वस्तुनिष्ठ प्रश्न
प्रश्न 1. विसर्ग का उच्चारण स्थान बताइए-
(a) कण्ठ
(b) तालु
(c) दन्त
(d) ओष्ठ
उत्तर: (a) : विसर्ग का उच्चारण स्थान कण्ठ है। सूत्र अकुहविसर्जनीयानां कण्ठः अर्थात अ, आ, कवर्ग (क, ख, ग, घ, ङ) और विसर्ग (:) का उच्चारण स्थान कण्ठ है।
प्रश्न 2. 'एकोनचत्वारिंशत' शब्द का अर्थ है-
(a) सैंतालिस
(b) उनतालिस
(c) उनतीस
(d) उनचास
उत्तर: (b) : 'एकोनचत्वारिंशत' शब्द का अर्थ उनतालिस (39) है। एकोन का अर्थ है- पीछे वाली संक्ष्या में एक कम।
प्रश्न 3. 'चोरभयम्' में समास है-
(a) तत्पुरुष समास
(b) द्वन्द्व समास
(c) अव्ययीभाव समास
(d) द्विगु समास
उत्तर: (a) : पञ्चमी तत्पुरुष समास जिस 'तत्पुरुष समास' का पूर्वपद पञ्चमी विभक्ति में हो, ऐसे पञ्चम्यन्त पदों का भय आदि शब्दों के साथ पञ्चमी तत्पुरुष समास होता है। सूत्र- पञ्चमी भयेन।
उदाहरण-
चोरात् भयम्-चोरभयम् (चोर से डरा हुआ)
सिंहात् भीतः सिंह भीतः (सिंह से भय)
प्रश्न 4. भयार्थक तथा रक्षार्थक धातुओं के साथ विभक्ति का प्रयोग होता है-
(a) चतुर्थी विभक्ति
(b) षष्ठी विभक्ति
(c) पञ्चमी विभक्ति
(d) द्वितीया विभक्ति
उत्तर: (c) : भयार्थक तथा रक्षार्थक धातुओं के साथ पञ्चमी विभक्ति का प्रयोग होता है। सूत्र- भीत्रार्थानां भयहेतुः अर्थात् भय (डर) और प्राण (रक्षा) अर्थ वाली धातुओं के योग में अपादान संज्ञा होती है। अपादान संज्ञा में पञ्चमी विभक्ति होती है।
प्रश्न 5. 'अहं बालक पश्यामि' वाक्य का कर्मवाच्य में परिवर्तन होगा-
(a) मया बालकः दृश्यते
(b) मया बालक दृश्यते
(c) मया बालक दृश्यति
(d) मया बालकः दृश्यति
उत्तर: (a) : अहं बालकः पश्यामि (मैं बालक को देखता हूँ।) यह कर्तृवाच्य वाक्य है। जहाँ क्रिया कर्ता के अनुसार होती है और कर्म में द्वितीया विभक्ति होती है। तो इस वाक्य को कर्मवाच्य में परिवर्तित करने पर वाक्य बनेगा-मया बालकः दृश्यते।
अतिलघु उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 6. वर्गों के पञ्चम् वर्ण माहेश्वर सूत्रों के किस क्रमांक के अन्तर्गत आते हैं?
उत्तर: वर्गों के पञ्चम् वर्ण माहेश्वर सूत्रों के सातवें क्रमांक के अन्तर्गत आते है। जो इस प्रकार है ञमङणनम्
प्रश्न 7. पितृ शब्द रूप पञ्चमी विभक्ति के तीनों वचनों में लिखिए।
उत्तर: 'पितृ' शब्द रूप
| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथमा | पिता | पितरौ | पितरः |
| द्वितीया | पितरम् | पितरौ | पितृन् |
| तृतीया | पित्रा | पितृभ्याम् | पितृभिः |
| चतुर्थी | पित्रे | पितृभ्याम् | पितृभ्यः |
| पञ्चमी | पितुः | पितृभ्याम् | पितृभ्यः |
| षष्ठी | पितुः | पित्रोः | पितृणाम् |
| सप्तमी | पितरि | पित्रोः | पितृषु |
| सम्बोधन | हे पितः ! | हे पितरौ ! | हे पितरः ! |
(नोट: प्रश्न में केवल पञ्चमी विभक्ति पूछी गई थी, जो पितुः, पितृभ्याम्, पितृभ्यः है।)
प्रश्न 8. 'झलां जशोऽन्ते' किस सन्धि का सूत्र है, उसकी परिभाषा उदाहरण सहित लिखिए।
उत्तर: जश्त्व संधि- सूत्र झलां जशोऽन्ते अर्थात पदान्त झल् के स्थान पर जश् आदेश होता है। यदि वर्ग के प्रथम, द्वितीय, तृतीय और चतुर्थ वर्ण के बाद यदि कोई स्वर या अपने ही वर्ग का तृतीय या चतुर्थ वर्ण आये तो उसके स्थान पर अपने ही वर्ग के तृतीय वर्ण में (ज, ब, ग, ड और द) बदल जाता है अर्थात् उसके स्थान पर उसी वर्ग का तृतीय वर्ण हो जाता है।
उदाहरण-
अच् + अन्तः = अजन्तः
वाक् + ईशः = वागीशः
प्रश्न 9. अस् धातु लङ् लकार का रूप उत्तम पुरुष के तीनों वचनों में लिखिए।
उत्तर: 'अस्' धातु लङ् लकार
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम पुरुष | आसीत् | आस्ताम् | आसन् |
| मध्यम पुरुष | आसीः | आस्तम् | आस्त |
| उत्तम पुरुष | आसम् | आस्व | आस्म |
प्रश्न 10. 'अभि' उपसर्ग लगाकर कोई चार शब्द बनाइये।
उत्तर: 'अभि' का अर्थ सामने, ओर, ऊपर, पास और तरफ।
- अभि + आगतः = अभ्यागतः
- अभि + मुखम् = अभिमुखम्
- अभि + मानः = अभिमानः
- अभि + ज्ञानम् = अभिज्ञानम्
प्रश्न 11. 'पश्यन्' शब्द में धातु एवं प्रत्यय लिखिए।
उत्तर: 'पश्यन्' शब्द में दृश (देखना) धातु एवं शतृ प्रत्यय लगा हुआ है।
लघु उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 12. द्वन्द्व समास किसे कहते हैं? इसके कितने भेद होते हैं?
उत्तर: द्वन्द्व समास "उभय पदार्थ प्रधानः द्वन्द्वः" अर्थात् जिस समास में दोनों पद प्रधान होते है, उसे द्वन्द्व समास कहते हैं।
उदाहरण- रामश्च कृष्णश्च = रामकृष्णौ
द्वन्द्व समास के भेद - द्वन्द्व समास के मुख्यतः दो ही भेद है परन्तु एकशेष को शामिल करके कुल तीन भेद हो जाते हैं।
- इतरेतर द्वन्द्व- जब समास में उपयुक्त होने वाले शब्द के अर्थ अपनी-अपनी प्रधानता अलग-अलग प्रदर्शित करते है; उसे इतरेतर द्वन्द्व कहते है। जैसे- रामश्च लक्ष्मणश्च = रामलक्ष्मणौ
- समाहार द्वन्द्व- जिस द्वन्द्व समास में आये हुए पद अपना अर्थ बतलाने के साथ-साथ समूह या समाहार अर्थ का भी बोध कराते हैं, उसे समाहार द्वन्द्व कहते हैं। यह हमेशा नपुंसकलिंङ्ग में होता है। जैसे- पाणीपादम् = पाणी च पादौ च तेषां समाहारः (हाथ और पैर का समूह)
- एकशेष द्वन्द्व- जिस द्वन्द्व समास में दो या दो से अधिक पदों में से केवल एक पद शेष रहता है, उसे एकशेष द्वन्द्व कहते है। जैसे- माता च पिता च = पितरौ, दुहिता च दुहिता च = दुहितरौ।
प्रश्न 13. निम्नलिखित श्लोक का अर्थ बताइये-
साहित्यसंगीतकलाविहीनः साक्षात्पशुः पुच्छविषाणहीनः।
तृणं न खादन्नपि जीवमानः तद्भागधेयं परमं पशूनाम्।।
उत्तर: अर्थ - जो व्यक्ति साहित्य, संगीत और कला से रहित है, वह पूँछ और सींगों के बिना साक्षात् पशु के सामान है। ऐसा व्यक्ति चारा न खाते हुए भी इस पृथ्वी पर जीवन धारण करता है, यह पशुओं के लिए परम सौभाग्य की बात है।
प्रश्न 14. संस्कृत भाषा पर संस्कृत में चार वाक्य बनाइये।
उत्तर: संस्कृत भाषा-
- संस्कृत भाषा अस्माकं देशस्य प्राचीनतम भाषा अस्ति।
- भारतीयैकता साधकं संस्कृतम्।
- सर्वे प्राचीनग्रन्थाः चत्वारों वेदाश्च संस्कृत भाषायामेव सन्ति।
- भारतीयत्व सम्पादकं संस्कृतम्।
प्रश्न 15. संस्कृत शिक्षण को प्रभावी बनाने के लिए किन किन श्रव्य दृश्य साधनों का उपयोग किया जा सकता हैं?
उत्तर: संस्कृत शिक्षण को प्रभावी बनाने के लिए निम्नलिखित श्रव्य-दृश्य साधनों का उपयोग किया जाता है-
- चित्र और फोटो - प्राचीन भारत, संस्कृत, साहित्य और संस्कृति से संबंधित चित्र और फोटो छात्रों को भाषा और संस्कृति से जोड़ने में मदद करते हैं।
- श्यामपट्ट (Black Board) - श्यामपट्ट शिक्षक का अभिन्न मित्र है। सामान्य आर्थिक स्थिति वाला शिक्षक भी इसका उपयोग करता है।
- लपेट श्यामपट्ट (Roller Black Board) - इसका उपयोग चित्र उद्वरण एवं परिभाषाओं हेतु किया जा सकता है। इससे कक्षा में अतिरिक्त श्रम एवं समय की बचत होती है।
- चार्ट - किसी काव्य की प्रस्तावना एवं व्याकरणिक नियमों को स्पष्ट करने हेतु स्वनिर्मित चार्ट बहुत उपयोगी एवं प्रभावकारी हैं।
- एनिमेशन - संस्कृत व्याकरण और शब्दावली को समझने के लिए एनिमेशन एक आकर्षक माध्यम है।
प्रश्न 16. कर्तृवाच्य को कर्मवाच्य में परिवर्तित करने का क्या नियम हैं, उदाहरण सहित बताइए।
उत्तर: कर्तृवाच्य का कर्मवाच्य में प्रयोग-
- कर्तृवाच्य के कर्ता के साथ यदि कोई विभक्ति लगी हो, तो उसे हटाकर 'के' अथवा 'के द्वारा' परसर्ग का प्रयोग किया जाता है। कर्म के साथ कोई परसर्ग हो तो उसे हटा दिया जाता है।
- कर्तृवाच्य की मुख्य क्रिया को सामान्य भूतकाल में परिवर्तित किया जाता है।
- परिवर्तित क्रिया के साथ 'जाना', क्रिया का काल, पुरूष, वचन और लिंग के अनुसार जो रूप हो, उसे जोड़कर साधारण क्रिया को संयुक्त क्रिया में बदला जाता है।
उदाहरण-
- कर्तृवाच्य : अहं शिक्षा लभे -> कर्मवाच्य : मया शिक्षा लभ्यते
- कर्तृवाच्य : सः पुस्तकं पठति -> कर्मवाच्य : तेन पुस्तकं पठ्यते
प्रश्न 17. षष्ठी विभक्ति कारक विभक्ति क्यों नहीं मानी जाती। उदाहरण सहित समझाइये।
उत्तर: षष्ठी विभक्ति को कारक नहीं कहा जाता है क्योंकि उसका क्रिया से कोई संबंध नहीं होता अपितु उसका संबंध कर्ता, कर्म आदि कारकों से होता है। अतः क्रियान्वयित्व कारकत्वम् यह लक्षण उसमें घटित नहीं होता है।
उदाहरण- दशरथस्य पुत्रः रामः वनं गच्छति।
यहाँ 'दशरथस्य' का 'गच्छति' क्रिया के साथ कोई साक्षात् संबंध नहीं है। अतः इसे कारक नहीं कहते है। संबंध में षष्ठी विभक्ति होती है।
प्रश्न 18. निम्नलिखित वाक्यों का संस्कृत में अनुवाद कीजिए।
(a) वह पढ़ने के लिये प्रयाग में रहता हैं।
(b) विद्यालय के चारों ओर आम के वृक्ष हैं。
(c) भगवान वासुदेव को नमस्कार हैं。
(d) वाराणसी गंगा के तट पर स्थित हैं।
उत्तर:
- (a) सः पठनाय प्रयागे निवसति।
- (b) विद्यालयं परितः आम्रवृक्षाः सन्ति।
- (c) भगवते वासुदेवाय नमः।
- (d) वाराणसी गङ्गाया तटे विराजमाना अस्ति।