्रश्न 22. व्यक्तित्व की कोई एक परिभाषा लिखिए।
उत्तर: "व्यक्तित्व एक व्यक्ति के गठन, व्यवहार के तरीकों, रूचियों, दृष्टिकोणों, क्षमताओं तथा तरीकों का सबसे विशिष्ट संगठन है।" - मन के अनुसार
प्रश्न 23. आवाज में भारीपन किस अवस्था में आता है?
उत्तर: आवाज में भारीपन किशोरावस्था में आता है। इसमें त्वचा पर बाल आने लगते हैं। इस अवस्था में अनेक शारीरिक परिवर्तन होने लगते हैं।
प्रश्न 24. अधिगम का अर्थ स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: सीखना या अधिगम एक व्यापक सतत् एवं जीवन पर्यन्त चलने वाली महत्वपूर्ण प्रक्रिया है। मनुष्य जन्म के उपरान्त ही सीखना प्रारंभ कर देता है और जीवन भर कुछ न कुछ सीखता रहता है।
प्रश्न 25. रुचि के भेद बताइए।
उत्तर: रुचि शब्द अंग्रेजी भाषा के INTEREST का हिन्दी रूपान्तरण है। Interest की उत्पत्ति लैटिन भाषा के शब्द INTERESSE से हुई है। इसका तात्पर्य है-अन्तर स्थापित करना, महत्वपूर्ण होना और लगाव होना। रूचि के प्रकार-
- जन्मजात रूचि।
- अर्जित रूचि।
प्रश्न 26. बुद्धि परीक्षण कितने प्रकार के होते हैं?
उत्तर: क्रियाओं के आधार पर बुद्धि-परीक्षण को दो मुख्य भागों में बाँटा जा सकता है-
- (A) शाब्दिक परीक्षण।
- (B) अशाब्दिक परीक्षण।
प्रश्न 28. अमूर्त बुद्धि से क्या आप समझते हैं?
उत्तर: ऐसी चीजों के बारे में चिंतन करना जो आपके सामने नहीं हो उसे ही अमूर्त बुद्धि कहा जाता है। ऐसी बुद्धि में व्यक्ति शब्द प्रतीक तथा अन्य मूर्त चीजों के सहारे अच्छे से चिंतन कर लेता है। सामान्यतः जिन व्यक्तियों में अमूर्त बुद्धि अधिक होती है। वे सफल कलाकार पेंटर, गणितज्ञ, कहानीकार, दार्शनिक आदि होते हैं।
प्रश्न 29. शारीरिक विकास का अध्ययन क्यों जरूरी है? दो कारण बताइए।
उत्तर: शारीरिक विकास संज्ञानात्मक विकास में योगदान देता है। जैसे-जैसे बच्चे आगे बढ़ते हैं और दुनिया का पता लगाते हैं वे वस्तुओं के गुणों और अपनी क्षमताओं के बारे में सीखते हैं। शुरूआती वर्षों में बच्चे गतिविधि के ऐसे पैटर्न स्थापित कर रहे हैं जो उनके पूरे भविष्य को प्रभावित करेंगे।
लघु उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 30. बाल्यावस्था की दो विशेषताएँ बताइए।
उत्तर: बाल्यावस्था की दो विशेषताएँ निम्नलिखित हैं-
- (1) संवेगात्मक विकास- बाल्यावस्था में बालक के संवेग में स्थिरता आ जाती है। बालक भय और क्रोध को नियन्त्रित करना सीख जाता है। इस अवस्था में बालक में सामाजिक गुणों का विकास होने लगता है। जैसे-सहयोग, सहनशीलता, आज्ञाकारिता, सद्भावना इत्यादि।
- (2) सामाजिक विकास- बाल्यावस्था में बालक का सामाजीकरण की प्रक्रिया भी प्रारम्भ हो जाती है। इस अवस्था में बालक क्या, कौन, क्यों, कैसे जैसे प्रश्नों पर विचार करने और पूछने लगता है। बालक जब 11 या 12 वर्ष की आयु में होता है, तो वह सामूहिक खेलों में भाग लेने लगता है। बालक समूह के कप्तान के बातों को मानने लगता है इस अवस्था में बालक में सहनशीलता सहयोग और आत्मविश्वास की भावना आदि गुणों का विकास होता है।
प्रश्न 31. अधिगम की विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर: अधिगम की विशेषताएँ निम्नलिखित हैं-
- (1) अधिगम एक समायोजन की प्रक्रिया है- व्यक्ति हर स्थिति में अपने वातावरण में समायोजित होने का प्रयास करता है जिसके फलस्वरूप वह अपने व्यवहारों में संशोधन, नए व्यवहारों को ग्रहण करता है। ताकि वह अपनी समायोजित अवस्था में रह सके।
- (2) अधिगम उद्देश्यपूर्ण एवं विवेकपूर्ण होता है- सीखने में सफलता निश्चित उद्देश्यों की उपस्थिति से ही सम्भव है। सीखना एक विवेकपूर्ण कार्य है। बिना बुद्धि या विवेक के सीखने की प्रक्रिया संतोषजनक ढंग से नहीं चलती।
- (3) अधिगम ज्ञानात्मक, भावात्मक व मनोक्रियात्मक पक्ष से संबंधित है- मनुष्य जो कुछ सीखता है उसका क्षेत्र ज्ञानात्मक, भावात्मक व मनोक्रियात्मक होता है क्योंकि वह ज्ञान का संग्रह करता है, भावनाओं को ग्रहण करता है तथा क्रियाओं को करने के लिए दक्षताओं को भी संकलित करता है।
प्रश्न 32. सीखने की प्रभावशाली विधियाँ कौन-कौन सी हैं?
उत्तर: सीखने की प्रभावशाली विधियाँ निम्नलिखित हैं-
- (1) प्रश्नोत्तर विधि (सुकराती विधि)- इस विधि का प्रतिपादन सुकरात ने किया था। इसलिए इसे सुकराती विधि कहते हैं। इसमें प्रश्नकर्त्ता से ही प्रश्न किये जाते हैं और उसके उत्तरों के आधार पर उसी से प्रश्न करते-करते अपेक्षित उत्तर निकलवाया जाता है।
- (2) करके सीखना- करके सीखना अर्थात् स्वानुभव द्वारा ज्ञान प्राप्त करना, आज कल का सर्वाधिक व्यापक शिक्षण सिद्धान्त है। अतः रूसो से लेकर मांटेसरी और ड्यूबी तक शिक्षाशास्त्रियों ने बच्चों की ज्ञानेंद्रियों को अधिक कार्यशील बनाने तथा उनके द्वारा शिक्षा देने पर अधिक बल दिया है।
- (3) प्रोजेक्ट विधि- इसके अनुसार ज्ञान प्राप्ति के लिए स्वाभाविक वातावरण अधिक उपयुक्त होता है। इस विधि से पढ़ाने के लिए पहले कोई समस्या ली जाती है, जो प्रायः छात्रों के द्वारा उठाई जाती है और उस समस्या का हल करने के लिए उन्हीं के द्वारा योजना बनाई जाती है। यह विधि अमेरिका के प्रसिद्ध शिक्षाशास्त्री ड्यूबी, किलपैट्रिक आदि के सम्मिलित प्रयास की योजना विधि है।
- (4) वर्धा योजना या बुनियादी तालीम- इस योजना की शुरूआत महात्मा गाँधी ने की। गाँधी जी ने देश की तत्कालीन स्थिति को देखते हुए शिक्षा में हाथ के काम को प्रधानता दी। उनका विश्वास था कि जब तक छात्र हाथ से काम नहीं करता तब तक उसे श्रम का महत्व नहीं ज्ञात होता। अतः बच्चों को आरम्भ से ही किसी न किसी हस्त कौशल के द्वारा शिक्षा देनी चाहिए।
प्रश्न 33. "किशोरावस्था बड़े संघर्ष, तनाब, तूफान तथा विरोध की अवस्था है।" इस कथन की विवेचना कीजिए।
उत्तर: किशोरावस्था का प्रारम्भ लगभग 13 या 14 वर्ष से प्रारम्भ होता है। वैयक्तिक अन्तर होने कारण इसकी कोई आयु सीमा निर्धारित नहीं की जा सकती है। किशोरावस्था लगभग 18-19 वर्ष तक मानी गयी है। इस अवस्था को मनोवैज्ञानिक 21 वर्ष तक मानते हैं। इसमें बालक अनेक जिज्ञासाएँ लिये हुए होता है।
किशोरावस्था जीवन का सबसे कठिन काल- यह, वह अवस्था है जिसमें बालक बाल्यावस्था से परिपक्वता की ओर बढ़ता है। इस अवस्था में व्यवहार सम्बंधी समस्याएँ सबसे ज्यादा होती हैं। इसमें विपरीत लिंगों के प्रति आकर्षण बहुत तीव्र होता है। लड़के, लड़कियों की तरफ तथा लड़कियाँ, लड़कों की तरफ ज्यादा आकर्षित होती हैं। इस अवस्था में अपराध होने की प्रवृत्ति सबसे ज्यादा होती है। इसमें प्रतिस्पर्धा, आत्म सम्मान, वीर पूजा की भावना का विकास होता है।
स्टैनले हाल के अनुसार, "किशोरावस्था बड़े संघर्ष, तनाव तथा विरोध की अवस्था है।" इस अवस्था में किशोर एवं किशोरियों में काम-वासना की भावना का विकास तीव्र होता है। इसमें बालक का झुकाव जिस तरफ जाता है, उसी दिशा में वह आगे बढ़ता चला जाता है। कुछ बालक नशीली दवाओं का सेवन, मदिरा, तम्बाकू आदि का सेवन करना शुरू कर देते हैं। इसमें संवेग, चिड़चिड़ापन, घृणा, क्रोध आदि कई भाव तथा संवेग उत्पन्न हो जाते हैं। इस अवस्था में बालक बहुत अधिक उदण्ड हो जाता है। किशोरावस्था में बालक आत्मनिर्भर रहना चाहता है। वह स्वतन्त्र रहना चाहता है। स्वतन्त्रता के लिए वह लड़ाई-झगड़ा भी कर लेता है। किशोरावस्था जीवन का सबसे कठिन काल है क्योंकि इस अवस्था में बालक में बहुत से शारीरिक परिवर्तन होते हैं। हार्मोन तथा ग्रन्थियों के स्राव में भी परिवर्तन होता है। इस अवस्था में सामाजिक, मानसिक भावानात्मक परिवर्तन होता है। इसलिए किशोरावस्था को सबसे कठिन काल कहा जाता है।
प्रश्न 34. बाल विकास की आवश्यकता एवं महत्व पर प्रकाश डालिए।
उत्तर: बाल विकास की आवश्यकता एवं महत्व निम्न प्रकार से है-
- बालक की वृद्धि एवं विकास में वातावरण तथा वंशानुक्रम दोनों ही उत्तरदायी होते हैं
- बाल विकास प्रक्रिया को समझाने में सहायक।
- बाल निर्देश व परामर्श में सहायक।
- बालकों के प्रति भविष्यवाणी करने में सहायक।
- व्यक्तिगत भिन्नता का ज्ञान।
- अनुशासन स्थापन में सहायक आदि।
प्रश्न 35. किशोरों की व्यवहार सम्बन्धी समस्याओं का संक्षेप में उल्लेख कीजिए।
उत्तर: किशारों में बदलाव शुरू होता वह क्योंकि ये अवस्था तनाव व तूफान की अवस्था होती है। इसमें निम्न बातें शामिल हैं-
- माता-पिता या भाई-बहनों के साथ बहस करना।
- परिवार में दूसरों के प्रति असम्मानजनक व्यवहार।
- भावनाओं में उतार-चढ़ाव और मूडी होना।
- वीर पूजा की भावना का विकास होना।
- अपने को श्रेष्ठ समझना
- प्रतिस्पर्धा की भावना का विकास होना।
- विपरीत लिंगों के प्रति आकर्षित होना।
प्रश्न 36. चिन्तन का शिक्षा में क्या महत्व है?
उत्तर: चिंतन एक अपसारी प्रक्रिया है। इसमें नए विचार आपके दिमाग में आते हैं जो निर्णय लेने में सहायक होते हैं। चिंतन में आए विचार की तुरंत प्रतिक्रिया होती है। विचार को पसंद करते हैं या ना पसंद लेकिन आपका विवेक विचार को मूर्त रूप देने के लिए अच्छा या बुरा के बारे में सोचता है। चिन्तन करने से तर्कशक्ति का विकास होता है। जिससे वैज्ञानिक शक्ति जाग्रत होती है। चिन्तन सीखने की प्रक्रिया का एक अभिन्न अंग है। यह हमें अपने बारे में और हम कैसे सीखते हैं, इसके बारे में अधिक जानने की अनुमति देता है। यह हमें शैक्षणिक कौशल में सुधार करने में भी सहायता करता है।
प्रश्न 37. मानसिक विकास के विभिन्न पक्षों के नाम लिखिए।
उत्तर: मानसिक विकास अनेक क्रियाओं का समूह होता है। इसके विभिन्न पक्षों के नाम निम्नलिखित हैं-
- संवेदन
- रूचि एवं अभिव्यक्ति
- तर्क
- प्रत्यक्षीकरण
- कल्पना
- निर्णय
- स्मरण-विस्मरण
- निरीक्षण
- बुद्धि
- ध्यान
- चिन्तन
- सीखना (अधिगम)
प्रश्न 38. बुद्धि से आप क्या समझते हैं?
उत्तर: बुद्धि वह मानसिक शक्ति है जो वस्तुओं एवं तथ्यों को समझने उनमें आपसी सम्बन्ध खोजने तथा तर्कपूर्ण ज्ञान प्राप्त करने में सहायक होती है। यह 'भावना' और अन्तः प्रज्ञा से अलग है। बुद्धि ही मनुष्य को नवीन परिस्थितियों को ठीक से समझने और उसके साथ अनुकूलित होने में सहायता करती है।
- "बुद्धि, अमूर्त विचारों के बारे में सोचने की योग्यता है।" - टर्मन
- "बुद्धि, कार्य करने की एक विधि है।" - वुडवर्थ
- "सीखने की शक्ति ही बुद्धि है।" - बकिंघम
- "बुद्धि पहचानने तथा सीखने की शक्ति है।" - गाल्टन
- "बुद्धि, ज्ञान का अर्जन करने की क्षमता है।" - वुडरो
प्रश्न 39. व्यक्तित्व मापन की कौन-कौन सी विधियाँ हैं? किसी एक विधि का वर्णन कीजिए।
उत्तर: व्यक्तित्व मापन की विधियाँ निम्नलिखित हैं-
- (1) आत्मनिष्ठ विधि- जीवन इतिहास विधि, आत्मकथा लेखन विधि, प्रश्नावली विधि, साक्षात्कार विधि।
- (2) प्रक्षेपी विधि- रोर्शा का स्याही धब्बा परीक्षण, प्रासंगिक अंतर्बोध परीक्षण, चित्र साहचर्य परीक्षण, शब्द साहचर्य परीक्षण।
- (3) वस्तुनिष्ठ विधि- शारीरिक परीक्षण, संचयी अभिलेख, परिस्थिति परीक्षण, निरीक्षण विधि, मापन रेखा विधि, समाजमिति विधि।
आत्मनिष्ठ विधि- इस विधि में व्यक्तित्व की जाँच उसके परिचितों की सहायता से या परीक्षक द्वारा की जाती है। इसमें निम्नलिखित विधियों का प्रयोग किया जाता है।
(i) जीवन इतिहास विधि- इस विधि में मनोवैज्ञानिक किसी व्यक्ति के व्यवहार को समझने के लिए उसकी माँ के गर्भ धारण के समय से जो घटित हो रहा है उसका इतिहास तैयार करते हैं। इस विधि में व्यक्ति तीन तरह की सूचनायें एकत्र करता है जो इस प्रकार है-
- (1) बीता इतिहास
- (2) प्रारम्भिक सूचनायें
- (3) वर्तमान अवस्था
प्रश्न 40. वंशानुक्रम के नियमों का वर्णन कीजिए।
उत्तर: ग्रेगर जोहान मेडल एक वैज्ञानिक थे जिन्हें आनुवंशिकी के जनक और संस्थापक के रूप में जाना जाता है। मेडल ने 1856 से 1863 के बीच मटर के पौधे (पिसम सैटिवम) पर कई प्रयोग किए। उन्होंने प्रयोगों के परिणामों का अध्ययन किया और कई अवलोकन निकाले। इस प्रकार वंशानुक्रम के नियम अस्तित्व में आये। वंशानुक्रम का नियम निम्न है-
- समान का नियम- इस नियम के अनुसार माता-पिता जैसे होते हैं, उनकी संतान भी वैसी होंगी।
- भिन्नता का नियम- इस नियम के अनुसार यह सिद्ध हुआ कि संतान बिल्कुल माता-पिता की हमशक्ल या समान नहीं होते हैं।
- प्रत्यागम का नियम- इस नियम के अनुसार तीव्र बुद्धि वाले पिता के बच्चे का तीव्र बुद्धि वाली और प्रतिभाशाली माता-पिता के बच्चे का प्रतिभाशाली होने की प्रवृत्ति वही प्रत्यागम कहलाती है।