वस्तुनिष्ठ प्रश्न
प्रश्न 1. संस्कृत भाषा में स्वरों को उच्चारित करने में जो समय लगता है, उसके आधार पर स्वरों के कितने भेद होते हैं?
(a) दो
(b) तीन
(c) चार
(d) पाँच
उत्तर: (b) : उच्चारण-काल के आधार पर स्वर तीन प्रकार के होते हैं—ह्रस्व, दीर्घ और प्लुत।
प्रश्न 2. 'ह' वर्ण का उच्चारण-स्थान है—
(a) कण्ठ
(b) दन्त
(c) मूर्धा
(d) ओष्ठ
उत्तर: (a) : 'ह' वर्ण का उच्चारण-स्थान कण्ठ है। सूत्र—अकुहविसर्जनीयानां कण्ठः।
प्रश्न 3. 'बालक' का चतुर्थी विभक्ति, एकवचन का रूप होगा—
(a) बालकेन
(b) बालकौ
(c) बालकाय
(d) बालकस्य
उत्तर: (c) : 'बालक' शब्द का चतुर्थी विभक्ति, एकवचन रूप बालकाय होता है।
प्रश्न 4. 'महैश्वर्यम्' में सन्धि है—
(a) दीर्घ सन्धि
(b) वृद्धि सन्धि
(c) गुण सन्धि
(d) अयादि सन्धि
उत्तर: (b) : 'महैश्वर्यम्' में वृद्धि सन्धि है। सन्धि-विच्छेद—महा + ऐश्वर्यम् = महैश्वर्यम्।
प्रश्न 5. 'दृश्' धातु का लट् लकार, उत्तम पुरुष के द्विवचन का रूप होगा—
(a) पश्यति
(b) पश्यथः
(c) पश्यतः
(d) पश्यावः
उत्तर: (d) : 'दृश्' धातु के लट् लकार, उत्तम पुरुष, द्विवचन का रूप पश्यावः होता है।
अति लघु उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 6. गुण सन्धि का सूत्र लिखिए।
उत्तर: गुण सन्धि का सूत्र है—आद्गुणः।
प्रश्न 7. 'पितरौ' में कौन-सा समास है? समास-विग्रह भी कीजिए।
उत्तर: 'पितरौ' में एकशेष द्वन्द्व समास है। विग्रह—माता च पिता च = पितरौ।
प्रश्न 8. उपसर्ग किसे कहते हैं?
उत्तर: जो अव्यय धातु के पूर्व जुड़कर उसके अर्थ में परिवर्तन या विशेषता उत्पन्न करते हैं, उन्हें उपसर्ग कहते हैं।
प्रश्न 9. 'पिबन्' एवं 'गच्छन्' में कौन-सा प्रत्यय है तथा इसका प्रयोग किस लकार के स्थान पर होता है?
उत्तर: 'पिबन्' एवं 'गच्छन्' में शतृ प्रत्यय है। इसका प्रयोग लट् लकार के स्थान पर वर्तमानकालिक अर्थ में होता है।
प्रश्न 10. उन्नीस, तीस एवं पचास संख्याओं को संस्कृत में लिखिए।
उत्तर: 19—एकोनविंशतिः, 30—त्रिंशत्, 50—पञ्चाशत्।
प्रश्न 11. 'देवदत्तः ग्रामं गच्छति' वाक्य को कर्मवाच्य में परिवर्तित कीजिए।
उत्तर: कर्मवाच्य रूप है—देवदत्तेन ग्रामः गम्यते।
लघु उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 12. संस्कृत भाषा में कारक कितने होते हैं? सभी के नाम भी लिखिए।
उत्तर: संस्कृत में छः कारक माने जाते हैं—
- कर्ता कारक — प्रथमा विभक्ति
- कर्म कारक — द्वितीया विभक्ति
- करण कारक — तृतीया विभक्ति
- सम्प्रदान कारक — चतुर्थी विभक्ति
- अपादान कारक — पञ्चमी विभक्ति
- अधिकरण कारक — सप्तमी विभक्ति
सम्बन्ध तथा सम्बोधन को कारक नहीं माना जाता, क्योंकि उनका क्रिया के साथ प्रत्यक्ष सम्बन्ध नहीं होता।
प्रश्न 13. संस्कृत भाषा में सुन्दर लेखन विकास के उपाय तथा विधियाँ लिखिए।
उत्तर: संस्कृत में सुन्दर, शुद्ध एवं स्पष्ट लेखन के विकास के लिए निम्नलिखित उपाय उपयोगी हैं—
- वर्णों की शुद्ध आकृति का अभ्यास— प्रत्येक देवनागरी वर्ण, मात्रा और संयुक्ताक्षर को सही आकार में लिखने का नियमित अभ्यास कराया जाए।
- प्रतिलेख— आदर्श लेख को देखकर उसी के अनुरूप शुद्ध एवं सुन्दर लिखने का अभ्यास कराया जाए।
- श्रुतलेख— सुनकर लिखने के अभ्यास से वर्तनी, मात्रा तथा शब्द-लेखन की अशुद्धियाँ दूर होती हैं।
- अक्षर एवं शब्दों में उचित दूरी— अक्षरों का आकार समान तथा शब्दों और पंक्तियों के बीच उचित दूरी रखी जाए।
- नियमित सुलेख-अभ्यास— प्रतिदिन निश्चित मात्रा में स्वच्छ एवं सुन्दर लेखन कराया जाए।
- त्रुटि-सुधार— शिक्षक अशुद्ध वर्ण, मात्रा, वर्तनी एवं अक्षर-विन्यास की त्रुटियों को चिन्हित कर सुधार कराए।
प्रश्न 14. श्रुतलेख किसे कहते हैं? इसका प्रमुख उद्देश्य क्या है?
उत्तर: शिक्षक द्वारा बोले गए शब्दों, वाक्यों अथवा अनुच्छेद को ध्यानपूर्वक सुनकर लिखने की क्रिया को श्रुतलेख कहते हैं। इसके प्रमुख उद्देश्य हैं—
- शुद्ध वर्तनी एवं मात्रा-ज्ञान का विकास करना।
- श्रवण एवं एकाग्रता-शक्ति का विकास करना।
- लेखन की शुद्धता और गति बढ़ाना।
- विद्यार्थियों की लेखन सम्बन्धी त्रुटियों की पहचान एवं सुधार करना।
प्रश्न 15. अधोलिखित वाक्यों का संस्कृत भाषा में अनुवाद कीजिए—
(1) मोहन सोहन के साथ गाँव जाता है।
(2) तुम पुस्तक पढ़ते हो।
(3) गणेश को नमस्कार है।
(4) गाँव के चारों ओर वृक्ष हैं।
उत्तर:
- मोहनः सोहनेन सह ग्रामं गच्छति।
- त्वं पुस्तकं पठसि।
- गणेशाय नमः।
- ग्रामं परितः वृक्षाः सन्ति।
प्रश्न 16. संस्कृत शिक्षण में प्रयुक्त सहायक-सामग्रियों के नाम लिखिए।
उत्तर: संस्कृत शिक्षण को सरल, स्पष्ट एवं रुचिकर बनाने के लिए विभिन्न सहायक-सामग्रियों का प्रयोग किया जाता है—
- श्यामपट्ट एवं श्वेतपट्ट
- चित्र एवं छायाचित्र
- चार्ट एवं फ्लैश कार्ड
- मानचित्र एवं मॉडल
- रेडियो एवं ऑडियो रिकॉर्डिंग
- प्रोजेक्टर एवं वीडियो
- कम्प्यूटर एवं स्मार्ट बोर्ड
- पाठ्यपुस्तक एवं अन्य मुद्रित सामग्री
इन सामग्रियों से उच्चारण, शब्दार्थ, व्याकरण, पाठ-बोध तथा विद्यार्थियों की रुचि और सहभागिता में वृद्धि होती है।
प्रश्न 17. एक कंठस्थ वन्दना-श्लोक लिखिए।
उत्तर:
सरस्वति नमस्तुभ्यं वरदे कामरूपिणि।
विद्यारम्भं करिष्यामि सिद्धिर्भवतु मे सदा।।
प्रश्न 18. अधोलिखित श्लोक का हिन्दी में अर्थ लिखिए—
पृथिव्यां त्रीणि रत्नानि जलमन्नं सुभाषितम्।
मूढैः पाषाणखण्डेषु रत्नसंज्ञा विधीयते।।
उत्तर: पृथ्वी पर तीन वास्तविक रत्न हैं—जल, अन्न और सुभाषित अर्थात् अच्छे वचन। किन्तु मूर्ख लोग पत्थर के टुकड़ों को रत्न की संज्ञा देते हैं। श्लोक में जीवनोपयोगी वस्तुओं और मधुर वचनों को वास्तविक रत्न बताया गया है।
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