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PYQ 2017 • संस्कृत

संस्कृत Previous Year Paper 2017

UP DELED Semester 3 संस्कृत Previous Year Question Paper 2017 with solution.

Section 1 वस्तुनिष्ठ प्रश्न

वस्तुनिष्ठ प्रश्न

प्रश्न 1. माहेश्वर सूत्रों की संख्या है-

(a) 08

(b) 10

(c) 12

(d) 14

उत्तर: (d) : माहेश्वर सूत्र महर्षि पाणिनि ने संस्कृत व्याकरण बनाने की इच्छा से घोर तप करके भगवान शिव को प्रसन्न किया। प्रसन्न होकर शिव ने नृत्य के साथ जो डमरू वादन किया, उससे माहेश्वर सूत्रों की उत्पत्ति हुई। माहेश्वर सूत्रों की संख्या 14 है।

प्रश्न 2. पावकः में सन्धि है-

(a) गुण सन्धि

(b) अयादि सन्धि

(c) वृद्धि सन्धि

(d) यण् सन्धि

उत्तर: (b) : अयादि संधि सूत्र एचोडयवायावः। अर्थात् जब संधि करते समय ए, ऐ, ओ और औ के साथ कोई अन्य स्वर हो तो (ए का अय), (ऐ का आय) (ओ का अव), (औ का आव) बन जाता है। यही अयादि संधि कहलाती है।
उदाहरण-
पावकः = पौ + अकः (संधि विच्छेद)

प् + औ + अकः (वर्ण विच्छेद)

प् + आव् + अकः (औ के स्थान पर 'आव' आदेश)

प्रश्न 3. 'स' वर्ण का उच्चारण स्थान

(a) दन्त

(b) तालु

(c) कण्ठ

(d) मूर्धा

उत्तर: (a) : 'स' वर्ण का उच्चारण स्थान दन्त है।
सूत्र- लृतुलसानां दन्ताः
इसमें लृ, त वर्ग (त, थ, द, ध, न) और स वर्ण है।

प्रश्न 4. त्रयश्चत्वारिंशत शब्द का अर्थ है-

(a) चौंतीस

(b) तैंतालिस

(c) एक सौ तीन

(d) तीन सौ

उत्तर: (b) : त्रयश्चत्वारिंशत्/त्रिचत्वारिंशत् को हिन्दी भाषा में तैतालीस (43) कहते हैं।

प्रश्न 5. 'पंचवटी' में समास है-

(a) द्वन्द्व

(b) द्विगु

(c) बहुब्रीहि

(d) कर्मधारय

उत्तर: (b) : द्विगु समास सूत्र संख्यापूर्वी द्विगुः अर्थात् जिस समास में पूर्वपद संख्यावाचक हो, वह द्विगु समास कहलाता है।
उदाहरण- पंचवटी = पञ्चानां वटानां समाहारः (पाँच वटों/वृक्षों का समूह)
त्रिलोकी = त्रयाणां लोकना समाहारः (तीन लोकों का समाहार)

Section 2 अति लघु उत्तरीय प्रश्न

अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 6. 'रामाया गां ददाति' में कौन-सा कारक है?

उत्तर: सम्प्रदान कारक कर्ता दान कर्म के द्वारा किसी को कुछ देता है या जिसके लिए कुछ करता है; वह सम्प्रदान कारक कहलाता है।
ब्राह्मणाय भूमिं ददाति (ब्राह्मण को भूमि देता है।)
माता बालकाय फलं ददाति। (माता बालक को फल देती है।)

प्रश्न 7. गुरु शब्द के सप्तमी विभक्ति के सभी वचनों में रूप लिखिए।

उत्तर: 'गुरू' शब्द के रूप

विभक्ति एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथमा गुरूः गुरू गुरूवः
द्वितीया गुरूम् गुरू गुरून्
तृतीया गुरूणा गुरुभ्याम् गुरूभिः
चतुर्थी गुरवे गुरुभ्याम् गुरुभ्यः
पञ्चमी गुरोः गुरुभ्याम् गुरुभ्यः
षष्ठी गुरोः गुर्वोः गुरूणाम्
सप्तमी गुरौ गुर्वोः गुरुषु
सम्बोधन हे गुरो ! हे गुरू ! हे गुरवः!

प्रश्न 8. नायकः का सन्धि विच्छेद कीजिए तथा सन्धि का नाम लिखिए।

उत्तर: अयादि संधि- सूत्र- एचोडयवायावः। अर्थात् जब संधि करते समय ए, ऐ, ओ और औ के साथ कोई अन्य स्वर हो तो (ए का अय), (ऐ का आय) (ओ का अव), (औ का आव) बन जाता है। यही अयादि संधि कहलाती है।
उदाहरण- चयनम = चे + अनम् (ए के स्थान पर 'अय्')
पवनः = पो + अनः (ओ के स्थान पर 'अव्')
नायकः = नै + अकः (ऐ के स्थान पर 'आय')
पावनः = पौ + अनः (औ के स्थान पर 'आव')

प्रश्न 9. गम् धातु में क्त्वा प्रत्यय लगाकर शब्द बनाइए।

उत्तर: कत्वा प्रत्यय जब एक कर्ता के द्वारा एक कार्य की समाप्ति के बाद दूसरी क्रिया की जाती है, तो समाप्ति क्रिया में कत्वा प्रत्यय का प्रयोग होता है। इस प्रत्यय से बने हुए शब्द को पूर्वकालिक क्रिया कहते हैं।
उदाहरण गम् + कत्वा = गत्वा (जाकर)
हस् + कत्वा = हसित्वा (हँसकर)

प्रश्न 10. अक् प्रत्याहार के अन्तर्गत कौन-कौन से वर्ण आते हैं?

उत्तर: 'अक्' एक प्रत्याहार है जिसमें पाँच वर्ण आते हैं- अ इ उ ऋ लृ। इसी प्रत्याहार से इनके दीर्घ वर्णों (आ ई ऊ ऋ) का भी बोध होगा।

प्रश्न 11. गम् धातु में कोई दो उपसर्ग लगाकर शब्द बनाइए

उत्तर:

उपसर्ग धातु शब्द
आङ् गम् (जाना) आगच्छति (आना)
अनु गम् (जाना) अनुगच्छति (पीछे-पीछे चलना)
Section 3 लघु उत्तरीय प्रश्न

लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 12. द्वि शब्द का पुल्लिंग तथा स्त्रीलिंग में द्वितीया तथा चतुर्थी विभक्ति में रूप लिखिए।

उत्तर: द्वि (दो) शब्द संख्यावाचक शब्द है। इसका एकवचन तथा बहुवचन में रूप नहीं होते है। यह तीनों लिंगों अर्थात् पुलिङ्ग स्रीलिङ्ग नपुंसकलिंङ्ग के रूप में होते हैं।

विभक्ति पुलिंङ्ग स्त्रीलिंग नपुंसकलिंङ्ग
प्रथमा द्वौ द्वे द्वे
द्वितीया द्वौ द्वे द्वे
तृतीया द्वाभ्याम् द्वाभ्याम् द्वाभ्याम्
चतुर्थी द्वाभ्याम् द्वाभ्याम् द्वाभ्याम्
पञ्चमी द्वाभ्याम् द्वाभ्याम् द्वाभ्याम्
षष्ठी द्वयोः द्वयोः द्वयोः
सप्तमी द्वयोः द्वयोः द्वयोः

प्रश्न 13. स्था धातु का विधिलिंग मध्यम पुरुष में तीनों वचनों के रूप लिखिए।

उत्तर: विधिलिङ्ग लकार विधिलिङ्ग लकार का क्रिया के रूप में प्रयोग किया जाता है, जो संभावित मनोदशा को बताता है। इसका उपयोग किसी कार्य की संभावना या क्षमता को व्यक्त करने के लिए किया जाता है। स्था धातु का अर्थ है, बैठना /ठहरना।
स्था (तिष्ठ) धातु का विधिलिङ्ग लकार- चाहिए के अर्थ में

पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम पुरूष तिष्ठेत् तिष्ठेताम् तिष्ठेयुः
मध्यम पुरूष तिष्ठेः तिष्ठेतम् तिष्ठेत
उत्तम पुरूष तिष्ठेयम् तिष्ठेव तिष्ठेम

प्रश्न 14. विद्यालय पर संस्कृत में दो वाक्य लिखिए।

उत्तर: विद्यालय

  1. मम विद्यालयः अति सुन्दरं अस्ति।
  2. मम विद्यालये एकः पुस्तकालयः अपि अस्ति।
  3. विद्यालयः शिक्षायै भवति।
  4. विद्यालये एकम् सुंदरम् उद्यानम् अस्ति।
  5. विद्यालयः मध्यम् अतीव रोचते।

प्रश्न 15. आगत्य शब्द में उपसर्ग, धातु तथा प्रत्यय अलग-अलग करिए तथा नाम लिखिए।

उत्तर: आगत्य शब्द में 'गम' धातु, 'आ' उपसर्ग और लय (ल्यप्) प्रत्यय लगा है अर्थात् आ + गम् + ल्यप् = आगत्य

प्रश्न 16. अपादान कारक की विभक्ति तथा उसका चिह्न संस्कृत भाषा में एक उदाहरण सहित लिखिए।

उत्तर: अपादान कारक जिस वस्तु से किसी का पृथक होना पाया जाता है अर्थात् जिससे वस्तु अलग होती है, उसे अपादान कारक कहते हैं। अपादान कारक में पञ्चमी विभक्ति का प्रयोग किया जाता है। इसका विभक्ति चिन्ह 'से' अलग होने के लिए है।
उदाहरण-

  1. वृक्षात् पत्राणि पतन्ति। (वृक्ष से पत्ते गिरते हैं।)
  2. महेशः आसनात् उत्तिष्ठति (महेश आसन से उठता है।)
  3. गङ्गा हिमालयात् प्रभवति। (गंगा हिमालय से निकलती है।)

प्रश्न 17. निम्नलिखित श्लोक का अर्थ लिखिए-
नैनं छिन्दन्ति शस्त्राणि, नैनं दहति पावकः।
न चैनं क्लेदयन्त्यापो, न शोषयति मारुतः।।

उत्तर: अर्थ - आत्मा को न तो शस्त्र काट सकते है और न इसे अग्नि जला सकती है, न जल इसे गीला कर सकता है और न वायु इसे सुखा सकती है अर्थात् आत्मा सदा विकार रहित स्थिति में रहती है।

प्रश्न 18. निम्नलिखित वाक्यों का संस्कृत में अनुवाद कीजिए-
(1) बाग के चारों ओर जल है।
(2) मोहन लता के साथ जाता है。
(3) राम के द्वारा पुस्तक पढ़ी जाती है。
(4) वह श्याम से अधिक मोटा है。

उत्तर: अनुवाद-

  1. उद्यानम् परितः जलं अस्ति।
  2. मोहन लतायाः सह गच्छति।
  3. रामेण पुस्तकम् पठ्यते।
  4. सः श्यामेन अत्यधिक स्थूलाः अस्ति।

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