वस्तुनिष्ठ प्रश्न
प्रश्न 1. बालक के मानसिक विकास के लिए शिक्षक को करना चाहिए-
(a) स्नेह और सहानुभूतिपूर्ण व्यवहार
(b) सदाचरण प्रस्तुत करना
(c) उपयुक्त शिक्षण विधि का प्रयोग
(d) उपर्युक्त सभी
उत्तर: (d) उपर्युक्त सभी।
व्याख्या : बालक के मानसिक विकास के लिए शिक्षक को स्नेह एवं सहानुभूतिपूर्ण व्यवहार करना, अपने व्यवहार द्वारा अच्छा आदर्श प्रस्तुत करना तथा बालक की आयु और क्षमता के अनुरूप उपयुक्त शिक्षण विधियों का प्रयोग करना चाहिए।
प्रश्न 2. विकास को प्रभावित करने वाले कारक हैं-
(a) बुद्धि
(b) यौन
(c) अन्तःस्रावी ग्रन्थियाँ
(d) उपर्युक्त सभी
उत्तर: (d) उपर्युक्त सभी।
व्याख्या : बालक का विकास अनेक जैविक एवं मनोवैज्ञानिक कारकों से प्रभावित होता है। बुद्धि, लैंगिक कारक तथा अन्तःस्रावी ग्रन्थियाँ सभी विकास को प्रभावित कर सकते हैं।
प्रश्न 3. टोली की आयु कहते हैं-
(a) किशोरावस्था को
(b) बाल्यावस्था को
(c) शैशवावस्था को
(d) युवावस्था को
उत्तर: (b) बाल्यावस्था को।
व्याख्या : बाल्यावस्था में बालक अपने साथियों के समूह या टोली के प्रति विशेष रुचि दिखाता है, इसलिए इसे टोली की आयु (Gang Age) भी कहा जाता है।
प्रश्न 4. शिक्षा में सृजनात्मकता का प्रयोग किस रूप में होता है?
(a) सीखना
(b) तर्क
(c) चिन्तन
(d) कल्पना
उत्तर: (d) कल्पना।
व्याख्या : सृजनात्मकता में मौलिक एवं नवीन विचार उत्पन्न करने के लिए कल्पना की महत्त्वपूर्ण भूमिका होती है।
प्रश्न 5. बाल्यावस्था में शिक्षा का क्या स्वरूप होना चाहिए?
(a) खेलकूद की छूट बिल्कुल नहीं दी जानी चाहिए
(b) खेलों एवं रचनात्मक कार्यों के माध्यम से शिक्षा दी जानी चाहिए
(c) गुरुकुल प्रणाली द्वारा शिक्षा दी जानी चाहिए
(d) पिटाई करने वाले अध्यापक द्वारा शिक्षा दी जानी चाहिए
उत्तर: (b) खेलों एवं रचनात्मक कार्यों के माध्यम से शिक्षा दी जानी चाहिए।
व्याख्या : बाल्यावस्था में शिक्षा को सक्रिय, रुचिकर और अनुभवपरक बनाने के लिए खेल, गतिविधि तथा रचनात्मक कार्यों का प्रयोग उपयोगी होता है।
प्रश्न 6. "मनुष्य को जो कुछ बनना होता है प्रारम्भ के चार-पाँच वर्षों में ही बन जाता है।" कथन है-
(a) फ्रॉयड
(b) क्रो एण्ड क्रो
(c) हरलॉक
(d) थार्नडाइक
उत्तर: (a) फ्रॉयड।
व्याख्या : फ्रॉयड ने जीवन के प्रारम्भिक वर्षों को व्यक्तित्व-विकास की दृष्टि से अत्यन्त महत्त्वपूर्ण माना।
प्रश्न 7. "जिस प्रकार शारीरिक विकास के लिए भोजन का महत्व है, उसी प्रकार सामाजिक विकास के लिए शिक्षा का।" कथन है-
(a) स्किनर
(b) ड्यूवी
(c) वुडवर्थ
(d) अरस्तू
उत्तर: (b) ड्यूवी।
व्याख्या : इस कथन के माध्यम से सामाजिक विकास में शिक्षा के महत्त्व को स्पष्ट किया गया है।
प्रश्न 8. कल्पना के विकास के लिए शिक्षा में निम्न बातों पर ध्यान देना चाहिए-
(a) भाषा विकास पर ध्यान
(b) कहानी सुनना
(c) काल्पनिक खेलों एवं क्रियाओं के लिए अवसर
(d) उपर्युक्त सभी
उत्तर: (d) उपर्युक्त सभी।
व्याख्या : बालक की कल्पना-शक्ति के विकास में भाषा-विकास, कहानी, नाटक, भूमिका-अभिनय तथा काल्पनिक एवं रचनात्मक खेल उपयोगी होते हैं।
प्रश्न 9. थार्नडाइक ने दिया-
(a) प्रभाव का नियम
(b) अभ्यास का नियम
(c) तत्परता का नियम
(d) उपर्युक्त सभी
उत्तर: (d) उपर्युक्त सभी।
व्याख्या : थार्नडाइक ने अधिगम के तीन मुख्य नियम बताए-
- तत्परता का नियम
- अभ्यास का नियम
- प्रभाव का नियम
प्रश्न 10. प्रेरणा होती है-
(a) सकारात्मक
(b) नकारात्मक
(c) विकल्प 'अ' और 'ब' दोनों
(d) उपर्युक्त में से कोई नहीं
उत्तर: (c) विकल्प 'अ' और 'ब' दोनों।
व्याख्या : प्रेरणा सकारात्मक तथा नकारात्मक दोनों प्रकार की हो सकती है। पुरस्कार, प्रशंसा एवं सफलता सकारात्मक प्रेरक हो सकते हैं, जबकि दण्ड या नकारात्मक परिणाम से बचने की प्रेरणा नकारात्मक रूप में कार्य कर सकती है।
प्रश्न 11. जीन पियाजे द्वारा बालक के संज्ञानात्मक विकास का वर्णन कितनी अवस्थाओं में किया गया है-
(a) 3
(b) 4
(c) 5
(d) 6
उत्तर: (b) 4।
व्याख्या : जीन पियाजे ने संज्ञानात्मक विकास की चार अवस्थाएँ बताईं-
- संवेदी-गामक अवस्था
- पूर्व-संक्रियात्मक अवस्था
- मूर्त-संक्रियात्मक अवस्था
- औपचारिक-संक्रियात्मक अवस्था
प्रश्न 12. अधिगम स्थानान्तरण के सिद्धान्त हैं-
(a) मानसिक शक्तियों का सिद्धान्त
(b) समान तत्वों का सिद्धान्त
(c) सामान्यीकरण का सिद्धान्त
(d) उपर्युक्त सभी
उत्तर: (d) उपर्युक्त सभी।
व्याख्या : अधिगम स्थानान्तरण की व्याख्या के लिए मानसिक शक्तियों का सिद्धान्त, समान तत्वों का सिद्धान्त तथा सामान्यीकरण का सिद्धान्त प्रमुख रूप से बताए जाते हैं।
प्रश्न 13. वे प्रेरक जिन्हें व्यक्ति अपने प्रयासों से प्राप्त करता है, कहलाते हैं-
(a) अर्जित प्रेरक
(b) जागृत प्रेरक
(c) निर्देशित प्रेरक
(d) व्यवहार को परिचालित प्रेरक
उत्तर: (a) अर्जित प्रेरक।
व्याख्या : अनुभव, शिक्षा तथा सामाजिक-सांस्कृतिक वातावरण से विकसित होने वाले प्रेरकों को अर्जित या सामाजिक प्रेरक कहते हैं; जैसे—प्रतिष्ठा, उपलब्धि और सामाजिक स्वीकृति।
प्रश्न 14. "स्मृति सीखी हुई वस्तु का सीधा उपयोग है।" यह कथन है-
(a) वुडवर्थ का
(b) मैक्डूगल का
(c) स्किनर का
(d) रॉस का
उत्तर: (a) वुडवर्थ का।
व्याख्या : वुडवर्थ ने स्मृति को पूर्व में सीखी गई सामग्री के पुनः उपयोग से सम्बन्धित माना है।
प्रश्न 15. आँकड़ों के प्रकार हैं-
(a) अवर्गीकृत
(b) वर्गीकृत
(c) अवर्गीकृत व वर्गीकृत
(d) उपर्युक्त में से कोई नहीं
उत्तर: (c) अवर्गीकृत व वर्गीकृत।
व्याख्या : प्रस्तुतीकरण के आधार पर आँकड़ों को अवर्गीकृत तथा वर्गीकृत आँकड़ों में बाँटा जा सकता है। अवर्गीकृत आँकड़े मूल रूप में दिए जाते हैं, जबकि वर्गीकृत आँकड़ों को वर्गों या समूहों में व्यवस्थित किया जाता है।
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अति लघु उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 16. बालक के विकास में जो परिवर्तन होते हैं, उनका सम्बन्ध शरीर और मन दोनों से होता है, स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: बाल विकास में शारीरिक तथा मानसिक दोनों प्रकार के परिवर्तन होते हैं। शरीर के साथ बुद्धि, भाषा, संवेग और व्यवहार का भी विकास होता है।
प्रश्न 17. बाल विकास के सिद्धान्तों का शैक्षिक महत्त्व बताइए।
उत्तर: बाल विकास के सिद्धान्त शिक्षक को आयु एवं विकास-स्तर के अनुरूप शिक्षण करने तथा वैयक्तिक भिन्नताओं को समझने में सहायता देते हैं।
प्रश्न 18. शैशवावस्था में शिक्षा का स्वरूप कैसा होना चाहिए?
उत्तर: शैशवावस्था में शिक्षा खेल, क्रिया, प्रत्यक्ष अनुभव एवं इन्द्रिय-अनुभव पर आधारित तथा बालक की रुचि के अनुरूप होनी चाहिए।
प्रश्न 19. बाल्यावस्था में मानसिक विकास की दो विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर: बाल्यावस्था में स्मृति एवं तर्क-शक्ति का विकास होता है तथा बालक मूर्त वस्तुओं और अनुभवों के आधार पर अधिक व्यवस्थित चिन्तन करने लगता है।
प्रश्न 20. वैयक्तिक भिन्नता का अर्थ लिखिए।
उत्तर: व्यक्तियों में शारीरिक, मानसिक, बौद्धिक, रुचि, स्वभाव, योग्यता एवं व्यक्तित्व सम्बन्धी गुणों में पाए जाने वाले अन्तर को वैयक्तिक भिन्नता कहते हैं।
प्रश्न 21. बालक के विकास में संचार माध्यम से दो लाभ लिखिए।
उत्तर: संचार माध्यमों से बालक के ज्ञान एवं सामान्य जागरूकता में वृद्धि होती है तथा उसे सामाजिक एवं सांस्कृतिक जानकारी प्राप्त होती है।
प्रश्न 22. चिन्तन क्या है?
उत्तर: किसी समस्या, वस्तु या परिस्थिति के विषय में ज्ञान और अनुभव के आधार पर मानसिक रूप से विचार करने की प्रक्रिया को चिन्तन कहते हैं।
प्रश्न 23. अधिगम से क्या तात्पर्य है?
उत्तर: अनुभव और अभ्यास के फलस्वरूप व्यवहार या व्यवहार-क्षमता में होने वाले अपेक्षाकृत स्थायी परिवर्तन को अधिगम कहते हैं।
प्रश्न 24. बाल विकास में अधिगम की सम्मेलन व विचारगोष्ठी विधि बताइए।
उत्तर: सम्मेलन एवं विचारगोष्ठी में विद्यार्थी या विशेषज्ञ किसी विषय पर विचार-विमर्श, प्रश्नोत्तर और विचारों के आदान-प्रदान द्वारा सीखते हैं।
प्रश्न 25. जब एक कुत्ते के सामने पहले घण्टी बजायी जाती है, फिर भोजन दिया जाता है और बार-बार ऐसा करने के बाद केवल घण्टी पर लार स्राव होने लगता है, यह किसके और कौन-से सिद्धान्त के अन्तर्गत आता है?
उत्तर: यह इवान पावलॉव के शास्त्रीय अनुबंधन या सम्बद्ध प्रतिक्रिया सिद्धान्त का उदाहरण है।
प्रश्न 26. सीखने में पठार के दो प्रमुख कारण एवं उन्हें दूर करने के उपाय बताइए।
उत्तर: प्रमुख कारण—अभिप्रेरणा की कमी और थकान/अनुचित अभ्यास। इन्हें विश्राम, उचित अभ्यास, विधि-परिवर्तन और अभिप्रेरणा द्वारा कम किया जा सकता है।
प्रश्न 27. अधिगम स्थानान्तरण को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: पहले सीखे गए ज्ञान या कौशल का किसी नई परिस्थिति के अधिगम पर प्रभाव पड़ना अधिगम स्थानान्तरण कहलाता है।
प्रश्न 28. प्रतिद्वन्द्विता (Competition) से आप क्या समझते हैं?
उत्तर: जब दो या अधिक व्यक्ति समान लक्ष्य, उपलब्धि या श्रेष्ठता प्राप्त करने के लिए एक-दूसरे से आगे बढ़ने का प्रयास करते हैं, तो इसे प्रतिद्वन्द्विता कहते हैं।
प्रश्न 29. बालक में विस्मृति कम करने के कोई दो उपाय बताइए।
उत्तर: विस्मृति कम करने के दो प्रमुख उपाय हैं—नियमित पुनरावृत्ति तथा अर्थपूर्ण एवं रुचिपूर्ण अधिगम।
प्रश्न 30. बुद्धि-लब्धि का सूत्र लिखिए।
उत्तर:
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लघु उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 31. बाल विकास में अधिगम को प्रभावित करने वाले विभिन्न कारकों का संक्षेप में वर्णन कीजिए।
उत्तर: अधिगम अनेक आन्तरिक और बाह्य कारकों से प्रभावित होता है। बालक की क्षमता, स्वास्थ्य, रुचि और अभिप्रेरणा के साथ-साथ शिक्षक, विषय-वस्तु तथा विद्यालयी वातावरण भी अधिगम की गति एवं गुणवत्ता को प्रभावित करते हैं।
अधिगम को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारक-
- शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य : स्वस्थ बालक अधिक ध्यान एवं सक्रियता के साथ सीख सकता है।
- परिपक्वता : किसी कौशल को सीखने के लिए आवश्यक शारीरिक एवं मानसिक तैयारी होना आवश्यक है।
- रुचि एवं अभिप्रेरणा : सीखने की इच्छा अधिगम को अधिक प्रभावी बनाती है।
- पूर्व ज्ञान : नई सामग्री को पहले से प्राप्त ज्ञान से जोड़ने पर सीखना सरल होता है।
- विषय-वस्तु : सरल, क्रमबद्ध और अर्थपूर्ण सामग्री अधिक आसानी से सीखी जाती है।
- शिक्षण-विधि : बाल-केन्द्रित एवं गतिविधि आधारित विधियाँ अधिगम में सहायक होती हैं।
- पुनर्बलन : उचित प्रशंसा एवं प्रतिपुष्टि सफल प्रतिक्रियाओं को दृढ़ करती है।
- वातावरण : शान्त, सहयोगी और भयमुक्त वातावरण सीखने के लिए अनुकूल होता है।
प्रश्न 32. जब बालक किशोरावस्था में पैर रखता है तो उसमें धीरे-धीरे परिवर्तन होते हैं। इस सन्धिकाल का शिक्षक तथा अभिभावक के लिए क्या महत्त्व है?
उत्तर: किशोरावस्था बाल्यावस्था और प्रौढ़ता के बीच का महत्त्वपूर्ण सन्धिकाल है। इसमें शारीरिक, मानसिक, सामाजिक और संवेगात्मक परिवर्तन तीव्र गति से होते हैं। इसलिए शिक्षक एवं अभिभावक की भूमिका अत्यन्त महत्त्वपूर्ण होती है।
शिक्षक एवं अभिभावक की भूमिका-
- किशोर की भावनाओं और विचारों का सम्मान करना चाहिए।
- उसकी स्वतन्त्रता की इच्छा को उचित दिशा देनी चाहिए।
- अनावश्यक दण्ड, कठोर आलोचना एवं अपमान से बचना चाहिए।
- शारीरिक एवं भावनात्मक परिवर्तनों के विषय में उचित जानकारी देनी चाहिए।
- रुचि, योग्यता और अभिरुचि के अनुसार मार्गदर्शन देना चाहिए।
- स्वस्थ मित्रता, खेल एवं रचनात्मक गतिविधियों के अवसर देने चाहिए।
- समस्याओं को सुनकर सहानुभूतिपूर्ण परामर्श देना चाहिए।
उचित सहयोग और मार्गदर्शन मिलने पर किशोर स्वस्थ व्यक्तित्व, आत्मविश्वास और उत्तरदायित्व का विकास कर सकता है।
प्रश्न 33. व्यक्तित्व मापन की प्रक्षेपण विधियों का वर्णन कीजिए।
उत्तर: जिन व्यक्तित्व-परीक्षणों में व्यक्ति के सामने अस्पष्ट या अनिश्चित उद्दीपक प्रस्तुत किए जाते हैं और उसकी प्रतिक्रियाओं के आधार पर उसकी आवश्यकताओं, भावनाओं, इच्छाओं और व्यक्तित्व-विशेषताओं का अध्ययन किया जाता है, उन्हें प्रक्षेपी विधियाँ कहते हैं।
प्रमुख प्रक्षेपी विधियाँ-
- टी.ए.टी. (Thematic Apperception Test) : व्यक्ति को अस्पष्ट चित्र दिखाकर उन पर कहानी बनाने को कहा जाता है।
- सी.ए.टी. (Children's Apperception Test) : बच्चों के व्यक्तित्व के अध्ययन के लिए चित्रों का प्रयोग किया जाता है।
- रोर्शाक स्याही-धब्बा परीक्षण : अस्पष्ट स्याही-धब्बों को देखकर व्यक्ति बताता है कि उसे उनमें क्या दिखाई देता है।
- वाक्य-पूर्ति परीक्षण : अधूरे वाक्यों को पूरा करने की प्रतिक्रियाओं से व्यक्ति की भावनाओं और अभिवृत्तियों का अध्ययन किया जाता है।
इन विधियों में सही या गलत उत्तर निर्धारित नहीं होता; व्यक्ति की स्वतन्त्र प्रतिक्रिया का विश्लेषण किया जाता है।
प्रश्न 34. प्रयास एवं त्रुटि सिद्धान्त की व्याख्या करते हुए बताइए कि शिक्षा में इसकी क्या उपयोगिता है?
उत्तर: प्रयत्न एवं भूल सिद्धान्त का प्रतिपादन ई. एल. थार्नडाइक ने किया। इसके अनुसार किसी समस्या के समाधान के लिए व्यक्ति अनेक प्रतिक्रियाएँ करता है। असफल प्रतिक्रियाएँ धीरे-धीरे छोड़ दी जाती हैं और सफल प्रतिक्रिया अभ्यास के द्वारा दृढ़ हो जाती है।
थार्नडाइक ने भूखी बिल्ली को पहेली-पेटी में रखकर अपने प्रयोग के माध्यम से इस प्रकार के अधिगम को स्पष्ट किया।
शिक्षा में उपयोगिता-
- विद्यार्थी स्वयं प्रयास करके सीखता है।
- गलतियों से सीखने का अवसर मिलता है।
- अभ्यास द्वारा सही प्रतिक्रिया या कौशल दृढ़ होता है।
- गणित, विज्ञान, खेल और व्यावहारिक कौशलों में उपयोगी है।
- समस्या-समाधान और स्वावलम्बन की प्रवृत्ति विकसित होती है।
- शिक्षक को उचित मार्गदर्शन एवं प्रतिपुष्टि देने का अवसर मिलता है।
प्रश्न 35. स्किनर के क्रियाप्रसूत अधिगम सिद्धान्त का उल्लेख कीजिए।
उत्तर: बी. एफ. स्किनर द्वारा प्रतिपादित क्रियाप्रसूत अनुबंधन सिद्धान्त (Operant Conditioning) के अनुसार व्यक्ति की स्वैच्छिक क्रिया उसके परिणामों से प्रभावित होती है। जिस व्यवहार के बाद पुनर्बलन मिलता है, उसके दोहराए जाने की सम्भावना बढ़ जाती है।
स्किनर ने चूहों और कबूतरों पर प्रयोग किए। स्किनर बॉक्स में किसी उचित प्रतिक्रिया—जैसे लीवर दबाने—के बाद भोजन मिलने पर वह प्रतिक्रिया क्रमशः दृढ़ होती गई।
शिक्षा में उपयोगिता-
- सही उत्तर या व्यवहार पर तत्काल पुनर्बलन देना।
- जटिल अधिगम को छोटे-छोटे चरणों में बाँटना।
- विद्यार्थियों को सक्रिय प्रतिक्रिया का अवसर देना।
- तत्काल प्रतिपुष्टि प्रदान करना।
- वांछित व्यवहार को क्रमिक रूप से विकसित करना।
- कार्यक्रमित अधिगम में इसका उपयोग करना।
प्रश्न 36. सीखने-सिखाने तथा विद्यालयी व्यवस्था के सन्दर्भ में समुदाय के सक्रिय सदस्यों का अभिप्रेरण में योगदान स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: विद्यालय समुदाय का ही एक महत्त्वपूर्ण अंग है। अभिभावक, ग्रामवासी, स्थानीय विशेषज्ञ और समुदाय के अन्य सक्रिय सदस्य विद्यार्थियों तथा विद्यालय को सहयोग एवं अभिप्रेरणा प्रदान कर सकते हैं।
समुदाय के सक्रिय सदस्यों का योगदान-
- बच्चों के नियमित नामांकन और उपस्थिति के लिए अभिभावकों को प्रेरित करना।
- विद्यार्थियों की उपलब्धियों की प्रशंसा एवं प्रोत्साहन करना।
- विद्यालय की गतिविधियों, उत्सवों एवं परियोजनाओं में सहयोग देना।
- स्थानीय ज्ञान, कौशल और अनुभव को विद्यार्थियों के साथ साझा करना।
- विद्यालय की समस्याओं के समाधान में शिक्षक के साथ सहयोग करना।
- विद्यालय में आवश्यक संसाधन जुटाने में सहायता करना।
- बालिका शिक्षा और वंचित बच्चों की शिक्षा के प्रति जागरूकता उत्पन्न करना।
समुदाय और विद्यालय के बीच सकारात्मक सहयोग से विद्यार्थियों में शिक्षा के प्रति रुचि तथा विद्यालय के प्रति अपनापन बढ़ता है।
प्रश्न 37. "अन्तर्दृष्टि में पूर्वदृष्टि निहित होती है।" कथन को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: कोहलर के अन्तर्दृष्टि सिद्धान्त के अनुसार समस्या की सम्पूर्ण परिस्थिति तथा उसके विभिन्न अंगों के पारस्परिक सम्बन्ध को समझकर समाधान की सूझ प्राप्त होती है। इसी अर्थ में कहा जाता है कि "अन्तर्दृष्टि में पूर्वदृष्टि निहित होती है।"
व्यक्ति केवल वर्तमान वस्तुओं को नहीं देखता, बल्कि उपलब्ध साधनों और उनके सम्भावित परिणामों के सम्बन्ध को पहले से समझता है। इस प्रकार वह कार्य करने से पहले उसके समाधान की दिशा का अनुमान लगा सकता है।
कोहलर ने चिम्पैंजी पर किए गए प्रयोगों में पाया कि चिम्पैंजी समस्या की सम्पूर्ण स्थिति को देखकर छड़ी अथवा बक्सों जैसे साधनों का सही उपयोग समझ लेता था और लक्ष्य तक पहुँच जाता था। अतः अन्तर्दृष्टि में समग्र प्रत्यक्षीकरण, सम्बन्धों की समझ और परिणाम का पूर्वानुमान महत्त्वपूर्ण होते हैं।
प्रश्न 38. अवधान को प्रभावित करने वाले कारकों को लिखिए।
उत्तर: किसी विशेष वस्तु, घटना या विचार पर चेतना को केन्द्रित करने की प्रक्रिया को अवधान या ध्यान कहते हैं। अवधान को प्रभावित करने वाले कारकों को मुख्यतः दो वर्गों में बाँटा जा सकता है-
1. बाह्य या वस्तुगत कारक-
- उद्दीपक की तीव्रता
- आकार
- नवीनता
- गति
- विषमता या विरोध
- पुनरावृत्ति
- अचानक परिवर्तन
2. आन्तरिक या व्यक्तिनिष्ठ कारक-
- रुचि
- आवश्यकता
- अभिप्रेरणा
- उद्देश्य
- पूर्व अनुभव
- आदत
- संवेग
- जिज्ञासा
प्रश्न 39. सांख्यिकी के महत्त्व को संक्षेप में लिखिए।
उत्तर: शिक्षा एवं मनोविज्ञान में प्राप्त आँकड़ों को व्यवस्थित करने, उनका विश्लेषण करने और उनके आधार पर निष्कर्ष निकालने के लिए सांख्यिकी का विशेष महत्त्व है।
सांख्यिकी के प्रमुख महत्त्व-
- बड़े एवं जटिल आँकड़ों को सरल रूप में प्रस्तुत करती है।
- माध्य, माध्यिका और बहुलक द्वारा आँकड़ों का प्रतिनिधि मान ज्ञात किया जाता है।
- विद्यार्थियों की उपलब्धियों की तुलना करने में सहायता मिलती है।
- परीक्षा एवं मूल्यांकन के परिणामों का विश्लेषण किया जा सकता है।
- तालिका, ग्राफ और आरेखों द्वारा आँकड़ों को स्पष्ट किया जा सकता है।
- शैक्षिक अनुसंधान में निष्कर्ष निकालने में सहायता मिलती है।
- निर्णय लेने और भविष्य सम्बन्धी अनुमान लगाने में उपयोगी होती है।
प्रश्न 40. सामान्य ज्ञान की परीक्षा में 8 विद्यार्थियों को निम्नलिखित अंक प्राप्त हुए। इनका मध्यमान ज्ञात कीजिए- प्राप्तांक : 20, 23, 27, 18, 17, 13, 24, 22
उत्तर:
अतः 8 विद्यार्थियों के प्राप्तांकों का मध्यमान = 20.5 है।
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