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बाल विकास एवं सीखने की प्रक्रिया Previous Year Paper 2016

UP DELED Semester 1 बाल विकास एवं सीखने की प्रक्रिया Previous Year Question Paper 2016 with solution.

Section 1 वस्तुनिष्ठ प्रश्न

वस्तुनिष्ठ प्रश्न

प्रश्न 1. बालक का विभाजन कितनी अवस्थाओं में किया जाता है?

(a) 4

(b) 3

(c) 5

(d) 6

उत्तर: (b) : मानव विकास की अवस्थाएँ तीन होती हैं-

  1. शैशवावस्था (जन्म से 6 वर्ष)
  2. बाल्यावस्था (6-12 वर्ष)
  3. किशोरावस्था (12-18 वर्ष)

प्रश्न 2. बालको को पूर्वजो से प्राप्त गुण कहा जाता है

(a) आनुवंशिकता

(b) परिपक्वता

(c) वातावरण

(d) आत्मसातन

उत्तर: (a) : बालकों को पूर्वजों से प्राप्त गुण को आनुवंशिकता कहा जाता है या माता-पिता एवं अन्य पूर्वजों के गुण का सन्तानों में अवतरित होना ही आनुवंशिकता कहलाती है।

प्रश्न 3. बुद्धि के समूह कारक सिद्धान्त का प्रतिपादन किसने किया?

(a) हिल्माई

(b) बेबर

(c) थर्सटन

(d) थाम्पसन

उत्तर: (c) : लुई लियोन थर्स्टन ने समूह कारक का सिद्धान्त प्रस्तावित किया है, कि बुद्धि कई अलग-अलग कारकों से बनी होती है。

प्रश्न 4. निम्नलिखित में से कौन-सा परीक्षण बुद्धि का मापन करता है?

(a) सी. ए. टी.

(b) टी. ए. टी.

(c) एम. ए. टी.

(d) भाटिया बैटरी परीक्षण

उत्तर: (d) : भाटिया बैटरी परीक्षण बुद्धि का एक प्रदर्शन परीक्षण है। जो सी.एम. भाटिया द्वारा 1955 में विकसित किया गया है। इसमें विभिन्न पैटर्न वाले कार्ड शामिल हैं।

प्रश्न 5. जीन पियाजे द्वारा बालक के संज्ञानात्मक विकास का वर्णन कितनी अवस्थाओं में किया गया है?

(a) 5

(b) 4

(c) 3

(d) 6

उत्तर: (b) : जीन पियाजे के अनुसार बालक के संज्ञानात्मक विकास को चार भागों में बाँटा गया है-

  • (i) संवेदी पेशीय अवस्था (जन्म से 2 वर्ष)
  • (ii) पूर्व संक्रियात्मक अवस्था (2-7 वर्ष)
  • (iii) मूर्त संक्रियात्मक अवस्था (7-12 वर्ष)
  • (iv) अमूर्त संक्रियात्मक अवस्था (12-15 वर्ष)

प्रश्न 6. वह मानवीय योग्यता जिसके आधार पर वह किसी नवीन रचना या विचार को प्रस्तुत करता है, कहलाती है-

(a) अभिसरण

(b) कल्पना

(c) सृजनात्मकता

(d) तर्क

उत्तर: (c) : वह मानवीय योग्यता जिसके द्वारा व्यक्ति किसी नवीन रचना/विचार को प्रस्तुत करता है, यह योग्यता सृजनात्मकता कहलाती है。

प्रश्न 7. व्यक्ति का सम्पूर्ण व्यवहार प्रतिमान जो उसकी समस्त विशेषताओं के योग को व्यक्त करता है, कहलाता है-

(a) व्यक्तित्व

(b) रुचि

(c) प्रेरणा

(d) कल्पना

उत्तर: (a) : व्यक्ति का सम्पूर्ण व्यवहार प्रतिमान जो उसकी समस्त विशेषताओं के योग को व्यक्त करता है, वह व्यक्तित्व कहलाता है。

प्रश्न 8. टी. ए. टी व्यक्तित्व परीक्षण का निर्माण किसने किया है?

(a) सी कोई एवं बेकमैन

(b) थर्स्टन

(c) हरमन रोर्शाक

(d) मरे एवं मॉर्गन

उत्तर: (d) : टी.ए.टी. व्यक्तित्व परीक्षण का निर्माण मनोवैज्ञानिक मुरे एवं मॉर्गन ने किया था。

प्रश्न 9. अनुभव एवं प्रशिक्षण के कारण व्यवहार में होने वाला परिवर्तन कहलाता है

(a) प्रेरणा

(b) प्रत्यक्षीकरण

(c) अधिगम

(d) संवेदना

उत्तर: (c) : मानव व्यवहार में अधिगम एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है। यह परिवर्तनों के एक विस्तार को संदर्भित करता है। अनुभव एवं प्रशिक्षण के कारण व्यवहार में होने वाला परिवर्तन ही अधिगम कहलाता है。

प्रश्न 10. बालक के कोषों एवं पेशियों में समय के साथ-साथ होने वाला परिवर्तन जिसके कारण वह एक निश्चित समय पर कोई कार्य कर सकता है, कहलाता है -

(a) परिपक्वता

(b) अभिसरण

(c) समंजन

(d) प्रत्यक्षण

उत्तर: (a) : बालक के कोषों एवं पेशियों में समय के साथ-साथ होने वाला परिवर्तन जिसके कारण वह एक निश्चित समय पर कोई कार्य कर सकता है, परिपक्वता कहलाता है。

प्रश्न 11. थार्नडाइक ने सीखने से सम्बन्धित मुख्य कितने सिद्धान्तों का प्रतिपादन किया है?

(a) 5

(b) 3

(c) 4

(d) 6

उत्तर: (b) : थार्नडाइक ने सीखने से सम्बन्धित मुख्य तीन सिद्धान्तों का प्रतिपादन किया है-

  • (i) तत्परता का नियम
  • (ii) अभ्यास का नियम
  • (iii) प्रभाव का नियम

प्रश्न 12. पावलॉव ने अपने सीखने के सिद्धान्त का प्रतिपादन किसके ऊपर प्रयोग करके किया है?

(a) बिल्ली

(b) बनमानुष

(c) कुत्ता

(d) मेढक

उत्तर: (c) : पावलॉव ने अपने सीखने के सिद्धान्त का प्रतिपादन कुत्ता के ऊपर प्रयोग करके किया है。

प्रश्न 13. थार्नडाइक ने अपने सीखने के सिद्धान्त का प्रतिपादन किसके ऊपर प्रयोग करके किया?

(a) कुत्ता

(b) तोता

(c) मनुष्य

(d) बिल्ली

उत्तर: (d) : थार्नडाइक ने अपने सीखने के सिद्धान्त का प्रतिपादन भूखी बिल्ली के ऊपर प्रयोग करके किया。

प्रश्न 14. कोहलर के सीखने के सिद्धान्त को किस नाम से जाना जाता है?

(a) पूर्ण आकृति / समग्र सिद्धान्त

(b) पुनर्बलन सिद्धान्त

(c) उद्दीपन सिद्धान्त

(d) क्रियात्मक सिद्धान्त

उत्तर: (a) : कोहलर के सीखने के सिद्धान्त को पूर्ण आकृति / समग्र सिद्धान्त के नाम से जाना जाता है। गेस्टाल्ट का अर्थ है- "समग्र रूप"। गेस्टाल्टवादियों का मानना है कि व्यक्ति किसी वस्तु या अवधारणा को आंशिक रूप से नहीं बल्कि पूर्ण रूप से सीखता है। अतः इसे सम्पूर्णवाद भी कहा जाता है。

प्रश्न 15. व्यक्ति की वह मनोस्थिति जिसके द्वारा वह विभिन्न परिस्थितियों में सामाजिक और व्यक्तिगत समायोजन करने में समर्थ होता है कहलाता है -

(a) समंजन

(b) मानसिक स्वास्थ्य

(c) आत्मसातन

(d) प्रकीर्णन

उत्तर: (a) : व्यक्ति की वह मनोस्थिति जिसके द्वारा बह विभिन्न परिस्थितियों में सामाजिक और व्यक्तिगत समायोजन करने में समर्थ होता है, उसे समंजन कहते हैं。

Section 2 अति लघु उत्तरीय प्रश्न

अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 16. बाल गाल विकास के अन्तर्गत बाल्यावस्था की अवधि कौन-सी मानी जाती है?

उत्तर: बाल्यावस्था 6 से 12 वर्ष तक मानी जाती है। शिक्षाविदों ने इसे प्रारम्भिक विद्यालय की आयु कहा है。

प्रश्न 17. अशिक्षित व्यक्ति बालकों के बुद्धि का मापन किस परीक्षण से करते हैं ?

उत्तर: अशिक्षित व्यक्ति/बालकों के बुद्धि का मापन अशाब्दिक बुद्धि परीक्षण से करते हैं。

प्रश्न 18. बालक के संवेगात्मक विकास से सम्बन्धित विकासात्मक सिद्धान्त का प्रतिपादन किसने किया ?

उत्तर: बालक के संवेगात्मक विकास से सम्बन्धित विकासात्मक सिद्धान्त का प्रतिपादन विलियम मैक्डूगल ने किया。

प्रश्न 19. जीन पियाजे द्वारा प्रतिपादित बालक के संज्ञानात्मक विकास से सम्बन्धित तीसरी अवस्था क्या कहलाती है?

उत्तर: जीन पियाजे द्वारा प्रतिपादित बालक के संज्ञानात्मक विकास से सम्बन्धित तीसरी अवस्था मूर्त संक्रियात्मक अवस्था कहलाती है जिसे प्रत्यक्ष या स्थूल संक्रियात्मक अवस्था भी कहा जाता है。

प्रश्न 20. क्रन्दन, बलबलाना, हावभाव, वाक्य निर्माण बालक में किस आयाम के विकास की अवस्थायें होती हैं ?

उत्तर: क्रन्दन, बलबलाना, हावभाव, वाक्य निर्माण का विकास बालक में शैशवावस्था (Infancy) में होता है。

प्रश्न 21. व्यक्तित्व का वह प्रकार जिसके अन्तर्गत व्यक्ति दूसरे लोगों / समाज के अन्य लोगों की प्रगति के लिये सोचकर कार्य करता है, क्या कहलाता है ?

उत्तर: व्यक्तित्व का वह प्रकार जिसके अन्तर्गत व्यक्ति दूसरे लोगों/समाज के अन्य लोगों की प्रगति के लिये सोचकर कार्य करता है, बहिर्मुखी व्यक्तित्व वाला कहलाता है। इस तरह के व्यक्ति की अभिरूचि सामाजिक कार्यों की ओर अधिक होती है। इनमें कार्यकुशलता की मात्रा अन्तर्मुखी से अधिक होती है। ये सबको प्रसन्न करने वाले होते हैं। बहिर्मुखी एक मिलनसार व्यक्ति होता है。

प्रश्न 22. सी. ए. टी. का निर्माण किसने किया है ?

उत्तर: बाल समप्रत्यय परीक्षण (Children's Appreception Test)-इसका प्रतिपादन लियोपोल्ड बेलॉक ने किया। यह 11 वर्ष तक के बच्चों के लिए उपयोगी होता है। इसमें प्रयुक्त कार्ड की संख्या 10 होती है इसमें जानवरों के लिए चित्र बने होते हैं。

प्रश्न 23. स्टैनले हाल ने किशोरावस्था को कौन-सी अवस्था कहा है?

उत्तर: 'किशोरावस्था' लैटिन शब्द 'अडोलेसेरे' से आया है जिसका अर्थ है परिपक्व होने के लिए बढ़ना। यह एक अवस्था है जो 12 से 19 वर्ष की उम्र के बीच है। स्टेनले हाल, किशोरावस्था में वैज्ञानिक अनुसंधान के पिता के अनुसार 'किशोरावस्था' अधिक तनाव और तूफान की अवस्था है。

प्रश्न 24. वह शक्ति जिसके कारण व्यक्ति किसी कार्य को करने या ना करने के लिए बाध्य हो जाता है, क्या कहलाती है?

उत्तर: वह शक्ति जिसके कारण व्यक्ति किसी कार्य को करने या ना करने के लिए बाध्य हो जाता है, अभिप्रेरणा (Motivation) कहलाता है。

प्रश्न 25. सीखने से सम्बन्धित प्रभाव के नियम का प्रतिपादन किसने किया है ?

उत्तर: सीखने से सम्बन्धित प्रभाव के नियम को ई. एल. थार्नडाइक ने प्रतिपादित किया। इस नियम के अनुसार, प्रायः हम उस कार्य को ज्यादा अच्छे से करना चाहते हैं जिसका परिणाम हमारे लिए हितकर होता है, जिससे हमें सुख एवं सन्तोष मिलता है। यदि हमें किसी कार्य को करने या सीखने में कष्ट होता है तो हम उस क्रिया को नहीं दोहराते हैं。

प्रश्न 26. कोहलर ने अपने सीखने के सिद्धान्त का प्रतिपादन किसके ऊपर प्रयोग करके किया ?

उत्तर: कोहलर ने अपना प्रयोग सुल्तान नामक चिम्पैंजी (वनमानुष) पर किया। उसने चिम्पैंजी को एक खाली कमरे में बंद कर दिया और छत पर से कुछ केले लटका दिए। भूखा होने के कारण चिम्पैंजी उछल कर केले को पकड़ने का प्रयास करता लेकिन केले की ऊँचाई अधिक होने की वजह से चिम्पैंजी केले को नहीं पकड़ पाता फिर कोहलर द्वारा वहाँ एक छड़ी रख दी गयी। अब छड़ी की सहायता से चिम्पैंजी (वनमानुस) केले को प्राप्त कर लेता है और केले को खाकर अपनी भूख मिटाता है。

प्रश्न 27. पावलोव द्वारा अपने प्रयोग में पहले घण्टी बजती थी, फिर भोजन दिया जाता था। यह प्रक्रिया कई बार होने पर अन्त में क्या पाया गया ?

उत्तर: पावलोव ने स्वाभाविक उद्दीपन को दर्शाने के लिए कुत्ते पर एक प्रयोग किया जिसमें एक भूखे कुत्ते को एक ध्वनि-नियंत्रित प्रयोगशाला में एक विशेष उपकरण के सहारे खड़ा कर दिया गया। कुत्ते के सामने भोजन लाया जाता था और चूँकि कुत्ता भूखा था, इसलिए भोजन देखकर उसके मुँह में लार आ जाता था। कुछ प्रयासों के बाद भोजन देने के पहले एक घंटी बजाई जाती है यह प्रक्रिया कुछ दिनों तक दोहराई गई तथा देखा गया कि बिना भोजन आए ही मात्र घंटी की आवाज पर कुत्ते के मुँह से लार निकलना शुरू हो गया। पावलोव के अनुसार कुत्ते ने घंटी की आवाज पर लार के स्राव करने की अनुक्रिया को सीख लिया था। उनके अनुसार घंटी की आवाज तथा लार के स्राव के बीच एक नया साह्चर्य कायम हुआ जिसे अनुबंधन की संज्ञा दी गई。

प्रश्न 28. नियमित दिनचर्या, सबके साथ समायोजन, आत्मविश्वास, संवेगात्मक परिपक्वता और आत्म मूल्यांकन की क्षमता किसका प्रमुख लक्षण है?

उत्तर: नियमित दिनचर्या, सबके साथ समायोजन, आत्मविश्वास, संवेगात्मक परिपक्वता और आत्म मूल्यांकन की क्षमता अच्छे व्यक्तित्व (Good Personality) का प्रमुख लक्षण है。

प्रश्न 29. जीन पियाज ने बालक के संज्ञानात्मक विकास में किन दो प्रक्रियाओं का वर्णन किया है ?

उत्तर: जीन पियाजे ने बालक के संज्ञानात्मक विकास (Cognitive Development) की प्रक्रिया में दो बातों को महत्वपूर्ण माना है-

  1. संगठन
  2. अनुकूलन

संगठन व्यक्ति एवं वातावरण के संबंध को आंतरिक रूप से प्रभावित करता है तथा अनुकूलन बाह्य रूप से प्रभावित करता है。

प्रश्न 30. पूर्व ज्ञान, विषय वस्तु, शारीरिक स्वास्थ्य व परिपक्वता, मानसिक स्वास्थ्य व परिपक्वता, अधिगम की इच्छा व प्रेरणा आदि किसे प्रभावित करने वाले कारक माने जाते हैं ?

उत्तर: पूर्व ज्ञान, विषयवस्तु, शारीरिक स्वास्थ्य व परिपक्वता, मानसिक स्वास्थ्य व परिपक्वता, अधिगम की इच्छा व प्रेरणा आदि अधिगम प्रक्रिया (Learning Process) को प्रभावित करने वाले कारक माने जाते हैं。

Section 3 लघु उत्तरीय प्रश्न

लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 31. बुद्धिलब्धि से आप क्या समझते हैं ?

उत्तर: 'बुद्धिलब्धि' या 'Intelligence Quotient (IQ)' कई अलग मानकीकृत परीक्षणों से प्राप्त एक गणना है, जिससे बुद्धि का आकलन किया जाता है। बुद्धिलब्धि बालक में स्थित बुद्धि की मात्रा का मापन है। टरमैन ने मानसिक आयु के बदले बुद्धिलब्धि की विधि खोजी और सूत्र निकाला। बुद्धिलब्धि की गणना के अन्तर्गत व्यक्ति की मानसिक आयु में वास्तविक आयु से भाग देकर उसे 100 से गुणा कर दिया जाता है。

बुद्धिलब्धि = (मानसिक आयु / वास्तविक आयु) * 100

बुद्धिलब्धि के आधार पर वर्गीकरण-

  • 140-169 : प्रतिभा
  • 120-139 : अति प्रतिभाशाली
  • 110-119 : प्रतिभाशाली
  • 90-109 : सामान्य
  • 80-89 : मन्द
  • 70-79 : निर्बल बुद्धि
  • 60-69 : हीन बुद्धि
  • 50-59 : मूर्ख
  • 25-49 : जड़
  • 0-24 : अति उत्कृष्ट (Note: The provided text lists these directly below the range)

प्रश्न 32. अन्तर्मुखी व्यक्तित्व से आप क्या समझते हैं?

उत्तर: अन्तर्मुखी व्यक्तित्व-अन्तर्मुखी व्यक्तित्व वह होता है, जिसमें ऐसे व्यक्तित्व के गुण होते हैं जिन्हें अन्तर्मुखता के रूप में जाना जाता है, जिसका अर्थ है कि वे बाहरी रूप से क्या हो रहा है। इसके बजाय अपने आन्तरिक विचारों और विचारों पर ध्यान केन्द्रित करने में अधिक सहज महसूस करते हैं। वे बड़े समूहों या भीड़ के बजाय केवल एक या दो लोगों के साथ समय बिताना पसन्द करते हैं। अन्तर्मुखी व्यक्तित्व का व्यक्ति चिन्तनशील होता है तथा अपनी ही ओर केन्द्रित रहता है। इस व्यक्तित्व के लक्षण, स्वभाव, आदतें, अभिवृत्तियाँ आदि बाह्य रूप में प्रकट नहीं होते हैं。

अन्तर्मुखी व्यक्तित्व की विशेषताएँ निम्नलिखित हैं-

  • (1) अन्तर्मुखी व्यक्तित्व एकाकी होते हैं。
  • (ii) ऐसे व्यक्ति का बाह्य जगत की वस्तुओं से कम अनुराग होता है。
  • (iii) ये भाव प्रधान होते हैं, आत्मचिन्तन करते हैं तथा आत्मोद्धार हेतु लीन रहते हैं。
  • (iv) ये स्वयं के लिए चिन्तनशील होते हैं तथा शान्त मुद्रा में रहते हैं。
  • (v) ये प्रायः प्रतिक्रियावादी होते हैं तथा यथार्थ को अपने स्वभाव के अनुरूप ढालने का प्रयास करते हैं。

प्रश्न 33. जीन पियाजे द्वारा प्रतिपादित विकास की अवस्था के अन्तर्गत पूर्व संक्रिया की अवस्था से आपका क्या तात्पर्य है ?

उत्तर: जीन पियाजे एक मनोवैज्ञानिक और आनुवंशिक एपिस्टेमोलॉजिस्ट थे。 वह सबसे अधिक संज्ञानात्मक विकास के अपने सिद्धान्त के लिए प्रसिद्ध हैं जो इस बात पर ध्यान देता है कि बचपन के दौरान बच्चे बौद्धिक रूप से कैसे विकसित होते हैं。

जीन पियाजे ने संज्ञानात्मक विकास के सिद्धान्त को निम्न अवस्थाओं में समझाया है-

  • (i) संवेदी पेशीय अवस्था/इंद्रिय जनित अवस्था 0 से 2 वर्ष
  • (ii) पूर्व संक्रियात्मक अवस्था 2 से 7 वर्ष
  • (iii) स्थूल/मूर्त संक्रियात्मक अवस्था 7 से 12 वर्ष
  • (iv) औपचारिक संक्रियात्मक अवस्था 12 वर्ष के बाद

पूर्व संक्रियात्मक अवस्था इस अवस्था में दूसरे के सम्पर्क में खिलौनों से अनुकरण के माध्यम से सीखता है। खिलौनों की आयु इसी अवस्था को कहा जाता है। शिशु गिनती गिनना रंगों को पहचानना वस्तुओं को क्रम से रखना हल्के भारी का ज्ञान होना। वस्तु स्थायित्व का भाव जागृत हो जाता है। निर्जीव वस्तुओं में सजीव चिंतन करने लगता है, इसे जीव वाद कहते हैं। इसमें प्रतीकात्मक सोच पाई जाती है。

प्रश्न 34. वैयक्तिक भिन्नता से क्या तात्पर्य है ?

उत्तर: वैयक्तिक भिन्नता-जब दो बालक विभिन्न समानताएँ रखते हुए भी आपस में भिन्न व्यवहार करते हैं तो इसे "वैयक्तिक भिन्नता" कहा जाता है। वैयक्तिक भिन्नता से अभिप्राय है कि प्रत्येक व्यक्ति में जैविक, मानसिक, सांस्कृतिक, संवेगात्मक अन्तर पाया जाना। इसी अन्तर के कारण एक व्यक्ति, दूसरे से भिन्न माना जाता है। अतः कोई भी दो व्यक्ति समान नहीं होते। इस दृष्टि से वैयक्तिक भिन्नता को निम्नलिखित प्रकार से परिभाषित किया गया है-

  • (i) स्किनर के अनुसार-व्यक्तिगत विभिन्नता में सम्पूर्ण व्यक्तित्व का कोई भी ऐसा पहलू सम्मिलित हो सकता है, जिसका माप किया जा सकता है。
  • (ii) टायलर के अनुसार-शरीर के आकार और स्वरूप, शारीरिक गति सम्बन्धी क्षमताओं, बुद्धि, उपलब्धि, ज्ञान, रूचियों, अभिवृत्तियों और व्यक्तित्व के लक्षणों में माप की जा सकने वाली विभिन्नताओं की उपस्थिति सिद्ध की जा चुकी है。

प्रश्न 35. कल्पना से आप क्या समझते हैं ?

उत्तर: वस्तु का प्रत्यक्षीकरण मानव मस्तिष्क में प्रतिमाओं को स्थापित करता है। वह इन प्रतिमाओं में परिवर्तन करके नवीनता उत्पन्न कर देता है। इसी नवीनता का नाम कल्पना है। कल्पना के द्वारा व्यक्ति यथार्थ से अलग हट जाता है। इससे उसे सुख मिलता है। कल्पना में अनुभव का प्रत्यास्मरण होता है लेकिन कल्पना को अलग स्थापित करने वाला लक्षण विद्यमान होता है। अतः यथार्थता में अभूतपूर्व परिवर्तन करना ही कल्पना होता है。 कल्पना को स्पष्ट करने के लिए निम्न परिभाषाएँ दी गई हैं -

  • (i) वुडवर्थ के अनुसार- "कल्पना मानसिक हस्त व्यापार है। जब जब कोई पूर्व यथार्थ तथ्यों का व्यक्तिगत स्मरण करता है तो वह कल्पना प्रदर्शित करता है।"
  • (ii) मैक्डूगल के अनुसार- "कल्पना दूरस्थ वस्तुओं के सम्बन्ध का चिन्तन है।"

प्रश्न 36. अनुकरण द्वारा सीखना से आपका क्या तात्पर्य है?

उत्तर: सामान्यतया अनुकरण का अर्थ, किसी कार्य या वस्तु की नकल करना है। हमारे दैनिक जीवन में अनुकरण एक साधारण सी बात है, जैसे-बस स्टाप में बस को आते देखकर दौड़ना, लाइन में लगना आदि। इस प्रकार वे सभी कार्य जो व्यक्ति चेतन या अचेतन अवस्था में दूसरों के कार्यों के अनुसार करते हैं, अनुकरण कहलाते हैं。

मीड के अनुसार “दूसरे व्यक्ति के कार्यों या व्यवहारों को जान बूझकर अपनाना अनुकरण है।"

रायबर्न के अनुसार- "अनुकरण दूसरे व्यक्ति के बाहरी व्यवहार सीखने की प्रभावशाली विधियों में छात्रों के अनुकरण द्वारा सीखने को महत्वपूर्ण स्थान प्रदान किया जाता है。

प्रश्न 37. सीखने के तत्परता के नियम से आपका क्या आशय है ?

उत्तर: तत्परता का नियम-इस नियम का अभिप्राय यह है कि यदि हम किसी कार्य को सीखने के लिये तैयार होते हैं, तो हम उसे शीघ्र ही सीख लेते हैं। तत्परता में कार्य करने की इच्छा निहित रहती है। यदि बालक में गणित के प्रश्न करने की इच्छा है, तो वह उनको करता है, अन्यथा नहीं। इतना ही नहीं, तत्परता के कारण वह उनको अधिक शीघ्रता और कुशलता से करता है। तत्परता उसके ध्यान को कार्य पर केन्द्रित करने में सहायता देती है, जिसके फलस्वरूप वह उसे सम्पन्न करने में सफल होता है。

भाटिया के अनुसार- "तत्परता या किसी कार्य के लिए तैयार होना, युद्ध को आधा विजय कर लेना है।"

प्रश्न 38. मानसिक थकान से आप क्या समझते हैं ?

उत्तर: मानसिक थकान निरन्तर मानसिक कार्य करने से आती है। जब व्यक्ति निरन्तर मानसिक कार्य करता रहता है तो मस्तिष्क की बौद्धिक एवं चिन्तन आदि शक्तियाँ शिथिल हो जाती हैं。 मानसिक थकावट, असल में मांसपेशियों या शरीर की थकान की तरह ही है。

वेलेन्टाइन के अनुसार, "मानसिक थकान प्रायः केवल एक बोरियस है। जब तक व्यक्ति की रूचि बनी रहती है तब तक वह किसी प्रकार की मानसिक थकान का अनुभव नहीं रहता है।"

मानसिक थकान के लक्षण-

  • (i) बालक किये जाने वाले कार्य में अरूचि प्रकट करता है。
  • (ii) पलकों में भारीपन आ जाता है。
  • (iii) पाठ पर ध्यान केन्द्रित नहीं होता。
  • (iv) बालक मस्तिष्क में भारीपन का अनुभव करने लगता है。
  • (v) विचारों और तर्क शक्ति में कमी आ जाती है。

प्रश्न 39. कोहलर के अन्तर्दृष्टि सिद्धान्त से आपका क्या तात्पर्य है ?

उत्तर: कोहलर का सूझ या अन्तर्दृष्टि सिद्धान्त-यह सिद्धान्त संज्ञानात्मक नियम के ऊपर आधारित है। इस सिद्धान्त को गेस्टाल्ट सिद्धांत भी कहा जाता है। कोहलर ने अपना प्रयोग 1916 में किया था。 इस प्रयोग में उसने एक सुल्तान नाम के चिम्पैंजी का प्रयोग किया था。 कोहलर ने अपने प्रयोग में निष्कर्ष निकाला कि जीव संपूर्ण वातावरण का प्रत्यक्षीकरण करता है और उसके आधार पर उसमें सूझ उत्पन्न होती है, उसमें वह अपनी समस्या का समाधान करना सीख लेता है। क्षेत्र का प्रत्यक्षीकरण होना तथा क्षेत्र का पुनर्गठन करना ही सूझ या अंतर्दृष्टि है。

अंतर्दृष्टि सिद्धांत की विशेषताएँ-

  • (i) समस्यात्मक स्थिति का सर्वेक्षण。
  • (ii) परिवर्तित अनुक्रियाओं द्वारा प्रयास करना。
  • (iii) समस्यात्मक स्थिति में हिचकिचाहट विश्राम एवं ध्यान का केन्द्रीयकरण करना。
  • (iv) उद्देश्य लक्ष्य अथवा प्रेरणा की ओर बार-बार ध्यान केन्द्रित करना。
  • (v) प्रथम अनुक्रिया उपयुक्त सिद्ध न होने पर अन्य अनुक्रिया करना。
  • (vi) अनुकूलित अनुक्रिया की पुनरावृत्ति करना。

प्रश्न 40. सीखने में परिपक्वता का योगदान बताइये।

उत्तर: सीखना, व्यवहार परिवर्तन या व्यवहार अर्जन की एक प्रक्रिया है。 किसी व्यक्ति का व्यवहार परिवर्तन या तो परिपक्वता के कारण होता है या किसी नयी बात को ग्रहण करने के कारण。 परिपक्वता शारीरिक विकास की प्रक्रिया है, जिसके अन्तर्गत बढ़ती हुई आयु के साथ, शरीर व स्नायुमण्डल का विकास सीखने की सामर्थ्य को जन्म देता है। स्पष्टतः सीखने के परिणामस्वरूप व्यक्ति के व्यवहार में परिवर्तन आता है。 परिपक्वता की प्रक्रिया सीखने से पूर्व की स्थिति है तथा यह सीखने का आधार है। परिपक्वता के अभाव में किसी क्रिया का सीखना न केवल दुष्कर अपितु असम्भव है। वस्तुतः परिपक्वता किसी व्यवहार को अर्जित करने (सीखने) की एक पूर्व आवश्यकता है。

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