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विज्ञान Previous Year Paper 2017

UP DELED Semester 4 विज्ञान Previous Year Question Paper 2017 with solution.

Section 1 वस्तुनिष्ठ प्रश्न

वस्तुनिष्ठ प्रश्न

प्रश्न 1. एलीसा परीक्षण है-

(a) हिपेटाइटिस

(b) क्षय रोग

(c) एड्स

(d) टाइफाइड

उत्तर: (c) एड्स। परीक्षा के संदर्भ में ELISA का उपयोग HIV संक्रमण की जाँच के लिए किया जाता है। ELISA द्वारा रक्त में HIV के प्रति बनी एंटीबॉडी का पता लगाया जा सकता है।

प्रश्न 2. गैलेना किस धातु का अयस्क है-

(a) जिंक

(b) लेड

(c) कॉपर

(d) एल्युमीनियम

उत्तर: (b) लेड। गैलेना का रासायनिक सूत्र PbS है और यह सीसा (Lead) का प्रमुख सल्फाइड अयस्क है।

प्रश्न 3. वातावरण और जीवधारियों के पारस्परिक सम्बन्धों से क्या बनता है-

(a) समुदाय

(b) पारिस्थितिक तन्त्र

(c) जीवोम

(d) खाद्य-जाल

उत्तर: (b) पारिस्थितिक तन्त्र। किसी क्षेत्र के जैविक घटकों तथा उनके अजैविक वातावरण के बीच होने वाली पारस्परिक क्रियाओं से पारिस्थितिक तन्त्र बनता है।

प्रश्न 4. शुष्क सेल में किस पदार्थ की छड़ एनोड का कार्य करती है-

(a) कार्बन

(b) सिलिकॉन

(c) जर्मेनियम

(d) बोरॉन

उत्तर: यह प्रश्न वैज्ञानिक दृष्टि से त्रुटिपूर्ण है। सामान्य जिंक-कार्बन शुष्क सेल में जिंक का पात्र एनोड तथा कार्बन/ग्रेफाइट की छड़ कैथोड का कार्य करती है। अतः दिए गए विकल्पों में कोई भी वैज्ञानिक रूप से सही नहीं है। पुरानी पाठ्यसामग्री/उत्तर-कुंजी में (a) कार्बन अपेक्षित उत्तर दिया गया मिलता है।

प्रश्न 5. रुधिर का थक्का बनाने वाली रुधिर कणिका का नाम है-

(a) लाल रुधिर कणिका

(b) प्लेटलेट

(c) श्वेत रुधिर कणिका

(d) इनमें से कोई नहीं

उत्तर: (b) प्लेटलेट। प्लेटलेट्स अथवा बिम्बाणु रक्त का थक्का बनने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और चोट लगने पर अत्यधिक रक्तस्राव को रोकने में सहायता करते हैं।

Section 2 अति लघु उत्तरीय प्रश्न

अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 6. खाद्य-जाल से क्या समझते हैं?

उत्तर: किसी पारिस्थितिक तन्त्र में अनेक परस्पर जुड़ी खाद्य-श्रृंखलाओं के जाल को खाद्य-जाल कहते हैं। यह जीवों के विभिन्न भोजन सम्बन्धों को प्रदर्शित करता है।

प्रश्न 7. विद्युत के दो सुचालक और दो कुचालक पदार्थों के नाम लिखो।

उत्तर: विद्युत के दो सुचालक—ताँबा और एल्युमीनियम। दो कुचालक—रबर और प्लास्टिक।

प्रश्न 8. धातु गैल्वनीकरण प्रक्रिया क्या है?

उत्तर: लोहे अथवा इस्पात को जंग से बचाने के लिए उसकी सतह पर जस्ते (Zinc) की पतली परत चढ़ाने की प्रक्रिया को गैल्वनीकरण कहते हैं।

प्रश्न 9. सर्वदाता व सर्वग्राही रक्त वर्ग का नाम लिखो।

उत्तर: ABO रक्त समूह प्रणाली में O समूह सर्वदाता तथा AB समूह सर्वग्राही माना जाता है। Rh कारक को भी शामिल करने पर लाल रक्त कणिकाओं के लिए O− सर्वदाता और AB+ सर्वग्राही होता है।

प्रश्न 10. विद्युत ऋणात्मकता को परिभाषित कीजिए।

उत्तर: किसी सहसंयोजक बन्ध में स्थित परमाणु की साझे के इलेक्ट्रॉनों को अपनी ओर आकर्षित करने की प्रवृत्ति को विद्युत ऋणात्मकता कहते हैं।

प्रश्न 11. हेपेटाइटिस बी शरीर के किस अंग को प्रभावित करता है?

उत्तर: हेपेटाइटिस बी वायरस मुख्य रूप से यकृत (Liver) को प्रभावित करता है और उसमें सूजन तथा क्षति उत्पन्न कर सकता है।

Section 3 लघु उत्तरीय प्रश्न

लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 12. तत्वों की आवर्त सारणी के गुण व दोष क्या हैं?

उत्तर: आधुनिक आवर्त सारणी में तत्वों को बढ़ते हुए परमाणु क्रमांक के आधार पर व्यवस्थित किया गया है।

प्रमुख गुण—

  • तत्वों की स्थिति उनके परमाणु क्रमांक एवं इलेक्ट्रॉनिक विन्यास पर आधारित है।
  • समान बाह्य इलेक्ट्रॉनिक विन्यास वाले तत्व एक ही समूह में आते हैं, इसलिए उनके गुणों की तुलना सरल होती है।
  • समस्थानिकों को एक ही स्थान मिलता है, क्योंकि उनका परमाणु क्रमांक समान होता है।
  • मेण्डलीफ की सारणी में परमाणु द्रव्यमान के कारण उत्पन्न कई विसंगतियाँ दूर हो जाती हैं।

प्रमुख सीमाएँ—

  • हाइड्रोजन की स्थिति पूर्णतः संतोषजनक नहीं है, क्योंकि इसमें समूह 1 तथा समूह 17 दोनों के तत्वों से समानताएँ हैं।
  • लैन्थेनाइड तथा ऐक्टिनाइड तत्वों को मुख्य सारणी से अलग नीचे रखना पड़ता है।
  • हीलियम का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास s-ब्लॉक जैसा होने के बावजूद उसके निष्क्रिय गुणों के कारण उसे समूह 18 में रखा गया है।

प्रश्न 13. ओम के नियम को परिभाषित कीजिए तथा प्रतिरोध व विद्युत धारा में सम्बन्ध लिखिए।

उत्तर: नियत ताप एवं अन्य भौतिक परिस्थितियों में किसी चालक के सिरों के बीच विभवान्तर (V), उसमें प्रवाहित विद्युत धारा (I) के समानुपाती होता है। इसे ओम का नियम कहते हैं।

V ∝ I

V = IR

जहाँ V = विभवान्तर, I = विद्युत धारा तथा R = प्रतिरोध।

अतः,

I = V/R

नियत विभवान्तर पर विद्युत धारा प्रतिरोध के व्युत्क्रमानुपाती होती है, अर्थात् प्रतिरोध बढ़ने पर धारा घटती है।

प्रश्न 14. धारावाही परिनालिका से क्या अभिप्राय है? सचित्र वर्णन करो।

उत्तर: किसी विद्युतरोधी तार को बेलनाकार रूप में बहुत से पास-पास फेरों में लपेटकर बनाई गई लम्बी कुण्डली को परिनालिका (Solenoid) कहते हैं। जब इसमें विद्युत धारा प्रवाहित होती है तो इसके चारों ओर चुम्बकीय क्षेत्र उत्पन्न होता है।

धारावाही परिनालिका का चुम्बकीय क्षेत्र दण्ड चुम्बक के क्षेत्र के समान होता है। इसका एक सिरा उत्तर ध्रुव तथा दूसरा सिरा दक्षिण ध्रुव की तरह व्यवहार करता है। परिनालिका के भीतर चुम्बकीय क्षेत्र रेखाएँ लगभग समानान्तर होती हैं, जिससे भीतर का क्षेत्र लगभग एकसमान होता है।

दाहिने हाथ की उँगलियों को परिनालिका के फेरों में प्रवाहित धारा की दिशा में मोड़ने पर फैला हुआ अंगूठा परिनालिका के उत्तर ध्रुव तथा भीतर के चुम्बकीय क्षेत्र की दिशा बताता है।

धारावाही परिनालिका का नामांकित चित्र
धारावाही परिनालिका एवं उसके चुम्बकीय क्षेत्र का नामांकित चित्र

प्रश्न 15. जैविक घटक क्या होता है? इनके घटकों का संक्षिप्त वर्णन करो।

उत्तर: किसी पारिस्थितिक तन्त्र में उपस्थित सभी जीवित घटकों को जैविक घटक (Biotic Components) कहते हैं। इन्हें मुख्यतः तीन वर्गों में बाँटा जाता है—

  1. उत्पादक: हरे पौधे एवं शैवाल प्रकाश-संश्लेषण द्वारा अपना भोजन स्वयं बनाते हैं, इसलिए इन्हें उत्पादक या स्वपोषी कहते हैं।
  2. उपभोक्ता: वे जीव जो भोजन के लिए उत्पादकों या अन्य जीवों पर निर्भर रहते हैं। इनमें प्राथमिक, द्वितीयक तथा तृतीयक उपभोक्ता सम्मिलित हैं।
  3. अपघटक: जीवाणु एवं कवक जैसे जीव मृत पौधों और जन्तुओं के कार्बनिक पदार्थों का अपघटन करके पोषक तत्त्वों को पुनः पर्यावरण में लौटाते हैं।

प्रश्न 16. "एनीमिया" तथा "ल्यूकीमिया" रोग किस कारण होता है? इसके बचाव व उपचार क्या हैं?

उत्तर:

एनीमिया— ऐसी अवस्था जिसमें रक्त में हीमोग्लोबिन की मात्रा अथवा लाल रक्त कोशिकाओं की संख्या सामान्य से कम हो जाती है, एनीमिया कहलाती है। इससे शरीर के ऊतकों तक ऑक्सीजन पहुँचाने की क्षमता कम हो जाती है।

प्रमुख कारण—

  • आयरन की कमी।
  • विटामिन B12 या फोलेट की कमी।
  • अधिक रक्तस्राव।
  • कुछ संक्रमण, दीर्घकालिक रोग अथवा वंशानुगत रक्त रोग।

बचाव एवं उपचार— आयरन, फोलेट और विटामिन B12 युक्त संतुलित भोजन लेना उपयोगी है। उपचार एनीमिया के वास्तविक कारण पर निर्भर करता है; आवश्यकता होने पर चिकित्सकीय सलाह से आयरन, विटामिन अथवा अन्य उपचार दिया जाता है।

ल्यूकीमिया— ल्यूकीमिया रक्त बनाने वाली कोशिकाओं, विशेषकर अस्थि-मज्जा से सम्बन्धित कैंसर का समूह है, जिसमें असामान्य रक्त कोशिकाएँ अनियंत्रित रूप से बढ़ने लगती हैं।

कारण एवं जोखिम कारक— अधिकांश मामलों में निश्चित कारण ज्ञात नहीं होता। कुछ प्रकारों का जोखिम आनुवंशिक परिवर्तनों, अधिक आयनीकरण विकिरण, बेंजीन के सम्पर्क तथा पूर्व की कुछ कीमोथेरेपी आदि से बढ़ सकता है।

बचाव एवं उपचार— ल्यूकीमिया को पूर्णतः रोकने का निश्चित उपाय नहीं है। ज्ञात हानिकारक रसायनों एवं धूम्रपान से बचना जोखिम घटाने में सहायक हो सकता है। रोग के प्रकार के अनुसार उपचार में कीमोथेरेपी, लक्षित चिकित्सा, प्रतिरक्षा चिकित्सा तथा स्टेम-सेल प्रत्यारोपण आदि का प्रयोग किया जा सकता है।

प्रश्न 17. लोहे के अयस्क से पिग आयरन प्राप्त करने की प्रक्रिया का संक्षिप्त वर्णन करें।

उत्तर: पिग आयरन का निर्माण मुख्यतः वात्या भट्ठी (Blast Furnace) में किया जाता है। इसमें ऊपर से सान्द्रित लौह अयस्क, कोक तथा चूना पत्थर डाला जाता है और नीचे से गर्म वायु प्रवाहित की जाती है।

मुख्य क्रियाएँ—

कोक के जलने से कार्बन मोनोऑक्साइड बनती है, जो लौह ऑक्साइड का अपचयन करती है—

Fe2O3 + 3CO → 2Fe + 3CO2

चूना पत्थर गर्म होकर कैल्शियम ऑक्साइड बनाता है—

CaCO3 → CaO + CO2

यह सिलिका जैसी अशुद्धि से अभिक्रिया करके स्लैग बनाता है—

CaO + SiO2 → CaSiO3

पिघला हुआ लोहा भट्ठी के तल में एकत्र होकर कार्बन तथा कुछ अन्य अशुद्धियाँ ग्रहण कर लेता है। इस उच्च कार्बनयुक्त कच्चे लोहे को पिग आयरन कहते हैं। इसका मुख्य उपयोग ढलवाँ लोहा तथा इस्पात बनाने में किया जाता है।

प्रश्न 18. रक्त को कितने वर्ग में विभाजित किया गया है? समझाइए।

उत्तर: ABO रक्त समूह प्रणाली के अनुसार मानव रक्त को चार प्रमुख समूहों—A, B, AB तथा O में विभाजित किया जाता है। इसका वर्गीकरण लाल रक्त कोशिकाओं की सतह पर उपस्थित A और B प्रतिजनों (Antigens) के आधार पर किया जाता है। ABO रक्त समूहों की खोज कार्ल लैंडस्टीनर ने की थी।

रक्त समूह RBC पर प्रतिजन प्लाज्मा में प्रतिपिंड
A A प्रतिजन Anti-B
B B प्रतिजन Anti-A
AB A तथा B दोनों Anti-A तथा Anti-B दोनों अनुपस्थित
O A तथा B दोनों अनुपस्थित Anti-A तथा Anti-B दोनों

ABO प्रणाली के संदर्भ में O समूह को सर्वदाता तथा AB समूह को सर्वग्राही कहा जाता है। रक्त आधान में Rh कारक तथा उचित रक्त-मिलान (Cross-matching) का भी ध्यान रखा जाता है।

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