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PYQ 2021 • संस्कृत

संस्कृत Previous Year Paper 2021

UP DELED Semester 3 संस्कृत Previous Year Question Paper 2021 with solution.

Section 1 वस्तुनिष्ठ प्रश्न

वस्तुनिष्ठ प्रश्न

प्रश्न 1. 'छ' का उच्चारण स्थान है—

(a) मूर्धा

(b) कण्ठ

(c) ओष्ठ

(d) तालु

उत्तर: (d) : 'छ' वर्ण का उच्चारण स्थान तालु है। सूत्र—इचुयशानां तालु। इसके अन्तर्गत इ, ई, चवर्ग, य तथा श वर्ण आते हैं।

प्रश्न 2. 'पावकः' का सन्धि-विच्छेद है—

(a) प + आवकः

(b) पो + अकः

(c) पा + वकः

(d) पौ + अकः

उत्तर: (d) : 'पावकः' में अयादि सन्धि है। इसका सन्धि-विच्छेद है—पौ + अकः = पावकः। सूत्र—एचोऽयवायावः। इसमें औ के स्थान पर आव् आदेश होता है।

प्रश्न 3. 'नदी' शब्द का चतुर्थी विभक्ति एकवचन रूप बनेगा—

(a) नद्या

(b) नदीम्

(c) नद्यै

(d) नदीः

उत्तर: (c) : 'नदी' शब्द का चतुर्थी विभक्ति, एकवचन रूप नद्यै होता है।

प्रश्न 4. 'एकोनविंशतिः' का तात्पर्य है—

(a) उन्नीस

(b) उनचास

(c) उनतीस

(d) इक्कीस

उत्तर: (a) : 'एकोनविंशतिः' का अर्थ उन्नीस (19) है। 'एकोन' का अर्थ एक कम होता है, अर्थात् बीस से एक कम।

प्रश्न 5. 'प्रतिदिनम्' में कौन-सा समास है—

(a) प्रादि तत्पुरुष

(b) कर्मधारय

(c) अव्ययीभाव

(d) बहुब्रीहि

उत्तर: (c) : 'प्रतिदिनम्' में अव्ययीभाव समास है। इसमें पूर्वपद 'प्रति' प्रधान है। इसका अर्थ है—प्रत्येक दिन।

Section 2 अति लघु उत्तरीय प्रश्न

अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 6. संस्कृत में कारक के कितने भेद होते हैं?

उत्तर: संस्कृत में छः कारक होते हैं—कर्ता, कर्म, करण, सम्प्रदान, अपादान और अधिकरण।

प्रश्न 7. 'अस्मद्' सर्वनाम शब्द के प्रथमा विभक्ति के तीनों वचनों के रूप लिखिए।

उत्तर: प्रथमा विभक्ति में—अहम् (एकवचन), आवाम् (द्विवचन), वयम् (बहुवचन)।

प्रश्न 8. 'त्याज्यं न धैर्यं विधुरेऽपि काले' श्लोकांश का अर्थ लिखिए।

उत्तर: इसका अर्थ है—विपत्ति या संकट के समय भी धैर्य का त्याग नहीं करना चाहिए।

प्रश्न 9. 'अनुगमनम्' में कौन-सा उपसर्ग है?

उत्तर: 'अनुगमनम्' में अनु उपसर्ग है।

प्रश्न 10. 'दातुम्' में कौन-सा प्रत्यय है?

उत्तर: 'दातुम्' में तुमुन् प्रत्यय है—दा + तुमुन् = दातुम्।

प्रश्न 11. 'गोहितम्' में कौन-सा समास है?

उत्तर: 'गोहितम्' में चतुर्थी तत्पुरुष समास है। विग्रह—गोभ्यः हितम् = गोहितम्।

Section 3 लघु उत्तरीय प्रश्न

लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 12. संस्कृत शिक्षण की नवीन विधियों का उल्लेख करें।

उत्तर: संस्कृत शिक्षण को सरल, रुचिकर तथा प्रभावी बनाने के लिए अनेक आधुनिक शिक्षण-विधियों का प्रयोग किया जाता है। प्रमुख विधियाँ हैं—

  • पाठ्यपुस्तक विधि— इसमें पाठ्यपुस्तक को शिक्षण का मुख्य आधार बनाकर भाषा, साहित्य तथा व्याकरण का अध्ययन कराया जाता है।
  • प्रत्यक्ष विधि— इसमें संस्कृत का शिक्षण यथासम्भव संस्कृत भाषा के माध्यम से ही किया जाता है और बोलने-सुनने के अभ्यास पर बल दिया जाता है।
  • विश्लेषणात्मक विधि— इसमें पूर्ण विषय-वस्तु को विभिन्न अंशों में विभाजित करके उनका क्रमशः अध्ययन कराया जाता है।
  • हरबर्टीय पञ्चपदी— इसके पाँच सोपान हैं—प्रस्तावना, प्रस्तुतीकरण, तुलना, सामान्यीकरण तथा प्रयोग।
  • श्रव्य-दृश्य विधि— इसमें चित्र, चार्ट, ऑडियो, वीडियो, प्रोजेक्टर तथा अन्य शिक्षण-साधनों द्वारा संस्कृत को अधिक स्पष्ट एवं रुचिकर बनाया जाता है।

शिक्षक विषय-वस्तु, कक्षा-स्तर तथा शिक्षण-उद्देश्य के अनुसार इन विधियों का उचित संयोजन कर सकता है।

प्रश्न 13. वृद्धि सन्धि की परिभाषा एवं उदाहरण लिखिए।

उत्तर: वृद्धि सन्धि का सूत्र है—वृद्धिरेचि। जब अ अथवा आ के बाद ए अथवा ऐ आए तो दोनों के स्थान पर ऐ तथा अ अथवा आ के बाद ओ अथवा औ आए तो दोनों के स्थान पर औ हो जाता है। इसे वृद्धि सन्धि कहते हैं।

उदाहरण—

  • तत्र + एव = तत्रैव
  • सदा + एव = सदैव
  • जल + ओघः = जलौघः
  • महा + औषधम् = महौषधम्

प्रश्न 14. दृश् धातु के लट् लकार के रूप तीनों पुरुषों एवं तीनों वचनों में लिखिए।

उत्तर:

पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम पुरुष पश्यति पश्यतः पश्यन्ति
मध्यम पुरुष पश्यसि पश्यथः पश्यथ
उत्तम पुरुष पश्यामि पश्यावः पश्यामः

प्रश्न 15. निम्नलिखित शब्दों के संस्कृत में नाम लिखिए।
1) मकड़ी
2) अनार
3) दुपट्टा
4) लोमड़ी

उत्तर:

हिन्दी संस्कृत
मकड़ी लूता
अनार दाडिमम्
दुपट्टा उत्तरीयम्
लोमड़ी लोमशिका

प्रश्न 16. बहुब्रीहि समास की परिभाषा दीजिए एवं उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिए।

उत्तर: जिस समास में न तो पूर्वपद और न ही उत्तरपद प्रधान होता है, बल्कि दोनों पद मिलकर किसी अन्य व्यक्ति या वस्तु का बोध कराते हैं, उसे बहुब्रीहि समास कहते हैं। इसका लक्षण है—अन्यपदार्थप्रधानो बहुव्रीहिः।

उदाहरण—

  • लम्बोदरः — लम्बम् उदरं यस्य सः = गणेशः।
  • पीताम्बरः — पीतम् अम्बरं यस्य सः = श्रीकृष्णः।
  • नीलकण्ठः — नीलः कण्ठः यस्य सः = शिवः।
  • चन्द्रशेखरः — चन्द्रः शेखरे यस्य सः = शिवः।

प्रश्न 17. निम्नलिखित श्लोक का हिन्दी अर्थ लिखिए—
प्रियवाक्यप्रदानेन सर्वे तुष्यन्ति जन्तवः।
तस्मात् तदेव वक्तव्यं वचने का दरिद्रता।।

उत्तर: मधुर एवं प्रिय वचन बोलने से सभी प्राणी प्रसन्न होते हैं। इसलिए सदैव प्रिय वचन ही बोलने चाहिए, क्योंकि मधुर वचन बोलने में किसी प्रकार का धन व्यय नहीं होता; अतः वाणी में दरिद्रता क्यों दिखाई जाए।

प्रश्न 18. अधोलिखित वाक्यों का संस्कृत में अनुवाद कीजिए।
(a) विद्वान् सर्वत्र पूज्य होता है।
(b) वह ब्राह्मण को दान देता है।
(c) हम दोनों भोजन करते हैं।
(d) कल हम सब विद्यालय जायेंगे।

उत्तर:

  • (a) विद्वान् सर्वत्र पूज्यते।
  • (b) सः ब्राह्मणाय दानं ददाति।
  • (c) आवां भोजनं कुर्वः।
  • (d) श्वः वयं विद्यालयं गमिष्यामः।
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