बहुविकल्पीय प्रश्न
प्रश्न 1. राधाकृष्णन आयोग की संस्तुतियाँ सम्बन्धित थीं—
(a) उच्च शिक्षा से
(b) माध्यमिक शिक्षा से
(c) प्राथमिक शिक्षा से
(d) तकनीकी शिक्षा से
उत्तर: (a) उच्च शिक्षा से
राधाकृष्णन आयोग अथवा विश्वविद्यालय शिक्षा आयोग (1948-49) का गठन स्वतंत्र भारत में विश्वविद्यालय एवं उच्च शिक्षा की स्थिति का अध्ययन करने तथा उसमें सुधार के सुझाव देने के लिए किया गया था।
प्रश्न 2. वैदिककालीन शिक्षा किस दर्शन पर आधारित थी—
(a) प्रकृतिवाद
(b) आदर्शवाद
(c) समाजवाद
(d) व्यवहारवाद
उत्तर: (b) आदर्शवाद
वैदिककालीन शिक्षा में आत्मिक विकास, चरित्र-निर्माण, उच्च जीवन-मूल्यों और आत्मानुभूति को महत्व दिया जाता था। इसलिए इसे मुख्यतः आदर्शवादी दर्शन से सम्बन्धित माना जाता है।
प्रश्न 3. दर्शनशास्त्र अत्यन्त ही ................ है।
(a) नवीन
(b) प्राचीन
(c) आधुनिक
(d) उपर्युक्त सभी
उत्तर: (b) प्राचीन
दर्शनशास्त्र ज्ञान की अत्यन्त प्राचीन शाखाओं में से एक है। मनुष्य प्राचीन काल से ही जीवन, जगत, ज्ञान और सत्य के स्वरूप पर विचार करता आया है।
प्रश्न 4. "प्राथमिक शाला में भाषा शिक्षा" नामक पुस्तक के लेखक हैं—
(a) रवीन्द्रनाथ टैगोर
(b) गिजुभाई बधेका
(c) स्वामी विवेकानन्द
(d) महात्मा गाँधी
उत्तर: (b) गिजुभाई बधेका
"प्राथमिक शाला में भाषा शिक्षा" गिजुभाई बधेका की प्रसिद्ध शैक्षिक रचना है। वे बाल-केन्द्रित एवं आनंदपूर्ण शिक्षा के प्रमुख समर्थक थे।
प्रश्न 5. मूल संविधान में 14 वर्ष तक के बच्चों के लिए निःशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा की व्यवस्था किस अनुच्छेद में की गई थी?
(a) 45
(b) 49
(c) 26
(d) 50
उत्तर: (a) अनुच्छेद 45
मूल संविधान के अनुच्छेद 45 में राज्य को 14 वर्ष तक के बच्चों के लिए निःशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा की व्यवस्था करने का निर्देश दिया गया था।
वर्तमान संवैधानिक व्यवस्था में अनुच्छेद 21A के अन्तर्गत 6 से 14 वर्ष के बच्चों को निःशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा का मौलिक अधिकार प्राप्त है।
प्रश्न 6. मूल्यों के विकास का सम्बन्ध किस पक्ष से होता है?
(a) ज्ञानात्मक
(b) कौशलात्मक
(c) भावात्मक
(d) मनोगत्यात्मक
उत्तर: (c) भावात्मक
रुचि, अभिवृत्ति, प्रशंसा और मूल्यों का विकास मुख्यतः व्यक्ति के भावात्मक पक्ष से सम्बन्धित होता है।
प्रश्न 7. मनुष्य में मूल्यों के विकास में सर्वाधिक महत्वपूर्ण माना जाता है—
(a) आर्थिक पक्ष
(b) परिवार
(c) भौतिक सुविधाएँ
(d) विदेशी मित्र
उत्तर: (b) परिवार
बालक के मूल्य-विकास में परिवार की अत्यन्त महत्वपूर्ण भूमिका होती है, क्योंकि परिवार ही समाजीकरण का पहला और प्रमुख अभिकरण है।
प्रश्न 8. शिक्षा का प्रमुख उद्देश्य है—
(a) शारीरिक विकास
(b) मानसिक विकास
(c) सर्वांगीण विकास
(d) नैतिक विकास
उत्तर: (c) सर्वांगीण विकास
शिक्षा का प्रमुख उद्देश्य व्यक्ति के शारीरिक, मानसिक, सामाजिक, सांवेगिक एवं नैतिक पक्षों का संतुलित अर्थात् सर्वांगीण विकास करना है।
प्रश्न 9. मदरसों में शिक्षा का माध्यम था—
(a) फारसी
(b) अरबी
(c) उर्दू
(d) उपर्युक्त सभी
उत्तर: (a) फारसी
मध्यकालीन भारतीय शिक्षा के सन्दर्भ में मदरसों में उच्च शिक्षा का प्रमुख माध्यम फारसी था। अरबी का प्रयोग धार्मिक एवं इस्लामी अध्ययन में भी किया जाता था।
प्रश्न 10. निस्यंदन सिद्धान्त किसने दिया था—
(a) हण्टर
(b) मैकाले
(c) वुड
(d) फ्रांसिस
उत्तर: (b) मैकाले
भारतीय शिक्षा के इतिहास में अधोमुखी निस्यंदन सिद्धान्त को मैकाले की शिक्षा-नीति से जोड़ा जाता है। इसके अनुसार पहले उच्च वर्ग को शिक्षित करके शिक्षा को क्रमशः सामान्य जनता तक पहुँचाने की धारणा थी।
प्रश्न 11. प्रकृतिवाद का श्रेष्ठ योगदान शिक्षा के किस क्षेत्र में है—
(a) उद्देश्य
(b) शिक्षण विधि
(c) पाठ्यक्रम
(d) अनुशासन
उत्तर: (b) शिक्षण विधि
प्रकृतिवाद ने प्रत्यक्ष अनुभव, निरीक्षण, स्व-अधिगम, क्रिया, खेल तथा भ्रमण जैसी बाल-केन्द्रित शिक्षण-विधियों के विकास पर विशेष प्रभाव डाला। इसलिए इसका श्रेष्ठ योगदान शिक्षण-विधि के क्षेत्र में माना जाता है।
प्रश्न 12. शिक्षा में प्रयोजनवादी शिक्षा है—
(a) अनुभव केन्द्रित
(b) विषय केन्द्रित
(c) पाठ्यक्रम केन्द्रित
(d) बाल केन्द्रित
उत्तर: (a) अनुभव केन्द्रित
प्रयोजनवाद प्रत्यक्ष अनुभव, क्रिया, समस्या-समाधान और करके सीखने पर बल देता है। इसलिए प्रयोजनवादी शिक्षा अनुभव केन्द्रित मानी जाती है।
प्रश्न 13. "शिक्षा से मेरा अभिप्राय बालक और मनुष्य के शरीर, मन तथा आत्मा में निहित सर्वोत्तम गुणों के सर्वांगीण विकास से है।" यह कथन किसका है—
(a) महात्मा गाँधी
(b) स्वामी विवेकानन्द
(c) शंकराचार्य
(d) टैगोर
उत्तर: (a) महात्मा गाँधी
महात्मा गाँधी शिक्षा को केवल बौद्धिक विकास तक सीमित न मानकर शरीर, मन और आत्मा के सर्वांगीण विकास की प्रक्रिया मानते थे।
प्रश्न 14. जनसंख्या शिक्षा पर प्रथम राष्ट्रीय सेमिनार कहाँ आयोजित किया गया था?
(a) कलकत्ता
(b) सूरत
(c) दिल्ली
(d) मुम्बई
उत्तर: (d) मुम्बई
जनसंख्या शिक्षा पर प्रथम राष्ट्रीय सेमिनार 7-8 मार्च 1969 को बम्बई, वर्तमान मुम्बई में आयोजित किया गया था।
प्रश्न 15. "डेमोक्रेसी एण्ड एजुकेशन" पुस्तक के लेखक हैं—
(a) मॉण्टेसरी
(b) प्लेटो
(c) जॉन डीवी
(d) रूसो
उत्तर: (c) जॉन डीवी
Democracy and Education जॉन डीवी की प्रसिद्ध शैक्षिक कृति है, जो 1916 में प्रकाशित हुई थी।
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अति लघु उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 16. शिक्षा क्या है?
उत्तर: शिक्षा वह सतत् प्रक्रिया है जिसके द्वारा व्यक्ति के ज्ञान, कौशल, व्यवहार, मूल्यों और अन्तर्निहित क्षमताओं का विकास होता है।
प्रश्न 17. शिक्षक के विषय में प्रकृतिवादियों के क्या विचार हैं?
उत्तर: प्रकृतिवाद में शिक्षक का स्थान पृष्ठभूमि में रहने वाले मार्गदर्शक का है। बालक को प्रकृति एवं प्रत्यक्ष अनुभवों से स्वयं सीखने के अवसर दिए जाते हैं।
प्रश्न 18. पर्यावरण संरक्षण अधिनियम कब बना?
उत्तर: भारत में पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 बनाया गया। इसका उद्देश्य पर्यावरण की सुरक्षा एवं गुणवत्ता में सुधार करना है।
प्रश्न 19. किन्हीं तीन मूल्यों के नाम लिखिए।
उत्तर: सत्य, ईमानदारी और अहिंसा तीन प्रमुख मानवीय एवं नैतिक मूल्य हैं।
प्रश्न 20. राष्ट्रीय बाल श्रम नीति कब घोषित की गई?
उत्तर: भारत सरकार ने अगस्त 1987 में राष्ट्रीय बाल श्रम नीति घोषित की। इसका उद्देश्य बाल-श्रम की रोकथाम एवं बाल श्रमिकों के पुनर्वास के लिए उपाय करना था।
प्रश्न 21. वुड्स डिस्पैच क्या है?
उत्तर: वुड्स डिस्पैच, 1854 सर चार्ल्स वुड द्वारा भारत की शिक्षा-व्यवस्था के विकास के लिए भेजा गया महत्वपूर्ण शिक्षा सम्बन्धी घोषणा-पत्र था। इसे भारतीय शिक्षा का महाधिकार-पत्र भी कहा जाता है।
प्रश्न 22. संकुचित रूप में शिक्षा का स्वरूप क्या है?
उत्तर: संकुचित अर्थ में शिक्षा विद्यालय जैसी औपचारिक संस्था में निर्धारित पाठ्यक्रम, समय एवं उद्देश्य के अनुसार दी जाने वाली योजनाबद्ध शिक्षा है।
प्रश्न 23. "वसुधैव कुटुम्बकम्" इस सूक्ति का आशय स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: वसुधैव कुटुम्बकम् का अर्थ है—सम्पूर्ण विश्व एक परिवार है। यह मानवता, विश्व-बन्धुत्व और सभी के प्रति समान आत्मीयता की भावना व्यक्त करता है।
प्रश्न 24. आधुनिक शिक्षा का जन्मदाता किसे कहा गया है?
उत्तर: भारतीय शिक्षा के इतिहास में चार्ल्स ग्राण्ट को आधुनिक अंग्रेजी शिक्षा के प्रारम्भिक प्रवर्तक तथा आधुनिक शिक्षा का जन्मदाता कहा जाता है।
प्रश्न 25. उपनयन का शाब्दिक अर्थ क्या होता है?
उत्तर: उपनयन का शाब्दिक अर्थ गुरु के समीप ले जाना है। वैदिक शिक्षा में इसके द्वारा विद्यार्थी को अध्ययन-जीवन में प्रवेश कराया जाता था।
प्रश्न 26. ग्राम शिक्षा समिति का गठन क्यों किया गया है?
उत्तर: ग्राम शिक्षा समिति का गठन प्रारम्भिक शिक्षा के सार्वभौमीकरण, विद्यालय में सामुदायिक सहभागिता तथा स्थानीय स्तर पर विद्यालय के संचालन एवं निगरानी में सहयोग के लिए किया जाता है।
प्रश्न 27. किस दर्शन को अर्थक्रियावाद, व्यवहारवाद और अनुभववाद के नाम से जाना जाता है?
उत्तर: प्रयोजनवाद (Pragmatism) को अर्थक्रियावाद, व्यावहारिकतावाद, प्रयोगवाद आदि नामों से भी जाना जाता है।
प्रश्न 28. आदर्शवाद के अनुसार किस जगत का महत्वपूर्ण स्थान है?
उत्तर: आदर्शवाद में भौतिक जगत की अपेक्षा आध्यात्मिक अथवा विचार-जगत को अधिक वास्तविक एवं महत्वपूर्ण माना जाता है।
प्रश्न 29. प्रयोजनवाद के अनुसार सर्वोच्च सत्ता किसकी है?
उत्तर: प्रयोजनवाद के अनुसार समाज की सर्वोच्च सत्ता मानी जाती है। यह व्यक्ति के सामाजिक विकास, क्रिया एवं उपयोगी अनुभवों पर विशेष बल देता है।
प्रश्न 30. आदर्शवादी शिक्षा की कितनी विधियाँ हैं?
उत्तर: प्रचलित शिक्षाशास्त्रीय वर्गीकरण में आदर्शवादी शिक्षा की आठ प्रमुख विधियाँ मानी जाती हैं, जिनमें प्रश्नोत्तर, संवाद, आगमन-निगमन, वाद-विवाद, निर्देशन, तर्क, खेल तथा अभ्यास-आवृत्ति प्रमुख हैं।
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लघु उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 31. मानव जीवन में शिक्षा के महत्व पर प्रकाश डालिए।
उत्तर:
मानव जीवन में शिक्षा का अत्यन्त महत्वपूर्ण स्थान है। शिक्षा व्यक्ति की अन्तर्निहित क्षमताओं को विकसित करके उसे ज्ञानवान, विवेकशील, आत्मनिर्भर और उत्तरदायी नागरिक बनाती है।
शिक्षा का महत्व—
- सर्वांगीण विकास: शारीरिक, मानसिक, सामाजिक, नैतिक एवं सांवेगिक विकास करती है।
- ज्ञान एवं कौशल: व्यक्ति में ज्ञान, तार्किक सोच और जीवनोपयोगी कौशल विकसित करती है।
- चरित्र-निर्माण: सत्य, ईमानदारी, अनुशासन, सहयोग और उत्तरदायित्व जैसे गुण विकसित करती है।
- आत्मनिर्भरता: व्यक्ति को कार्य-कुशल बनाकर जीवन की समस्याओं का समाधान करने योग्य बनाती है।
- सामाजिक विकास: व्यक्ति को समाज की संस्कृति, मूल्यों और उत्तरदायित्वों से परिचित कराती है।
इस प्रकार शिक्षा व्यक्ति एवं समाज दोनों के विकास का महत्वपूर्ण साधन है।
प्रश्न 32. बौद्धकालीन शिक्षा की विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर:
बौद्धकालीन शिक्षा का विकास बौद्ध मठों, विहारों एवं प्रसिद्ध शिक्षा-केन्द्रों में हुआ। इसकी प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित थीं—
- मठ एवं विहार: बौद्ध मठ और विहार शिक्षा के प्रमुख केन्द्र थे।
- प्रव्रज्या संस्कार: विद्यार्थी मठीय शिक्षा में प्रवेश के लिए प्रव्रज्या संस्कार से गुजरता था।
- उपसम्पदा: निर्धारित अवस्था एवं प्रशिक्षण के बाद उपसम्पदा संस्कार द्वारा पूर्ण भिक्षु के रूप में प्रवेश मिलता था।
- अनुशासित जीवन: संयम, सदाचार, सरल जीवन एवं अनुशासन पर विशेष बल दिया जाता था।
- विविध पाठ्यक्रम: धार्मिक शिक्षा के साथ व्याकरण, तर्क, दर्शन, चिकित्सा एवं अन्य लौकिक विषय भी पढ़ाए जाते थे।
- शिक्षण-विधियाँ: व्याख्यान, प्रश्नोत्तर, वाद-विवाद, स्वाध्याय एवं चर्चा का प्रयोग किया जाता था।
- प्रमुख केन्द्र: नालन्दा, विक्रमशिला और वल्लभी जैसे शिक्षा-केन्द्र प्रसिद्ध थे।
प्रश्न 33. आधुनिक शिक्षा पर प्रकृतिवाद का क्या प्रभाव पड़ा? लिखिए।
उत्तर:
प्रकृतिवाद ने आधुनिक शिक्षा को शिक्षक-केन्द्रित एवं कठोर व्यवस्था से हटाकर बाल-केन्द्रित, अनुभवपरक और स्वाभाविक शिक्षा की दिशा दी।
आधुनिक शिक्षा पर इसके प्रमुख प्रभाव—
- बालक की रुचि, आवश्यकता एवं व्यक्तिगत भिन्नताओं को महत्व मिला।
- स्वतंत्रता एवं स्वाभाविक विकास पर बल दिया गया।
- करके सीखने, निरीक्षण, प्रयोग एवं प्रत्यक्ष अनुभव को महत्व मिला।
- खेल, भ्रमण एवं प्रकृति-अध्ययन जैसी विधियों का विकास हुआ।
- शारीरिक एवं स्वास्थ्य शिक्षा को उचित स्थान मिला।
- शिक्षक की भूमिका आदेश देने वाले के स्थान पर मार्गदर्शक की हुई।
- बाल-मनोविज्ञान एवं विकासात्मक आवश्यकताओं के अनुसार शिक्षा देने पर बल बढ़ा।
इस प्रकार प्रकृतिवाद ने आधुनिक बाल-केन्द्रित एवं क्रियात्मक शिक्षा को महत्वपूर्ण आधार प्रदान किया।
प्रश्न 34. प्रयोजनवाद के किन्हीं चार गुण एवं चार दोषों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
प्रयोजनवाद के गुण—
- क्रिया एवं अनुभव पर बल: करके सीखने और प्रत्यक्ष अनुभव को महत्व देता है।
- व्यावहारिक शिक्षा: शिक्षा को वास्तविक जीवन की समस्याओं एवं आवश्यकताओं से जोड़ता है।
- बालक की सक्रियता: शिक्षार्थी को सक्रिय बनाकर समस्या-समाधान की क्षमता विकसित करता है।
- सामाजिक विकास: सहयोग, लोकतांत्रिक जीवन एवं सामाजिक दक्षता के विकास पर बल देता है।
प्रयोजनवाद के दोष—
- शिक्षा के स्थायी एवं सार्वभौमिक उद्देश्यों को स्वीकार नहीं करता।
- आध्यात्मिक एवं शाश्वत मूल्यों को पर्याप्त महत्व नहीं देता।
- उपयोगिता पर अत्यधिक बल देने से ज्ञान के सैद्धान्तिक पक्ष की उपेक्षा हो सकती है।
- सत्य एवं मूल्यों को परिवर्तनशील मानने से शिक्षा के स्थायी मानदण्ड निर्धारित करना कठिन हो सकता है।
प्रश्न 35. माध्यमिक शिक्षा आयोग के अध्यक्ष कौन थे? इसकी नियुक्ति कब हुई थी?
उत्तर:
भारत सरकार ने 23 सितम्बर 1952 को माध्यमिक शिक्षा आयोग की नियुक्ति की। इसके अध्यक्ष डॉ. ए. लक्ष्मणस्वामी मुदालियर थे, इसलिए इसे मुदालियर आयोग भी कहा जाता है।
आयोग की प्रमुख संस्तुतियाँ—
- माध्यमिक शिक्षा को लगभग 11 से 17 वर्ष की आयु तक सात वर्ष का बनाया जाए।
- इसे 3 वर्ष के जूनियर सेकण्डरी और 4 वर्ष के हायर सेकण्डरी स्तर में व्यवस्थित किया जाए।
- बहुउद्देशीय विद्यालयों एवं विविधीकृत पाठ्यक्रमों की व्यवस्था की जाए।
- व्यावसायिक एवं तकनीकी शिक्षा को बढ़ावा दिया जाए।
- परीक्षा एवं मूल्यांकन प्रणाली में सुधार किया जाए।
- लोकतांत्रिक नागरिकता, व्यक्तित्व एवं नेतृत्व के विकास पर बल दिया जाए।
प्रश्न 36. "हण्टर कमीशन" की क्या विशेषता थी?
उत्तर:
हण्टर आयोग का गठन 1882 में सर विलियम हण्टर की अध्यक्षता में किया गया था। इसका विशेष ध्यान प्राथमिक शिक्षा की स्थिति और उसके विस्तार पर था।
इसकी प्रमुख विशेषताएँ एवं संस्तुतियाँ—
- प्राथमिक शिक्षा के विस्तार पर विशेष बल दिया गया।
- प्राथमिक शिक्षा का प्रबन्ध स्थानीय निकायों को सौंपने की सिफारिश की गई।
- प्राथमिक स्तर पर स्थानीय अथवा मातृभाषा को महत्व दिया गया।
- माध्यमिक शिक्षा में साहित्यिक एवं व्यावसायिक दोनों धाराओं के विकास पर बल दिया गया।
- निजी शिक्षण संस्थाओं को अनुदान सहायता देने को प्रोत्साहित किया गया।
- स्त्री शिक्षा एवं शिक्षक-प्रशिक्षण के विकास पर भी बल दिया गया।
प्रश्न 37. टैगोर के अनुसार शिक्षा का अर्थ व उद्देश्य बताइए।
उत्तर:
रवीन्द्रनाथ टैगोर ने शिक्षा को व्यापक अर्थ में ग्रहण किया। उनके अनुसार श्रेष्ठ शिक्षा वह है जो व्यक्ति के जीवन का प्रकृति, मानवता और सम्पूर्ण विश्व के साथ सामंजस्य स्थापित करे।
टैगोर के अनुसार शिक्षा के प्रमुख उद्देश्य—
- बालक का शारीरिक, मानसिक, भावात्मक एवं आध्यात्मिक विकास करना।
- स्वतंत्र चिन्तन एवं स्वतंत्र अभिव्यक्ति का विकास करना।
- प्रकृति के साथ निकट सम्बन्ध स्थापित करना।
- सृजनशीलता, कला एवं सौन्दर्य-बोध का विकास करना।
- भारतीय संस्कृति के प्रति सम्मान विकसित करना।
- मानवतावाद एवं विश्व-बन्धुत्व की भावना उत्पन्न करना।
- आत्मानुशासन एवं आत्मनिर्भरता का विकास करना।
प्रश्न 38. जनसंख्या शिक्षा के प्रमुख उद्देश्यों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
जनसंख्या शिक्षा ऐसी शैक्षिक प्रक्रिया है जो विद्यार्थियों को जनसंख्या की स्थिति, वृद्धि, परिवार, संसाधनों और जीवन-गुणवत्ता के बीच सम्बन्ध समझने में सहायता करती है।
इसके प्रमुख उद्देश्य—
- जनसंख्या वृद्धि के कारणों एवं परिणामों का ज्ञान कराना।
- परिवार के आकार और जीवन-गुणवत्ता के सम्बन्ध को समझाना।
- जनसंख्या और उपलब्ध संसाधनों के बीच सम्बन्ध स्पष्ट करना।
- स्वास्थ्य, परिवार-कल्याण और उत्तरदायी अभिभावकत्व के प्रति उचित दृष्टिकोण विकसित करना।
- जनसंख्या सम्बन्धी समस्याओं पर तर्कसंगत एवं उत्तरदायी निर्णय लेने की क्षमता विकसित करना।
- जनसंख्या परिवर्तन के सामाजिक, आर्थिक एवं पर्यावरणीय प्रभावों से परिचित कराना।
प्रश्न 39. भूमण्डलीय तापवृद्धि से क्या अभिप्राय है? इसके नियन्त्रण के प्रमुख उपायों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
पृथ्वी के औसत सतही तापमान में दीर्घकालीन वृद्धि को भूमण्डलीय तापवृद्धि या ग्लोबल वार्मिंग कहते हैं। इसका प्रमुख कारण मानवीय गतिविधियों से वायुमण्डल में कार्बन डाइऑक्साइड, मीथेन और नाइट्रस ऑक्साइड जैसी ग्रीनहाउस गैसों की मात्रा बढ़ना है।
इसके प्रमुख कारण—
- कोयला, पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस जैसे जीवाश्म ईंधनों का अत्यधिक उपयोग।
- वनों की कटाई।
- उद्योग एवं परिवहन से होने वाला उत्सर्जन।
- कृषि एवं पशुपालन से ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन।
भूमण्डलीय तापवृद्धि के नियन्त्रण के उपाय—
- सौर, पवन एवं अन्य नवीकरणीय ऊर्जा-स्रोतों का उपयोग बढ़ाया जाए।
- जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता कम की जाए।
- वनों का संरक्षण एवं बड़े स्तर पर वृक्षारोपण किया जाए।
- ऊर्जा-दक्ष उपकरणों एवं भवनों का प्रयोग बढ़ाया जाए।
- सार्वजनिक परिवहन, पैदल चलने, साइकिल एवं स्वच्छ वाहनों को बढ़ावा दिया जाए।
- औद्योगिक उत्सर्जन को नियंत्रित किया जाए।
- कचरे को कम करके पुनः उपयोग एवं पुनर्चक्रण को बढ़ावा दिया जाए।
ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन सम्बन्धित अवधारणाएँ हैं, परन्तु दोनों समान नहीं हैं। ग्लोबल वार्मिंग तापमान में वृद्धि को दर्शाती है, जबकि जलवायु परिवर्तन में तापमान के साथ वर्षा, समुद्र-स्तर एवं अन्य दीर्घकालिक जलवायवीय परिवर्तनों को भी सम्मिलित किया जाता है।
प्रश्न 40. विद्यालय एवं समुदाय में अन्तर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
| आधार | विद्यालय | समुदाय |
|---|---|---|
| स्वरूप | विद्यालय एक औपचारिक शैक्षिक संस्था है। | समुदाय किसी निश्चित क्षेत्र, हित अथवा सामाजिक सम्बन्धों से जुड़े लोगों का समूह है। |
| मुख्य उद्देश्य | ज्ञान, कौशल, मूल्य एवं व्यक्तित्व का विकास करना। | सदस्यों की सामाजिक, सांस्कृतिक एवं सामुदायिक आवश्यकताओं की पूर्ति करना। |
| सदस्य | मुख्यतः विद्यार्थी, शिक्षक एवं विद्यालय-प्रशासन। | विभिन्न आयु एवं व्यवसाय के सभी स्थानीय सदस्य। |
| व्यवस्था | निश्चित नियम, समय-सारणी और पाठ्यक्रम के अनुसार कार्य करता है। | सामाजिक सम्बन्धों, परम्पराओं, संस्थाओं एवं स्थानीय आवश्यकताओं के आधार पर कार्य करता है। |
| शिक्षा में भूमिका | योजनाबद्ध एवं औपचारिक शिक्षा प्रदान करता है। | सामाजिक अनुभव, स्थानीय ज्ञान, संस्कृति एवं संसाधन उपलब्ध कराता है। |
विद्यालय और समुदाय अलग होते हुए भी परस्पर निर्भर हैं। समुदाय विद्यालय के विकास में सहयोग करता है और विद्यालय समुदाय के सामाजिक एवं शैक्षिक विकास में योगदान देता है।
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