बहुविकल्पीय प्रश्न
प्रश्न 1. "शिक्षा एक प्रक्रिया है जिसके द्वारा बालक अपनी जन्मजात शक्तियों को पूर्ण अभिव्यक्त करता है।" यह कथन किसका है?
(a) स्वामी विवेकानन्द
(b) महात्मा गाँधी
(c) रवीन्द्रनाथ टैगोर
(d) फ्रॉबेल
उत्तर: (d) फ्रॉबेल
फ्रॉबेल के अनुसार शिक्षा वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा बालक अपनी अन्तर्निहित अथवा जन्मजात शक्तियों को बाहर की ओर अभिव्यक्त करता है।
प्रश्न 2. Education शब्द की उत्पत्ति निम्न में से किस लैटिन शब्द से मानी जाती है?
(a) एजुकेशन
(b) एजुकेयर
(c) एजुकेटम
(d) एजुकेट
उत्तर: (c) एजुकेटम
शिक्षाशास्त्र की प्रचलित व्युत्पत्ति के अनुसार Education शब्द को लैटिन शब्द Educatum से भी व्युत्पन्न माना जाता है, जिसका अर्थ शिक्षण अथवा प्रशिक्षण से सम्बन्धित है।
प्रश्न 3. निम्न में से शिक्षण का केन्द्र बिन्दु नहीं है—
(a) शिक्षक
(b) विद्यार्थी
(c) पाठ्यवस्तु
(d) समुदाय
उत्तर: (d) समुदाय
शिक्षण के प्रमुख केन्द्र बिन्दु शिक्षक, विद्यार्थी तथा पाठ्यवस्तु हैं। अतः दिए गए विकल्पों में समुदाय शिक्षण का प्रत्यक्ष केन्द्र बिन्दु नहीं है।
प्रश्न 4. शिक्षा का आत्मानुभूति उद्देश्य है—
(a) सामाजिक
(b) वैयक्तिक
(c) सांस्कृतिक
(d) राष्ट्रीय
उत्तर: (b) वैयक्तिक
आत्मानुभूति व्यक्ति की अपनी अन्तर्निहित शक्तियों एवं वास्तविक स्वरूप के विकास से सम्बन्धित है, इसलिए यह शिक्षा का वैयक्तिक उद्देश्य है।
प्रश्न 5. शिक्षा का प्रमुख उद्देश्य है—
(a) मानसिक विकास
(b) नैतिक विकास
(c) सामाजिक विकास
(d) सर्वांगीण विकास
उत्तर: (d) सर्वांगीण विकास
शिक्षा का प्रमुख उद्देश्य व्यक्ति के शारीरिक, मानसिक, सामाजिक, नैतिक एवं सांवेगिक पक्षों का संतुलित अर्थात् सर्वांगीण विकास करना है।
प्रश्न 6. ऐसी शिक्षा जिसमें किसी निश्चित समय, पाठ्यक्रम एवं स्थान की आवश्यकता नहीं होती है—
(a) औपचारिक शिक्षा
(b) दूरस्थ शिक्षा
(c) अनौपचारिक शिक्षा
(d) सतत एवं व्यापक शिक्षा
उत्तर: (c) अनौपचारिक शिक्षा
अनौपचारिक शिक्षा जीवन के अनुभवों, परिवार, समाज एवं वातावरण से स्वाभाविक रूप से प्राप्त होती है। इसमें निश्चित समय, स्थान और पाठ्यक्रम आवश्यक नहीं होते।
प्रश्न 7. 'मकतब' शब्द किस स्तर की शिक्षा से सम्बन्धित है—
(a) प्राथमिक स्तर
(b) माध्यमिक स्तर
(c) उच्च स्तर
(d) उच्च प्राथमिक स्तर
उत्तर: (a) प्राथमिक स्तर
मुस्लिमकालीन शिक्षा-व्यवस्था में मकतब प्राथमिक शिक्षा के केन्द्र थे, जबकि मदरसे उच्च शिक्षा से सम्बन्धित थे।
प्रश्न 8. 'उपनयन संस्कार' किस काल से सम्बन्धित है—
(a) बौद्ध काल
(b) इस्लामिक काल
(c) वैदिक काल
(d) मध्यकालीन
उत्तर: (c) वैदिक काल
वैदिक शिक्षा में विद्यार्थी के अध्ययन-जीवन में प्रवेश के लिए उपनयन संस्कार किया जाता था। इसका अर्थ गुरु के समीप ले जाना है।
प्रश्न 9. 'बहुउद्देशीय शिक्षा' किस आयोग से सम्बन्धित है—
(a) राधाकृष्णन आयोग
(b) कोठारी आयोग
(c) सैडलर आयोग
(d) मुदालियर आयोग
उत्तर: (d) मुदालियर आयोग
माध्यमिक शिक्षा आयोग (1952-53), अर्थात् मुदालियर आयोग ने विद्यार्थियों की विभिन्न रुचियों एवं योग्यताओं के अनुरूप बहुउद्देशीय विद्यालय स्थापित करने तथा पाठ्यक्रम में विविधीकरण की संस्तुति की थी।
प्रश्न 10. 'प्रव्रज्या संस्कार' किस काल की शिक्षा से सम्बन्धित है—
(a) वैदिककालीन शिक्षा
(b) आधुनिककालीन शिक्षा
(c) मुस्लिमकालीन शिक्षा
(d) बौद्धकालीन शिक्षा
उत्तर: (d) बौद्धकालीन शिक्षा
प्रव्रज्या संस्कार बौद्धकालीन शिक्षा में मठीय जीवन एवं शिक्षा में प्रवेश से सम्बन्धित संस्कार था।
प्रश्न 11. आदर्शवाद का श्रेष्ठ योगदान किस क्षेत्र में है—
(a) शिक्षण विधि
(b) शिक्षण के उद्देश्य
(c) शिक्षण सूत्र
(d) शिक्षण का पाठ्यक्रम
उत्तर: (b) शिक्षण के उद्देश्य
आदर्शवाद ने आत्मानुभूति, चरित्र-निर्माण, नैतिक एवं आध्यात्मिक विकास जैसे शैक्षिक उद्देश्यों को विशेष महत्व दिया है। इसलिए इसका श्रेष्ठ योगदान उद्देश्यों के क्षेत्र में माना जाता है।
प्रश्न 12. निम्नलिखित में से प्रकृतिवाद का प्रबल समर्थक था—
(a) रूसो
(b) प्लेटो
(c) अरस्तू
(d) जॉन डीवी
उत्तर: (a) रूसो
जाँ-जाक रूसो प्रकृतिवादी शिक्षा-दर्शन के प्रमुख समर्थक थे। उन्होंने बालक की स्वतंत्रता एवं स्वाभाविक विकास पर विशेष बल दिया।
प्रश्न 13. 'प्रोजेक्ट विधि' किस दार्शनिक विचारधारा की देन है—
(a) आदर्शवादी
(b) प्रकृतिवादी
(c) प्रयोजनवादी
(d) यथार्थवादी
उत्तर: (c) प्रयोजनवादी
प्रोजेक्ट विधि प्रयोजनवादी शिक्षा-दर्शन की प्रमुख विधि है। यह उद्देश्यपूर्ण क्रिया, अनुभव, समस्या-समाधान एवं करके सीखने पर आधारित है।
प्रश्न 14. 'दिवास्वप्न' नामक पुस्तक के रचनाकार हैं—
(a) स्वामी विवेकानन्द
(b) रवीन्द्रनाथ टैगोर
(c) गिजुभाई बधेका
(d) महात्मा गाँधी
उत्तर: (c) गिजुभाई बधेका
'दिवास्वप्न' गिजुभाई बधेका की प्रसिद्ध शैक्षिक कृति है, जिसमें बाल-केन्द्रित एवं आनंदपूर्ण शिक्षा पर बल दिया गया है।
प्रश्न 15. निम्न में से जॉन डीवी द्वारा लिखित पुस्तक है—
(a) द रिपब्लिक
(b) एमील
(c) दास कैपिटल
(d) डेमोक्रेसी एण्ड एजुकेशन
उत्तर: (d) डेमोक्रेसी एण्ड एजुकेशन
Democracy and Education जॉन डीवी की प्रसिद्ध शैक्षिक कृति है, जो 1916 में प्रकाशित हुई थी।
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अति लघु उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 16. किन्हीं चार नैतिक मूल्यों के नाम लिखिए।
उत्तर: चार प्रमुख नैतिक मूल्य हैं— सत्य, ईमानदारी, न्याय और करुणा।
प्रश्न 17. जनसंचार के चार यान्त्रिक साधनों के नाम लिखिए।
उत्तर: जनसंचार के चार प्रमुख यान्त्रिक साधन हैं— रेडियो, दूरदर्शन, चलचित्र और इंटरनेट।
प्रश्न 18. विश्व जनसंख्या दिवस कब मनाया जाता है?
उत्तर: विश्व जनसंख्या दिवस प्रत्येक वर्ष 11 जुलाई को मनाया जाता है।
प्रश्न 19. बाल अपराध को परिभाषित कीजिए।
उत्तर: किसी बालक द्वारा किया गया ऐसा कार्य जो कानून के विरुद्ध हो, बाल अपराध कहलाता है। आधुनिक किशोर न्याय व्यवस्था में 18 वर्ष से कम आयु के व्यक्ति को बालक माना जाता है।
प्रश्न 20. राष्ट्रीय बाल-श्रम नीति कब घोषित की गई थी?
उत्तर: भारत सरकार ने अगस्त 1987 में राष्ट्रीय बाल श्रम नीति घोषित की थी।
प्रश्न 21. सामाजिक परिवर्तन के तीन कारक लिखिए।
उत्तर: सामाजिक परिवर्तन के तीन प्रमुख कारक हैं— प्रौद्योगिक कारक, आर्थिक कारक तथा सांस्कृतिक कारक।
प्रश्न 22. 'सत्यम् शिवम् सुन्दरम्' किस दर्शन का आधार वाक्य है?
उत्तर: सत्यम् शिवम् सुन्दरम् आदर्शवाद का आधार-वाक्य माना जाता है।
प्रश्न 23. बालकों को 'बाल देवो भव' की संज्ञा किसने दी थी?
उत्तर: गिजुभाई बधेका ने बालक के सम्मान एवं बाल-केन्द्रित शिक्षा की भावना को 'बाल देवो भव' के रूप में अभिव्यक्त किया।
प्रश्न 24. रूसो की किन्हीं दो रचनाओं के नाम लिखिए।
उत्तर: रूसो की दो प्रसिद्ध रचनाएँ एमील (Émile) तथा द सोशल कॉन्ट्रैक्ट (The Social Contract) हैं।
प्रश्न 25. रवीन्द्रनाथ टैगोर ने 'शान्तिनिकेतन' विद्यालय की स्थापना कब और कहाँ की?
उत्तर: रवीन्द्रनाथ टैगोर ने 22 दिसम्बर 1901 को बोलपुर, बीरभूम, पश्चिम बंगाल में शान्तिनिकेतन में ब्रह्मचर्याश्रम विद्यालय प्रारम्भ किया।
प्रश्न 26. बुनियादी शिक्षा का जनक किसे माना जाता है?
उत्तर: महात्मा गाँधी को बुनियादी शिक्षा अथवा नई तालीम का जनक माना जाता है।
प्रश्न 27. मुस्लिम शिक्षा के दो प्रमुख केन्द्रों के नाम बताइए।
उत्तर: मुस्लिमकालीन शिक्षा के दो प्रमुख केन्द्र मकतब और मदरसा थे।
प्रश्न 28. भारतीय शिक्षा का महाधिकार पत्र किसे कहा जाता है?
उत्तर: वुड्स डिस्पैच, 1854 को भारतीय शिक्षा का महाधिकार-पत्र अथवा मैग्नाकार्टा कहा जाता है।
प्रश्न 29. शिक्षा के चार सामान्य उद्देश्य बताइए।
उत्तर: शिक्षा के चार सामान्य उद्देश्य हैं— सर्वांगीण विकास, चरित्र-निर्माण, जन्मजात शक्तियों का विकास तथा योग्य एवं उत्तरदायी नागरिक का निर्माण।
प्रश्न 30. दूरस्थ शिक्षा को परिभाषित कीजिए।
उत्तर: वह शिक्षा जिसमें शिक्षक और शिक्षार्थी सामान्यतः एक ही स्थान पर उपस्थित न होकर पत्राचार, मुद्रित सामग्री अथवा संचार-तकनीक के माध्यम से शिक्षण-अधिगम करते हैं, दूरस्थ शिक्षा कहलाती है।
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लघु उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 31. औपचारिक एवं अनौपचारिक शिक्षा में अन्तर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
| आधार | औपचारिक शिक्षा | अनौपचारिक शिक्षा |
|---|---|---|
| स्वरूप | योजनाबद्ध एवं संगठित होती है। | स्वाभाविक एवं अनियोजित रूप से प्राप्त होती है। |
| स्थान | विद्यालय, महाविद्यालय आदि निश्चित संस्थानों में दी जाती है। | घर, परिवार, समाज एवं जीवन-अनुभवों से प्राप्त होती है। |
| पाठ्यक्रम | निश्चित एवं पूर्वनिर्धारित पाठ्यक्रम होता है। | कोई निश्चित पाठ्यक्रम नहीं होता। |
| समय | निश्चित समय-सारणी एवं अवधि होती है। | निश्चित समय नहीं होता और यह जीवनभर चल सकती है। |
| शिक्षक | प्रशिक्षित एवं नियुक्त शिक्षक द्वारा शिक्षा दी जाती है। | परिवार, समाज, मित्र तथा अनुभव सीखने के स्रोत बनते हैं। |
| मूल्यांकन | परीक्षा एवं प्रमाण-पत्र की व्यवस्था होती है। | सामान्यतः औपचारिक परीक्षा या प्रमाण-पत्र नहीं होता। |
इस प्रकार औपचारिक शिक्षा संस्थागत एवं योजनाबद्ध होती है, जबकि अनौपचारिक शिक्षा दैनिक जीवन के अनुभवों से स्वाभाविक रूप से प्राप्त होती है।
प्रश्न 32. वैदिककालीन शिक्षा की विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
वैदिककालीन शिक्षा भारतीय शिक्षा की प्राचीन व्यवस्था थी। इसकी प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित थीं—
- गुरुकुल व्यवस्था: विद्यार्थी गुरु के आश्रम में रहकर शिक्षा प्राप्त करते थे।
- उपनयन संस्कार: विद्यार्थी के अध्ययन-जीवन का प्रारम्भ उपनयन संस्कार से होता था।
- गुरु-शिष्य सम्बन्ध: गुरु एवं शिष्य का सम्बन्ध निकट, आत्मीय और अनुशासित होता था।
- मौखिक शिक्षण: श्रवण, मनन, कण्ठस्थीकरण, प्रश्नोत्तर एवं अभ्यास का प्रयोग किया जाता था।
- चरित्र-निर्माण: सत्य, संयम, सदाचार, सेवा और आत्मानुशासन पर विशेष बल था।
- पाठ्यक्रम: वेद, वेदांग, दर्शन, व्याकरण के साथ विभिन्न लौकिक एवं जीवनोपयोगी विषयों का भी अध्ययन कराया जाता था।
- सादा जीवन: विद्यार्थी सरल, संयमित एवं श्रमशील जीवन व्यतीत करते थे।
प्रश्न 33. संस्कार के आधार पर बौद्धकालीन शिक्षा एवं मुस्लिमकालीन शिक्षा में अन्तर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
| आधार | बौद्धकालीन शिक्षा | मुस्लिमकालीन शिक्षा |
|---|---|---|
| प्रवेश संस्कार | मठीय शिक्षा में प्रवेश के लिए प्रव्रज्या संस्कार किया जाता था। | शिक्षा प्रारम्भ करने के अवसर पर बिस्मिल्लाह संस्कार किया जाता था। |
| अगला संस्कार | उचित आयु एवं प्रशिक्षण के बाद उपसम्पदा संस्कार द्वारा पूर्ण भिक्षु-जीवन में प्रवेश मिलता था। | बिस्मिल्लाह के बाद बालक मकतब में नियमित प्राथमिक अध्ययन प्रारम्भ करता था। |
| धार्मिक आधार | बौद्ध धर्म, नैतिकता एवं संघ-जीवन से सम्बन्धित था। | इस्लामी धार्मिक परम्परा एवं कुरान के अध्ययन से सम्बन्धित था। |
अतः संस्कार की दृष्टि से बौद्ध शिक्षा में प्रव्रज्या और उपसम्पदा, जबकि मुस्लिम शिक्षा में बिस्मिल्लाह प्रमुख प्रवेश-संस्कार था।
प्रश्न 34. शिक्षा में प्रकृतिवाद के योगदान का मूल्यांकन कीजिए।
उत्तर:
प्रकृतिवाद ने शिक्षा को कृत्रिम, कठोर एवं शिक्षक-केन्द्रित व्यवस्था से हटाकर बालक की प्रकृति, स्वतंत्रता और प्रत्यक्ष अनुभव पर केन्द्रित किया। इसके प्रमुख योगदान निम्नलिखित हैं—
- बाल-केन्द्रित शिक्षा: बालक की रुचि, आवश्यकता एवं योग्यता को शिक्षा का आधार बनाया।
- स्वाभाविक विकास: जन्मजात शक्तियों को प्रकृति के अनुरूप विकसित करने पर बल दिया।
- स्वतंत्रता: बालक को अनावश्यक बन्धनों से मुक्त रखकर सीखने की स्वतंत्रता दी।
- अनुभव द्वारा अधिगम: निरीक्षण, प्रयोग, खोज, खेल एवं करके सीखने को महत्व दिया।
- प्राकृतिक अनुशासन: बाहरी दण्ड के स्थान पर कार्यों के स्वाभाविक परिणामों द्वारा अनुशासन विकसित करने पर बल दिया।
- शिक्षक की भूमिका: शिक्षक को आदेश देने वाले के स्थान पर मार्गदर्शक एवं सहायक माना।
इस प्रकार प्रकृतिवाद ने आधुनिक बाल-केन्द्रित, क्रियात्मक एवं मनोवैज्ञानिक शिक्षा के विकास को महत्वपूर्ण आधार प्रदान किया।
प्रश्न 35. आदर्शवाद एवं प्रकृतिवाद के शैक्षिक उद्देश्यों की तुलना कीजिए।
उत्तर:
| आदर्शवाद | प्रकृतिवाद |
|---|---|
| शिक्षा का सर्वोच्च उद्देश्य आत्मानुभूति है। | शिक्षा का उद्देश्य बालक की जन्मजात शक्तियों का स्वाभाविक विकास है। |
| चरित्र एवं नैतिक विकास पर विशेष बल देता है। | स्वतंत्रता एवं स्व-अभिव्यक्ति पर विशेष बल देता है। |
| सत्यम्, शिवम् एवं सुन्दरम् जैसे शाश्वत मूल्यों की प्राप्ति को महत्व देता है। | प्रकृति, प्रत्यक्ष अनुभव एवं वास्तविक जीवन से सीखने को महत्व देता है। |
| आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक विकास को महत्वपूर्ण मानता है। | शारीरिक, प्राकृतिक एवं सहज विकास को महत्व देता है। |
| आदर्श व्यक्तित्व एवं आत्म-विकास की प्राप्ति लक्ष्य है। | बालक को उसकी प्रकृति के अनुरूप स्वतंत्र रूप से विकसित करना लक्ष्य है। |
अतः आदर्शवाद आध्यात्मिक एवं नैतिक उद्देश्यों पर, जबकि प्रकृतिवाद स्वाभाविक विकास और स्वतंत्रता पर अधिक बल देता है।
प्रश्न 36. महात्मा गाँधी की बुनियादी शिक्षा की पाठ्यचर्या पर प्रकाश डालिए।
उत्तर:
महात्मा गाँधी की बुनियादी शिक्षा अथवा नई तालीम में पाठ्यचर्या का केन्द्र कोई उपयोगी एवं उत्पादक शिल्प था। अन्य विषयों का शिक्षण भी यथासम्भव उसी शिल्प एवं बालक के वास्तविक जीवन से सहसम्बन्धित किया जाता था।
बुनियादी शिक्षा की पाठ्यचर्या के प्रमुख अंग—
- आधारभूत शिल्प: कताई-बुनाई, कृषि, काष्ठकला, मिट्टी का कार्य आदि।
- मातृभाषा: शिक्षा का प्रमुख माध्यम मातृभाषा हो।
- गणित: दैनिक जीवन एवं शिल्प से जोड़कर गणित पढ़ाया जाए।
- सामाजिक अध्ययन: इतिहास, भूगोल एवं नागरिक जीवन का ज्ञान दिया जाए।
- सामान्य विज्ञान: प्रकृति एवं दैनिक जीवन से सम्बन्धित वैज्ञानिक ज्ञान दिया जाए।
- कला एवं संगीत: चित्रकला, संगीत एवं सृजनात्मक गतिविधियों को स्थान दिया जाए।
- शारीरिक शिक्षा: स्वास्थ्य, व्यायाम, खेल एवं स्वच्छता पर बल दिया जाए।
इस पाठ्यचर्या का उद्देश्य बालक को केवल पुस्तकीय ज्ञान देना नहीं, बल्कि उसे कर्मशील, स्वावलम्बी एवं जीवनोपयोगी शिक्षा प्रदान करना था।
प्रश्न 37. मॉण्टेसरी शिक्षण पद्धति के सिद्धान्तों की विवेचना कीजिए।
उत्तर:
मॉण्टेसरी शिक्षण-पद्धति बालक की स्वतंत्रता, स्वक्रिया एवं व्यक्तिगत विकास पर आधारित है। इसके प्रमुख सिद्धान्त निम्नलिखित हैं—
- स्वतंत्रता का सिद्धान्त: बालक को निर्धारित सीमाओं के भीतर कार्य चुनने की स्वतंत्रता मिलनी चाहिए।
- स्व-शिक्षा: बालक विशेष शिक्षण-सामग्री की सहायता से स्वयं सीखता है।
- तैयार वातावरण: कक्षा एवं सामग्री बालक की आयु और आवश्यकताओं के अनुरूप व्यवस्थित होती है।
- इन्द्रिय-प्रशिक्षण: दृष्टि, श्रवण, स्पर्श, आकार, रंग और भार आदि से सम्बन्धित अनुभवों द्वारा ज्ञानेन्द्रियों का विकास किया जाता है।
- वैयक्तिकता: प्रत्येक बालक की गति एवं व्यक्तिगत भिन्नताओं का सम्मान किया जाता है।
- आत्मानुशासन: स्वतंत्र एवं उद्देश्यपूर्ण कार्यों के माध्यम से बालक में आत्मानुशासन विकसित होता है।
- शिक्षक की भूमिका: शिक्षक ज्ञान थोपने वाले के स्थान पर निरीक्षक, मार्गदर्शक एवं सहायक होता है।
प्रश्न 38. फ्रॉबेल की किंडरगार्टन प्रणाली पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
फ्रेडरिक फ्रॉबेल किंडरगार्टन प्रणाली के जनक माने जाते हैं। उन्होंने 1837 में छोटे बच्चों के लिए संस्था प्रारम्भ की और 1840 में इसके लिए Kindergarten नाम अपनाया, जिसका अर्थ है— बाल उद्यान।
इस प्रणाली में विद्यालय को बगीचा, बालक को पौधा और शिक्षक को माली के समान माना गया है। इसकी प्रमुख विशेषताएँ हैं—
- खेल द्वारा शिक्षा।
- स्वक्रिया एवं स्वतंत्र अभिव्यक्ति।
- गीत, कहानी एवं सामूहिक गतिविधियाँ।
- Gifts एवं Occupations के माध्यम से क्रियात्मक अधिगम।
- सामाजिक सहयोग एवं सृजनात्मकता का विकास।
इस प्रकार किंडरगार्टन बालक की प्राकृतिक शक्तियों का आनंदपूर्ण एवं क्रियात्मक वातावरण में विकास करता है।
प्रश्न 39. "विद्यालय समाज का लघु रूप है।" स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
विद्यालय में विभिन्न परिवारों एवं सामाजिक पृष्ठभूमियों से आने वाले बच्चे एक साथ रहकर, सीखकर और कार्य करके सामाजिक जीवन का अनुभव प्राप्त करते हैं। इस कारण विद्यालय को समाज का लघु रूप कहा जाता है।
विद्यालय में सहयोग, अनुशासन, नेतृत्व, उत्तरदायित्व, समानता, सहिष्णुता एवं लोकतांत्रिक व्यवहार का अभ्यास कराया जाता है। विद्यार्थी समूह-कार्य, खेल, सांस्कृतिक कार्यक्रम और सामुदायिक गतिविधियों द्वारा सामाजिक नियम एवं मूल्य सीखते हैं।
इस प्रकार विद्यालय केवल ज्ञान देने वाली संस्था नहीं, बल्कि समाजीकरण और उत्तरदायी नागरिक-निर्माण का प्रमुख केन्द्र है।
प्रश्न 40. जलवायु परिवर्तन से आप क्या समझते हैं? सविस्तार वर्णन कीजिए।
उत्तर:
तापमान, वर्षा, पवन तथा अन्य जलवायवीय दशाओं के औसत स्वरूप में लम्बी अवधि तक होने वाले महत्वपूर्ण परिवर्तन को जलवायु परिवर्तन कहते हैं। जलवायु में प्राकृतिक कारणों से भी परिवर्तन होते हैं, किन्तु वर्तमान तीव्र परिवर्तन का प्रमुख कारण मानवीय गतिविधियों से ग्रीनहाउस गैसों की मात्रा में वृद्धि है।
जलवायु परिवर्तन के प्रमुख कारण—
- कोयला, पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस जैसे जीवाश्म ईंधनों का अत्यधिक उपयोग।
- वनों की कटाई एवं भूमि उपयोग में परिवर्तन।
- उद्योगों एवं परिवहन से कार्बन डाइऑक्साइड का उत्सर्जन।
- कृषि एवं पशुपालन से मीथेन और नाइट्रस ऑक्साइड जैसी गैसों का उत्सर्जन।
प्रमुख प्रभाव—
- पृथ्वी के औसत तापमान में वृद्धि।
- हिमनदों एवं ध्रुवीय बर्फ का पिघलना।
- समुद्र-स्तर में वृद्धि।
- वर्षा के स्वरूप में परिवर्तन तथा सूखा और बाढ़ की घटनाओं में वृद्धि।
- अत्यधिक गर्मी, तूफान एवं अन्य चरम मौसमी घटनाओं का बढ़ना।
- कृषि, स्वास्थ्य, जल-संसाधनों एवं जैव-विविधता पर प्रतिकूल प्रभाव।
नियन्त्रण के उपाय—
- सौर, पवन एवं अन्य नवीकरणीय ऊर्जा-स्रोतों का प्रयोग बढ़ाना।
- जीवाश्म ईंधनों की खपत कम करना।
- वनों का संरक्षण एवं वृक्षारोपण करना।
- ऊर्जा-दक्ष तकनीक एवं स्वच्छ परिवहन को बढ़ावा देना।
- औद्योगिक उत्सर्जन और कचरे को नियंत्रित करना।
- जल, भूमि एवं प्राकृतिक संसाधनों का सतत् उपयोग करना।
अतः जलवायु परिवर्तन एक वैश्विक पर्यावरणीय समस्या है, जिसके नियन्त्रण के लिए सरकार, समाज और प्रत्येक व्यक्ति के संयुक्त प्रयास आवश्यक हैं।
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