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PYQ 2022 • संस्कृत

संस्कृत Previous Year Paper 2022

UP DELED Semester 3 संस्कृत Previous Year Question Paper 2022 with solution.

Section 1 वस्तुनिष्ठ प्रश्न

वस्तुनिष्ठ प्रश्न

प्रश्न 1. संस्कृत में माहेश्वर सूत्रों की संख्या है-

(a) 8

(b) 12

(c) 10

(d) 14

उत्तर: (d): माहेश्वर सूत्र महर्षि पाणिनि ने संस्कृत व्याकरण बनाने की इच्छा से घोर तप करके भगवान शिव को प्रसन्न किया। प्रसन्न होकर शिव ने नृत्य के साथ जो डमरू वादन किया, उससे माहेश्वर सूत्रों की उत्पत्ति हुई। माहेश्वर सूत्रों की संख्या 14 है।

प्रश्न 2. 'ट' का उच्चारण स्थान है -

(a) कण्ठ

(b) तालु

(c) मूर्धा

(d) ओष्ठ

उत्तर: (c): 'ट्' वर्ण का उच्चारण स्थान मूर्धा है। ऋटुरषाणां मूर्धा (सूत्र) के अन्तर्गत ऋ, ऋ, टु वर्ग (ट, ठ, ड, ढ, ण) और ष् वर्ण आते हैं।

प्रश्न 3. कौन-सा शब्द नपुंसकलिंग है?

(a) बालक

(b) नदी

(c) एतत्

(d) विद्यालय

उत्तर: (c): 'एतत्' शब्द नपुंसकलिंग है। अतः बालक और विद्यालय पुल्लिंग शब्द है तथा नदी स्रीलिंग शब्द के अन्तर्गत आते हैं।

प्रश्न 4. 'रमेशः' में कौन-सी सन्धि है?

(a) दीर्घ सन्धि

(b) गुण सन्धि

(c) वृद्धि सन्धि

(d) यण सन्धि

उत्तर: (b): गुण संधि- जब अ या आ के बाद इ या ई आये तो 'ए', अ या आ के बाद उ या ऊ आये तो 'ओ' तथा ऋ आए तो 'अर' बनता है।
उदाहरण- उप + इन्द्रः = उपेन्द्रः
हित + उपदेशः = हितोपदेश
देव + ऋर्षिः = देवर्षिः
रमा + ईशः = रमेशः

प्रश्न 5. राजपुरुष में समान है-

(a) तत्पुरुष समास

(b) कर्मधारय समास

(c) अव्ययीभाव समास (विकल्प पीडीएफ में नहीं है, लेकिन सामान्यतः होता है)

(d) बहुब्रीहि समास

उत्तर: (a): तत्पुरुष समास 'प्रायेण उत्तरपदार्थप्रधानः तत्पुरुषः' अर्थात् जिस समास में उत्तरपद का अर्थ प्रधान होता है, उसे समास कहते हैं।
उदाहरण:
रामाश्रित = रामम आश्रितः
अनर्थ = न अर्थः
राजपुत्रः = राज्ञः पुत्रः
राजपुरुषः = राज्ञः पुरुषः

Section 2 अति लघु उत्तरीय प्रश्न

अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 6. 'दीर्घ सन्धि' के सूत्र लिखकर स्पष्ट कीजिए।

उत्तर: दीर्घ संधि- अकः सवर्णे दीर्घः (सूत्र) अर्थात् समान वर्णों के योग से शब्दों में जो परिवर्तन होता है, उसे दीर्घ संधि कहते हैं।
उदाहरण: परमार्थः, विद्यालयः तथा देवालयः आदि।

प्रश्न 7. 'नदी' शब्द के प्रथमा विभक्ति के तीनों वचनों के रूप लिखिए।

उत्तर: नदी का शब्दरूप-

विभक्ति एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथमा नदी नद्यौ नद्यः
द्वितीया नदीम् नद्यौ नदीः
तृतीया नद्या नदीभ्याम् नदीभिः
चतुर्थी नद्यै नदीभ्याम् नदीभ्यः
पञ्चमी नद्याः नदीभ्याम् नदीभ्यः
षष्ठी नद्याः नद्योः नदीनाम्
सप्तमी नद्याम् नद्योः नदीषु
सम्बोधन हे नदि ! हे नद्यौ ! हे नद्यः !

(नोट: प्रश्न में केवल प्रथमा विभक्ति पूछी गई है, जो नदी, नद्यौ, नद्यः है।)

प्रश्न 8. 'उन्नीस' संख्या को संस्कृत में लिखिए।

उत्तर: 'उन्नीस' को संस्कृत में नवदश या एकोनविंशति लिखते हैं।

प्रश्न 9. 'नमः' के योग में कौन-सी विभक्ति लगती है?

उत्तर: 'नमः' 'स्वस्तिस्वाहास्वधाऽलंवषट्योगाच्च' सूत्र के योग में चतुर्थी विभक्ति लगती है अर्थात् नमः, स्वस्ति, स्वाहा, स्वधा, अलम्, वषट् शब्दों के योग में चतुर्थी विभक्ति होती है।
उदाहरण- गणेशाय नमः। (गणेश को नमस्कार)
तुभ्यम् स्वस्ति। (तुम्हारा कल्याण हो।)

प्रश्न 10. 'पठ' धातु के लोट्लकार प्रथम पुरुष के रूप में लिखिए।

उत्तर: 'पठ' धातु के लोट्लकार के रूप

पुरूष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम पुरूष पठतु पठताम् पठन्तु
मध्यम पुरूष पठ पठतम् पठत
उत्तम पुरूष पठानि पठाव पठाम

(नोट: प्रश्न में केवल प्रथम पुरुष पूछा गया है, जो पठतु, पठताम्, पठन्तु है।)

प्रश्न 11. 'चौमासा' में कौन-सा समास है?

उत्तर: द्विगु समास- संख्यापूर्वी द्विगुः (सूत्र) अर्थात् जिस समास में पूर्वपद संख्यावाचक हो, वह द्विगु समास कहलाता है।
उदाहरण- पंचवटी = पञ्चानां वटानां समाहारः (पाँच वटों/वृक्षों का समूह)
त्रिलोकी = त्रयाणां लोकनां समाहारः (तीन लोकों का समूह)
त्रिभुवनम् = त्रयाणां भुवनानां समाहारः (तीन भवनों का समूह)

Section 3 लघु उत्तरीय प्रश्न

लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 12. 'कृ' धातु का लुटलकार का रूप लिखिए।

उत्तर: 'कृ' धातु के लृटलकार का रूप (नोट: पीडीएफ में लुटलकार लिखा है, लेकिन उत्तर लृटलकार का दिया है)

पुरूष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम पुरूष करिष्यति करिष्यतः करिष्यन्ति
मध्यम पुरूष करिष्यसि करिष्यथः करिष्यथ
उत्तम पुरूष करिष्यामि करिष्यावः करिष्यामः

प्रश्न 13. 11 से 20 तक को गिनती (संख्या) को संस्कृत में लिखिए-

उत्तर: ग्यारह से बीस तक के संख्यावाचक शब्द

  • 11. एकादश
  • 12. द्वादश
  • 13. त्रयोदश
  • 14. चतुर्दश
  • 15. पञ्चदश
  • 16. षोडश
  • 17. सप्तदश
  • 18. अष्टादश
  • 19. नवदश/एकोनविंशति
  • 20. विंशति

प्रश्न 14. निम्नलिखित श्लोक का हिन्दी में अर्थ लिखिए-
प्रियवाक्यप्रदानेन, सर्वे तुष्यन्ति जन्तवः।
तस्माद् तदैव वक्तव्य वचने का दरिद्रता ।।

उत्तर:
प्रियवाक्यप्रदानेन सर्वे तुष्यन्ति जन्तवः।
तस्मात् तदेव वक्तव्यम् वचने का दरिद्रता
अर्थ- प्रिय वाक्य बोलने से सभी व्यक्ति प्रसन्न और संतुष्ट होते हैं इसलिए सदैव प्रिय वचन ही बोलना चाहिए। वाणी हमारे अधीन है और इसका कोई मूल्य नहीं देना पड़ता है, तो प्रिय वचन बोलने में दरिद्रता कैसी

प्रश्न 15. उपसर्ग एवं प्रत्यय का अन्तर स्पष्ट कीजिए।

उत्तर: उपसर्ग एवं प्रत्यय का अन्तर

उपसर्ग प्रत्यय
1. 'उप' उपसर्ग, 'सृज' धातु में घञ् प्रत्यय जोड़ने पर उपसर्ग शब्द निर्मित होता है। 1. 'प्रति' उपसर्ग, 'अय्' धातु में जुड़कर प्रत्यय शब्द का निर्माण करते हैं।
2. उपसर्ग शब्द के आरंभ में जुड़ता है। 2. प्रत्यय शब्द के अन्त में जुड़ता है।
3. उपसर्ग जुड़ने पर मूल शब्द का अर्थ बदल जाता है। नए शब्द का निर्माण होता है। 3. प्रत्यय जुड़ने पर अर्थ मूल शब्द से मिलता-जुलता रहता है।
4. संस्कृत में उपसर्गा की संख्या 22 होती है। 4. संस्कृत में प्रत्यय की संख्या निश्चित नहीं है।
5. उदाहरण-
सम् + चिनोति = सञ्चिनोति
उप + चरित = उपचरित
अनु + गम् = अनुगच्छति
5. उदाहरण-
गम् + क्त = गतः (पीडीएफ में गम् + कितन् = गतिः और अर्च् + ल्युट् = अर्चनम् दिया है, जो अलग प्रत्यय हैं)

प्रश्न 16. शिक्षण अधिगम में श्रव्य एवं दृश्य उपकरणों को सोदाहरण समझाइए-

उत्तर: संस्कृत शिक्षण को प्रभावी बनाने के लिए निम्नलिखित श्रव्य दृश्य साधनों का उपयोग किया जाता है-

  1. चित्र और फोटो - प्राचीन भारत, संस्कृत, साहित्य और संस्कृति से संबंधित चित्र और फोटो छात्रों को भाषा और संस्कृति से जोड़ने में मदद करते हैं।
  2. श्यामपट्ट (Black Board) - श्यामपट्ट शिक्षक का अभिन्न मित्र है। सामान्य आर्थिक स्थिति वाला शिक्षक भी इसका उपयोग करता है।
  3. लपेट श्यामपट्ट (Roller Black Board) - इसका उपयोग चित्र उद्वरण एवं परिभाषाओं हेतु किया जा सकता है। इससे कक्षा में अतिरिक्त श्रम एवं समय की बचत होती है।
  4. चार्ट - किसी काव्य की प्रस्तावना एवं व्याकरणिक नियमों को स्पष्ट करने हेतु स्वनिर्मित चार्ट बहुत उपयोगी एवं प्रभावकारी हैं।
  5. एनिमेशन - संस्कृत व्याकरण और शब्दावली को समझने के लिए एनिमेशन एक आकर्षक माध्यम है।

प्रश्न 17. यण संधि की सूत्र के माध्यम से सौदाहरण की व्याख्या कीजिए।

उत्तर: यण संधि का सूत्र - 'इकोयणचि'
सूत्रार्थ - इक् प्रत्याहार (इ, उ, ऋ, लृ) के बाद यदि कोई असमान स्वर आता है तो उनके स्थान पर यण प्रत्याहार (य, र, ल, व) हो जाता है।
उदाहरण -

  • (क) इ/ई + असमान स्वर = य्
    अभि + उदय = अभ्युदय
    प्रति + एकम् = प्रत्येकम्
  • (ख) उ/ऊ + असमान स्वर = व्
    सु + आगतम् = स्वागतम्
    अनु + एषणम् = अन्वेषणम्
  • (ग) ऋ/ॠ + असमान स्वर = र्
    पितृ + आज्ञा = पित्राज्ञा
    मातृ + अंशः = मात्रंशः
  • (घ) लृ + असमान स्वर = ल्
    लृ + आकृतिः = लाकृतिः

प्रश्न 18. संस्कृत में कारक कितने होते हैं? नाम सहित लिखिए।

उत्तर: कारक - "क्रियान्वयित्वं कारकत्वम्"
अर्थात् क्रिया के साथ जिसका सीधा सम्बन्ध हो, उसे कारक कहते है। कारक चिन्हों को परसर्ग भी कहा जाता है। संस्कृत में कारकों की संख्या 6 है। जबकि हिन्दी में कारकों की संख्या 8 होती है。
उदाहरण- बालकः पठति (लड़का पढ़ता है।)
इस वाक्य में 'पठति' क्रिया का सीधा संबंध बालक से है。
कारक के भेद- कारक के छः भेद है

कारक विभक्ति चिन्ह
कर्ता प्रथमा ने
कर्म द्वितीया को
करण तृतीया से, के द्वारा
सम्प्रदान चतुर्थी के लिए
अपादान पंचमी से (अलग करने में)
सम्बन्ध षष्ठी का, की, के, रा, री, रे
अधिकरण सप्तमी में, पर
सम्बोधन अष्ठमी (प्रथमा का ही रूप होता है) हे! भो! अरे !

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