बहुविकल्पीय प्रश्न
प्रश्न 1. "शिक्षा एक त्रिमुखी प्रक्रिया है।" यह कथन किसका है?
(a) जॉन डीवी
(b) अरस्तू
(c) एडम्स
(d) सुकरात
उत्तर: (a) जॉन डीवी
जॉन डीवी ने शिक्षा को त्रिमुखी अथवा त्रिध्रुवीय प्रक्रिया माना, जिसमें शिक्षक, शिक्षार्थी तथा सामाजिक वातावरण प्रमुख तत्त्व हैं।
प्रश्न 2. शिक्षा का प्रमुख उद्देश्य है—
(a) शारीरिक विकास
(b) मानसिक विकास
(c) सर्वांगीण विकास
(d) सांवेगिक विकास
उत्तर: (c) सर्वांगीण विकास
शिक्षा का प्रमुख उद्देश्य बालक के शारीरिक, मानसिक, सामाजिक, नैतिक एवं सांवेगिक पक्षों का संतुलित अर्थात् सर्वांगीण विकास करना है।
प्रश्न 3. प्रश्नोत्तर विधि के जनक हैं—
(a) सुकरात
(b) प्लेटो
(c) अरस्तू
(d) फ्रॉबेल
उत्तर: (a) सुकरात
यूनानी दार्शनिक सुकरात को प्रश्नोत्तर अथवा सुकराती विधि का जनक माना जाता है। इस विधि में प्रश्नों के माध्यम से शिक्षार्थी को विचार एवं सत्य की खोज की ओर प्रेरित किया जाता है।
प्रश्न 4. शिक्षण को रोचक एवं प्रभावशाली बना देती हैं—
(a) चित्रकला
(b) विज्ञान
(c) शिक्षण में प्रयुक्त युक्तियाँ
(d) लेखन कला
उत्तर: (c) शिक्षण में प्रयुक्त युक्तियाँ
उपयुक्त शिक्षण युक्तियाँ विषय-वस्तु को सरल, स्पष्ट, रोचक एवं प्रभावशाली बनाने में सहायता करती हैं।
प्रश्न 5. बुनियादी शिक्षा किस दार्शनिक से सम्बन्धित है?
(a) प्लेटो
(b) महात्मा बुद्ध
(c) रवीन्द्रनाथ टैगोर
(d) महात्मा गाँधी
उत्तर: (d) महात्मा गाँधी
महात्मा गाँधी ने बुनियादी शिक्षा अथवा नई तालीम का प्रतिपादन किया। इसमें शिल्प, श्रम, स्वावलम्बन तथा करके सीखने पर विशेष बल दिया गया।
प्रश्न 6. विश्व जल दिवस कब मनाया जाता है?
(a) 17 फरवरी
(b) 11 फरवरी
(c) 22 मार्च
(d) 8 जून
उत्तर: (c) 22 मार्च
प्रत्येक वर्ष 22 मार्च को विश्व जल दिवस मनाया जाता है। इसका उद्देश्य जल के महत्व एवं जल-संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाना है।
प्रश्न 7. पाठशाला को एक बाग, शिशु को पौधा व शिक्षक को माली किसने कहा है?
(a) रूसो
(b) जॉन डीवी
(c) मारिया मॉण्टेसरी
(d) फ्रॉबेल
उत्तर: (d) फ्रॉबेल
फ्रॉबेल ने विद्यालय की तुलना बगीचे, बालक की तुलना पौधे तथा शिक्षक की तुलना माली से की। इसी विचार से उनकी किंडरगार्टन पद्धति जुड़ी है।
प्रश्न 8. ‘दिवास्वप्न’ नामक पुस्तक के रचनाकार हैं—
(a) स्वामी विवेकानन्द
(b) राधाकृष्णन
(c) गिजुभाई बधेका
(d) रूसो
उत्तर: (c) गिजुभाई बधेका
‘दिवास्वप्न’ गिजुभाई बधेका की प्रसिद्ध शैक्षिक कृति है। इसमें बाल-केन्द्रित एवं आनंदपूर्ण शिक्षा पर विशेष बल दिया गया है।
प्रश्न 9. घर पर दी जाने वाली शिक्षा कहलाती है—
(a) अनौपचारिक शिक्षा
(b) दूरस्थ शिक्षा
(c) गैर-औपचारिक शिक्षा
(d) औपचारिक शिक्षा
उत्तर: (a) अनौपचारिक शिक्षा
परिवार एवं घर के वातावरण से स्वाभाविक रूप से प्राप्त होने वाली शिक्षा अनौपचारिक शिक्षा का उदाहरण है। इसमें निश्चित पाठ्यक्रम, समय-सारणी एवं विद्यालय आवश्यक नहीं होते।
प्रश्न 10. "प्रत्येक वस्तु जो प्राकृतिक है, अच्छी है, परन्तु मनुष्य के हाथों में खराब हो जाती है।" यह कथन किसका है?
(a) प्लेटो
(b) अरस्तू
(c) रूसो
(d) फ्रॉबेल
उत्तर: (c) रूसो
यह विचार रूसो की प्रकृतिवादी विचारधारा से सम्बन्धित है। रूसो ने बालक के स्वाभाविक एवं प्राकृतिक विकास पर विशेष बल दिया।
प्रश्न 11. ‘प्रोजेक्ट पद्धति’ किस दर्शन की प्रमुख विधि मानी जाती है?
(a) यथार्थवाद
(b) प्रकृतिवाद
(c) आदर्शवाद
(d) प्रयोजनवाद
उत्तर: (d) प्रयोजनवाद
प्रोजेक्ट पद्धति प्रयोजनवादी शिक्षा-दर्शन की प्रमुख शिक्षण-विधि मानी जाती है। यह उद्देश्यपूर्ण क्रिया, अनुभव एवं करके सीखने पर आधारित है।
प्रश्न 12. मूल प्रवृत्ति सिद्धान्त किस दर्शन पर आधारित है?
(a) प्रकृतिवाद
(b) आदर्शवाद
(c) यथार्थवाद
(d) सांख्य दर्शन
उत्तर: (a) प्रकृतिवाद
प्रकृतिवाद बालक की जन्मजात शक्तियों, मूल प्रवृत्तियों और स्वाभाविक विकास को महत्व देता है। अतः मूल प्रवृत्ति सिद्धान्त को प्रकृतिवाद से सम्बन्धित माना जाता है।
प्रश्न 13. मूल्य हमारे व्यवहार को क्या करते हैं?
(a) दर्शित
(b) प्रेरित
(c) नियन्त्रित
(d) उपर्युक्त सभी
उत्तर: (c) नियन्त्रित
मूल्य व्यक्ति के व्यवहार के लिए मानक निर्धारित करते हैं तथा उसे उचित दिशा और नियंत्रण प्रदान करते हैं। दिए गए विकल्पों में नियन्त्रित अभीष्ट उत्तर है।
प्रश्न 14. ‘मकतब’ शब्द किस स्तर की शिक्षा से सम्बन्धित है?
(a) प्राथमिक स्तर
(b) माध्यमिक स्तर
(c) उच्च स्तर
(d) उपर्युक्त सभी
उत्तर: (a) प्राथमिक स्तर
मुस्लिमकालीन शिक्षा-व्यवस्था में मकतब प्राथमिक शिक्षा के केन्द्र थे, जबकि मदरसे सामान्यतः उच्च स्तर की शिक्षा से सम्बन्धित थे।
प्रश्न 15. आदर्शवाद का श्रेष्ठ योगदान किस क्षेत्र में है?
(a) शिक्षण विधि
(b) पाठ्यक्रम
(c) उद्देश्य
(d) अनुशासन
उत्तर: (c) उद्देश्य
आदर्शवाद ने शिक्षा के उद्देश्यों—विशेषकर आत्मानुभूति, चरित्र-निर्माण, नैतिक एवं आध्यात्मिक विकास—को स्पष्ट रूप देने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। इसलिए आदर्शवाद का श्रेष्ठ योगदान शिक्षा के उद्देश्य के क्षेत्र में माना जाता है।
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अति लघु उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 16. रूसो का जन्म कब और कहाँ हुआ था?
उत्तर: रूसो का जन्म 28 जून 1712 को जेनेवा में हुआ था। वे प्रकृतिवादी शिक्षा-दर्शन के प्रमुख विचारक थे।
प्रश्न 17. ‘सत्यम् शिवम् सुन्दरम्’ किस दर्शन का आधार वाक्य है?
उत्तर: ‘सत्यम् शिवम् सुन्दरम्’ आदर्शवाद का आधार-वाक्य माना जाता है। आदर्शवाद सत्य, कल्याण और सौन्दर्य जैसे शाश्वत मूल्यों की प्राप्ति पर बल देता है।
प्रश्न 18. वैश्विक तापमान वृद्धि से आप क्या समझते हैं? संक्षेप में समझाइए।
उत्तर: पृथ्वी के औसत तापमान में दीर्घकालीन वृद्धि को वैश्विक तापमान वृद्धि या ग्लोबल वार्मिंग कहते हैं। इसका प्रमुख कारण वायुमण्डल में ग्रीनहाउस गैसों की बढ़ती मात्रा है।
प्रश्न 19. मूल्य का क्या अर्थ है? किसी विद्वान की परिभाषा दीजिए।
उत्तर: मूल्य वे आदर्श, विश्वास एवं मानक हैं जो व्यक्ति के व्यवहार और निर्णयों को दिशा देते हैं। जॉन जे. केन के अनुसार, मूल्य वे आदर्श, विश्वास या मानक हैं जिन्हें समाज अथवा समाज के अधिकांश सदस्य स्वीकार करते हैं।
प्रश्न 20. पर्यावरण शब्द किन दो शब्दों से मिलकर बना है?
उत्तर: पर्यावरण शब्द ‘परि’ + ‘आवरण’ से मिलकर बना है। ‘परि’ का अर्थ चारों ओर तथा ‘आवरण’ का अर्थ घेरा या ढकने वाला है।
प्रश्न 21. स्वामी विवेकानन्द जी के बचपन का नाम क्या था?
उत्तर: स्वामी विवेकानन्द का बचपन का नाम नरेन्द्रनाथ दत्त था। उनका जन्म 12 जनवरी 1863 को कलकत्ता में हुआ था।
प्रश्न 22. विश्व जनसंख्या दिवस कब मनाया जाता है?
उत्तर: विश्व जनसंख्या दिवस प्रत्येक वर्ष 11 जुलाई को मनाया जाता है। इसका उद्देश्य जनसंख्या सम्बन्धी महत्वपूर्ण विषयों के प्रति जागरूकता बढ़ाना है।
प्रश्न 23. शिक्षा के सार्वभौमीकरण से क्या आशय है?
उत्तर: शिक्षा के सार्वभौमीकरण का अर्थ सभी बच्चों के लिए शिक्षा की सार्वभौमिक उपलब्धता, नामांकन, नियमित उपस्थिति तथा निर्धारित शिक्षा-स्तर की पूर्णता सुनिश्चित करना है।
प्रश्न 24. बौद्ध शिक्षा क्या है?
उत्तर: बौद्ध धर्म के सिद्धान्तों, नैतिकता एवं ज्ञान पर आधारित प्राचीन शिक्षा-व्यवस्था को बौद्ध शिक्षा कहते हैं। मठों एवं विहारों में शिक्षा दी जाती थी तथा भिक्षु-जीवन में प्रवेश के लिए प्रव्रज्या संस्कार का प्रावधान था।
प्रश्न 25. शिक्षा के सामान्य उद्देश्य बताइए।
उत्तर: शिक्षा के सामान्य उद्देश्यों में सर्वांगीण विकास, चरित्र-निर्माण, जन्मजात शक्तियों का विकास तथा व्यक्ति को योग्य एवं उत्तरदायी नागरिक बनाना प्रमुख हैं।
प्रश्न 26. औपचारिक शिक्षा की कोई एक विशेषता बताइए।
उत्तर: औपचारिक शिक्षा निश्चित शिक्षण संस्था, निर्धारित पाठ्यक्रम, समय-सारणी एवं प्रशिक्षित शिक्षकों के माध्यम से योजनाबद्ध रूप में प्रदान की जाती है।
प्रश्न 27. शिक्षा के प्रभावी कारकों के नाम बताइए।
उत्तर: शिक्षा के प्रमुख प्रभावी कारक अथवा अभिकरण हैं— परिवार, समाज, विद्यालय, राज्य तथा जनसंचार माध्यम।
प्रश्न 28. जनसंचार के चार साधनों के नाम लिखिए।
उत्तर: जनसंचार के चार प्रमुख साधन हैं— समाचार-पत्र, रेडियो, दूरदर्शन तथा इंटरनेट।
प्रश्न 29. प्रदूषण का अर्थ लिखते हुए इसके प्रकारों के नाम बताइए।
उत्तर: पर्यावरण में होने वाला ऐसा अवांछनीय परिवर्तन जो जीव-जगत पर हानिकारक प्रभाव डाले, प्रदूषण कहलाता है। इसके प्रमुख प्रकार हैं— वायु, जल, मृदा और ध्वनि प्रदूषण।
प्रश्न 30. टैगोर को किस धारणा में विश्वास था?
उत्तर: रवीन्द्रनाथ टैगोर सत्यम्, शिवम् और सुन्दरम् के आदर्श तथा मानव, प्रकृति और विश्व के सामंजस्य में विश्वास रखते थे।
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लघु उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 31. शिक्षा में प्रकृतिवाद के योगदान का मूल्यांकन कीजिए।
उत्तर:
प्रकृतिवाद ने परम्परागत, कठोर एवं शिक्षक-केन्द्रित शिक्षा के स्थान पर बालक के स्वाभाविक विकास, स्वतंत्रता और प्रत्यक्ष अनुभव को महत्व दिया। शिक्षा के क्षेत्र में इसके प्रमुख योगदान निम्नलिखित हैं—
- बाल-केन्द्रित शिक्षा: बालक की प्रकृति, रुचि, आवश्यकता एवं योग्यता को शिक्षा का आधार बनाया।
- स्वाभाविक विकास: बालक की जन्मजात शक्तियों के प्राकृतिक विकास पर बल दिया।
- स्वतंत्रता: अनावश्यक बन्धनों के स्थान पर बालक को उचित स्वतंत्रता देने का समर्थन किया।
- अनुभव द्वारा सीखना: प्रत्यक्ष अनुभव, निरीक्षण, खोज और करके सीखने को महत्व दिया।
- प्रकृति से सम्बन्ध: प्राकृतिक वातावरण में सीखने और वास्तविक वस्तुओं का अनुभव प्राप्त करने पर बल दिया।
- प्राकृतिक अनुशासन: दण्ड के स्थान पर कार्यों के स्वाभाविक परिणामों द्वारा अनुशासन विकसित करने पर बल दिया।
- शिक्षक की भूमिका: शिक्षक को आदेश देने वाले के स्थान पर सहायक एवं मार्गदर्शक माना।
रूसो प्रकृतिवादी शिक्षा-दर्शन के प्रमुख विचारकों में माने जाते हैं। प्रकृतिवाद ने आधुनिक बाल-केन्द्रित शिक्षा को महत्वपूर्ण आधार प्रदान किया।
प्रश्न 32. विद्यालय को शिक्षा का प्रभावशाली साधन किस प्रकार बनाया जा सकता है? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
विद्यालय शिक्षा का एक प्रमुख औपचारिक अभिकरण है। उसे प्रभावशाली बनाने के लिए निम्न बातों पर ध्यान देना आवश्यक है—
- अनुकूल वातावरण: विद्यालय का वातावरण सुरक्षित, स्वच्छ, सहयोगपूर्ण और भयमुक्त होना चाहिए।
- योग्य शिक्षक: प्रशिक्षित, संवेदनशील और उत्तरदायी शिक्षकों की व्यवस्था होनी चाहिए।
- बाल-केन्द्रित शिक्षण: शिक्षण में गतिविधि, अनुभव, प्रयोग, परियोजना और सहभागिता पर बल दिया जाए।
- उचित संसाधन: पुस्तकालय, प्रयोगशाला, खेल, शिक्षण-सामग्री एवं डिजिटल साधन उपलब्ध हों।
- मूल्यपरक वातावरण: अनुशासन, सहयोग, समानता, जिम्मेदारी और लोकतांत्रिक मूल्यों का विकास किया जाए।
- सहगामी क्रियाएँ: खेल, कला, सांस्कृतिक कार्यक्रम एवं सामाजिक गतिविधियों को महत्व दिया जाए।
- समुदाय से सम्बन्ध: अभिभावकों एवं समुदाय की सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित की जाए।
इस प्रकार विद्यालय बालक के सर्वांगीण विकास का प्रभावशाली साधन बन सकता है।
प्रश्न 33. जलवायु परिवर्तन से आप क्या समझते हैं?
उत्तर:
तापमान, वर्षा, पवन और अन्य जलवायवीय दशाओं के औसत स्वरूप में लम्बे समय तक होने वाले महत्वपूर्ण परिवर्तन को जलवायु परिवर्तन कहते हैं।
जलवायु में प्राकृतिक कारणों से भी परिवर्तन हो सकता है, किन्तु वर्तमान तीव्र जलवायु परिवर्तन का प्रमुख कारण मानवीय गतिविधियों से वायुमण्डल में कार्बन डाइऑक्साइड, मीथेन आदि ग्रीनहाउस गैसों की मात्रा बढ़ना है।
इसके प्रमुख प्रभाव हैं—
- औसत तापमान में वृद्धि।
- वर्षा के स्वरूप में परिवर्तन।
- हिमनदों एवं ध्रुवीय बर्फ का पिघलना।
- समुद्र-स्तर में वृद्धि।
- सूखा, बाढ़ एवं अत्यधिक गर्मी जैसी चरम मौसमी घटनाओं में वृद्धि।
प्रश्न 34. शिक्षा में जनसंचार की भूमिका के बारे में बताइए।
उत्तर:
रेडियो, दूरदर्शन, समाचार-पत्र, इंटरनेट तथा अन्य डिजिटल माध्यम शिक्षा के महत्वपूर्ण साधन बन गए हैं। शिक्षा में जनसंचार की प्रमुख भूमिकाएँ निम्नलिखित हैं—
- ज्ञान एवं सूचनाओं को कम समय में बड़ी संख्या में शिक्षार्थियों तक पहुँचाना।
- दूरस्थ एवं वंचित क्षेत्रों के विद्यार्थियों तक शैक्षिक सामग्री पहुँचाना।
- ऑडियो, वीडियो, चित्र एवं एनीमेशन द्वारा कठिन विषयों को सरल बनाना।
- समसामयिक घटनाओं एवं नवीन ज्ञान से विद्यार्थियों को परिचित कराना।
- स्व-अध्ययन एवं आजीवन शिक्षा को प्रोत्साहित करना।
- स्वास्थ्य, पर्यावरण, सामाजिक मूल्यों और नागरिक कर्तव्यों के प्रति जागरूकता बढ़ाना।
अतः जनसंचार माध्यम शिक्षा की पहुँच, विविधता और प्रभावशीलता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
प्रश्न 35. प्रकृतिवाद में पाठ्यक्रम किस प्रकार का होना चाहिए? वर्णन कीजिए।
उत्तर:
प्रकृतिवाद के अनुसार पाठ्यक्रम बालक की प्रकृति, रुचियों, आवश्यकताओं, क्षमताओं और वास्तविक जीवन के अनुरूप होना चाहिए।
प्रकृतिवादी पाठ्यक्रम की प्रमुख विशेषताएँ—
- पाठ्यक्रम बाल-केन्द्रित एवं लचीला होना चाहिए।
- प्रत्यक्ष अनुभव एवं क्रियात्मक शिक्षा को महत्व दिया जाना चाहिए।
- प्रकृति-अध्ययन, विज्ञान, गणित, स्वास्थ्य एवं शारीरिक शिक्षा को उचित स्थान मिलना चाहिए।
- खेल, भ्रमण, निरीक्षण और प्रयोग जैसी गतिविधियों को पाठ्यक्रम में सम्मिलित किया जाना चाहिए।
- विषय-वस्तु को बालक के विकास-स्तर तथा व्यक्तिगत भिन्नताओं के अनुसार व्यवस्थित किया जाना चाहिए।
- पुस्तकीय ज्ञान की अपेक्षा वास्तविक जीवन एवं वातावरण से सम्बन्ध स्थापित करने पर बल होना चाहिए।
इस प्रकार प्रकृतिवादी पाठ्यक्रम का उद्देश्य बालक का स्वतंत्र एवं स्वाभाविक विकास करना है।
प्रश्न 36. "शिक्षा के प्रभावी कारक के रूप में" समाज की विवेचना कीजिए।
उत्तर:
समाज शिक्षा का एक महत्वपूर्ण प्रभावी कारक है। शिक्षा की प्रकृति, उद्देश्य, पाठ्यक्रम और व्यवस्था समाज की आवश्यकताओं, संस्कृति और मूल्यों से प्रभावित होती है।
शिक्षा पर समाज का प्रभाव निम्न प्रकार पड़ता है—
- समाजीकरण: समाज बालक को भाषा, व्यवहार, रीति-रिवाज और सामाजिक नियम सिखाता है।
- संस्कृति का हस्तान्तरण: शिक्षा के माध्यम से समाज अपनी संस्कृति एवं परम्पराएँ अगली पीढ़ी तक पहुँचाता है।
- शिक्षा के उद्देश्य: समाज की आवश्यकताएँ शिक्षा के उद्देश्यों को प्रभावित करती हैं।
- मूल्यों का विकास: सहयोग, समानता, उत्तरदायित्व और अनुशासन जैसे सामाजिक मूल्य विकसित होते हैं।
- शैक्षिक संस्थाओं की स्थापना: समाज विद्यालयों एवं अन्य शैक्षिक संस्थाओं के विकास में सहयोग करता है।
- सामाजिक परिवर्तन: समाज की बदलती आवश्यकताओं के अनुसार शिक्षा में भी परिवर्तन होता है और शिक्षा स्वयं समाज-सुधार का माध्यम बनती है।
अतः समाज और शिक्षा एक-दूसरे को निरन्तर प्रभावित करने वाली परस्पर सम्बन्धित प्रक्रियाएँ हैं।
प्रश्न 37. जल संरक्षण क्यों आवश्यक है? बताइए।
उत्तर:
जल जीवन का आधार है, परन्तु उपयोग योग्य मीठे जल की मात्रा सीमित है। जनसंख्या वृद्धि, शहरीकरण, औद्योगीकरण, जल-प्रदूषण और भूजल के अत्यधिक दोहन से जल-संकट बढ़ रहा है। इसलिए जल-संरक्षण अत्यन्त आवश्यक है।
जल-संरक्षण की आवश्यकता—
- भविष्य के लिए पर्याप्त जल उपलब्ध रखने के लिए।
- गिरते भूजल-स्तर को रोकने एवं पुनर्भरण बढ़ाने के लिए।
- कृषि, पेयजल एवं उद्योग की आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए।
- नदियों, तालाबों एवं अन्य जलीय पारिस्थितिक तन्त्रों के संरक्षण के लिए।
- सूखा एवं जल-संकट की परिस्थितियों के प्रभाव को कम करने के लिए।
वर्षा-जल संचयन, जल का पुनः उपयोग, जल-स्रोतों की सफाई और अनावश्यक जल-व्यय रोकना जल-संरक्षण के महत्वपूर्ण उपाय हैं।
प्रश्न 38. मॉण्टेसरी पद्धति के सिद्धान्तों की विवेचना कीजिए।
उत्तर:
मॉण्टेसरी पद्धति बालक की स्वतंत्रता, स्वक्रिया एवं प्राकृतिक विकास पर आधारित है। इसके प्रमुख सिद्धान्त निम्नलिखित हैं—
- स्वतंत्रता का सिद्धान्त: बालक को निर्धारित सीमाओं के भीतर अपनी रुचि के अनुसार कार्य चुनने की स्वतंत्रता मिलनी चाहिए।
- स्व-शिक्षा का सिद्धान्त: बालक विशेष शिक्षण-सामग्री की सहायता से स्वयं सीखता है।
- तैयार वातावरण: कक्षा का वातावरण बालक की आयु, ऊँचाई और विकासात्मक आवश्यकताओं के अनुरूप व्यवस्थित किया जाता है।
- इन्द्रिय-प्रशिक्षण: दृष्टि, श्रवण, स्पर्श, आकार, रंग और भार आदि के अनुभव द्वारा ज्ञानेन्द्रियों का विकास किया जाता है।
- वैयक्तिकता: प्रत्येक बालक की सीखने की गति एवं व्यक्तिगत भिन्नताओं का सम्मान किया जाता है।
- स्वतंत्रता से अनुशासन: बाहरी दण्ड की अपेक्षा स्वयं कार्य करने और जिम्मेदारी ग्रहण करने से आत्मानुशासन विकसित होता है।
- व्यावहारिक जीवन की शिक्षा: दैनिक जीवन की गतिविधियों द्वारा आत्मनिर्भरता, समन्वय और व्यवस्था विकसित की जाती है।
- शिक्षक की भूमिका: शिक्षक ज्ञान थोपने वाला नहीं, बल्कि निरीक्षक, मार्गदर्शक और सहायक होता है।
इस प्रकार मॉण्टेसरी पद्धति बालक को सक्रिय, स्वतंत्र और आत्मनिर्भर शिक्षार्थी बनाने पर बल देती है।
प्रश्न 39. औपचारिक शिक्षा एवं अनौपचारिक शिक्षा में अन्तर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
| आधार | औपचारिक शिक्षा | अनौपचारिक शिक्षा |
|---|---|---|
| स्वरूप | योजनाबद्ध एवं संगठित होती है। | स्वाभाविक एवं अनियोजित रूप से प्राप्त होती है। |
| स्थान | विद्यालय, महाविद्यालय आदि निश्चित संस्थाओं में दी जाती है। | घर, परिवार, समाज, मित्रों और जीवन-अनुभवों से कहीं भी प्राप्त हो सकती है। |
| पाठ्यक्रम | निश्चित एवं पूर्वनिर्धारित पाठ्यक्रम होता है। | कोई निश्चित पाठ्यक्रम नहीं होता। |
| समय | समय-सारणी एवं निर्धारित अवधि होती है। | निश्चित समय-सारणी नहीं होती; जीवनभर चलती रहती है। |
| शिक्षक | प्रशिक्षित एवं नियुक्त शिक्षक होते हैं। | कोई भी व्यक्ति, परिवार, समाज या अनुभव सीखने का स्रोत हो सकता है। |
| मूल्यांकन | परीक्षा एवं प्रमाण-पत्र की व्यवस्था होती है। | सामान्यतः औपचारिक परीक्षा या प्रमाण-पत्र नहीं होता। |
अतः औपचारिक शिक्षा संस्थागत एवं योजनाबद्ध होती है, जबकि अनौपचारिक शिक्षा जीवन के अनुभवों से स्वाभाविक रूप से प्राप्त होती है। दोनों व्यक्ति के विकास में एक-दूसरे की पूरक हैं।
प्रश्न 40. सामाजिक एवं साम्प्रदायिक सौहार्द क्यों आवश्यक है?
उत्तर:
भारत विविध धर्मों, भाषाओं, जातियों और संस्कृतियों वाला देश है। ऐसी विविधता में शान्ति, एकता और राष्ट्रीय विकास के लिए सामाजिक एवं साम्प्रदायिक सौहार्द अत्यन्त आवश्यक है।
इसके महत्व को निम्न प्रकार समझा जा सकता है—
- विभिन्न धर्मों एवं समुदायों के बीच पारस्परिक सम्मान और विश्वास बढ़ता है।
- साम्प्रदायिक तनाव, घृणा एवं हिंसा को रोकने में सहायता मिलती है।
- राष्ट्रीय एकता एवं अखण्डता मजबूत होती है।
- समानता, धर्मनिरपेक्षता, सहिष्णुता और भाईचारे जैसे संवैधानिक मूल्यों का विकास होता है।
- समाज में शान्ति और सहयोग रहने से आर्थिक एवं सामाजिक विकास को गति मिलती है।
अतः जाति, धर्म, भाषा एवं सम्प्रदाय के संकीर्ण भेदों से ऊपर उठकर आपसी सम्मान, सहिष्णुता और विश्व-बन्धुत्व की भावना विकसित करना आवश्यक है।
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