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PYQ 2023 • हिन्दी

हिन्दी Previous Year Paper 2023

UP DELED Semester 4 हिन्दी Previous Year Question Paper 2023 with solution.

Section 1 वस्तुनिष्ठ प्रश्न

वस्तुनिष्ठ प्रश्न

प्रश्न 1. य, र, ल, व व्यंजन होते हैं—

(a) ऊष्म व्यंजन

(b) स्पर्श व्यंजन

(c) अन्तःस्थ व्यंजन

(d) संयुक्त व्यंजन

उत्तर: (c) अन्तःस्थ व्यंजन

य, र, ल और व अन्तःस्थ व्यंजन कहलाते हैं। श, ष, स, ह ऊष्म व्यंजन तथा क से म तक के पाँचों वर्ग स्पर्श व्यंजन कहलाते हैं।

प्रश्न 2. शुद्ध वर्तनी युक्त शब्द है—

(a) उपरोक्त

(b) उपर्युक्त

(c) उपरियुक्त

(d) ऊपर उक्त

उत्तर: (b) उपर्युक्त (परीक्षा में अपेक्षित उत्तर)

‘उपर्युक्त’ शुद्ध शब्द है, जिसका अर्थ है— जिसका उल्लेख ऊपर किया गया हो। ध्यान रहे कि ‘उपरोक्त’ भी हिन्दी में मान्य शब्द है, इसलिए दिए गए विकल्पों के कारण यह प्रश्न पूर्णतः निर्विवाद नहीं है।

प्रश्न 3. 'साकेत' महाकाव्य के लेखक हैं—

(a) जयशंकर प्रसाद

(b) विष्णु प्रभाकर

(c) मैथिलीशरण गुप्त

(d) रामधारी सिंह दिनकर

उत्तर: (c) मैथिलीशरण गुप्त

‘साकेत’ मैथिलीशरण गुप्त द्वारा रचित प्रसिद्ध महाकाव्य है। यह रामकथा पर आधारित है और इसमें उर्मिला के चरित्र को विशेष महत्त्व दिया गया है।

प्रश्न 4. पं. सोहनलाल द्विवेदी की रचना नहीं है—

(a) दूध बताशा

(b) शिशु-भारती

(c) पल्लव

(d) झरना

उत्तर: (c) पल्लव

‘दूध बताशा’, ‘शिशु-भारती’ और ‘झरना’ सोहनलाल द्विवेदी की बाल-साहित्य कृतियों में शामिल हैं, जबकि ‘पल्लव’ सुमित्रानंदन पंत का प्रसिद्ध काव्य-संग्रह है।

प्रश्न 5. वाक्य का गुण नहीं है—

(a) सार्थकता

(b) योग्यता

(c) उद्देश्य

(d) क्रमबद्धता

उत्तर: (c) उद्देश्य

‘उद्देश्य’ वाक्य का एक अंग है, गुण नहीं। वाक्य के निर्माण में सार्थकता, योग्यता, आकांक्षा, आसक्ति और उचित पदक्रम आदि का महत्त्व होता है।

Section 2 अति लघु उत्तरीय प्रश्न

अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 6. शुद्ध उच्चारण के प्रमुख तत्व क्या हैं?

उत्तर: शुद्ध उच्चारण के प्रमुख तत्व हैं— वर्णों का सही उच्चारण, उचित उच्चारण-स्थान, मात्रा, बलाघात, अनुतान, लय, गति तथा उचित विराम।

प्रश्न 7. पठन (वाचन) के प्रकार बताइए।

उत्तर: पठन या वाचन के दो प्रमुख प्रकार हैं— सस्वर वाचन और मौन वाचन।

प्रश्न 8. समाचार-पत्रों में विभिन्न स्तम्भ कौन-कौन से होते हैं?

उत्तर: समाचार-पत्रों में राष्ट्रीय-अन्तरराष्ट्रीय समाचार, स्थानीय समाचार, सम्पादकीय, खेल, व्यापार, शिक्षा, रोजगार, मनोरंजन तथा पाठकों के पत्र आदि प्रमुख स्तम्भ होते हैं।

प्रश्न 9. महादेवी वर्मा की प्रमुख रचनाएँ लिखिए।

उत्तर: महादेवी वर्मा की प्रमुख रचनाएँ हैं— नीहार, रश्मि, नीरजा, सांध्यगीत, दीपशिखा, यामा, अतीत के चलचित्र, स्मृति की रेखाएँ और श्रृंखला की कड़ियाँ।

प्रश्न 10. 'बीजक' काव्य-संग्रह के कितने भाग हैं? नाम लिखिए।

उत्तर: कबीर की वाणी के प्रसिद्ध संग्रह ‘बीजक’ के तीन प्रमुख भाग हैं— रमैनी, सबद और साखी।

प्रश्न 11. 'हितं मनोहारि च दुर्लभं वचः' सूक्ति का अर्थ स्पष्ट कीजिए।

उत्तर: इसका अर्थ है— ऐसा वचन जो हितकारी भी हो और मन को प्रिय भी लगे, दुर्लभ होता है।

Section 3 लघु उत्तरीय प्रश्न

लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 12. जीवनी तथा आत्मकथा में अन्तर स्पष्ट कीजिए।

उत्तर:

जीवनी आत्मकथा
जीवनी में लेखक किसी अन्य व्यक्ति के जीवन का वर्णन करता है। आत्मकथा में लेखक स्वयं अपने जीवन का वर्णन करता है।
लेखक और वर्णित व्यक्ति अलग-अलग होते हैं। लेखक और वर्णित व्यक्ति एक ही होता है।
यह दस्तावेजों, साक्ष्यों, घटनाओं और अन्य स्रोतों पर आधारित होती है। यह मुख्यतः लेखक के स्वयं के अनुभवों और स्मृतियों पर आधारित होती है।
वर्णन सामान्यतः तृतीय पुरुष में किया जाता है। वर्णन सामान्यतः प्रथम पुरुष में किया जाता है।

प्रश्न 13. छात्रों के लिए समाचार-पत्र पठन क्यों आवश्यक है?

उत्तर: विद्यार्थियों के लिए समाचार-पत्र का नियमित पठन अनेक दृष्टियों से उपयोगी है—

  1. देश-विदेश की समसामयिक घटनाओं की जानकारी मिलती है।
  2. सामान्य ज्ञान और सामाजिक जागरूकता में वृद्धि होती है।
  3. शब्द-भण्डार और भाषा-अभिव्यक्ति का विकास होता है।
  4. पठन, समझने और विचार करने की क्षमता बढ़ती है।
  5. विज्ञान, खेल, शिक्षा, अर्थव्यवस्था और समाज से सम्बन्धित नई जानकारियाँ प्राप्त होती हैं।
  6. विद्यार्थियों में समाचारों और तथ्यों का विवेकपूर्ण विश्लेषण करने की आदत विकसित होती है।

प्रश्न 14. अनुस्वार एवं विसर्ग को सोदाहरण स्पष्ट कीजिए।

उत्तर:

अनुस्वार (ं): वर्ण के ऊपर लगाया जाने वाला बिन्दु ‘ं’ अनुस्वार कहलाता है। इसका उच्चारण प्रायः नासिक्य ध्वनि के रूप में होता है। वर्गीय व्यंजन के पहले इसका उच्चारण उस वर्ग के पंचम वर्ण के अनुरूप होता है।

उदाहरण: अंक, गंगा, संबंध, वंश।

विसर्ग (ः): स्वर के बाद प्रयुक्त ‘ः’ चिह्न विसर्ग कहलाता है। इसके उच्चारण में स्वर के बाद हल्की श्वास-ध्वनि निकलती है।

उदाहरण: नमः, अतः, प्रायः, दुःख।

प्रश्न 15. नाटक तथा संवाद शिक्षण की प्रमुख विधियाँ लिखिए।

उत्तर: नाटक और संवाद के शिक्षण में विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी तथा मौखिक अभिव्यक्ति पर विशेष बल दिया जाता है।

नाटक शिक्षण की प्रमुख विधियाँ:

  1. आदर्श नाट्य-वाचन विधि: शिक्षक भाव, स्वर और भंगिमा के साथ संवादों का आदर्श वाचन करता है।
  2. कक्षाभिनय विधि: विद्यार्थी कक्षा में पात्रों की भूमिका निभाकर संवाद बोलते हैं।
  3. रंगमंच अभिनय विधि: नाटक का वेशभूषा, मंच-सज्जा आदि के साथ विधिवत मंचन किया जाता है।
  4. व्याख्या अथवा समीक्षा विधि: कथानक, पात्र, संवाद, भाषा-शैली, उद्देश्य तथा नाटकीय विशेषताओं की चर्चा की जाती है।

संवाद शिक्षण की प्रमुख विधियाँ:

  1. आदर्श वाचन।
  2. अनुकरण वाचन।
  3. भूमिका-अभिनय।
  4. प्रश्नोत्तर एवं वार्तालाप।

प्रश्न 16. मुंशी प्रेमचन्द का संक्षिप्त जीवन-परिचय लिखिए।

उत्तर: मुंशी प्रेमचन्द हिन्दी और उर्दू के प्रसिद्ध कथाकार एवं उपन्यासकार थे। उनका जन्म 31 जुलाई 1880 को वाराणसी के निकट लमही गाँव में हुआ था। उनका मूल नाम धनपत राय था और प्रारम्भ में वे उर्दू में ‘नवाब राय’ नाम से लिखते थे। बाद में वे ‘प्रेमचन्द’ नाम से प्रसिद्ध हुए।

प्रेमचन्द ने अपने साहित्य में किसान, मजदूर, स्त्री, गरीबी, शोषण, सामाजिक विषमता और ग्रामीण जीवन का यथार्थ चित्रण किया। उनकी भाषा सरल, प्रभावपूर्ण और जनजीवन के निकट है।

प्रमुख उपन्यास: सेवासदन, प्रेमाश्रम, रंगभूमि, निर्मला, गबन, कर्मभूमि और गोदान।

प्रमुख कहानियाँ: पंच परमेश्वर, ईदगाह, पूस की रात, कफन, बूढ़ी काकी, बड़े घर की बेटी और दो बैलों की कथा।

प्रेमचन्द का निधन 8 अक्टूबर 1936 को हुआ।

प्रश्न 17. एक कंठस्थ नीतिश्लोक लिखकर अर्थ स्पष्ट कीजिए।

उत्तर:

रूपयौवनसम्पन्नाः विशालकुलसम्भवाः।
विद्याहीना न शोभन्ते निर्गन्धा इव किंशुकाः॥

अर्थ: रूप, यौवन और श्रेष्ठ कुल से सम्पन्न व्यक्ति भी विद्या के बिना शोभा नहीं पाता, जैसे सुगन्ध से रहित पलाश का फूल सुन्दर होते हुए भी पूर्ण शोभा नहीं देता।

प्रश्न 18. हिन्दी में कारक कितने होते हैं? कारकों के प्रकार लिखिए।

उत्तर: हिन्दी व्याकरण में परम्परागत रूप से आठ कारक माने जाते हैं। ये संज्ञा या सर्वनाम का वाक्य के अन्य पदों से सम्बन्ध प्रकट करते हैं।

कारक प्रमुख विभक्ति-चिह्न / परसर्ग
कर्ता ने / शून्य
कर्म को / शून्य
करण से, के द्वारा
सम्प्रदान को, के लिए
अपादान से
सम्बन्ध का, के, की
अधिकरण में, पर
सम्बोधन हे!, अरे!, ओ!
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