बहुविकल्पीय प्रश्न
प्रश्न 1. "शिक्षा वह है जो जीवन को सम्पूर्ण सत्ता के साथ स्थापित करने की शक्ति होती है।" यह विचार किसका है?
(a) महात्मा गाँधी
(b) ऐरिस
(c) रवीन्द्रनाथ टैगोर
(d) स्वामी विवेकानन्द
उत्तर: (c) रवीन्द्रनाथ टैगोर
रवीन्द्रनाथ टैगोर के अनुसार शिक्षा व्यक्ति को जीवन और सम्पूर्ण सत्ता के साथ सामंजस्य स्थापित करने की क्षमता प्रदान करती है।
प्रश्न 2. गिजुभाई बधेका द्वारा लिखित पुस्तक है—
(a) दास कैपिटल
(b) डिस्कवरी ऑफ इण्डिया
(c) माई एक्सपेरिमेन्ट्स विद ट्रुथ
(d) प्राथमिक शाला में भाषा शिक्षा
उत्तर: (d) प्राथमिक शाला में भाषा शिक्षा
प्राथमिक शाला में भाषा शिक्षा गिजुभाई बधेका द्वारा लिखित पुस्तक है।
प्रश्न 3. पाठशाला को 'बाग', शिशु को 'पौधा' व शिक्षक को 'माली' किसने कहा है?
(a) फ्रॉबेल
(b) रूसो
(c) मॉण्टेसरी
(d) जॉन डीवी
उत्तर: (a) फ्रॉबेल
फ्रॉबेल ने विद्यालय की तुलना बगीचे, बालकों की तुलना पौधों तथा शिक्षक की तुलना माली से की। इसी विचार से उनकी किंडरगार्टन पद्धति विकसित हुई।
प्रश्न 4. शिक्षा का प्रमुख उद्देश्य है—
(a) मानसिक विकास
(b) शारीरिक विकास
(c) सर्वांगीण विकास
(d) सामाजिक विकास
उत्तर: (c) सर्वांगीण विकास
शिक्षा का प्रमुख उद्देश्य बालक के शारीरिक, मानसिक, सामाजिक, सांवेगिक और नैतिक पक्षों का संतुलित अर्थात् सर्वांगीण विकास करना है।
प्रश्न 5. शिक्षक द्वारा छात्रों में राष्ट्रीय सद्भावना का विकास किया जा सकता है—
(a) दण्ड देकर
(b) पुस्तकों को पढ़ाकर
(c) शिक्षक द्वारा स्वयं इसका आचरण करके
(d) समझाकर
उत्तर: (c) शिक्षक द्वारा स्वयं इसका आचरण करके
शिक्षक अपने आचरण में समानता, सहिष्णुता, सहयोग और राष्ट्रीय एकता के मूल्यों को अपनाकर विद्यार्थियों के सामने आदर्श प्रस्तुत कर सकता है।
प्रश्न 6. "मनुष्य की अन्तर्निहित पूर्णता को अभिव्यक्त करना ही शिक्षा है।" यह विचार किसका है?
(a) रवीन्द्रनाथ टैगोर
(b) स्वामी विवेकानन्द
(c) अरस्तू
(d) महात्मा गाँधी
उत्तर: (b) स्वामी विवेकानन्द
स्वामी विवेकानन्द के अनुसार, "शिक्षा मनुष्य में पहले से विद्यमान पूर्णता की अभिव्यक्ति है।"
प्रश्न 7. अनिवार्य प्राथमिक शिक्षा का प्रावधान संविधान के किस अनुच्छेद में किया गया है?
(a) 41
(b) 43
(c) 45
(d) 49
उत्तर: (c) 45
मूल संविधान के नीति-निर्देशक तत्त्वों में अनुच्छेद 45 के अन्तर्गत बच्चों के लिए निःशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा का प्रावधान किया गया था।
वर्तमान संवैधानिक व्यवस्था में 6 से 14 वर्ष के बच्चों के निःशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा के अधिकार का प्रावधान अनुच्छेद 21A में है, जबकि संशोधित अनुच्छेद 45 छह वर्ष से कम आयु के बच्चों की प्रारम्भिक बाल्यावस्था देखभाल एवं शिक्षा से सम्बन्धित है।
प्रश्न 8. महात्मा गाँधी के दर्शन के अनुसार छात्रों की क्रियाशीलता के लिए पाठ्यक्रम में आवश्यकता है—
(a) भूगोल विषय
(b) हस्तकला विषय
(c) इतिहास विषय
(d) विज्ञान विषय
उत्तर: (b) हस्तकला विषय
गाँधीजी की बुनियादी शिक्षा में उत्पादक हस्तकला या शिल्प को शिक्षण का केन्द्र बनाया गया, जिससे बालक करके सीख सके और उसमें क्रियाशीलता एवं स्वावलम्बन का विकास हो।
प्रश्न 9. शिक्षा में प्रयोजनवादी शिक्षा होती है—
(a) अध्यापक केन्द्रित
(b) विषय केन्द्रित
(c) पाठ्यक्रम केन्द्रित
(d) अनुभव केन्द्रित
उत्तर: (d) अनुभव केन्द्रित
प्रयोजनवाद प्रत्यक्ष अनुभव, क्रिया, समस्या-समाधान तथा करके सीखने पर बल देता है। इसलिए प्रयोजनवादी शिक्षा अनुभव केन्द्रित होती है।
प्रश्न 10. शिक्षा में निस्पंदन सिद्धान्त किसने दिया था?
(a) हण्टर
(b) मैकाले
(c) वुड
(d) फ्रांसिस
उत्तर: (b) मैकाले
भारतीय शिक्षा के इतिहास में अधोमुखी निस्पंदन सिद्धान्त को मैकाले की शिक्षा-नीति से जोड़ा जाता है। इसके अनुसार पहले समाज के उच्च वर्ग को शिक्षित करके शिक्षा को क्रमशः निम्न वर्गों तक पहुँचाने की धारणा थी।
प्रश्न 11. ऐसी शिक्षा जिसमें किसी निश्चित समय, पाठ्यक्रम और विद्यालय की आवश्यकता नहीं होती है—
(a) औपचारिक शिक्षा
(b) वैकल्पिक शिक्षा
(c) अनौपचारिक शिक्षा
(d) सतत शिक्षा
उत्तर: (c) अनौपचारिक शिक्षा
अनौपचारिक शिक्षा जीवन के दैनिक अनुभवों, परिवार, समाज और वातावरण से स्वाभाविक रूप से प्राप्त होती है। इसमें निश्चित विद्यालय, समय-सारणी और पाठ्यक्रम आवश्यक नहीं होते।
प्रश्न 12. "सीखने में स्वतंत्रता एवं निरन्तरता आवश्यक है।" यह विचार किसका है?
(a) फ्रॉबेल
(b) हल
(c) डाल्टन
(d) सिम्पसन
उत्तर: (a) फ्रॉबेल
फ्रॉबेल बालक के स्वाभाविक विकास, स्वक्रिया एवं स्वतंत्र अभिव्यक्ति पर बल देते थे। उनके अनुसार सीखने में स्वतंत्रता और निरन्तरता आवश्यक है।
प्रश्न 13. बौद्ध शिक्षा का प्रमुख केन्द्र था—
(a) हस्तिनापुर
(b) नालन्दा
(c) कोलकाता
(d) अहमदाबाद
उत्तर: (b) नालन्दा
नालन्दा प्राचीन भारत में बौद्ध शिक्षा का अत्यन्त महत्वपूर्ण केन्द्र था, जहाँ भारत तथा विदेशों से विद्यार्थी अध्ययन के लिए आते थे।
प्रश्न 14. सभी धर्मों के प्रति सहनशील अध्ययन को प्रोत्साहित करने का सुझाव किसने दिया?
(a) वर्धा योजना
(b) कामत योजना
(c) कोठारी योजना
(d) राधाकृष्णन योजना
उत्तर: (c) कोठारी योजना
कोठारी आयोग ने शिक्षा के माध्यम से नैतिक एवं सामाजिक मूल्यों के विकास तथा विभिन्न धर्मों के प्रति सहिष्णुता और समझ विकसित करने पर बल दिया।
प्रश्न 15. जॉन डीवी द्वारा लिखित पुस्तक है—
(a) द रिपब्लिक
(b) दास कैपिटल
(c) सीमार्क
(d) डेमोक्रेसी एण्ड एजुकेशन
उत्तर: (d) डेमोक्रेसी एण्ड एजुकेशन
Democracy and Education जॉन डीवी की प्रसिद्ध शैक्षिक कृति है।
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अति लघु उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 16. बुनियादी शिक्षा का जनक किसे माना जाता है?
उत्तर: महात्मा गाँधी को बुनियादी शिक्षा अथवा नई तालीम का जनक माना जाता है। इसे वर्धा शिक्षा योजना से भी जोड़ा जाता है।
प्रश्न 17. एन.सी.टी.ई. से सम्बन्धित उ.प्र. का कार्य कहाँ से होता है?
उत्तर: उत्तर प्रदेश NCTE की Northern Regional Committee (NRC) के क्षेत्राधिकार में आता है। प्रश्न-पत्र के समय इसका कार्य नई दिल्ली से संचालित होता था।
प्रश्न 18. ग्राम शिक्षा समिति का अध्यक्ष कौन होता है?
उत्तर: ग्राम शिक्षा समिति का अध्यक्ष सामान्यतः ग्राम प्रधान होता है।
प्रश्न 19. बौद्धकालीन शिक्षा के प्रमुख उद्देश्य बताइए।
उत्तर:
- बौद्ध धर्म एवं उसके सिद्धान्तों का अध्ययन और प्रसार करना।
- चरित्र एवं नैतिक जीवन का विकास करना।
- ज्ञान एवं विवेक का विकास करना।
- निर्वाण की प्राप्ति के लिए व्यक्ति को तैयार करना।
प्रश्न 20. बुनियादी शिक्षा का अर्थ बताइए।
उत्तर: बुनियादी शिक्षा से आशय ऐसी शिल्प एवं क्रिया-केन्द्रित शिक्षा से है, जो बालक के शरीर, मन और हृदय का समन्वित विकास करते हुए उसे स्वावलम्बी एवं जीवनोपयोगी बनाती है।
प्रश्न 21. छात्र-छात्राओं में मूल्यों के विकास हेतु कौन-कौन से जनसंचार साधन हैं?
उत्तर: टेलीविजन, रेडियो, समाचार-पत्र, पत्र-पत्रिकाएँ, चलचित्र और इंटरनेट आदि जनसंचार माध्यम विद्यार्थियों में उचित मूल्यों के विकास में सहायक हो सकते हैं।
प्रश्न 22. भूमण्डलीय तापवृद्धि किसे कहते हैं?
उत्तर: पृथ्वी के औसत सतही तापमान में दीर्घकालीन वृद्धि को भूमण्डलीय तापवृद्धि या ग्लोबल वार्मिंग कहते हैं। इसका प्रमुख कारण वायुमण्डल में ग्रीनहाउस गैसों की बढ़ती मात्रा है।
प्रश्न 23. किन्हीं चार मानवीय मूल्यों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर: सत्य, ईमानदारी, करुणा और मानवता प्रमुख मानवीय मूल्य हैं।
प्रश्न 24. जल संचयन का मूल सिद्धान्त क्या है?
उत्तर: जल संचयन का मूल सिद्धान्त वर्षा-जल को जहाँ सम्भव हो वहीं एकत्र, सुरक्षित एवं भूजल पुनर्भरण के लिए उपयोग करना है।
प्रश्न 25. जल प्रदूषण को दूर करने के उपाय बताइए।
उत्तर:
- घरेलू सीवेज और औद्योगिक अपशिष्ट को उपचारित करने के बाद ही जल-स्रोतों में छोड़ा जाए।
- नदियों और तालाबों में कूड़ा-कचरा, प्लास्टिक एवं हानिकारक रसायन न डाले जाएँ।
- मृत पशुओं तथा अन्य जैविक अपशिष्ट को जल-स्रोतों में न बहाया जाए।
- नदी-तालाबों में पशुओं को नहलाने तथा वाहनों को धोने जैसी प्रदूषणकारी गतिविधियों को नियंत्रित किया जाए।
प्रश्न 26. वैदिक साहित्य में शिक्षा शब्द का प्रयोग किन अर्थों में किया गया?
उत्तर: वैदिक साहित्य में शिक्षा का प्रयोग विद्या, ज्ञान, बोध और विनय के अर्थ में किया गया है।
प्रश्न 27. बालिका शिक्षा का आशय बताइए।
उत्तर: बालिकाओं को बालकों के समान शिक्षा, ज्ञान, कौशल और व्यक्तित्व-विकास के अवसर उपलब्ध कराने की प्रक्रिया को बालिका शिक्षा कहते हैं।
प्रश्न 28. अनौपचारिक शिक्षा का उद्देश्य बताइए।
उत्तर: अनौपचारिक शिक्षा का उद्देश्य जीवन के स्वाभाविक अनुभवों द्वारा व्यक्ति में ज्ञान, सामाजिक व्यवहार, जीवन-कौशल, मूल्य और उचित दृष्टिकोण विकसित करना है। इसमें कोई निश्चित पाठ्यक्रम अथवा समय-सारणी नहीं होती।
प्रश्न 29. दूरस्थ शिक्षा का उद्देश्य बताइए।
उत्तर: दूरस्थ शिक्षा का प्रमुख उद्देश्य स्व-अध्ययन को प्रोत्साहित करना तथा ऐसे शिक्षार्थियों को लचीले ढंग से गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना है जो नियमित शिक्षण संस्थान में उपस्थित नहीं हो सकते।
प्रश्न 30. शिक्षा और समाज का सम्बन्ध बताइए।
उत्तर: शिक्षा और समाज का घनिष्ठ एवं परस्पर सम्बन्ध है। समाज अपने ज्ञान, संस्कृति, मूल्य और परम्पराएँ शिक्षा के माध्यम से अगली पीढ़ी तक पहुँचाता है, जबकि शिक्षा व्यक्तियों का विकास करके समाज में सुधार एवं परिवर्तन लाती है।
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लघु उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 31. वैदिककालीन शिक्षा की विशेषताएँ बताइए।
उत्तर: वैदिककालीन शिक्षा की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित थीं—
- गुरुकुल व्यवस्था: विद्यार्थी गुरु के आश्रम में रहकर शिक्षा प्राप्त करते थे।
- वैयक्तिक शिक्षण: गुरु विद्यार्थी की क्षमता एवं आवश्यकता के अनुसार व्यक्तिगत मार्गदर्शन देता था।
- मौखिक एवं व्यावहारिक शिक्षा: श्रवण, मनन, कण्ठस्थीकरण और अभ्यास पर विशेष बल दिया जाता था।
- चरित्र-निर्माण: सत्य, अनुशासन, संयम, सेवा और सदाचार को महत्वपूर्ण माना जाता था।
- वैदिक अध्ययन: वेदों एवं वैदिक साहित्य के साथ अन्य जीवनोपयोगी विषयों का भी अध्ययन कराया जाता था।
- आवासीय जीवन: गुरु और शिष्य का निकट सम्बन्ध गुरुकुलीय जीवन की प्रमुख विशेषता था।
प्रश्न 32. मध्यकालीन शिक्षा के उद्देश्य बताइए।
उत्तर: मध्यकालीन भारतीय शिक्षा के प्रमुख उद्देश्य निम्नलिखित थे—
- धार्मिक एवं नैतिक शिक्षा प्रदान करना।
- इस्लामी धर्म, संस्कृति एवं साहित्य का अध्ययन और संरक्षण करना।
- अरबी एवं फारसी भाषाओं और साहित्य का ज्ञान देना।
- विद्यार्थियों में चरित्र, अनुशासन एवं धार्मिक आचरण विकसित करना।
- प्रशासनिक एवं राजकीय सेवाओं के लिए आवश्यक शिक्षा प्रदान करना।
- गणित, चिकित्सा, दर्शन और अन्य ज्ञान-विषयों का अध्ययन कराना।
प्रश्न 33. वर्तमान में शिक्षा के उद्देश्यों को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारकों को बताइए।
उत्तर:
शिक्षा के उद्देश्य किसी समाज की आवश्यकताओं एवं परिस्थितियों के अनुसार निर्धारित होते हैं। इन्हें प्रभावित करने वाले प्रमुख कारक हैं—
- दार्शनिक कारक: जीवन, ज्ञान और सत्य सम्बन्धी विचार शिक्षा की दिशा निर्धारित करते हैं।
- सांस्कृतिक कारक: समाज की संस्कृति, परम्पराएँ और मूल्य शिक्षा के उद्देश्यों को प्रभावित करते हैं।
- समाजशास्त्रीय कारक: सामाजिक आवश्यकताएँ, परिवर्तन और समस्याएँ शिक्षा के स्वरूप को प्रभावित करती हैं।
- आर्थिक कारक: रोजगार, उत्पादन, कौशल और आर्थिक विकास की आवश्यकताएँ शिक्षा को प्रभावित करती हैं।
- राजनीतिक कारक: शासन-व्यवस्था, लोकतंत्र और राष्ट्रीय नीतियाँ शिक्षा के उद्देश्यों को दिशा देती हैं।
- धार्मिक एवं नैतिक कारक: समाज की नैतिक मान्यताएँ तथा जीवन-मूल्य भी शिक्षा के उद्देश्यों पर प्रभाव डालते हैं।
प्रश्न 34. महात्मा गाँधी की शैक्षिक विचारधारा को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
महात्मा गाँधी के अनुसार शिक्षा का उद्देश्य बालक के शरीर, मन और आत्मा में निहित सर्वोत्तम गुणों का सर्वांगीण विकास करना है। वे केवल पुस्तकीय ज्ञान के स्थान पर जीवन से जुड़ी, क्रियात्मक और आत्मनिर्भर बनाने वाली शिक्षा के समर्थक थे।
उनकी शैक्षिक विचारधारा की प्रमुख विशेषताएँ—
- शिल्प-केन्द्रित शिक्षा: किसी उत्पादक हस्तकला के माध्यम से विभिन्न विषयों की शिक्षा देना।
- करके सीखना: बालक को प्रत्यक्ष कार्य एवं अनुभव द्वारा सीखने का अवसर देना।
- स्वावलम्बन: शिक्षा को जीवनोपयोगी एवं कार्य-कौशल से जोड़ना।
- मातृभाषा: शिक्षा का माध्यम बालक की मातृभाषा हो।
- श्रम की प्रतिष्ठा: शारीरिक श्रम को सम्मान देना और उसे शिक्षा का अंग बनाना।
- चरित्र-निर्माण: सत्य, अहिंसा, सहयोग, सेवा और नैतिकता का विकास करना।
इसी विचारधारा के आधार पर गाँधीजी ने बुनियादी शिक्षा अथवा नई तालीम का प्रतिपादन किया।
प्रश्न 35. "शिक्षा समाज का दर्पण है।" स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
शिक्षा और समाज एक-दूसरे से घनिष्ठ रूप से जुड़े हैं। किसी समाज की संस्कृति, परम्पराएँ, मूल्य, आवश्यकताएँ एवं जीवन-पद्धति उसकी शिक्षा-व्यवस्था में दिखाई देती हैं। इसी अर्थ में कहा जाता है कि शिक्षा समाज का दर्पण है।
शिक्षा समाज के ज्ञान और संस्कृति को नई पीढ़ी तक पहुँचाती है, सामाजिक मूल्यों का विकास करती है तथा व्यक्ति को उत्तरदायी नागरिक बनाती है। साथ ही शिक्षा सामाजिक कुरीतियों को दूर करने, वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने और सामाजिक परिवर्तन लाने का भी साधन है।
प्रश्न 36. मारिया मॉण्टेसरी की शिक्षा-पद्धति का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
मारिया मॉण्टेसरी की शिक्षा-पद्धति बालक की स्वतंत्रता, स्वक्रिया और व्यक्तिगत विकास पर आधारित है। बालक को एक सुव्यवस्थित एवं तैयार वातावरण में अपनी गति से सीखने का अवसर दिया जाता है।
इस पद्धति की प्रमुख विशेषताएँ—
- तैयार वातावरण: कक्षा का वातावरण बालक की आयु एवं आवश्यकताओं के अनुसार व्यवस्थित होता है।
- स्व-शिक्षा: बालक विशेष शिक्षण-सामग्री की सहायता से स्वयं सीखता और अपनी त्रुटियों को स्वयं सुधारता है।
- इन्द्रिय-प्रशिक्षण: रंग, आकार, ध्वनि, स्पर्श आदि से सम्बन्धित सामग्रियों द्वारा इन्द्रियों का विकास किया जाता है।
- व्यावहारिक जीवन की क्रियाएँ: दैनिक जीवन से जुड़े कार्यों द्वारा आत्मनिर्भरता और समन्वय विकसित किया जाता है।
- स्वतंत्रता के साथ अनुशासन: बालक को निर्धारित सीमाओं के भीतर कार्य चुनने की स्वतंत्रता दी जाती है।
- शिक्षक की भूमिका: शिक्षक ज्ञान थोपने वाला नहीं, बल्कि निरीक्षक, मार्गदर्शक और सहायक होता है।
प्रश्न 37. वुड डिस्पैच की प्रमुख विशेषताएँ बताइए।
उत्तर:
वुड का घोषणा-पत्र 1854 भारतीय शिक्षा के इतिहास का महत्वपूर्ण दस्तावेज था। इसकी प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित थीं—
- प्रत्येक प्रान्त में लोक शिक्षा विभाग स्थापित करने की सिफारिश की गई।
- कलकत्ता, बम्बई और मद्रास में विश्वविद्यालय स्थापित करने का सुझाव दिया गया।
- प्राथमिक स्तर पर भारतीय स्थानीय भाषाओं तथा उच्च शिक्षा में अंग्रेजी के प्रयोग पर बल दिया गया।
- अनुदान सहायता प्रणाली द्वारा निजी शिक्षण संस्थाओं को प्रोत्साहन देने का सुझाव दिया गया।
- स्त्री शिक्षा के विकास को प्रोत्साहित किया गया।
- शिक्षक-प्रशिक्षण संस्थाओं की स्थापना पर बल दिया गया।
- व्यावसायिक एवं उपयोगी शिक्षा को बढ़ावा देने की सिफारिश की गई।
प्रश्न 38. सामाजिक परिवर्तन में शिक्षक एवं विद्यालय की भूमिका बताइए।
उत्तर:
शिक्षक और विद्यालय सामाजिक परिवर्तन के महत्वपूर्ण माध्यम हैं। विद्यालय नई पीढ़ी को केवल ज्ञान ही नहीं देता, बल्कि समाज के मूल्यों, आदर्शों और आवश्यक सामाजिक परिवर्तन के लिए भी तैयार करता है।
सामाजिक परिवर्तन में शिक्षक एवं विद्यालय की प्रमुख भूमिकाएँ—
- वैज्ञानिक दृष्टिकोण: अन्धविश्वास और रूढ़ियों के स्थान पर तर्क एवं वैज्ञानिक सोच विकसित करना।
- सामाजिक मूल्यों का विकास: समानता, स्वतंत्रता, सहयोग, न्याय और सहिष्णुता की भावना विकसित करना।
- सामाजिक कुरीतियों का विरोध: जातिवाद, लैंगिक भेदभाव, छुआछूत और अन्य कुरीतियों के प्रति विद्यार्थियों को जागरूक करना।
- नवीन विचारों का प्रसार: विद्यार्थियों को सामाजिक, वैज्ञानिक और तकनीकी परिवर्तनों से परिचित कराना।
- आदर्श प्रस्तुत करना: शिक्षक अपने आचरण से विद्यार्थियों को जिम्मेदार एवं संवेदनशील नागरिक बनने की प्रेरणा देता है।
प्रश्न 39. आदर्शवाद के अनुसार शिक्षा का अर्थ स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
आदर्शवाद के अनुसार वास्तविकता का मूल आधार भौतिक वस्तुओं की अपेक्षा मन, आत्मा, विचार एवं आध्यात्मिक मूल्य हैं। इसलिए शिक्षा का उद्देश्य व्यक्ति में निहित उच्चतम आध्यात्मिक एवं नैतिक शक्तियों का विकास करना है।
आदर्शवाद के अनुसार शिक्षा—
- आत्मानुभूति एवं आत्म-विकास का साधन है।
- सत्य, शिव और सुन्दर जैसे शाश्वत मूल्यों की प्राप्ति कराती है।
- चरित्र एवं नैतिक व्यक्तित्व का निर्माण करती है।
- मानव को उसकी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत से परिचित कराती है।
- व्यक्ति को उच्च आदर्शों के अनुसार जीवन जीने के लिए प्रेरित करती है।
शिक्षा-दर्शन में प्लेटो आदर्शवाद के प्रमुख प्रतिनिधि विचारकों में माने जाते हैं।
प्रश्न 40. विद्यालय के विकास में समुदाय की भूमिका बताइए।
उत्तर:
विद्यालय समाज का अभिन्न अंग है, इसलिए उसके विकास में समुदाय की सक्रिय भागीदारी अत्यन्त महत्वपूर्ण है। समुदाय विद्यालय की आवश्यकताओं को समझकर उसके भौतिक एवं शैक्षिक विकास में सहयोग कर सकता है।
समुदाय की प्रमुख भूमिकाएँ—
- विद्यालय विकास योजना: विद्यालय की आवश्यकताओं एवं विकास-योजनाओं के निर्माण में सहयोग करना।
- नामांकन एवं उपस्थिति: बच्चों के नामांकन, नियमित उपस्थिति और विद्यालय छोड़ने की समस्या को कम करने में सहायता करना।
- संसाधन उपलब्ध कराना: विद्यालय के भवन, स्वच्छता, पेयजल, पुस्तकालय और अन्य सुविधाओं के विकास में सहयोग देना।
- शैक्षिक गुणवत्ता की निगरानी: विद्यालय की गतिविधियों और विद्यार्थियों की प्रगति में रुचि लेना।
- विद्यालय-समुदाय सम्बन्ध: स्थानीय ज्ञान, कौशल और संसाधनों को विद्यालयी गतिविधियों से जोड़ना।
- समावेशी शिक्षा: बालिकाओं, वंचित वर्गों और विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की शिक्षा को प्रोत्साहित करना।
इस प्रकार समुदाय की सक्रिय भागीदारी विद्यालय को अधिक उत्तरदायी, प्रभावी और समाजोपयोगी बनाती है।
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