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बाल विकास एवं सीखने की प्रक्रिया Previous Year Paper 2018

UP DELED Semester 1 बाल विकास एवं सीखने की प्रक्रिया Previous Year Question Paper 2018 with solution.

Section 1 वस्तुनिष्ठ प्रश्न

वस्तुनिष्ठ प्रश्न

प्रश्न 1. किशोरावस्था को गम्भीर उथल-पुथल की अवस्था कहा है-

(a) स्टैनले हॉल ने

(b) स्किनर ने

(c) ब्रूनर ने

(d) बागले ने

उत्तर: (a) स्टैनले हॉल ने।

व्याख्या : जी. स्टैनले हॉल ने किशोरावस्था को तूफान और तनाव (Storm and Stress) की अवस्था कहा। इस अवस्था में तीव्र शारीरिक, मानसिक, सामाजिक एवं संवेगात्मक परिवर्तन होते हैं।

प्रश्न 2. (मानसिक आयु / वास्तविक आयु) × 100 सूत्र से मापन किया जाता है-

(a) अर्जित ज्ञान का

(b) बुद्धि-लब्धि का

(c) आयु का

(d) लम्बाई का

उत्तर: (b) बुद्धि-लब्धि का।

व्याख्या : पारम्परिक बुद्धिलब्धि का सूत्र है—IQ = (मानसिक आयु / वास्तविक आयु) × 100। मानसिक आयु और वास्तविक आयु के अनुपात की अवधारणा विलियम स्टर्न से सम्बन्धित है; बाद में टरमैन ने इसे 100 से गुणा करके IQ के रूप में लोकप्रिय बनाया।

प्रश्न 3. वह मानसिक योग्यता जिसके द्वारा व्यक्ति किसी नवीन रचना को प्रस्तुत करता है, कहलाती है-

(a) ज्ञान

(b) योग्यता

(c) सृजनात्मकता

(d) इनमें से कोई नहीं

उत्तर: (c) सृजनात्मकता।

व्याख्या : किसी नवीन, मौलिक और उपयोगी विचार, समाधान या रचना को प्रस्तुत करने की योग्यता सृजनात्मकता कहलाती है।

प्रश्न 4. शारीरिक रचना, बुद्धि-रुचि, व्यक्तित्व आदि में एक व्यक्ति का दूसरे व्यक्ति से भिन्न होना कहलाता है-

(a) सामूहिक भिन्नता

(b) बौद्धिक भिन्नता

(c) शारीरिक भिन्नता

(d) वैयक्तिक भिन्नता

उत्तर: (d) वैयक्तिक भिन्नता।

व्याख्या : व्यक्तियों में शारीरिक, मानसिक, बौद्धिक, संवेगात्मक, रुचि एवं व्यक्तित्व सम्बन्धी गुणों में पाए जाने वाले अन्तर को वैयक्तिक भिन्नता कहते हैं।

प्रश्न 5. संज्ञानात्मक क्षमता की कमी से व्यक्ति को कठिनाई होती है-

(a) शारीरिक विकास में

(b) बौद्धिक विकास में

(c) व्यावसायिक विकास में

(d) समायोजन में

उत्तर: (b) बौद्धिक विकास में।

व्याख्या : संज्ञानात्मक क्षमताएँ ध्यान, स्मृति, तर्क, समस्या-समाधान तथा अधिगम जैसी मानसिक प्रक्रियाओं से सम्बन्धित होती हैं। इनकी कमी बौद्धिक कार्यों और सीखने की क्षमता को प्रभावित कर सकती है।

प्रश्न 6. सिगमण्ड फ्रॉयड द्वारा प्रतिपादित व्यक्तित्व विकास के सिद्धान्त को कहा जाता है-

(a) शारीरिक विकास का सिद्धान्त

(b) भावात्मक विकास का सिद्धान्त

(c) मनोविश्लेषणात्मक सिद्धान्त

(d) ज्ञानात्मक सिद्धान्त

उत्तर: (c) मनोविश्लेषणात्मक सिद्धान्त।

व्याख्या : सिगमण्ड फ्रॉयड ने व्यक्तित्व की व्याख्या मनोविश्लेषणात्मक दृष्टिकोण से की तथा मनोलैंगिक विकास की अवस्थाओं का वर्णन किया।

प्रश्न 7. परोक्ष वस्तुओं के सम्बन्ध में चिन्तन कहलाता है-

(a) कल्पना

(b) चिन्तन

(c) तर्क

(d) स्मृति

उत्तर: (a) कल्पना।

व्याख्या : प्रत्यक्ष रूप से उपस्थित न होने वाली वस्तुओं, घटनाओं या परिस्थितियों की मानसिक प्रतिमा बनाकर उनके विषय में विचार करना कल्पना कहलाता है।

प्रश्न 8. किसी समस्या का समाधान करने के लिए गत अनुभवों को नये ढंग से समायोजित किया जाना कहलाता है-

(a) तर्क

(b) चिन्तन

(c) कल्पना

(d) स्मृति

उत्तर: (a) तर्क।

व्याख्या : किसी निश्चित उद्देश्य या समस्या के समाधान के लिए तथ्यों, पूर्व अनुभवों एवं ज्ञान को क्रमबद्ध रूप में व्यवस्थित करके निष्कर्ष तक पहुँचने की प्रक्रिया तर्क कहलाती है।

प्रश्न 9. किसी के द्वारा विभिन्न परिस्थितियों में समायोजन कहलाता है-

(a) शारीरिक स्वास्थ्य

(b) संवेगात्मक विकास

(c) मानसिक स्वास्थ्य

(d) उपर्युक्त सभी

उत्तर: (c) मानसिक स्वास्थ्य।

व्याख्या : विभिन्न व्यक्तिगत और सामाजिक परिस्थितियों के साथ संतोषजनक समायोजन करने की क्षमता अच्छे मानसिक स्वास्थ्य की प्रमुख विशेषता है।

प्रश्न 10. सीखने की मात्रा तथा समय के सम्बन्ध को चित्रांकित करने वाली वक्र रेखा कहलाती है-

(a) अधिगम वक्र

(b) पठार वक्र

(c) सम्प्राप्ति वक्र

(d) बुद्धि-लब्धि वक्र

उत्तर: (a) अधिगम वक्र।

व्याख्या : सीखने की मात्रा तथा अभ्यास या समय के बीच सम्बन्ध को ग्राफ पर प्रदर्शित करने वाली रेखा को अधिगम वक्र (Learning Curve) कहते हैं।

प्रश्न 11. जब कोई बालक सीखने को तत्पर होता है, तब वह चीजों को जल्दी से सीखता है, यह थार्नडाइक के सीखने के किस नियम के अन्तर्गत आता है?

(a) प्रभाव का नियम

(b) तत्परता का नियम

(c) अभ्यास का नियम

(d) इनमें से कोई नहीं

उत्तर: (b) तत्परता का नियम।

व्याख्या : थार्नडाइक के तत्परता के नियम के अनुसार जब व्यक्ति किसी कार्य को करने या सीखने के लिए तैयार होता है, तब अधिगम अधिक प्रभावी और संतोषप्रद होता है।

प्रश्न 12. सीखने के किस सिद्धान्त के अन्तर्गत व्यक्ति सम्पूर्ण परिस्थिति के प्रत्यक्षीकरण के आधार पर सीखता है?

(a) प्रयत्न और भूल का सिद्धान्त

(b) सम्बद्ध प्रतिक्रिया का सिद्धान्त

(c) अनुकरण का सिद्धान्त

(d) अन्तर्दृष्टि या सूझ का सिद्धान्त

उत्तर: (d) अन्तर्दृष्टि या सूझ का सिद्धान्त।

व्याख्या : कोहलर के अन्तर्दृष्टि सिद्धान्त के अनुसार व्यक्ति समस्या की सम्पूर्ण परिस्थिति और उसके विभिन्न भागों के सम्बन्ध को समझकर समाधान प्राप्त करता है।

प्रश्न 13. वे प्रेरक जिन्हें व्यक्ति अपने प्रयासों से प्राप्त करता है, कहलाते हैं-

(a) अर्जित प्रेरक

(b) जाग्रत प्रेरक

(c) निर्देशित प्रेरक

(d) व्यवहार को परिचालित प्रेरक

उत्तर: (a) अर्जित प्रेरक।

व्याख्या : सामाजिक जीवन, अनुभव, शिक्षा और संस्कृति के प्रभाव से विकसित होने वाले प्रेरकों को अर्जित या सामाजिक अभिप्रेरक कहते हैं; जैसे—प्रतिष्ठा, उपलब्धि और सामाजिक स्वीकृति।

प्रश्न 14. अधिगम, धारण, पुनःस्मरण तथा पहचान आदि प्रक्रियाएँ आती हैं-

(a) ध्यान के अन्तर्गत

(b) कल्पना के अन्तर्गत

(c) रुचि के अन्तर्गत

(d) स्मृति के अन्तर्गत

उत्तर: (d) स्मृति के अन्तर्गत।

व्याख्या : अधिगम, धारण, पुनःस्मरण और पहचान स्मृति की प्रमुख प्रक्रियाएँ हैं।

प्रश्न 15. वह प्राप्तांक जो किसी प्रदत्त को दो बराबर भागों में बाँटता है, कहलाता है-

(a) समान्तर माध्य

(b) माध्यिका

(c) बहुलक

(d) उपर्युक्त सभी

उत्तर: (b) माध्यिका।

व्याख्या : क्रमबद्ध आँकड़ों को दो समान भागों में विभाजित करने वाले मध्य मान को माध्यिका (Median) कहते हैं।

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Section 2 अति लघु उत्तरीय प्रश्न

अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 16. बाल विकास के अन्तर्गत शैशवावस्था की आयु कितनी होती है?

उत्तर: बाल विकास में शैशवावस्था सामान्यतः जन्म से 6 वर्ष तक मानी जाती है।

प्रश्न 17. जन्म के समय शिशुओं के भीतर कितने संवेग पाये जाते हैं?

उत्तर: वाटसन के अनुसार जन्म के समय तीन मूल संवेग—भय, क्रोध और स्नेह—पाए जाते हैं।

प्रश्न 18. बुद्धि के बहुकारक सिद्धान्त का प्रतिपादन किसने किया?

उत्तर: बुद्धि के बहुकारक सिद्धान्त का प्रतिपादन ई. एल. थार्नडाइक ने किया।

प्रश्न 19. अन्तर्मुखी व्यक्तित्व से क्या तात्पर्य है?

उत्तर: अन्तर्मुखी व्यक्ति सामान्यतः आत्मचिन्तनशील, शान्त तथा अपने आन्तरिक विचारों और भावनाओं पर अधिक केन्द्रित होता है।

प्रश्न 20. सामान्य बौद्धिक स्तर के बालक की बुद्धि-लब्धि कितनी होती है?

उत्तर: पारम्परिक वर्गीकरण में सामान्य बौद्धिक स्तर की बुद्धिलब्धि लगभग 90 से 109 मानी जाती है।

प्रश्न 21. टी.ए.टी. व्यक्तित्व परीक्षण का निर्माण किसने किया?

उत्तर: टी.ए.टी. (Thematic Apperception Test) का विकास हेनरी मरे और क्रिस्टियाना मॉर्गन ने किया।

प्रश्न 22. बालक के केन्द्रक में सामान्यतः कितने गुणसूत्र होते हैं?

उत्तर: मानव की सामान्य देह कोशिकाओं में 46 गुणसूत्र अर्थात् 23 जोड़े पाए जाते हैं।

प्रश्न 23. 'सीखने का स्थानान्तरण' सम्प्रत्यय को स्पष्ट कीजिए।

उत्तर: पहले सीखे गए ज्ञान या कौशल का किसी नई परिस्थिति में प्रभाव या उपयोग होना अधिगम स्थानान्तरण कहलाता है।

प्रश्न 24. बालक के कोषों एवं पेशियों में समय के साथ होने वाला परिवर्तन, जिसके कारण वह किसी कार्य को करने योग्य होता है, क्या कहलाता है?

उत्तर: ऐसे स्वाभाविक जैविक विकास को परिपक्वता कहते हैं।

प्रश्न 25. वैयक्तिक एवं सामूहिक बुद्धि परीक्षण में मुख्य अन्तर क्या है?

उत्तर: वैयक्तिक परीक्षण एक समय में एक व्यक्ति पर किया जाता है, जबकि सामूहिक परीक्षण एक साथ अनेक व्यक्तियों पर किया जाता है।

प्रश्न 26. पावलॉव ने सीखने से सम्बन्धित अपने सिद्धान्त का प्रतिपादन किसके ऊपर प्रयोग करके किया?

उत्तर: इवान पावलॉव ने कुत्ते पर प्रयोग करके शास्त्रीय अनुबंधन सिद्धान्त को स्पष्ट किया।

प्रश्न 27. थार्नडाइक ने अपने सीखने के सिद्धान्त के अन्तर्गत कितने मुख्य नियमों की चर्चा की है?

उत्तर: थार्नडाइक ने तीन मुख्य नियम बताए—तत्परता, अभ्यास और प्रभाव का नियम

प्रश्न 28. प्यास, भूख, निद्रा, प्रतिष्ठा में से कौन-सा अर्जित अभिप्रेरणा के अन्तर्गत आता है?

उत्तर: प्रतिष्ठा अर्जित या सामाजिक अभिप्रेरणा है; भूख, प्यास और नींद जैविक आवश्यकताएँ हैं।

प्रश्न 29. सीखी गई सामग्री को पुनः स्मरण करने की असफलता क्या कहलाती है?

उत्तर: सीखी हुई सामग्री को आवश्यकता के समय स्मरण न कर पाना विस्मरण या विस्मृति कहलाता है।

प्रश्न 30. किसी अवर्गीकृत प्रदत्त में सबसे अधिक बार आने वाली संख्या क्या कहलाती है?

उत्तर: सबसे अधिक बार आने वाले मान को बहुलक या बहुलांक (Mode) कहते हैं।

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Section 3 लघु उत्तरीय प्रश्न

लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 31. जन्म से किशोरावस्था तक बच्चे के सामाजिक विकास को विस्तार से समझाइए।

उत्तर: समाज के अन्य व्यक्तियों के साथ सम्बन्ध स्थापित करने, सामाजिक नियमों को समझने, सहयोग करने तथा समाज में स्वीकार्य व्यवहार विकसित करने की प्रक्रिया को सामाजिक विकास कहते हैं। यह जन्म से प्रारम्भ होकर क्रमशः विकसित होता है।

1. शैशवावस्था में सामाजिक विकास-

  • शिशु प्रारम्भ में माता-पिता और परिवार के सदस्यों पर निर्भर रहता है।
  • धीरे-धीरे वह परिचित व्यक्तियों को पहचानने और प्रतिक्रिया देने लगता है।
  • मुस्कराना, अनुकरण करना, दूसरों के साथ खेलना तथा स्नेह व्यक्त करना विकसित होता है।
  • आयु बढ़ने पर अन्य बच्चों के साथ समानान्तर तथा सामूहिक खेल की प्रवृत्ति विकसित होती है।

2. बाल्यावस्था में सामाजिक विकास-

  • विद्यालय और मित्र-समूह का प्रभाव बढ़ जाता है।
  • सहयोग, प्रतिस्पर्धा, अनुशासन और उत्तरदायित्व की भावना विकसित होती है।
  • बालक समूह के नियमों और सामाजिक मानदण्डों को समझना सीखता है।
  • मित्रता, नेतृत्व तथा समूह-निष्ठा का विकास होता है।

3. किशोरावस्था में सामाजिक विकास-

  • साथियों के समूह का प्रभाव अधिक महत्त्वपूर्ण हो जाता है।
  • स्वतन्त्रता और अपनी पहचान स्थापित करने की इच्छा बढ़ती है।
  • विपरीत लिंग के प्रति रुचि तथा सामाजिक सम्बन्धों में विस्तार होता है।
  • नेतृत्व, सामाजिक उत्तरदायित्व और सामाजिक मूल्यों की समझ विकसित होती है।

इस प्रकार सामाजिक विकास परिवार से आरम्भ होकर विद्यालय, मित्र-समूह और व्यापक समाज तक क्रमशः विस्तृत होता है।

प्रश्न 32. बच्चे के मानसिक विकास में 'वंशानुक्रम और वातावरण' का सापेक्षिक महत्त्व है, पर समीक्षात्मक व्याख्या दीजिए।

उत्तर: बालक का मानसिक विकास न केवल वंशानुक्रम का परिणाम है और न केवल वातावरण का। वास्तविक विकास वंशानुक्रम और वातावरण की पारस्परिक क्रिया से होता है।

वंशानुक्रम का महत्त्व-

  • बालक को कुछ जैविक एवं जन्मजात विशेषताएँ माता-पिता से प्राप्त होती हैं।
  • स्नायु-तन्त्र, मस्तिष्क की संरचना और अनेक क्षमताओं की विकास-सम्भावना पर आनुवंशिक प्रभाव होता है।
  • शारीरिक परिपक्वता की गति भी आंशिक रूप से आनुवंशिक कारकों से प्रभावित होती है।

वातावरण का महत्त्व-

  • परिवार, विद्यालय, पोषण, शिक्षा, सामाजिक-सांस्कृतिक परिस्थितियाँ और अनुभव विकास को प्रभावित करते हैं।
  • उचित अवसर, अभ्यास और प्रोत्साहन से जन्मजात क्षमताओं का बेहतर विकास हो सकता है।
  • प्रतिकूल वातावरण विकास की सम्भावनाओं को सीमित कर सकता है।

अतः शिक्षक को बालक की जन्मजात क्षमताओं को समझते हुए ऐसा अनुकूल वातावरण प्रदान करना चाहिए जिसमें उसकी सम्भावनाओं का अधिकतम विकास हो सके।

प्रश्न 33. सीखने के पठार के कारण एवं उन्हें दूर करने के उपाय बताइए।

उत्तर: सीखते समय वह अवस्था जिसमें कुछ समय के लिए प्रगति रुक जाती है और अधिगम-वक्र लगभग समतल हो जाता है, अधिगम का पठार कहलाती है।

पठार के प्रमुख कारण-

  • शारीरिक या मानसिक थकान।
  • रुचि एवं अभिप्रेरणा की कमी।
  • एक ही विधि का लगातार प्रयोग।
  • अनुचित अभ्यास या गलत आदतें।
  • कार्य का अत्यधिक कठिन होना।
  • पुराने एवं नए अधिगम में संघर्ष।
  • ध्यान और एकाग्रता में कमी।
  • उचित प्रतिपुष्टि का अभाव।

पठार दूर करने के उपाय-

  • उचित विश्राम देना।
  • अभिप्रेरणा और पुनर्बलन का प्रयोग करना।
  • शिक्षण एवं अभ्यास की विधि में परिवर्तन करना।
  • कठिन कार्य को छोटे भागों में बाँटना।
  • वितरित अभ्यास अपनाना।
  • गलत आदतों की पहचान कर उन्हें सुधारना।
  • विद्यार्थी को नियमित प्रतिपुष्टि देना।

प्रश्न 34. पावलॉव के सम्बद्ध प्रतिक्रिया सिद्धान्त क्या हैं? इस सिद्धान्त का चित्र भी बनाइए।

उत्तर: पावलॉव का शास्त्रीय अनुबंधन या सम्बद्ध प्रतिक्रिया सिद्धान्त उद्दीपक और अनुक्रिया के बीच साहचर्य स्थापित होने पर आधारित है।

पावलॉव ने कुत्ते पर प्रयोग किया। भोजन देखकर कुत्ते के मुँह में स्वाभाविक रूप से लार आती थी। भोजन देने से पहले बार-बार घण्टी बजाई गई। कई बार घण्टी और भोजन को साथ प्रस्तुत करने के बाद केवल घण्टी बजाने पर भी कुत्ते के मुँह में लार आने लगी। इस प्रकार घण्टी अनुबन्धित उद्दीपक और लार अनुबन्धित अनुक्रिया बन गई।

  • अनुबंधन से पहले : भोजन (UCS) → लार (UCR)
  • अनुबंधन के दौरान : घण्टी + भोजन → लार
  • अनुबंधन के बाद : घण्टी (CS) → लार (CR)
पावलॉव के शास्त्रीय अनुबंधन सिद्धान्त का चित्र
पावलॉव के शास्त्रीय अनुबंधन सिद्धान्त का चित्र

प्रश्न 35. अभिप्रेरणा किसे कहते हैं? अभिप्रेरणा के प्रकार बताइए।

उत्तर: व्यक्ति के व्यवहार को सक्रिय करने, दिशा देने और लक्ष्य की प्राप्ति तक बनाए रखने वाली शक्ति को अभिप्रेरणा कहते हैं।

अभिप्रेरणा के प्रमुख प्रकार-

  • 1. आन्तरिक अभिप्रेरणा : जब व्यक्ति किसी कार्य को अपनी रुचि, जिज्ञासा, संतोष या सीखने की इच्छा से करता है। जैसे—ज्ञान प्राप्त करने के लिए पढ़ना।
  • 2. बाह्य अभिप्रेरणा : जब व्यक्ति किसी बाहरी प्रोत्साहन या परिणाम के कारण कार्य करता है। जैसे—पुरस्कार, अंक, प्रशंसा या मान्यता प्राप्त करने के लिए पढ़ना।

सकारात्मक और नकारात्मक अभिप्रेरणा एक अलग वर्गीकरण है। पुरस्कार एवं प्रशंसा सकारात्मक प्रेरक हो सकते हैं, जबकि दण्ड या भय पर आधारित प्रेरणा नकारात्मक हो सकती है।

प्रश्न 36. ध्यान एवं रुचि में क्या सम्बन्ध है? एक ऐसी सूची बनाएँ जिससे आप कक्षा में बच्चों में रुचि उत्पन्न कर सकते हैं?

उत्तर: ध्यान और रुचि में घनिष्ठ सम्बन्ध है। जिस वस्तु या कार्य में बालक की रुचि होती है, उसकी ओर उसका ध्यान सहज रूप से केन्द्रित होता है। इसी प्रकार किसी विषय पर निरन्तर ध्यान देने और सफलता प्राप्त करने से उसमें रुचि विकसित हो सकती है।

कक्षा में रुचि उत्पन्न करने के उपाय-

  1. पाठ को बालकों के पूर्व ज्ञान और दैनिक जीवन से जोड़ना।
  2. चित्र, मॉडल और श्रव्य-दृश्य सामग्री का प्रयोग करना।
  3. खेल एवं गतिविधि आधारित शिक्षण अपनाना।
  4. प्रश्नोत्तर और चर्चा का प्रयोग करना।
  5. बालकों को प्रयोग और करके सीखने के अवसर देना।
  6. सफलता पर उचित प्रशंसा और प्रोत्साहन देना।
  7. वैयक्तिक भिन्नताओं के अनुसार गतिविधियाँ देना।
  8. शिक्षण में विविधता और नवीनता बनाए रखना।

प्रश्न 37. शिक्षा में वैयक्तिक भिन्नताओं के प्रभाव की विवेचना कीजिए।

उत्तर: प्रत्येक विद्यार्थी बुद्धि, रुचि, योग्यता, सीखने की गति, व्यक्तित्व, अनुभव और सामाजिक पृष्ठभूमि की दृष्टि से अन्य विद्यार्थियों से भिन्न होता है। इसलिए शिक्षा में वैयक्तिक भिन्नताओं का ध्यान रखना आवश्यक है।

शिक्षा पर वैयक्तिक भिन्नताओं के प्रमुख प्रभाव-

  • सभी विद्यार्थी एक समान गति से नहीं सीखते हैं।
  • एक ही शिक्षण-विधि सभी विद्यार्थियों के लिए समान रूप से प्रभावी नहीं होती।
  • कुछ विद्यार्थियों को अतिरिक्त सहायता तथा कुछ को समृद्धि गतिविधियों की आवश्यकता होती है।
  • रुचि और अभिरुचि के अनुसार विषय एवं गतिविधियों में अन्तर करना आवश्यक होता है।
  • मूल्यांकन में विभिन्न प्रकार के साधनों का उपयोग करना चाहिए।
  • शिक्षक को लचीली और बाल-केन्द्रित शिक्षण-विधियाँ अपनानी चाहिए।
  • समूह-कार्य, व्यक्तिगत कार्य और उपचारात्मक शिक्षण का उचित प्रयोग करना चाहिए।

अतः प्रभावी शिक्षा वही है जो विद्यार्थियों की वैयक्तिक आवश्यकताओं और क्षमताओं को स्वीकार करके उनके अनुसार शिक्षण-अवसर प्रदान करे।

प्रश्न 38. स्मृति को परिभाषित कीजिए। स्मृति के विभिन्न प्रकारों को उदाहरण देकर समझाइए।

उत्तर: पूर्व में सीखे गए अनुभव, ज्ञान या कौशल को धारण करके आवश्यकता पड़ने पर पुनः स्मरण या पहचान करने की मानसिक क्षमता को स्मृति कहते हैं।

स्मृति के प्रमुख प्रकार-

  • 1. तात्कालिक स्मृति : बहुत थोड़े समय के लिए सामग्री को याद रखना। जैसे—किसी संख्या को सुनकर तुरन्त दोहरा देना।
  • 2. अल्पकालिक स्मृति : सीमित सामग्री को कुछ समय तक धारण करना। जैसे—अभी पढ़े गए निर्देश को थोड़ी देर तक याद रखना।
  • 3. दीर्घकालिक स्मृति : सामग्री को लंबे समय तक याद रखना। जैसे—अपना नाम, वर्णमाला या बचपन की कोई घटना।
  • 4. तार्किक स्मृति : अर्थ और सम्बन्ध समझकर सामग्री याद करना। जैसे—किसी सिद्धान्त को समझकर याद रखना।
  • 5. यान्त्रिक या रटन्त स्मृति : अर्थ पर विशेष ध्यान दिए बिना बार-बार दोहराकर याद करना। जैसे—कविता या पहाड़ा रटना।
  • 6. सक्रिय स्मृति : प्रयत्न करके किसी तथ्य को स्मरण करना। जैसे—परीक्षा में पढ़ा हुआ उत्तर याद करना।

प्रश्न 39. आप कक्षा में बच्चों के भूलने की क्रिया को कैसे नियन्त्रित करेंगे? भूलने की गति को रोकने के उपाय सुझाइए।

उत्तर: भूलने की गति को कम करने के लिए शिक्षण को अर्थपूर्ण, रुचिकर और व्यवस्थित बनाना आवश्यक है। केवल रटाने की अपेक्षा समझकर सीखने पर बल देना चाहिए।

भूलने की गति कम करने के प्रमुख उपाय-

  • समझकर और अर्थपूर्ण ढंग से सीखना।
  • नियमित पुनरावृत्ति करना।
  • वितरित अभ्यास का प्रयोग करना।
  • सीखी हुई सामग्री का प्रयोग कराना।
  • नई सामग्री को पूर्व ज्ञान से जोड़ना।
  • चित्र, संकेत और उदाहरणों का प्रयोग करना।
  • विद्यार्थियों से स्वयं पुनःस्मरण एवं पुनर्कथन करवाना।
  • रुचि और अभिप्रेरणा बनाए रखना।
  • पर्याप्त नींद, विश्राम और स्वस्थ दिनचर्या सुनिश्चित करना।

बच्चे की भूल पर दण्ड देने की अपेक्षा उसे अलग-अलग तरीकों से पुनः सीखने और अभ्यास करने के अवसर देने चाहिए।

प्रश्न 40. सांख्यिकी से आप क्या समझते हैं? सांख्यिकी के प्रकारों की संक्षिप्त चर्चा कीजिए।

उत्तर: आँकड़ों के संग्रह, वर्गीकरण, प्रस्तुतीकरण, विश्लेषण और व्याख्या से सम्बन्धित विज्ञान को सांख्यिकी कहते हैं। शिक्षा में इसका प्रयोग परीक्षा-परिणाम, उपलब्धि, बुद्धि, रुचि तथा अन्य शैक्षिक आँकड़ों के अध्ययन में किया जाता है।

सांख्यिकी के दो प्रमुख प्रकार-

  • 1. वर्णनात्मक सांख्यिकी : उपलब्ध आँकड़ों को व्यवस्थित, सारांशित और वर्णित किया जाता है। इसमें माध्य, माध्यिका, बहुलक, प्रसार आदि का प्रयोग होता है।
  • 2. अनुमानात्मक सांख्यिकी : नमूने से प्राप्त आँकड़ों के आधार पर व्यापक जनसंख्या के विषय में अनुमान या निष्कर्ष निकाले जाते हैं तथा परिकल्पनाओं का परीक्षण किया जाता है।
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