Home
Store Updates
Home PYQs Semester 2 वर्तमान भारतीय समाज और प्रारंभिक शिक्षा 2017
PYQ 2017 • वर्तमान भारतीय समाज और प्रारंभिक शिक्षा

वर्तमान भारतीय समाज और प्रारंभिक शिक्षा Previous Year Paper 2017

UP DELED Semester 2 वर्तमान भारतीय समाज और प्रारंभिक शिक्षा Previous Year Question Paper 2017 with solution.

Section 1 बहुविकल्पीय प्रश्न

बहुविकल्पीय प्रश्न

प्रश्न 1. आदर्शवाद का श्रेष्ठ योगदान किस क्षेत्र में है?

(a) शिक्षण विधि में

(b) उद्देश्य में

(c) पाठ्यक्रम में

(d) बालक में

उत्तर: (b) : आदर्शवाद का श्रेष्ठ योगदान उद्देश्य के क्षेत्र में है।

प्रश्न 2. राममूर्ति समिति (1990) क्यों गठित हुई?

(a) विश्वविद्यालय की शिक्षा में सुधार के लिए

(b) बालकों के पाठ्यक्रम का बोझ कम करने के लिए

(c) राष्ट्रीय शिक्षा नीति (1986) की समीक्षा हेतु

(d) माध्यमिक शिक्षा का व्यावसायीकरण हेतु

उत्तर: (c) : राममूर्ति समिति (1990), राष्ट्रीय शिक्षा नीति (1986) की समीक्षा (जाँच) के लिए गठित की गई थी।

प्रश्न 3. राधाकृष्णन आयोग की संस्तुतियाँ सम्बन्धित थीं-

(a) उच्च शिक्षा से

(b) माध्यमिक शिक्षा से

(c) प्राथमिक शिक्षा से

(d) तकनीकी शिक्षा से

उत्तर: (a) : भारत में विश्वविद्यालय शिक्षा की वर्तमान स्थिति की समीक्षा करने और सुधार के लिए सिफारिशें करने के लिए राधाकृष्णन आयोग की स्थापना की गई थी। राधाकृष्णन आयोग उच्च शिक्षा की संस्तुतियों से सम्बन्धित था।

प्रश्न 4. वुड का आज्ञा-पत्र प्रकाशित हुआ-

(a) 19 जुलाई 1854 को

(b) 2 फरवरी 1835 को

(c) 24 नवम्बर 1839 को

(d) 7 मार्च 1835 को

उत्तर: (a) : वुड का आज्ञा पत्र 'बोर्ड ऑफ कन्ट्रोल' के प्रधान चार्ल्स वुड द्वारा 19 जुलाई 1854 को जारी किया गया था। इसे भारत में अंग्रेजी शिक्षा के मैग्नाकार्टा के रूप में जाना जाता है।

प्रश्न 5. निस्पंदन सिद्धान्त किसने दिया था -

(a) हण्टर ने

(b) मैकाले ने

(c) वुड ने

(d) फ्रांसिस ने

उत्तर: (b) : भारतीय शिक्षा नीति में लार्ड मैकाले ने निस्पंदन सिद्धान्त दिया था। जिनका मुख्य उद्देश्य भारत के उच्च तथा मध्यम वर्ग के एक छोटे से समूह को शिक्षित करना था, ताकि एक ऐसा वर्ग तैयार हो जो रंग और खून से भारतीय हो परन्तु विचारों, नैतिकता तथा बुद्धि से ब्रिटिश हो।

प्रश्न 6. मैकाले ने अपना प्रतिवेदन प्रस्तुत किया था -

(a) सन् 1935 में

(b) सन् 1833 में

(c) सन् 1831 में

(d) सन् 1854 में

उत्तर: (a) : लार्ड मैकाले ने अपना प्रतिवेदन पत्र वर्ष 1835 में गवर्नर जनरल की परिषद के समक्ष प्रस्तुत किया था।

प्रश्न 7. वैदिक शिक्षा का प्रमुख संस्कार था

(a) उपनयन संस्कार

(b) उपसम्दा संस्कार

(c) प्रवज्जा संस्कार

(d) विस्मिल्लाह संस्कार

उत्तर: (a) : वैदिक शिक्षा का प्रमुख संस्कार उपनयन संस्कार को माना जाता था। जिसमें ब्राह्मण बालक का उपनयन 8 वर्ष, क्षत्रिय 11 वर्ष, वैश्य 12 वर्ष की आयु में होता था।

प्रश्न 8. प्रारम्भिक शिक्षा प्रारम्भ होती है।

(a) शैशवावस्था से

(b) बाल्यावस्था से

(c) किशोरावस्था से

(d) युवावस्था से

उत्तर: (b) : प्रारंभिक शिक्षा बाल्यावस्था में प्रारंभ होती है। बाल्यावस्था के अन्तर्गत 6 से 14 वर्ष के बालकों को रखा गया है।

प्रश्न 9. "शिक्षा स्वस्थ शरीर में स्वस्थ मस्तिष्क का निर्माण करती है" ये कथन है -

(a) स्वामी विवेकानन्द का

(b) स्वामी दयानन्द का

(c) अरस्तु का

(d) राजाराम मोहन राय का

उत्तर: (c) : अरस्तु का कथन है "शिक्षा एक स्वस्थ शरीर में स्वस्थ मस्तिष्क का निर्माण करती है।"

प्रश्न 10. शिक्षा का प्रमुख उद्देश्य है-

(a) शारीरिक विकास

(b) मानसिक विकास

(c) सर्वांगीण विकास

(d) सांवेगिक विकास

उत्तर: (c) : शिक्षा का प्रमुख उद्देश्य बालक का सर्वांगीण विकास करना है।

प्रश्न 11. बालक का मस्तिष्क कोरी स्लेट, की तरह है। यह कथन है -

(a) रूसो का

(b) एडम्स का

(c) नन का

(d) अरस्तू का

उत्तर: (*) : प्लेटो के अनुसार "बालक का मस्तिष्क कोरी स्लेट होता है।"
नोट- उपरोक्त विकल्पों में सही उत्तर नहीं दिया गया है। यह कथन प्लेटो का था।

प्रश्न 12. मदरसों में शिक्षा का माध्यम था-

(a) अरबी

(b) उर्दू

(c) फारसी

(d) संस्कृत

उत्तर: (c) : मदरसों में शिक्षा का माध्यम फारसी था

प्रश्न 13. वैदिक कालीन शिक्षा सम्बन्धित है-

(a) रामायण

(b) वेदों से

(c) कुरान से

(d) बाइबिल से

उत्तर: (b) : वैदिक कालीन शिक्षा वेदों से संबंधित है जिसमें गुरूओं द्वारा शिष्यों को गुरुकुलों में वेदों के मंत्रों एवं सूक्तियों को कण्ठस्थ कराया जाता था।

प्रश्न 14. किण्डरगार्डन प्रणाली के जन्मदाता कहे जाते हैं-

(a) फ्रॉबेल

(b) माण्टेसरी

(c) रूसो

(d) हरबर्ट

उत्तर: (a) : किंडरगार्डन प्रणाली को इस विचार से तैयार किया गया था कि बच्चे खेल के माध्यम से सबसे अच्छी तरह से सीखते हैं। इस पद्धति का विकास जर्मन शिक्षाविद् फ्रेडरिक फ्रॉबेल द्वारा किया गया। जर्मन भाषा में किंडरगार्डन का शाब्दिक अर्थ है 'बच्चों का बगीचा।'

प्रश्न 15. पाण्डिचेरी में किस महान शिक्षाशस्त्री ने आश्रम की स्थापना की?

(a) महात्मा गांधी ने

(b) स्वामी विवेकानन्द ने

(c) आचार्य विनोबा भावे ने

(d) श्री अरविन्द घोष ने

उत्तर: (d) : महान शिक्षाशास्त्री श्री अरविन्द घोष ने वर्ष 1928 में पांडिचेरी में अरविंद आश्रम की स्थापना की।

Section 2 अति लघुउत्तरीय प्रश्न

अति लघुउत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 16. पाठशाला को बाग, शिशु को पौधा और शिक्षक को माली कहने वाले विचारक का नाम लिखिए।

उत्तर: जर्मन शिक्षाविद् फ्रेडरिक फ्रॉबेल के अनुसार स्कूल एक बाग है अध्यापक एक माली तथा उसमें पढ़ने वाले बच्चे पौधों के समान हैं। रूसो, फ्राबेल, मारिया मॉटेसरी, जॉन डिवी, महात्मा गाँधी आदि कुछ महान विचारकों ने शिक्षा के लिए करके सीखने के सिद्धांत को माना है।

प्रश्न 17. प्रयोजनवाद किसमें आस्था नहीं रखता है?

उत्तर: प्रयोजनवाद जीवन की वास्तविक परिस्थितियों में विश्वास रखता है जबकि समाज में व्याप्त रूढ़ियों, मान्यताओं, बंधनों, परम्पराओं, अंधविश्वासों आदि में कोई आस्था नहीं रखता है। मन और आत्मा जैसी अमूर्त धारणाओं को नहीं मानता है

प्रश्न 18. प्रश्न शिक्षण विधि के जनक कौन हैं?

उत्तर: यूनानी दार्शनिक एवं शिक्षाविद् सुकरात को प्रश्न शिक्षण विधि का जनक माना जाता है, उनका विचार था कि विचारशील प्रश्न के अनुशासित अभ्यास ने छात्र को तार्किक रूप से विचारों की जाँच करने और उन विचारों की वैधता निर्धारित करने में सक्षम बनाया है।

प्रश्न 19. प्रकृतिवाद को दूसरे किस नाम से जाना जाता है?

उत्तर: प्रकृतिवाद को भौतिकवाद, पदार्थवाद के नाम से भी जाना जाता है। प्रकृतिवाद, प्रकृति को ही मूल तत्व मानता है। इस दर्शन के अनुसार प्रकृति ही सर्वस्व है, यह उससे परे किसी भी ईश्वरीय सत्ता को नहीं मानता है। इसके अनुसार भौतिक संसार ही सत्य है और आध्यात्मिक संसार केवल एक कल्पना मात्र है। वस्तुतः यह दर्शन मन और आत्मा जैसी अमूर्त धारणाओं को नहीं मानता है

प्रश्न 20. फ्रॉबेल ने किंडरगार्डेन कब प्रारम्भ किया ?

उत्तर: फ्रॉबेल के अनुसार "शिक्षण का उद्देश्य मनुष्य में निहित शक्तियों का निरंतर विकास करना है, न कि उसको और अधिक ज्ञान प्रदान करना। फ्रॉबेल ने वर्ष 1805 में शिक्षण कार्य आरंभ किया, 1839 में उन्होनें एक विद्यालय खोला जिसका नाम उन्होनें बालोद्यान अथवा किण्डरगार्डन रखा। वे कहते हैं कि हमें अपने बच्चों के लिए जीवित रहना चाहिए।

प्रश्न 21. समाज के प्रमुख कार्य लिखिए।

उत्तर: समाज के प्रमुख कार्य-

  1. बच्चों के शिक्षा के लिए अनुकूल माहौल देना।
  2. बच्चों के लिए शिक्षा संस्थानों की स्थापना करना।
  3. संस्था के सुचारू रूप से संचालन के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करना।
  4. बच्चों को नैतिक जानकारी प्रदान करना।

प्रश्न 22. मूल्य का अर्थ लिखिए।

उत्तर: मूल्य-मूल्य समाज द्वारा मान्यता प्राप्त इच्छाएँ और लक्ष्य हैं। जिन्हें सीखने या सामाजीकरण की प्रक्रिया के माध्यम से आंतरिक किया जाता है।
विभिन्न परिभाषाएँ: -

  1. मूल्य वे वस्तुएँ हैं, जिनका सामाजिक समूह के सदस्यों के लिए कुछ अर्थ और तथ्य होते हैं थामस और जैनिकी
  2. मूल्य वह महत्व है, जो किसी एक वस्तु का उसी वर्ग की अन्य वस्तुओं की तुलना में हम देते हैं वारेन एच. एसी.

प्रश्न 23. बाल - अपराध के प्रमुख बिन्दु कितने प्रकार का होता है?

उत्तर: बाल अपराध के निम्नलिखित प्रमुख बिन्दु हैं-

  1. गरीबी
  2. भुखमरी
  3. अशिक्षा
  4. जागरूकता
  5. सामाजिक वातावरण
  6. मानसिक महत्वाकांक्षा

प्रश्न 24. कलकत्ता मदरसा किस सन् में खुला ?

उत्तर: वर्ष 1781 में प्रथम गवर्नर जनरल लार्ड वारेन हेस्टिंग्स ने कोलकाता में मदरसा की स्थापना की। इस मदरसे में फारसी, अरबी तथा मुस्लिम कानून को पढ़ाया जाता था और इससे पढ़े लोग ब्रिटिश शासन में दुभाषिए के रूप में काम करते थे।

प्रश्न 25. बनारस संस्कृत कालेज कब और किसके द्वारा प्रारम्भ किया गया है?

उत्तर: बनारस संस्कृत कालेज की स्थापना-बनारस संस्कृत कालेज की स्थापना वर्ष 1791 में जोनाथन डंकन के द्वारा किया गया था। इस कालेज की स्थापना करने का उद्देश्य हिंदू कानून और दर्शन का अध्ययन और संरक्षण करना था, 1795 ई. में जोनाथन डंकन बम्बई के राज्यपाल थे।

प्रश्न 26. मैकाले ने अपना विवरण पत्र कब प्रस्तुत किया?

उत्तर: लार्ड मैकाले का विवरण पत्र- मैकाले ने अपना विवरण पत्र 2 फरवरी 1835 को गवर्नर जनरल को पेश किया। लार्ड मैकाले को शिक्षा समिति के प्रमुख के रूप में नियुक्त किया गया था और भारत के लिये नई शिक्षा प्रणाली तैयार करने का कार्य दिया गया। लार्ड मैकाले द्वारा प्रस्तुत शिक्षा नीति को अधोगामी निस्पंदन का सिद्धांत के नाम से जाना जाता है, जिसका अर्थ है- शिक्षा का प्रवाह उच्च वर्ग से निम्न वर्ग की तरफ है। मैकाले का उद्देश्य था भारत के उच्च वर्ग तथा मध्यम वर्ग के एक छोटे से हिस्से को शिक्षित करना ताकि ऐसा वर्ग तैयार हो जो रंग और खून से भारतीय हो लेकिन विचारों, नैतिकता तथा बुद्धिमत्ता से अंग्रेज हो।

प्रश्न 27. वुड घोषणा पत्र के आधार पर कम्पनी ने शिक्षा नीति कब घोषित की?

उत्तर: वुड घोषणा पत्र के आधार पर कम्पनी की शिक्षा नीति-सन् 1854 में सर चार्ल्स वुड ने अंग्रेजी शिक्षा के प्रचार प्रसार और महिलाओं की शिक्षा के लिये वर्तमान गवर्नर जनरल लार्ड डलहौजी को एक पत्र लिखा, जिसे वुड का घोषणा पत्र कहा गया। इस घोषणा पत्र का उद्देश्य था, प्राथमिक विद्यालयों (1-5) तक की शिक्षा बालक की मातृभाषा में हो और उच्च शिक्षा (विश्वविद्यालय की शिक्षा) का माध्यम अंग्रेजी भाषा होना चाहिए। वुड के घोषणा पत्र में यूरोपीय ज्ञान का प्रसार, जन-शिक्षा प्रसार, प्राच्य शिक्षा को बढ़ावा देना, महिला और व्यावसायिक शिक्षा को बढ़ावा देना था। वुड घोषणा पत्र को भारतीय शिक्षा का मैग्नाकार्टा कहा जाता है। प्रारम्भिक शिक्षा को बालक की मातृभाषा में देने का सुझाव सर्वप्रथम वुड डिस्पैच ने ही दिया, जो वर्तमान शिक्षा नीति में भी लागू किया गया है।

प्रश्न 28. निरौपचारिक शिक्षा के विभिन्न साधनों में किस आयु वर्ग के लिए अधिक दबाव डाला गया?

उत्तर: शिक्षा के मुख्यतः तीन प्रकार हैं-

  1. औपचारिक शिक्षा
  2. अनौपचारिक शिक्षा
  3. गैर-औपचारिक (निरौपचारिक)

निरौपचारिक शिक्षा के विभिन्न साधन- निरौपचारिक शिक्षा, अनौपचारिक शिक्षा की तरह पूर्णरूपेण अनियन्त्रित नहीं है, न ही औपचारिक शिक्षा की तरह पूर्णरूपेण नियन्त्रित है। निरौपचारिक शिक्षा में नियन्त्रण के साथ अनियन्त्रण होता है। निरौपचारिक शिक्षा में आयु, स्थान, शिक्षण विधि आदि में कोई नियन्त्रण नहीं होता परन्तु पाठ्यक्रम, परीक्षा आदि क्षेत्रों में नियन्त्रण होता है। निरौपचारिक शिक्षा के विभिन्न प्रकार हैं, जैसे-प्रौढ़ शिक्षा, सतत् शिक्षा, खुली शिक्षा और दूरस्थ शिक्षा, मुक्त विश्वविद्यालय, शैक्षिक रेडियो, शैक्षिक दूरदर्शन आदि। इसके अन्तर्गत विद्यार्थियों को निरौपचारिक शिक्षा औपचारिक शिक्षा अनौपचारिक शिक्षा के लिए 15 से 35 वर्ष की आयु वर्ग के लिए अधिक दबाव डाला गया है।

प्रश्न 29. "शिक्षा के वैयक्तिक और सामाजिक उद्देश्यों का समन्वय आवश्यक है, क्योंकि शिक्षा व्यक्ति की खुशी और राज्य कल्याण के लिए है" यह कथन किसका है?

उत्तर: शिक्षा के वैयक्तिक और सामाजिक उद्देश्यों का समन्वय आवश्यक है, क्योंकि शिक्षा व्यक्ति की खुशी और राज्य कल्याण के लिए है- यह कथन महान दार्शनिक प्लेटो का है। प्लेटो ने शिक्षा को मनुष्य के सर्वांगीण विकास का एक माध्यम बताया है। प्लेटो का कहना है कि शिक्षा के माध्यम से ही किसी देश, राज्य या प्रदेश में नैतिक व्यवस्था को बनाये रखना सम्भव है। प्लेटो का मानना है, शिक्षा ही नैतिक सुधार का एकमात्र माध्यम है। इसके द्वारा मानवीय आत्मा को किसी भी दिशा में रूपांतरित किया जा सकता है। शिक्षा के सामाजिक उद्देश्य का जन्म शिक्षा के व्यैक्तिक उद्देश्य की प्रतिक्रिया के परिणामस्वरूप हुआ है। इस उद्देश्य के समर्थक व्यक्ति की अपेक्षा समाज को ऊँचा मानते हैं। उनका अटल विश्वास है कि व्यक्ति स्वभाव से सामाजिक प्राणी है।

प्रश्न 30. प्राथमिक शिक्षा कब प्रारम्भ होती है?

उत्तर: प्राथमिक शिक्षा - प्राथमिक शिक्षा 5 वर्ष की आयु से प्रारंभ हो जाती है, परन्तु वर्तमान समय में शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 के द्वारा प्राथमिक शिक्षा 6 वर्ष की आयु से प्रारंभ होती है। जब बालक 6 वर्ष की आयु पूर्ण कर लेता है तो उससे प्राथमिक शिक्षा प्रारम्भ करने की उम्मीद की जा सकती है।
Note-RTE के अनुसार प्राथमिक शिक्षा 6-14 वर्ष तक दी जाती है।

Section 3 लघु उत्तरीय प्रश्न

लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 31. माध्यमिक शिक्षा आयोग के अध्यक्ष कौन थे? इसकी नियुक्ति कब हुई?

उत्तर: माध्यमिक शिक्षा आयोग के अध्यक्ष डॉ. ए. लक्ष्मणस्वामी मुदालियर थे, इसलिए इस आयोग को "मुदालियर आयोग" भी कहा जाता है। भारत सरकार ने 23 सितम्बर 1952 को माध्यमिक शिक्षा आयोग की स्थापना की। इसका कार्य माध्यमिक स्तर की शिक्षा व्यवस्था, संरचना की जाँच करना और तत्कालीन समस्याओं का पता लगाकर इसके संदर्भ में भारत सरकार को आवश्यक सुझाव देना था।
माध्यमिक शिक्षा आयोग के सुझाव-

  1. 4 या 5 वर्ष की प्राइमरी शिक्षा।
  2. सेकण्डरी शिक्षा के दो भाग होने चाहिए।
  3. वस्तुनिष्ठ (MCQ) परीक्षण पद्धति को अपनाना चाहिए।
  4. संख्यात्मक अंक देने के बजाय सांकेतिक अंक दिया जाए।

प्रश्न 32. हण्टर कमीशन की विशेषता क्या थी?

उत्तर: हण्टर आयोग के गुण/विशेषताएँ -

  1. आयोग ने भारतीय शिक्षा में ईसाई मिशनरियों को प्रमुख स्थान न देने कारण भारतीयों के साथ काफी उदारता दिखायी क्योंकि वे अब शिक्षा की आड़ में ईसाई धर्म का प्रचार नहीं कर सकते थे।
  2. आयोग ने प्राथमिक शिक्षा के पाठ्यक्रम में कृषि, भौतिकशास्त्र, चिकित्सा, क्षेत्रमिति, बहिखाता आदि विषयों का समावेश कर उसे व्यावहारिक एवं जीवनोपयोगी बना दिया।
  3. पाठ्यक्रम में व्यवसायी विषयों को जोड़कर बालक को स्वावलंबी बनाया।

हण्टर कमीशन भारत में शिक्षा के विकास में एक महत्त्वपूर्ण मोड़ था। इस आयोग ने शिक्षा प्रणाली में कई महत्वपूर्ण बदलाव लाए, जिनका प्रभाव आज भी देखा जा सकता है।

प्रश्न 33. वुड के घोषणा-पत्र के चार दोष लिखिए।

उत्तर: वुड के घोषणा-पत्र के दोष-

  1. घोषणा पत्र में अंग्रेजी शिक्षित लोगों को नौकरियों में रखा गया था। इससे अंग्रेजी का महत्त्व बढ़ गया और देशी भाषाओं का महत्व कम हो गया।
  2. घोषणा पत्र में लन्दन विश्वविद्यालय को आदर्श मानकर विश्वविद्यालयों की स्थापना का सुझाव दिया गया। इससे तक्षशिला तथा नालन्दा जैसे विश्वविद्यालयों का महत्व कम हो गया।
  3. शिक्षा की सम्पूर्ण जिम्मेदारी सरकार को सौंपकर शिक्षा को पूर्णतया राज्य के अधीन करके उस पर नौकरशाही का आधिपत्य स्थापित कर दिया गया।
  4. शिक्षा के महत्त्व के साथ ईसाई धर्म और साहित्य का प्रचार भी बढ़ा और लोगों को ईसाई बनने के लिए प्रेरित किया गया।

प्रश्न 34. मैकाले को भारतीय शिक्षा का अग्रदूत माना जाता है। लिखिए।

उत्तर:

  1. मैकाले को भारतीय शिक्षा का अग्रदूत माना जाता है क्योंकि वह पहला अंग्रेज विद्वान था, जिसके विचारों से प्रभावित होकर एक ऐसी सरकारी नीति निर्धारित हुई थी, जिससे प्राच्य पाश्चात्य विवाद खत्म हो गया और आधुनिक अंग्रेजी शिक्षा की नींव पड़ गयी।
  2. मैकाले के विवरण-पत्र ने भारत के लिए प्राच्य-पाश्चात्य ज्ञान विज्ञान के द्वार खोल दिये।
  3. अंग्रेजी शिक्षा ने भारतीय जनमानस में समानता, स्वतंत्रता और बन्धुत्व की भावनाएँ उत्पन्न करके उनमें राजनैतिक जागृति उत्पन्न की। यदि भारत में अंग्रेजी शिक्षा का प्रादुर्भाव न हुआ होता तो भारत में स्वतंत्रता संग्राम भी कभी न छिड़ता।

प्रश्न 35. मिशनरी स्कूल की विशेषताएँ लिखिए।

उत्तर: मिशनरी स्कूलों की विशेषताएँ -

  1. मिशनरी स्कूलों को ही कक्षा शिक्षण प्रणाली शुरू करने का श्रेय जाता है।
  2. मिशनरी स्कूलों में आधुनिक शिक्षण विधियों का प्रयोग किया जाता है।
  3. मिशनरी स्कूलों में गरीब और मेधावी छात्रों को छात्रवृत्ति प्रदान किया जाता है।
  4. मिशनरी स्कूलों में शिक्षा का स्तर उच्च होता है, शिक्षक योग्य और अनुभवी होते हैं।
  5. मिशनरी स्कूलों के प्राथमिक स्कूलों में शिक्षा का माध्यम भारतीय भाषाएँ थी।

प्रश्न 36. सर्वशिक्षा अभियान के अन्तर्गत 31 मार्च 2009 में कुल कितना खर्च हुआ?

उत्तर: समस्त छात्रों को बुनियादी शिक्षा के दायरे में लाने हेतु प्रदेश में 86वें संवैधानिक संशोधन के तहत सन् 2001-02 में सर्वशिक्षा अभियान की शुरूआत की गई थी। इस अधिनियम के अन्तर्गत 31 मार्च 2009 तक सूबे में 13,328.79 करोड़ व्यय किये जा चुके थे। सर्वशिक्षा अभियान 9वीं पंचवर्षीय योजना (1997-2002) के तहत शुरू किया गया था। 9वीं पंचवर्षीय योजना "सामाजिक न्याय और समानता के साथ विकास" के उद्देश्य से शुरू की गई थी। इसने कृषि विकास को भी प्राथमिकता दी। ऋण कार्यक्रमों का आयोजन सरकार की वित्तीय स्थिति को बढ़ाने पर जोर दिया गया था। सर्वशिक्षा अभियान के तहत सरकारी आँकड़ों के अनुसार 2011 तक 3,66,559 नये विद्यालय खोलें जा चुके थे, 2,81,943 विद्यालयों हेतु भवन बनवाए जा चुके थे और 12,77.072 कमरे बनवाये जा चुके थे। 1,92,486 स्कूलों में स्वच्छ जल की व्यवस्था की जा चुकी थी और 3,19,607 स्कूलों में शौचालयों का प्रावधान किया जा चुका था। सर्वेक्षण के आँकड़े यह भी बताते हैं कि अब तक 11,30,000 नए शिक्षक नियुक्त किये जा चुके थे और लगभग 10 करोड़ बच्चों को प्रतिवर्ष निःशुल्क पाठ्यपुस्तकों को वितरित करने की व्यवस्था की जा चुकी थी।

प्रश्न 37. बाल-अपराध कब और किसने निर्धारित किया?

उत्तर: बाल अपराध दों शब्दों से मिलकर बना हैं। बाल + अपराध। अतः बच्चों द्वारा किया जाने वाला अपराध ही 'बाल अपराध' कहलाता है। दूसरे शब्दों में जब किसी बच्चे द्वारा कानून या समाज के खिलाफ कोई कार्य किया जाता है। तब उसे बाल अपराध की संज्ञा दी जाती है। भारत में बाल न्याय अधिनियम, 1986 (संशोधित 2000) के तहत 16 वर्ष की आयु तक के बालकों एवं 18 वर्ष की आयु तक की बालिकाओं द्वारा किये गए कानून विरोधी कार्य बाल अपराध की श्रेणी में आते हैं। यह अलग बात है कि राज्य एवं देश के अनुसार बाल अपराधी की अधिकतम आयु सीमा भी अलग हो सकती है। सन् 1986 में बाल न्याय अधिनियम पारित किया गया, जिससे सारे देश में एक समान बाल अधिनियम लागू कर दिया गया, सितम्बर 1965 में राष्ट्रसंघ द्वारा किशोर न्याय प्रशासन हेतु कानून पारित किया गया, जो न्यूनतम मानक नियमों को स्वीकार करते हुए उनके अनुरूप अपनी किशोर न्याय व्यवस्था लागू कर सके।

प्रश्न 38. राष्ट्रीय एकता प्राप्त करने हेतु साधन बताइए

उत्तर: भारत में राष्ट्रीय एकता: भारत जैसे देश में समाज के सभी वर्गों के बीच एकता बढ़ाने के लिए भारत में "राष्टीय एकता" बहुत महत्वपूर्ण है। भारत एक एकीकृत सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक संरचना वाला देश है। यह उन लोगों के एक समूह को संदर्भित करता है जिनके जीवन के तरीके काफी समान हैं।
राष्ट्रीय एकता प्राप्त करने के निम्न साधन है-

  1. सभी बालकों को देश के विभिन्न पहलुओं का ज्ञान कराया जाये।
  2. बालकों को स्वतंत्रता प्राप्ति के सम्बन्ध में प्रमुख घटनाओं का ज्ञान कराया जाये।
  3. देश की विभिन्न जातियों तथा सम्प्रदायों में राष्ट्रीय एकता को विकसित करने वाली पढ़ाई-लिखाई पर विशेष बल दिया जाये।
  4. सामाजिक-सांस्कृतिक और आर्थिक मतभेदों या असमानताओं को कम करना आपसी एकजुटता को मजबूत करना।

प्रश्न 39. अन्तर्राष्ट्रीय एकता बनाने में अध्यापक की भूमिका बताइए।

उत्तर: अन्तर्राष्ट्रीय एकता बनाने में अध्यापक की भूमिकाः- सच ही कहा गया है कि राष्ट्र को शक्तिशाली व पूर्ण आत्मनिर्भर बनाने के लिए राष्ट्रीयता एवं अन्तर्राष्ट्रीयता की भावना अति आवश्यक है, परन्तु यह राष्ट्रीयता की भावना केवल शिक्षा के माध्यम से ही सम्भव है। शिक्षा के क्षेत्र में शिक्षक महत्वपूर्ण भूमिका निभात है। राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय भावना को जाग्रत करने के लिए शिक्षक या अध्यापक की निम्नलिखित भूमिका होनी चाहिए-

  1. पूर्ण आस्था- अध्यापक की भावनात्मक व राष्ट्रीय / अन्तर्राष्ट्रीय एकता के लिए विचार एवं दर्शन में पूर्ण आस्था होनी चाहिए, तभी अपने विद्यार्थियों में इस भावना का विकास कर सकता है। अध्यापक ही इस भावना को बच्चों में विकसित कर सकता है।
  2. राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय मूल्यों का विकास :- अध्यापक का जीवन अच्छे मूल्यों पर आधारित होता है। वही अच्छा अध्यापक कहलाता है। जिसमें अच्छे मूल्य होते हैं और वही विद्यार्थियों में मूल्यों का विकास करके राष्ट्रीय/अंतर्राष्ट्रीय एकता की भावना का विकास करते हैं।
  3. उचित वातावरण तैयार करना : अध्यापक स्कूल में एक अच्छा व उचित वातावरण तैयार करता है, जिसमें विद्यार्थियों में प्रेम व देशभक्ति विकसित होती है तथा घृणा व कुदृष्टिकोण की समाप्ति होती है।
  4. नैतिक कर्तव्य- एक अध्यापक अपने विद्यार्थियों को नैतिक कर्तव्यों का पाठ पढ़ाता है। जिसके माध्यम से वह विद्यार्थियों के दिलों में देशभक्ति व देश प्रेम का दीपक जलाता है।
  5. सामाजिक कुरीतियों का विरोधः - अध्यापक वर्ग सामाजिक कुरीतियों के द्वारा देश में होने वाले हानिकारक प्रभाव से अवगत करवाता है। जिससे विद्यार्थियों को अच्छाई व बुराई का ज्ञान होता है। व देश में इन कुरीतियों को दूर करने के लिए उन्हें प्रेरणा मिलती है। जिसके कारण उनमें राष्ट्रीय/अन्तर्राष्ट्रीय एकता की भावना उत्पन्न होती है।
  6. जीवन दर्शन :- अध्यापक के जीवन दर्शन का विद्यार्थियों के जीवन पर बड़ा प्रभाव पड़ता है। अध्यापक के जीवन दर्शन में राष्ट्र प्रेम, राष्ट्रीय एकता व भावनात्मक एकता की झलक दिखाई देनी चाहिए।
  7. भाषा नीति :- भाषा ही बालकों में भावनात्मक तथा राष्ट्रीयता का विकास करता है। भाषा नीति द्वारा अध्यापक अपने विद्यार्थियों में राष्ट्रीय भाषा को प्रोत्साहित करके राष्ट्रीय/अन्तर्राष्ट्रीय प्रक्रम जाग्रत करता है।
  8. साहित्य का ज्ञान- अध्यापक अपने विद्यार्थियों को साहित्य का ज्ञान कराता है तथा साहित्य की सहायता से ही राष्ट्रीय प्रेम/अन्तर्राष्ट्रीय प्रेम, राष्ट्रीय व अन्तर्राष्ट्रीय भक्ति का बोध विद्यार्थियों को कराता है।
  9. मातृभाषा :- राष्ट्रीय व अन्तर्राष्ट्रीय एकता की भावना का विकास करने के लिए अति आवश्यक है कि अध्यापक मातृभाषा को महत्व देकर राष्ट्रीयता का पाठ पढ़ाए तथा इसके माध्यम से राष्ट्रभाषा को महत्व दें। इस प्रकार अध्यापक मातृभाषा के माध्यम से राष्ट्रीय भाषा को महत्व देकर, राष्ट्रीयता व अन्तर्राष्ट्रीयता का पाठ बच्चों को पढ़ाता है।

प्रश्न 40. मूल्य का अर्थ लिखिए।

उत्तर: मूल्य किसी भौतिक वस्तु अथवा मानसिक अवस्था के उस गुण का बोध कराता है, जिसके द्वारा मनुष्य की आवश्यकताओं एवं इच्छाओं की पूर्ति होती है। यह नियमों का समूह होता है, जो सही-गलत को निर्देशित करता है। इस आधार पर मूल्य समाज द्वारा निर्धारित विश्वास है। जिसे समय या व्यक्ति के द्वारा अच्छा समझा जाता है।
मूल्य की आवश्यकता: मूल्य हमें दिशा और उद्देश्य के साथ जीने में मदद करते हैं- एक मार्गदर्शक कम्पास की तरह। हमारे जीवन में जो कुछ भी चल रहा है, हमारे मूल्य हमें आगे का रास्ता दिखा सकते हैं और बेहतर विकल्प चुनने में मदद कर सकते हैं। मूल्य हमारी स्वयं की भावना से जुड़े हुए हैं और वे हमारे मानसिक स्वास्थ के लिए आवश्यक हैं।
मूल्यों का महत्व : मूल्यों के अभाव में मानव जीवन व्यर्थ है। मूल्यों के विकास द्वारा ही बालकों एवं मनुष्यों को एक आदर्श नागरिक बनाया जा सकता है। मूल्यों के महत्व निम्न हैं-

  1. व्यक्तिगत विकास में मूल्यों का अहम किरदार होता है, इसके माध्यम से सामाजिक, राजनीतिक, आर्थिक तथा मानवीय मूल्यों का विकास होता हैं।
  2. मानवता के विकास में मूल्य महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। इससे राष्ट्र के अन्तर्गत ही नहीं, बल्कि समस्त विश्व में शक्ति कायम करने एवं विश्व बन्धुत्व की भावना के विकास में महत्वपूर्ण योगदान प्राप्त होता है।
  3. शिक्षा सुधार में मूल्यों का महत्व अत्यन्त व्यापक है। इसके द्वारा बालकों में स्वानुशासन का बोध कराया जाना आसान होता है।
  4. मूल्य समाज में एकरूपता लाकर व्यक्ति को व्यवस्थित, संगठित एवं सशक्त बनाते हैं। व्यक्ति की बहुमुखी क्रियाओं को निर्देशित भी करते हैं।

Question Paper PDF

इस प्रश्न पत्र की PDF डाउनलोड करें।

PDF Download

वर्तमान भारतीय समाज और प्रारंभिक शिक्षा Previous Year Paper 2017

Solved question paper PDF download.

Complete 10 Years Solved PYQ Collection

2015 से 2025 तक के solved previous year papers, महत्वपूर्ण प्रश्न, उत्तर एवं PDF resources एक ही package में प्राप्त करें और अपनी UP DELED परीक्षा की तैयारी को मजबूत बनाएं।